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सरकारी कॉलोनियों को जोड़ने के लिए दिल्ली में बनेगा 6-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर

नई दिल्ली  जनरल पूल रेजिडेंशल अकोमोडेशन (जीपीआरए) के तहत केंद्र सरकार ने जो 7 रेजिडेंशल कॉलोनियां डिवेलप की हैं, उनसे रिंग रोड पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए 13.65 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। रेजिडेंशल कॉलोनियों से एलिवेटेड कॉरिडोर पर चढ़ने और उतरने के लिए चार जगहों पर रैप बनाए जाएंगे। इनमें एक सरोजानी नगर और नेताजी नगर के पास, दूसरा लक्ष्मीबाई नगर, तीसरा मुनिरका और चौथा रैप जेएनयू कैंपस के पास होगा। जेएनयू कैंपस से आगे एयरपोर्ट तक एलिवेटेड कॉरिडोर पर चढ़ने और उतरने की सुविधा नहीं होगी। कॉरिडोर 6 लेन चौड़ा होगा। जीपीआरए कॉलोनियों से रिंग रोड पर वर्तमान में जितना ट्रैफिक है, उसमें कुल 17.6 पसेंट हिस्सेदारी इन 7 कॉलोनियों की है। पीडब्ल्यूडी ने 7 जीपीआरए कॉलोनियों से रिंग रोड पर आकलन कराया है एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, पीडब्ल्यूडी ने 7 जीपीआरए कॉलोनियों से रिंग रोड पर आने-जाने वाले ट्रैफिक वॉल्यूम का आकलन कराया है। इसमें पाया गया कि अफ्रीका एवेन्यू के पास नेताजी नगर और नौरोजी नगर से रोजाना रिंग रोड पर सबसे अधिक 3,215 गाड़ियों का भार पड़ता है। रिंग रोड और लीला पैलेस होटल के बीच रोजाना 2,608 गाड़ियां इन कॉलोनियों से आती-जाती है। किदवई नगर के सामने रिंग रोड पर रोजाना 1,628 गाड़ियां कॉलोनियों से आती-जाती है। सरकार ने श्रीनिवासपुरी में डिवेलप की गई रेजिडेंशल कॉलोनी को कनेक्ट करने के लिए अलग योजना तैयार की है। इन इलाकों में फ्लाईओवर बनाने का प्लान साउथ एक्सटेंशन फ्लाईओवर और एम्स क्लोवरलीफ फ्लाईओवर को जोड़ने के लिए एक अलग फ्लाईओवर बनाने का प्लान है। इसके अलावा, किदवई नगर की बेसमेट पार्किंग में आने-जाने के लिए एक एल-शेप अंडरपास बनाने की भी योजना है।

