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Delhi Government issues ‘Flood Control Order 2026’; major preparations ahead of the monsoon

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगामी मानसून के मद्देनजर बुधवार को ‘बाढ़ नियंत्रण आदेश 2026’ जारी करते हुए राजधानी के उन क्षेत्रों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्त करने का निर्देश दिया जहां बरसात में जलभराव हो जाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जारी किया बयान सीएम रेखा गुप्ता ने यह भी निर्देश दिया कि इन नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और किसी भी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित अधिकारी सीधे जवाबदेह होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी बयान के मुताबिक सीएम गुप्ता ने ये निर्देश सचिवालय में शीर्ष समिति की उच्च स्तरीय बैठक में दिए जिसमें आगामी मॉनसून और संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न विभागों द्वारा की गई तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। सीएम गुप्ता ने सभी विभागों को दिया निर्देश उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र की लगातार निगरानी की जाए। बयान के मुताबिक, विभिन्न एजेंसियों के नालों के जंक्शन बिंदुओं पर जल निकासी में कोई बाधा न आए, इसके लिए सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के साथ मिलकर संयुक्त निरीक्षण समितियां गठित की हैं। सीएम ने जारी किया ‘बाढ़ नियंत्रण आदेश-2026’ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘बाढ़ नियंत्रण आदेश-2026’ जारी किया। सीएम गुप्ता ने बताया कि यह आदेश सभी विभागों के लिए दिशानिर्देश पुस्तिका के रूप में काम करेगा और इसमें जल निकासी प्रणाली, नदी के तटबंध, पंपिंग स्टेशन, नियामक तंत्र, परिचालन योजना, सभी मशीनरी की जानकारी और नियंत्रण कक्षों के संपर्क नंबर शामिल हैं। मानसून से पहले सीएम ने आदेश उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी विभाग अपनी टीमों को अलर्ट पर रखें और मानसून के दौरान हर आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। उन्होंने आदेश दिए “राहत और बचाव कार्य में इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरणों की जांच हो। बाढ़ की स्थिति में संबंधित विभाग लोगों को सकुशल सुरक्षित स्थानों पर भेजने के पुख्ता इंतजाम करें। बैठक में अधिकारियों ने दी जानकारी साथ ही पीडब्ल्यूडी व अन्य विभाग सुनिश्चित करें कि बरसात के दौरान दिल्ली में जलजमाव न हो इसके लिए सभी स्थायी पंप हाउस की जांच हो और जलजमाव वाले इलाकों में मोबाइल पंप भी तैनात किए जाएं। सीएमओ के मुताबिक, बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि 15 जून से केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24×7 आधार पर सक्रिय कर दिया गया है। दिल्ली के मंत्रियों की अध्यक्षता में गठन की कमेटियां साथ ही, दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, आशीष सूद और मनजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व में उच्च स्तरीय सेक्टर कमेटियों का गठन किया गया है तथा प्रत्येक सेक्टर कमेटी में तीन चार जिलाधिकारी (डीएम) शामिल होंगे। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन और समन्वय के लिए पूरी तरह उत्तरदायी होंगे। पिछले साल की तुलना में दिल्ली में बढ़ी पंपों की संख्या बयान के अनुसार, बैठक के दौरान सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने बाढ़ जैसे हालात से निपटने व नियंत्रण के लिए व्यापक संरचनात्मक, तकनीकी व अन्य सुधारों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। सीएमओ ने बताया कि विभाग ने 22 प्रमुख नालों सहित कुल 77 नालों से 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद निकाली है और शेष कार्य युद्धस्तर पर जारी है। साथ ही पिछले वर्ष की तुलना में विभाग ने पंपों की संख्या बढ़ाकर 243 से अधिक कर दी है। आपात स्थितियों से निपटने के लिए सरकार ने की व्यवस्थाएं बयान के मुताबिक, आपात स्थितियों से निपटने के लिए नावों की संख्या बढ़ाकर 41 कर दी गई है और 31 मोटरबोट इंजन व 12 बोट कैरिज ट्रॉलियां भी उपलब्ध कराई हैं। बैठक में बताया गया कि नगर निगम के सभी 12 जोनों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं और स्थायी एवं पोर्टेबल पंपों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। संभावित जलभराव वाली जगहों के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।  

