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जापान में 7.3 तीव्रता का भूकंप, सुनामी के खतरे को लेकर अलर्ट जारी

टोक्यो   सोमवार को जापान के पूर्वोत्तर तट पर प्रशांत महासागर में 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है। भूकंप का केंद्र उत्तरी इवाते प्रांत के पास समुद्र में था। भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 4:53 बजे आया। इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे झटके काफी तेज महसूस किए गए। टोक्यो तक महसूस हुए झटके भूकंप इतना शक्तिशाली था कि केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी ऊंची इमारतें हिल गईं। कई इलाकों में लोगों ने तेज झटके महसूस किए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं आई है, लेकिन स्थिति की निगरानी की जा रही है।  इसके अलावा, क्योडो के अनुसार, जापान में आए जोरदार भूकंप के बाद टोक्यो-आओमोरी बुलेट ट्रेन लाइन पर परिचालन रोक दिया गया। सुनामी की चेतावनी जारी भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी अलर्ट जारी कर दिया है। इवाते प्रांत और होक्काइडो के कुछ हिस्सों में 3 मीटर (10 फीट) तक ऊंची सुनामी लहरों की चेतावनी दी गई है। एजेंसी ने तटीय इलाकों के निवासियों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। सुनामी लहरों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए सतर्कता बरतने का आग्रह किया गया है। जापान के मीडिया NHK के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि जोरदार भूकंपीय गतिविधि के कारण समुद्र तट के पास सुनामी भी आ गई। मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी कि सुनामी की लहरें उत्तरी तटरेखा तक लगभग तुरंत पहुंच सकती हैं। एजेंसी ने कहा कि तटीय क्षेत्रों और नदी के किनारे वाले इलाकों से तुरंत किसी सुरक्षित जगह, जैसे कि ऊंची जमीन या किसी सुरक्षित इमारत में चले जाएं, और साथ ही यह भी चेताया कि सुनामी की लहरों से नुकसान होने की संभावना है। एजेंसी ने आगे कहा, "सुनामी की लहरें बार-बार आने की उम्मीद है। जब तक चेतावनी वापस नहीं ले ली जाती, तब तक सुरक्षित जगह न छोड़ें।" सालो पहले जापान में आया था प्रलय जापान में अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं जो कई बार भयानक तबाही भी मचाते हैं। इसी वजह से यहां सरकार ने सख्त निर्माण नियम लागू किए हैं जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इमारतें मजबूत झटकों का सामना कर सकें। जापान के जहन में अभी भी 2011 की फुकुशिमा त्रासदी की काली यादें कैद हैं। सालो पहले जापान में 9.0-9.1 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था जिसने एक घातक सुनामी को जन्म दिया जिसने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को बर्बाद कर दिया था। सुनामी से 18,500 लोग मारे गए थे या लापता हो गए थे।   

