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ड्रोन से हथियार और ड्रग्स सप्लाई करने वाले आतंकी मॉड्यूल का दिल्ली में पर्दाफाश हुआ

नई दिल्ली  पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के समर्थन से चल रहे एक इंटरनेशनल टेरर-क्राइम नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए स्पेशल सेल ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मॉड्यूल को पाकिस्तानी गैंगस्टर-आतंकी शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी अजमल गुज्जर ऑपरेट कर रहे थे। यह सिंडिकेट पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स मंगवाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई कर रहा था।     पुलिस इनसे जुड़े अन्य मेंबरों की तलाश कर रही है।     DCP (स्पेशल सेल) नरी चैतन्य के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के लोनी निवासी अनस उर्फ अनस त्यागी (26), मोहित उर्फ योगी (26), दीपक उर्फ दीपक अगरौला (38), आरिफ उर्फ प्रधान (30), जतन (29), साबिर (30) और पंजाब के फतेहगढ़ साहिब निवासी करणवीर सिंह (26) के तौर पर हुई है।     इनसे पांच पिस्टल, 41 कारतूस, सात फोन और एक स्कॉर्पियो रिकवर हुए है।     पूछताछ में कई बैंक अकाउंट्स की जानकारी मिली है।     इनके फोन खंगालने पर शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर से चैट, वॉयस नोट और अन्य आपत्तिजनक डिजिटल एविडेंस मिले हैं। सोशल मीडिया के जरिए हुई भर्ती भट्टी और उसके विदेशी सहयोगी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन ऐप्स के जरिए भारतीय युवाओं को नेटवर्क से जोड़ रहे हैं। नई उम्र के लड़कों को हथियार, आपराधिक लाइफ स्टाइल की चमक-दमक, मोटी रकम का लालच देकर भर्ती किया जा रहा है। इन्हें हथियारों की तस्करी, ड्रग्स सप्लाई और अन्य गतिविधियों में लगाया जा रहा है। रेकी कर पाक भेजे विडियो-फोटो पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के कई संवेदनशील और सार्वजनिक जगहों के अलावा कुछ नामी शख्सियतों की रेकी की थी। इनकी फोटो और विडियो पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजे गए थे। दिल्ली-एनसीआर में आतंकी हमला करने का इनका मकसद भय का माहौल पैदा करना और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना था। जेल में बैठे गैंगस्टर से जुड़ा नेटवर्क आरिफ ने अजमल से एक जिगाना पिस्टल एक लाख में खरीदी थी। बैंक खातों और UPI स्कैनर से पेमेंट हुई थी। ड्रग्स की बिक्री से मिली रकम का इस्तेमाल नेटवर्क फैलाने और आतंकी गतिविधियों के लिए कर रहे थे। मंडोली जेल में बंद गैंगस्टर दीपक अगरौला को भी नेटवर्क से जोड़ा गया। अनस ने जेल में फोन चला रहे दीपक का संपर्क अजमल से कराया। दो साल से थे टच में ACP कैलाश बिष्ट की निगरानी में बनी इंस्पेक्टर राहुल कुमार, विनीत कुमार तेवतिया और अजीत कुमार की टीम ने इनकी गिरफ्तारी की है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अनस और मोहित नवंबर 2025 से और दीपक मार्च 2026 से भट्टी-गुज्जर के टच में थे। करणवीर और आरिफ भी सीधे गुज्जर के कॉन्टैक्ट में थे। इनके बीच सैकड़ों से लेकर हजारों बार बातचीत के साक्ष्य मिले है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ हत्या, डकैती, जानलेवा हमला, आर्म्स और NDPS एक्ट जैसे केस दर्ज हैं।  