97 परीक्षा केंद्रों पर विशेष इंतजाम, अभिभावकों को मिलेगा पेयजल, शिकंजी और आरामदायक प्रतीक्षा सुविधा

नई दिल्ली  देशभर में 21 जून को होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने मानवीय पहल की है। सरकार ने नीट परीक्षार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों की सुविधा का भी विशेष प्रबंध किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहली बार है, जब परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देने वालों के साथ-साथ उनके माता-पिता और परिजनों के आराम एवं सुविधा को ध्यान में रखते हुए कूलिंग जोन बनाए जा रहे हैं, जहां उनके बैठने की सुविधा, स्वच्छ पेयजल, शिकंजी आदि आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में नीट परीक्षा के लिए कुल 97 केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 69 सरकारी विद्यालय में तथा 28 केंद्रीय विद्यालयों में हैं। इन परीक्षा केंद्रों के आसपास जिला प्रशासन द्वारा विशेष कूलिंग जोन स्थापित किए जा रहे हैं, जहां अभिभावकों और परिजनों के बैठने, विश्राम करने तथा गर्मी से राहत पाने की समुचित व्यवस्था रहेगी। उन्होंने कहा कि हर वर्ष लाखों परिवार अपने बच्चों के भविष्य के सपनों के साथ परीक्षा केंद्रों तक पहुंचते हैं। परीक्षा के दौरान परीक्षार्थी तो केंद्र के भीतर होते हैं, लेकिन बाहर कई घंटे तक प्रतीक्षा कर रहे माता-पिता की चिंता, धूप, गर्मी और असुविधा पर अक्सर किसी का ध्यान नहीं जाता। दिल्ली सरकार ने इस मानवीय पहलू को समझते हुए यह निर्णय लिया है कि परीक्षा के दिन अभिभावकों को असुविधा का सामना न करना पड़े। आरामदायक प्रतीक्षा व्यवस्था उपलब्ध होगी रेखा गुप्ता ने आगे कहा कि अब तक अक्सर देखा जाता था कि परीक्षा के दौरान परिजन कभी किसी पेड़ की छांव तलाशते थे, कभी पार्क में बैठकर समय बिताते थे, तो कभी आसपास की बाजारों में इधर-उधर भटकते रहते थे। कई लोगों को भीषण गर्मी में लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता था। अब ऐसी स्थिति नहीं होगी। परीक्षा केंद्रों के बाहर ही उनके लिए आरामदायक प्रतीक्षा व्यवस्था उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि डिविजनल कमिश्नर (डीएम) के निर्देश से संबंधित अधिकारी सभी परीक्षा केंद्रों के आसपास कूलिंग जोन की व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे हैं। इन कूलिंग जोन में बैठने की सुविधा, स्वच्छ पेयजल, शिकंजी, ओआरएस, चाय तथा प्राथमिक चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी ताकि अभिभावकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। परीक्षा से जुड़ा अनुभव बनेगा बेहतर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल परीक्षा का सफल आयोजन नहीं, बल्कि परीक्षा से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के अनुभव को बेहतर बनाना है। जब अभिभावक सहज और निश्चिंत रहेंगे तो विद्यार्थियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकेंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा और युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों और उनके परिवारों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है। यह पहल केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि उन लाखों माता-पिता के प्रति सम्मान का प्रतीक है जो अपने बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़े रहते हैं। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि दिल्ली सरकार की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी और भविष्य में देशभर में परीक्षाओं के दौरान अभिभावकों की सुविधा को भी समान महत्व दिया जाएगा। उन्होंने सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरी दिल्ली उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना कर रही है। दिल्ली में पहले से 15 कूलिंग जोन मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली सरकार केवल परीक्षा केंद्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भीषण गर्मी से आमजन को राहत पहुंचाने के लिए पहले से व्यापक इंतजाम कर रही है। इसके तहत राजधानी के विभिन्न इलाकों में 85 शेड स्थापित किए गए हैं, 15 कूलिंग जोन संचालित हो रहे हैं तथा 13 मोबाइल राहत वैन (मोबाइल हीट रिलीफ यूनिट) लगातार विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को गर्मी से राहत पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा के दौरान अभिभावकों के लिए की गई विशेष व्यवस्था भी इसी जनकल्याणकारी और संवेदनशील सोच का विस्तार है। अक्षय श्रीवास्तव

मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास बनेगा हाईटेक रेस्ट एरिया, फूड कोर्ट और EV चार्जिंग भी होगी

नई दिल्ली  दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हर 50 किमी पर रेस्ट एरिया डिवेलप किए गए हैं। ठीक उसी तरह अर्बन एक्सटेंशन रोड (UER-2) पर मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के पास रेस्ट एरिया डिवेलप किया जाएगा। रेस्ट एरिया के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मेट्रो स्टेशन के पास 34,349 वर्ग मीटर जमीन चिह्नित की है। रेस्ट एरिया एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ बनाए जाएंगे। एक्सप्रेसवे के दाईं ओर 17,138 और बाईं ओर 17,211 वर्ग मीटर एरिया में इन्हें तैयार किया जाएगा।     एनएचएआई के अफसरों के अनुसार यूईआर-2 की कुल लंबाई करीब 75.7 किमी है।     इसका एक बड़ा हिस्सा दिल्ली में पड़ता है। जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उन पर यात्रियों की सुविधा के लिए एनएचएआई हर 50 किमी की दूरी पर रेस्ट एरिया डिवेलप कर रहा है।     दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कई जगहों पर इसी तरह से आधुनिक रेस्ट एरिया डिवेलप किए गए हैं, जहां यात्रियों को हर तरह की सुविधा मिल रही है।     अर्बन एक्सटेंशन रोड पर मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के पास एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ रेस्ट एरिया डिवेलप किया जाएगा।     जिसमें फूड कोर्ट, कार, बस, ट्रक पार्किंग, ढाबा, चिल्ड्रेन प्ले जोन, ईवी चार्जिंग स्टेशन , बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन, रेस्टरूम और अन्य तरह की सुविधाएं होंगी।     यह रेस्ट एरिया मेट्रो स्टेशन के पास होने के चलते लोकल लोगों और मेट्रो यात्रियों को भी इससे सुविधा मिलेगी। UER-2 पर तेजी से बढ़ रहा ट्रैफिक यूईआर के इस स्ट्रेच में डेली ट्रैफिक करीब 25,868 है। जिसमें सबसे अधिक संख्या कारों की है। एक्सप्रेसवे के राइट कैरिज-वे से रोजाना कारों की संख्या 16,476 और बाएं कैरिज-वे से 18,893 कारें गुजरती हैं। लेफ्ट और राइट कैरिज वे को मिलाकर कारों की संख्या रोजाना 25,369 है। इसी तरह से दोनों कैरिज वे को मिलाकर यूईआर-2 पर बसों की संख्या 119 और ट्रकों की संख्या 376 है। भविष्य में यूईआर पर डेली ट्रैफिक में और इजाफा होगा।

