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वेनेजुएला आपदा: ला गुआइरा में भारी तबाही, राहत कार्यों में लापरवाही के आरोप

कराकास  वेनेजुएला में बीते दिनों आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने भयंकर तबाही मचाई है। यहां मरने वालों और घायलों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,430 हो गई है, जबकि 3,200 से अधिक लोग घायल हैं और करीब 50,000 लोग अभी भी लापता हैं। इस विनाशकारी भूकंप में सबसे अधिक ला गुआइरा राज्य प्रभावित हुआ है। यहां हर तरफ मलबे और सड़ते शवों की दुर्गंध फैली हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद पहले 72 घंटे जीवित लोगों को खोजने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। वह समय अब समाप्त हो चुका है। जीवित लोगों की खोज अब शवों की खोज में बदल गई है। सेल्फी लेते नजर आएं अधिकारी भूकंप के बीच सरकारी संवेदनहीनता की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। एक तरफ जहां हजारों लोग मलबे के नीचे दबे हैं, लाशें सड़ रही हैं। वहीं दूसरी तरफ आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए सरकारी कर्मचारी और अधिकारी ध्वस्त इमारतों के सामने खड़े होकर 'सेल्फी' खींचते नजर आए। राहत कार्यों में सरकार द्वारा ढिलाई के बीच हद तो तब हो गई जब सरकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित ला गुआइरा क्षेत्र में आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया और मलबे से अपनों की जान बचाने के लिए जुटे स्थानीय स्वयंसेवकों के लिए भी 'सुरक्षित प्रवेश पास (परमिट)' लेना अनिवार्य कर दिया। जिसको लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा और कहा कि यहां अधिकारी मदद के लिए सेल्फी लेने के लिए आए थे। सड़ते शवों क दुर्गंध भीषण गर्मी में सड़ते शवों की दुर्गंध फैलने के कारण अधिकाधिक लोग मास्क पहने हुए हैं। जो लोग बच गए उनकी कहानियां एक मां को अपनी बेटी का शव कराकस के मुर्दाघर तक ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। बुधवार को ला गुआइरा में उनके घर के मलबे के गिरने से उनकी बेटी और दामाद की मौत हो गई। उन्होंने एएफपी को बताया, "हमने उन्हें खुद बाहर निकाला। कोई मदद नहीं आई। शवों के तेजी से सड़ने के कारण दंपति का अंतिम संस्कार बिना किसी शोक सभा के किया जाएगा। आखिर वे किस बात का इंतजार कर रहे हैं? वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद जहां एक तरफ लोग अपनों को खोने के गम में डूबे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन की सुस्ती ने इस दर्द को गुस्से में बदल दिया है। कैराबलेडा के समुद्रतटीय कस्बे में मलबे के बीच अपनों को तलाश रही माइलेडी रोमेरो ने कहा, "वहाँ कल रात से लाशों का ढेर लगा हुआ है। उन शवों में मासूम नवजात शिशु भी हैं। कल रात 8 बजे तक वहां मलबे के नीचे लोग ज़िंदा थे, चिल्ला रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बचाने की कोई जरूरत ही नहीं समझी। हमने अपने स्तर पर कई लाशें बाहर निकाली हैं, लेकिन उन्हें निकालने में भी अधिकारियों ने हमारी कोई मदद नहीं की। आखिर वे किस बात का इंतजार कर रहे हैं।" हालांकि, अमेरिकासहित 21 देश राहत दल खोज अभियान में जुटे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार इस आपदा से करीब 67 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