टर्मिनल से रनवे तक बदला सिस्टम: DIAL ने IGI एयरपोर्ट पर लगाए नए ड्रेनेज और पंप

नई दिल्ली देश के सबसे बड़े और व्यस्ततम एयरपोर्ट आइजीआइ की संचालन एजेंसी डायल इस बार मानसून से जुड़ी तैयारियों में कोई किंतु-परंतु या ढिलाई की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती। पिछले कुछ वर्षाें में मानसून के दौरान टर्मिनल के भीतर पानी टपकने, रनवे पर जलभराव और टर्मिनल-1 के फोरकोर्ट पर हुए हादसों ने न केवल यात्रियों को परेशान किया था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरपोर्ट की साख को भी बट्टा लगाया था। इन पुरानी फजीहतों से कड़ा सबक लेते हुए इस बार दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने एक एडवांस प्री-मानसून प्लान तैयार किया है। हालांकि, असली चुनौती इन दावों को जमीन पर उतारने की होगी। विगत वर्षों का कड़वा अनुभव इस बार एयरपोर्ट प्रशासन की तैयारियों में जो सख्ती और जल्दबाजी दिख रही है, उसके पीछे बीते वर्षों का कड़वा अनुभव है। पूर्व में हुई कुछ गंभीर घटनाओं ने एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए थे। दो वर्ष पूर्व मानसून की शुरुआत में टर्मिनल-1 पर हुआ हादसा सबसे ज्यादा संवेदनशील रहा, जिसने स्ट्रक्चरल मेंटेनेंस की कमियों को उजागर किया था। वहीं, कुछ वर्ष पूर्व भारी वर्षा के दौरान रनवे और एयरसाइड एरिया में पानी भरने से उड़ानों के रूट डाइवर्ट करने पड़े थे, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हुई। इसके अलावा, पिछले वर्ष टी-1 के भीतर लाउंज एरिया में पानी टपकने की तस्वीरों ने इंटरनेट मीडिया पर खूब किरकिरी कराई थी। यही वजह है कि इस बार डायल प्रशासन केवल रूटीन सफाई तक सीमित न रहकर बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव करने को मजबूर हुआ है। इस बार डायल ने कागजी दावों से इतर जमीन पर कई तकनीकी बदलाव किए हैं। टर्मिनल-1 फोरकोर्ट: यहां पहले होने वाले जलभराव और कमजोर ड्रेनेज से निपटने के लिए अत्याधुनिक साइफोनिक ड्रेनेज सिस्टम (वैक्यूम आधारित सक्शन तकनीक) और ओवरफ्लो डाउनटेक पाइप (इमरजेंसी बैकअप पाइप) लगाए गए हैं, जो पानी को छत पर जमा नहीं होने देंगे। टर्मिनल-2 की छत: स्काईलाइट और छतों से पानी का रिसाव रोकने के लिए पूरी छत की व्यापक स्तर पर वाटरप्रूफिंग की गई है और सभी जोड़ों की बारीक मरम्मत पूरी हो चुकी है। रनवे व एयरसाइड: विमानों के पहियों तक पानी भरने की पुरानी समस्या को खत्म करने के लिए हाई-कैपेसिटी डीवाटरिंग पंप स्थापित किए गए हैं और नालियों की सघन गाद सफाई (डीसिल्टिंग) का काम पूरा कर लिया गया है। बैकअप और समन्वय पर विशेष जोर इस बार डायल सिर्फ नए ड्रेनेज सिस्टम के भरोसे नहीं बैठा है, बल्कि उसने बैकअप प्लान भी तैयार किया है। आपात स्थितियों के लिए एक समर्पित क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) बनाई गई है, जो किसी भी लीकेज या जलभराव की स्थिति में तुरंत एक्शन के लिए संवेदनशील प्वाइंट्स पर 24 घंटे तैनात रहेगी। इसके साथ ही बाहरी पानी को रोकने के लिए भी व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं। अक्सर एयरपोर्ट के आसपास बसे इलाकों का वर्षा जल बैकफ्लो मारकर एयरपोर्ट परिसर में घुस जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए डायल ने दिल्ली सरकार के साथ तालमेल बिठाकर इस बाहरी पानी को एयरपोर्ट में आने से पहले ही डाइवर्ट करने का प्लान बनाया है।  

बैंकॉक से आए भारतीय के बैग में मिला करीब 7 किलो संदिग्ध मादक पदार्थ

नई दिल्ली सीमा शुल्क अधिकारियों ने दिल्ली हवाई अड्डे पर एक भारतीय यात्री को गिरफ्तार किया, जिसके बैग से लगभग 2.43 करोड़ रुपये मूल्य का संदिग्ध गांजा बरामद किया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैंकॉक से आ रहे उस यात्री को बुधवार को एक्स-रे जांच और उसके सामान की विस्तृत तलाशी के बाद गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान उसके बैग से हरे रंग के मादक पदार्थ से भरे आठ पॉलीथीन पाउच बरामद हुए। बयान में बताया गया कि बरामद किए गए पदार्थ का वजन 6,939.5 ग्राम था। सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला कि यह पदार्थ प्रथम दृष्टया गांजा (मारिजुआना) है। बयान में कहा गया कि जब्त किए गए मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत लगभग 2.43 करोड़ रुपये है। क्या है पूरा मामला     दिल्ली हवाई अड्डे पर बैंकॉक से आए एक भारतीय यात्री को कस्टम अधिकारियों ने गिरफ्तार किया।     यात्री के बैग से आठ पॉलीथीन पाउच में भरा लगभग 7 किलो संदिग्ध गांजा बरामद हुआ।     जब्त किए गए इस गांजे की अनुमानित कीमत ~2.43 करोड़ रुपये है।     आरोपी को एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत गिरफ्तार कर सामान जब्त कर लिया गया है। जब्त कर लिया गया गांजा यात्री को स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया और मादक पदार्थ के साथ उसकी पैकिंग सामग्री को आगे की जांच के लिए जब्त कर लिया गया। सीमा शुल्क अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए मादक पदार्थों के स्रोत और इनके संभावित गंतव्य का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।  

