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राजधानी की सड़कों पर स्मार्ट रोशनी का नया दौर, कंट्रोल सेंटर से होगी स्ट्रीटलाइटों की निगरानी

नई दिल्ली  दिल्ली की सड़कों पर जल्द ही स्मार्ट तकनीक आधारित स्ट्रीटलाइटें लगाई जाएंगी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने करीब 93 हजार स्ट्रीटलाइटों को आधुनिक बनाने की योजना शुरू की है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में ठेकेदारों को एकमुश्त भुगतान नहीं किया जाएगा, बल्कि उनकी EMI कार्यक्षमता के आधार पर दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से सड़कों पर बेहतर रोशनी मिलेगी, रखरखाव में सुधार होगा और सरकारी खर्च का बोझ भी कम होगा। इसके साथ ही दिल्ली में लगे लगभग 1.4 लाख चीनी मूल के सीसीटीवी कैमरों को भी चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। पहले चरण में 50 हजार कैमरे बदले जाने की योजना है। स्मार्ट एलईडी लाइटों से होगा बदलाव PWD की सड़कों पर लगी पुरानी सोडियम वेपर और पुराने एलईडी लाइटों को हटाकर नई स्मार्ट एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी। इसके अलावा लगभग 5,000 नए पोल भी लगाए जाएंगे, ताकि अंधेरे वाले हिस्सों में पर्याप्त रोशनी पहुंच सके। प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा भुगतान नई व्यवस्था में ठेकेदारों को तभी भुगतान मिलेगा जब स्ट्रीटलाइटें सही तरीके से काम करेंगी। यदि लाइटें खराब रहती हैं या समय पर मरम्मत नहीं होती है, तो भुगतान प्रभावित हो सकता है। इससे ठेकेदारों की जवाबदेही बढ़ेगी और रखरखाव बेहतर होगा। कंट्रोल सेंटर से होगी निगरानी PWD मुख्यालय में एक केंद्रीय कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। यहां से हर स्ट्रीटलाइट की रियल टाइम निगरानी की जाएगी। स्मार्ट लाइटों की रोशनी मौसम और जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा भी की जा सकेगी। बिजली बचत पर सरकार का जोर वित्त विभाग के आकलन के अनुसार स्मार्ट एलईडी प्रणाली से बिजली की खपत में बड़ी कमी आएगी। सरकार को उम्मीद है कि अगले पांच वर्षों में लगभग 300 करोड़ रुपये की बचत होगी। अधिकारियों का मानना है कि यह योजना दिल्ली की सड़कों को अधिक सुरक्षित, ऊर्जा-कुशल और तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने में मदद करेगी।

PWD की नई पहल: QR कोड स्कैन कर लोग सीधे दर्ज करा सकेंगे सड़क की शिकायत

नई दिल्ली  दिल्ली में अब सड़क पर गड्ढा, टूटी सड़क या किसी अन्य समस्या की शिकायत करना पहले से कहीं ज्यादा आसान होने वाला है। दिल्ली सरकार का लोक निर्माण विभाग (PWD) जल्द ही अपनी सड़कों पर QR कोड आधारित व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। इसके तहत लोग सड़क किनारे लगे बोर्ड पर मौजूद QR कोड को स्कैन करके सीधे शिकायत दर्ज करा सकेंगे। यह पहल 'नो योर रोड' (Know Your Road) प्रोजेक्ट के तहत शुरू की जा रही है। इसका उद्देश्य लोगों को सड़कों से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराना और मरम्मत कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाना है। यह सुविधा हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी तीन भाषाओं में उपलब्ध होगी। क्या होगी नई व्यवस्था?     दिल्ली की सभी PWD सड़कों को एक यूनिक QR कोड दिया जाएगा।     सड़क किनारे लगे बोर्ड पर यह QR कोड दिखाई देगा।     कोड स्कैन करते ही नागरिक एक ऑनलाइन पोर्टल पर पहुंच जाएंगे। मिलेगी सड़क की पूरी जानकारी     सड़क कब बनी थी और आखिरी बार कब मरम्मत हुई, इसकी जानकारी मिलेगी।     सड़क की देखरेख करने वाले इंजीनियर और ठेकेदार का विवरण भी उपलब्ध होगा।     नागरिक सीधे उसी सड़क से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। 60 दिनों में पूरा होगा काम     प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।     शुरुआत में पांच सड़कों पर इसका परीक्षण होगा।     इसके बाद 100 सड़कों पर पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा।     सफल परीक्षण के बाद पूरे शहर में इसे लागू किया जाएगा। 2500 से ज्यादा QR कोड लगाए जाएंगे     चौथे से आठवें सप्ताह के बीच दिल्ली भर में करीब 2500 QR कोड लगाए जाएंगे।     सड़कों के दोनों ओर सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे।     खराब या क्षतिग्रस्त QR कोड को तुरंत बदला जाएगा।     जवाबदेही और निगरानी होगी मजबूत इस प्रोजेक्ट से सड़कों की निगरानी आसान होगी और शिकायतों के निस्तारण पर नजर रखी जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे सड़क रखरखाव में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को बेहतर सड़क सुविधाएं मिल सकेंगी।