कोरापुट से बस्तर तक कांपी धरती, भूकंप के झटकों का वीडियो सामने आया

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के जगदलपुर/बस्तर संभाग में बीती रात उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अचानक भूकंप के झटके महसूस किए गए। जगदलपुर समेत आसपास के कई इलाकों में जमीन हिलने से लोग घबरा गए और एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। नैशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप रात 11:31 बजे आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में जमीन से लगभग 5 किलोमीटर नीचे स्थित था। कुछ सेकंड की दहशत, फिर सामान्य हुआ माहौल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटके कुछ सेकंड तक ही महसूस हुए, लेकिन अचानक जमीन हिलने से लोग घबरा गए। कई लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों पर खड़े हो गए। झटके थमने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। CCTV में कैद हुई घटना शहर के कई इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों में भूकंप के दौरान की हलचल रिकॉर्ड हुई है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि झटकों के दौरान पंखे और अन्य सामान हिलते नजर आए, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया। कम जोखिम वाले क्षेत्र में भूकंप से बढ़ी चिंता बस्तर क्षेत्र को अब तक भूकंपीय दृष्टि से अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम संवेदनशील माना जाता रहा है, जहां बड़े या बार-बार भूकंप आने की घटनाएं सामान्यतः दर्ज नहीं होतीं। ऐसे में अचानक झटकों का महसूस होना न केवल आम लोगों के लिए डर और आशंका का कारण बना है, बल्कि विशेषज्ञों और भूविज्ञानियों के लिए भी यह एक गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना में कोई सूक्ष्म बदलाव हो रहा है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा। भूविज्ञानियों का मानना है कि भले ही यह भूकंप तीव्रता में मध्यम था, लेकिन इसका असर और स्थान महत्वपूर्ण है, इसलिए इस तरह की घटनाओं का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी हो जाता है। भविष्य में संभावित जोखिमों का आकलन करने, भूकंपीय गतिविधियों के पैटर्न को समझने और समय रहते आवश्यक सतर्कता बरतने के लिए इस क्षेत्र में लगातार मॉनिटरिंग और रिसर्च की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन सतर्क, स्थिति पर नजर भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन और विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भूकंप के दौरान घबराएं नहीं, बल्कि सुरक्षित स्थानों पर जाएं। साथ ही भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना के लिए जागरूक और तैयार रहने की सलाह दी गई है। भूवैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बस्तर जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस होना वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है। विशेषज्ञ अब इस क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों पर और गहन नजर रखेंगे, ताकि भविष्य में संभावित जोखिम का आकलन किया जा सके।

