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जापान में भूकंप से मची हलचल, बोनिन द्वीप क्षेत्र में 6.3 मैग्नीट्यूड के झटके

टोक्यो  जापान के बोनिन द्वीप समूह क्षेत्र में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया है. धरती के अंदर 7 प्लेट ऐसी होती हैं जो लगातार घूम रही हैं. ये प्लेट जिन जगहों पर अधिक टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहते हैं।  बता दें, बार-बार टकराने से प्लेट के कोने मुड़ते हैं. जब प्रेशर ज्यादा बनने लगता है कि तो प्लेट टूटने लगती हैं. इनके टूटने के कारण अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है. 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।  भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. 7.0 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप को आमतौर पर खतरनाक माना जाता है, वहीं, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो भूकंप कहा जाता हैं, जिन्हें कई लोग महसूस भी नहीं कर पाते हैं।  इस बीच, शनिवार को वानुआतू द्वीप में भी भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए थे. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.1 मापी गई. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप 24 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 1 मिनट पर आया. वानुआतू, दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह देश है। 

दक्षिण प्रशांत के वानुअतु में भूकंप से हड़कंप, सुबह महसूस हुए तेज झटके

पोर्ट-विला  वानुआतू द्वीप में भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए हैं. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.1 मापी गई है. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप 24 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 1 मिनट पर आया. वानुआतू, दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह देश है. यह भूकंप दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित वानुआतू के कई द्वीपों को प्रभावित कर सकता है।  यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, उसी क्षेत्र में लगभग 25 सेकंड के अंतराल पर 6.9 तीव्रता का एक और भूकंप भी दर्ज किया गया।  पहली भूकंप रिपोर्ट में भूकंप का केंद्र सोला, वानुअतु से लगभग 200 किमी पश्चिम में 10 किमी की गहराई पर दर्ज किया गया. वहीं, दूसरी रीडिंग में भूकंप का केंद्र पोर्ट-ओलरी के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में लगभग 197 किमी दूर, 10 किमी की गहराई पर था।  दोनों रीडिंग दक्षिण प्रशांत के एक ही हिस्से में उथली भूकंपीय गतिविधि की ओर इशारा करती हैं।  भूकंप के बाद वानुअतु में भूकंप के तेज झटकों के बाद जान-माल के नुकसान या इमारतों को पहुंची क्षति के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।  सुनामी की स्थिति के बारे में भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है.  वानुआतू दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्विपीय देश है. वानुआतू ऑस्ट्रेलिया के पूर्व और फिजी के पश्चिम में पड़ता है. यह कई छोटे बड़े द्वीपों से मिलकर बना है. वानुआतू ऑस्ट्रेलिया से लगभग 1,750 किलोमीटर पूर्व में स्थित है।  क्यों आते हैं भूकंप पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी और छोटी प्लेटों में बंटी हुई हैं. ये प्लेटें लगातार चलती रहती हैं लेकिन इनकी गति बहुत धीमी रहती है. जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे के खिलाफ रगड़ खाती हैं, तो इनमें भारी दबाव और ऊर्जा पैदा होती है. जब यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, तो धरती हिलने लगती है। 

