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नेपाल में नई सरकार ने सैलरी सिस्टम में किया बड़ा बदलाव, कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ

काठमांडू  नेपाल सरकार ने एक बड़ा और अलग फैसला लिया है, जिसके तहत अब सरकारी कर्मचारियों को हर महीने की बजाय हर 15 दिन में सैलरी दी जाएगी। Nepal में यह पहली बार होगा जब सैलरी का भुगतान महीने में दो बार (फोर्टनाइटली) किया जाएगा। यह फैसला 17 अप्रैल को वित्त मंत्रालय स्तर पर लिया गया और इसे लागू करने के लिए संबंधित सरकारी विभागों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था पूरी तरह से कब से लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, अगर कर्मचारियों को बार-बार पैसे मिलेंगे तो वे नियमित रूप से खर्च करेंगे, जिससे बाजार में पैसा तेजी से घूमेगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। दुनिया के ज्यादातर देशों में, खासकर दक्षिण एशिया में, सरकारी कर्मचारियों को मासिक सैलरी ही दी जाती है। India, Pakistan, Bangladesh, Bhutan, Sri Lanka और Maldives में अभी भी महीने में एक बार सैलरी देने की परंपरा है। हालांकि, इस नए फैसले को लागू करने में कुछ कानूनी अड़चनें आ सकती हैं। नेपाल के मौजूदा कानून के अनुसार सरकारी कर्मचारियों को हर महीने के अंत में सैलरी देने का प्रावधान है। इसलिए इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए कानून में बदलाव करना पड़ सकता है।  फाइनेंशियल कंट्रोलर जनरल ऑफिस के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी रूप से सैलरी हर 15 दिन में देना संभव है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा। सरकार इस पर विचार कर रही है कि अध्यादेश (Ordinance) लाकर इसे जल्दी लागू किया जाए। कुल मिलाकर, नेपाल का यह फैसला आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

नेपाल में बालेन युग की शुरुआत, बालेंद्र शाह ने ’12:34′ बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ ली

काठमांडू  आज, 27 मार्च 2026 से नेपाल में 'बालेन' युग की शुरुआत हो गई है। काठमांडू के पूर्व मेयर और 'रैपर' से राजनेता बने बालेन शाह (बालेंद्र शाह) ने नेपाल के 40वें और देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। 35 वर्षीय बालेन ने अपनी पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाकर नेपाल के पुराने राजनीतिक घरानों और पारंपरिक दलों के वर्चस्व को खत्म कर दिया था। शपथ ग्रहण समारोह और '12:34' का शुभ मुहूर्त राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल द्वारा काठमांडू स्थित राष्ट्रपति भवन 'शीतल निवास' में बालेन शाह को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण के लिए आज दोपहर 12:34 बजे का समय चुना गया था। हिंदू ज्योतिष और पंडितों के अनुसार यह समय बेहद शुभ माना गया और साथ ही यह '1-2-3-4' का एक अनूठा अंकगणितीय पैटर्न भी बनाता है। इसके बाद वह दोपहर 14:15 बजे (14-15 पैटर्न) अपना कार्यभार संभालेंगे। बालेन शाह नेपाल के शीर्ष कार्यकारी पद पर पहुंचने वाले मधेश मूल के पहले व्यक्ति भी बन गए हैं। इस समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ-साथ बौद्ध लामाओं की प्रार्थनाएं भी शामिल की गई हैं। प्रचंड बहुमत और दिग्गज नेताओं की हार बालेन की 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' (RSP) ने हाल ही में हुए संसदीय चुनावों में 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 182 सीटों पर क्लीन स्वीप करते हुए दो-तिहाई के करीब बहुमत हासिल किया है। सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब बालेन शाह ने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से नेपाल के चार बार के प्रधानमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी (UML) के दिग्गज नेता के.पी. शर्मा ओली को भारी अंतर से हरा दिया। 'Gen Z' का आंदोलन और बदलाव की लहर नेपाल में सितंबर 2025 में आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर युवाओं (Gen Z) ने एक बड़ा और हिंसक आंदोलन किया था। इसके बाद हुए इस पहले आम चुनाव में युवाओं ने पुरानी राजनीतिक पार्टियों को पूरी तरह से नकार दिया। अपनी शपथ से ठीक पहले बालेन ने देश में एकता का संदेश देने के लिए 'जय महाकाली' नामक एक रैप सॉन्ग का नया वीडियो जारी किया। सोशल मीडिया पर आते ही इसे कुछ ही घंटों में लाखों व्यूज मिल गए। बालेन शाह का सफर: इंजीनियरिंग से सत्ता के शीर्ष तक 27 अप्रैल 1990 को जन्मे बालेन पेशे से एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं। राजनीति में आने से पहले वे युवाओं के बीच एक लोकप्रिय रैपर के रूप में मशहूर थे, जो अपने गानों के जरिए सिस्टम की कमियों पर निशाना साधते थे। मई 2022 में उन्होंने काठमांडू के मेयर का चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता था। अपने कार्यकाल के दौरान कड़े फैसलों और अतिक्रमण हटाने की मुहिम से उन्होंने 'सुधारक' की छवि बनाई। जनवरी 2026 में प्रधानमंत्री पद की रेस में उतरने के लिए उन्होंने मेयर पद से इस्तीफा दे दिया था।

