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सुबह 6 बजे से शुरू होगी खास मुहिम, कई बड़े चेहरे होंगे शामिल

नई दिल्ली  यमुना सफाई के लिए दिल्ली सरकार रविवार को बड़ा जन-अभियान शुरू करने जा रही है। सीएम रेखा गुप्ता के नेतृत्व में 'मां यमुना तट स्वच्छता अभियान' के तहत यमुना के 28 घाट, तटों और रिवरफ्रंट क्षेत्रों में एक साथ सफाई और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 'एक संकल्प-स्वच्छ यमुना' थीम पर आधारित इस अभियान में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, सांसद-मंत्री समेत आम लोग, स्वयंसेवक और सामाजिक संगठन श्रमदान करेंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सुबह 6 बजे गीता कॉलोनी स्थित ठोकर नंबर-14 घाट पर अभियान का नेतृत्व करेंगी। उन्होंने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यावरणीय धरोहर है। इसकी स्वच्छता और संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। इसी सोच के साथ इस पहल को जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम के स्वच्छ भारत विजन से प्रेरित यह अभियान यमुना संरक्षण को जनभागीदारी का आंदोलन बनाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 'मेरी यमुना, मेरा कर्तव्य' अभियान के तहत 12 टन से अधिक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया गया था। इस बार अभियान को और व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यमुना को स्वच्छ और जीवनदायिनी बनाया जा सके। यमुना सफाई अभियान के तहत चिल्ला गांव घाट, निजामुद्दीन घाट, गांधी नगर घाट, पुराना लोहे पुल घाट, सिग्नेचर ब्रिज-वजीराबाद घाट, सोनिया विहार के विभिन्न घाट, निगम बोध घाट, यमुना बैंक, कालिंदी कुंज समेत 28 प्रमुख स्थलों पर एक साथ सफाई अभियान चलाया जाएगा। करीब 500 सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संगठनों भी इस अभियान में भागीदार होंगे। इस दौरान दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट समेत दिल्ली सरकार के मंत्री अलग-अलग घाटों पर मौजूद रहकर अभियान का नेतृत्व करेंगे। नागरिकों को यह संकल्प भी दिलाया जाएगा कि वे पूजा सामग्री, प्लास्टिक, कचरा और अन्य अपशिष्ट यमुना में नहीं डालेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

दिल्ली सरकार का बड़ा प्लान: 11.4 एकड़ में ई-वेस्ट इको पार्क, 30 साल लीज पर निजी कंपनी

नई दिल्ली  राजधानी की दिल्ली सरकार इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के निपटारे के लिए बनने वाले ई-वेस्ट इको पार्क को अब पीपीपी मॉडल पर विकसित करेगी। सरकार को इसपर कोई पैसा खर्च नहीं करना होगा। दिल्ली सरकार की दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ( DSIIDC ) ने टेंडर जारी कर इसके लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे है। सूत्रों की मानें तो चयनित कंपनी को यह परियोजना 30 साल के लिए लीज पर दी जा सकती है। दिल्ली में हर साल 2 लाख टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है राजधानी दिल्ली में हर साल 2 लाख टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है। यह देश में निकलने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक कचरे का 9.5 पर्सेट है। इसलिए तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2022 में होलंबी कलां में 21 एकड़ क्षेत्र में ई-वेस्ट इको पार्क बनाने का फैसला किया था। उस समय कई कोशिशों के बाद भी डीडीए की ओर से पूरी जमीन उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण यह योजना लटकी रही। मौजूदा सरकार ने 11.4 एकड़ में विकसित करने का फैसला लिया अब मौजूदा सरकार ने इसे 11.4 एकड़ में विकसित करने का फैसला किया है। डीडीए ने इसके लिए जमीन भी उपलब्ध करा दी है। DSIIDC के दस्तावेजों के मुताबिक, यह परियोजना PPP मॉडल पर विकसित की जाएगी। इसके तहत चयनित कंपनी ई-वेस्ट 2 लाख टन ई-वेस्ट दिल्ली में हर साल निकलता है। ई-वेस्ट इको पार्क में कैसे होगा काम     ई-वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत, पुराने मोबाइल, टीवी, फ्रिज और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट और अलग किया जाएगा।     जो उपकरण ठीक किए जा सकते हैं, उनकी मरम्मत करके उन्हें दोबारा उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा।     पार्क में एक डेडिकेटेड इलेक्ट्रॉनिक बाजार होगा, जहां रीसायकल और नवीनीकृत किए गए सामानों को बेचा जाएगा।     कचरे से प्लास्टिक को अलग किया जाएगा और कीमती धातुओं को निकालने व दोबारा निर्माण (Remanufacturing) करने की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