भूकंप के तेज झटकों से दहला तिब्बत

ल्हासा तिब्बत में रात करीब 8:03 बजे भूकंप आया। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.0 मापी गई। भूकंप का केंद्र जमीन से 173 किलोमीटर की गहराई में था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने यह जानकारी दी। पिछले महीने भी आया था भूकंप तीन सितंबर को भी तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। तब भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.0 मापी गई गई थी। भूकंप के झटके दोपहर करीब 1:46 बजे दर्ज किए गए। भूकंप का केंद्र 31.479 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 80.370 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। इसकी गहराई जमीन के अंदर करीब 14 किलोमीटर बताई गई। भूकंप का लोकेशन तिब्बत क्षेत्र में दर्ज किया गया। पहले ही त्रासदी की मार झेल रहा तिब्बत 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस हुए थे, वहीं इसके बाद तिब्बत को बाढ़ की मार झेलनी पड़ी है। चीन सीमा से जुड़े इलाके में बड़े पैमाने पर तबाही देखने को मिली है। क्यों आते हैं भूकंप? धरती के भीतर सात प्लेट्स हैं, जो लगातर घूमती रहती हैं। जिस स्थान पर प्लेट्स की टक्कर होती है, उस जगह को फॉल्ट लाइन कहा जाता है। पृथ्वी के अंदर स्थित टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने, आपस में टकराने या रगड़ खाने से ऊर्जा उत्पन्न होती है। जब प्लेटों के टकराने से ज्यादा ऊर्जा निकलती है, तो धरती की सतह पर कंपन पैदा होता है। जिस स्थान पर प्लेट्स टकराती हैं, उस स्थान पर सबसे अधिक भूकंप का असर होता है। लेकिन जब भूकंप की तीव्रता अधिक होती है तो इसके झटके काफी दूर तक महसूस किए जाते हैं। कैसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता वैज्ञानिक भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल करते हैं। जब भूकंप आता है, पृथ्वी के नीचे से ऊर्जा तरंगे बाहर आती हैं। उन्हें रिक्टर स्केल से मापा जाता है। इसके बाद ही यह पता लगता है कि भूकंप की तीव्रता कितनी थी और इसका केंद्र कहां पर था।

बलोचिस्तान में भूकंप के तेज झटके, आसपास के इलाकों में भी महसूस हुई हलचल

 खुजदार 17 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 10:06-10:07 बजे पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में खुजदार शहर से लगभग 48 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में 5.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. कुछ एजेंसियों ने इसे 5.6 से 5.9 के बीच बताया है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह भूकंप बहुत उथला था- सिर्फ 10 किलोमीटर गहराई पर. उथले भूकंप समान तीव्रता वाले गहरे भूकंपों की तुलना में सतह पर कहीं ज्यादा जोरदार झटके पैदा करते हैं।  इसलिए यह झटका खुजदार और आसपास के बड़े क्षेत्र में साफ महसूस किया गया होगा. पाकिस्तान मौसम विभाग (पीएमडी) के अनुसार केंद्र 28.02 उत्तर और 66.20 पूर्व अक्षांश-देशांतर पर था. भूकंप की गहराई उसके असर को बहुत प्रभावित करती है. 10 किलोमीटर जैसी उथली गहराई का मतलब है कि ऊर्जा धरती की सतह के काफी करीब छूटी. इससे स्थानीय स्तर पर तेज हिलना, इमारतों में दरारें और लोगों में घबराहट पैदा हो सकती है।  गहरे भूकंप (70 किलोमीटर से ज्यादा) की ऊर्जा ज्यादा फैल जाती है और सतह पर कम असर करती है. इस बार खुजदार से झटके पहुंचने में महज 14 सेकंड का समय अनुमानित है. खारान और कलात जैसे शहरों में भी कुछ सेकंड में झटके पहुंचे होंगे. पिछले 30 दिनों में इस क्षेत्र में यही एकमात्र दर्ज भूकंप है. तीव्रता के हिसाब से सबसे बड़ा।  क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति और कारण बलोचिस्तान भारतीय, यूरेशियन और अरेबियन टेक्टोनिक प्लेट्स के मिलन क्षेत्र में आता है. इन प्लेट्स के लगातार दबाव और रगड़ से तनाव जमा होता रहता है. जब तनाव अचानक निकलता है तो भूकंप आता है. खुजदार के आसपास सक्रिय फॉल्ट लाइनें हैं. यहां पहले भी 5 से ऊपर के भूकंप आ चुके हैं. 6.0 या उससे ऊपर के बड़े भूकंप कम होते हैं, लेकिन 5.5-5.9 वाले झटके समय-समय पर आते रहते हैं. यह घटना क्षेत्र की सक्रिय भूकंपीय प्रकृति को फिर याद दिलाती है।  उथली गहराई के कारण खुजदार शहर और आसपास के गांवों में झटके जोरदार रहे होंगे. लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर जमा हुए होंगे. शुरुआती रिपोर्टों में बड़े नुकसान या हताहतों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कमजोर मकानों में छोटी-मोटी क्षति हो सकती है. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. आफ्टरशॉक्स यानी बाद के छोटे झटके भी आ सकते हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. सुरक्षित जगह पर रहें, भारी सामान से दूर रहें और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। 