बालेंद्र शाह ने ओली को हराया, नेपाल चुनाव में RSP अगली सरकार बनाने की ओर

काठमांडू  आरएसपी के बालेंद्र शाह ने शनिवार को चार बार के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को भारी अंतर से हराकर नेपाल में अगली सरकार बनाने की राह पर कदम रखा. पिछले साल पीढ़ीगत बदलाव और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मांग को लेकर हुए हिंसक ‘जेन जेड’ प्रदर्शनों के बाद हुए पहले आम चुनाव में उन्होंने पारंपरिक राजनीतिक दलों को करारा झटका दिया. रैपर से राजनीतिक नेता बने बालेंद्र शाह ‘बालेन’, जो राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, ने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) – सीपीएन-यूएमएल – के अध्यक्ष ओली को लगभग 50,000 मतों के भारी अंतर से हराया। निर्वाचन आयोग ने बताया कि 35 वर्षीय बालेन ने 74 वर्षीय ओली के 18,734 वोट के मुकाबले 68,348 वोट हासिल किए. रात साढ़े आठ बजे तक घोषित परिणामों के अनुसार, रवि लामिछाने द्वारा 2022 में गठित आरएसपी ने अब तक घोषित 87 सीटों के परिणाम में 70 सीट पर जीत दर्ज की है. चुनाव निकाय के आंकड़ों में कहा गया कि आरएसपी ने काठमांडू जिले की सभी 10 सीट जीतकर सूपड़ा-साफ कर दिया तथा देश भर में 52 सीट पर आगे है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, नेपाली कांग्रेस (एनसी) ने दस सीट जीतीं और नौ सीटों पर आगे है. सीपीएन (यूएमएल) ने सिर्फ तीन सीट जीतीं और आठ सीट पर आगे है. इसके आलावा नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) ने दो सीट जीतीं और पांच सीटों पर आगे है. वहीं, श्रम शक्ति पार्टी (एसएसपी) तीन सीट पर आगे है और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) ने एक सीट जीती है. जीतने वालों में एक निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल है। नेपाल में 5 मार्च को हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ था. मतों की गिनती बृहस्पतिवार देर रात शुरू हुई और शनिवार शाम 5 बजे तक 162 निर्वाचन क्षेत्रों में गिनती जारी थी. भारत इस चुनाव पर बारीकी से नजर रख रहा था, जो राजनीतिक रूप से अस्थिर हिमालयी देश में एक स्थिर सरकार की उम्मीद कर रहा है ताकि दोनों पक्षों के बीच विकासात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सके। इस बीच, ओली ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “बालेन बाबू, जीत के लिए बधाई.” नेपाल पिछले 18 साल में 14 सरकार देख चुका है. ओली ने बालेन को बधाई देते हुए कहा, “मैं कामना करता हूं कि आपका पांच साल का कार्यकाल निर्बाध, सफल हो और हार्दिक बधाई हो। ओली ने 2022 की एक तस्वीर संलग्न की जिसमें वह रैपर से राजनीतिक नेता बने बालेन को तबला भेंट करते हुए दिख रहे हैं, जब बालेन ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता था. आरएसपी ने बालेंद्र शाह ‘बालेन’ को प्रधानमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित किया था और मधेस के जनकपुर से अपने पहले चुनाव अभियान की शुरुआत की थी. पार्टी इस प्रांत में दूसरे दलों का सूपड़ा साफ करती दिख रही है।

आठ मुख, अद्भुत आस्था: नेपाल से भी विशिष्ट मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर

 मंदसौर मंदसौर में शिवना तट पर विराजे अष्टमुखी श्री पशुपतिनाथ महादेव की प्रतिमा का सौंदर्य अपने-आप में अनूठा है। नेपाल के पशुपतिनाथ में चार मुख की मूर्ति है, जबकि मंदसौर में मूर्ति अष्टमुखी है और अभी तक ज्ञात इतिहास में यह विश्व की एकमात्र अष्टमुखी मूर्ति है। पशुपतिनाथ महादेव की मूर्ति लगभग 1500 वर्ष पुरानी है। और 85 बरस पहले शिवना नदी से ही निकली थी। 19 जून 1940 को शिवना नदी से बाहर आने के बाद 21 साल तक भगवान पशुपतिनाथ की मूर्ति नदी के तट पर ही रखी रही। मूर्ति को नदी से बाहर निकलने के बाद चैतन्य आश्रम के स्वामी प्रत्यक्षानंदजी महाराज ने 23 नवंबर 1961 को प्राण प्रतिष्ठा की। 27 नवंबर को मूर्ति का नामकरण श्री पशुपतिनाथ महादेव किया गया। इसके बाद मंदिर निर्माण हुआ। सावन में यहां डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं। मुख्य आकर्षण श्रावण में पूरे माह होने वाला मनोकामना अभिषेक है। और अब तो यहां पशुपतिनाथ लोक बनने से पूरा परिसर आकर्षक बन गया है। 101 फीट ऊंचे मंदिर शिखर पर 100 किलो वजनी कलश स्थापित है जिस पर 51 तोला सोने की परत चढ़ाई गई है। शैव धर्म की 6 प्रमुख परंपराओं में से एक मंदसौर का पशुपतिनाथ महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित हिंदू मंदिर है। यह पशुपतिनाथ परंपरा से संबंधित है जो शैव धर्म के भीतर 6 प्रमुख परंपराओं में से एक है। शिलालेखों के आधार पर मंदिर की मूर्ति 5वीं या 6ठी शताब्दी की है। प्राचीन समय में इस स्थल को दशपुर कहते थे। यह मालवा के ऐतिहासिक क्षेत्र में राजस्थान की सीमा के पास इंदौर से लगभग 200 किमी, उदयगिरि गुफाओं से लगभग 340 किमी पश्चिम में और शामलाजी प्राचीन स्थलों से लगभग 220 किलोमीटर पूर्व में है। दोनों ही गुप्त साम्राज्य युग की पुरातात्विक खोजों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। शिवना से प्रकटे अष्टमुखी महादेव माना जाता है कि प्रतिमा का निर्माण विक्रम संवत 575 ई. में सम्राट यशोधर्मन की हूणों पर विजय के आसपास का है। संभवत: मूर्ति भंजकों से रक्षा के लिए इसे शिवना नदी में दबा दिया गया था। अनुमान के अनुसार अज्ञात कलाकार ने प्रतिमा के ऊपर के चार मुख पूरी तरह बना दिए थे, जबकि नीचे के चार मुख निर्माणाधीन थे। श्री पशुपतिनाथ महादेव मूर्ति की तुलना नेपाल के काठमांडू स्थित श्री पशुपतिनाथ से की जाती है। मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ मूर्ति अष्टमुखी है। जबकि नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मूर्ति चार मुखी है। मूर्ति में बाल्यावस्था, युवावस्था, अधेड़ावस्था व वृद्धावस्था के दर्शन होते हैं। इसमें चारों दिशाओं में एक के ऊपर एक दो शीर्ष हैं। प्रतिमा में गंगावतरण जैसी दिखाई देने वाली सफेद धारियां हैं। प्रतिमा की विशेषता मुख 8, ऊंचाई 7.3 फीट, गोलाई 11.3 फीट, वजन 6 क्विंटल अष्टमुख की विशेषता प्रतिमा के आठों मुखों का नामकरण भगवान शिव के अष्ट तत्व के अनुसार है। हर मुख के भाव व जीवन काल भी अलग-अलग हैं। 1 – शर्व, 2 – भव, 3 – रुद्र, 4 – उग्र, 5 – भीम, 6 – पशुपति, 7 – ईशान और 8 – महादेव। कैसे पहुंचें मंदसौर रेल सेवाएं – जयपुर-इंदौर रेलमार्ग पर मंदसौर प्रमुख स्टेशन है। और मुंबई, इंदौर, दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, बड़ौदा, सूरत, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, उदयपुर, मथुरा, भोपाल, नागपुर, हिसार, जोधपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों से सीधी रेल सेवा उपलब्ध है। बस सेवाएं – मंदसौर महू-नसीराबाद राजमार्ग पर स्थित है। मंदसौर से महज 30 किमी दूर से मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस वे भी निकल रहा है। सभी प्रमुख शहरों से सीधी बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं। निकटतम हवाई अड्डा – इंदौर (220 किमी), उदयपुर (190 किमी) मंदसौर में 25 करोड़ से 'पशुपतिनाथ लोक' तैयार श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में पशुपतिनाथ लोक का प्रथम चरण पूरा हो चुका है। मंदिर के सभा हाल से लेकर पुराने पार्किंग स्थल तक पूरे परिसर में 25 करोड़ रुपये में पर्यटन विकास निगम ने कायाकल्प कर दिया है। मंदिर परिसर में पुराने खंभों पर भी लाल पत्थर का कार्य हो चुका है। माली धर्मशाला व उसके आस-पास बने भवन भी तोड़कर यहां ओपन थियेटर बना दिया गया है। मंदिर के आसपास दीवारों पर लगे लाल पत्थरों पर शिव लीलाएं उकेरी गई हैं।

