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जालंधर में LPG सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए हेल्पलाइन जारी, अफवाह फैलाने पर कार्रवाई

जालंधर   पिछले कुछ दिनों से गैस सिलैंडरों की उपलब्धता को लेकर भी लोगों में चिंता देखी जा रही है। इसी कारण कई जगहों पर जरूरत से ज्यादा बुकिंग व अधिक खरीदने की प्रवृत्ति सामने आई है, जिससे कई क्षेत्रों में अस्थायी कमी की स्थिति बनी है। प्रशासन के अनुसार इस स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग कालाबाजारी या गैर-कानूनी जमाखोरी की कोशिश भी कर सकते हैं। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन पहले ही गैस एजैंसियों और गोदामों की लगातार चैकिंग करवा रहा है, ताकि सप्लाई व्यवस्था सुचारू बनी रहे और किसी तरह की गड़बड़ी सामने न आए। इसके साथ ही प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे घबराहट में आकर सिलैंडरों की अनावश्यक खरीद न करें और किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें। इसी कड़ी में अब प्रशासन ने लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए गैस सिलैंडरों की कालाबाजारी पर नजर रखने के लिए एक व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, ताकि कोई भी व्यक्ति संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन तक पहुंचा सके। जिला प्रशासन द्वारा मौजूदा हालात को देखते हुए गैस सिलैंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए जहां उच्च अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है और बड़े स्तर पर टीमों द्वारा गैस एजैंसियों की चैकिंग की जा रही है, वहीं अब डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल द्वारा व्हाट्सएप हैल्पलाइन नंबर 9646-222-555 जारी किया गया है, ताकि गैस सिलैंडरों की सुचारू सप्लाई सुनिश्चित बनाने के साथ-साथ कालाबाजारी पर निगरानी रखी जा सके। इस हैल्पलाइन नंबर पर आम लोग यदि कहीं गैस सिलैंडरों की कालाबाजारी का मामला देखते हैं तो व्हाट्सएप मैसेज के जरिए इसकी सूचना साझा कर सकते हैं। डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि इस उद्देश्य के लिए जरूरी स्टाफ तैनात किया जा रहा है, जो प्राप्त होने वाली शिकायतों और सूचनाओं को तुरंत कार्रवाई के लिए अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) के नेतृत्व में गठित कमेटी तक पहुंचाएगा। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर कहीं भी गैस सिलैंडरों की कालाबाजारी की जानकारी मिलती है तो तुरंत हैल्पलाइन नंबर के माध्यम से सूचित किया जाए, ताकि प्रशासन द्वारा तत्काल कानूनी कार्रवाई की जा सके। गलत जानकारी फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई: डी.सी. कालाबाजारी और गैर-कानूनी जमाखोरी के खिलाफ सख्त चेतावनी देते हुए डी.सी. हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है तो आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। गैस किल्लत को लेकर गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जनता से घबराहट में आकर गैस सिलैंडरों की अनावश्यक खरीद से बचने की भी अपील की। 

मावां-धीयां सत्कार योजना: महिला वोट बैंक को साधने की आप की रणनीति, 97% वयस्क महिलाएं शामिल

