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‘महा-भूकंप’ का खतरा? 1000 वर्षों से जमा हो रहा तनाव लॉस एंजेलिस के लिए बन सकता है चुनौती

 कैलिफोर्निया वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में चेतावनी दी है कि दक्षिणी कैलिफोर्निया की दो सबसे प्रमुख फॉल्ट लाइनों सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो  में पिछले 1000 सालों की तुलना में इस समय सबसे अधिक दबाव जमा हो चुका है. यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के विशेषज्ञों के नेतृत्व में किए गए इस स्टडी ने भूकंपीय खतरों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।  शोधकर्ताओं ने एक आधुनिक 'फिजिक्स-बेस्ड मॉडल' का उपयोग करके साल 1000 ईस्वी (CE) से लेकर वर्तमान समय तक इन फॉल्ट्स पर बढ़ते दबाव को ट्रैक किया है. इस स्टडी के परिणाम बताते हैं कि लॉस एंजेलिस और रिवरसाइड जैसे घने बसे हुए महानगरीय क्षेत्रों के नीचे जमीन के भीतर एक बहुत बड़ा खतरा पनप रहा है, जो कभी भी एक बड़े विनाशकारी भूकंप का रूप ले सकता है।  क्या है यह नया शोध और कैसे मापा गया दबाव? इस ऐतिहासिक शोध में वैज्ञानिकों ने पारंपरिक तरीकों से हटकर एक खास कंप्यूटर मॉडल का इस्तेमाल किया है, जो पृथ्वी के भीतर होने वाली भौतिक हलचलों और टेक्टोनिक प्लेटों के दबाव को समझता है. इस मॉडल की मदद से पिछले एक हजार साल के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिससे यह पता चल सके कि समय के साथ इन फॉल्ट्स के अलग हिस्सों पर कितना दबाव बढ़ा या घटा है।  स्टडी में पाया गया कि सैन एंड्रियास फॉल्ट के 'मोजावे साउथ' हिस्से पर दबाव बढ़कर 2.8 मेगापास्कल (MPa) तक पहुंच गया है. वहीं दूसरी ओर, सैन जैसिंटो फॉल्ट की 'बरनार्डिनो स्ट्रैंड' पर यह दबाव और भी अधिक यानी 3.6 मेगापास्कल (MPa) दर्ज किया गया है।  वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले 1000 वर्षों के इतिहास में इन दोनों जगहों पर दबाव का यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है. यह दबाव इस बात का संकेत है कि धरती के नीचे की चट्टानें अब अपनी सहनशीलता की आखिरी सीमा पर हैं।  कजोन पास: महा-भूकंप का संभावित केंद्र इस पूरे शोध में सबसे चिंताजनक बात 'कजोन पास' को लेकर सामने आई है. कजोन पास वह भौगोलिक स्थान है जहां सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो फॉल्ट्स एक-दूसरे के बेहद करीब आते हैं. वैज्ञानिक इस जगह को एक मुख्य 'जंक्शन' या संपर्क बिंदु मान रहे हैं।  कजोन पास के कारण दोनों फॉल्ट्स आपस में इस तरह जुड़ सकते हैं कि यदि किसी एक फॉल्ट पर भूकंप की शुरुआत होती है, तो उसका कंपन या दरार दूसरे फॉल्ट को भी सक्रिय कर देगी.अगर ऐसा होता है, तो यह कई दरारों का एक साथ टूटना होगा, जो इतिहास के किसी भी सामान्य भूकंप से कहीं ज्यादा बड़ा और विनाशकारी हो सकता है।  दो बड़ी फॉल्ट लाइनों के एक साथ मिलने से पैदा होने वाला भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.5 या उससे भी अधिक तीव्रता का हो सकता है, जिससे दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक बहुत बड़े हिस्से में भारी तबाही मच सकती है।  दशकों की शांति बढ़ा रही है बड़ा खतरा कैलिफोर्निया के इतिहास पर नजर डालें तो सैन एंड्रियास के मोजावे साउथ हिस्से में साल 1857 के बाद से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है. वहीं सैन जैसिंटो की बरनार्डिनो शाखा में आखिरी बार साल 1968 में हलचल देखी गई थी. पिछले कई दशकों या कहें तो सदियों की यह शांति वास्तव में कोई राहत की बात नहीं है, बल्कि यह एक बड़े खतरे की दस्तक है।  जब दो टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में रगड़ खाती हैं और उनके बीच की फॉल्ट लाइन हिलती नहीं है, तो वहां लगातार ऊर्जा और दबाव जमा होता रहता है. इसे सिस्मिक गैप कहा जाता है. चूंकि पिछले 150 से अधिक सालों से मोजावे साउथ सेगमेंट पूरी तरह शांत है, इसलिए वहां इतनी भारी मात्रा में दबाव जमा हो चुका है कि जब भी यह फॉल्ट टूटेगा, तो इससे निकलने वाली ऊर्जा अकल्पनीय होगी।  यह भविष्यवाणी नहीं, बल्कि तैयारी की चेतावनी है इस शोध की मुख्य लेखिका लिलियन बर्कहार्ड ने स्पष्ट किया है कि उनके इस स्टडी का उद्देश्य किसी निश्चित तारीख या समय पर भूकंप आने की भविष्यवाणी करना बिल्कुल नहीं है. वर्तमान विज्ञान के पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जो यह बता सके कि भूकंप ठीक किस दिन या किस समय आएगा।  बर्कहार्ड के अनुसार, इस रिसर्च का असली मकसद प्रशासन और आम जनता को आने वाले कल के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है. यह डेटा लॉस एंजेलिस, रिवरसाइड और सैन बर्नार्डिनो जैसे शहरों के लिए आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन में बेहद मददगार साबित होगा।  इस जानकारी का उपयोग करके स्थानीय सरकारें अपने बिल्डिंग कोड को और सख्त बना सकती हैं, ताकि भविष्य में बनने वाली इमारतें इतने ऊंचे दबाव से पैदा होने वाले झटकों को झेल सकें. इसके अलावा, पुराने बुनियादी ढांचे, जैसे कि पुल, पानी की पाइपलाइनें और बिजली ग्रिड को मजबूत करने के लिए भी इस डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