प्रदूषण पर सख्ती: NCR में BS-1, BS-2 और BS-3 गाड़ियां चरणबद्ध तरीके से होंगी बंद

नई दिल्ली दिल्ली-NCR के इलाकों में चार नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने की तैयारी है, वहीं प्रदूषण कम करने के लिए पुरानी गाड़ियों पर बड़ी कार्रवाई होगी। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की मीटिंग में कई अहम फैसलों पर सहमति बनी है। 'नमो' शहर से बनने वाले ग्रीनफील्ड (ऐसी खाली या अविकसित जमीन, जिस पर पहले निर्माण कार्य न हुआ हो) शहरों को NCR योजना-2041 के तहत विकसित किया जाएगा। 5,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए राज्यों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे। दिल्ली (बाहरी) में 'सब सिटी' बनाने की भविष्य योजना है। ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए नमो भारत रेल और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। प्रस्ताव है कि एनसीआर में शामिल हर राज्य के चार प्रमुख शहरों को नमो भारत परियोजना से जोड़ा जाए। इसके लिए भी लगभग 5,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा फॉरेस्ट एरियाज से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। BS-3 तक की गाड़ियां सड़कों से हटेंगी बैठक में पॉल्यूशन कंट्रोल को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। एनसीआर में BS-1, BS-2 और BS-3 मानक वाली गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाने की तैयारी है। इन्हें स्क्रैपिंग के लिए भेजा जाएगा। सरकार का तर्क है कि 40% प्रदूषण पुरानी गाड़ियों से है। इसी वजह से एनसीआर में BS-6 मानक वाले गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति तैयार की जा रही है।

दिल्ली में यमुना घाटों का पुनर्विकास, गंदगी-बदबू खत्म करने की योजना

नई दिल्ली  यमुना के किनारे स्थित राजधानी के 32 ऐतिहासिक घाटों पर जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इन घाटों पर न गंदगी नजर आएगी और न ही बदबू की समस्या होगी। घाटों को इस तरह डिवेलप करने की योजना है कि लोग यहां सुबह-शाम सैर कर सकें और सूर्योदय व सूर्यास्त के सुंदर नजारों का लुत्फ उठा सकें। अगले 6 महीने के भीतर इन 32 घाटों के विकास का काम शुरू होने की उम्मीद है। एलजी वीके सक्सेना ने यमुना कायाकल्प परियोजना में तेजी लाने के लिए डीडीए को निर्देश दिए हैं। एलजी ने यमुना के दोबारा जिंदा करने और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े काम का जायजा लिया। यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुई बैठक में डीडीए ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में चल रहे कामों की रिपोर्ट भी पेश की। अधिकारियों ने बताया कि करीब 1700 हेक्टेयर इलाके में नदी तट को सुधारने का काम किया गया है। इसके तहत लगभग 88,574 मीट्रिक टन मलबा और 4,998 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया। इसके साथ ही करीब 1,425 एकड़ जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। यमुना किनारे 7 लाख से ज्यादा देसी पेड़ लगाए गए डीडीए के अनुसार, यमुना किनारे 7 लाख से ज्यादा देसी पेड़ लगाए गए हैं। नदी इलाके से जुड़ी घास और वैटलैंड प्रजातियां लगाई गई हैं। यमुना कॉरिडोर में 35 वैटलैंड तैयार किए गए हैं। इससे ग्राउंड वॉटर रिचार्ज, जैव विविधता और बाढ़ नियंत्रण क्षमता मजबूत होने का दावा किया गया है। एलजी ने नदी किनारे बनाए गए प्रमुख इकोलॉजिकल स्थलों की भी जायजा लिया। बैठक में यमुना बाजार इलाके के 32 ऐतिहासिक घाटों के दोबारा जिंदा करने की योजना पर भी चर्चा हुई। एलजी ने इस काम को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके लिए इंटैक की ओर से स्टडी कराई गई है। कवायद     छह महीने में शुरू होगा घाटों के पुनर्विकास का काम     LG ने यमुना कायाकल्प परियोजना में तेजी लाने के निर्देश दिए क्यों ज़रूरी है ये प्रोजेक्ट? बीते दो साल में यमुना किनारे असिता, बांसेरा, अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क, यमुना वनस्थली, कालिंदी अविरल और यमुना वाटिका जैसे पार्क बनाए गए हैं। इससे जैव विविधता में सुधार हुआ है। ऐतिहासिक घाटों की स्थिति ज्यादा नही सुधरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन घाटों के विकास से लोगों का यमुना से जुड़ाव बढ़ेगा। पहले दिन यमुना से 116.6 मीट्रिक टन कचरा साफ यमुना को कचरामुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने जो जनभागीदारी अभियान शुरू किया है, उसके तहत एक दिन में ही यमुना से करीब 116.6 मीट्रिक टन कचरा साफ किया गया। सिंचाई व बाढ़ विभाग मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पहले दिन 15 हजार लोगों ने इस अभियान में भाग लिया। यमुना के 28 घाटों पर एक साथ सफाई शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि अभियान में नागरिकों के अलावा वॉलंटियर्स, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, RWA के पदाधिकारी तथा सरकारी विभागों और एजेंसियों के कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान कुछ ही घंटों की सफाई में 116.6 मीट्रिक टन कचरा निकाला गया। यमुना की सफाई के लिए नागरिकों की भागीदारी के अलावा 8 ट्रैश स्कीमर और वीड हार्वेस्टर, 28 बोट, 28 JCB मशीनें, 84 PWD मेंटेनेंस वैन तथा हॉर्टिकल्चर विभाग की 28 गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया। राय ने कहा कि यमुना की सफाई को लेकर सालों से चर्चा होती रही है, लेकिन अब सफाई सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सामूहिक प्रयासों से नदी को साफ किया जाएगा।