NCR प्लान-2041: दिल्ली का बोझ घटाने को नए ग्रीनफील्ड शहरों का खाका तैयार

नई दिल्ली  दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती आबादी और दबाव को कम करने के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) ने बड़ा खाका तैयार किया है। अगले सप्ताह मंजूरी के लिए रखे जाने वाले रीजनल प्लान-2041 में 5 से 8 नए ग्रीनफील्ड स्मार्ट टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही दिल्ली समेत एनसीआर के प्रमुख शहरों को महज 30 मिनट की दूरी पर लाने की योजना है। NCRPB की योजना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए नए स्मार्ट शहर बसाए जाएंगे। इन टाउनशिप में आधुनिक नागरिक सुविधाएं, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल अपनाया जाएगा। दिल्ली का बोझ कम करने पर फोकस रीजनल प्लान-2041 प्लान में मौजूदा शहरों और बस्तियों के पुनर्विकास के साथ-साथ नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने का सुझाव दिया गया है। इन शहरों को आत्मनिर्भर और स्व-संपूर्ण बनाया जाएगा ताकि रोजगार, आवास और अन्य सुविधाओं के लिए लोगों को दिल्ली पर निर्भर न रहना पड़े। योजना में उत्तर प्रदेश सरकार के यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया (YEIDA) को 20 लाख आबादी वाले ग्रीनफील्ड शहर के रूप में विकसित करने और हरियाणा में कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास प्रस्तावित पंचग्राम परियोजना का भी जिक्र किया गया है। रीजनल प्लान-2041 की बड़ी बातें     NCR में 5-8 नए स्मार्ट ग्रीनफील्ड शहर बसाने का प्रस्ताव     दिल्ली से प्रमुख एनसीआर शहरों की दूरी 30 मिनट करने की योजना     हाई-स्पीड रेल और हेली-टैक्सी नेटवर्क पर जोर     YEIDA और हरियाणा के पंचग्राम को नए विकास केंद्र के रूप में शामिल किया गया     अगले 15 सालों में 20 लाख करोड़ रुपये निवेश की जरूरत     2030 तक दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर बन सकता है दिल्ली-एनसीआर दिल्ली से जुड़ेंगे एनसीआर के प्रमुख शहर रीजनल प्लान-2041 का सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्ताव 30 मिनट NCR है। इसके तहत दिल्ली और NCR के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय 30 मिनट तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हाई-स्पीड और सीमित स्टॉपेज वाली मास ट्रांजिट रेल प्रणाली, सुपरफास्ट ट्रेनें और हेली-टैक्सी जैसी सुविधाओं की संभावनाएं तलाशने का प्रस्ताव है। योजना के अनुसार अन्य रेल सेवाओं से NCR के किसी भी हिस्से तक 60 मिनट और कार से 2 से 3 घंटे के भीतर पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। 2030 तक बनेगा दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर प्लान के अनुसार, साल 2030 तक दिल्ली-एनसीआर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहरी क्षेत्र बन सकता है। जो कि जापान की राजधानी टोक्यो को भी छोड़ देगा। अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में 3 करोड़ से अधिक अतिरिक्त लोगों को बसाने और मौजूदा आबादी के लिए बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की आवश्यकता होगी।  