गर्मी का असर या बदलती पसंद? दिल्लीवासियों ने मई में गटक ली 11.12 लाख केस बीयर, बिक्री में बड़ा उछाल

नई दिल्ली दिल्ली में गर्मियों के दौरान बीयर लोगों की सबसे पसंदीदा अल्कोहल ड्रिंक में से एक है। जैसे-जैसे गर्मी अपना रंग दिखाना शुरू करती है, बीयर की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। दिल्लीवासी गर्मी भगाने के लिए बीते साल मई के मुकाबले में इस मई में ज्यादा बीयर गटक गए। राजधानी में दुकानों में फिर से लोकप्रिय ब्रांडों के आने से इस साल मई में बीयर की बिक्री बीते साल इसी टाइम पीरियड के मुकाबले 10 फीसदी बढ़ी है। आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बढ़ोत्तरी की वजह रिटेल दुकानों पर देश के लोकप्रिय बीयर ब्रांडों की वापसी है। आंकड़ों के अनुसार, लोकप्रिया देसी बीयर ब्रांडों की रिटेल दुकानों में हिस्सेदारी इस साल मई में बढ़कर 54 फीसदी हो गई जो कि मई 2025 में 24 फीसदी जबकि 2024 में 38 फीसदी थी। कम लोकप्रिय ब्रांड की बिक्री पर असर आंकड़ों के मुताबिक, कम लोकप्रिय ब्रांड जिनमें नेपाल और भूटान के ब्रांड भी शामिल हैं उनकी हिस्सेदारी 46 फीसदी रही जो कि मई 2024 में 62 फीसदी थी। एक ऑफिशियल डॉक्यूमेंट के अनुसार, बीयर की बिक्री इस साल मई में 10 फीसदी बढ़ी है जो कि बीते साल इसी टाइम पीरियड के दौरान कम थी। बीते साल मई में बीयर की 10,10,524 केस की बिक्री हुई थी, जबकि इस साल 11,12,761 केस की बिक्री हुई। इसमें से इस मई में देसी ब्रांडों की हिस्सेदारी 5,96,351 केस जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान यह 2,47,143 केस थी। ड्रॉफ्ट बीयर की बिक्री के क्या आंकड़े? वहीं आंकड़ों से भी पता चलता है कि ड्रॉफ्ट बीयर की बिक्री ज्यादात्तर रेस्टोरेंट और क्लब में ही होती है। मई के महीने में ड्रॉफ्ट बीयर की कुल 1,521 केस बिके जिनमें से 1,365 रेस्टोरेंट में तो 126 क्लब जबकि 30 दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (DSIIDC) की दुकानों पर बिके। अधिकारियों के मुताबिक, मई और जून में बीयर की बिक्री के लिए पीक सीजन माना जाता है क्योंकि इस बढ़ते तापमान के वजह से ग्राहक चिल्ड ड्रिंक का सेवन करना पसंद करते हैं। दिल्ली में कैसा है मौसम? दिल्ली में बीते दिनों तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार गया था लेकिन फिलहाल दिल्लीवासी भीषण गर्मी का सामना नहीं कर रहे है। शुक्रवार रात को भी दिल्ली के कुछ इलाकों में तेज हवाएं और हल्की बारिश दर्ज की गई थी। बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने से तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह जून का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा।