भीषण गर्मी से राहत की उम्मीद, दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक बारिश और तेज हवाओं का अनुमान

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर के लोगों को भीषण गर्मी और लू से फिलहाल राहत मिलने के संकेत मिल रहे हैं। सोमवार सुबह शुरू हुई बारिश का दौर मंगलवार को भी जारी रहा। मंगलवार सुबह जनकपुरी, दिल्ली हवाई अड्डा समेत कई इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है। बारिश से मौसम सुहाना हो गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना रहेगा। कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी, गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे तापमान नियंत्रित रहेगा और लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। आज 38 डिग्री तक जा सकता है तापमान मौसम विभाग के सात दिवसीय पूर्वानुमान के मुताबिक 16 जून को दिल्ली-एनसीआर में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन गरज के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। 17 जून को दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार, 17 जून को मौसम आंशिक रूप से बादल छाए रहने वाला रहेगा। अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इस दिन भी कोई चेतावनी जारी नहीं की है। 18 जून को अधिकतम तापमान 41 डिग्री और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है। आसमान में आंशिक बादल छाए रहेंगे तथा नमी का स्तर 35 से 60 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है। इस दिन भी किसी प्रकार का मौसम अलर्ट जारी नहीं किया गया है। 19 जून को भी मौसम का मिजाज लगभग समान बना रहेगा। अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार दिनभर आंशिक बादल छाए रह सकते हैं, जबकि आर्द्रता 35 से 60 प्रतिशत के बीच बनी रह सकती है। 20 जून को कैसा रहेगा मौसम 20 जून को एक बार फिर गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। इस दिन अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इसी तरह 21 जून को भी गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई गई है। इस दिन अधिकतम तापमान 41 डिग्री और न्यूनतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। सबसे अहम बात यह है कि मौसम विभाग ने फिलहाल दिल्ली-एनसीआर के लिए किसी भी प्रकार का येलो, ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी नहीं किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलती दिखाई दे रही है। हालांकि, उमस का असर बना रह सकता है, लेकिन हल्की बारिश और तेज हवाएं मौसम को अपेक्षाकृत खुशनुमा बनाए रखेंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की गतिविधियां धीरे-धीरे सक्रिय हो रही हैं, जिसके चलते आगामी दिनों में मौसम में और बदलाव देखने को मिल सकता है।  