इंडोनेशिया में भूकंप का कहर: 7.4 तीव्रता, सुनामी और भारी तबाही

जकार्ता इंडोनेशिया में भयंकर भूकंप आया है. इंडोनेशिया में भूकंप के बाद एक और खतरा मंडरा रहा है. वह खतरा है सुनामी का. जी हां इंडोनेशिया में जलजले के बाद अब सुनामी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है. इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में आज यानी गुरुवार की सुबह जोरदार भूकंप आया. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.4 मापी गई. इसके बाद भूकंप से सुनामी की छोटी लहरें उठीं. इस भूकंप-सुनामी के डेडली कॉम्बिनेशन में एक व्यक्ति की मौत हो गई और घरों एवं इमारतों को नुकसान पहुंचा।  दरअसल, यूएसजीएस यानी संयुक्त राज्य अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि गुरुवार तड़के पूर्वी इंडोनेशिया के तट से दूर समुद्र में शक्तिशाली भूकंप आया. इसके बाद एक अमेरिकी निगरानी एजेंसी ने भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में सुनामी की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.4 थी और इसका केंद्र मोलूका सागर में 35 किलोमीटर की गहराई पर था. भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं, खासकर इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया के तटीय इलाकों में. यूएसजीएस ने भी भूकंप के केंद्र से उतनी ही दूरी पर स्थित क्षेत्रों में खतरनाक सुनामी लहरों की संभावना के संबंध में चेतावनी दी।  इंडोनेशिया में भूंकप इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान एवं भूभौतिकी एजेंसी के अनुसार, भूकंप के आधे घंटे से भी कम समय में कई निगरानी केंद्रों में सुनामी की लहरें दर्ज की गईं. इनमें बिटुंग में आंठ इंच और पश्चिम हलमाहेरा में एक फुट ऊंची लहरें शामिल हैं. होनोलुलु स्थित प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा कि दक्षिणी फिलीपीन के दावाओ में दो इंच ऊंची लहरें उठीं लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों के लिए सुनामी का कोई खतरा नहीं है।  इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार उत्तरी सुलावेसी प्रांत के तटीय शहर बिटुंग और आसपास के इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी प्रांत उत्तर मलुकु के टेरनेट शहर में 10 से 20 सेकंड तक भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।  भूकंप-सुनामी से कितनी तबाही प्रारंभिक आकलन से पता चला है कि टेरनेट के कुछ हिस्सों में थोड़ा नुकसान हुआ है. स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि बटांग दुआ द्वीप जिले में एक गिरजाघर प्रभावित हुआ है और दक्षिण टेरनेट में दो घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. बिटुंग में नुकसान का आकलन अभी जारी है. इंडोनेशिया की खोज और बचाव एजेंसी ने बताया कि उत्तरी सुलावेसी के मिनाहासा जिले में 70 वर्षीय महिला की मौत हो गई और एक अन्य निवासी घायल हो गया।  तटीय इलाके में खतरा बरकरार आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहरी ने एक बयान में कहा, ‘‘इस समय सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब तक अधिकारी अनुमति न दें तब तक वे जलक्षेत्र में नहीं जाएं. भूकंप के बाद समुद्र तट से दूर कम से कम दो झटके और महसूस किए गए. अधिकारियों ने बताया कि दोनों झटकों से सुनामी का खतरा नहीं है।  क्यों खतरा मंडरा रहा इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है, क्योंकि यह ‘प्रशांत अग्नि वलय’ पर स्थित है. यह ज्वालामुखियों और भ्रंश रेखाओं का एक विशाल 40,000 किलोमीटर लंबा चाप है, जो टेक्टोनिक प्लेटों की आपसी हलचल से बना है. प्रशांत महासागर को घेरने वाली यह घोड़े की नाल के आकार की बेल्ट दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत भूकंपों का कारण बनती है और यह अपनी लगातार होने वाली भूकंपीय और ज्वालामुखी गतिविधियों के लिए जानी जाती है।  यहां पिछले महीने में भी आया था भूकंप यूएसजीएस के अनुसार, अभी पिछले महीने ही 3 मार्च को सुमात्रा के तट से दूर समुद्र में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इससे वहां के लोग सहम गए थे, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था. वह भूकंप सुमात्रा के उत्तर-पूर्वी सिरे के पास समुद्र में उत्पन्न हुआ था, जिसके कारण उस क्षेत्र में, जहां अक्सर भूकंप के झटके आते रहते हैं, कई लोग घबराकर अपने घरों से बाहर भाग निकले थे. इसी बीच, इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने इस भूकंप की तीव्रता 6.4 दर्ज की और बताया कि यह 13 किलोमीटर की गहराई पर आया था। 

तेज भूकंप से नेपाल में दहशत, प्रशासन अलर्ट

ताप्लेजंग, नेपाल पूर्वी नेपाल के ताप्लेजंग जिले में मंगलवार तड़के चार तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NEMRC) के अनुसार, भूकंप मंगलवार सुबह 2 बजकर 47 मिनट पर आया।भूकंप का केंद्र ताप्लेजंग जिले के कंचनजंगा क्षेत्र में स्थित था। झटकों के बाद स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई और कई लोग घरों से बाहर निकल आए। अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के झटके ताप्लेजंग के अलावा पूर्वी नेपाल के अन्य जिलों में भी महसूस किए गए। हालांकि, अब तक किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या संपत्ति क्षति की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां समय-समय पर इस तरह की गतिविधियां दर्ज की जाती रही हैं।