वेनेजुएला भूकंप: 1000 से अधिक इमारतें ढहीं, राहत-बचाव कार्य जारी

नई दिल्ली दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला में 25 जून को भूकंप के दो झटके हजारों लोगों की जिंदगियां निगल गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस भूकंप में 1430 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने आज सुबह कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब भी मलबे से लाशों पर लाशें निकल रही हैं। वहीं देश के उत्तरी तट के बाद अब भी लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी कराकास और माराके में भी 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे। भूकंप में 3360 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को 250 के करीब लोगों को जिंदा निकाला गया है। खुद ही परिजनों को तलाश रहे लोग वेनेजुएला में राहत टीमों की कमी की वजह से लोगों को खुद ही मलबा हटाकर परिजनों की तलाश करनी पड़ रही है। वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा है कि लोग ला गुआइरा राज्य की यात्रा से बचें। उन्होंने कहा कि यह समय बेहद संवेदनशील है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना है। उन्होंने कहा कि तेजी से पुलिस, सिविल प्रोटेक्शन, दमकल की टीमें भेजने के लिए रास्ते खाली रखना जरूरी है। जमींदोज हो गईं 1000 इमारतें बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के उत्तरी तटीय क्षेत्र और राजधानी काराकास में भूकंप के कारण सैकड़ों इमारतें, कई अस्पताल और शॉपिंग सेंटर पूरी तरह जमींदोज हो गये हैं। इसके अलावा करीब 1,000 अन्य बुनियादी ढांचागत स्थलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा तबाही काराकास के उत्तर में स्थित ला गुएरा क्षेत्र में हुई है, जहां देश का मुख्य बंदरगाह और सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है। ला गुएरा में अब तक मलबे से 243 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इस आपदा के बाद वेनेजुएला में अंतरराष्ट्रीय राहत और बचाव दल पहुंचना शुरू हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेचर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर वैश्विक सहायता अभियान चलाने की घोषणा की है। ब्रिटेन, अमेरिका, नीदरलैंड, मैक्सिको और स्विट्जरलैंड ने अपनी खोजी और बचाव टीमें, प्रशिक्षित श्वान दल और ड्रोन भेजे हैं। अमेरिका ने इसके साथ ही युद्धपोत, परिवहन विमान और 15 करोड़ डॉलर (लगभग 1,415 करोड़ 40 लाख रुपये) की वित्तीय सहायता देने का भी एलान किया है। आंतरिक मामलों के मंत्री डियोसडाडो काबेलो के अनुसार, भूकंप का सबसे ज्यादा असर काराकास के लॉस पालोस ग्रांडेस और अल्तामिरा इलाकों के अलावा ला गुएरा, अरागुआ, काराबोबो और फाल्कन जैसे उत्तरी तटीय राज्यों पर पड़ा है।

7.5 तीव्रता के भूकंप ने वेनेजुएला को हिलाया, इमारतें ढहीं और इंटरनेट ठप; हजारों मौतों का डर

काराकास वेनेजुएला में आए लगातार दो जोरदार भूकंपों ने भारी तबाही की आशंका पैदा कर दी है. राजधानी कराकास सहित कई इलाकों में इमारतों के ढहने की खबरें सामने आई हैं, जबकि हजारों लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए. USGS यानी यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने चेतावनी दी है कि इस आपदा में मरने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो सकती है।  वेनेजुएला में पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था, जिसका केंद्र वेनेजुएला के कैरेबियाई तट पर स्थित मोरोन इलाके के पश्चिम में था। भूकंप की गहराई करीब 22 किलोमीटर दर्ज की गई. इसके कुछ ही वक्त बाद एक और शक्तिशाली झटका महसूस किया गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।  अमेजन शहर तक भूकंप का असर एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले भूकंपों ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. यहां तक कि करीब 1,700 किलोमीटर दूर ब्राजील के अमेजन जैसे शहरों में भी इमारतों को खाली कराना पड़ा. बुधवार देर रात, कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने कहा कि वह देश को संबोधित करने की तैयारी कर रही थीं।  भूकंप के तीन घंटे के अंदर देश को संबोधित न करने और उस दौरान सरकार की ओर से किसी के घायल होने या मारे जाने की कोई रिपोर्ट न दिए जाने पर राजनेताओं और वेनेज़ुएला के लोगों ने रोड्रिग्ज की आलोचना की।  