ED की FIR में सनसनी: विदेशी फंडिंग का नक्सल क्षेत्रों में इस्तेमाल का आरोप

नई दिल्ली  क्या ईसाई धर्म प्रचार की आड़ में विदेशी फंडिंग से देश विरोधी एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया जा रहा था, जो एक हजार से ज्यादा डेबिट कार्डों के जरिए करोड़ों रुपये निकालकर नक्सल प्रभावित एरिया में खर्च हो रहा था? दरअसल, ED की शिकायत पर रविवार को FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि देश के लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (LWE) से प्रभावित इलाकों समेत विदेशी डेबिट कार्ड के नेटवर्क के जरिए विदेशी फंड का गैर-कानूनी इस्तेमाल किया जा रहा है।     ईडी की शिकायत पर अमेरिका की मिशनरी संस्था 'द टिमोथी इनिशिएटिव' (TTI) और छह अन्य के खिलाफ चौंकाने वाले दावे किए गए हैं।     बेंगलुरु के कोथनूर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, अप्रैल में हुई ईडी की छापेमारी के दौरान विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल का एक नेटवर्क मिला।     दावा है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 92.55 करोड़ रुपये विदेशी स्रोतों से मिले फंड का यूज FEMA और FCRA नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया।     आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने और UAPA के तहत आतंकवादी गतिविधियों की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।     डेबिट कार्ड के नेटवर्क के जरिए विदेशी फंड का गैर-कानूनी इस्तेमाल का दावा     अमेरिकी मिशनरी संस्था TTI समेत सात पर एफआईआर दर्ज की गई है US नागरिक से 24 डेबिट कार्ड मिले ईडी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि FIR में जोनाथन एस राजन, मीका मार्क, अजीत वर्गीस मथाई, वर्गीस चाको, बबलू कुर्मी, सुप्रीम जॉय, अमेरिकी बेस्ड 'द टिमोथी इनिशिएटिव' और अन्य को आरोपी बनाया गया है। मामले की शुरुआत उस समय हुई जब अमेरिकी नागरिक माइका मार्क को 18 अप्रैल को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर रोका गया। उसके पास 24 विदेशी डेबिट कार्ड मिले। ऐसे 1000 से ज्यादा कार्ड देशभर में इस्तेमाल किए जा रहे थे। कई कार्डों पर एक ही नाम 'संतोष कुमार' दर्ज था। नक्सल क्षेत्र में 6.34 करोड़ की निकासी FIR के मुताबिक, धमतरी, बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों में पिछले कुछ सालों के दौरान करीब 6.34 करोड़ रुपये निकाले गए। सूत्रों ने दावा किया कि इतनी बड़ी मात्रा में कैश निकासी किसी संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती है। आशंका जताई गई कि यह पैसा नक्सल प्रभाव वाले इलाकों तक पहुंचाया गया है। जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

देश में छात्र आत्महत्याएं गंभीर मुद्दा, NTF ने संस्थागत कारणों पर जताई चिंता

नई दिल्ली  देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं और मानसिक तनाव के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित राष्ट्रीय टास्क फोर्स (NTF) ने चिंता जताई है। टास्क फोर्स का कहना है कि स्टूडेंट आत्महत्या को केवल मानसिक स्वास्थ्य की समस्या मानना सही नहीं होगा, क्योंकि इसके पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत कारण भी जिम्मेदार हैं। पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट की अध्यक्षता वाली इस 10 सदस्यीय समिति ने देश के 10 राज्यों के 30 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों का दौरा किया है। इनमें IIT दिल्ली, एम्स दिल्ली, जेएनयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे संस्थान भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने समिति को अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट की चिंता सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों को “बेहद चिंताजनक” बताया है। अदालत के अनुसार, वर्ष 2022 में देश में 13 हजार से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की थी, जो एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। सर्वे में सामने आईं बड़ी बातें टास्क फोर्स के सर्वे में 2.4 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया। इनमें 34 प्रतिशत छात्रों ने खुद को कैंपस में अलग-थलग महसूस करने की बात कही, जबकि केवल 56 प्रतिशत छात्रों को अपने संस्थान के प्रशासन पर भरोसा है कि वह उनकी समस्याओं का निष्पक्ष समाधान करेगा। तनाव के कई कारण रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षणिक दबाव, भेदभाव, आर्थिक कठिनाइयां, सामाजिक अलगाव, उत्पीड़न और संस्थागत सहयोग की कमी छात्रों में तनाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं। टास्क फोर्स ने पाया कि छात्र संकट केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि संरचनात्मक समस्या भी है। मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी सर्वे में शामिल 70 प्रतिशत से अधिक संस्थानों में पूर्णकालिक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ नहीं हैं। वहीं, बहुत कम संस्थानों के पास आत्महत्या रोकथाम के लिए औपचारिक प्रोटोकॉल मौजूद हैं। अंतिम रिपोर्ट में जवाबदेही बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और छात्रों के लिए सुरक्षित व समावेशी माहौल बनाने की सिफारिशें की जा सकती हैं।