छात्राओं की सुरक्षा पर बड़ा कदम, स्कूलों में चाइल्ड प्रोटेक्शन कमिटी अनिवार्य

नई दिल्ली  राजधानी में बच्चों और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। एलजी वीके सक्सेना ने पॉक्सो (POCSO) कानून के लागू करने की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया है कि दिल्ली के सभी स्कूलों का व्यापक ऑडिट किया जाए। इसका मकसद सुनिश्चित करना है कि स्कूल बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों और दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं या नहीं।     एलजी ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि पॉक्सो कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन कराया जाए और जिन स्कूलों में कमियां पाई जाएं, उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए।     साथ ही विभाग को यह भी बताना होगा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए या उठाए जाएंगे।     एलजी ने कहा कि हर स्कूल में अनिवार्य रूप से चाइल्ड प्रोटेक्शन कमिटी सक्रिय होनी चाहिए और उसकी नियमित बैठकें आयोजित की जाएं।     इसके अलावा जुलाई को 'चाइल्ड प्रोटेक्शन मंथ' के रूप में मनाते हुए पूरे शहर में जागरूकता और प्रशिक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।     इस अभियान की प्रगति और परिणामों की रिपोर्ट भी एलजी को सौंपी जाएगी। छुट्टी के समय पुलिस तैनाती बढ़ाने पर दिया गया जोर स्कूलों और छात्रों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए दिल्ली पुलिस को स्कूल परिसरों और प्रमुख केंद्रों के आसपास पर्याप्त जवानों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर स्कूलों की छुट्टी के समय पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। महिलाओं और बच्चों के साथ छेड़छाड़, उत्पीड़न और यौन अपराधों के मामलों पर जीरो टॉलरेंस नीति दोहराते हुए एलजी ने कहा कि छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।

शहरीकरण की मार, दिल्ली में तेजी से बढ़े खराब पर्यावरण वाले इलाके

नई दिल्ली  दिल्ली में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और निर्माण गतिविधियों का असर पर्यावरण पर साफ दिखाई देने लगा है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक, पिछले 32 वर्षों में सेंट्रल दिल्ली ने अपने सबसे बेहतर इकोसिस्टम का करीब 73.8 प्रतिशत हिस्सा खो दिया है। कभी राजधानी के सबसे समृद्ध पर्यावरणीय क्षेत्रों में शामिल सेंट्रल दिल्ली का बड़ा हिस्सा अब खराब पर्यावरण की श्रेणी में पहुंच गया है। जामिया मिलिया इस्लामिया के भूगोल और पर्यावरण विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन 'क्रॉसिंग द इकोलॉजिकल थ्रेशोल्ड' में 1991 से 2023 तक के सैटेलाइट आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार, सेंट्रल दिल्ली में बेहतरीन प्राकृतिक स्वास्थ्य वाली जमीन 1991 में 13.88 वर्ग किलोमीटर थी, जो 2023 में घटकर सिर्फ 3.63 वर्ग किलोमीटर रह गई। खराब पर्यावरण वाले इलाके बढ़े     अध्ययन में यह भी सामने आया कि पूरी दिल्ली में खराब पर्यावरण वाले क्षेत्रों में 50.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।     सबसे ज्यादा गिरावट उत्तरी दिल्ली में दर्ज की गई, जहां खराब पर्यावरण वाला क्षेत्र बढ़कर 131.18 वर्ग किलोमीटर हो गया।     दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ऐसे क्षेत्रों में 132 प्रतिशत और पश्चिमी दिल्ली में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।     पूर्वी दिल्ली, शाहदरा और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में अच्छी पर्यावरणीय स्थिति वाले क्षेत्र अब बहुत कम बचे हैं।     इसके लिए अंधाधुंध शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियां और यमुना के फ्लडप्लेन में लगातार कमी को प्रमुख कारण बताया गया है।     हालांकि दक्षिणी दिल्ली और नई दिल्ली जिले से कुछ राहत की तस्वीर भी सामने आई है।  

Bata Carry Bag Case: 6 रुपये के बैग पर उपभोक्ता आयोग सख्त, कंपनी पर लगा 10 हजार रुपये का जुर्माना