तेज भूकंप से नेपाल में दहशत, प्रशासन अलर्ट

ताप्लेजंग, नेपाल पूर्वी नेपाल के ताप्लेजंग जिले में मंगलवार तड़के चार तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NEMRC) के अनुसार, भूकंप मंगलवार सुबह 2 बजकर 47 मिनट पर आया।भूकंप का केंद्र ताप्लेजंग जिले के कंचनजंगा क्षेत्र में स्थित था। झटकों के बाद स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई और कई लोग घरों से बाहर निकल आए। अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के झटके ताप्लेजंग के अलावा पूर्वी नेपाल के अन्य जिलों में भी महसूस किए गए। हालांकि, अब तक किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या संपत्ति क्षति की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां समय-समय पर इस तरह की गतिविधियां दर्ज की जाती रही हैं।

नेपाल में SIR पर सख्ती के बाद संकट गहरा, रोहिंग्याओं के घुसपैठ का खतरा; भारत से सहायता की अपील

 पिथौरागढ़ उत्तराखंड में निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद शुरू होने के साथ ही नेपाल ने रोहिंग्याओं की घुसपैठ की आशंका जताई है। इसे लेकर नेपाल ने सीमा चौकियों के लिए अलर्ट जारी किया है। साथ ही सुरक्षा बलों ने चौकसी भी बढ़ा दी है। नेपाल प्रशासन ने भारत से मदद की गुहार लगाई है। उत्तराखंड में एसआईआर को लेकर मेपिंग का कार्य चल रहा है। साथ ही पुलिस का सत्यापन अभियान भी जारी है। नेपाली प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि भारत में सख्ती के बाद रोहिंग्या शरणार्थियों की नेपाल में घुसने की आशंका है। नेपाल त्रिनगर सीमा सुरक्षा बल के प्रमुख और सशस्त्र पुलिस उपाधीक्षक धीरेंद्र शाह का कहना है कि रोहिंग्या शरणार्थियों के भारतीय आधार कार्ड का इस्तेमाल करके मजदूर के रूप में नेपाल में प्रवेश करने की सूचना मिली है। इसके बाद निगरानी कड़ी कर दी है। सुरक्षा बलों के साथ ही डॉग स्क्वायड भी सीमा पर मुस्तैद है। भारत से नेपाल में प्रवेश करने वालों के आधार कार्ड के साथ दूसरे दस्तावेजों की भी जांच के आदेश दिए हैं। संदिग्ध व्यक्तियों की तलाशी भी ली जा रही है। सहायक मुख्य जिला अधिकारी किरण जोशी ने बताया कि कैलाली में खुले सीमा क्षेत्र में गश्त बढ़ाई गई है। मुख्य जिला अधिकारी लक्ष्मण ढकाल ने बताया कि चंपावत जनपद के बनबसा क्षेत्र से लगी कंचनपुर के गड्डाचौकी चौकी पर भी कड़ी निगरानी की गई है। पिथौरागढ़ के दार्चुला और बैतड़ी में भी चौकियों पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री ने चौकियों का किया निरीक्षण नेपाल के गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्यल ने भी सीमावर्ती चौकियों का निरीक्षण किया। बीते दिनों गृह मंत्री धनगढ़ी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा संगोष्ठी में हिस्सा लिया। बाद में उन्होंने त्रिनगर सीमा चौकी का निरीक्षण किया। भारत से सहयोग की अपील नेपाल प्रशासन ने रोहिंग्याओं को लेकर अलर्ट को देखते हुए भारत से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने नेपाल सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा एजेंसी एसएसबी से किसी भी तरह की सूचना सामने आने पर साझा करने का अनुरोध किया है। कैलाली नेपाल के सहायक मुख्य जिला अधिकारी किरण जोशी ने बताया कि नेपाल में रोहिंग्याओं के प्रवेश की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है। भारत से अवैध तरीके से कोई भी रोहिंग्या नेपाल में प्रवेश न कर सके, इसके लिए सीमावर्ती चौकियों में निगरानी बढ़ाई गई है।

नेपाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव: सुशीला कार्की बनीं अंतरिम प्रधानमंत्री, कर्फ्यू और निषेधाज्ञा खत्म