500 यूनिट से ज्यादा खपत पर बढ़ेगा बिजली बिल, दिल्ली उपभोक्ताओं को झटका

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी में बिजली के बिल बढ़ने वाले हैं, इसका सीधा असर हजारों विद्युत उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों को 'फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज' (FPPAS) वसूलने की अनुमति दे दी है। ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार जिसे आमतौर पर PPAC भी कहा जाता है। DERC के इस फैसले का सीधा असर उन ग्राहकों पर होगा, जो 500 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। DERC का फैसला, बढ़ जाएगा बिजली बिल दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने वैश्विक तनाव के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट और बिजली खरीद लागत में वृद्धि के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी बिजली बिल बढ़ाने की तैयारी कर रही है। DERC ने बिजली वितरण कंपनियों को उपभोक्ताओं से अधिक ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) वसूलने की अनुमति दे दी है अधिकारियों ने बताया कि इस फैसले का असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो बिजली सब्सिडी योजना के दायरे में नहीं आते हैं। हालांकि पूर्ण या 50 फीसदी सब्सिडी प्राप्त करने वाले विद्युत उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। 500 यूनिट से ज्यादा इस्तेमाल करने वालों को झटका एफपीपीएएस बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और बिजली खरीद लागत में बदलाव के आधार पर लगाया जाने वाला अधिभार है। यह कुल ऊर्जा और स्थायी लागत के पर्सेंट के रूप में वसूला जाता है। अधिकारियों के अनुसार, हाल के समय में कोयले के आयात और परिवहन लागत बढ़ने से कोयले की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जानकारी के मुताबिक, पूर्वी और मध्य दिल्ली में BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) से बिजली लेने वाले ग्राहकों के बिल में लगभग 5.7 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। जून से बढ़ सकता है बिजली बिल दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीीडीडीएल) ने मई में डीईआरसी से एफपीपीएएस वसूली की 10 फीसदी की सीमा में ढील देने का अनुरोध किया था। कंपनियों ने कहा था कि अप्रैल में उनकी वास्तविक बिजली खरीद लागत, 30 सितंबर 2021 के फीस आदेश में निर्धारित आधार लागत की तुलना में काफी बढ़ गई है। DERC के फैसले की बड़ी बातें     डीईआरसी के आदेश के अनुसार, अप्रैल के लिए एफपीपीएएस बीआरपीएल के मामले में 31.5 फीसदी, बीवाईपीएल के लिए 35.26 फीसदी और टाटा पावर डीडीएल के लिए 16 फीसदी रहा।     आयोग ने बिजली खरीद लागत में वृद्धि का उचित हिस्सा वसूलने में बिजली कंपनियों को हो रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए 10 फीसदी की सीमा में ढील देने का फैसला किया।     इसके तहत बीआरपीएल को अप्रैल के लिए अतिरिक्त 7.94 फीसदी और बीवाईपीएल को 7.43 फीसदी अतिरिक्त एफपीपीएएस वसूलने की अनुमति दी गई है।     टीपीडीडीएल को पूरा 16 फीसदी एफपीपीएएस वसूलने की अनुमति दी गई है।     इस आदेश के बाद अप्रैल के लिए बीआरपीएल की ओर से वसूला जाने वाला कुल एफपीपीएएस बढ़कर 17.94 फीसदी होगा     बीवाईपीएल के लिए 17.43 प्रतिशत हो गया है।     डीईआरसी ने स्पष्ट किया कि अगला आदेश जारी होने तक यह छूट मासिक आधार पर लागू रहेगी।

बिरयानी विवाद के बाद प्रणित मोरे का यू-टर्न, कहा- मुझसे बड़ी गलती हुई, लोगों से मांगी क्षमा