तुर्की में भूकंप से कांपी धरती, 5.8 तीव्रता के झटकों से दियारबाकिर समेत कई शहर हिले

अदियामान  तुर्की में गुरुवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. शुरुआती अनुमान के मुताबिक भूकंप की तीव्रता 5.8 थी. दियारबाकिर, अदियामान और सानलिउर्फा समेत आसपास के कई प्रांतों में लोगों ने झटके महसूस किए. शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक दियारबाकिर में भूकंप का असर ज्यादा महसूस हुआ।  शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप की तीव्रता 5.5 बताई गई थी, जिसे बाद में 5.8 बताया गया. फिलहाल भूकंप से हुए नुकसान या किसी के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई है. भूकंप से जुड़ी ज्यादा जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।  एजेंसी के मुताबिक इसके झटके शानलिउर्फा के साथ अदियामान, मालट्या, दियारबाकिर और गाजियांटेप में भी महसूस किए गए. AFAD ने कहा कि फिलहाल किसी तरह की नकारात्मक स्थिति की जानकारी नहीं है और प्रभावित इलाकों में फील्ड स्कैनिंग जारी है।  अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल किसी के मारे जाने या घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है. प्रशासन की टीमें अलग-अलग इलाकों में जाकर हालात का जायजा ले रही हैं. भूकंप के बाद किसी बड़े नुकसान की जानकारी सामने आती है या नहीं, इसे लेकर निगरानी जारी है।  संवेदनशील इलाकों में से एक पूर्वी तुर्किए दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप-संवेदनशील इलाकों में से एक है। यहां से ईस्ट एनाटोलियन फॉल्ट गुजरती है और यह एनाटोलियन, अरेबियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा के पास स्थित है। विनाशकारी भूकंपों का इतिहास इस इलाके में विनाशकारी भूकंपों का लंबा इतिहास रहा है। इनमें सबसे प्रमुख फरवरी 2023 में कहरामनमारस प्रांत में आया भूकंप था, जिसमें अकेले तुर्किए में 53,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और यह सदी के सबसे घातक भूकंपों में से एक माना जाता है।

