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जामिया नगर हिंसा केस में बड़ा फैसला, जांच पर उठे सवाल के बाद 12 लोग आरोपमुक्त

नई दिल्ली  दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट में स्थित एक विशेष अदालत ने 2007 के जामिया नगर दंगा मामले में 12 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया है। अदालत ने आरोपों पर सुनाएगए अपने फैसले में दिल्ली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है। स्पेशल जज विशाल गोगने ने 95 पन्नों के आदेश में कहा कि मामले में पहचान परेड (TIP) नहीं कराई गई, जबकि ऐसे मामलों में यह एक बेहद अहम प्रक्रिया होती है। अदालत के अनुसार, इसके बिना केवल पुलिस गवाहों के आधार पर आरोपियों की पहचान को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। जांच पर अदालत की टिप्पणी अदालत ने कहा कि जिन 12 आरोपियों को बरी किया गया, उनकी गिरफ्तारी घटना के अगले दिन अलग-अलग सार्वजनिक स्थानों से दिखाई गई थी। जज ने कहा कि रिकॉर्ड से यह जाहिर होता है कि गिरफ्तारी और पहचान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। अदालत ने इस पर भी गौर किया कि जांच में किसी स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह को शामिल नहीं किया गया। फैसले में कहा गया कि सार्वजनिक गवाहों की गैर-मौजूदगी और पहचान परेड न होने से अभियोजन का मामला कमजोर पड़ता है। हालांकि, अदालत ने 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अभियोजन के अनुसार, ये आरोपी कथित रूप से भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे और उन पर दंगा, आगजनी, डकैती और हत्या की कोशिश जैसे आरोप हैं। जामिया नगर पुलिस चौकी पर हुआ था हमला लंबी चली कानूनी प्रक्रिया मामला 22 सितंबर, 2007 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, करीब 1,500 लोगों की भीड़ ने जामिया नगर पुलिस चौकी पर हमला किया था। आरोप था कि स्थानीय बाजार को हटाने की कार्रवाई के विरोध में हिंसा हुई, जिसमे आगजनी, पुलिसकर्मियों पर हमला और सरकारी सपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। करीब 20 साल पुराने इस मामले में पाच आरोपियों की मौत हो चुकी है, जिसके कारण उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई है। वहीं एक आरोपी अब भी फरार घोषित है।  

दिल्ली कोर्ट का बयान, AI समिट में यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रोटेस्ट से भारत की अंतरराष्ट्रीय इमेज को खतरा

नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के कार्यकर्ताओं का शर्टलेस प्रोटेस्ट असहमति जताने का सही तरीका नहीं था। कोर्ट ने कहा कि यह ‘सार्वजनिक व्यवस्था पर एक सीधा हमला’ था, जिसने भारत की डिप्लोमैटिक इमेज को भी नुकसान पहुंचाया। कोर्ट ने चारों आरोपियों को पुलिस कस्टडी में भेजा ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि की कोर्ट ने  यह टिप्पणी करते हुए शर्टलेस विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए यूथ कांग्रेस के चार कार्यकर्ताओं को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों में बिहार से युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि, बिहार से युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश से युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और तेलंगाना से नरसिंह यादव शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में बाहरी साजिश के संबंधों का संकेत दिल्ली पुलिस की हिरासत में पूछताछ की अर्जी को मंजूर करने के कारण बताते हुए मजिस्ट्रेट ने कहा कि आरोपी बिहार, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के दूर-दराज के इलाकों से हैं, जिससे उनके फरार होने की आशंका बहुत अधिक है। कोर्ट ने कहा कि ''प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों से बाहरी साजिश के संबंधों का संकेत मिलने से यह स्थिति और भी गंभीर'' हो जाती है। मजिस्ट्रेट रवि द्वारा पारित आदेश के एक अंश में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शन ने न केवल आयोजन की शुचिता को खतरे में डाला, बल्कि देश की डिप्लोमैटिक इमेज को भी नुकसान पहुंचाया। क्या हैं आरोप अदालत के आदेश में कहा गया, ''आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने वैश्विक प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एआई समिट 2026 के दौरान भारत मंडपम के हाई सिक्योरिटी वाले परिसर में घुसने की सुनियोजित साजिश रची।'' इसमें कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर 'भड़काऊ नारों वाली टी-शर्ट पहन रखी थी, जिन पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के दौरान प्रधानमंत्री झुक गए (पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड) जैसे आपत्तिजनक नारे लिखे थे। आदेश में कहा गया कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी का निर्वहन करने में बाधा डाली और पुलिसकर्मियों पर शारीरिक हमले किए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं, जैसा कि रिकॉर्ड में मौजूद 'मेडिको-लीगल' मामलों (एमएलसी) से प्रमाणित होता है। ऐसा आचरण सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्ट हमले के समान मजिस्ट्रेट ने कहा, ''ऐसा आचरण वैध तरीके से असहमति जताने के दायरे से स्पष्ट रूप से परे है और सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्ट हमले के समान है। यह न केवल आयोजन की गरिमा को खतरे में डालता है, बल्कि विदेशी हितधारकों के समक्ष देश की कूटनीतिक छवि को भी प्रभावित करता है…।'' मजिस्ट्रेट ने कहा कि जांच से पता चलता है कि आरोपियों के कई सहयोगी संभवत: फरार हैं, जो डिजिटल सबूतों, वित्तीय सुरागों आदि से छेड़छाड़ कर सकते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कथित अपराधों के लिए गहन जांच जरूरी है, क्योंकि वे एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर सार्वजनिक व्यवस्था और देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 121 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना) और धारा 61 (2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत तीन साल से अधिक की सजा का प्रावधान रखते हैं। अदालत ने कहा कि चारों आरोपियों को 25 फरवरी तक पांच दिन की पुलिस हिरासत में रखे जाने की अनुमति दी जाती है।