 काठमांडू  हिंसा, उपद्रव और आगजनी के बाद अब नेपाल में शांति लौट रही है. राजधानी काठमांडू में सेना की ओर से लगाया गया कर्फ्यू और निषेधाज्ञा आज सुबह 5 बजे से हटा दिया गया है. अंतरिम सरकार बनने के बाद सुरक्षा बलों ने हालात को देखते हुए यह फैसला लिया. हालांकि सड़कों पर सेना की मौजूदगी अभी कुछ दिन और रहने की उम्मीद है. अंतरिम सरकार की कमान पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने संभाली है. उन्होंने कल प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. राजधानी की सड़कों पर अब धीरे-धीरे सामान्य माहौल लौटता दिख रहा है. स्थानीय निवासी सुमन सिवाकोटी ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि सुशीला कार्की नेपाल के लिए एक नए युग की शुरुआत करेंगी. देश को और सुरक्षित रखने के साथ विकास को आगे बढ़ाना जरूरी है.' सुशीला कार्की के अंतरिम प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाल के बीरगंज में भी लोगों को उम्मीद है कि एक भ्रष्टाचार मुक्त सरकार बनेगी और प्रधानमंत्री समेत तमाम मंत्री जो भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त हैं सब की संपत्ति की जांच होगी और नेपाल भ्रष्टाचार मुक्त होगा. होटल इंडस्ट्री को 25 अरब का घाटा पिछले दिनों हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों में हिंसा के चलते हालात बिगड़ गए थे. पुलिस के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 51 हो गई है. इसमें 21 प्रदर्शनकारी, 9 कैदी, 3 पुलिसकर्मी और 18 अन्य लोग शामिल हैं. हिंसा का सबसे ज्यादा असर नेपाल की होटल इंडस्ट्री पर पड़ा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब दो दर्जन होटलों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाओं से इस सेक्टर को 25 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. पुलिस मांग रही उपद्रवियों के वीडियो नेपाल पुलिस ने देशभर में हुई हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं को लेकर जनता से सहयोग की अपील की है. पुलिस ने कहा है कि जिनके पास भी इन घटनाओं से जुड़े वीडियो या सबूत हैं, वे उन्हें साझा करें ताकि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके. इसके लिए पुलिस ने एक आधिकारिक ईमेल जारी कर ऐसे सभी वीडियो भेजने की अपील की है. हुआ क्या था? बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था. सैकड़ों प्रदर्शनकारी उनके दफ्तर में घुस गए थे और सोमवार के प्रदर्शन में हुई मौतों को लेकर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे. सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध सोमवार रात को ही हटा लिया गया था. ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसा थमी नहीं और प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सरकारी दफ्तरों, राजनीतिक दलों के दफ्तरों और वरिष्ठ नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया. 1700 लोगों को आई चोटें शुक्रवार दोपहर कई मृतकों का अंतिम संस्कार काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर परिसर स्थित आर्यघाट पर बागमती नदी के किनारे किया गया. पुलिस के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान करीब 1,700 लोग घायल हुए. इनमें से लगभग 1,000 लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं. अधिकारियों के मुताबिक, काठमांडू घाटी में नेपाल पुलिस की गतिविधियां धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं और जिन थानों व पुलिस चौकियों को प्रदर्शनकारियों ने तोड़ा-फोड़ा या आग के हवाले कर दिया था, वे फिर से संचालन में आ रही हैं.

