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खादी की नई पहचान: रीगल बिल्डिंग में खुल रहा 4 मंजिला मॉडर्न खादी भवन, कैफे का भी मिलेगा आनंद

 नई दिल्ली कनॉट प्लेस की रीगल बिल्डिंग में खादी और ग्रामोद्योग आयोग ( KVIC ) का एक नया और आधुनिक ' खादी भवन ' तैयार होने जा रहा है। इस साल के अंत तक बनकर तैयार होने वाले इस चार मंजिला खादी भवन में ग्राहकों को मैकेनाइज्ड फ्लोर सहित कई आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इसकी एक और बड़ी खासियत यह होगी मनोज गोयल कि यहां आने वाले ग्राहक पहली बार खरीदारी के साथ साथ एक बेहतरीन कैफे हाउस का भी आनंद ले सकेंगे। कस्टमाइजेशन की सुविधा KVIC के चेयरमैन मनोज गोयल ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) की पसंद और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए खादी के पहनावे मैं बड़ा बदलाव किया जा रहा है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग की ये तमाम उपलब्धियां प्रधानमंत्री के विजन का परिणाम हैं। इसी के तहत खादी भवन में पहली बार ग्राहकों को कस्टमाइजेशन की सुविधा दी जा रही है। यदि किसी ग्राहक को अपनी पसंद के अनुसार ड्रेस में कोई विशेष डिजाइन या फिटिंग करवानी है, तो वह वहीं पर मौजूद विशेष सेक्शन में इसके बारे में बता सकता है। मनपसंद ड्रेस सिलवा सकेंगे यहां महिला और पुरुष दोनों के लिए अलग-अलग फैब्रिकेटर तैनात रहेंगे। ग्राहकों की पसंद को और अधिक आधुनिक रूप देने के लिए यहां AI तकनीक की मदद भी ली जाएगी। ग्राहक अपनी पसंद का खादी कपड़ा खरीदकर AI द्वारा तैयार डिजाइनों के आधार पर अपनी मनपसंद ड्रेस सिलवा सकते हैं। बेहतरीन डिजाइनिंग के लिए नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) और सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर खादी (COEK) के विशेषज्ञ डिजाइनर और फैब्रिकेटर हमेशा इस खादी भवन में मौजूद रहेंगे। हथकरघा उत्पाद भी मिलेंगे नए खादी मॉल में कपड़ों के अलावा ग्रामोद्योग के अन्य सामान भी पहले से कहीं अधिक वैरायटी में उपलब्ध होंगे। इसके अलावा, खादी भवन में देश के दूर-दराज के इलाकों से लाए गए हथकरघा उत्पाद भी मिलेंगे, जिनमें लकड़ी और बांस के अनोखे सामानों के साथ-साथ विशेष रूप से कमल के फूल से बने दुर्लभ रेशमी कपड़े भी शामिल हैं।

पारदर्शिता पर जोर: लेखा विभाग में 19 अधिकारियों को प्रमोशन, 52 का ट्रांसफर

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार ने वित्त एवं लेखा विभाग में बीते पांच साल से मौजूद 52 अधिकारियों का तबादला कर दिया है। सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता को मजबूत करने के उद्देश्य से यह फेरबदल किया है। इनमें 23 डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स और 29 वरिष्ठ लेखाधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा सरकार ने विभागीय कार्यकुशलता को बढ़ावा देते हुए 19 वरिष्ठ लेखा अधिकारियों (सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर) को पदोन्नत कर डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स बनाया है। सरकार का कहना है कि ये सभी निर्णय प्रशासनिक आवश्यकताओं, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शी कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं। सीएम रेखा गुप्ता ने क्या कहा?     मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो पारदर्शिता, जवाबदेही, दक्षता और सुशासन के उच्चतम मानकों पर आधारित हो।     उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था में शिथिलता, लापरवाही और भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं है। सरकार के अनुसार, वित्त एवं लेखा विभाग में किए गए इस व्यापक फेरबदल से वित्तीय प्रबंधन और समयबद्ध निर्णयों के माध्यम से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। द्वारका में 500 किलोवॉट का सोलर प्लांट शुरू पालम विधानसभा क्षेत्र के द्वारका सेक्टर 7 स्थित एयर फोर्स और नेवल ऑफिसर्स एनक्लेव में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 500 किलोवॉट क्षमता के सोलर पावर प्लाट का उद्‌घाटन किया। यह सोलर प्लाट सोसायटी के करीब 375 घरो की बिजली की जरूरतों को स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करेगा। मुख्यमंत्री ने उ‌द्घाटन के दौरान बताया कि प्लाट चालू होने से एनक्लेव का मासिक बिजली खर्च करीब 12 लाख रुपये से घटकर आधा, यानी लगभग 6 लाख रुपये रह जाएगा। इससे सोसायटी के निवासियों को हर साल करीब 72 लाख रुपये की बचत होगी। करीब दो करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से 90 लाख रुपये और दिल्ली सरकार की ओर से 10 लाख रूपये की सब्सिडी दी गई है।  

