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आतंकी उमर की दिल्ली में सुरक्षित पनाहगाह का खुलासा, शोएब और अल-फलाह संगठन से जुड़े सुराग

फरीदाबाद लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए फिदायीन हमले के सिलसिले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एक और आरोपी को दबोचा है। खास बात यह है कि इसका भी लिंक अल-फलाह यूनिवर्सिटी से ही, जहां डॉक्टरों के आतंकी मॉड्यूल का खुलासा फरीदाबाद में विस्फोटकों की बरामदगी और दिल्ली धमाके के बाद हुआ है। सातवें आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया शोएब फरीदाबाद के धौज इलाके का रहने वाला है। आरोप है कि वह कार से फिदायीन हमला करने वाले आतंकी डॉ. उमर उन नबी का बड़ा मददगार था। शोएब ने उसने ना आतंकी को छिपाया बल्कि उसे विस्फोट से पहले उसे साजो-सामान भी मुहैया करने का आरोपी है। बताया जाता है कि जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 30 अक्टूबर को डॉ. मुजम्मिल को दबोचा तो उमर अंडर ग्राउंड हो गया। उमर नबी को छिपाने की व्यवस्था शोएब ने ही की। उसने आतंकी डॉक्टर उमर को जिला नूंह की हिदायत कॉलोनी में अपनी साली के घर कमरा दिलवाया। यहां उमर दिल्ली धमाके से पहले 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक किराए पर रहा था। यहीं से आरोपी डॉक्टर ने दिल्ली जाकर धमाका किया था। शोएब की साली मूल रूप से गोलपुरी गांव की निवासी थी और ससुराल हथीन क्षेत्र के खिल्लूका गांव में बताई गई थी। बहरहाल, धमाके के बाद जांच टीमों ने हिदायत कॉलोनी, पिनगवां रोड और आसपास के इलाकों में सर्च अभियान चलाया था। शोएब अल-फलाह यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिशियन है। वहीं से वह आरोपी डॉक्टरों उमर के संपर्क में आया। एएनआई अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली धमाके से पहले नूंह में रहते हुए आतंकी उमर नबी किन लोगों से मिला, कहां से क्या सामान जुटाया, क्या प्लानिंग की, इन सबकी अहम जानकारी शोएब को हो सकती है। जांचकर्ता अब शोएब से पूछताछ करके उस धमाके के रहस्य से और पर्दे उठाएंगे जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और करीब 20 जख्मी हो गए। नूंह में सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई थी आरोपी की कार दिल्ली धमाका के बाद आरोपी डॉक्टर उमर की कार जिला नूंह में अनेक जगह सीसीटीवी कैमरों कैद हुई थी। जिसके आधार पर जांच एजेंसियों ने मौके पर जांच की थी। जांच अधिकारियों को नूंह में गोयल अल्ट्रासाउंड एवं डायग्नोस्टिक सेंटर (बालाजी पेट्रोल पंप के पास, दिल्ली-अलवर रोड) के सीसीटीवी कैमरे से वह फुटेज मिला था, जिसमें संदिग्ध सफेद रंग की आई-20 कार साफ दिखाई दी थी। एजेंसियों के अनुसार, यह कार डॉ. उमर द्वारा इस्तेमाल की जा रही थी। फुटेज से पहले भी डॉ उमर की यही कार दिल्ली-मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर कैमरे में रिकॉर्ड हुई थी। इससे उसकी आवाजाही का पैटर्न मिल रहा था, जो जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा था। फिरोजपुर झिरका में रहने के दौरान डॉ उमर ने एटीएम से पैसे निकालने की कोशिश की थी, जिसके सीसीटीवी फुटेज को एजेंसियां खंगाल रही थीं। 30 अक्टूबर को डॉक्टर मुजम्मिल को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से गिरफ्तार किया था 09 नवंबर को जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस ने गांव धौज की कॉलोनी से डॉक्टर मुज़म्मिल के किराए के कमरे से 358 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और हथियार बरामद किए थे 10 नवंबर को जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस ने गांव फतेहपुर तगा की कॉलोनी में डॉक्टर मुज़म्मिल के दूसरे किराए के कमरे से 2563 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया था  