 नई दिल्ली आप मॉल या शोरूम में सामान खरीदने के लिए जाते हैं, तो कैश काउंटर पर बिल बनाते समय एम्प्लाई आपसे कैरी बैग के लिए पूछता है. कुछ जगह ये फ्री में, तो कुछ जगह 5-6 रुपये के आसपास का पड़ता है और आपके ऊपर निर्भर करता है कि इसे लेना है या फिर नहीं. लेकिन इस पेपर कैरी बैग के चक्कर में मशहूर शू-कंपनी बाटा (Bata) को 10,000 रुपये देने पड़े. ये पूरा मामला 2023 का है, जिस लेकर कोर्ट ने बिना किसी नोटिस के ही अपना फैसला सुना दिया।  दरअसल, एक 6 रुपये के पेपर कैरी बैग को लेकर हुए उपभोक्ता विवाद के चलते फुटवियर कंपनी बाटा इंडिया को एक ग्राहक को मुआवजे और मुकदमेबाजी की लागत के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है।  2023 का ये है पूरा मामला साउथ दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) ने दिल्ली की रहने वालीं प्रीति अग्रवाल के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है. उन्होंने बाटा इंडिया पर आरोप लगाया था कि मई 2023 में Bata Store से 1,499 रुपये कीमत के जूते खरीदते समय उनसे कैरी बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क लिया गया था, जबकि उन्हें पहले से इसकी सूचना नहीं दी गई थी।  शिकायत के अनुसार, प्रीति अग्रवाल को 6 रुपये के अतिरिक्त शुल्क के बारे में बिलिंग काउंटर पर पहुंचने पर ही जानकारी मिली. उन्होंने तर्क दिया कि स्टोर के अंदर कहीं भी कोई नोटिस नहीं लगा था, जिसमें ग्राहकों को यह बताया गया हो कि उन्हें कैरी बैग के लिए अलग से भुगतान करना होगा. उन्होंने आगे दावा किया कि खरीदारी करने के बाद ग्राहकों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे जूतों के डिब्बे अपने हाथों में लेकर चलें।  नोटिस न चिपकाना पड़ा बाटा को भारी इस पूरे मामले में चेयरमैन मोनिका ए. श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशा की अध्यक्षता वाली आयोग ने पाया कि खुदरा विक्रेताओं को सादा, बिना ब्रांड वाले कैरी बैग के लिए ग्राहकों से शुल्क लेने की कानूनी अनुमति है. हालांकि, उपभोक्ताओं को दुकान के अंदर प्रमुख नोटिस लगाकर पहले से सूचित किया जाना चाहिए. शिकायतकर्ता द्वारा पेश की गई तस्वीरों की जांच करने पर आयोग को संबंधित दुकान पर ऐसा कोई नोटिस नजर नहीं आया।  आयोग ने कहा कि नोटिस न होने के कारण ग्राहक को खरीदारी पूरी करने से पहले सोच-समझकर निर्णय लेने का अवसर ही नहीं मिला. आदेश सुनाते हुए कहा गया कि बाटा मुफ्त में कैरी बैग उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं था, फिर भी वह कैरी बैग रेट के को प्रदर्शित करने के संबंध में NCDRC के निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रही।  चंडीगढ़, जयपुर में भी आए थे मामले रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई मामलों में चंडीगढ़ और जयपुर के उपभोक्ता मंचों ने कंपनी के ब्रांडिंग वाले बैग के लिए ग्राहकों से पेमेंट लेने के लिए बाटा को फटकार लगाई थी. यह कहते हुए कि ग्राहक को उस चीज के लिए पेमेंट करने को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जो प्रभावी रूप से ब्रांड के लिए एक विज्ञापन के रूप में काम करती है।     Bata ने शिकायत को बताया गलत हालांकि, Bata India की ओर से इस शिकायत को खारिज करते हुए तर्क दिया गया कि पेपर कैरी बैग एक अलग उत्पाद था, जिस पर एमआरपी अंकित थी. कंपनी ने दावा किया कि ये कैरी बैग ग्राहक की सहमति प्राप्त करने के बाद ही दिया गया था और इसका शुल्क अंतिम बिल में दर्शाया गया था। 