नई दिल्ली  गुड़गांव के ‘₹370 बिरयानी विवाद’ को लेकर मचे भारी बवाल के बाद स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे ने माफी मांगी है. उन्होंने एक वीडियो शेयर कर अपनी गलती को स्वीकार किया लोगों का गुस्सा पूरी तरह जायज बताया. उन्होंने माना कि शो के दौरान उनके जजमेंट में बड़ी चूक हुई थी. सोशल मीडिया पर हो रही तीखी आलोचना और कानूनी कार्रवाई के बीच प्रणित मोरे ने ये कदम उठाया है।  ‘₹370 बिरयानी विवाद’ सोशल मीडिया पर काफी बढ़ा. सेलेब्स और लोगों की आलोचाओं के बाद महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया है. वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी दोनों को समन जारी किया है।  प्रणित मोरे ने क्या कहा आज प्रणित मोरे ने वीडियो जारी कर कहा, ‘आप सबने मेरा क्राउड वर्क का वीडियो देखा होगा. इसके लिए मुझे बहुत हेट मिल रही है. मुझे लगता है कि मैं यह हेट डिजर्व भी करता हूं. जब मैं उस लड़के के साथ बात कर रहा था तो उसने काफी गलत बातें बोलीं. लेकिन उस वक्त सब लोग हंस रहे थे. मैं भी भावनाओं में बह गया और मेरे से मुझसे ‘लैप्स इन जजमेंट’ हो गया. यह मेरी बहुत बड़ी गलती थी। ‘मैं उसे रोक सकता था लेकिन…’ प्रणीत ने आगे माना कि एक कॉमेडियन के तौर पर उनके पास माइक और स्टेज की जिम्मेदारी होती है. प्रणीत ने आगे कहा, ‘मैं चाहता तो उसे वहीं पर टोक सकता था या स्टैंड ले सकता था. लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया. मैंने उसे एक प्लेटफॉर्म दिया, जिसकी वजह से बात इतनी बढ़ गई. जिन लोगों को भी इस वजह से ठेस पहुंची है, मैं उन सभी से माफी मांगता हूं. यह मेरी बहुत बड़ी गलती थी।  ‘पुलिस का सहयोग कर रहा हूं, एक मौका और दे’ प्रणित ने वीडियो में कहा, ‘मेरे खिलाफ जो भी कानूनी कार्रवाई हो रही है, मैं उसमें पुलिस और अधिकारियों का पूरा सहयोग कर रहा हूं. मैं बस यही गुजारिश करना चाहता हूं कि प्लीज मुझे एक मौका दें. मैं एक बेहतर इंसान बनकर दिखाऊंगा. यह मेरे लिए एक बड़ा सबक था. अब मैं खुद पर और अपने कंटेंट पर काम करूंगा।  विवाद क्या है ₹370 बिरयानी’ मामला यह पूरा विवाद प्रणित मोरे के एक लाइव शो के दौरान शुरू हुआ था. शो में दर्शकों के बीच बैठे हिमांशु जांगड़ा नाम के एक 22 साल युवक ने अपनी डेटिंग लाइफ का एक किस्सा सुनाया. युवक ने कहा कि उसने एक लड़की को ₹370 की चिकन बिरयानी खिलाई थी. जब लड़की ने डेट के बाद घर जाने को कहा तो युवक ने शो में माइक कुछ आपत्तिजनक शब्द कहे. ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा दोनों ट्रोल होने लगे. हिमांशु को तो अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा।  प्रणित ने हंसकर दिया था इनाम इस विवादित बयान पर वहां मौजूद दर्शक और खुद प्रणित मोरे जोर-जोर से हंसने लगे. प्रणित ने इसे ‘पीक गुड़गांव कंटेंट’ कहा और युवक को उसकी कहानी के लिए 5000 रुपये का इनाम भी दे दिया. इसके बाद प्रणित ने इस क्लिप को एडिट करके अपने लाखों सब्सक्राइबर्स के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. वीडियो वायरल होते ही लोग भड़क गए। लोगों ने इसे महिलाओं के साथ जबरदस्ती और असहमति को बढ़ावा देने वाला बताया।   

पिंक सहेली योजना अपडेट: 15 जून से केंद्र हर सोमवार बंद, महिलाओं को मिल चुका 10 लाख कार्ड

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली परिवहन निगम ( डीटीसी ) ने एनसीएमसी 'पिंक सहेली' स्मार्ट कार्ड वितरण केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को हर सोमवार को साप्ताहिक अवकाश देने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 15 जून से लागू होगी। विभाग के इस पहल की वजह से अब सोमवार को पिंक सहेली स्मार्ट केंद्र बंद रहेंगे। डीटीसी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, दिल्ली सरकार की पिंक सहेली योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा सुविधा देने के लिए NCMC स्मार्ट कार्ड वितरण अभियान 3 मार्च 2026 से शुरू किया गया था। शुरुआत में करीब 50 केंद्रों से शुरू हुई यह व्यवस्था बढ़कर 70 से अधिक केंद्रों तक पहुंच गई। अब तक 10 लाख से अधिक पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड में क्या होगा पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड में सफर करने वाली महिला का पूरा डाटा उपलब्ध होगा, जो आधार से लिंक होगा। इस पर एक QR Code होगा, जिसे स्कैन कर वह डीटीसी बसों में मुफ्त में सफर कर पाएंगी। महिलाएं जितनी बार सफर करेंगी, उतनी ट्रिप इसमें एड होती जाएंगी। हालांकि, दिल्ली की महिलाओं के लिए यह अनलिमिटेड है। कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली का आधार कार्ड होना अनिवार्य कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य है। इसके लिए आपको दिल्ली के पते का प्रमाण पत्र (जैसे- दिल्ली का वोटर आईडी, आधार कार्ड) दिखाना होगा। कैसे काम करेगा पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड आपको सबसे पहले पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड बनवाना होगा। जिस ढंग से हम मेट्रो में कार्ड को स्कैन करते हैं, वैसे ही कंडक्टर को यह कार्ड दिखाना होगा। कंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन (ETM) पर टैप करेंगे और आपकी एंट्री हो जाएगी। आप आराम से सफर कर सकती हैं। कैसे बनेगा पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली में जगह-जगह काउंटर लगाए जाएंगे। द‍िल्‍ली में कुल 50 सेंटर्स पर काउंटर शुरू क‍िए गए हैं, जो सातों द‍िन काम करेंगे। यहां सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच जाकर आप अपना स्‍मार्ट कार्ड बनवा सकती हैं। पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत     आधार कार्ड     दिल्ली का निवास प्रमाण पत्र     फोटो