धुंध के बीच PMO का एक्शन मोड: इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को मिलेगी नई रफ़्तार

नई दिल्ली  दिल्ली में लगातार बढ़ते प्रदूषण के बीच सरकार कई कदम उठा रही है। कुछ दिन पहले ही राजधानी में GRAP-III लागू किया गया है। अब PMO ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। PMO ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए अधिकारियों को दोहरी रणनीति पर काम करने का निर्देश दिया है। PMO ने एक उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने की और प्रदूषण से निपटने के लिए कई सख्त निर्देश जारी किए। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब राजधानी की हवा की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है। PMO ने अधिकारियों को दो मुख्य मोर्चों पर तेज़ी से काम करने का निर्देश दिया है। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि प्रदूषण फैलाने वाले और उत्सर्जन मानदंडों का उल्लंघन करने वाले सभी वाहनों की जाँच और उन पर कार्रवाई को तेज़ किया जाए। दिल्ली में EV विस्तार की कही बात केंद्र सरकार दिल्ली की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना चाहती है, इसलिए चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ईवी पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार पर केंद्रित था।PMO ने अधिकारियों को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, चार्जिंग स्टेशन और सब्सिडी पर तेज़ी से प्रगति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। PMO ने यह भी निर्देश दिया है कि पारंपरिक पेट्रोल और डीज़ल वाहनों पर निर्भरता कम की जाए। यह कदम दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत दिल्ली के परिवहन को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाएगा। PMO का यह सक्रिय रुख दिखाता है कि सरकार राजधानी की हवा को साफ करने के लिए कठोर और त्वरित उपाय लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

देशभर में बढ़ा प्रदूषण का कहर: दिल्ली समेत कई राज्यों की हवा बेहद खराब

नई दिल्ली  देश के 33 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली सबसे प्रदूषित रही, जहां पीएम 2.5 प्रदूषक तत्वों की सांद्रता का वार्षिक औसत 101 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। यह भारतीय मानक से 2.5 गुना और विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों से 20 गुना अधिक है। एक नए उपग्रह-आधारित विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 से फरवरी 2025 तक की अध्ययन अवधि के दौरान चंडीगढ़ में पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर 70 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। वह इस मामले में दूसरे स्थान पर रहा।   रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा में 63 और त्रिपुरा में 62 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर का स्तर दर्ज किया गया। असम में 60, बिहार में 59, पश्चिम बंगाल में 57, पंजाब में 56, मेघालय में 53 और नगालैंड में 52 भी स्तर राष्ट्रीय मानक से अधिक था। कुल 749 जिलों में से 447 (60%) में राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक से अधिक स्तर दर्ज किया गया। इन जिलों में वार्षिक पीएम 2.5 का स्तर 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। विश्लेषण से पता चला कि सबसे प्रदूषित जिले कुछ ही राज्यों के हैं। दिल्ली और असम के 11-11 प्रदूषित जिले दिल्ली के 11 और असम के 11 जिले मिलकर इस मामले में शीर्ष 50 में से लगभग आधे जिले हो जाते हैं। इसके बाद बिहार के 7 और हरियाणा के 7 जिले सबसे ज्यादा प्रदूषित रहे। अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश के 4, त्रिपुरा के 3, राजस्थान के 2 और पश्चिम बंगाल के 2 जिले इस लिस्ट में शामिल हैं। अध्ययन अवधि के दौरान अपर्याप्त जमीनी निगरानी आंकड़ों के कारण लद्दाख, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह व लक्षद्वीप को विश्लेषण से बाहर रखा गया था।  

सुनवाई के दौरान वकील की आवाज बैठी, CJI का हल्का-फुल्का तंज— ‘दिल्ली की यही समस्या है’