वेनेजुएला आपदा: ला गुआइरा में भारी तबाही, राहत कार्यों में लापरवाही के आरोप

कराकास  वेनेजुएला में बीते दिनों आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने भयंकर तबाही मचाई है। यहां मरने वालों और घायलों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,430 हो गई है, जबकि 3,200 से अधिक लोग घायल हैं और करीब 50,000 लोग अभी भी लापता हैं। इस विनाशकारी भूकंप में सबसे अधिक ला गुआइरा राज्य प्रभावित हुआ है। यहां हर तरफ मलबे और सड़ते शवों की दुर्गंध फैली हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद पहले 72 घंटे जीवित लोगों को खोजने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। वह समय अब समाप्त हो चुका है। जीवित लोगों की खोज अब शवों की खोज में बदल गई है। सेल्फी लेते नजर आएं अधिकारी भूकंप के बीच सरकारी संवेदनहीनता की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। एक तरफ जहां हजारों लोग मलबे के नीचे दबे हैं, लाशें सड़ रही हैं। वहीं दूसरी तरफ आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए सरकारी कर्मचारी और अधिकारी ध्वस्त इमारतों के सामने खड़े होकर 'सेल्फी' खींचते नजर आए। राहत कार्यों में सरकार द्वारा ढिलाई के बीच हद तो तब हो गई जब सरकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित ला गुआइरा क्षेत्र में आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया और मलबे से अपनों की जान बचाने के लिए जुटे स्थानीय स्वयंसेवकों के लिए भी 'सुरक्षित प्रवेश पास (परमिट)' लेना अनिवार्य कर दिया। जिसको लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा और कहा कि यहां अधिकारी मदद के लिए सेल्फी लेने के लिए आए थे। सड़ते शवों क दुर्गंध भीषण गर्मी में सड़ते शवों की दुर्गंध फैलने के कारण अधिकाधिक लोग मास्क पहने हुए हैं। जो लोग बच गए उनकी कहानियां एक मां को अपनी बेटी का शव कराकस के मुर्दाघर तक ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। बुधवार को ला गुआइरा में उनके घर के मलबे के गिरने से उनकी बेटी और दामाद की मौत हो गई। उन्होंने एएफपी को बताया, "हमने उन्हें खुद बाहर निकाला। कोई मदद नहीं आई। शवों के तेजी से सड़ने के कारण दंपति का अंतिम संस्कार बिना किसी शोक सभा के किया जाएगा। आखिर वे किस बात का इंतजार कर रहे हैं? वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद जहां एक तरफ लोग अपनों को खोने के गम में डूबे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन की सुस्ती ने इस दर्द को गुस्से में बदल दिया है। कैराबलेडा के समुद्रतटीय कस्बे में मलबे के बीच अपनों को तलाश रही माइलेडी रोमेरो ने कहा, "वहाँ कल रात से लाशों का ढेर लगा हुआ है। उन शवों में मासूम नवजात शिशु भी हैं। कल रात 8 बजे तक वहां मलबे के नीचे लोग ज़िंदा थे, चिल्ला रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बचाने की कोई जरूरत ही नहीं समझी। हमने अपने स्तर पर कई लाशें बाहर निकाली हैं, लेकिन उन्हें निकालने में भी अधिकारियों ने हमारी कोई मदद नहीं की। आखिर वे किस बात का इंतजार कर रहे हैं।" हालांकि, अमेरिकासहित 21 देश राहत दल खोज अभियान में जुटे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार इस आपदा से करीब 67 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