पोखरा में फंसी भारतीय टीम की आपबीती वायरल, उपासना गिल ने भावुक होकर मांगी मदद

काठमांडू  नेपाल में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच भारतीय दूतावास ने एक बड़ी राहत भरी कार्रवाई करते हुए फंसी हुई भारतीय वॉलीबॉल टीम को सुरक्षित निकाला. यह कदम उस समय उठाया गया, जब टीवी प्रेजेंटर उपासना गिल का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया. गिल नेपाल में एक वॉलीबॉल लीग के लिए गई थीं, लेकिन अचानक फैली हिंसा में फंस गईं. उनके वीडियो अपील ने ही भारतीय दूतावास को सक्रिय किया और पूरी टीम की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी. वीडियो अपील बनी सहारा उपासना गिल ने पोखरा से वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई थी. उन्होंने कहा, 'मेरा नाम उपासना गिल है और मैं यह वीडियो प्रफुल्ल गर्ग को भेज रही हूं. मैं भारतीय दूतावास से मदद की अपील करती हूं. जो भी मदद कर सकते हैं, कृपया करें. मैं पोखरा, नेपाल में फंसी हुई हूं.'  गिल ने अपने होटल पर हुए हमले का भी जिक्र किया.उन्होंने बताया कि जिस होटल में वह ठहरी थीं, उसे प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया. उन्होंने कहा, 'मेरे सारे सामान और सामान से भरा कमरा जल गया. मैं उस समय स्पा में थी और प्रदर्शनकारी बड़े-बड़े डंडों के साथ पीछा कर रहे थे. मैं मुश्किल से अपनी जान बचा पाई.' दूतावास की त्वरित कार्रवाई वीडियो सामने आते ही भारतीय दूतावास ने तुरंत हरकत में आते हुए वॉलीबॉल टीम को काठमांडू स्थित सुरक्षित घर में शिफ्ट किया. सूत्रों के मुताबिक टीम के अधिकांश सदस्य पहले ही भारत लौट चुके हैं और बाकी की वापसी की तैयारी की जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि दूतावास लगातार टीम के सभी सदस्यों से संपर्क बनाए हुए है और उनकी सुरक्षा पर नजर रखे हुए है. नेपाल में क्यों भड़के प्रदर्शन? नेपाल में सोमवार को सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे. लेकिन ये प्रदर्शन जल्दी ही भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन में बदल गए. हालात इतने बिगड़े कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा. राजधानी काठमांडू से लेकर पोखरा तक प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों और होटलों को निशाना बनाया, जिससे आम लोगों और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. फंसे भारतीयों के लिए हेल्पलाइन भारतीय दूतावास ने न सिर्फ टीम को बचाया, बल्कि नेपाल में फंसे अन्य भारतीयों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं. काठमांडू स्थित कंट्रोल रूम लगातार सक्रिय है और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध करा रहा है. दूतावास के इस प्रयास ने एक बार फिर यह साबित किया कि संकट की घड़ी में विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना सरकार की प्राथमिकता रहती है. राहत की सांस वॉलीबॉल टीम के सुरक्षित निकलने के बाद उनके परिवारों ने राहत की सांस ली है. जिन खिलाड़ियों की वापसी अभी बाकी है, उनके लिए भी जल्द इंतजाम किए जा रहे हैं. उपासना गिल ने भी भारतीय दूतावास का धन्यवाद करते हुए कहा कि अगर समय रहते मदद न मिलती, तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे. नेपाल में भले ही हालात अभी सामान्य नहीं हैं, लेकिन भारतीय दूतावास की त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई ने न सिर्फ खिलाड़ियों की जान बचाई, बल्कि संकट में फंसे लोगों को भरोसा भी दिलाया कि भारत हमेशा अपने नागरिकों के साथ खड़ा है.

PM ओली के बाद राष्ट्रपति ने भी दिया इस्तीफा, काठमांडू में प्रदर्शनकारियों की जीत परेड