तेज गर्मी और चिपचिपी उमस से बेहाल दिल्ली, अगले 7 दिन मौसम में बड़े बदलाव के आसार नहीं

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में लोगों को इन दिनों तेज गर्मी के साथ भारी उमस का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को तापमान सामान्य के आसपास रहने के बावजूद हवा में नमी अधिक होने से लोगों को ज्यादा गर्मी महसूस हुई। दोपहर के समय घर से बाहर निकलने वालों को चिपचिपी गर्मी ने काफी परेशान किया। मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। हालांकि रविवार रात और सोमवार को हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है। महसूस हुआ 43.4 डिग्री तापमान     रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।     दोपहर 2:30 बजे वास्तविक तापमान 37.2 डिग्री था, लेकिन उमस के कारण यह 43.4 डिग्री जैसा महसूस हुआ।     इसे हीट इंडेक्स या "फील लाइक" तापमान कहा जाता है। अगले कुछ दिनों का मौसम     सोमवार को अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।     26 जून तक तापमान फिर से 40 डिग्री के करीब पहुंच सकता है।     रविवार का न्यूनतम तापमान 28.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक था।     मौसम विभाग ने फिलहाल कोई रंग-आधारित चेतावनी जारी नहीं की है। बारिश अभी भी सामान्य से कम     जून महीने में अब तक सफदरजंग मौसम केंद्र पर 31.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है     पूरे जून महीने की सामान्य वर्षा 74.1 मिमी मानी जाती है।     इससे साफ है कि इस महीने अब तक बारिश सामान्य से काफी कम रही है। हवा की गुणवत्ता रही मध्यम     दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रविवार को 127 दर्ज किया गया।     यह "मध्यम" श्रेणी में आता है।     जून में अब तक 18 दिन हवा की गुणवत्ता मध्यम और 3 दिन संतोषजनक श्रेणी में रही है।

भारत में बुलेट ट्रेन का विस्तार, 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी

 नई दिल्ली देश को अगले साल के मध्य में पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस बुलेट ट्रेन के लिए काम कई सालों से जारी है। इस बीच, देश के सात नए बुलेट ट्रेन हाई स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत, दिल्ली से वाराणसी एक हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनेगा, जिसमें बुलेट ट्रेन महज दो घंटे में ही दिल्ली से लखनऊ पहुंचा देगी। वहीं, दिल्ली से वाराणसी के लिए महज तीन घंटे 15 मिनट का ही समय लेगा। ट्रेन की अधिकतम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और यह हवा से बातें करेगी। मुंबई से अहमदाबाद ( एक घंटे 57 मिनट), मुंबई से पुणे (48 मिनट), बेंगलुरु से चेन्नई (73 मिनट्स), बेंगलुरु से हैदराबाद (2 घंटे 10 मिनट), पुणे से हैदराबाद (2 घंटे 8 मिनट), दिल्ली से लखनऊ (2 घंटे), दिल्ली से वाराणसी (3 घंटे 15 मिनट), दिल्ली से सिलिगुड़ी (6 घंटे) का समय लेगा। इन सात रूट्स पर हाई स्पीड बुलेट ट्रेन चलेगी। दिल्ली से वाराणसी तक लगभग 812 किलोमीटर लंबा रूट होगा। इस पर हाईस्पीड बुलेट ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जबकि संचालन की स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्ण्व ने कहा, ''पीएम मोदी ने सात नए कॉरिडोर का फैसला लिया है। इसके तहत मुंबई से पुणे 170 किलोमीटर के कॉरिडोर पर सफर सिर्फ 48 मिनट में पूरा होगा। अच्छा इकनॉमिक कॉरिडोर बन जाएगा। पुणे से हैदराबाद जोकि 500 किलोमीटर है लगभग, दो घंटे 8 मिनट में पूरा हो जाएगा। महाराष्ट्र में दो लाख करोड़ का निवेश हो रहा है।'' वहीं, लखनऊ से अयोध्या हाईस्पीड रूट की लंबाई 124 किलोमीटर होगी। दिल्ली से वाराणसी रूट पर चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए राज्य में कई शहरों में स्टेशन रखे गए हैं, ताकि आसपास के रहने वाले लोगों को फायदा मिल सके। दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज, वाराणसी में स्टेशन का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, आखिरी फैसला बाद में लिया जाएगा। जापान की मदद से बन रही बुलेट ट्रेन बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है। 508 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने रखी थी। यह परियोजना जापान की शिंकान्सेन तकनीक और आर्थिक मदद से बनाई जा रही है। शुरुआत में इसे 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण और अन्य मंजूरियों में देरी की वजह से इसमें तय समय से ज्यादा लग गया। वर्तमान में निर्माण तेजी से चल रहा है और अधिकांश भूमि अधिग्रहण तथा वैधानिक मंजूरियां पूरी हो चुकी हैं। अगले साल अगस्त में शुरू हो सकती है बुलेट ट्रेन रेल मंत्रालय के अनुसार, गुजरात में कई हिस्सों पर ट्रैक, स्टेशन और वायाडक्ट का काम तेजी से चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि भारत को 15 अगस्त 2027 को अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिलने की संभावना है। पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा तक होगा, उसके बाद वापी से सूरत तक का सेक्शन होगा। वहीं, मुंबई तक पूरी लाइन 2028-29 तक चालू किए जाने की संभावना है। पूरी तरह शुरू होने पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय करीब 2 से 3 घंटे रह जाएगा, जो अभी 6-7 घंटे से अधिक है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: AIIMS दिल्ली में सुबह 5:30 बजे विशेष सत्र

नई दिल्ली  अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर आज एम्स में आयोजित एक विशेष योग सत्र में काफी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। यह सत्र आज 21 जून रविवार की सुबह 5:30 बजे से आयोजित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों के बीच योग और अच्छे स्वास्थ्य के संदेश को पहुंचाना था। इस सत्र में एम्स के डायरेक्टर, सीनियर डॉक्टर, फेकल्टी मेंबर, नर्सेस, मरीज और तीमारदारों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। सेहतमंद जीवनशैली अपनाने पर दिया जोर एम्स परिसर में सुबह से ही सभी लोग जुटना शुरू हो गए थे। स्वास्थ्य को लेकर संदेश देने वाले इस युग सत्र में मौजूद लोगों के साथ मिलकर डायरेक्टर ने विभिन्न योगासन किया और सेहतमंद जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। एम्स दिल्ली में हुआ आयोजन 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आज इस विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया था। इस वर्ष योग दिवस की थीम Start Your Day with Yoga रखी गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को दैनिक जीवन में स्वास्थ्य और योग के प्रति जागरूक करना था। इस खास कार्यक्रम के दौरान लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। कब से मनाया जा रहा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आपको बता दें कि साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया और देखते ही देखते दुनिया के कई देश इस मुहिम में शामिल हो गए। आज भी दुनिया के ज्यादातर देशों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु, पीएम मोदी, उप राष्ट्रपति सहित देश के बड़े नेताओं ने आम लोगों के साथ योग किया।  