बिहारी कॉलोनी समेत कई रेडलाइट बंद करने की योजना, ट्रैफिक होगा सिग्नल फ्री

नई दिल्ली  ट्रैफिक पुलिस स्वामी दयानंद मार्ग पर बनी बिहारी कॉलोनी, आजाद नगर और कृष्णा नगर रेडलाइट को बंद कर केशव चौक से जगतपुरी रेडलाइट तक करीब 3 से 4 किलोमीटर के हिस्से को सिग्नल फ्री बनाने की योजना पर काम कर रही है। बिहारी कॉलोनी रेडलाइट पर ट्रायल शुरू हो चुका है। बाकी दोनों जगह जल बोर्ड की अंडरग्राउंड सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। वहां यू टर्न बनाए जा चुके हैं। काम पूरा होने के बाद इन्हें भी सिग्नल फ्री कर दिया जाएगा। इससे पहले विकास मार्ग को भी इसी तरह सिग्नल फ्री बनाया जा चुका है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, सड़क के बीच सीमेंटेड डिवाइडर लगाकर बिहारी कॉलोनी रेडलाइट बंद कर दी गई है। रेडलाइट की जगह डिवाइडर और यू टर्न से नियंत्रित होगा ट्रैफिक     अब बिहारी कॉलोनी से कांति नगर जाने वालों को यू टर्न लेना होगा, जबकि कांति नगर से बिहारी कॉलोनी जाने वालों को केशव चौक अंडरपास के ऊपर से घूमकर जाना पड़ेगा।रेडलाइट बंद होने से मुख्य मार्ग का ट्रैफिक बिना रुके आगे बढ़ सकेगा।     ट्रायल के बाद रॉन्ग साइड चलने की समस्या बढ़ी है, जिसे रोकने के लिए 200 से ज्यादा चालान किए जा चुके हैं।     वहीं, आजाद नगर रेडलाइट को सिग्नल फ्री बनाने की तैयारी पूरी है।     दोनों तरफ यू टर्न बनाए जा चुके हैं। स्वर्ण सिनेमा के पास सीवर लाइन बिछाने का काम 30 जून तक पूरा होना है। इसके बाद रेडलाइट बंद कर दी जाएगी। कृष्णा नगर रेडलाइट कृष्णा नगर रेडलाइट से पहले भी जल बोर्ड का काम चल रहा है। सड़क संकरी होने से कई बार एक लेन से ही ट्रैफिक गुजर पाता है। काम पूरा होने के बाद सिग्नल फ्री व्यवस्था लागू की जाएगी।  