दिल्ली-NCR में कांपी धरती, भूकंप के झटकों से मचा हड़कंप

नई दिल्‍ली दिल्ली में सोमवार की सुबह भूकंप का हल्का झटका महसूस किया गया. रिक्‍टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 2.8 मापी गई है. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप का केंद्र उत्तर दिल्ली में दर्ज किया गया है. सुबह 8:44 बजे भूकंप का झटका दर्ज किया गया और भूकंप का केंद्र जमीन की सतह के काफी पास रहा. दिल्‍ली में आए भूकंप का केंद्र जमीन से महज 5 किलोमीटर नीचे था. दिल्‍ली भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है और उच्‍च जोखिम वाले सिस्‍मिक जोन 4 में आता है. भूकंप का केंद्र दिल्‍ली जरूर था, लेकिन भूकंप का झटका बेहद हल्‍का था. ऐसे में जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. भूकंप के बाद दिल्‍ली-एनसीआर में हालात सामान्‍य हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, 2.8 तीव्रता के भूकंप से किसी तरह के नुकसान की आशंका नहीं होती है.  इस महीने कई जगहों पर दर्ज किए गए भूकंप  भारत के विभिन्‍न इलाकों में जनवरी महीने के दौरान कई भूकंप दर्ज किए गए हैं. शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात गुजरात के कच्छ जिले में 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसके बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई थी. गांधीनगर स्थित भूकंपीय अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) ने बताया था कि भूकंप शुक्रवार देर रात एक बजकर 22 मिनट पर आया और इसका केंद्र जिले के खावड़ा से लगभग 55 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपूर्व में था. भूकंप संवेदनशील जोन-4 में आता है दिल्ली-NCR भूकंप के झटके एक बार फिर याद दिलाते हैं कि दिल्ली-एनसीआर भूकंप संवेदनशील जोन-4 में आता है और यहां भूकंप के बड़े झटके कभी भी आ सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे झटके बड़े भूकंप का संकेत भी हो सकते हैं, इसलिए लोगों को तैयार रहना चाहिए. अभी तक कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन सुबह के इस झटके ने लोगों को डरा दिया है. इससे पहले बुधवार 14 जनवरी को भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए. इस भूंकप का केंद्र हरियाणा के सोनीपत स्थित गोहाना था, जिसकी तीव्रता रीक्टर स्केल पर 3.4 मापी गई. इस भूकंप के झटके दिल्ली तक झटके महसूस किए गए और कई लोग घबराकर अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए थे. क्यों आते हैं भूकंप? भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारी धरती की सतह मुख्य रूप से सात बड़ी और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से बनी है. ये प्लेट्स लगातार हरकत करती रहती हैं और अक्सर आपस में टकराती हैं. इस टक्कर के परिणामस्वरूप प्लेट्स के कोने मुड़ सकते हैं और अत्यधिक दबाव के कारण वे टूट भी सकती हैं. ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर फैलने का रास्ता खोजती है और यही ऊर्जा जब जमीन के अंदर से बाहर आती है, तो भूकंप आता है. भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है दिल्‍ली  भारत के भूकंप संवेदनशील इलाकों में दिल्‍ली भी शामिल है. दिल्ली भूकंप के लिहाज से बहुत जोखिम वाले जोन 4 में है. जोन 2 कम जोखिम वाले, जोन 3 मध्यम जोखिम वाले और जोन 5 सबसे अधिक जोखिम वाले इलाके हैं. दिल्ली ऐसा इलाका है, जहां पर बहुत जोखिम वाले भूकंप आ सकते हैं. साथ ही हिमालयी इलाके में आने वाले भूकंप की जद से भी दिल्‍ली बहुत दूर नहीं है.  खासतौर पर पर सेंट्रल हिमालय जहां 8 या उससे अधिक की तीव्रता का भूकंप आने की आशंका बनी रहती है.   इसलिए आता है भूकंप  पृथ्वी की सतह के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों में अक्‍सर हलचल है और इसके कारण ही भूकंप आते हैं. पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी प्लेटों में बंटी होती है और यह धीमी गति से खिसकती हैं. हालांकि जब यह प्लेटें आपस में टकराती हैं तो ऊर्जा का बड़ा विस्फोट होता है, जिसे हम भूकंप कहते हैं.