ईंधन संकट टला, दिल्ली में WFH और बदली ऑफिस टाइमिंग का आदेश वापस

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने के बाद दिल्ली सरकार ने सरकारी ऑफिसों में ईंधन बचाने के लिए लागू विशेष इंतजामों को समाप्त कर दिया। सीएम रेखा गुप्ता ने हफ्ते में दो दिन (बुधवार और शनिवार) को लागू वर्क फ्रॉम होम (WFH) व्यवस्था खत्म कर दी है। सरकारी ऑफिसों के अलग-अलग समय के फैसले को भी वापस ले लिया गया है। समय में फिर हुआ बदलाव नए आदेश के मुताबिक दिल्ली सरकार के सभी ऑफिस सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुले रहेंगे। पहले यह समय बदलकर सुबह 10:30 बजे से शाम 7 बजे कर दिया गया था। हालांकि, MCD के कर्मचारियों के लिए पहले से लागू समय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये नियम किए गए थे लागू 14 मई को दिल्ली सरकार ने ईंधन की आपूर्ति पर पड़े असर को देखते हुए WFH, ऑफिस टाइमिंग में बदलाव, मंडे मेट्रो जैसे कई अहम फैसले लागू किए थे। सरकार का कहना है कि सुरक्षा स्थिति और ईंधन की आपूर्ति सामान्य होने के बाद प्रशासनिक कामों को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के मकसद से यह फैसला लिया गया है। पीएम मोदी ने की थी अपील बता दें कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच पीएम मोदी ने ईंधन की बचत करने की अपील की थी। प्रधानमंत्री की अपील के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने राजधानी में कई बड़े फैसले किए थे। सीएम ने ऐलान किया था कि मेट्रो डे मनाया जाएगा। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन नो कार डे होगा। चलाई जा रहीं स्पेशल बसें तब दिल्ली सरकार और एमसीडी के ऑफिस का समय भी बदल दिया गया था। दिल्ली सरकार के ऑफिस सुबह 10.30 से शाम 7 बजे। एमसीडी ऑफिस सुबह 8.30 बजे से कर दिए गए थे। सरकारी 29 कॉलोनी से 58 स्पेशल बस चलाई जा रही थीं। इसके अलावा कंपनियों को सप्ताह में कम से कम 2 दिन वर्क फ्रॉम होम करावाने का निर्देश जारी किया गया था।

शरजील इमाम-उमर खालिद को नहीं मिली राहत, दिल्ली कोर्ट ने बेल अर्जी की खारिज

 नई दिल्ली दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की एक अदालत ने उनकी जमानत याचका खारिज कर दी हैष शनिवार को दोनों ओर से दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शाम को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट में उमर की ओर से अधिवक्ता त्रिदीप पेस और शरजील की ओर से अधिवक्ता मुस्तफा ने दलीलें पेश की थीं। जमानत के लिए क्या दी गई दलील? उमर खालिद और शरजील इमाम ने जमानत याचिकाओं में दलील दी कि मुकदमे की सुनवाई शुरू हुए बिना उन्हें लगातार हिरासत में रखना स्वतंत्रता के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। उनकी याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से फैसले के 6 महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद, मुकदमे की कार्यवाही में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है और आरोपों पर बहस अभी भी अधूरी है। उन्होंने दलील दी कि वे इस मामले में लगभग 6 साल से जेल में हैं। खालिद की याचिका में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने भले ही उनकी पिछली जमानत याचिका खारिज कर दी थी लेकिन उसके बाद हुए न्यायिक घटनाक्रम से परिस्थितियों में बदलाव आया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नई याचिका की थी दायर उन्होंने मई में एक अन्य मामले में अदालत की उस टिप्पणी का जिक्र किया, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत भी जमानत नियम है। सुप्रीम कोर्ट ने पांच जनवरी को यूएपीए मामले में दोनों को जमानत देने से इनकार कर दिया था जिसके बाद ये नई याचिकाएं दायर की गई थीं। उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य लोगों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे कथित व्यापक साजिश का हिस्सा होने के आरोप में आतंकवाद-रोधी कानून यूएपीए और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