भूकंप के तेज झटकों से कांपा इंडोनेशिया, पालू में अफरा-तफरी और संपत्तियों को क्षति

पालू  इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में मंगलवार (16 जून 2026) को आए 6.7 तीव्रता के बेहद शक्तिशाली भूकंप ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. इस तेज झटके के कारण मध्य सुलावेसी प्रांत की राजधानी पालू और उसके आसपास के इलाकों में व्यापक स्तर पर नुकसान की खबरें आ रही हैं।  भूकंप इतना जोरदार था कि लोग डर के मारे अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकलकर खुले मैदानों की तरफ भागने लगे. डराने वाली बात यह है कि पालू वही शहर है जिसने करीब आठ साल पहले एक बेहद विनाशकारी भूकंप और सुनामी का सामना किया था, जिसके जख्म आज भी यहां के लोगों के दिलों में ताजा हैं. इस नए झटके ने एक बार फिर स्थानीय निवासियों के मन में पुरानी और खौफनाक यादों को जिंदा कर दिया है।  अस्पतालों से मरीजों को निकाला गया बाहर, होटल और इमारतों को पहुंचा नुकसान भूकंप के तेज झटकों को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से पालू शहर के कई अस्पतालों से मरीजों को तुरंत बाहर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया. सोशल मीडिया और समाचार एजेंसियों द्वारा जारी तस्वीरों में देखा जा सकता है कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को उनकी ड्रिप और स्ट्रेचर के साथ खुले आसमान के नीचे ले जा रहे हैं।  शहर के एक प्रतिष्ठित फोर-स्टार होटल के जनरल मैनेजर एफेंडी नताली ने बताया कि भूकंप आते ही होटल के सभी कमरों को खाली करा लिया गया था. हालांकि अचानक आए इस झटके से मेहमानों के बीच भारी अफरा-तफरी और घबराहट का माहौल बन गया था, लेकिन राहत की बात यह रही कि सभी सुरक्षित हैं और होटल की इमारत को केवल मामूली नुकसान पहुंचा है. शहर के अन्य हिस्सों से भी छतों के गिरने, दीवारों में दरारें आने और सड़कों पर मलबा बिखरने की तस्वीरें सामने आई हैं।  सुनामी का कोई खतरा नहीं, लेकिन प्रशासन ने जारी की आफ्टरशॉक्स की चेतावनी अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र पालू शहर से लगभग 43 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर था. मुख्य भूकंप के बाद इलाके में कई आफ्टरशॉक्स भी महसूस किए गए, जिनमें से सबसे शक्तिशाली झटका 5.2 तीव्रता का मापा गया।  एहतियात के तौर पर तटीय इलाकों के पास रहने वाले लोग समुद्र से दूर सुरक्षित स्थानों पर चले गए ताकि किसी संभावित सुनामी से बचा जा सके. इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकीय एजेंसी (BMKG) ने साफ किया है कि इस भूकंप से सुनामी का कोई खतरा नहीं है, लेकिन उन्होंने लोगों को सचेत रहने की सलाह दी है क्योंकि आने वाले दिनों तक आफ्टरशॉक्स का सिलसिला जारी रह सकता है।  राहत और बचाव कार्य जारी, नुकसान का आकलन कर रही हैं एजेंसियां इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने एक बयान में कहा है कि वे वर्तमान में प्रभावित क्षेत्रों से नुकसान, संभावित हताहतों और विस्थापित हुए लोगों के बारे में सटीक डेटा जुटाने में लगे हैं. मलबे को हटाने और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए राहत दल को सक्रिय कर दिया गया है।  चूंकि इंडोनेशिया 'पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, इसलिए यहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं. फिलहाल प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है और लोगों से शांत रहने की अपील की जा रही है। 