राजनीतिक विज्ञापनों पर पाबंदी से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता। कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) के 2019 के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें आदर्श आचार संहिता (MCC) के दौरान दिल्ली मेट्रो में ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाई गई थी। हाई कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो उन कंपनियों के समूह ने दायर की थीं जिनके पास दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के साथ विज्ञापन के अधिकार हैं। इन अधिकारों में ट्रेनों के अंदर और बाहर, साथ ही सिविल स्ट्रक्चर पर विज्ञापन लगाने के कॉन्ट्रैक्ट शामिल हैं। DMRC के फैसले को सही ठहराया इन याचिकाओं में एक सिंगल जज के जनवरी 2020 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें MCC (आदर्श आचार संहिता) लागू रहने के दौरान मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने के DMRC के फैसले को सही ठहराया गया था। याचिकाकर्ताओं ने जून 2019 में ECI की ओर से DMRC को भेजे गए एक संदेश का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान कमर्शियल विज्ञापनों के लिए लीज पर दी गई जगह पर कोई भी राजनीतिक विज्ञापन नहीं लगाया जाएगा। अचार संहिता में तुरंत हटेगा विज्ञापन अगर दी गई जगह पर कोई राजनीतिक विज्ञापन है, तो आदर्श आचार संहिता लागू होते ही उसे तुरंत हटा दिया जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि यह निर्देश संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है, क्योंकि MCC के दौरान राजनीतिक प्रचार के लिए बस शेल्टर जैसी जगहों के इस्तेमाल पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अपील करने वालों पर अपना बिजनेस करने को लेकर 'कोई पूरी रोक नहीं' थी। कोर्ट ने कहा कि MCC लागू होने के दौरान भी वे ऐसे विज्ञापन दिखाने के लिए आजाद थे जो राजनीतिक नहीं थे। बेंच ने कहा कि राजनीतिक विज्ञापनों पर सीमित रोक का मतलब विज्ञापनों पर पूरी तरह से रोक लगाना नहीं है। संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक विज्ञापनों को दिखाने पर रोक (वह भी सीमित समय के लिए) का मतलब यह नहीं है कि कंपनियों को कोई भी विज्ञापन दिखाने से रोका गया था। इसलिए, यह दलील कि इससे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी) और (g) (किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार) का उल्लंघन हुआ है, बेबुनियाद है।  

नवंबर से नए नियम: पार्किंग महंगी, बिना PUCC नहीं मिलेगा ईंधन

नई दिल्ली  दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को 'प्रोएक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क' का ऐलान करते हुए कई बड़े फैसलों की घोषणा की। इसके तहत नवंबर से सरकारी पार्किंग का शुल्क दोगुना किया जाएगा। साथ ही नवंबर 2026 से जनवरी 2027 तक दिल्ली में बाहर से पंजीकृत नॉन-बीएस-4 कमर्शियल वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि नए फ्रेमवर्क के तहत केवल वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUCC) वाले वाहनों को ही दिल्ली के पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल मिलेगा। यानी जिन वाहनों के पास वैध PUCC नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। क्या हैं नए नियम?     वैध PUCC वाले वाहनों को ही पेट्रोल पंपों पर ईंधन मिलेगा।   1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS VI वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। CNG, EV, आपातकालीन सेवाओं और सरकारी कार्यों से जुड़े वाहनों को छूट मिलेगी।     1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना रहेगा।     आवश्यकता पड़ने पर कार्यालयों के समय में बदलाव और सरकारी-निजी कार्यालयों में 50% तक भौतिक उपस्थिति की व्यवस्था लागू की जा सकेगी।     1 नवंबर से 31 जनवरी तक निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्यों में धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।     10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच आवश्यकता पड़ने पर निर्माण कार्यों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकेंगे।     बड़े निर्माण स्थलों और बड़ी बिल्डिंग्स पर एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सप्रेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा।     खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने पर सख्त निगरानी और कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए ड्रोन और फील्ड मॉनिटरिंग का उपयोग किया जाएगा। प्रदूषण के खिलाफ बड़ा एक्शन दिल्ली सरकार का कहना है कि प्रदूषण से लड़ाई का सबसे अच्छा तरीका है समय रहते तैयारी। दिल्ली सरकार इसी संकल्प के साथ सर्दियों से पहले हर जरूरी तैयारी को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है।