ऐप से ई-रिक्शा लॉक होने का दावा कितना सच? साइबर एक्सपर्ट ने बताई हकीकत

नई दिल्ली  एक वायरल वीडियो से ईवी की बैटरी सुरक्षा को सस्ती लिथियम बैटरी वाले ई-रिक्शा में लग सकता है 'रिमोट ब्रेक' लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ई-रिक्शा को चलते चलते एक ऐप(BAT/BMS) से लॉक होने की बात कही जा रही है। बैटरियों में नहीं होती ब्लूटूथ की सुविधा साइबर एक्सपर्ट शौर्य कौशिक ने बताया कि वायरल वीडियो में जो दावा किया जा रहा है, वैसा कमजोर बैटरी वाले ई-रिक्शा में हो सकता है। भारत में लिथियम बैटरी वाले कई ई-रिक्शा निर्माता अपनी अलग-अलग बैटरी मैनेजमेंट तकनीक और अलग मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते है। इन्हें इस ऐप से कनेक्ट नहीं किया जा सकता। लेड एसिड बैटरियों पर चल रहे हैं ई-रिक्शा साथ ही कई ई-रिक्शा पारंपरिक लेड एसिड बैटरियों पर चल रहे हैं। इन बैटरियों में भी ब्लूटूथ की सुविधा नहीं होती। उन्होंने साफ कहा कि यह साइबर सुरक्षा में सेंध या साइबर हमला नहीं है, बल्कि कुछ बैटरी सिस्टम में मौजूद कमजोर सुरक्षा व्यवस्था की समस्या है। 'सभी ई-रिक्शा नहीं हो सकते ऐप से ऑफ' एनबीटी रिपोर्टर ने इस ऐप को डाउनलोड कर हकीकत जानने की कोशिश की। ई-रिक्शा स्टैंड के बाहर जब इस ऐप को ऑन किया तो इस पर कुछ ब्लूटूथ डिवाइस कनेक्ट हुए, लेकिन इन्हें कनेक्ट करने पर भी बैटरी को बंद करने का विकल्प ऐप पर नही दिखा। द्वारका के ई-रिक्शा डीलर सुमित अग्रवाल ने बताया कि यह ऐप बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम के लिए है। यह सिर्फ उन्हीं बैटरियों के साथ काम करता है, जिनमें संबंधित बीएमसी और ब्लूटूथ मॉड्यूल मौजूद होता है। ऐसे ई-रिक्शा को उस ऐप से कट्रोल करना संभव है।

दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी में सब्सिडी, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क से बड़ी राहत