काठमांडू  नेपाल में बीते 30 घंटे के समय में सब कुछ बदल चुका है. युवाओं के प्रदर्शन के सामने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक ने घुटने टेक दिए और इस्तीफा देने को मजबूर हुए. सोशल मीडिया बैन के ख़िलाफ़ युवाओं के आक्रोश से ज्यादातर शहरों में हिंसा हुई. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से लेकर गृहमंत्री के घर तक जला दिए. नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन में आग लगा दी। इसके अलावा, पीएम ओली, राष्ट्रपति, गृहमंत्री के निजी आवास पर तोड़फोड़ के बाद आगजनी की।प्रदर्शनकारियों ने पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा को घर में घुसकर पीटा। वहीं, वित्त मंत्री विष्णु पोडौल को काठमांडू में उनके घर के नजदीक दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इसका वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक प्रदर्शनकारी उनके सीने पर लात मारता दिख रहा है। इन हिंसक घटनाओं के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है। उन्हें सेना हेलिकॉप्टर से अ‍ज्ञात स्थान पर ले गई है। इस हिंसा में अब तक 22 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हैं।प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड, शेर बहादुर देउबा और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के निजी आवासों को भी आग के हवाले कर दिया। इस्तीफे के बाद भी क्यों शांत नहीं हो रहा है नेपाल? नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा तक राष्ट्रपति की ओर से स्वीकार कर लिया गया है. हालांकि, राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस्तीफे के बाद भी प्रदर्शनकारी शांत क्यों नहीं हो रहे हैं.  दिल्ली में नेपाल दूतावास की बढ़ाई गई सुरक्षा नेपाल में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों की ओर से बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग तेज होते जा रही है. इस बीच भारत में नेपाल दूतावास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दिल्ली में नेपाल का दूतावास बाराखंभा रोड पर स्थित है.  चार साल में भारत के 4 पड़ोसी देशों में 'तख्तापलट' बीते चार सालों में भारत के कई पड़ोसी मुल्कों में तख्तापलट हुआ है. इनमें अफगानिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के बाद अब नेपाल भी शामिल हो गया है. पड़ोसी मुल्कों की तख्तापलट की कहानी आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं – भारत के चार पड़ोसी देशों में जन आक्रोश के आगे झुकी सरकार  बीरगंज में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया बिहार में पूर्वी चंपारण के रक्सौल शहर से सटे नेपाल के बीरगंज में आज सुबह से ही प्रदर्शनकारियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया. स्थिति तनावपूर्ण बना हुआ है. प्रशासन ने हिंसक प्रदर्शन पर लगाम लगाने के लिए पूरे शहर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया. काठमांडू ने प्रदर्शनकारियों ने निकाला जुलूस मार्च नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में अभी भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.  राजधानी काठमांडू की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा है. पुतलीसडक में जुलूस मार्च निकाला गया. प्रदर्शनकारी पुलिस के दंगा निरोधक उपकरण के साथ मार्च करते नज़र आए. युवाओं के आंदोलन की 7 प्रमुख वजहें 1. नेपोटिज्म: जेन-जी को भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी ने निराश किया। भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) और चहेतों को कुर्सी पर बैठाने से नेताओं के बच्चों की विदेशी यात्राएं, ब्रांडेड सामान, शानो शौकत की पार्टियां सोशल मीडिया पर चर्चित होने लगीं। 2. सोशल मीडिया बैन: लोगों को लगा कि उनकी आवाज दबा दी गई है। कई युवा इसके जरिए कमाई भी कर रहे थे। इससे गुस्सा भड़का। 3. तीन बड़े घोटाले: 4 साल में 3 बड़े घोटाले सामने आए। 2021 में 54,600 करोड़ रुपए का गिरी बंधु भूमि स्वैप घोटाला, 2023 में 13,600 करोड़ रुपए का ओरिएंटल कोऑपरेटिव घोटाला और 2024 में 69,600 करोड़ रुपए का कोऑपरेटिव घोटाला। इससे युवाओं में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा था। 4. सियासी अस्थिरता: 5 साल में 3 सरकारें आईं। जुलाई 2021 में शेर बहादुर देउबा पीएम। दिसंबर 2022 में प्रचंड पीएम बने। जुलाई 2024 से ओली आए। 5. बेरोजगारी-आर्थिक असमानता: बेरोजगारी दर 2019 में 10.39% थी, अभी 10.71% है। महंगाई दर 2019 में 4.6% थी। अब 5.2% है। आर्थिक असमानता हावी। 20% लोगों के पास 56% संपत्ति। 6. विदेशी दबाव: ओली सत्ता में आए तो चीन की ओर झुकाव बढ़ा। पहले सरकारों ने कई फैसले अमेरिकी प्रभाव में लिए। सोशल मीडिया बैन के बीच सिर्फ चीनी ऐप टिक-टॉक चलता रहा। युवाओं को लगता है कि बड़े देशों के दबाव में नेपाल मोहरे जैसा इस्तेमाल हो रहा है। 7. भारत से बढ़ती दूरी: ओली पीएम बने तो लिपुलेख दर्रे को नेपाल के नक्शे में दिखाया। चीन से नजदीकी बढ़ाई। दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हुए तो नेपाल पर आर्थिक दबाव पड़ा। इससे भी युवाओं में बेचैनी।

बड़ा राजनीतिक संकट: नेपाल के PM ओली ने छोड़ी कुर्सी, प्रदर्शनकारियों ने संसद को बनाया निशाना