भूकंप का कहर: दो देशों में महसूस हुए तेज झटके, अफगानिस्तान और म्यांमार में दहशत

अफगानिस्तान एशिया के दो संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों अफगानिस्तान और म्यांमार में एक बार फिर धरती कांप उठी है। हाल के दिनों में दोनों देशों में कई भूकंप दर्ज किए गए हैं, जिससे पहले से संकटग्रस्त आबादी के लिए खतरा और बढ़ गया है। अफगानिस्तान में भूकंप रविवार को अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया, जिससे आफ्टरशॉक्स और नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। भूकंप का केंद्र 33.74° उत्तरी अक्षांश और 65.70° पूर्वी देशांतर पर स्थित था। इससे पहले 15 जनवरी को 4.2 तीव्रता का भूकंप 96 किमी गहराई पर और 14 जनवरी को 3.8 तीव्रता का भूकंप 90 किमी गहराई पर दर्ज किया गया था। रेड क्रॉस के अनुसाaर, अफगानिस्तान विशेष रूप से हिंदूकुश क्षेत्र में स्थित होने के कारण बार-बार भूकंप झेलता है। यह इलाका भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की टकराहट की सीमा पर है। UNOCHA ने चेतावनी दी है कि दशकों के संघर्ष और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण अफगानिस्तान प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है। म्यांमार में लगातार झटके इसी तरह, म्यांमार में भी रविवार को 3.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 65 किलोमीटर थी। NCS के अनुसार, इसका केंद्र 23.70° उत्तरी अक्षांश और 93.79° पूर्वी देशांतर पर था। विशेषज्ञों के अनुसार, उथले भूकंप अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि उनकी तरंगें सीधे सतह तक पहुंचती हैं और ज्यादा तबाही मचा सकती हैं।   म्यांमार चार टेक्टोनिक प्लेटों भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट के संगम पर स्थित है। यहां से गुजरने वाला 1,400 किमी लंबा सागाइंग फॉल्ट देश के प्रमुख शहरों सागाइंग, मांडले, बागो और यांगून के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है, जहां लगभग 46% आबादी रहती है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि बड़े भूकंपों के बाद विस्थापित लोगों में टीबी, एचआईवी और जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता है।

आज फिलीपींस में आया 6.7 मैग्नीट्यूड का भूकंप, समुद्र के भीतर था केंद्र

मनीला फिलीपींस के पूर्वी हिस्से में बुधवार को 6.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र बकुलिन शहर से 68 किलोमीटर पूर्व में था. इसकी गहराई सिर्फ 10 किलोमीटर थी. यह भूकंप समुद्र में हुआ था, जिसे ऑफशोर टेम्बलर कहा जा रहा है. फिलीपींस की भूकंप निगरानी एजेंसी फिवॉल्क्स (Phivolcs) ने चेतावनी दी है कि इस भूकंप से नुकसान हो सकता है. आफ्टरशॉक्स (झटके) आने की संभावना है. अभी तक किसी बड़े नुकसान या घायलों की कोई खबर नहीं आई है. लोगों में दहशत, लेकिन बड़ा नुकसान नहीं सुरिगाओ डेल सुर प्रांत के हिनातुआन शहर के स्थानीय पुलिस प्रमुख जोई मोनाटो ने बताया कि भूकंप इतना तेज नहीं था, लेकिन लोग डरकर बाहर भाग आए. उन्होंने कहा कि इलाके में लोग सुरक्षित हैं और अभी कोई गंभीर क्षति की सूचना नहीं है. भूकंप का केंद्र मिंदानाओ द्वीप के दावाओ ओरिएंटल क्षेत्र के पास था. यह इलाका रिंग ऑफ फायर पर स्थित है, जहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं. उथली गहराई की वजह से झटके ज्यादा महसूस होते हैं. क्या है आगे की स्थिति? अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. आफ्टरशॉक्स आने पर सुरक्षित जगह पर रहें. अभी तक सुनामी की कोई चेतावनी नहीं जारी की गई है. स्थानीय सरकार और राहत टीमें अलर्ट पर हैं. अगर कोई नुकसान होता है, तो उसकी जांच की जा रही है. फिलीपींस में हर साल हजारों भूकंप आते हैं, लेकिन ज्यादातर छोटे होते हैं. यह भूकंप हाल के दिनों में आए मध्यम स्तर के झटकों में से एक है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे भूकंप प्राकृतिक हैं. 