वेनेजुएला भूकंप: 1000 से अधिक इमारतें ढहीं, राहत-बचाव कार्य जारी

नई दिल्ली दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला में 25 जून को भूकंप के दो झटके हजारों लोगों की जिंदगियां निगल गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस भूकंप में 1430 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने आज सुबह कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब भी मलबे से लाशों पर लाशें निकल रही हैं। वहीं देश के उत्तरी तट के बाद अब भी लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी कराकास और माराके में भी 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे। भूकंप में 3360 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को 250 के करीब लोगों को जिंदा निकाला गया है। खुद ही परिजनों को तलाश रहे लोग वेनेजुएला में राहत टीमों की कमी की वजह से लोगों को खुद ही मलबा हटाकर परिजनों की तलाश करनी पड़ रही है। वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा है कि लोग ला गुआइरा राज्य की यात्रा से बचें। उन्होंने कहा कि यह समय बेहद संवेदनशील है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना है। उन्होंने कहा कि तेजी से पुलिस, सिविल प्रोटेक्शन, दमकल की टीमें भेजने के लिए रास्ते खाली रखना जरूरी है। जमींदोज हो गईं 1000 इमारतें बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के उत्तरी तटीय क्षेत्र और राजधानी काराकास में भूकंप के कारण सैकड़ों इमारतें, कई अस्पताल और शॉपिंग सेंटर पूरी तरह जमींदोज हो गये हैं। इसके अलावा करीब 1,000 अन्य बुनियादी ढांचागत स्थलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा तबाही काराकास के उत्तर में स्थित ला गुएरा क्षेत्र में हुई है, जहां देश का मुख्य बंदरगाह और सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है। ला गुएरा में अब तक मलबे से 243 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इस आपदा के बाद वेनेजुएला में अंतरराष्ट्रीय राहत और बचाव दल पहुंचना शुरू हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेचर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर वैश्विक सहायता अभियान चलाने की घोषणा की है। ब्रिटेन, अमेरिका, नीदरलैंड, मैक्सिको और स्विट्जरलैंड ने अपनी खोजी और बचाव टीमें, प्रशिक्षित श्वान दल और ड्रोन भेजे हैं। अमेरिका ने इसके साथ ही युद्धपोत, परिवहन विमान और 15 करोड़ डॉलर (लगभग 1,415 करोड़ 40 लाख रुपये) की वित्तीय सहायता देने का भी एलान किया है। आंतरिक मामलों के मंत्री डियोसडाडो काबेलो के अनुसार, भूकंप का सबसे ज्यादा असर काराकास के लॉस पालोस ग्रांडेस और अल्तामिरा इलाकों के अलावा ला गुएरा, अरागुआ, काराबोबो और फाल्कन जैसे उत्तरी तटीय राज्यों पर पड़ा है।