नई दिल्ली  दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण स्तर पर चिंता लगातार बनी हुई है। अब आशंका जताई जा रही है कि राजधानी में राख का गुबार हालात और बिगाड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट में भी भारत के नए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत भी ताजा स्थिति पर तंज कसते नजर आए। उन्होंने वकील के खांसने पर कहा कि पूरे दिल्ली का यही हाल है। CJI कांत ने सोमवार को ही पद भार संभाला है।   बार एंड बेंच के अनुसार, मंगलवार को अदालत में सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन एक केस पेश करने पहुंचे थे। इस दौरान वह अचानक गला साफ करने लगते हैं। वह न्यायाधीशों से कहते हैं, 'मुझे माफ कीजिएगा मीलॉर्ड, मेरी आवाज चली गई है।' इसपर सीजेआई ने जवाब दिया, 'हां अब दिल्ली के ऐसे ही हाल हैं।' दिल्ली प्रदूषण: राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को घनी धुंध छाई रही और वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' बनी रही। इस बीच आशंका जताई जा रही है कि इथियोपिया में ज्वालामुखी फटने के बाद उठा राख का गुबार क्षेत्र में प्रदूषण को और बढ़ा सकता है। इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित ढाल-ज्वालामुखी हायली गुब्बी रविवार को फट गया, जिससे राख का गुबार करीब 14 किलोमीटर (45,000 फुट) की ऊंचाई तक गया और लाल सागर की ओर पूर्व दिशा में फैलने लगा। मौसम विभाग ने क्या कहा IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, राख के गुबार चीन की ओर बढ़ रहे हैं और मंगलवार शाम साढ़े सात बजे तक भारत से दूर चले जाएंगे। विभाग ने बताया कि पूर्वानुमान मॉडल के मुताबिक मंगलवार को गुजरात, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा पर राख का कुछ प्रभाव देखा जा सकता है। दिल्ली का AQI केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी सुबह की वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक मंगलवार को 360 रहा, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले सोमवार को यह 382 दर्ज किया गया था। सीपीसीबी द्वारा विकसित समीर ऐप के अनुसार, रोहिणी निगरानी केन्द्र में वायु गुणवत्ता 416 दर्ज की गई जो 'गंभीर' की श्रेणी में आती है। अगले कुछ दिनों तक हवा की गुणवत्ता के ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बने रहने का अनुमान है।  

गुरु तेग बहादुर के आदर्शों को जीवन में उतारने की अपील, CM रेखा गुप्ता ने लोगों से कहा

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को सिखों के गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के मानवीय संदेशों धर्मनिरपेक्षता, करुणा, सहिष्णुता और सत्य को अपने जीवन में आत्मसात करने की लोगों से अपील की।दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में आज श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित तीन-दिवसीय भव्य समागम में सुबह से ही प्रांगण भक्तों की भीगी पलकें, हाथ जोड़े श्रद्धालु और गुरु साहिब के प्रति अटूट श्रद्धा से भरा दिख रहा है। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के साथ मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में मत्था टेका। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब का सत्य और मानवता के लिए अद्वितीय बलिदान हर नागरिक को साहस और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमती गुप्ता ने दिल्लीवासियों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होकर गुरु साहिब के मानवीय संदेशों जैसे धर्मनिरपेक्षता, करुणा, सहिष्णुता और सत्य को अपने जीवन में अपनाएं। दिल्ली सरकार ने इस अवसर पर 25 नवंबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर गुरु साहिब की शहादत को राष्ट्र के प्रति समर्पित श्रद्धा के रूप में प्रस्तुत किया है। लाल किला परिसर में आज शाम आयोजित विशेष लाइट एंड साउंड शो में सिख इतिहास और गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत को भव्य और भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जायेगा।

दिल्ली–एनसीआर में NCB का बड़ा एक्शन: 262 करोड़ की ड्रग सप्लाई चेन में विदेशी–भारतीय लिंक बेनकाब