केसला ब्लॉक में महसूस हुए भूकंप के झटके, लोगों ने कहा- अचानक हिलने लगी जमीन

नर्मदापुरम  नर्मदापुरम जिले के केसला ब्लॉक के ग्राम चिचवानी और छीतापुरा क्षेत्र में सोमवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। अचानक आए कंपन से ग्रामीणों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। रात करीब 9:38 बजे महसूस हुआ कंपन मौसम केंद्र भोपाल और नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, 8 जून 2026 की रात करीब 9:39 बजे भूकंप दर्ज किया गया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.8 मैग्नीट्यूड मापी गई। जबकि इसकी गहराई जमीन से लगभग 10 किलोमीटर नीचे बताई गई। छीतापुरा गांव तक महसूस हुए झटके चिचवानी गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर छीतापुरा में भी लोगों ने झटके महसूस किए। स्थानीय जनपद पंचायत सदस्य संतोष सल्लाम ने बताया कि वह रात में छत पर सो रहे थे, तभी अचानक कुछ सेकंड के लिए कंपन महसूस हुआ। शुरुआत में ऐसा लगा कि घर हिल रहा है, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई। हल्की श्रेणी का माना जाता है 3.8 मैग्नीट्यूड का भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार 3.8 मैग्नीट्यूड का भूकंप हल्की श्रेणी में आता है। ऐसे भूकंप में आमतौर पर बड़े नुकसान की संभावना कम रहती है, लेकिन इसके झटके लोगों को स्पष्ट रूप से महसूस हो सकते हैं। छत सो रहा था, अचानक से कंपन हुआ ग्राम चिचवानी से 2 किमी दूर स्थित छीतापुरा में भी झटके महसूस हुए। जनपद पंचायत सदस्य संतोष सल्लाम ने बताया रात करीब 9.30 बजे के आसपास जब में छत पर सो रहा था, तब कुछ पलभर के लिए कंपन हुआ। ऐसा लगा मानो घर हिल गया है लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ। 3.8 तीव्रता का भूकंप हल्की श्रेणी में आता है जानकारों के अनुसार 3.8 तीव्रता का भूकंप हल्की श्रेणी में आता है। इसमें आमतौर पर बड़ा नुकसान नहीं होता, लेकिन झटके साफ महसूस होते हैं। एसडीएम निलेश शर्मा ने बताया मुझे इसकी जानकारी मिली है। अधिकृत पता करके थोड़ी देर में बताऊंगा। हल्की श्रेणी का भूकंप, नुकसान की खबर नहीं विशेषज्ञों के अनुसार 3.8 तीव्रता का भूकंप हल्की श्रेणी में माना जाता है। ऐसे भूकंपों में आमतौर पर बड़े नुकसान की संभावना कम होती है, लेकिन झटके स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकते हैं। प्रशासन ने भी फिलहाल किसी तरह की क्षति की पुष्टि नहीं की है। प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट एसडीएम निलेश शर्मा ने बताया कि भूकंप की जानकारी प्राप्त हुई है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। अब तक किसी गांव से नुकसान या घायल होने की सूचना नहीं मिली है।

समंदर में उठी तबाही की आशंका! फिलीपींस में शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी चेतावनी जारी