नई दिल्ली मुख्यमंत्रीा रेखा गुप्ता का कहना है कि नई ईवी पॉलिसी 2026 सिर्फ प्रदूषण कम करने की योजना नहीं, बल्कि आम लोगों के पैसे बचाने वाली नीति भी है। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक, ईवी खरीदारों को इलेक्ट्रिक टू वीलर पर 50 हजार रुपये, ई-ऑटो पर 75 हजार और कमर्शल एन-1 गुड्स कैरियर पर 1.50 लाख रुपये तक की शुरुआती बचत हो सकती है। रेखा गुप्ता का कहना है कि इस नीति का मकसद ईवी की शुरुआती खरीद लागत के साथ-साथ उनके पूरे जीवनकाल में होने वाले खर्च को कम करना है ताकि  अधिक से अधिक लोग ईवी अपनाने के लिए प्रेरित हों। सरकार देती है प्रोत्साहन राशि, आजीवन रोड टैक्स में छूट मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नई ईवी पॉलिसी नई गाड़ी खरीदने के लिए प्रोत्साहित करता है, प्रदूषण वाली पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर प्रोत्साहन राशि देता है, आजीवन रोड टैक्स में छूट है, रजिस्ट्रेशन शुल्क में माफी और पेट्रोल व डीजल गाड़ियों की तुलना में इसे चलाने में कम खर्च और रखरखाव भी सस्ता है। यही कारण है कि ईवी अब घरों, व्यावसायिक चालकों और छोटे-बड़े व्यवसायों के लिए सबसे समझदारी भरा आर्थिक विकल्प बन रहे हैं। इलेक्ट्रिक दोपहिया पर सब्सिडी     सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रिक दोपहिया पर 30,000 रुपये तक की सब्सिडी, स्क्रैपिंग पर 10,000 रुपये की छूट, गाड़ी के पूरे जीवनकाल के लिए रोड टैक्स में छूट, रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी माफी मिलेगी।     इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा (एल-5) खरीदने वाले को 50,000 रुपये तक की छूट नया ऑटो खरीदने पर मिलेगी। 25,000 रुपये स्क्रैपिंग के एवज में मिलेगे।     इलेक्ट्रिक ग्रामीण सेवा गाड़ी खरीदने वालो को पुरानी गाड़ियो को स्क्रैप कराने पर 15,000 रुपये, इलेक्ट्रिक एन-1 गुड्स कैरियर को 1 लाख रुपये तक नई गाड़ी खरीदने पर मिलेंगे, इन्हें 50,000 रुपये स्क्रैपिंग पर मिलेगा। पॉलिसी में कई वित्तीय फायदे जोड़े सीएम ने बताया कि खरीद प्रोत्साहन, स्क्रैपिंग प्रोत्साहन, आजीवन रोड टैक्स छूट और एकमुश्त रजिस्ट्रेशन शुल्क माफी का लाभ लेकर गाड़ी की वास्तविक खरीद लागत को काफी कम कर सकते है। इससे ईवी खरीदने के लिए दिल्ली देश के सबसे आकर्षक राज्यों में से एक बन गई है। रोड टैक्स की छूट सबसे अहम     सीएम ने कहा कि इस नीति के तहत रोड टैक्स से मिलने वाली छूट केवल नीति की अवधि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गाड़ी के पूरे जीवन काल तक लागू रहेगी। साथ ही गाड़ी खरीदते समय रजिस्ट्रेशन शुल्क में भी पूरी छूट मिलेगी।     प्राइवेट इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर प्रोत्साहन का प्रावधान नहीं है। लेकिन पारंपरिक ईंधन वाली कार को स्क्रैप कर इलेक्ट्रिक कार खरीदता है तो एक लाख रुपये तक की राशि मिलेगी।

पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग न होने से मतदाताओं की बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया जारी है। घर-घर पहुंच रहे बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को अब नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लोग 2002 की मतदाता सूची से अपना मिलान नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं जो 2002 में ही मतदाता बनने के लिए एजिलिबल हो गए थे, लेकिन उन्होंने अपने वोटर कार्ड नहीं बनवाए। ऐसे लोगों के नाम नहीं मिल रहे हैं। तकनीकी दिक्कतों से माता-पिता से नाम की मैपिंग नहीं करा पा रहे हैं। सूची से मैपिंग कराने में करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना पुरानी मतदाता सूची से मैपिंग कराने में लोगों को सर्वाधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग ऐसे हैं जो 2002 में 18 वर्ष के हो गए थे। लेकिन उन्होंने अपना मतदाता पहचान पत्र 2005 या उसके बाद बनवाया। इससे उनका नाम सूची में नहीं मिल रहा है। चुनाव आयोग ने व्यवस्था की है कि जो 2002 की सूची में नहीं है वह अपने माता-पिता या दादा-दादी के नाम के साथ मैपिंग कर सकते हैं। अब समस्या आ रही है कि उनकी मैपिंग माता-पिता के नाम के साथ नहीं हो पा रही है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिनमें माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। दादा-दादी के बारे में भी जानकारी नहीं है। 2002 में वे मतदाता नहीं थे और अब मैपिंग में अपना नाम नहीं दिखा पा रहे हैं। कई मामलो में माता-पिता की मौत हो चुकी पटपड़गंज इलाके में एन्युमरेशन फॉर्म भरवा रहे BLO अरुण कुमार ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे है, जिनमें 2002 में एलिजिबल होकर भी मतदाता पहचान पत्र नहीं बनवाया, अब उनके नाम नहीं मिल रहे हैं। कई मामलो में माता-पिता की मौत हो चुकी है। उनके नाम की मैपिंग करना चुनौतीभरा साबित हो रहा है। उत्तर भारत पहुंचा मॉनसून, दिल्ली-यूपी-बिहार से लेकर पंजाब-हरियाणा तक कैसी होगी बरसात? हम उनको समझा रहे हैं कि अगर आपका नाम 5 अगस्त को प्रकाशित होने वाले ड्राफ्ट रोल में नहीं आता है, तो उनके पास दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका है। इसके बाद जरूरी 12 दस्तावेज में से कोई भी एक पेश करके वह अपना नाम जुड़वा सकते हैं। लेकिन, लोगों में डर का माहौल है कि उनका नाम कट जाएगा तो वापस नहीं जुड़ेगा। ऐसे में लोगों को समझाने में काफी मुश्किल हो रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक 2002 में एलिजिबल होकर भी मतदाता पहचान पत्र नहीं बनवा सके तो माता-पिता से अपनी मैपिंग करा सकते हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। 3 दिनों में बांटे 21 लाख से ज्यादा फॉर्म SIR के तीसरे दिन बीएलओ ने घर-घर जाकर एन्युमरेशन फॉर्म बांटे। गुरुवार की रात 8 बजे तक दिल्ली में कुल 21 लाख 2 हजार 79 चुनावी फॉर्म वांटे जा चुके है, जो कि कुल मतदाताओं का 14.49 प्रतिशत है। हालांकि, बांटे गए फॉर्मों को डिजिटल प्लैटफॉर्म पर दर्ज करने यानी डिजिटाइजेशन की रफ्तार अभी काफी धीमी है। अब तक केवल 63 हजार 620 फॉर्मों का ही डिजिटाइजेशन हो पाया है।