7.5 तीव्रता के भूकंप ने वेनेजुएला को हिलाया, इमारतें ढहीं और इंटरनेट ठप; हजारों मौतों का डर

काराकास वेनेजुएला में आए लगातार दो जोरदार भूकंपों ने भारी तबाही की आशंका पैदा कर दी है. राजधानी कराकास सहित कई इलाकों में इमारतों के ढहने की खबरें सामने आई हैं, जबकि हजारों लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए. USGS यानी यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने चेतावनी दी है कि इस आपदा में मरने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो सकती है।  वेनेजुएला में पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था, जिसका केंद्र वेनेजुएला के कैरेबियाई तट पर स्थित मोरोन इलाके के पश्चिम में था। भूकंप की गहराई करीब 22 किलोमीटर दर्ज की गई. इसके कुछ ही वक्त बाद एक और शक्तिशाली झटका महसूस किया गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।  अमेजन शहर तक भूकंप का असर एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले भूकंपों ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. यहां तक कि करीब 1,700 किलोमीटर दूर ब्राजील के अमेजन जैसे शहरों में भी इमारतों को खाली कराना पड़ा. बुधवार देर रात, कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने कहा कि वह देश को संबोधित करने की तैयारी कर रही थीं।  भूकंप के तीन घंटे के अंदर देश को संबोधित न करने और उस दौरान सरकार की ओर से किसी के घायल होने या मारे जाने की कोई रिपोर्ट न दिए जाने पर राजनेताओं और वेनेज़ुएला के लोगों ने रोड्रिग्ज की आलोचना की।  वेनेजुएला में जबरदस्त भूकंप के बाद अफरा-तफरी और भारी तबाही जैसे हालात वेनेजुएला की राजधानी में आए भूकंप के बाद तबाही जैसे हालात हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज में वेनेजुएला के उत्तरी तट पर एक के बाद एक आए जबरदस्त भूकंप के कारण डरे हुए लोग और गिरी हुई इमारतें दिखाई दे रही हैं।  वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने की हेल्थ वर्कर्स से काम पर लौटने की अपील वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने डॉक्टरों और नर्सों से कहा है कि वे भूकंप में घायल हुए लोगों के इलाज में मदद के लिए स्थानीय अस्पतालों और इमरजेंसी रूम में रिपोर्ट करें।  वेनेज़ुएला के अख़बार 'एल नैशनल' के मुताबिक, देश को संबोधित करते हुए रोड्रिगेज ने कहा, "मैं डॉक्टरों, नर्सों और सभी हेल्थ वर्कर्स से काम पर लौटने की अपील करती हूं, जिससे हम उन लोगों का इलाज कर सकें, जिन्हें अस्पतालों और प्राइवेट हेल्थ सेंटरों के इमरजेंसी रूम में लाया जा रहा है।  रोड्रिगेज ने कहा कि राष्ट्रीय, राज्य और नगरपालिका अधिकारी इस संकट से निपटने के लिए काम कर रहे हैं और देश के सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्यों में सबसे पहले मदद भेजी जा रही है।   अमेरिकी ऊर्जा मंत्री ने वेनेज़ुएला के प्रति संवेदना जताई अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट भी उन विदेशी अधिकारियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने वेनेज़ुएला के साथ एकजुटता दिखाई है।  उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "हम उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं, जिन्होंने अपनों को खोया है. इस मुश्किल वक्त में प्रभावित सभी समुदायों के लिए हिम्मत, सुरक्षा और जल्द ठीक होने की कामना करते हैं।   वेनेजुएला में भूकंप के बाद इमरजेंसी का ऐलान  वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने जबरदस्त भूकंपों के बाद इमरजेंसी का ऐलान किया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप के बाद अपनी में रोड्रिगेज ने मौतों की पुष्टि की, लेकिन यह नहीं बताया कि कितने लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही, उन्होंने खोज और बचाव कार्यों की देखरेख के लिए एक हाई-लेवल टास्क फोर्स बनाने का भी ऐलान किया है।    भूकंप के बाद पूरे वेनेजुएला में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर पड़ा असर वॉचडॉग 'NetBlocks' के मुताबिक, भूकंप से बिजली और टेलीकम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने के बाद वेनेजुएला में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर बुरा असर पड़ा है. अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती भी हुई है या नहीं।  कनेक्टिविटी में रुकावट की वजह से आने वाले कुछ घंटों में हॉटस्पॉट से मिलने वाली जानकारी और वीडियो की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है. मेक्सिको ने वेनेज़ुएला के साथ जताई एकजुटता  मेक्सिको के विदेश मंत्रालय ने वेनेज़ुएला में भूकंप आने के बाद वहां के लोगों के प्रति सहानुभूति जताई है. इसके साथ ही मेक्सिकों ने भूकंप से हुए नुकसान खेद प्रकट की है।  पल भर में बदल गई तीव्रता US जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने शुरू में कहा कि पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था, जिसे बाद में बदलकर 7.2 कर दिया गया. इसका केंद्र कैरेबियन तट पर बसे मोरोन इलाके के पश्चिम में था, जो काराकस से करीब 168 किलोमीटर पश्चिम में है. भूकंप की गहराई 22 किलोमीटर थी।  USGS ने ठीक एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता के और भी बड़े भूकंप की जानकारी दी. दूसरे भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी और इसका केंद्र मोरोन से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था।  दंग रह गए लोग वेनेजुएला में आए ये भूकंप एक सदी से भी ज्यादा वक्त में वेनेजुएला में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से थे. राजधानी काराकस में लोग हिलती हुई इमारतों से बाहर निकल आए. कई लोग यह देखकर हैरान रह गए कि पूरी की पूरी दीवारें गिर गई थीं और सड़क से ही घर का फर्नीचर दिखाई दे रहा था. राजधानी के दो इलाकों में धूल के गुबार भी देखे गए, जहां आमतौर पर रेस्तरां और अन्य कारोबारों में काफी चहल-पहल रहती है।     