मनीला दक्षिणी फिलीपींस के मिंडानाओ में सोमवार सुबह जोरदार भूकंप से धरती कांप उठी है। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 8.2 रही है, जिसके बाद फिलीपींस और इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में चेतावनी जारी की गई है। चेतावनी में तटीय इलाके में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा गया है। भूकंप जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर की गहराई पर था, जिससे झटके और जोर से महसूस किए गए। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) ने शुरू में इसकी तीव्रता 7.2 बताई थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 8.2 कर दिया। भूकंप के बाद अमेरिका के सुनामी चेतावनी सिस्टम ने सुनामी का अलर्ट जारी किया है। इसने चेतावनी दी कि खतरनाक लहरें इलाके के तटीय इलाकों को प्रभावित कर सकती हैं। इंडोनेशिया में भी सुनामी की चेतावनी इंडोनेशिया की जियोफिजिस्ट एजेंसी ने देश के उत्तर-पूर्वी तटीय इलाकों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की है। इसमें लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने को कहा है। इंडोनेशियाई एजेंसी ने भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.7 मापी है। फिलीपींस इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्कानोलॉजी एंड सिस्मोलॉजी ने भूकंप के 7.0 तीव्रता का होने का अनुमान लगाया है। इसने एक मीटर ऊंची सुनामी की लहरें उठने की चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने कहा है कि भूकंप के बाद ये लहरें कई घंटे तक रह सकती हैं। जापान, इंडोनेशिया समेत इन देशों में अलर्ट अलजजीरा के मुताबिक, फिलीपींस के पास आए जबरदस्त भूकंप के बाद जापान ने अपने प्रशांत महासागर तट के कुछ हिस्सों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग का अनुमान है कि जापान के कुछ इलाकों में एक मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं।  भूकंप के बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्र ने सुनामी का खतरा बताते हुए चेतावनी जारी की है. एजेंसी के मुताबिक, खतरनाक लहरें समुद्र तट पर स्थित द्वीप को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसके बाद इंडोनेशिया की जियोफिजिक्स एजेंसी ने भी देश के उत्तरपूर्वी तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की और अपने नागरिकों को सतर्क रहने के साथ-साथ निर्देशों का पालन करने की अपील की।  चेतावनी में कहा गया है कि शक्तिशाली भूकंप से काफी नुकसान हो सकता है और आने वाले घंटों और दिनों में इसके बाद तेज झटके आ सकते हैं. बीते रविवार को भी भारत समेत कई देशों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे. भारत के साथ-साथ नेपाल, चीन और भूटान में आए भूकंप की रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.3 मापी गई थी. इस भूकंप का केंद्र भूटान था।  किसी के मारे जाने की खबर नहीं इंडोनेशिया और फिलीपींस में अभी तक किसी बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। अधिकारियों ने भूकंप के केंद्र के पास जोरदार झटके आने की बात कही है, जिससे भारी नुकसान हो सकता है। लोगों से सावधान रहने को कहा गया है, क्योंकि आने वाले घंटों और झटके महसूस किए जा सकते हैं। इलाके में एजेंसियां समुद्र के जलस्तर पर नजर रख रही हैं। दक्षिणी फिलीपींस के सारांगनी प्रांत में स्थित अलाबेल के पुलिस चीफ बेंजी अंचेता ने बताया कि भूकंप के बाद स्थानीय पुलिस स्टेशन की इमारत में दरार पड़ गई। अंचेता ने बताया कि तत्काल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। उन्होंने कहा, "यह अब तक का सबसे जोरदार भूकंप है, जो हमने महसूस किया है।" 

रात 10:04 बजे कांपी पंजाब और चंडीगढ़ की जमीन, 4.3 तीव्रता के भूकंप ने बढ़ाई लोगों की चिंता