वेनेजुएला में जबरदस्त भूकंप के बाद अफरा-तफरी और भारी तबाही जैसे हालात वेनेजुएला की राजधानी में आए भूकंप के बाद तबाही जैसे हालात हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज में वेनेजुएला के उत्तरी तट पर एक के बाद एक आए जबरदस्त भूकंप के कारण डरे हुए लोग और गिरी हुई इमारतें दिखाई दे रही हैं।  वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने की हेल्थ वर्कर्स से काम पर लौटने की अपील वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने डॉक्टरों और नर्सों से कहा है कि वे भूकंप में घायल हुए लोगों के इलाज में मदद के लिए स्थानीय अस्पतालों और इमरजेंसी रूम में रिपोर्ट करें।  वेनेज़ुएला के अख़बार 'एल नैशनल' के मुताबिक, देश को संबोधित करते हुए रोड्रिगेज ने कहा, "मैं डॉक्टरों, नर्सों और सभी हेल्थ वर्कर्स से काम पर लौटने की अपील करती हूं, जिससे हम उन लोगों का इलाज कर सकें, जिन्हें अस्पतालों और प्राइवेट हेल्थ सेंटरों के इमरजेंसी रूम में लाया जा रहा है।  रोड्रिगेज ने कहा कि राष्ट्रीय, राज्य और नगरपालिका अधिकारी इस संकट से निपटने के लिए काम कर रहे हैं और देश के सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्यों में सबसे पहले मदद भेजी जा रही है।   अमेरिकी ऊर्जा मंत्री ने वेनेज़ुएला के प्रति संवेदना जताई अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट भी उन विदेशी अधिकारियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने वेनेज़ुएला के साथ एकजुटता दिखाई है।  उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "हम उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं, जिन्होंने अपनों को खोया है. इस मुश्किल वक्त में प्रभावित सभी समुदायों के लिए हिम्मत, सुरक्षा और जल्द ठीक होने की कामना करते हैं।   वेनेजुएला में भूकंप के बाद इमरजेंसी का ऐलान  वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने जबरदस्त भूकंपों के बाद इमरजेंसी का ऐलान किया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप के बाद अपनी में रोड्रिगेज ने मौतों की पुष्टि की, लेकिन यह नहीं बताया कि कितने लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही, उन्होंने खोज और बचाव कार्यों की देखरेख के लिए एक हाई-लेवल टास्क फोर्स बनाने का भी ऐलान किया है।    भूकंप के बाद पूरे वेनेजुएला में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर पड़ा असर वॉचडॉग 'NetBlocks' के मुताबिक, भूकंप से बिजली और टेलीकम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने के बाद वेनेजुएला में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर बुरा असर पड़ा है. अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती भी हुई है या नहीं।  कनेक्टिविटी में रुकावट की वजह से आने वाले कुछ घंटों में हॉटस्पॉट से मिलने वाली जानकारी और वीडियो की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है. मेक्सिको ने वेनेज़ुएला के साथ जताई एकजुटता  मेक्सिको के विदेश मंत्रालय ने वेनेज़ुएला में भूकंप आने के बाद वहां के लोगों के प्रति सहानुभूति जताई है. इसके साथ ही मेक्सिकों ने भूकंप से हुए नुकसान खेद प्रकट की है।  पल भर में बदल गई तीव्रता US जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने शुरू में कहा कि पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था, जिसे बाद में बदलकर 7.2 कर दिया गया. इसका केंद्र कैरेबियन तट पर बसे मोरोन इलाके के पश्चिम में था, जो काराकस से करीब 168 किलोमीटर पश्चिम में है. भूकंप की गहराई 22 किलोमीटर थी।  USGS ने ठीक एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता के और भी बड़े भूकंप की जानकारी दी. दूसरे भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी और इसका केंद्र मोरोन से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था।  दंग रह गए लोग वेनेजुएला में आए ये भूकंप एक सदी से भी ज्यादा वक्त में वेनेजुएला में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से थे. राजधानी काराकस में लोग हिलती हुई इमारतों से बाहर निकल आए. कई लोग यह देखकर हैरान रह गए कि पूरी की पूरी दीवारें गिर गई थीं और सड़क से ही घर का फर्नीचर दिखाई दे रहा था. राजधानी के दो इलाकों में धूल के गुबार भी देखे गए, जहां आमतौर पर रेस्तरां और अन्य कारोबारों में काफी चहल-पहल रहती है।     