‘महा-भूकंप’ का खतरा? 1000 वर्षों से जमा हो रहा तनाव लॉस एंजेलिस के लिए बन सकता है चुनौती

 कैलिफोर्निया वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में चेतावनी दी है कि दक्षिणी कैलिफोर्निया की दो सबसे प्रमुख फॉल्ट लाइनों सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो  में पिछले 1000 सालों की तुलना में इस समय सबसे अधिक दबाव जमा हो चुका है. यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के विशेषज्ञों के नेतृत्व में किए गए इस स्टडी ने भूकंपीय खतरों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।  शोधकर्ताओं ने एक आधुनिक 'फिजिक्स-बेस्ड मॉडल' का उपयोग करके साल 1000 ईस्वी (CE) से लेकर वर्तमान समय तक इन फॉल्ट्स पर बढ़ते दबाव को ट्रैक किया है. इस स्टडी के परिणाम बताते हैं कि लॉस एंजेलिस और रिवरसाइड जैसे घने बसे हुए महानगरीय क्षेत्रों के नीचे जमीन के भीतर एक बहुत बड़ा खतरा पनप रहा है, जो कभी भी एक बड़े विनाशकारी भूकंप का रूप ले सकता है।  क्या है यह नया शोध और कैसे मापा गया दबाव? इस ऐतिहासिक शोध में वैज्ञानिकों ने पारंपरिक तरीकों से हटकर एक खास कंप्यूटर मॉडल का इस्तेमाल किया है, जो पृथ्वी के भीतर होने वाली भौतिक हलचलों और टेक्टोनिक प्लेटों के दबाव को समझता है. इस मॉडल की मदद से पिछले एक हजार साल के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिससे यह पता चल सके कि समय के साथ इन फॉल्ट्स के अलग हिस्सों पर कितना दबाव बढ़ा या घटा है।  स्टडी में पाया गया कि सैन एंड्रियास फॉल्ट के 'मोजावे साउथ' हिस्से पर दबाव बढ़कर 2.8 मेगापास्कल (MPa) तक पहुंच गया है. वहीं दूसरी ओर, सैन जैसिंटो फॉल्ट की 'बरनार्डिनो स्ट्रैंड' पर यह दबाव और भी अधिक यानी 3.6 मेगापास्कल (MPa) दर्ज किया गया है।  वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले 1000 वर्षों के इतिहास में इन दोनों जगहों पर दबाव का यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है. यह दबाव इस बात का संकेत है कि धरती के नीचे की चट्टानें अब अपनी सहनशीलता की आखिरी सीमा पर हैं।  कजोन पास: महा-भूकंप का संभावित केंद्र इस पूरे शोध में सबसे चिंताजनक बात 'कजोन पास' को लेकर सामने आई है. कजोन पास वह भौगोलिक स्थान है जहां सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो फॉल्ट्स एक-दूसरे के बेहद करीब आते हैं. वैज्ञानिक इस जगह को एक मुख्य 'जंक्शन' या संपर्क बिंदु मान रहे हैं।  कजोन पास के कारण दोनों फॉल्ट्स आपस में इस तरह जुड़ सकते हैं कि यदि किसी एक फॉल्ट पर भूकंप की शुरुआत होती है, तो उसका कंपन या दरार दूसरे फॉल्ट को भी सक्रिय कर देगी.अगर ऐसा होता है, तो यह कई दरारों का एक साथ टूटना होगा, जो इतिहास के किसी भी सामान्य भूकंप से कहीं ज्यादा बड़ा और विनाशकारी हो सकता है।  दो बड़ी फॉल्ट लाइनों के एक साथ मिलने से पैदा होने वाला भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.5 या उससे भी अधिक तीव्रता का हो सकता है, जिससे दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक बहुत बड़े हिस्से में भारी तबाही मच सकती है।  दशकों की शांति बढ़ा रही है बड़ा खतरा कैलिफोर्निया के इतिहास पर नजर डालें तो सैन एंड्रियास के मोजावे साउथ हिस्से में साल 1857 के बाद से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है. वहीं सैन जैसिंटो की बरनार्डिनो शाखा में आखिरी बार साल 1968 में हलचल देखी गई थी. पिछले कई दशकों या कहें तो सदियों की यह शांति वास्तव में कोई राहत की बात नहीं है, बल्कि यह एक बड़े खतरे की दस्तक है।  जब दो टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में रगड़ खाती हैं और उनके बीच की फॉल्ट लाइन हिलती नहीं है, तो वहां लगातार ऊर्जा और दबाव जमा होता रहता है. इसे सिस्मिक गैप कहा जाता है. चूंकि पिछले 150 से अधिक सालों से मोजावे साउथ सेगमेंट पूरी तरह शांत है, इसलिए वहां इतनी भारी मात्रा में दबाव जमा हो चुका है कि जब भी यह फॉल्ट टूटेगा, तो इससे निकलने वाली ऊर्जा अकल्पनीय होगी।  यह भविष्यवाणी नहीं, बल्कि तैयारी की चेतावनी है इस शोध की मुख्य लेखिका लिलियन बर्कहार्ड ने स्पष्ट किया है कि उनके इस स्टडी का उद्देश्य किसी निश्चित तारीख या समय पर भूकंप आने की भविष्यवाणी करना बिल्कुल नहीं है. वर्तमान विज्ञान के पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जो यह बता सके कि भूकंप ठीक किस दिन या किस समय आएगा।  बर्कहार्ड के अनुसार, इस रिसर्च का असली मकसद प्रशासन और आम जनता को आने वाले कल के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है. यह डेटा लॉस एंजेलिस, रिवरसाइड और सैन बर्नार्डिनो जैसे शहरों के लिए आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन में बेहद मददगार साबित होगा।  इस जानकारी का उपयोग करके स्थानीय सरकारें अपने बिल्डिंग कोड को और सख्त बना सकती हैं, ताकि भविष्य में बनने वाली इमारतें इतने ऊंचे दबाव से पैदा होने वाले झटकों को झेल सकें. इसके अलावा, पुराने बुनियादी ढांचे, जैसे कि पुल, पानी की पाइपलाइनें और बिजली ग्रिड को मजबूत करने के लिए भी इस डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