जालंधर  पंजाब सरकार की प्रस्तावित मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना को राज्य की राजनीति में बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने 2026-27 के बजट में इसकी घोषणा कर लगभग एक करोड़ महिलाओं को हर माह आर्थिक सहायता देने की तैयारी की है।   सरकार इसे महिला सशक्तिकरण का कदम बता रही है, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह आगामी चुनावों से पहले महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति भी हो सकती है। योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रति माह एक हजार रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जाएंगे। भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा। राज्य सरकार का दावा है कि पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत वयस्क महिलाएं इसके दायरे में आएंगी। बैसाखी से शुरू हो सकता है पंजीकरण, कैंपों में होंगे आवेदन मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना के लिए पंजीकरण 13 अप्रैल 2026 (बैसाखी) से शुरू किए जाने की संभावना है। सरकार की योजना है कि अधिक से अधिक महिलाओं तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए गांवों और शहरों में विशेष पंजीकरण कैंप लगाए जाएं। इन कैंपों के माध्यम से पात्र महिलाएं सीधे आवेदन कर सकेंगी। इसके अलावा नजदीकी सेवा केंद्रों और सुविधा केंद्रों के माध्यम से भी आवेदन की व्यवस्था की जाएगी। सरकार भविष्य में इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप शुरू करने की भी तैयारी कर रही है, ताकि महिलाएं घर बैठे भी पंजीकरण कर सकें। आवेदन के समय आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण या पासबुक, पंजाब का निवास प्रमाण पत्र और आधार से लिंक मोबाइल नंबर जैसे दस्तावेज जरूरी होंगे, जिससे लाभ सीधे डीबीटी के माध्यम से खातों में भेजा जा सके। योजना के लागू करने में वित्तीय व प्रशासनिक चुनौतियां मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना को लेकर आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों पर भी चर्चा हो रही है। पहले से कर्ज के दबाव से जूझ रहे पंजाब के लिए इतनी बड़ी नकद सहायता योजना को लंबे समय तक जारी रखना आसान नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वित्तीय प्रबंधन संतुलित नहीं रहा तो भविष्य में इसके लिए संसाधन जुटाना सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। इसके अलावा लाभार्थियों की सही पहचान, फर्जी आवेदनों पर रोक और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कसौटी होगा। हालांकि समर्थकों का मानना है कि यदि योजना प्रभावी और पारदर्शी ढंग से लागू होती है तो इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और वे छोटे-मोटे खर्चों में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगी। करदाता महिलाएं नहीं होंगी शामिल सरकार के अनुसार आयकरदाता महिलाएं, वर्तमान या पूर्व सरकारी कर्मचारी, तथा वर्तमान या पूर्व सांसद और विधायक इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। हालांकि जो महिलाएं पहले से वृद्धावस्था, विधवा या दिव्यांग पेंशन प्राप्त कर रही हैं, उन्हें यह राशि अतिरिक्त सहायता के रूप में दी जाएगी। यानी उनकी मौजूदा पेंशन के साथ योजना की निर्धारित राशि भी मिलेगी, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से और अधिक सहारा मिल सकेगा। महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल सामाजिक कल्याण योजना भर नहीं, बल्कि एक सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। पंजाब में महिला मतदाताओं की संख्या काफी अधिक और प्रभावशाली मानी जाती है, जो कई विधानसभा सीटों के नतीजों को प्रभावित करती हैं। ऐसी योजनाएं सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में राशि पहुंचाकर सरकार और मतदाताओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करती हैं। इससे महिलाओं के बीच सरकार के प्रति सकारात्मक संदेश जाने की संभावना रहती है। विश्लेषकों के अनुसार, आगामी चुनावों को देखते हुए यह कदम राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। क्रियान्वयन में प्रशासनिक कसौटी भी कम नहीं मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना को लागू करने में प्रशासनिक स्तर पर कई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। सबसे बड़ी चुनौती पात्र लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करना होगा। सरकार को यह तय करना होगा कि योजना का लाभ केवल योग्य महिलाओं तक ही पहुंचे और अपात्र लोग इससे बाहर रहें। इसके लिए आधार आधारित सत्यापन, बैंक खातों की जांच और स्व-घोषणा पत्र जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जा सकती हैं। साथ ही फर्जी आवेदनों और दोहरे लाभ को रोकने के लिए डिजिटल डाटा मिलान भी जरूरी होगा। योजना के क्रियान्वयन में पंचायतों, नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन की अहम भूमिका रहेगी। गांव और वार्ड स्तर पर पात्र महिलाओं की सूची तैयार करना, दस्तावेजों का सत्यापन और पंजीकरण प्रक्रिया को सुचारु बनाना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी। सामाजिक बदलाव की संभावना भी मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना का असर केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इससे सामाजिक बदलाव की भी संभावना जताई जा रही है। नियमित राशि सीधे बैंक खातों में आने से महिलाओं की बैंकिंग प्रणाली और डिजिटल भुगतान से जुड़ाव बढ़ सकता है। इससे वित्तीय साक्षरता और बैंकिंग सेवाओं तक उनकी पहुंच मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित आय से परिवार के आर्थिक फैसलों में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ सकती है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं और छोटे स्तर के घरेलू कारोबार को भी इससे सहारा मिल सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। महिला मतदाता और चुनावी गणित पंजाब की राजनीति में महिला मतदाताओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या करीब ढाई करोड़ के आसपास है, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 48 प्रतिशत मानी जाती है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी महिला मतदान प्रतिशत उल्लेखनीय रहा और कई सीटों पर महिलाओं की भागीदारी ने नतीजों को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मालवा क्षेत्र में महिला मतदाता बड़ी संख्या में हैं और यहां उनका रुझान चुनाव परिणामों को निर्णायक बना सकता है। इसके अलावा दोआबा और माझा में भी महिला मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी देखी जाती है। ऐसे में महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली योजनाओं को राजनीतिक रूप से अहम रणनीति माना जा रहा है। अन्य राज्यों में भी महिलाओं को नकद सहायता योजनाएं देश के कई राज्यों में महिलाओं को सीधे नकद सहायता देने वाली योजनाएं पहले से लागू हैं। पश्चिम बंगाल की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत सामान्य वर्ग की … Read more