दिल्ली की 2.2 करोड़ आबादी जनगणना में कवर, 14 जून तक चलेगा हाउस लिस्टिंग अभियान

नई दिल्ली  दिल्ली में चल रही जनगणना 2026 के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन का अंतिम चरण में है। अब तक कुल 55 लाख से अधिक घरों को कवर किया जा चुका है, जिसमें 76.63 लाख परिवार रहते हैं। यानी 98% घर कवर हो चुके हैं। अधिकारियों का दावा है कि अगले दो दिनों में 100% जनगणना हो जाएगी। अभी तक जनगणना के हिसाब से दिल्ली की 2.2 करोड़ आबादी कवर की जा चुकी है। दिल्ली में 16 मई से जनगणना-2026 के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन का काम शुरू हुआ था। पहले 15 दिन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का फिर 1 जून से घर-घर जाकर यह काम चल रहा है जो 14 जून तक चलेगा। अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में कुल 45 हजार से अधिक हाउस लिस्टिंग ब्लॉक तैयार किए गए थे। अनुमान के मुताबिक हर ब्लॉक में 150-200 घर रखे गए थे। कहां-कहां कितना हुआ काम? आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी जिला सबसे अधिक आबादी वाला क्षेत्र बनकर उभरा है, जहां अब तक 8.23 लाख घर को कवर किया जा चुका है, जिसमें 6.30 लाख परिवार रहते हैं। वहीं, पुरानी दिल्ली जिला सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र रहा, जहां 2.95 लाख घरों को कवर किया गया है। आउटर नॉर्थ में 99.14 फीसदी, नॉर्थ-वेस्ट में 98.48 फीसदी और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में 98.13 फीसदी घरों को कवर किया जा चुका है। ईस्ट व नॉर्थ जिले में अभी 95 फीसदी काम ही पूरा हुआ है। जनगणना 2026 की प्रक्रिया दो चरणों में चलेगी जनगणना 2026 का आयोजन दो चरणों में हो रहा है। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और आवास गणना का है, जो फिलहाल जारी है। इसके बाद दूसरा चरण जनसंख्या गणना (Population Enumeration) का होगा, जिसकी शुरुआत फरवरी 2027 में की जाएगी। इस चरण में नागरिकों की संख्या और सामाजिक-आर्थिक जानकारी जुटाई जाएगी।      क्यों जरूरी होती है जनगणना? अगर अभी तक आप जनगणना में शामिल नहीं हुए हैं तो 14 जून तक का समय है। 14 तक एन्यूमरेटर बचे हुए घरों में एक बार फिर से दस्तक देंगे। दरअसल, गर्मी की छुट्टी के कारण कई घरों में लोग नहीं मिले। जनगणना कर्मी ने इनके पड़ोसियों से अपना नंबर भी शेयर किया है। यह जनगणना इसलिए जरूरी है क्योंकि आंकड़ों के आधार पर ही सरकार अपनी नीतिगत फैसले लेती है।

गुरु रंधावा के जिम पर ताबड़तोड़ गोलियां, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का दावा; दिल्ली में सनसनी

 नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. मशहूर पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा के मालिकाना हक वाले एक जिम के बाहर अज्ञात हमलावरों द्वारा ताबड़तोड़ फायरिंग की गई है. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।  इस सनसनीखेज हमले की जिम्मेदारी कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित पोस्ट और ऑडियो क्लिप के जरिए गैंग ने इस फायरिंग का दावा किया है।  वायरल ऑडियो में कथित तौर पर गैंग के एक सदस्य को यह कहते सुना जा सकता है कि गुरु रंधावा के अभिनेता सलमान खान के साथ करीबी रिश्ते हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया है. ऑडियो में इस हमले को महज एक 'ट्रेलर' बताया गया है।  पुलिस कर रही है जांच घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं और जिम के बाहर के विजुअल्स और सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है. पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या यह वाकई गैंग की ही हरकत है या किसी ने दहशत फैलाने के लिए इस नाम का इस्तेमाल किया है।  दिल्ली पुलिस के मुताबिक, वायरल हो रहे ऑडियो और सोशल मीडिया पोस्ट की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है, जिसके बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।  दिल्ली पुलिस ने बयान जारी करते हुए कहा, 11 जून 2026 की सुबह तड़के थाना पश्चिम विहार ईस्ट में "24 आवर्स फिटनेस" जिम, पुष्कर एन्क्लेव, पश्चिम विहार, दिल्ली में फायरिंग की घटना संबंधी एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई. प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि चेहरे को कपड़े से ढके हुए बाइक सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने जिम के शीशों पर कुछ राउंड फायरिंग की. इस घटना में किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार की चोट नहीं आई है. स्थानीय पुलिस और जिला पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की है तथा मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है. आरोपियों की पहचान, उनकी तलाश और जल्द गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। 