अमित शाह की बैठक में दिल्ली स्लम नीति 2026 और यमुना सफाई पर बड़ा फैसला

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली में मंगलवार को दो अहम मीटिंग हुईं। पहली मीटिंग दिल्ली की झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास और पुनर्स्थापना को लेकर जबकि दूसरी सालों से पेंडिंग चल रही 'किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना' पर हुई। जिससे दिल्ली में नाला बन चुकी यमुना को भी साफ पानी मिल सकेगा। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में झुग्गी-बस्तियों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर हुई बैठक में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत केंद्र व दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इसमें दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए। यमुना सफाई की दिशा में बड़ा कदम गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सालों से पेंडिंग चल रही 'किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना' पर हुई दूसरी मीटिंग में संबंधित राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में सहमति बनती दिखाई दी। इसका सबसे बड़ा एक फायदा दिल्ली में नाला बन चुकी यमुना को साफ करने के रूप में भी मिलेगा। जिसके तहत हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी। इससे यमुना में साफ पानी का फ्लो काफी बढ़ जाएगा। लंबे समय बाद इस मीटिंग में सभी राज्य इस प्रोजेक्ट के लिए एमओयू पर साइन करने के लिए सहमत हुए हैं। मंत्रालय के मुताबिक एमओयू साइन होने के बाद इस किशाऊ परियोजना को कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इस पर काम शुरू होगा। इस बांध परियोजना के तहत केंद्र सरकार 90 फीसदी और शेष 10 फीसदी का बजट इन छह राज्यों द्वारा खर्च किया जाएगा।     बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अन्य तमाम अधिकारी शामिल हुए। रिव्यू मीटिंग में शाह ने दिल्ली सरकार को दिए आदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों (JJ Clusters) के पुनर्वास मुद्दे पर हुई रिव्यू मीटिंग में बड़े फैसले लिए गए। इसमें दिल्ली में पीपीपी मॉडल पर झुग्गी-झोपड़ियों का विकास होगा। इसमें दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026 आज निर्धारित हो गई। शाह ने निर्देश दिए कि दिल्ली सरकार जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी करे। इससे झुग्गी बस्तियों में रहने वाले करीब चार लाख परिवारों को लाभ होगा। इसमें आने वाले समय में दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ ही रंगरूप बदलने पर निर्देश जारी किए गए। मीटिंग में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली के एलजी तरनजीत सिंह संधू, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली के शहरी विकास मंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव, दिल्ली के मुख्य सचिव समेत केंद्र और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। झुग्गी बस्तियों का पुनर्वास बैठक में गृह मंत्री शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार जल्द ही दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026 को अधिसूचित करने की कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मोड पर झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास के लिए पांच क्लस्टर के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) 45 दिन में टेंडर जारी करें। इसके साथ ही अतिरिक्त 50 झुग्गी-झोपड़ी संकुलों के लिए भी परियोजना दस्तावेज तथा निविदा प्रपत्र जल्द बनाए जाएं। गृह मंत्री ने कहा कि झुग्गियों की पात्रता की तिथि एक जनवरी, 2025 के अनुसार तय की जाए। DDA और DUSIB से 45 दिन में टेंडर जारी करने को कहा शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रति माह पुनर्वास की कम से कम पांच PPP आधारित परियोजनाओं की निविदा जारी करना सुनिश्चित करे। गृह मंत्री ने कहा कि पुनर्वास कॉलोनियों के निर्माण में आंगनवाड़ी केंद्र, शैक्षणिक सुविधाएं, स्वास्थ्य केंद्र, खेल मैदान जैसी सामूहिक सुविधाओं का समुचित एवं पर्याप्त प्रावधान किया जाए। उन्होंने कहा कि आज के निर्णय से झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 4 लाख परिवारों को लाभ होगा।  

पीडब्ल्यूडी की 1 लाख स्ट्रीट लाइट्स बदलेंगी, खराब लाइट 48 घंटे में ठीक करना होगा अनिवार्य