‘महा-भूकंप’ का खतरा? 1000 वर्षों से जमा हो रहा तनाव लॉस एंजेलिस के लिए बन सकता है चुनौती

 कैलिफोर्निया वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में चेतावनी दी है कि दक्षिणी कैलिफोर्निया की दो सबसे प्रमुख फॉल्ट लाइनों सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो  में पिछले 1000 सालों की तुलना में इस समय सबसे अधिक दबाव जमा हो चुका है. यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के विशेषज्ञों के नेतृत्व में किए गए इस स्टडी ने भूकंपीय खतरों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।  शोधकर्ताओं ने एक आधुनिक 'फिजिक्स-बेस्ड मॉडल' का उपयोग करके साल 1000 ईस्वी (CE) से लेकर वर्तमान समय तक इन फॉल्ट्स पर बढ़ते दबाव को ट्रैक किया है. इस स्टडी के परिणाम बताते हैं कि लॉस एंजेलिस और रिवरसाइड जैसे घने बसे हुए महानगरीय क्षेत्रों के नीचे जमीन के भीतर एक बहुत बड़ा खतरा पनप रहा है, जो कभी भी एक बड़े विनाशकारी भूकंप का रूप ले सकता है।  क्या है यह नया शोध और कैसे मापा गया दबाव? इस ऐतिहासिक शोध में वैज्ञानिकों ने पारंपरिक तरीकों से हटकर एक खास कंप्यूटर मॉडल का इस्तेमाल किया है, जो पृथ्वी के भीतर होने वाली भौतिक हलचलों और टेक्टोनिक प्लेटों के दबाव को समझता है. इस मॉडल की मदद से पिछले एक हजार साल के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिससे यह पता चल सके कि समय के साथ इन फॉल्ट्स के अलग हिस्सों पर कितना दबाव बढ़ा या घटा है।  स्टडी में पाया गया कि सैन एंड्रियास फॉल्ट के 'मोजावे साउथ' हिस्से पर दबाव बढ़कर 2.8 मेगापास्कल (MPa) तक पहुंच गया है. वहीं दूसरी ओर, सैन जैसिंटो फॉल्ट की 'बरनार्डिनो स्ट्रैंड' पर यह दबाव और भी अधिक यानी 3.6 मेगापास्कल (MPa) दर्ज किया गया है।  वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले 1000 वर्षों के इतिहास में इन दोनों जगहों पर दबाव का यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है. यह दबाव इस बात का संकेत है कि धरती के नीचे की चट्टानें अब अपनी सहनशीलता की आखिरी सीमा पर हैं।  कजोन पास: महा-भूकंप का संभावित केंद्र इस पूरे शोध में सबसे चिंताजनक बात 'कजोन पास' को लेकर सामने आई है. कजोन पास वह भौगोलिक स्थान है जहां सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो फॉल्ट्स एक-दूसरे के बेहद करीब आते हैं. वैज्ञानिक इस जगह को एक मुख्य 'जंक्शन' या संपर्क बिंदु मान रहे हैं।  कजोन पास के कारण दोनों फॉल्ट्स आपस में इस तरह जुड़ सकते हैं कि यदि किसी एक फॉल्ट पर भूकंप की शुरुआत होती है, तो उसका कंपन या दरार दूसरे फॉल्ट को भी सक्रिय कर देगी.अगर ऐसा होता है, तो यह कई दरारों का एक साथ टूटना होगा, जो इतिहास के किसी भी सामान्य भूकंप से कहीं ज्यादा बड़ा और विनाशकारी हो सकता है।  दो बड़ी फॉल्ट लाइनों के एक साथ मिलने से पैदा होने वाला भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.5 या उससे भी अधिक तीव्रता का हो सकता है, जिससे दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक बहुत बड़े हिस्से में भारी तबाही मच सकती है।  दशकों की शांति बढ़ा रही है बड़ा खतरा कैलिफोर्निया के इतिहास पर नजर डालें तो सैन एंड्रियास के मोजावे साउथ हिस्से में साल 1857 के बाद से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है. वहीं सैन जैसिंटो की बरनार्डिनो शाखा में आखिरी बार साल 1968 में हलचल देखी गई थी. पिछले कई दशकों या कहें तो सदियों की यह शांति वास्तव में कोई राहत की बात नहीं है, बल्कि यह एक बड़े खतरे की दस्तक है।  जब दो टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में रगड़ खाती हैं और उनके बीच की फॉल्ट लाइन हिलती नहीं है, तो वहां लगातार ऊर्जा और दबाव जमा होता रहता है. इसे सिस्मिक गैप कहा जाता है. चूंकि पिछले 150 से अधिक सालों से मोजावे साउथ सेगमेंट पूरी तरह शांत है, इसलिए वहां इतनी भारी मात्रा में दबाव जमा हो चुका है कि जब भी यह फॉल्ट टूटेगा, तो इससे निकलने वाली ऊर्जा अकल्पनीय होगी।  यह भविष्यवाणी नहीं, बल्कि तैयारी की चेतावनी है इस शोध की मुख्य लेखिका लिलियन बर्कहार्ड ने स्पष्ट किया है कि उनके इस स्टडी का उद्देश्य किसी निश्चित तारीख या समय पर भूकंप आने की भविष्यवाणी करना बिल्कुल नहीं है. वर्तमान विज्ञान के पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जो यह बता सके कि भूकंप ठीक किस दिन या किस समय आएगा।  बर्कहार्ड के अनुसार, इस रिसर्च का असली मकसद प्रशासन और आम जनता को आने वाले कल के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है. यह डेटा लॉस एंजेलिस, रिवरसाइड और सैन बर्नार्डिनो जैसे शहरों के लिए आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन में बेहद मददगार साबित होगा।  इस जानकारी का उपयोग करके स्थानीय सरकारें अपने बिल्डिंग कोड को और सख्त बना सकती हैं, ताकि भविष्य में बनने वाली इमारतें इतने ऊंचे दबाव से पैदा होने वाले झटकों को झेल सकें. इसके अलावा, पुराने बुनियादी ढांचे, जैसे कि पुल, पानी की पाइपलाइनें और बिजली ग्रिड को मजबूत करने के लिए भी इस डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

भूकंप के तेज झटकों से कांपा इंडोनेशिया, पालू में अफरा-तफरी और संपत्तियों को क्षति