सरकारी स्कूलों में माध्यम परिवर्तन विवाद पर शिक्षा निदेशालय ने लिया संज्ञान

नई दिल्ली  सरकारी स्कूलों में कक्षा 11 के छात्रों को अंग्रेजी माध्यम से हिंदी माध्यम सेक्शन में स्थानांतरित किए जाने के आरोपों की शिक्षा निदेशालय ने अब औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है।अधिवक्ता अशोक अग्रवाल की ओर से इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की कक्षाओं को या तो बंद किया जा रहा है या फिर उन्हें हिंदी माध्यम के साथ मिला दिया जा रहा है, जिससे छात्रों को अपनी चुनी हुई भाषा में पढ़ाई जारी रखने में कठिनाई हो रही है। शिकायतकर्ता ने कहा कि ये घटनाएं उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कुछ स्कूलों में हो रही हैं, जिनमें सीआर दास सर्वोदय कन्या विद्यालय का नाम भी सामने आया है। शिकायत के अनुसार, जिन छात्रों ने 10वीं तक अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की थी, उन्हें 11वीं में उसी माध्यम में आगे बढ़ने के पर्याप्त विकल्प नहीं मिल रहे हैं। इस स्थिति को लेकर अभिभावकों और छात्रों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि अचानक माध्यम बदलने से न केवल पढ़ाई की समझ प्रभावित होती है, बल्कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी और आगे की उच्च शिक्षा की योजना पर भी असर पड़ता है। अभिभावक संगठनों का कहना है कि यदि अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाले छात्रों को बीच में ही हिंदी माध्यम में स्थानांतरित किया जाता है, तो यह उनकी शैक्षणिक प्रगति को प्रभावित कर सकता है।

असोला भाटी अभयारण्य में बढ़ी तेंदुओं की मौजूदगी, कैमरा ट्रैप में जोड़े बार-बार रिकॉर्ड