पावर परचेज कॉस्ट बढ़ने से बिजली दरों में बदलाव, व्यापारियों और इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली बिजली के बिलों में पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) की बढ़ोतरी के फैसले पर सरकार ने दावा किया है कि बिजली सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की बढ़ती कीमतों के बावजूद दिल्ली सरकार ने राजधानी के बिजली उपभोक्ताओं को राहत दी है। बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं पर PPAC में हुई बढ़ोतरी का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। आशीष सूद ने साफ किया कि PPAC कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि बिजली कानूनों के तहत पहले से लागू एक नियामक प्रावधान है। इसके जरिए विजली वितरण कंपनियां ईंधन और बिजली खरीद की बढ़ी हुई लागत का एडजस्टमेंट करती है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय कारणों से पिछले एक महीने में बिजली खरीद की लागत में करीब 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उपभोक्ताओं पर इसका असर सिमित ऊर्जा मंत्री के अनुसार, इतनी बड़ी लागत वृद्धि के बावजूद दिल्ली सरकार के प्रयासों से उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रखा गया है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने औसतन केवल 2.4 प्रतिशत PPAC बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि पहले PPAC की सीमा 31 मार्च तक 14.5 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर अब लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत किया गया है। उन्होंने कहा कि DERC के आदेश में बिजली वितरण कंपनियों को लागत की वसूली चरणबद्ध तरीके से करने का प्रावधान किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं पर तत्काल प्रभाव न्यूनतम रहे। सूद ने कहा कि यह कदम बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने दोहराया कि दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे है, जबकि सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सूद ने बताया कि पहले PPAC की सीमा 31 मार्च तक 14.5 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर अब लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत किया गया है दुकानदारों और फैक्ट्री मालिकों की मुश्किलें बढ़ीं PPAC में बढ़ोतरी को लेकर दुकानदारों और फैक्ट्री मालिकों की टेशन बढ़ गई है। व्यापारी संगठन सीटीआई बृजेश गोयल ने सीएम रेखा गुप्ता को पत्र लिखा है। दावा है कि इस बढ़ोतरी से हरियाणा और यूपी के अपेक्षा दिल्ली में कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। बिजली की नई दरें 10 जून से लागू हो चुकी है, जिसका असर जुलाई में आने वाले बिजली बिलो में दिखाई देगा बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली में कमर्शल और इंडस्ट्रीज के लिए बिजली की दरे पहले से ही पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत ज्यादा है। इंडस्ट्रीज हरियाणा और उत्तर प्रदेश शिफ्ट हो सकती हैं बिजली की दरे और बढ़ने से दिल्ली की इंडस्ट्रीज पड़ोसी राज्यो हरियाणा और उत्तर प्रदेश में शिफ्ट हो सकती है क्योंकि वहां बिजली की दरें और न्यूनतम मजदूरी दिल्ली की तुलना में सस्ती होने से लागत कम पड़ेगी। बृजेश गोयल ने कहा कि रेजिडेशल बिजली दरो में सब्सिडी मिलती है, लेकिन कमर्शल और इंडस्ट्रीज में सब्सिडी नहीं मिलने से यहां बिजली की दरे हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत ज्यादा हो जाएंगी। जिससे व्यापारियों और फैक्ट्री मालिको पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और वस्तुओ के दाम बढ़ने की संभावना बढ़ेगी। अगर यही स्थिति रही तो कारोबारी अपना कारोबार हरियाणा या यूपी में शिफ्ट करने को मजबूर होगे। सबसे ज्यादा बोझ बीएसईएस उपभोक्ताओं पर घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए PPAC दरों में संशोधन के बाद 2 किलोवॉट स्वीकृत लोड वाले उपभोक्ताओं के मासिक बिल में वितरण कंपनियों के अनुसार अलग अलग बढ़ोतरी होगी। बृजेश गोयल ने कहा कि DERC के आदेश में बिजली कंपनियो को लागत की वसूली चरणबद्ध तरीके से करने का प्रावधान किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं पर तत्काल प्रभाव न्यूनतम रहे। जानिए किसे कितना चुकाना होगा बिल बीआरपीएल का PPAC 14.5% से बढ़कर 17.9% हो गया है। इसके चलते 200 यूनिट का बिल 866 रुपये से बढ़कर 889 रुपये यानी 23 रुपये अधिक होगा, लेकिन सब्सिडी के चलते बिल जीरो आएगा। 400 यूनिट का बिल 2,086 रुपये से बढ़कर 2.142 रुपये यानी 56 रुपये अधिक होगा। 600 यूनिट का बिल 3,850 रुपये से बढ़कर 3,952 रुपये हो जाएगा, यानी 102 रुपये की बढ़ोतरी होगी। BYPL में PPAC 11.7% से बढ़कर 17.4% कर दिया गया है, जो सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। 200 यूनिट का बिल 847 रुपये से बढ़कर 885 रुपये होगा, लेकिन बिल जीरो ही रहेगा। 400 यूनिट का बिल 2,041 रुपये से बढ़कर 2,133 रुपये यानी 92 रुपये अधिक होगा। 600 यूनिट का बिल 3,766 रुपये से बढ़कर 3,936 रुपये हो जाएगा, यानी 170 रुपये की बढ़ोतरी होगी। वहीं, TPDDL में PPAC 15.9% से बढ़कर 16% हुआ है। इसके बावजूद 200. 400 और 600 यूनिट की खपत पर बिल क्रमशः 876 रुपये, 2,110 रुपये और 3,894 रुपये ही रहेगा। बढ़ोतरी नहीं होगी।  