पालू  इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में मंगलवार (16 जून 2026) को आए 6.7 तीव्रता के बेहद शक्तिशाली भूकंप ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. इस तेज झटके के कारण मध्य सुलावेसी प्रांत की राजधानी पालू और उसके आसपास के इलाकों में व्यापक स्तर पर नुकसान की खबरें आ रही हैं।  भूकंप इतना जोरदार था कि लोग डर के मारे अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकलकर खुले मैदानों की तरफ भागने लगे. डराने वाली बात यह है कि पालू वही शहर है जिसने करीब आठ साल पहले एक बेहद विनाशकारी भूकंप और सुनामी का सामना किया था, जिसके जख्म आज भी यहां के लोगों के दिलों में ताजा हैं. इस नए झटके ने एक बार फिर स्थानीय निवासियों के मन में पुरानी और खौफनाक यादों को जिंदा कर दिया है।  अस्पतालों से मरीजों को निकाला गया बाहर, होटल और इमारतों को पहुंचा नुकसान भूकंप के तेज झटकों को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से पालू शहर के कई अस्पतालों से मरीजों को तुरंत बाहर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया. सोशल मीडिया और समाचार एजेंसियों द्वारा जारी तस्वीरों में देखा जा सकता है कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को उनकी ड्रिप और स्ट्रेचर के साथ खुले आसमान के नीचे ले जा रहे हैं।  शहर के एक प्रतिष्ठित फोर-स्टार होटल के जनरल मैनेजर एफेंडी नताली ने बताया कि भूकंप आते ही होटल के सभी कमरों को खाली करा लिया गया था. हालांकि अचानक आए इस झटके से मेहमानों के बीच भारी अफरा-तफरी और घबराहट का माहौल बन गया था, लेकिन राहत की बात यह रही कि सभी सुरक्षित हैं और होटल की इमारत को केवल मामूली नुकसान पहुंचा है. शहर के अन्य हिस्सों से भी छतों के गिरने, दीवारों में दरारें आने और सड़कों पर मलबा बिखरने की तस्वीरें सामने आई हैं।  सुनामी का कोई खतरा नहीं, लेकिन प्रशासन ने जारी की आफ्टरशॉक्स की चेतावनी अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र पालू शहर से लगभग 43 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर था. मुख्य भूकंप के बाद इलाके में कई आफ्टरशॉक्स भी महसूस किए गए, जिनमें से सबसे शक्तिशाली झटका 5.2 तीव्रता का मापा गया।  एहतियात के तौर पर तटीय इलाकों के पास रहने वाले लोग समुद्र से दूर सुरक्षित स्थानों पर चले गए ताकि किसी संभावित सुनामी से बचा जा सके. इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकीय एजेंसी (BMKG) ने साफ किया है कि इस भूकंप से सुनामी का कोई खतरा नहीं है, लेकिन उन्होंने लोगों को सचेत रहने की सलाह दी है क्योंकि आने वाले दिनों तक आफ्टरशॉक्स का सिलसिला जारी रह सकता है।  राहत और बचाव कार्य जारी, नुकसान का आकलन कर रही हैं एजेंसियां इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने एक बयान में कहा है कि वे वर्तमान में प्रभावित क्षेत्रों से नुकसान, संभावित हताहतों और विस्थापित हुए लोगों के बारे में सटीक डेटा जुटाने में लगे हैं. मलबे को हटाने और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए राहत दल को सक्रिय कर दिया गया है।  चूंकि इंडोनेशिया 'पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, इसलिए यहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं. फिलहाल प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है और लोगों से शांत रहने की अपील की जा रही है। 