दिल्ली-मेरठ नमो भारत की बढ़ी रफ्तार, 24 घंटे में 1.25 लाख यात्रियों के साथ बना नया कीर्तिमान

 नई दिल्ली दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर ने सबसे ज्यादा यात्रियों का नया रिकॉर्ड बनाया है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने मंगलवार को जानकारी दी कि नमो भारत ट्रेन से 8 जून को एक दिन में करीब 1,25,500 यात्रियों ने सफर किया।    यह आंकड़ा अब तक का सबसे ज्यादा है. आम दिनों में औसतन एक लाख यात्री नमो भारत ट्रेन से सफर करते हैं. NCRTC के मुताबिक, सोमवार को यात्री संख्या में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली।  क्यों बढ़ रहे हैं यात्री? NCRTC ने बताया कि कई कारणों से लोग नमो भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं. दरअसल, नमो भारत के जरिए मेरठ से दिल्ली की यात्रा का समय काफी कम हो गया है. सड़क के ट्रैफिक जाम से बचना आसान हो गया है. वहीं,  गर्मी के प्रकोप (40 डिग्री से ऊपर तापमान) के बीच पूरी तरह एयर कंडीशंड ट्रेनें ठंडक और आरामदायक साबित हो रही हैं. दिल्ली-एनसीआर में रोजाना सफर करने वाले यात्री अब नमो भारत का इस्तेमाल कर रहे हैं।  किस स्टेशन पर सबसे ज्यादा भीड़ रही? दिल्ली में सराय काले खां, न्यू अशोक नगर और आनंद विहार स्टेशन सबसे ज्यादा व्यस्त रहे. वहीं, उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद और बेगमपुल स्टेशन भी काफी भीड़ वाले रहे. इन पांचों स्टेशनों पर कुल यात्रियों में से 40 प्रतिशत से ज्यादा सवारियां होती हैं।  खास बात यह है कि यह स्टेशन मेट्रो, रेलवे, इंटर-स्टेट बस टर्मिनल और शहर की बस सर्विस से कनेक्ट हैं. इससे यात्रियों को आसानी होती है. मेरठ में लोकल मेट्रो सेवाएं भी नमो भारत के ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर चल रही हैं. इससे शहर के अंदर भी सफर आसान हो गया है।  यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए NCRTC ने हाल ही में पीक ऑवर्स में 18 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हैं. ये अतिरिक्त ट्रिप्स सुबह और शाम के पीक समय में सराय काले खां से मेरठ साउथ के बीच चलाई जा रही हैं।  NCRTC ने कहा कि नमो भारत अब दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के रोजाना के सफर का महत्वपूर्ण साधन बनती जा रही है. इससे समय की बचत, भरोसेमंद सेवा और आरामदायक यात्रा की वजह से लोग सड़क के बजाय इस ट्रेन को चुन रहे हैं. पूरी तरह एयर कंडीशंड ट्रेनें गर्मी से राहत दे रही हैं और लोगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचा रही हैं. नमो भारत रैपिड रेल अब NCR क्षेत्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मजबूत विकल्प साबित हो रही है। 