 नई दिल्ली  दिल्ली–एनसीआर के बीचों-बीच चल रहे एक हाई-प्रोफाइल सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क की परतें उस वक्त खुलनी शुरू हुईं, जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने दिल्ली के एक फार्महाउस पर रेड मारी. किसी भी रूटीन छापे की तरह शुरू हुए इस ऑपरेशन में ऐसे क्लू मिले जिससे आगे चलकर 200 करोड़ से ज्यादा की ड्रग पकड़ी गई.  अधिकारियों  के मुताबिक यह केस सिर्फ ड्रग पकड़ने का नहीं है बल्कि एक ऐसे अदृश्य नेटवर्क को उजागर करने का है, जिसे विदेशी ऑपरेटर अपने भारतीय ग्राउंड स्टाफ के जरिए रिमोट से कंट्रोल कर रहे थे. और इस नेटवर्क के बीचोबीच खड़ा था एक 25 साल का युवक शेन वारिस जो खुद को कंपनी का सेल्स मैनेजर बताता रहा, लेकिन अंदर से इस पूरे रैकेट का भरोसेमंद रनर मिला. डियो/फोटो बॉस को भेजना अनिवार्य था. पूरी बातचीत ऐसे चलती थी मानो कोई वीडियो गेम का रिमोट कंट्रोलर विदेश से भारत में मौजूद चरित्र को चला रहा हो. अचानक उभरा एक नाम एस्थर किनिमी पूछताछ के दौरान शेन ने एक और नाम खखेला. एस्थर किनिमी, नागालैंड की रहने वाली, दिल्ली में किराए के एक फ्लैट में रहने वाली महिला का. यही एस्थर, शेन के मुताबिक, पहले भी एक कंसाइनमेंट उसे हैंडओवर कर चुकी थी, जिसे बाद में एक पोर्टर राइडर के जरिए आगे भेजा गया था. शेन ने न सिर्फ उसका पता दिया, बल्कि फोन नंबर और उसके नेटवर्क से जुड़े कुछ और संदिग्धों का ज़िक्र भी किया. यह इनपुट NCB के लिए ब्रेकथ्रू मोमेंट था. 20 नवंबर की रात लगभग 11 बजे, NCB की टीम चुपचाप छतरपुर एन्क्लेव फेज-2 पहुँची. चार मंज़िला जैन हाउस की चौथी मंज़िल का एक फ्लैट यही था एस्थर का ठिकाना. दरवाज़ा खुलते ही टीम को कमरे में फैली एक अजीब-सी गंध महसूस हुई. कुछ ही मिनटों में अलमारी, बेडबॉक्स और स्टोर रूम की सर्च शुरू हुई. उसके बाद जो सामने आया उसने टीम को भी कुछ क्षणों के लिए रोक दिया . 328.54 किलो मेथाम्फेटामाइन. इंटरनेशनल मार्केट वैल्यू करीब 262 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बैगों में भरी दर्जनों पैकेट्स, हर पैकेट पर विदेशी पैकिंग की सील और कमरे में मौजूद पाउडर के कण. यह बरामदगी दिल्ली–एनसीआर की सबसे बड़ी सिंथेटिक ड्रग पकड़ों में शामिल हो गई. एस्थर को वहीं से गिरफ्तार कर लिया गया. जांच में पता चला कि  ड्रग बनाने वाले लैब्स देश से बाहर थे लॉजिस्टिक्स को देश के अलग-अलग शहरों से कंट्रोल किया जाता था. हर रनर को सिर्फ उसका हिस्सा पता होता था. बताया जा रहा है कि उनकी पेमेंट पूरी तरह डिजिटल और मल्टी-लेयर चैन के जरिये होती थी. शेन और एस्थर जैसे लोग नेटवर्क की फॉरवर्ड यूनिट थे जो सिर्फ हैंडलिंग और मूवमेंट देखते थे. असली ऑपरेटर विदेश में बैठा था. न ही उसका नाम सामने आया और न ही लोकेशन अभी तक स्पष्ट है. लेकिन शेन के फोन से मिले डेटा, कॉल लॉग और क्लाउड बैकअप ने साफ कर दिया कि यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा है.  तीन दिनों तक चला ऑपरेशन, कई राज्यों में भेजे गए अलर्ट NCB ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान तीन दिन में कई लोकेशनों पर रेड कीं. राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, अमरोहा और पंजाब के कुछ पॉइंट्स तक इनपुट भेजे गए. टीम ने स्पष्ट किया है कि  नेटवर्क के कम से कम 7 और लोग सक्रिय भूमिका में हैं.  कुछ लोग कूरियर/राइडर के रूप में इस्तेमाल हुए. कुछ लोग किराए के फ्लैट के इंतजाम करते थे. फंडिंग चैनल अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. विदेशी बॉस कौन है इस पर इन्वेस्टिगेशन जारी है. ड्रग के पैकेट्स की सील से अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह माल कई चरणों में भारत पहुंचा था. और एस्थर का फ्लैट एक स्टोरेज–क्यूम–ट्रांजिट हब के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था. NCB की नजर अभी और बड़ी मछलियों पर NCB के अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क सिर्फ सप्लाई–डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल से कहीं ज्यादा संगठित है. जांच अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन अब तक के सुराग बताते हैं कि  भारत के कई शहरों में स्लीपर यूनिट्स मौजूद हैं.