काठमांडू  नेपाल में छात्रों का भारी लगातार दूसरे दिन भी बवाल जारी है। नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत 26 सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म से बैन हटा लिया है। यह फैसला सोमवार देर रात देश भर में युवाओं के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए बाद लिया गया। इसके बाद भी युवा मान नहीं रहे थे। छात्रों के भारी दबाव के बाद नेपाल के पीएम ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। नेपाली युवाओं ने पीएम प्रचंड और पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा के घर पर हमला करने की कोशिश की है। जेन-ज़ी प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हुए हैं। नेपाल में जेन-ज़ी प्रदर्शनकारी लगातार दूसरे दिन भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे नेपाल के पीएम केपी ओली के इस्‍तीफे की मांग कर रहे थे। नेपाली सेना प्रमुख की चेतावनी के बाद ओली ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया। नेपाल के 10 से ज्‍यादा मंत्रियों ने पहले ही इस्‍तीफा दे दिया था। नेपाल के संचार, सूचना और प्रसारण मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने देर रात घोषणा की कि सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध लगान का फैसला वापस ले लिया गया है।  इससे पहले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की पार्टी के नेता रघुवीर महासेठ और माओवादी अध्यक्ष प्रचंड के घरों पर भी हमला हुआ. गृहमंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री समेत पांच मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं. लगातार बढ़ते दबाव के बीच पीएम ओली इलाज के नाम पर दुबई जाने की तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने उपप्रधानमंत्री को कार्यवाहक जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है. कर्फ्यू और सुरक्षा के सख्त इंतजामों के बावजूद विरोध प्रदर्शनों का दायरा बढ़ता जा रहा है और राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है. इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए गृह मंत्री रमेश लेखक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. हालात बिगड़ते देख नेपाल अब तक कैबिनेट के तीन मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं और खुद पीएम ओली के बारे में कहा जा रहा है कि वे देश छोड़कर दुबई जाने की तैयारी में हैं. बेकाबू हो रहे प्रदर्शनकारियों को देखते हुए काठमांडू की सड़कों पर सेनाओं को तैनात कर दिया गया है. सोमवार को दोपहर तक कुछ इलाकों में मौजूद ये बवाल अब काठमांडू के अलावा पोखरा, बुटवल, भैरहवा, भरतपुर, इटहरी और दमक जैसे शहरों में भी फैल गया. बताया जा रहा है कि सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी उनके दफ्तर में घुस गए थे, जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है. पीएम ओली ने अपने इस्तीफे वाली चिट्ठी राष्ट्रपति को सौंपी है. देश में लगातार चल रही हिंसा और विद्रोह की वजह से उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा है. उनके 4 कैबिनेट मंत्री पहले ही इस्तीफा दे चुके थे. सूत्रों के हवाले से खबर है कि ओली इसके बाद दुबई जा सकते हैं. सुबह ही सोमवार को 19 प्रदर्शनकारियों की मौत से गुस्साई भीड़ ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के निजी आवास फूंक दिए और मंत्रियों को उनके घर में ही बंधक बना डाला जिसके बाद उन्हें चॉपर से रेस्क्यू किया गया. पड़ोसी देश नेपाल में सिर्फ सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने से शुरू हुई विद्रोह की चिंगारी अब पूरे नेपाल में लहक रही है. स्थिति ये है कि नेपाल के तमाम इलाकों में नई पीढ़ी के युवा हाथों में पत्थर और लाठी-डंडे लेकर घूम रहे हैं. उन्हें नियंत्रित करने में पुलिस के पसीने छूट गए हैं. उन्होंने संसद भवन में घुसकर इसमें आग लगा दी और बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे हाई प्रोफाइल लोगों के घरों में तोड़फोड़ की है.  वित्त मंत्री को जनता ने सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर लात-घूसे से पीटा नेपाल में राजनीतिक और सामाजिक तनाव की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को सरेआम सड़क पर घेर लिया और उन पर बेरहमी से लात-घूसे बरसाए। इस हिंसक घटना ने देश में विरोध प्रदर्शन की तीव्रता और गहराई को बयां किया है, जहां जनता की नाराजगी ने अब सीधे तौर पर उच्च राजनैतिक नेताओं तक को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को राजधानी काठमांडू समेत कई अन्य शहरों में प्रदर्शनकारियों ने भारी तोड़फोड़ और आगजनी की, जिससे पूरे देश की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर हमला किया, जिसे देखकर हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस व्यापक आंदोलन ने सरकार के ढांचे को हिला कर रख दिया है। पहले ही कई मंत्रियों – गृह मंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल और जल आपूर्ति मंत्री प्रदीप यादव – ने इस्तीफा दिया था, और अब प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी अपना पद छोड़ दिया है। यह साफ संकेत है कि बढ़ते जनाक्रोश को रोक पाना अब सरकार के लिए बेहद कठिन हो गया है। वित्त मंत्री विष्णु पौडेल कौन हैं? विष्णुप्रसाद पौडेल नेपाल के प्रमुख कम्युनिस्ट नेताओं में से एक हैं और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के उपाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने नेपाल सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है, जिनमें उपप्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के पद प्रमुख हैं। पौडेल ने कई मौकों पर गृह, उद्योग, जल और रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली है। उनकी व्यापक प्रशासनिक अनुभव की वजह से वे नेपाली राजनीति में एक प्रभावशाली शख्सियत माने जाते हैं।  ओली के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों का जश्न नेपाल में चल रहे प्रदर्शन के बाद जब प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दिया, तो सड़कों पर जश्न मनाया गया. आगजनी और बवाल के बीच प्रदर्शनकारियों ने नाचना शुरू कर दिया.