Delhi HC की ध्रुव राठी को फटकार, अदालत बोली- भावनाएं आहत करने वाला कंटेंट नहीं चलेगा

नई दिल्ली यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक विवादित वीडियो को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने सरकार की शिकायत अपीलीय समिति (Grievance Appellate Committee-GAC) को आदेश दिया है कि वह वीडियो हटाने की मांग वाली अपील पर 15 दिनों के भीतर फैसला सुनाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके आदेश की किसी भी तरह की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।  यह मामला ध्रुव राठी के इसी साल 21 मार्च को अपलोड किए गए यूट्यूब वीडियो 'क्या हिंदू बीफ खा सकते हैं? केरल स्टोरी 2 का पर्दाफाश' से जुड़ा है. याचिकाकर्ता वकील अमिता सचदेवा का आरोप है कि इस वीडियो में भगवान राम, माता सीता और भगवान कृष्ण के बारे में कथित तौर पर कहा गया कि वे मांस और शराब का सेवन करते थे, जिससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।  सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने कहा कि यूट्यूब जैसे इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को उचित सावधानी बरतनी चाहिए थी. उनका तर्क था कि आपत्तिजनक और नफरत फैलाने वाले कंटेंट को तुरंत हटाया जाना चाहिए था. उन्होंने अदालत से कहा कि ध्रुव राठी का वीडियो नुकसान पहुंचाने वाला है और समाज में फूट डालने वाला कंटेंट है।  या तो गूगल वीडियो हटाए, या कोर्ट दे आदेश! एएसजी ने यह भी कहा कि या तो गूगल खुद वीडियो हटाने का फैसला करे या फिर अदालत इस मामले में उचित आदेश पारित करे. उन्होंने कहा कि ऐसे कंटेंट को मंच नहीं मिलना चाहिए, जो बहुसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता हो।  15 दिनों के भीतर GAC को देना होगा फैसला- कोर्ट वहीं गूगल की तरफ से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कंपनी अपना जवाब याचिकाकर्ता को दे चुकी है और इस मामले में GAC के सामने अपील भी दायर कर दी गई है. इसके बाद जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने GAC को 15 दिनों के भीतर अपील पर फैसला लेने का निर्देश दिया।  फिलहाल हाईकोर्ट ने वीडियो हटाने पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है. अब सभी की नजर GAC के फैसले पर टिकी है, जिसे अदालत के निर्देश के मुताबिक अगले 15 दिनों के भीतर अपना फैसला देना होगा। 

पति ने तलाक के साथ भेजीं पत्नी की प्राइवेट तस्वीरें, हाई कोर्ट की टिप्पणी से छिड़ी बहस