चंडीगढ़ पंजाब और चंडीगढ़ में शुक्रवार रात अचानक धरती कांपने से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। रात करीब 10 बजकर 4 मिनट पर आए भूकंप के झटके कई इलाकों में महसूस किए गए। झटके महसूस होते ही लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.3 दर्ज की गई है। भूकंप का केंद्र हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के पास बताया गया है। राहत की बात यह रही कि घटना के बाद किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई। भूकंप के झटके महसूस होने के बाद पंजाब और चंडीगढ़ के कई क्षेत्रों में लोग घरों से बाहर निकल आए। रात के समय आए इन झटकों के कारण कुछ लोगों में घबराहट देखी गई। हालांकि झटके ज्यादा देर तक नहीं रहे, लेकिन लोगों ने धरती में कंपन स्पष्ट रूप से महसूस किया। स्थानीय स्तर पर लोगों ने अपने अनुभव साझा किए और कई स्थानों पर लोग कुछ समय तक खुले स्थानों में ही रहे। कांगड़ा से पंचकूला तक कांपी धरती हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में में शुक्रवार रात 10 बजकर 4 मिनट पर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 दर्ज की गई. भूकंप का केंद्र धर्मशाला से करीब 18 किलोमीटर दूर बताया गया है।  भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए. कई इलाकों में कुछ सेकंड तक धरती हिलती महसूस हुई, जिससे लोगों में भय और दहशत का माहौल बन गया. देर रात तक लोग खुले स्थानों पर खड़े दिखाई दिए।  प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक भूकंप का असर केवल कांगड़ा तक सीमित नहीं रहा. आसपास के कई जिलों और राज्यों में भी झटके महसूस किए गए।  धर्मशाला के पास रहा भूकंप का केंद्र भूकंप का केंद्र हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला क्षेत्र के आसपास दर्ज किया गया है। धर्मशाला और उसके आसपास का इलाका भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण यहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज होते रहते हैं। इस बार आए झटकों का असर हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब और चंडीगढ़ तक महसूस किया गया। प्रशासनिक और प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार भूकंप के कारण किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है। न तो किसी बड़े हादसे की सूचना है और न ही किसी संरचनात्मक क्षति की पुष्टि हुई है। अधिकारियों द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। दो महीने पहले भी महसूस हुए थे झटके करीब दो महीने पहले भी पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में था। रिक्टर स्केल पर उसकी तीव्रता 5.9 दर्ज की गई थी। उस भूकंप का प्रभाव उत्तर भारत के कई हिस्सों तक महसूस किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार पृथ्वी की सतह सात प्रमुख और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें लगातार गतिशील रहती हैं और समय-समय पर एक-दूसरे से टकराती या खिसकती हैं। जब प्लेटों के बीच दबाव बढ़ जाता है तो उनमें ऊर्जा जमा होने लगती है। दबाव एक सीमा से अधिक होने पर यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, जिससे धरती में कंपन पैदा होता है और भूकंप आता है। यही प्रक्रिया दुनिया के अधिकांश भूकंपों का प्रमुख कारण मानी जाती है।

जापान में 7.3 तीव्रता का भूकंप, सुनामी के खतरे को लेकर अलर्ट जारी

टोक्यो   सोमवार को जापान के पूर्वोत्तर तट पर प्रशांत महासागर में 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है। भूकंप का केंद्र उत्तरी इवाते प्रांत के पास समुद्र में था। भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 4:53 बजे आया। इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे झटके काफी तेज महसूस किए गए। टोक्यो तक महसूस हुए झटके भूकंप इतना शक्तिशाली था कि केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी ऊंची इमारतें हिल गईं। कई इलाकों में लोगों ने तेज झटके महसूस किए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं आई है, लेकिन स्थिति की निगरानी की जा रही है।  इसके अलावा, क्योडो के अनुसार, जापान में आए जोरदार भूकंप के बाद टोक्यो-आओमोरी बुलेट ट्रेन लाइन पर परिचालन रोक दिया गया। सुनामी की चेतावनी जारी भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी अलर्ट जारी कर दिया है। इवाते प्रांत और होक्काइडो के कुछ हिस्सों में 3 मीटर (10 फीट) तक ऊंची सुनामी लहरों की चेतावनी दी गई है। एजेंसी ने तटीय इलाकों के निवासियों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। सुनामी लहरों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए सतर्कता बरतने का आग्रह किया गया है। जापान के मीडिया NHK के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि जोरदार भूकंपीय गतिविधि के कारण समुद्र तट के पास सुनामी भी आ गई। मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी कि सुनामी की लहरें उत्तरी तटरेखा तक लगभग तुरंत पहुंच सकती हैं। एजेंसी ने कहा कि तटीय क्षेत्रों और नदी के किनारे वाले इलाकों से तुरंत किसी सुरक्षित जगह, जैसे कि ऊंची जमीन या किसी सुरक्षित इमारत में चले जाएं, और साथ ही यह भी चेताया कि सुनामी की लहरों से नुकसान होने की संभावना है। एजेंसी ने आगे कहा, "सुनामी की लहरें बार-बार आने की उम्मीद है। जब तक चेतावनी वापस नहीं ले ली जाती, तब तक सुरक्षित जगह न छोड़ें।" सालो पहले जापान में आया था प्रलय जापान में अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं जो कई बार भयानक तबाही भी मचाते हैं। इसी वजह से यहां सरकार ने सख्त निर्माण नियम लागू किए हैं जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इमारतें मजबूत झटकों का सामना कर सकें। जापान के जहन में अभी भी 2011 की फुकुशिमा त्रासदी की काली यादें कैद हैं। सालो पहले जापान में 9.0-9.1 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था जिसने एक घातक सुनामी को जन्म दिया जिसने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को बर्बाद कर दिया था। सुनामी से 18,500 लोग मारे गए थे या लापता हो गए थे।   