दिल्ली सरकार का स्वास्थ्य विभाग में सुधार अभियान, लंबे समय से तैनात डॉक्टरों का होगा तबादला

नई दिल्ली सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) में कथित भ्रष्टाचार के मामले में 40 से अधिक मेडिकल स्टाफ और प्रशासनिक अधिकारियों के ट्रांसफर के साथ डॉक्टर वत्सला अग्रवाल और डॉक्टर विजय कुमार रंगा को सस्पेंड किया गया था। अब दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बढ़ा कदम उठाते हुए तिहाड़ और मंडोली जेलों में लंबे समय से तैनात डॉक्टरों की सिफारिश एलजी से की है। 39 डॉक्टरों का किया जा सकता है तबादला प्रस्ताव के मुताबिक 5 साल या उससे अधिक समय से एक ही जगह कार्यरत 39 डॉक्टरों का तबादला किया जा सकता है। इनमें कई डॉक्टर ऐसे भी है, जो 2014 से लगातार एक ही स्थान पर तैनात है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, तिहाड़ और मंडोली जेलों में कार्यरत स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और जनरल ड्यूटी मेडिकल अधिकारियों (जीडीएमओ) को मिलाकर 39 डॉक्टरों के ट्रांसफर का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इनके स्थान पर करीब 35 अन्य डॉक्टरों की तैनाती भी प्रस्तावित है। इस तरह कुल 74 ट्रांसफर किए जाने की योजना है। ह्यूमन रिसोर्स का संतुलित उपयोग जरूरी सरकार का कहना है कि किसी भी विभाग में लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती रहने से कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। ऐसे में समय-समय पर पोस्टिंग की समीक्षा और ह्यूमन रिसोर्स का संतुलित उपयोग जरूरी है। इसी सोच के तहत जेल अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों के ट्रांसफर की सिफारिश की गई है। तैनात कर्मचारियों की समीक्षा की जा रही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न इकाइयों को अधिक सक्षम, जवाबदेह और जनहित केंद्रित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी कारण विभिन्न संस्थानों में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों की समीक्षा की जा रही है और जरूरत के अनुसार बदलाव किए जा रहे हैं। तिहाड़ और मंडोली जेलों में लंबे समय से तैनात डॉक्टरों के ट्रांसफर की सिफारिशें भी इसी प्रशासनिक सुधार अभियान का हिस्सा है।  

लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट में जजों की भागीदारी वाले वायरल दावे को लेकर विवाद