जालंधर-मोगा के स्कूलों में धमकी का मामला, पेपर से पहले ईमेल आई, परीक्षा रद्द कर बच्चों को घर भेजा

जालंधर  जालंधर में तीन प्रमुख स्कूलों, दिल्ली जाने वाली ट्रेन, विधानसभा और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल मिलने का मामला सामने आया। यह धमकी कथित तौर पर खालिस्तानी समर्थकों की ओर से भेजी गई बताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं और जांच शुरू कर दी गई है।  बम की धमकी के बाद स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है। एडीसीपी आकर्षि जैन ने कहा कि हम जांच कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जालंधर के एपीजे स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल सहित एक अन्य निजी स्कूल को धमकी भरी ईमेल भेजी गई है। ईमेल में चेतावनी दी गई है कि जालंधर में स्थित इन संस्थानों के साथ-साथ दिल्ली जाने वाली एक ट्रेन और विधानसभा को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईमेल मिलने के बाद स्कूल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए। धमकी भरे ईमेल में एक और गंभीर चेतावनी दी गई है। मेल भेजने वाले ने जालंधर जिले में स्थापित डॉ. भीमराव अंबेडकर की सभी प्रतिमाओं को हटाने की मांग की है। इसके लिए 14 अप्रैल तक का समय दिया गया है। ईमेल में कहा गया है कि यदि तय समय तक प्रतिमाएं नहीं हटाई गईं तो उन्हें बम से उड़ाने की कार्रवाई की जाएगी। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। स्कूलों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस साइबर सेल भी ईमेल की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि धमकी किसने और कहां से भेजी है। पुलिस अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच में जुटी हैं और लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की गई है।  मोगा के तीन सरकारी स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मोगा के तीन सरकारी स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार सरकारी स्कूल गोथेयाला, सरकारी स्कूल उगोके और सरकारी स्कूल झंडियाना को एक धमकी भरी ईमेल प्राप्त हुई, जिसमें स्कूलों को बम से उड़ाने की बात कही गई थी। गोथेयाला सरकारी स्कूल के अध्यापक जतिन गोयल ने बताया कि आज नाैवीं क्लास के पेपर थे। पेपर शुरू होने से पहले जब स्कूल के स्टाफ ने ईमेल चेक किया तो उसमें खालिस्तान समर्थक की और से ईमेल भेजा गया। ईमेल में लिखा गया कि 14 अप्रैल से पहले स्कूल से डॉ. भीम राव आंबेडकर की फोटो हटा दी जाए नहीं तो स्कूल को बम से उड़ा दिया जाएगा। तुरंत इस मामले की सूचना उच्च अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को दी गई।  उन्होंने बताया कि उस समय स्कूल में छात्रों के पेपर चल रहे थे, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परीक्षाएं तुरंत रद्द कर दी गईं और छात्रों को सुरक्षित तरीके से घर भेज दिया गया। धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बम निरोधक टीमों को मौके पर भेज कर स्कूल परिसर और आसपास के इलाकों की बारीकी से जांच की और स्कूल को सेफ घोषित किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि धमकी भरी ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है और साइबर टीम की भी मदद ली जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और शांति बनाए रखने की अपील की है। 