केसला ब्लॉक में महसूस हुए भूकंप के झटके, लोगों ने कहा- अचानक हिलने लगी जमीन

नर्मदापुरम  नर्मदापुरम जिले के केसला ब्लॉक के ग्राम चिचवानी और छीतापुरा क्षेत्र में सोमवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। अचानक आए कंपन से ग्रामीणों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। रात करीब 9:38 बजे महसूस हुआ कंपन मौसम केंद्र भोपाल और नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, 8 जून 2026 की रात करीब 9:39 बजे भूकंप दर्ज किया गया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.8 मैग्नीट्यूड मापी गई। जबकि इसकी गहराई जमीन से लगभग 10 किलोमीटर नीचे बताई गई। छीतापुरा गांव तक महसूस हुए झटके चिचवानी गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर छीतापुरा में भी लोगों ने झटके महसूस किए। स्थानीय जनपद पंचायत सदस्य संतोष सल्लाम ने बताया कि वह रात में छत पर सो रहे थे, तभी अचानक कुछ सेकंड के लिए कंपन महसूस हुआ। शुरुआत में ऐसा लगा कि घर हिल रहा है, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई। हल्की श्रेणी का माना जाता है 3.8 मैग्नीट्यूड का भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार 3.8 मैग्नीट्यूड का भूकंप हल्की श्रेणी में आता है। ऐसे भूकंप में आमतौर पर बड़े नुकसान की संभावना कम रहती है, लेकिन इसके झटके लोगों को स्पष्ट रूप से महसूस हो सकते हैं। छत सो रहा था, अचानक से कंपन हुआ ग्राम चिचवानी से 2 किमी दूर स्थित छीतापुरा में भी झटके महसूस हुए। जनपद पंचायत सदस्य संतोष सल्लाम ने बताया रात करीब 9.30 बजे के आसपास जब में छत पर सो रहा था, तब कुछ पलभर के लिए कंपन हुआ। ऐसा लगा मानो घर हिल गया है लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ। 3.8 तीव्रता का भूकंप हल्की श्रेणी में आता है जानकारों के अनुसार 3.8 तीव्रता का भूकंप हल्की श्रेणी में आता है। इसमें आमतौर पर बड़ा नुकसान नहीं होता, लेकिन झटके साफ महसूस होते हैं। एसडीएम निलेश शर्मा ने बताया मुझे इसकी जानकारी मिली है। अधिकृत पता करके थोड़ी देर में बताऊंगा। हल्की श्रेणी का भूकंप, नुकसान की खबर नहीं विशेषज्ञों के अनुसार 3.8 तीव्रता का भूकंप हल्की श्रेणी में माना जाता है। ऐसे भूकंपों में आमतौर पर बड़े नुकसान की संभावना कम होती है, लेकिन झटके स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकते हैं। प्रशासन ने भी फिलहाल किसी तरह की क्षति की पुष्टि नहीं की है। प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट एसडीएम निलेश शर्मा ने बताया कि भूकंप की जानकारी प्राप्त हुई है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। अब तक किसी गांव से नुकसान या घायल होने की सूचना नहीं मिली है।

समंदर में उठी तबाही की आशंका! फिलीपींस में शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी चेतावनी जारी

मनीला दक्षिणी फिलीपींस के मिंडानाओ में सोमवार सुबह जोरदार भूकंप से धरती कांप उठी है। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 8.2 रही है, जिसके बाद फिलीपींस और इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में चेतावनी जारी की गई है। चेतावनी में तटीय इलाके में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा गया है। भूकंप जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर की गहराई पर था, जिससे झटके और जोर से महसूस किए गए। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) ने शुरू में इसकी तीव्रता 7.2 बताई थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 8.2 कर दिया। भूकंप के बाद अमेरिका के सुनामी चेतावनी सिस्टम ने सुनामी का अलर्ट जारी किया है। इसने चेतावनी दी कि खतरनाक लहरें इलाके के तटीय इलाकों को प्रभावित कर सकती हैं। इंडोनेशिया में भी सुनामी की चेतावनी इंडोनेशिया की जियोफिजिस्ट एजेंसी ने देश के उत्तर-पूर्वी तटीय इलाकों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की है। इसमें लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने को कहा है। इंडोनेशियाई एजेंसी ने भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.7 मापी है। फिलीपींस इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्कानोलॉजी एंड सिस्मोलॉजी ने भूकंप के 7.0 तीव्रता का होने का अनुमान लगाया है। इसने एक मीटर ऊंची सुनामी की लहरें उठने की चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने कहा है कि भूकंप के बाद ये लहरें कई घंटे तक रह सकती हैं। जापान, इंडोनेशिया समेत इन देशों में अलर्ट अलजजीरा के मुताबिक, फिलीपींस के पास आए जबरदस्त भूकंप के बाद जापान ने अपने प्रशांत महासागर तट के कुछ हिस्सों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग का अनुमान है कि जापान के कुछ इलाकों में एक मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं।  भूकंप के बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्र ने सुनामी का खतरा बताते हुए चेतावनी जारी की है. एजेंसी के मुताबिक, खतरनाक लहरें समुद्र तट पर स्थित द्वीप को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसके बाद इंडोनेशिया की जियोफिजिक्स एजेंसी ने भी देश के उत्तरपूर्वी तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की और अपने नागरिकों को सतर्क रहने के साथ-साथ निर्देशों का पालन करने की अपील की।  चेतावनी में कहा गया है कि शक्तिशाली भूकंप से काफी नुकसान हो सकता है और आने वाले घंटों और दिनों में इसके बाद तेज झटके आ सकते हैं. बीते रविवार को भी भारत समेत कई देशों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे. भारत के साथ-साथ नेपाल, चीन और भूटान में आए भूकंप की रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.3 मापी गई थी. इस भूकंप का केंद्र भूटान था।  किसी के मारे जाने की खबर नहीं इंडोनेशिया और फिलीपींस में अभी तक किसी बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। अधिकारियों ने भूकंप के केंद्र के पास जोरदार झटके आने की बात कही है, जिससे भारी नुकसान हो सकता है। लोगों से सावधान रहने को कहा गया है, क्योंकि आने वाले घंटों और झटके महसूस किए जा सकते हैं। इलाके में एजेंसियां समुद्र के जलस्तर पर नजर रख रही हैं। दक्षिणी फिलीपींस के सारांगनी प्रांत में स्थित अलाबेल के पुलिस चीफ बेंजी अंचेता ने बताया कि भूकंप के बाद स्थानीय पुलिस स्टेशन की इमारत में दरार पड़ गई। अंचेता ने बताया कि तत्काल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। उन्होंने कहा, "यह अब तक का सबसे जोरदार भूकंप है, जो हमने महसूस किया है।" 