न्यू ईयर ईव पर प्रकृति का कहर, 6 रिक्टर तीव्रता से हिली धरती

नई दिल्ली  एक तरफ जहां पूरी दुनिया नए साल के जश्न की तैयारी कर रही है तो दूसरी ओर जापान में भूकंप से धरती हिल गई है। नए साल की पूर्व संध्या पर जापान में छह रिक्टर स्केल का भूकंप आया है। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, बुधवार, 31 दिसंबर को जापान के नोडा शहर में 6 तीव्रता का भूकंप आया। USGS ने बताया कि भूकंप नोडा से करीब 91 किलोमीटर पूर्व में आया और इसकी गहराई 19.3 किलोमीटर थी। भूकंप को लेकर राहतभरी बात यह रही कि किसी भी नुकसान या जान-माल के नुकसान की तुरंत कोई जानकारी नहीं मिली है। इसके अलावा, नए साल की पूर्व संध्या पर दिन में पहले तिब्बत में दोपहर के समय 3.4 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप भारतीय समयानुसार दोपहर करीब 3.26 बजे 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था। इससे पहले नौ दिसंबर को उत्तरी जापान में देर रात 7.5 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसके कारण 33 लोग घायल हो गए और प्रशांत महासागर के तटवर्ती इलाकों में सुनामी आ गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि 33 लोग घायल हुए हैं जिनमें एक गंभीर रूप से घायल है। सार्वजनिक प्रसारक ‘एनएचके की खबर के अनुसार, अधिकतर लोग वस्तुएं गिरने के कारण घायल हुए। जापान के मुख्य होन्शू द्वीप के सबसे उत्तरी प्रांत आओमोरी के तट से लगभग 80 किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर में रात लगभग 11 बजकर 15 मिनट पर भूकंप आया था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने भूकंप की तीव्रता 7.6 मापी तथा कहा कि यह सतह से 44 किलोमीटर (27 मील) नीचे आया। आओमोरी प्रांत के हाचिनोहे शहर में एक दुकान के मालिक नोबुओ यामादा ने एनएचके से कहा, ‘‘मैंने कभी इतना भीषण भूकंप नहीं देखा।’’ इसके भीषण भूकंप के बाद जापान में कई अन्य भूकंप के झटके भी महसूस किए गए हैं।

जापान में 6.7 का शक्तिशाली भूकंप, तटीय क्षेत्रों में सुनामी का खतरा, देश में चौथी बार भूकंप