दिल्ली में ऑफिस कर्मचारियों के लिए एडवाइजरी जारी, आधे स्टाफ को घर से काम करने की सलाह

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का संकट गहराता जा रहा है। लगातार नौवें दिन भी दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी रही जिसके बाद सरकार को कड़े एहतियाती कदम उठाने पड़े हैं। इसी के चलते दिल्ली सरकार ने निजी कंपनियों को कहा है कि उनके 50% कर्मचारी घर से ही काम करें । सरकार ने जारी की वर्क फ्रॉम होम की सलाह इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, दिल्ली सरकार ने निजी कार्यालयों के लिए तत्काल प्रभाव से एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। निजी कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके 50% कर्मचारी घर से काम करें (Work From Home)। यह कदम सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को कम करने और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। GRAP-3 और CAQM का कड़ा रुख यह एहतियाती उपाय केंद्र के ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण 3 (Stage 3) के तहत आता है। सरकार का यह निर्देश वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के एक औपचारिक निर्देश के बाद आया है। CAQM ने प्रदूषण प्रतिक्रिया ढांचे को और कड़ा करते हुए यह निर्णय लिया है। यह सख्ती सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के उन निर्देशों पर आधारित है जिनमें प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया था। GRAP-3 के तहत सामान्य तौर पर लगाए जाने वाले कुछ अन्य प्रतिबंध: गैर-आवश्यक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध। ईंट भट्टों, हॉट मिक्स प्लांट्स और स्टोन क्रशर के संचालन पर प्रतिबंध। गैर-ज़रूरी ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक। लगातार खराब होती हवा ने दिल्ली में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है जिसके चलते सरकार और पर्यावरण एजेंसियां सख्त कदम उठाने को मजबूर हैं।  