ट्रैफिक चालानों के लिए नई डिजिटल व्यवस्था, 45 दिन में करना होगा फैसला या भुगतान

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार जल्द ही ट्रैफिक चालानों के निपटारे और शिकायतों के समाधान के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अपने ई-चालान सिस्टम को अपग्रेड कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक नया प्लेटफॉर्म अगले एक महीने के भीतर तैयार हो जाएगा, जिससे चालान जारी करने से लेकर शिकायत दर्ज करने, जुर्माना भरने और अदालत में अपील करने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। इस नई व्यवस्था का मकसद ट्रैफिक नियम उल्लंघन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाना और अदालतों पर पड़ने वाले बोझ को कम करना है। दिल्ली सरकार केंद्र सरकार द्वारा संशोधित मोटर वाहन नियमों को लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत चालान से जुड़े मामलों के लिए पहले डिजिटल शिकायत निवारण प्रक्रिया अपनानी होगी। ई-चालान सिस्टम में होंगे अहम बदलाव दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी (ट्रैफिक मुख्यालय) एस.के. सिंह ने बताया कि नए नियमों के अनुसार चालान जारी करते समय वाहन चालक, वाहन और चालान करने वाले अधिकारी की तस्वीर लेना अनिवार्य होगा। अपग्रेडेड पोर्टल पर चालान की पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। 45 दिन में करना होगा फैसला नए नियमों के तहत वाहन चालक को चालान जारी होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर जुर्माना जमा करना होगा या फिर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करनी होगी। यदि इस अवधि में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो चालान को स्वीकार माना जाएगा। इसके बाद भुगतान के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा। शिकायत खारिज होने पर अदालत में जाने से पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य होगा। CCTV चालान भी होंगे शामिल नया सिस्टम CCTV कैमरों और अन्य डिजिटल निगरानी प्रणालियों से जारी होने वाले चालानों को भी जोड़ेगा। मोबाइल नंबर उपलब्ध होने पर ई-चालान तीन दिन के भीतर भेजा जाएगा, जबकि नंबर उपलब्ध न होने पर 15 दिन के भीतर नोटिस जारी किया जाएगा। Metroकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

स्मार्ट सिटी की ओर दिल्ली, CSIR-CRRI और SPA के साथ सड़क सुधार पर बड़ा समझौता

नई दिल्ली  राजधानी की सड़कों को धूल मुक्त, सुरक्षित और स्मार्ट बनाने की दिशा में सरकार ने सीएसआईआर-सीआरआरआई और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) से समझौता किया है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के साथ इस समझौते के तहत दिल्ली में रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (आरएएमएस) लागू किया जाएगा, जिसके जरिए सड़कों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी स्थिति, मरम्मत की जरूरत तथा यातायात दबाव का वैज्ञानिक आकलन के साथ प्लानिंग की जा सकेगी। डेटा आधारित रोड मैनेजमेंट सीएम ने कहा, सरकार केवल नई सड़कें बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसा अर्बन रोड इकोसिस्टम विकसित कर रही है जो पर्यावरण-अनुकूल, सुरक्षित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। बढ़ते ट्रैफिक, वायु प्रदूषण और जलभराव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अब सड़कों का रखरखाव पारंपरिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और डेटा आधारित प्रणाली से किया जाएगा। सीएम के मुताबिक, नई व्यवस्था से सड़कों के रखरखाव और मरम्मत की योजना डेटा आधारित होगी, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और रोड स्ट्रक्चर की गुणवत्ता में सुधार होगा। सड़कों के किनारे वैज्ञानिक तरीके से ग्रीन एरिया विकसित किया जाएगा, स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने तथा मिकैनाइज्ड रोड स्वीपिंग और डस्ट कंट्रोल के उपायों को लागू किया जाएगा। समझौते के तहत सड़कों के स्लोप और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को भी वैज्ञानिक आधार पर विकसित किया जाएगा। समझौते की मुख्य बातें…     सड़कों के स्लोप और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को पुनर्गठित किया जाएगा।     पेवमेंट डिजाइन में तकनीक का इस्तेमाल होगा, जो भूजल रिचार्ज में सहायक हो।     सड़क इंजीनियरिंग, पेवमेंट टेक्नोलॉजी, रोड सेफ्टी और एसेट मैनेजमेंट पर काम होगा।     एसपीए शहरी डिजाइन, स्ट्रीट एस्केप प्लानिंग, पब्लिक स्पेस डिवेलपमेंट, अर्बन लैंडस्केपिंग पर काम करेगी।     सड़कों के लिए एक इंटीग्रेटेड अर्बन रोड डिवेलपमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा। आधुनिक रोड मॉडल पर जोर पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, यह समझौता रोड स्ट्रक्चर को आधुनिक, वैज्ञानिक और भविष्य की आवश्यकताओं के हिसाब से विकसित करेगा। सड़कों के लिए एक इंटीग्रेटेड अर्बन रोड डिवेलपमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा। वहीं, मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, सरकार सड़कों के किनारे स्थानीय और पर्यावरण-अनुकूल वृक्षों, झाड़ियों तथा घास के रोपण के माध्यम से डस्ट पॉल्यूशन कम करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।  