दिल्ली में यमुना को स्वच्छ बनाने का अभियान तेज, सीएम ने लोगों से की अपील

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को गीता कॉलोनी स्थित दशमेश घाट पर आयोजित ‘मां यमुना रिवरबैंक क्लीनलिनेस ड्राइव’ में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने यमुना को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए जनभागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यमुना में पूजा सामग्री और अन्य कचरा डालकर हम अपनी आस्था को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से ही यमुना को उसका पुराना स्वरूप लौटाया जा सकता है। सुबह 6 बजे से चला सफाई अभियान मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न सामाजिक संगठनों के स्वयंसेवकों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने सुबह 6 बजे से ही सफाई अभियान में हिस्सा लिया। इस दौरान यमुना तट और नदी से सैकड़ों टन कचरा हटाया गया। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी है। लगातार जारी रहेगा अभियान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई एक दिवसीय कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक सतत अभियान है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और नागरिकों को इससे जोड़ा जाएगा, ताकि यमुना को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाया जा सके। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि पीएम के स्वच्छ भारत विजन से प्रेरित यह अभियान यमुना संरक्षण को जनभागीदारी का आंदोलन बनाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 'मेरी यमुना, मेरा कर्तव्य' अभियान के तहत 12 टन से अधिक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया गया था। इस बार अभियान को और व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यमुना को स्वच्छ और जीवनदायिनी बनाया जा सके। यमुना सफाई अभियान के तहत चिल्ला गांव घाट, निजामुद्दीन घाट, गांधी नगर घाट, पुराना लोहे पुल घाट, सिग्नेचर ब्रिज-वजीराबाद घाट, सोनिया विहार के विभिन्न घाट, निगम बोध घाट, यमुना बैंक, कालिंदी कुंज समेत 28 प्रमुख स्थलों पर एक साथ सफाई अभियान चलाया जाएगा। करीब 500 सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संगठनों भी इस अभियान में भागीदार होंगे। इस दौरान दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट समेत दिल्ली सरकार के मंत्री अलग-अलग घाटों पर मौजूद रहकर अभियान का नेतृत्व करेंगे। नागरिकों को यह संकल्प भी दिलाया जाएगा कि वे पूजा सामग्री, प्लास्टिक, कचरा और अन्य अपशिष्ट यमुना में नहीं डालेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। आस्था और पर्यावरण दोनों की रक्षा जरूरी रेखा गुप्ता ने कहा कि लोग धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पूजा सामग्री यमुना में प्रवाहित कर देते हैं, लेकिन इससे नदी प्रदूषित होती है। उन्होंने सवाल किया कि यदि यमुना ही प्रदूषित रहेगी तो हम किस देवी-देवता को प्रसन्न कर पाएंगे। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानने की अपील की। नदी में कचरा फेंकने से बचने की अपील मुख्यमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे किसी भी प्रकार का कचरा यमुना में न डालें। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभा रही है, लेकिन स्थायी बदलाव तभी संभव है जब आम लोग भी इस अभियान का हिस्सा बनें।  

रेस कोर्स स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड पर सरकार का कब्जा, कानूनी लड़ाई की तैयारी