ऑनलाइन आतंक का नेटवर्क बेनकाब: टेरर मॉड्यूल के मास्टरमाइंड की पहचान उजागर

नई दिल्ली  दिल्ली में लाल किला के पास हुए विस्फोट की जांच में सामने आए व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल में शामिल डॉक्टरों का कट्टरपंथ की ओर झुकाव साल 2019 से ही हो गया था। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का योगदान रहा। जांच से यह भी पता चला है कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के मुख्य संचालक उकासा, फैजान और हाशमी हैं। ये तीनों भारत के बाहर से अपनी गतिविधियां चला रहे थे। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामलों में अक्सर इनके नाम सामने आते हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि अब तक की जांच से सीमा पार आतंकवाद की रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं। ये भारत के लिए काफी चिंताजनक हैं। इस बदली रणनीति के तहत पाकिस्तान और दुनिया के अन्य हिस्सों में बैठे आतंकी आका डिजिटल प्लेटफार्मों का सहारा लेकर उच्च शिक्षित पेशेवरों को आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार कर रहे हैं। सीमा पार बैठ ऐसे चुने मोहरे जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि टेरर मॉड्यूल के सदस्यों को शुरू में सीमा पार के आतंकी आकाओं ने फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर एक्टिव पाया। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राठेर, डॉ. मुजफ्फर राठेर और डॉ. उमर उन नबी की गतिविधियों को देखकर ही उनका सलेक्शन सीमा पार के आतंकियों ने डिजिटल माध्यमों के जरिए किया। आईईडी बनाने के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल अधिकारियों ने बताया कि ऐसे भारत विरोधी लोगों को तुरंत ‘टेलीग्राम’ पर एक निजी ग्रुप में जोड़ा गया। यहीं से उन्हें बरगलाना शुरू किया गया। जांच में यह भी पाया गया है कि आतंकी मॉड्यूल के सदस्यों ने हमलों को अंजाम देने के लिए संवर्धित विस्फोटक उपकरण (आईईडी) बनाने का तरीका सीखने के लिए यूट्यूब का भी खूब इस्तेमाल किया। सीमा पार के 3 आतंकी आकाओं के नाम पूछताछ से मिले निष्कर्षों और डिजिटल फुटप्रिंट की छानबीन से पता चला कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के मुख्य संचालक उकासा, फैजान और हाशमी नाम के आतंकी हैं। ये तीनों भारत के बाहर से बैठकर अपनी गतिविधियां चला रहे है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी नेटवर्क से जुड़ी जानकारियों में अक्सर इन्हीं आतंकी आकाओं के नाम सामने आते हैं।  

क्यों छीना जा सकता है अल फलाह यूनिवर्सिटी का माइनॉरिटी दर्जा? जानिए किसने थमाया नोटिस

नई दिल्ली  दिल्ली ब्लास्ट के बाद से जांच में केंद्र में रही अल फलाह यूनिवर्सिटी के माइनॉरिटी स्टेटस पर भी अब खतरे के बादल उमड़ आए हैं। हमारे सहयोगी हिंदुस्तान टाइम्स को मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के 'अल्पसंख्यक दर्जे' को लेकर एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इससे पहले, 12 नवंबर को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने भी मान्यता से जुड़े दावों को लेकर कॉलेज को नोटिस जारी किया था।   नोटिस का कारण NCMEI ने यूनिवर्सिटी से पूछा है कि उनका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न रद्द कर दिया जाए। यह कदम तब उठाया गया है जब जांचकर्ताओं ने 10 नवंबर को लाल किले में हुए धमाके में शामिल दो व्यक्तियों का संबंध इस संस्थान से पाया है। आयोग ने यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और हरियाणा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई के लिए बुलाया है। नोटिस में अल-फलाह से उनकी मैनेजिंग बॉडी, ट्रस्ट के ढांचे, फंडिंग (पैसे) के स्रोतों, नियुक्ति की प्रक्रियाओं और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग अधिनियम, 2004 के नियमों के पालन से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। आयोग ने ट्रस्ट डीड, मैनेजमेंट की संरचना, एडमिशन के आंकड़े, शिक्षकों की नियुक्तियां, गवर्निंग बॉडी की बैठकों के विवरण और पिछले तीन सालों के वित्तीय विवरण के मूल रिकॉर्ड भी मांगे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, "पेश न होने या दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर संस्थान के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की जा सकती है।" इस बीच हरियाणा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह एक सत्यापन रिपोर्ट (verification report) दाखिल करे। इस रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान की मान्यता मिलने के बाद से किए गए निरीक्षणों (inspections), निगरानी कार्यों और विभाग व यूनिवर्सिटी के बीच हुए पत्राचार (बातचीत) का पूरा विवरण होना चाहिए। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, NCMEI अब निम्नलिखित बातों की जांच करेगा। क्या यूनिवर्सिटी का संचालन अभी भी उसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा किया जा रहा है जिसका ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व है? क्या यूनिवर्सिटी के स्वामित्व या नियंत्रण में कोई बदलाव आया है? क्या अल्पसंख्यक दर्जे के लिए जरूरी शर्तें अभी भी बरकरार हैं? 10 नवंबर को हुए धमाके के बाद से इस संस्थान पर जांच और सख्त हो गई है। उस धमाके में कम से कम 12 लोगों की जान गई थी। जांच में पाया गया है कि विस्फोटकों से भरी गाड़ी चलाने वाले डॉ. उमर उन-नबी और इस मामले में आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनी, दोनों ही इस यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे।राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मामले से जुड़े चार डॉक्टरों का नाम अपने मेडिकल रजिस्टर से हटा दिया है। इन डॉक्टरों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। डॉक्टरों के नाम: मुजफ्फर अहमद राथर अदील अहमद राथर मुजम्मिल शकील गनी शाहीन शाहिद 18 नवंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करने) की जांच के तहत हुई है, जो मान्यता (accreditation) के फर्जी दावों और पैसों की गड़बड़ी से जुड़ी है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने इस यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है। इससे पहले राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर किए गए मान्यता से जुड़े दावों पर सफाई मांगी थी। NAAC के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने अपना जवाब भेज दिया है। उन्होंने परिषद को बताया है कि वेबसाइट से वे दावे हटा दिए गए हैं। कई बार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद, अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के प्रशासन और कुलपति (Vice-Chancellor) ने इस मामले पर हिंदुस्तान टाइम्स (HT) के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। NCMEI की 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि आयोग और दस्तावेज मांगेगा, नई जांच शुरू करेगा, या फिर संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे (minority status) की समीक्षा करके उसे वापस लेगा। फिलहाल कई एजेंसियां अल-फलाह ग्रुप के रोजगार रिकॉर्ड, वित्तीय डेटा और संस्थान द्वारा किए गए अन्य दावों की जांच कर रही हैं।