कोरापुट से बस्तर तक कांपी धरती, भूकंप के झटकों का वीडियो सामने आया

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के जगदलपुर/बस्तर संभाग में बीती रात उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अचानक भूकंप के झटके महसूस किए गए। जगदलपुर समेत आसपास के कई इलाकों में जमीन हिलने से लोग घबरा गए और एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। नैशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप रात 11:31 बजे आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में जमीन से लगभग 5 किलोमीटर नीचे स्थित था। कुछ सेकंड की दहशत, फिर सामान्य हुआ माहौल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटके कुछ सेकंड तक ही महसूस हुए, लेकिन अचानक जमीन हिलने से लोग घबरा गए। कई लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों पर खड़े हो गए। झटके थमने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। CCTV में कैद हुई घटना शहर के कई इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों में भूकंप के दौरान की हलचल रिकॉर्ड हुई है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि झटकों के दौरान पंखे और अन्य सामान हिलते नजर आए, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया। कम जोखिम वाले क्षेत्र में भूकंप से बढ़ी चिंता बस्तर क्षेत्र को अब तक भूकंपीय दृष्टि से अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम संवेदनशील माना जाता रहा है, जहां बड़े या बार-बार भूकंप आने की घटनाएं सामान्यतः दर्ज नहीं होतीं। ऐसे में अचानक झटकों का महसूस होना न केवल आम लोगों के लिए डर और आशंका का कारण बना है, बल्कि विशेषज्ञों और भूविज्ञानियों के लिए भी यह एक गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना में कोई सूक्ष्म बदलाव हो रहा है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा। भूविज्ञानियों का मानना है कि भले ही यह भूकंप तीव्रता में मध्यम था, लेकिन इसका असर और स्थान महत्वपूर्ण है, इसलिए इस तरह की घटनाओं का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी हो जाता है। भविष्य में संभावित जोखिमों का आकलन करने, भूकंपीय गतिविधियों के पैटर्न को समझने और समय रहते आवश्यक सतर्कता बरतने के लिए इस क्षेत्र में लगातार मॉनिटरिंग और रिसर्च की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन सतर्क, स्थिति पर नजर भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन और विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भूकंप के दौरान घबराएं नहीं, बल्कि सुरक्षित स्थानों पर जाएं। साथ ही भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना के लिए जागरूक और तैयार रहने की सलाह दी गई है। भूवैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बस्तर जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस होना वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है। विशेषज्ञ अब इस क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों पर और गहन नजर रखेंगे, ताकि भविष्य में संभावित जोखिम का आकलन किया जा सके।