नई दिल्ली लगभग 15.20 एकड़ में फैला जयपुर पोलो ग्राउंड रेस कोर्स इलाके में स्थित है। जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय ने 1930 के आसपास दिल्ली पोलो क्लब को यह भूमि उपहार स्वरूप दी थी। वे खुद भी पोलो के मशहूर खिलाड़ी थे। तब से यह मैदान पोलो की धड़कन बना रहा। बेशक, दिल्ली का यह ग्राउंड उनके सपनों का विस्तार था। एक ऐसा मैदान, जो बिलियर्ड टेबल जितना चिकना हो। यहां राजकुमारों, सेना अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की टापें गूंजी। 1975 में ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स (अब किंग चार्ल्स) ने यहां मैच खेला। लेकिन इतिहास सिर्फ विजयों का नहीं, दर्द का भी गवाह है। नवाब इफ्तिखार अली खान पटौदी सीनियर यहां 5 जनवरी 1952 को पोलो खेलते हुए घोड़े से गिर गए थे और उनकी मृत्यु हो गई थी। उस दिन उनके बेटे, क्रिकेट लीजेंड मंसूर अली खान पटौदी का 11वां जन्मदिन था। वे वहां मौजूद थे। यह घटना दिल्ली के पटौदी की त्रासदी से प्रिंस चार्ल्स के मैच तक, अनगिनत किस्सों का मैदान खेल इतिहास की एक दुखद कड़ी बनी। फिर भी मैदान खिलाड़ियों का आकर्षण बना रहा। जिंदल पैंथर्स, पद्मनाभ सिंह जैसी टीमों ने यहां रोमांचक मुकाबले खेले। सांसों का हिस्सा  यह ग्राउंड सिर्फ खेल का मैदान नहीं, दिल्ली की सांसों का हिस्सा रहा। हरे-भरे पेड़ों और खुली हवा से घिरा जयपुर पोलो ग्राउंड प्रदूषण की मार झेलती राजधानी को थोड़ी राहत देता था। जयपुर पोलो ग्राउंड अब स्मृतियों की धूल में सिमट जाएगा। फिर भी, जो विरासत एक बार रची जाती है, वह कभी पूरी तरह मिटती नहीं। वह हवा में, कहानियों में और उन दिलों में बसती है, जिन्होंने कभी यहां घोड़ों की गति महसूस की। जयपुर के और भी प्रतीक  इस बीच, राजधानी में में जयपुर के कई अन्य महत्वपूर्ण प्रतीक भी मौजूद हैं। राष्ट्रपति भवन परिसर में जयपुर स्तंभ है। यह करीब 145 फीट ऊंचा है। जब देश की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित हुई, उस खुशी में जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह द्वितीय ने इसे ब्रिटिश सरकार को भेंट किया था। नई दिल्ली के निर्माण के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने रायसीना क्षेत्र को चुना था। उन दिनों यह क्षेत्र जयपुर राज्य की संपत्ति था। महाराजा ने यह क्षेत्र ब्रिटिश सरकार को सौंपा और इस भेंट को जीवंत बनाए रखने के लिए वायसराय हाउस (वर्तमान राष्ट्रपति भवन) में जयपुर स्तंभ का निर्माण करवाया गया। इस पर महाराजा द्वारा भेजा गया चांदी का शुभकामना प्रतीक लगा है, जिस कारण इसे जयपुर स्तंभ कहा जाता है। जयपुर से कनॉट प्लेस तक जयपुर रियासत के राजा जय सिंह द्वितीय ने कनॉट प्लेस में राजधानी के सबसे प्राचीन हनुमान मंदिर का 1724 में जीर्णोद्धार करवाया था। उन्होंने हनुमान मंदिर से सटे शिव मंदिर की महत्ता को देखते हुए उसका भी जीर्णोद्धार कराया। जय सिंह द्वितीय ने ही कनॉट प्लेस के पास संसद मार्ग पर जंतर मंतर का निर्माण करवाया था। यह एक खगोलीय वेधशाला है, जिसका निर्माण 1724 में हुआ था। राजस्थान मामलों के जानकार और लेखक गोपेन्द्र नाथ भट्ट ने बताया कि कनॉट प्लेस के पास स्थित राजा बाजार भी जयपुर महाराजा के अधिकार क्षेत्र में था। IPA ने कहा, कानूनी लड़ाई जारी रहेगी केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएडडीओ) ने शनिवार को दिल्ली के रेस कोर्स क्षेत्र स्थित 15.20 एकड़ के जयपुर पोलो ग्राउंड का कब्जा अपने हाथ में ले लिया। यह कार्रवाई 20 मई को जारी बेदखली आदेश के बाद की गई, जिसमें एलएंडडीओ ने जमीन को वृहद सार्वजनिक उद्देश्य और जनहित के लिए आवश्यक बताते हुए कब्जा मागा था। हालांकि, आदेश में जमीन के प्रस्तावित उपयोग का उल्लेख नहीं किया गया था। इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) ने इस कार्रवाई को गलत, मनमाना और कानून के विपरीत बताया है। आईपीए के वकील मेजर (सेवानिवृत्त) निर्विकार सिह ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए एसोसिएशन फिलहाल कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं करेगी।