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद खादर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली  यमुना नदी के खादर क्षेत्र में बसी अनधिकृत कालोनियों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने यमुना के संरक्षित ओ-जोन इलाके से अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर एक्शन शुरू कर दिया है। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद डीडीए अवैध निर्माणों और बस्तियों को हटाने की कार्रवाई तेज कर सकती है। क्या है दिल्ली का O-Zone ? दिल्ली सरकार के मास्टर प्लान-2021 के अनुसार, यमुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को O-Zone घोषित किया गया है। यह इलाका वजीराबाद से ओखला तक करीब 22 किलोमीटर में फैला हुआ है और लगभग 9,700 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है। राजधानी का यह इलाके का उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और यमुना नदी को प्रदूषण से बचाना है। नियमों के अनुसार यहां आवासीय निर्माण और स्थायी मकान का निर्माण नहीं किया जा सकता है। क्यों चर्चा में है O-Zone? डीडीए के अनुसार, पिछले कई सालों में यमुना के खादर क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध बस्तियां और कालोनियां विकसित हो गई हैं। इनमें से कई जगहों पर सीवर और अन्य बुनियादी जरूरतों का भी अभाव है, जिसके कारण गंदा पानी सीधे यमुना में पहुंचता है। इससे नदीं प्रदूषित होती और बाढ़ का खतरा बढ़ता है। दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद डीडीए इसी ओ-जोन इलाके को मूल अवस्था में लाने के लिए बुलडोजर एक्शन शुरू कर रहा है। दिल्ली के O-Zone में कौन से इलाके? DDA के रिकॉर्ड के मुताबिक, यमुना फ्लडप्लेन के भीतर करीब 90 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां मौजूद हैं। इनमें मदनपुर खादर, जैतपुर, मीठापुर, झंगोला, सोनिया विहार के कुछ हिस्से, खजूरी खास, करावल नगर समेत यमुना किनारे के कई अन्य इलाके शामिल बताए जाते हैं। बता दें ओ-जोन बाढ़ क्षेत्र है, इसलिए कई इलाकों का पूरा हिस्सा इसके अंतर्गत नहीं आता है। बल्कि केवल यमुना के करीब स्थित कुछ हिस्से ही आते हैं।     मदनपुर खादर     जैतपुर     मीठापुर     झंगोला     सोनिया विहार के कुछ हिस्से     खजूरी खास     करावल नगर के कुछ हिस्से     जगतपुर     बुराड़ी के यमुना किनारे वाले क्षेत्र     उस्मानपुर     गढ़ी मांडू     शेरपुर     बेहटा हाजीपुर     ताजपुर खुर्द     छिल्ला गांव क्षेत्र     कोंडली के कुछ हिस्से     मयूर विहार के यमुना किनारे स्थित क्षेत्र     ओखला बैराज के आसपास के इलाके     आईटीओ बैराज के आसपास का फ्लडप्लेन क्षेत्र