नई दिल्ली  भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) ने ऑनलाइन वायरल हो रही फेक न्यूज के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। फेक खबर में दावा किया जा रहा था कि इस महीने लंदन में हुए बैडमिंटन टूर्नामेंट में कई दर्जन भारतीय जजों ने भाग लिया।दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले को शुक्रवार को ही तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। क्या है लंदन में जजों के खेलने का पूरा मामला खबरों के मुताबिक, काफी संख्या में न्यायाधीश और वकील दूसरे अंतरराष्ट्रीय बार एंड बेंच बैडमिंटन चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए ब्रिटेन गए थे। 7 जून को लंदन के साउथॉल में भारत और ब्रिटेन के वकीलों के लिए एक 'अंतरराष्ट्रीय' बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। बताया जा रहा है कि इसका आयोजन पूर्व अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी और डेका इवेंट्स की संस्थापक अबंतिका डेका ने किया था। इस कार्यक्रम को भारत के केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के साथ-साथ कुछ कॉर्पोरेट कंपनियों ने भी प्रायोजित किया था। देखते ही देश में शुरू हो गई बहस हालांकि, इस आयोजन की आलोचना के साथ ही देश में एक नया मुद्दा सामने आ गया। वकील प्रशांत भूषण ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवालों की बौछार कर दी थी। उन्होंने एक्स पर लिखा था, 'कानून मंत्रालय द्वारा लंदन में आज भारतीय न्यायाधीशों और वकीलों के बीच एक अद्भुत बैडमिंटन टूर्नामेंट प्रायोजित किया जा रहा है! अन्य प्रायोजक विभिन्न कॉर्पोरेट कंपनियां हैं। मुख्य न्यायाधीश और कानून मंत्री द्वारा उद्घाटन किया जा रहा है! 150 न्यायाधीश और वकील भाग ले रहे हैं! प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील का क्या हुआ? न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता का क्या हुआ? न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या हुआ? घिनौना!' वहीं, सोशल मीडिया पर फिजूलखर्ची को लेकर केंद्र सरकार पर एक से बढ़कर एक आरोप लगने लगे। आज ही होगी सुनवाई शुक्रवार को अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। भारतीय बैडमिंटन संघ ने इस वायरल खबर को ही नकार दिया है। इसी मामले की सुनवाई के निए उसने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने भी केस की गंभीरता और न्यायाधीशों की शुचिता का ख्याल रखते हुए इस मुकदमे की तत्काल सुनवाई करना तय किया है।  

शादीपुर चौक से आश्रम चौक तक, जानिए दिल्ली की टॉप-10 ट्रैफिक जाम वाली लोकेशन

नई दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली में जाम के टॉप-10 लोकेशन की पहचान की है और लिस्ट दिल्ली सरकार को भेजी है। पुलिस ने कहा है कि इन 10 जगहों पर पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या है और इसका समाधान जरूरी है। सभी लोकेशन दिल्ली के महत्वपूर्ण जंक्शन में से एक स्थानों पर जाम की समस्या है, उसकी वजह भी पुलिस ने बताई है। नो एंट्री लागू करने का सुझाव दिल्ली सरकार के अफसरों के अनुसार दिल्ली में 10 ऐसी लोकेशन हैं, जो काफी प्रमुख हैं। हर जगह जाम के अलग-अलग कारण ट्रैफिक पुलिस ने बताए हैं। ट्रैफिक पुलिस ने सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि कोंडली ब्रिज पर गाजीपुर रोड से सामान्य से अधिक ट्रैफिक भार का आना जाम की वजह है। पुलिस का सुझाव है कि पीक आवर के दौरान गाजीपुर रोड पर नो-एंट्री लागू किया जाना चाहिए। लंबे समय से रोड जाम की समस्या महरौली-बदरपुर रोड (एमबी रोड) पर पुलिस ने मेट्रो कंस्ट्रक्शन वर्क की वजह से जाम बताया है। पुलिस ने कहा है कि एमबी रोड एमजी रोड (महरौली-गुड़गांव रोड) रोड को सैलाब के पास कनेक्ट करती है। इससे पहले तक मेट्रो का काम चल रहा है। कंस्ट्रक्शन वर्क के चलते रोड के आधे से अधिक हिस्से की बैरिकेडिंग की गई है, जिससे गाड़ियों को चलने के लिए जगह काफी कम हो गई है, जिससे लंबे समय से इस रोड पर जाम की समस्या है। जाम की टॉप-10 लोकेशन     शादीपुर चौक     कोंडली ब्रिज     आनंद विहार बस अड्डा     आजादपुर मंडी     बवाना चौक     एमबी रोड     आश्रम चौक     मथुरा रोड     जैतपुर मोड़     भैरा एनक्लेव