भूकंप के तेज झटकों से कांपा इंडोनेशिया, पालू में अफरा-तफरी और संपत्तियों को क्षति

पालू  इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में मंगलवार (16 जून 2026) को आए 6.7 तीव्रता के बेहद शक्तिशाली भूकंप ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. इस तेज झटके के कारण मध्य सुलावेसी प्रांत की राजधानी पालू और उसके आसपास के इलाकों में व्यापक स्तर पर नुकसान की खबरें आ रही हैं।  भूकंप इतना जोरदार था कि लोग डर के मारे अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकलकर खुले मैदानों की तरफ भागने लगे. डराने वाली बात यह है कि पालू वही शहर है जिसने करीब आठ साल पहले एक बेहद विनाशकारी भूकंप और सुनामी का सामना किया था, जिसके जख्म आज भी यहां के लोगों के दिलों में ताजा हैं. इस नए झटके ने एक बार फिर स्थानीय निवासियों के मन में पुरानी और खौफनाक यादों को जिंदा कर दिया है।  अस्पतालों से मरीजों को निकाला गया बाहर, होटल और इमारतों को पहुंचा नुकसान भूकंप के तेज झटकों को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से पालू शहर के कई अस्पतालों से मरीजों को तुरंत बाहर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया. सोशल मीडिया और समाचार एजेंसियों द्वारा जारी तस्वीरों में देखा जा सकता है कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को उनकी ड्रिप और स्ट्रेचर के साथ खुले आसमान के नीचे ले जा रहे हैं।  शहर के एक प्रतिष्ठित फोर-स्टार होटल के जनरल मैनेजर एफेंडी नताली ने बताया कि भूकंप आते ही होटल के सभी कमरों को खाली करा लिया गया था. हालांकि अचानक आए इस झटके से मेहमानों के बीच भारी अफरा-तफरी और घबराहट का माहौल बन गया था, लेकिन राहत की बात यह रही कि सभी सुरक्षित हैं और होटल की इमारत को केवल मामूली नुकसान पहुंचा है. शहर के अन्य हिस्सों से भी छतों के गिरने, दीवारों में दरारें आने और सड़कों पर मलबा बिखरने की तस्वीरें सामने आई हैं।  सुनामी का कोई खतरा नहीं, लेकिन प्रशासन ने जारी की आफ्टरशॉक्स की चेतावनी अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र पालू शहर से लगभग 43 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर था. मुख्य भूकंप के बाद इलाके में कई आफ्टरशॉक्स भी महसूस किए गए, जिनमें से सबसे शक्तिशाली झटका 5.2 तीव्रता का मापा गया।  एहतियात के तौर पर तटीय इलाकों के पास रहने वाले लोग समुद्र से दूर सुरक्षित स्थानों पर चले गए ताकि किसी संभावित सुनामी से बचा जा सके. इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकीय एजेंसी (BMKG) ने साफ किया है कि इस भूकंप से सुनामी का कोई खतरा नहीं है, लेकिन उन्होंने लोगों को सचेत रहने की सलाह दी है क्योंकि आने वाले दिनों तक आफ्टरशॉक्स का सिलसिला जारी रह सकता है।  राहत और बचाव कार्य जारी, नुकसान का आकलन कर रही हैं एजेंसियां इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने एक बयान में कहा है कि वे वर्तमान में प्रभावित क्षेत्रों से नुकसान, संभावित हताहतों और विस्थापित हुए लोगों के बारे में सटीक डेटा जुटाने में लगे हैं. मलबे को हटाने और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए राहत दल को सक्रिय कर दिया गया है।  चूंकि इंडोनेशिया 'पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, इसलिए यहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं. फिलहाल प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है और लोगों से शांत रहने की अपील की जा रही है।