इंडोनेशिया में भूकंप का कहर: 7.4 तीव्रता, सुनामी और भारी तबाही

जकार्ता इंडोनेशिया में भयंकर भूकंप आया है. इंडोनेशिया में भूकंप के बाद एक और खतरा मंडरा रहा है. वह खतरा है सुनामी का. जी हां इंडोनेशिया में जलजले के बाद अब सुनामी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है. इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में आज यानी गुरुवार की सुबह जोरदार भूकंप आया. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.4 मापी गई. इसके बाद भूकंप से सुनामी की छोटी लहरें उठीं. इस भूकंप-सुनामी के डेडली कॉम्बिनेशन में एक व्यक्ति की मौत हो गई और घरों एवं इमारतों को नुकसान पहुंचा।  दरअसल, यूएसजीएस यानी संयुक्त राज्य अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि गुरुवार तड़के पूर्वी इंडोनेशिया के तट से दूर समुद्र में शक्तिशाली भूकंप आया. इसके बाद एक अमेरिकी निगरानी एजेंसी ने भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में सुनामी की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.4 थी और इसका केंद्र मोलूका सागर में 35 किलोमीटर की गहराई पर था. भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं, खासकर इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया के तटीय इलाकों में. यूएसजीएस ने भी भूकंप के केंद्र से उतनी ही दूरी पर स्थित क्षेत्रों में खतरनाक सुनामी लहरों की संभावना के संबंध में चेतावनी दी।  इंडोनेशिया में भूंकप इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान एवं भूभौतिकी एजेंसी के अनुसार, भूकंप के आधे घंटे से भी कम समय में कई निगरानी केंद्रों में सुनामी की लहरें दर्ज की गईं. इनमें बिटुंग में आंठ इंच और पश्चिम हलमाहेरा में एक फुट ऊंची लहरें शामिल हैं. होनोलुलु स्थित प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा कि दक्षिणी फिलीपीन के दावाओ में दो इंच ऊंची लहरें उठीं लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों के लिए सुनामी का कोई खतरा नहीं है।  इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार उत्तरी सुलावेसी प्रांत के तटीय शहर बिटुंग और आसपास के इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी प्रांत उत्तर मलुकु के टेरनेट शहर में 10 से 20 सेकंड तक भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।  भूकंप-सुनामी से कितनी तबाही प्रारंभिक आकलन से पता चला है कि टेरनेट के कुछ हिस्सों में थोड़ा नुकसान हुआ है. स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि बटांग दुआ द्वीप जिले में एक गिरजाघर प्रभावित हुआ है और दक्षिण टेरनेट में दो घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. बिटुंग में नुकसान का आकलन अभी जारी है. इंडोनेशिया की खोज और बचाव एजेंसी ने बताया कि उत्तरी सुलावेसी के मिनाहासा जिले में 70 वर्षीय महिला की मौत हो गई और एक अन्य निवासी घायल हो गया।  तटीय इलाके में खतरा बरकरार आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहरी ने एक बयान में कहा, ‘‘इस समय सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब तक अधिकारी अनुमति न दें तब तक वे जलक्षेत्र में नहीं जाएं. भूकंप के बाद समुद्र तट से दूर कम से कम दो झटके और महसूस किए गए. अधिकारियों ने बताया कि दोनों झटकों से सुनामी का खतरा नहीं है।  क्यों खतरा मंडरा रहा इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है, क्योंकि यह ‘प्रशांत अग्नि वलय’ पर स्थित है. यह ज्वालामुखियों और भ्रंश रेखाओं का एक विशाल 40,000 किलोमीटर लंबा चाप है, जो टेक्टोनिक प्लेटों की आपसी हलचल से बना है. प्रशांत महासागर को घेरने वाली यह घोड़े की नाल के आकार की बेल्ट दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत भूकंपों का कारण बनती है और यह अपनी लगातार होने वाली भूकंपीय और ज्वालामुखी गतिविधियों के लिए जानी जाती है।  यहां पिछले महीने में भी आया था भूकंप यूएसजीएस के अनुसार, अभी पिछले महीने ही 3 मार्च को सुमात्रा के तट से दूर समुद्र में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इससे वहां के लोग सहम गए थे, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था. वह भूकंप सुमात्रा के उत्तर-पूर्वी सिरे के पास समुद्र में उत्पन्न हुआ था, जिसके कारण उस क्षेत्र में, जहां अक्सर भूकंप के झटके आते रहते हैं, कई लोग घबराकर अपने घरों से बाहर भाग निकले थे. इसी बीच, इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने इस भूकंप की तीव्रता 6.4 दर्ज की और बताया कि यह 13 किलोमीटर की गहराई पर आया था। 

तेज भूकंप से नेपाल में दहशत, प्रशासन अलर्ट

ताप्लेजंग, नेपाल पूर्वी नेपाल के ताप्लेजंग जिले में मंगलवार तड़के चार तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NEMRC) के अनुसार, भूकंप मंगलवार सुबह 2 बजकर 47 मिनट पर आया।भूकंप का केंद्र ताप्लेजंग जिले के कंचनजंगा क्षेत्र में स्थित था। झटकों के बाद स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई और कई लोग घरों से बाहर निकल आए। अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के झटके ताप्लेजंग के अलावा पूर्वी नेपाल के अन्य जिलों में भी महसूस किए गए। हालांकि, अब तक किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या संपत्ति क्षति की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां समय-समय पर इस तरह की गतिविधियां दर्ज की जाती रही हैं।