नई दिल्ली कहीं आपको संगीतमय रोशनी वाली स्ट्रीट लाइट्स दिखें, तो चौंकने की जरूरत नहीं। दिल्ली सरकार पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर लगी एक लाख स्ट्रीट लाइट्स को बदलकर नए किस्म की आधुनिक स्ट्रीट लाइट्स लगाने की योजना बना रही है। सरकार पहली बार मंथली इंस्टॉलमेंट मॉडल अपना रही है। इसके तहत लाइट्स लगाने वाली एजेंसी को हर महीने भुगतान किया जाएगा। कहीं कोई लाइट खराब होती है, तो उसे 48 घंटे में बदलना भी होगा।     कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के अनुसार, देश भर में किसी प्रोजेक्ट का भुगतान सरकारी एजेंसियां ओपन टेंडर, बीओटी (बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर), ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) या फिर हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत करती हैं।     भुगतान की इस पुरानी प्रक्रिया को छोड़कर सरकार पहली बार ईएमआई मॉडल अपना रही है।     इसके तहत दिल्ली की 1400 किमी लंबी सड़कों पर लगी एक लाख स्ट्रीट लाइट्स बदली जाएंगी।     किसी एक एजेंसी को स्ट्रीट लाइट्स बदलने का ठेका दिया जाएगा और 60 किस्तों में उसका भुगतान किया जाएगा।     जो एजेंसी स्ट्रीट लाइट लगाएगी, उसे ही पांच साल तक उनका मेंटेनेंस भी करना होगा। अगर किसी सड़क पर कोई लाइट नहीं जल रही है, तो एजेंसी को उसे 48 घंटे में बदलना होगा।     48 घंटे में बदलनी होगी खराब लाइट, लापरवाही बरतने पर एजेंसी को रोज देना होगा 2000 रुपये जुर्माना     60 इंस्टॉलमेंट में कुल ₹450 करोड़ का भुगतान किया जाएगा     कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि अगर एजेंसी तय समय में लाइट नहीं बदलती है, तो उसे प्रति लाइट, प्रति दिन 2000 रुपये का जुर्माना भी देना होगा।     मंत्री का कहना है कि दिल्ली में पहली बार आधुनिक संगीतमय स्ट्रीट लाइट्स लगाने की योजना है, जिन्हें किसी खास अवसर पर सेलिब्रेशन के लिए संगीतमय तरीके से जलाया और बुझाया जा सकेगा। रात ढलने के साथ खुद कम होगी रोशनी प्रवेश का कहना है कि लाइट्स की रोशनी 40 लक्स होगी। वर्तमान में जो लाइट्स लगी हैं, उनकी रोशनी 10 से 15 लक्स है। वे इतनी अधिक ऊंचाई पर लगी हैं कि उनसे सड़कों पर पर्याप्त रोशनी नहीं हो पाती। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट्स की एक और विशेषता होगी कि जैसे-जैसे रात ढलेगी और उजाला बढ़ेगा, उसी के अनुसार लाइटों की रोशनी भी कम होती जाएगी। यानी थोड़ा उजाला होने पर रोशनी 40 लक्स से 30, फिर 20 और 15 लक्स तक हो जाएगी और सुबह होने पर लाइट्स बंद हो जाएंगी। स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट की लागत 450 करोड़ रुपये है। आधुनिक लाइटों से पांच साल में करीब 300 करोड़ रुपये की बिजली बचत होगी। सरकार जितने पैसे प्राइवेट एजेंसियों को लाइट्स के लिए देगी, उसका बड़ा हिस्सा बचत के जरिए वसूल भी हो जाएगा। लाइटों की मॉनिटरिंग के लिए कंपनी को कंट्रोल रूम भी स्थापित करना होगा। सुदामा यादव

ड्रोन से हथियार और ड्रग्स सप्लाई करने वाले आतंकी मॉड्यूल का दिल्ली में पर्दाफाश हुआ