रात 10:04 बजे कांपी पंजाब और चंडीगढ़ की जमीन, 4.3 तीव्रता के भूकंप ने बढ़ाई लोगों की चिंता

चंडीगढ़ पंजाब और चंडीगढ़ में शुक्रवार रात अचानक धरती कांपने से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। रात करीब 10 बजकर 4 मिनट पर आए भूकंप के झटके कई इलाकों में महसूस किए गए। झटके महसूस होते ही लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.3 दर्ज की गई है। भूकंप का केंद्र हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के पास बताया गया है। राहत की बात यह रही कि घटना के बाद किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई। भूकंप के झटके महसूस होने के बाद पंजाब और चंडीगढ़ के कई क्षेत्रों में लोग घरों से बाहर निकल आए। रात के समय आए इन झटकों के कारण कुछ लोगों में घबराहट देखी गई। हालांकि झटके ज्यादा देर तक नहीं रहे, लेकिन लोगों ने धरती में कंपन स्पष्ट रूप से महसूस किया। स्थानीय स्तर पर लोगों ने अपने अनुभव साझा किए और कई स्थानों पर लोग कुछ समय तक खुले स्थानों में ही रहे। कांगड़ा से पंचकूला तक कांपी धरती हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में में शुक्रवार रात 10 बजकर 4 मिनट पर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 दर्ज की गई. भूकंप का केंद्र धर्मशाला से करीब 18 किलोमीटर दूर बताया गया है।  भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए. कई इलाकों में कुछ सेकंड तक धरती हिलती महसूस हुई, जिससे लोगों में भय और दहशत का माहौल बन गया. देर रात तक लोग खुले स्थानों पर खड़े दिखाई दिए।  प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक भूकंप का असर केवल कांगड़ा तक सीमित नहीं रहा. आसपास के कई जिलों और राज्यों में भी झटके महसूस किए गए।  धर्मशाला के पास रहा भूकंप का केंद्र भूकंप का केंद्र हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला क्षेत्र के आसपास दर्ज किया गया है। धर्मशाला और उसके आसपास का इलाका भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण यहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज होते रहते हैं। इस बार आए झटकों का असर हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब और चंडीगढ़ तक महसूस किया गया। प्रशासनिक और प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार भूकंप के कारण किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है। न तो किसी बड़े हादसे की सूचना है और न ही किसी संरचनात्मक क्षति की पुष्टि हुई है। अधिकारियों द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। दो महीने पहले भी महसूस हुए थे झटके करीब दो महीने पहले भी पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में था। रिक्टर स्केल पर उसकी तीव्रता 5.9 दर्ज की गई थी। उस भूकंप का प्रभाव उत्तर भारत के कई हिस्सों तक महसूस किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार पृथ्वी की सतह सात प्रमुख और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें लगातार गतिशील रहती हैं और समय-समय पर एक-दूसरे से टकराती या खिसकती हैं। जब प्लेटों के बीच दबाव बढ़ जाता है तो उनमें ऊर्जा जमा होने लगती है। दबाव एक सीमा से अधिक होने पर यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, जिससे धरती में कंपन पैदा होता है और भूकंप आता है। यही प्रक्रिया दुनिया के अधिकांश भूकंपों का प्रमुख कारण मानी जाती है।