मदनी का वार: ‘मुस्लिम दबाने की कोशिश’—कांग्रेस ने भी सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली  दिल्ली में लाल किले के पास हुए विस्फोट की चल रही जांच के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी द्वारा भारत में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव के आरोपों पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई है। मौलाना अरशद मदनी ने दावा किया कि भारत में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने विदेशों में मुस्लिम नेताओं के उच्च पदों तक पहुंचने का उदाहरण दिया, लेकिन भारत में ऐसे पदों पर पहुंचने वालों को जेल भेज दिया जाता है। उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर-इलेक्ट जोहरान ममदानी और लंदन के मेयर सादिक खान का उल्लेख किया।   उन्होंने कहा कि भारत में कोई मुस्लिम विश्वविद्यालय का कुलपति भी नहीं बन सकता और यदि कोई बनता है तो उसे जेल भेज दिया जाता है, जिसका उदाहरण आजम खान हैं। उन्होंने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में हो रही जांच का भी हवाला दिया। मदनी ने आरोप लगाया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रही है कि मुसलमान कभी सिर न उठाए। भाजपा नेता यासिर जिलानी ने मदनी के बयानों की कड़ी आलोचना की। उन्हें भ्रमित करने वाला और गुमराह करने वाला बताया। जिलानी ने कहा कि मुसलमानों के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती और हिंदुओं से बेहतर कोई बड़ा भाई नहीं हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आजम खान और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मालिक के खिलाफ मामले कानूनी उल्लंघनों पर आधारित हैं। जिलानी ने कहा कि आजम खान विभिन्न अपराधों में शामिल हैं। आजम खान और उनके बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान को हाल ही में एक दोहरे पैन कार्ड जालसाजी मामले में 7 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। उन पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया गया था। एक अन्य भाजपा नेता मोहसिन रजा ने आरोप लगाया कि मदनी और उनका परिवार देश के मुसलमानों को लूटता रहा है और वे दोषारोपण की राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता उदित राज ने मौलाना अरशद मदनी के बयानों का समर्थन किया और सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया। उदित राज ने कहा कि वह मदनी के बयान का समर्थन करते हैं और उन्होंने सवाल किया कि मुसलमानों के घर बुलडोजर से क्यों गिराए जा रहे हैं? उन्होंने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी में किसी ने आतंकवादी गतिविधि की होगी, लेकिन उनका कहना है कि पूरे विश्वविद्यालय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।