दिल्ली-NCR में कांपी धरती, भूकंप के झटकों से मचा हड़कंप

नई दिल्‍ली दिल्ली में सोमवार की सुबह भूकंप का हल्का झटका महसूस किया गया. रिक्‍टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 2.8 मापी गई है. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप का केंद्र उत्तर दिल्ली में दर्ज किया गया है. सुबह 8:44 बजे भूकंप का झटका दर्ज किया गया और भूकंप का केंद्र जमीन की सतह के काफी पास रहा. दिल्‍ली में आए भूकंप का केंद्र जमीन से महज 5 किलोमीटर नीचे था. दिल्‍ली भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है और उच्‍च जोखिम वाले सिस्‍मिक जोन 4 में आता है. भूकंप का केंद्र दिल्‍ली जरूर था, लेकिन भूकंप का झटका बेहद हल्‍का था. ऐसे में जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. भूकंप के बाद दिल्‍ली-एनसीआर में हालात सामान्‍य हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, 2.8 तीव्रता के भूकंप से किसी तरह के नुकसान की आशंका नहीं होती है.  इस महीने कई जगहों पर दर्ज किए गए भूकंप  भारत के विभिन्‍न इलाकों में जनवरी महीने के दौरान कई भूकंप दर्ज किए गए हैं. शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात गुजरात के कच्छ जिले में 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसके बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई थी. गांधीनगर स्थित भूकंपीय अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) ने बताया था कि भूकंप शुक्रवार देर रात एक बजकर 22 मिनट पर आया और इसका केंद्र जिले के खावड़ा से लगभग 55 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपूर्व में था. भूकंप संवेदनशील जोन-4 में आता है दिल्ली-NCR भूकंप के झटके एक बार फिर याद दिलाते हैं कि दिल्ली-एनसीआर भूकंप संवेदनशील जोन-4 में आता है और यहां भूकंप के बड़े झटके कभी भी आ सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे झटके बड़े भूकंप का संकेत भी हो सकते हैं, इसलिए लोगों को तैयार रहना चाहिए. अभी तक कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन सुबह के इस झटके ने लोगों को डरा दिया है. इससे पहले बुधवार 14 जनवरी को भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए. इस भूंकप का केंद्र हरियाणा के सोनीपत स्थित गोहाना था, जिसकी तीव्रता रीक्टर स्केल पर 3.4 मापी गई. इस भूकंप के झटके दिल्ली तक झटके महसूस किए गए और कई लोग घबराकर अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए थे. क्यों आते हैं भूकंप? भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारी धरती की सतह मुख्य रूप से सात बड़ी और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से बनी है. ये प्लेट्स लगातार हरकत करती रहती हैं और अक्सर आपस में टकराती हैं. इस टक्कर के परिणामस्वरूप प्लेट्स के कोने मुड़ सकते हैं और अत्यधिक दबाव के कारण वे टूट भी सकती हैं. ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर फैलने का रास्ता खोजती है और यही ऊर्जा जब जमीन के अंदर से बाहर आती है, तो भूकंप आता है. भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है दिल्‍ली  भारत के भूकंप संवेदनशील इलाकों में दिल्‍ली भी शामिल है. दिल्ली भूकंप के लिहाज से बहुत जोखिम वाले जोन 4 में है. जोन 2 कम जोखिम वाले, जोन 3 मध्यम जोखिम वाले और जोन 5 सबसे अधिक जोखिम वाले इलाके हैं. दिल्ली ऐसा इलाका है, जहां पर बहुत जोखिम वाले भूकंप आ सकते हैं. साथ ही हिमालयी इलाके में आने वाले भूकंप की जद से भी दिल्‍ली बहुत दूर नहीं है.  खासतौर पर पर सेंट्रल हिमालय जहां 8 या उससे अधिक की तीव्रता का भूकंप आने की आशंका बनी रहती है.   इसलिए आता है भूकंप  पृथ्वी की सतह के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों में अक्‍सर हलचल है और इसके कारण ही भूकंप आते हैं. पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी प्लेटों में बंटी होती है और यह धीमी गति से खिसकती हैं. हालांकि जब यह प्लेटें आपस में टकराती हैं तो ऊर्जा का बड़ा विस्फोट होता है, जिसे हम भूकंप कहते हैं.