जापान में 7.3 तीव्रता का भूकंप, सुनामी के खतरे को लेकर अलर्ट जारी

टोक्यो   सोमवार को जापान के पूर्वोत्तर तट पर प्रशांत महासागर में 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है। भूकंप का केंद्र उत्तरी इवाते प्रांत के पास समुद्र में था। भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 4:53 बजे आया। इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे झटके काफी तेज महसूस किए गए। टोक्यो तक महसूस हुए झटके भूकंप इतना शक्तिशाली था कि केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी ऊंची इमारतें हिल गईं। कई इलाकों में लोगों ने तेज झटके महसूस किए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं आई है, लेकिन स्थिति की निगरानी की जा रही है।  इसके अलावा, क्योडो के अनुसार, जापान में आए जोरदार भूकंप के बाद टोक्यो-आओमोरी बुलेट ट्रेन लाइन पर परिचालन रोक दिया गया। सुनामी की चेतावनी जारी भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी अलर्ट जारी कर दिया है। इवाते प्रांत और होक्काइडो के कुछ हिस्सों में 3 मीटर (10 फीट) तक ऊंची सुनामी लहरों की चेतावनी दी गई है। एजेंसी ने तटीय इलाकों के निवासियों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। सुनामी लहरों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए सतर्कता बरतने का आग्रह किया गया है। जापान के मीडिया NHK के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि जोरदार भूकंपीय गतिविधि के कारण समुद्र तट के पास सुनामी भी आ गई। मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी कि सुनामी की लहरें उत्तरी तटरेखा तक लगभग तुरंत पहुंच सकती हैं। एजेंसी ने कहा कि तटीय क्षेत्रों और नदी के किनारे वाले इलाकों से तुरंत किसी सुरक्षित जगह, जैसे कि ऊंची जमीन या किसी सुरक्षित इमारत में चले जाएं, और साथ ही यह भी चेताया कि सुनामी की लहरों से नुकसान होने की संभावना है। एजेंसी ने आगे कहा, "सुनामी की लहरें बार-बार आने की उम्मीद है। जब तक चेतावनी वापस नहीं ले ली जाती, तब तक सुरक्षित जगह न छोड़ें।" सालो पहले जापान में आया था प्रलय जापान में अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं जो कई बार भयानक तबाही भी मचाते हैं। इसी वजह से यहां सरकार ने सख्त निर्माण नियम लागू किए हैं जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इमारतें मजबूत झटकों का सामना कर सकें। जापान के जहन में अभी भी 2011 की फुकुशिमा त्रासदी की काली यादें कैद हैं। सालो पहले जापान में 9.0-9.1 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था जिसने एक घातक सुनामी को जन्म दिया जिसने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को बर्बाद कर दिया था। सुनामी से 18,500 लोग मारे गए थे या लापता हो गए थे।   

कोरापुट से बस्तर तक कांपी धरती, भूकंप के झटकों का वीडियो सामने आया

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के जगदलपुर/बस्तर संभाग में बीती रात उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अचानक भूकंप के झटके महसूस किए गए। जगदलपुर समेत आसपास के कई इलाकों में जमीन हिलने से लोग घबरा गए और एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। नैशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप रात 11:31 बजे आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में जमीन से लगभग 5 किलोमीटर नीचे स्थित था। कुछ सेकंड की दहशत, फिर सामान्य हुआ माहौल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटके कुछ सेकंड तक ही महसूस हुए, लेकिन अचानक जमीन हिलने से लोग घबरा गए। कई लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों पर खड़े हो गए। झटके थमने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। CCTV में कैद हुई घटना शहर के कई इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों में भूकंप के दौरान की हलचल रिकॉर्ड हुई है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि झटकों के दौरान पंखे और अन्य सामान हिलते नजर आए, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया। कम जोखिम वाले क्षेत्र में भूकंप से बढ़ी चिंता बस्तर क्षेत्र को अब तक भूकंपीय दृष्टि से अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम संवेदनशील माना जाता रहा है, जहां बड़े या बार-बार भूकंप आने की घटनाएं सामान्यतः दर्ज नहीं होतीं। ऐसे में अचानक झटकों का महसूस होना न केवल आम लोगों के लिए डर और आशंका का कारण बना है, बल्कि विशेषज्ञों और भूविज्ञानियों के लिए भी यह एक गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना में कोई सूक्ष्म बदलाव हो रहा है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा। भूविज्ञानियों का मानना है कि भले ही यह भूकंप तीव्रता में मध्यम था, लेकिन इसका असर और स्थान महत्वपूर्ण है, इसलिए इस तरह की घटनाओं का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी हो जाता है। भविष्य में संभावित जोखिमों का आकलन करने, भूकंपीय गतिविधियों के पैटर्न को समझने और समय रहते आवश्यक सतर्कता बरतने के लिए इस क्षेत्र में लगातार मॉनिटरिंग और रिसर्च की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन सतर्क, स्थिति पर नजर भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन और विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भूकंप के दौरान घबराएं नहीं, बल्कि सुरक्षित स्थानों पर जाएं। साथ ही भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना के लिए जागरूक और तैयार रहने की सलाह दी गई है। भूवैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बस्तर जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस होना वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है। विशेषज्ञ अब इस क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों पर और गहन नजर रखेंगे, ताकि भविष्य में संभावित जोखिम का आकलन किया जा सके।