टोक्यो जापान में आज सुबह फिर तेज झटके महसूस किए गए. समुद्र में आया 6.7 मैग्नीट्यूड का भूकंप इतना जोरदार था कि तटीय इलाकों से लेकर दूर बसे शहरों तक धरती हिल गई. भारतीय समय के मुताबिक यह भूकंप सुबह 8:14 बजे आया. इसकी गहराई 10.7 किलोमीटर थी, जो इसे खतरनाक बनाती है. भूकंप तट के करीब आया, और झटकों की तीव्रता देखकर कई जगह लोग घरों से बाहर भागते दिखे. दुकानों और दफ्तरों में अलार्म बजा दिए गए. जापान में भूकंप के बाद सुनामी की कहां चेतावनी? जापानी मीडिया आउटलेट के मुताबिक भूकंप के बाद जापान मौसम एजेंसी ने 1 मीटर तक ऊंची लहरें आने की चेतावनी जारी की है. कई तटीय इलाकों में दोपहर तक लगातार अलर्ट दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक होक्काइडो सेंट्रल पैसिफिक कोस्ट, आओमोरी प्रीफेक्चर, इवाते प्रीफेक्चर और मियागी प्रीफेक्चर में सुनामी की चेतावनी दी गई. बताया जा रहा है कि ये एक मीटर तक ऊंची हो सकती हैं. इसी हफ्ते आए कई भूकंप जापान इस हफ्ते भूकंपों की सीरीज से जूझ रहा है. सोमवार को 7.6 मैग्नीट्यूड का बड़ा भूकंप आया, जिसमें 50 से ज्यादा लोग घायल हुए. सड़कें टूटीं, इमारतें हिली, और छोटे सुनामी वेव्स भी दिखे. मंगलवार को होंचो शहर में 6.7 मैग्नीट्यूड के झटके महसूस किए गए. बुधवार को आओमोरी और होक्काइडो में 6.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया. अब शुक्रवार को फिर 6.7, यानी जापान इस सप्ताह चौथे दिन कांप चुका है. जापान ने जारी की बड़ी चेतावनी सोमवार के भूकंप के बाद जापान एजेंसी ने दुर्लभ ‘मेगाक्वेक एडवाइजरी’ जारी कर दी है. एजेंसी का कहना है कि अगले एक हफ्ते में 8.0 या उससे बड़ा भूकंप आने की संभावना बढ़ गई है. 2011 का विनाशकारी 9.0 भूकंप भी इसी पैटर्न की तरह था. जापान की टेक्टॉनिक प्लेट्स इस समय भारी दबाव में हैं, खासकर होक्काइडो-सानरिकु तट के पास. आज आए भूकंप से क्या नुकसान हुआ? अभी तक किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं मिली है. फिलहाल भूकंप के तुरंत बाद कई ट्रेनें रोक दी गईं. तटीय हाइवे बंद होने लगे हैं. वहीं स्थानीय. प्रशासन अलर्ट पर है. लोग अपने घरों से तुरंत बाहर निकल आए और खुले इलाके में जमा हो गए. सरकार ने कहा है कि हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है.

रिक्टर स्केल 6.1: सिंदिर्गी भूकंप ने हिला दिया तुर्की, अभी तक कोई हताहत नहीं, नुकसान की आशंका

सिंदिर्गी तुर्की में भोरे-भोरे जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्कैल पर इसकी तीव्रता करीब 6.1 थी. इससे भारी नुकसान की आशंका है. यह भूकंप पूर्वी तुर्की के इलाके में आई है. स्थानीय समय के अनुसार सोमवार देर पूर्वी तुर्की के सिंदिर्गी शहर में यह भूंकप आया. बीते तीन महीनों में इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाला दूसरा बड़ा भूकंप है. तुर्की की आपदा और आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (AFAD) के अनुसार भूकंप स्थानीय समयानुसार रात 10:48 बजे (1948 GMT) आया. इसका असर देश की आर्थिक राजधानी इस्तांबुल और पर्यटक स्थल इजमिर तक महसूस किया गया. अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. आंतरिक मामलों के मंत्री अली येरलिकाया ने बताया कि अगस्त में आए पिछले भूकंप के बाद खाली किए गए तीन भवनों और एक दुकान के ढहने की सूचना है, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई. सिंदिर्गी, इजमिर से लगभग 138 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में पहाड़ी क्षेत्र में बसा एक छोटा शहर है, जो भूकंपीय गतिविधियों के लिए संवेदनशील है. अगस्त में भी आया था भूकंप इससे पहले 10 अगस्त को सिंदिर्गी में 6.1 तीव्रता के भूकंप ने एक व्यक्ति की जान ले ली थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे. तुर्की भौगोलिक रूप से कई फॉल्ट लाइनों से होकर गुजरता है, जिसके कारण यह क्षेत्र भूकंपों के लिए अत्यधिक संवेदनशील है. फरवरी 2023 में दक्षिण-पश्चिम तुर्की में आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने अंताक्या (प्राचीन शहर एंटिओक) को तबाह कर दिया था, जिसमें कम से कम 53,000 लोगों की मौत हुई थी. इसके अलावा जुलाई की शुरुआत में इसी क्षेत्र में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और 69 लोग घायल हुए थे. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं. भूकंप के बाद लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है.