नई दिल्ली  दिल्ली के असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी ने वन अधिकारियों को खासा उत्साहित कर दिया है। अब यहां आए दिन तेंदुए देखे जा रहे हैं। खास तौर पर कैमरा ट्रैप में लगातार तेंदुओं के जोड़े रिकॉर्ड हो रहे हैं। इसे अधिकारी अभयारण्य में बेहतर होते प्राकृतिक आवास और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मान रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि असोला भाटी क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या 2022 के लगभग 12-14 से बढ़कर अब करीब 16 हो गई है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि यह आंकड़ा ‘कैमरा ट्रैप’ रिकॉर्ड और एरिया निगरानी पर आधारित है और विस्तृत गणना के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकती है। असोला वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी से गुड न्यूज वन्यजीव अधिकारियों को जिस बात ने सबसे ज्यादा उत्साहित किया है, वह है अभयारण्य के भीतर जलाशयों के पास तेंदुओं के जोड़ों का बार-बार दिखना। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे नजारे बेहद दुर्लभ हैं क्योंकि तेंदुए आमतौर पर एकांत प्रिय होते हैं और वे आमतौर पर केवल प्रणय काल, प्रजनन के दौरान या फिर शावकों के पालन-पोषण के समय ही साथ दिखाई देते हैं। क्या कह रहे वन विभाग के अधिकारी वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ साल पहले तेंदुए इतनी बार दिखना असामान्य था। आज हमारे ‘कैमरा ट्रैप’ लगभग हर रोज उन्हें रिकॉर्ड कर रहे हैं। तेंदुओं के जोड़े भी बार-बार दिख रहे हैं, जो काफी महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों की आबादी में बढ़ोतरी सिर्फ तेंदुओं तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि चीतल और जंगली सूअर भी काफी देखे जा रहे हैं, जबकि मोर तो इतने हैं कि अब वे अभयारण्य के कई हिस्सों में आम तौर पर दिख जाते हैं। इसलिए खास है ये उपलब्धि     एक अधिकारी ने कहा कि मोर अब लगभग हर जगह दिखते हैं। उनकी आबादी काफी बढ़ी है और कुछ रास्तों पर तो वे पूरे झुंड में नजर आते हैं।     अधिकारियों के मुताबिक वन्यजीव गतिविधि में यह वृद्धि अभयारण्य के भीतर व्यापक पारिस्थितिक सुधार का संकेत है।     कई प्रजातियों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि भोजन, पानी और आश्रय अब परिदृश्य में अधिक सुलभ होते जा रहे हैं।     एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियां आवास की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं।     अधिकारी ने कहा कि कुछ प्रजातियां ऐसी होती हैं जिन्हें हम संकेतक प्रजाति कहते हैं।     उनकी मौजूदगी से हम समझ सकते हैं कि आवास बेहतर हो रहा है या बिगड़ रहा है।     मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियों की बढ़ोतरी बताती है कि आवास की स्थिति सुधर रही है। अधिकारियों ने बताया कैसे बदल रही स्थिति अधिकारी इस बदलाव का श्रेय पिछले कई वर्षों में किए गए आवास प्रबंधन उपायों को देते हैं। अभयारण्य में 200 से अधिक जलकुंड बनाए और संधारित किए गए हैं, जिससे वन्यजीवों को साल भर पानी मिलता रहता है। साथ ही कई साल पहले किए गए वृक्षारोपण अब घने हरे-भरे क्षेत्र में तब्दील हो चुके हैं और अनेक पेड़ घना छत्र बना चुके हैं। चीतल और जंगली सूअर की भी बढ़ी संख्या अधिकारियों ने बताया कि चीतल और जंगली सूअर की संख्या काफी बढ़ी है, जिससे तेंदुए जैसे शिकारियों के लिए अभयारण्य के भीतर रहने के अनुकूल हालात बने हैं। ऐतिहासिक रूप से तेंदुए असोला भाटी क्षेत्र को हरियाणा के अरावली के जंगलों और दिल्ली को जोड़ने वाले एक बड़े गलियारे के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। यह आवाजाही जारी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि हाल के ‘कैमरा ट्रैप’ रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि कुछ जानवर अब अभयारण्य में अधिक समय बिताने लगे हैं।  

दिल्ली में हर घर में स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर अनिवार्य करने की सिफारिश

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में आग की बढ़ती घटनाओं पर काबू पाने के लिए दिल्ली फायर डिपार्टमेंट ने हर घर में स्मोक डिटेक्टर, वॉटर स्प्रिंकलर लगाना अनिवार्य करने की सिफारिश की है। विभाग का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो आग से हो रही मौतों पर 97 फीसदी तक काबू पाया जा सकता है। फायर डिपार्टमेंट ने आग से निपटने के लिए अगले 25 साल की तैयारियों के लिए मास्टर प्लान भी तैयार कर लिया है। विवेक विहार की घटना के बाद सीएम ने खुद संभाली थी कमान फायर विभाग के सूत्रों की मानें तो अगले एक-दो दिन में इसे होम डिपार्टमेंट के पास भेज दिया जाएगा। बता दें कि विवेक विहार की घटना के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने विभागों के साथ बैठक कर आग से निपटने के लिए फायर मास्टर प्लान बनाने का निर्देश दिया था। फायर डिपार्टमेंट की माने तो अगर यह दावा लागू हुआ तो 97 फीसदी तक मौत का आंकड़ा घट जाएगा। दिल्ली के चीफ फायर ऑफिसर ए. के. मलिक के मुताबिक एक-दो दिन में इस मास्टर प्लान को होम डिपार्टमेट के पास भेज दिया जाएगा और मालवीय नगर जैसी घटनाओं में आग से होने वाली मौत को रोकने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे। उसी को लेकर हमने सरकार को कुछ सिफारिशें भेजी हैं, जिससे आग से हो रही मौतों में 97 फीसदी की कमी लाई जा सकती है। दिल्ली के हर घर में स्मोक डिटेक्टर, वॉटर स्प्रिंकलर अनिवार्य करने पर जोर इसके लिए सबसे पहले हर घर में स्मोक डिटेक्टर, वॉटर स्प्रिंकलर अनिवार्य करने के साथ-साथ विल्डिंग में सीढ़ियों के आस-पास बिजली के मीटर लगाने और बिल्डिंग के बेसमेंट या स्टिल्ट पार्किंग में एग्जिट गेट के पास EV चार्जिग पॉइंट पर रोक लगानी होगी। उन्होंने कहा कि ज्यादातर आग की घटनाएं बिजली मीटर के या EV चार्जिंग पॉइंट के साथ हो रही है। इससे आग लगने के बाद लोग बाहर नहीं निकल पाते है। उन्होंने कहा कि पहले से बने घरों में स्मोक डिटेक्टर लगाने के लिए सरकार को प्रोत्साहित करने के लिए भी योजना लानी चाहिए। स्मोक डिटेक्टर, वॉटर स्प्रिंकलर हो तो लोग आग फैलने से पहले खुद को बचा सकते हैं। इससे कैजुएलटी पर काबू पाया जा सकता है। दिल्ली में अभी आग से हर साल करीब 100 लोगों की मौत हो जाती है। इस साल ही जनवरी से जून में अब तक 66 से अधिक लोगों की आग के कारण मौत हो चुकी है।  

कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा पर सख्ती, फीस से लेकर फायर सेफ्टी तक बनेंगे नियम

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के कोचिंग सेंटर्स को चलाने के लिए सरकार नए नियम-कानून बनाने जा रही है। नई नीति के ड्राफ्ट को तैयार करने के लिए सरकार ने नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। राजधानी में चल रहे कोचिंग संस्थानों के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने शुरू भी कर दी है। दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार कोचिंग संस्थानों के मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और स्टूडेंट्स सुरक्षित हों, इसके लिए गाइडलाइंस तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स दिल्ली में कोचिंग के लिए आते है, इसलिए दिल्ली इस क्षेत्र में व्यापक नियम-कानून लागू करने वाला अग्रणी राज्य बनने जा रहा है। गुरुवार को शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने इसके लिए एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई गुरुवार को शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने इसके लिए एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई। इस बैठक में नगर निगम, दिल्ली फायर सर्विस, हायर एजुकेशन डायरेक्टोरेट, दिल्ली पुलिस, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शहरी विकास विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में फैसला लिया गया कि एक मल्टी-डिसिप्लिनरी कमिटी कोचिंग संस्थानों के लिए दिशानिर्देश तैयार करेगी। इनमें फीस स्ट्रक्चर, स्टूडेंट सेफ्टी और वेलफेयर, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श व्यवस्था, बिल्डिंग और बुनियादी ढांचे के सुरक्षा मानक, फायर सेफ्टी और इमरजेंसी के लिए तैयारियां, शिक्षकों और कर्मचारियों के वेलफेयर और काम की परिस्थितियों को सिस्टमैटिक करना शामिल है इसके अलावा कोचिंग कर्मचारियों और स्टूडेंट्स के लिए ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम, नियमित निरीक्षण और अनुपालन की निगरानी की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित ढांचा कोचिंग संस्थानों में सुरक्षित, पारदर्शी, जवाबदेह और स्टूडेंट फ्रेंडली एनवायरमेंट सुनिश्चित करेंगे। क्यों जरूरी है नियम ? 2024 में ओल्ड राजेद्र नगर में एक कोचिंग सेटर के बेसमेंट में पानी भरने से हुई तीन स्टूडेंट्स की मौत के बाद तमाम कोचिंग सेंटर्स में सुरक्षा के लिए आसपास ड्रेनेज सिस्टम, तारों के जंजाल, कोचिंग सेंटर्स की मनमानी की ओर भी ध्यान दिलाया गया था। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) आर.सी. गौबा की अध्यक्षता में हाई लेवल कमिटी कमियों की पहचान की और कड़े रेगुलेशंस और निगरानी का सुझाव दिया था। दिल्ली मे करीब 600 कोचिंग सेंटर्स है, जो रजिस्टर्ड है और कर्मशल तौर पर चलते है। बाकी कम संख्या वाले कोचिंग सेंटर्स की संख्या काफी ज्यादा है