नई दिल्ली  पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के समर्थन से चल रहे एक इंटरनेशनल टेरर-क्राइम नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए स्पेशल सेल ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मॉड्यूल को पाकिस्तानी गैंगस्टर-आतंकी शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी अजमल गुज्जर ऑपरेट कर रहे थे। यह सिंडिकेट पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स मंगवाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई कर रहा था।     पुलिस इनसे जुड़े अन्य मेंबरों की तलाश कर रही है।     DCP (स्पेशल सेल) नरी चैतन्य के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के लोनी निवासी अनस उर्फ अनस त्यागी (26), मोहित उर्फ योगी (26), दीपक उर्फ दीपक अगरौला (38), आरिफ उर्फ प्रधान (30), जतन (29), साबिर (30) और पंजाब के फतेहगढ़ साहिब निवासी करणवीर सिंह (26) के तौर पर हुई है।     इनसे पांच पिस्टल, 41 कारतूस, सात फोन और एक स्कॉर्पियो रिकवर हुए है।     पूछताछ में कई बैंक अकाउंट्स की जानकारी मिली है।     इनके फोन खंगालने पर शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर से चैट, वॉयस नोट और अन्य आपत्तिजनक डिजिटल एविडेंस मिले हैं। सोशल मीडिया के जरिए हुई भर्ती भट्टी और उसके विदेशी सहयोगी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन ऐप्स के जरिए भारतीय युवाओं को नेटवर्क से जोड़ रहे हैं। नई उम्र के लड़कों को हथियार, आपराधिक लाइफ स्टाइल की चमक-दमक, मोटी रकम का लालच देकर भर्ती किया जा रहा है। इन्हें हथियारों की तस्करी, ड्रग्स सप्लाई और अन्य गतिविधियों में लगाया जा रहा है। रेकी कर पाक भेजे विडियो-फोटो पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के कई संवेदनशील और सार्वजनिक जगहों के अलावा कुछ नामी शख्सियतों की रेकी की थी। इनकी फोटो और विडियो पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजे गए थे। दिल्ली-एनसीआर में आतंकी हमला करने का इनका मकसद भय का माहौल पैदा करना और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना था। जेल में बैठे गैंगस्टर से जुड़ा नेटवर्क आरिफ ने अजमल से एक जिगाना पिस्टल एक लाख में खरीदी थी। बैंक खातों और UPI स्कैनर से पेमेंट हुई थी। ड्रग्स की बिक्री से मिली रकम का इस्तेमाल नेटवर्क फैलाने और आतंकी गतिविधियों के लिए कर रहे थे। मंडोली जेल में बंद गैंगस्टर दीपक अगरौला को भी नेटवर्क से जोड़ा गया। अनस ने जेल में फोन चला रहे दीपक का संपर्क अजमल से कराया। दो साल से थे टच में ACP कैलाश बिष्ट की निगरानी में बनी इंस्पेक्टर राहुल कुमार, विनीत कुमार तेवतिया और अजीत कुमार की टीम ने इनकी गिरफ्तारी की है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अनस और मोहित नवंबर 2025 से और दीपक मार्च 2026 से भट्टी-गुज्जर के टच में थे। करणवीर और आरिफ भी सीधे गुज्जर के कॉन्टैक्ट में थे। इनके बीच सैकड़ों से लेकर हजारों बार बातचीत के साक्ष्य मिले है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ हत्या, डकैती, जानलेवा हमला, आर्म्स और NDPS एक्ट जैसे केस दर्ज हैं।  

प्रदूषण पर सख्ती: NCR में BS-1, BS-2 और BS-3 गाड़ियां चरणबद्ध तरीके से होंगी बंद

नई दिल्ली दिल्ली-NCR के इलाकों में चार नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने की तैयारी है, वहीं प्रदूषण कम करने के लिए पुरानी गाड़ियों पर बड़ी कार्रवाई होगी। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की मीटिंग में कई अहम फैसलों पर सहमति बनी है। 'नमो' शहर से बनने वाले ग्रीनफील्ड (ऐसी खाली या अविकसित जमीन, जिस पर पहले निर्माण कार्य न हुआ हो) शहरों को NCR योजना-2041 के तहत विकसित किया जाएगा। 5,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए राज्यों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे। दिल्ली (बाहरी) में 'सब सिटी' बनाने की भविष्य योजना है। ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए नमो भारत रेल और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। प्रस्ताव है कि एनसीआर में शामिल हर राज्य के चार प्रमुख शहरों को नमो भारत परियोजना से जोड़ा जाए। इसके लिए भी लगभग 5,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा फॉरेस्ट एरियाज से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। BS-3 तक की गाड़ियां सड़कों से हटेंगी बैठक में पॉल्यूशन कंट्रोल को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। एनसीआर में BS-1, BS-2 और BS-3 मानक वाली गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाने की तैयारी है। इन्हें स्क्रैपिंग के लिए भेजा जाएगा। सरकार का तर्क है कि 40% प्रदूषण पुरानी गाड़ियों से है। इसी वजह से एनसीआर में BS-6 मानक वाले गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति तैयार की जा रही है।