नई दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट में एक अजीब मामला सामने आया है। एक शख्स ने दिल्ली हाई कोर्ट में तलाक की अर्जी के साथ पत्नी की प्राइवेट तस्वीरें भी भेज दी। अदालत ने व्यक्ति के इस कदम पर हैरानी जताई। हालांकिइसके बावजूद पति और उसके वकील के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह कृत्य गंभीर चूक की श्रेणी में आता है। लेकिन प्रतिवादी पति व वकील ने माफी मांग ली है। इसलिए उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई उचित नहीं है। हाई कोर्ट यह भी कहा कि इस तरह से संवेदनशील दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में सबमिट करना चाहिए। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने की। अदालत ने अपने फैसले में माना कि हालांकि इस तरह के कृत्य को खुली मंजूरी नहीं दी जा सकती। लेकिन इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वैवाहिक विवाद के मामलों में इस तरह की गलतियां अकसर हो जाती हैं। इन्हें सुधारा जाना चाहिए। इस मामले में वर्ष 2015 के दिल्ली हाई कोर्ट के एक पूर्व फैसले के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। अदालत ने कहा- दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में पेश होने चाहिए उस फैसले में निर्देश दिया गया था कि संवेदनशील या निजी प्रकृति के दस्तावेजों को पहले अदालत की अनुमति लेकर सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता महिला का तर्क था कि प्रतिवादियों ने फैमिली कोर्ट में दायर तलाक की अर्जी के साथ बिना किसी बदलाव के निजी तस्वीरें लगाकर उन निर्देशों का उल्लंघन किया। हालांकि हाई कोर्ट की पीठ ने गौर किया कि प्रतिवादियों का दावा है कि उन्हें उन निर्देशों की जानकारी नहीं थी। पीठ ने कहा कि इसके अलावा जब प्रतिवादी पति व उसके वकीलों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपने कार्यों को सही ठहराने की कोशिश नहीं की, बल्कि बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने फैमिली कोर्ट में उन तस्वीरों को सीलबंद लिफाफे में रखने के लिए एक अर्जी दाखिल की है। पीठ ने कहा कि इसे गंभीर चूक माना जा सकता है। लेकिन अवमानना की कार्रवाई शुरु करना उचित नहीं है। अदालत ने पति को चेतावनी दी पीठ ने साथ ही यह चेतावनी भी दी कि महिला से संबंधित मामलों में इस तरह की भविष्य में गलती नहीं होनी चाहिए। अवमानना ​​याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता महिला को अपनी पहचान छिपाने व संबंधित सामग्री की सुरक्षा के लिए फैमिली कोर्ट में जाने की छूट दी। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि वे तस्वीरों को खुले रिकॉर्ड से हटा दें। उन्हें सीलबंद लिफाफे में रखें।

स्पेशल सेल की बड़ी कार्रवाई, दिल्ली में फायरिंग की साजिश रच रहे चार गिरफ्तार

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने राष्ट्रीय राजधानी में बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक ये सभी पाकिस्तान स्थित ISI हैंडलर शाहजाद भट्टी के संपर्क में थे और उसके निर्देश पर दिल्ली में फायरिंग जैसी आतंकी वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी विदेशी फोन नंबरों और एन्क्रिप्टेड माध्यमों से अपने पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में रहते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभदीप सिंह (23), गुरजंत सिंह (22), साजन सिंह (28) और गगनप्रीत (24) के रूप में हुई है। इनमें तीन आरोपी पंजाब के और एक दिल्ली से पकड़ा गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से दो विदेशी पिस्तौल, नौ जिंदा कारतूस और पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। क्या-क्या बरामद हुआ?     दो विदेशी निर्मित पिस्तौल।     नौ जिंदा कारतूस।     पांच मोबाइल फोन, जिनमें अहम डिजिटल सबूत मिलने की संभावना है। ड्रोन से पहुंचते थे हथियार और नशा     पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि हथियार और मादक पदार्थ पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पंजाब सीमा पर भेजे जाते थे।     इसके बाद इन्हें अलग-अलग राज्यों में पहुंचाने का काम किया जाता था। दिल्ली में की थी रेकी     पुलिस के अनुसार आरोपी गगनप्रीत ने दिल्ली के कई पुलिस थानों और धार्मिक स्थलों की रेकी की थी।     उसे राजधानी में फायरिंग की घटना को अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच का दायरा बढ़ा     स्पेशल सेल अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।     जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस मॉड्यूल के देश के अन्य राज्यों में भी संपर्क थे या नहीं। हाल के महीनों में शाहजाद भट्टी से जुड़े कई मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है, जिससे संकेत मिलता है कि सुरक्षा एजेंसियां ऐसे नेटवर्क पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।