कपूरथला के विक्की ने रचा इतिहास, लोहे की रॉड पर 40 सेकेंड में 64 पुश-अप्स कर तोड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड

कपूरथला  स्पोर्ट्स एथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के फिट इंडिया कार्निवल का दूसरा दिन बेहद खास रहा है। पंजाब के सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला) में जन्मे हरप्रीत सिंह उर्फ विक्की देओल ने वर्ल्ड बुक्स ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम बेहतर किया। उन्होंने 40 सेकेंड में 3 फीट हाइट पर 3 लोहे की रॉड पर हवा में रहते हुए अंगूठों के सहारे 64 पुश-अप्स कर डाले। इसी के साथ उन्होंने उस रिकॉर्ड को बेहतर किया, जो उन्होंने साल 2021 में कायम किया था। विक्की साल 2015 से इस तरह पुश-अप्स करने का अभ्यास कर रहे हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने रिकॉर्ड के लिए पहली बार 2021 में प्रयास किया। 15 अगस्त, 2021 के दिन उन्होंने 40 बार इस तरह से पुश-अप्स करते हुए रिकॉर्ड बनाया था और अब उन्होंने रिकॉर्ड को बेहतर करते हुए 64 कर दिया। कराटे में 3 बार के ब्लैक बेल्ड होल्डर विक्की पंजाब के फिटनेस आइकन हैं। उनके इस प्रयास को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अपूर्व मेनन, रणदीप सिंह कोहली, जसवीर सिंह शिंदा, संदीप डोगरा, गुरप्रीत सिंह और पंकज ठाकुर ने प्रमाणित किया। मेरा मकसद फिटनेस को घर-घर पहुंचाना है भास्कर से बात करते हुए विक्की ने कहा कि मैं तीसरी क्लास से खेलों के साथ जुड़ा हूं। मेरा हमेशा प्रयास यही रहा है कि मैं खुद को फिट रखूं और दूसरों को भी फिटनेस के लिए मोटिवेट करूं। मैं अपने जैसे फिटनेस लवर्स के साथ पंजाब के कई गवर्नमेंट स्कूलों में स्टूडेंट्स के साथ काम करता हूं, ताकि वे फिटनेस के प्रति बचपन से ही जागरूक हों।

पंजाब में गरमाई सियासत: मोगा में भाजपा कार्यक्रम के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन

चंडीगढ़ पंजाब के मोगा में भाजपा की रैली के दौरान किसानों ने काले झंडे दिखाकर विरोध जताया। विभिन्न किसान संगठनों ने राजनीतिक कैदियों की रिहाई, किसानों से जुड़े मुद्दों और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर प्रदर्शन किया, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई। मोगा में भाजपा रैली के दौरान किसानों का विरोध पंजाब के मोगा जिले में आयोजित भाजपा की राजनीतिक रैली के दौरान किसानों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाते हुए भाजपा नेताओं का घेराव किया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारी समूहों का कहना था कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार को इस पर गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। किसान संगठनों की मांगें और प्रदर्शन का कारण किसान नेताओं ने बताया कि यह प्रदर्शन विभिन्न संगठनों के आह्वान पर किया गया। उनका कहना है कि सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों और राजनीतिक बंदियों की रिहाई सहित कई मुद्दों पर सरकार को निर्णय लेना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल किसान संगठनों का आरोप था कि केंद्र सरकार इन मामलों में संवैधानिक सिद्धांतों का पालन नहीं कर रही है, इसलिए उन्होंने रैली के दौरान विरोध दर्ज कराया। मोगा में आयोजित इस रैली को भाजपा ने पंजाब की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में पेश किया। कार्यक्रम के दौरान पार्टी नेताओं ने राज्य में कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या और विकास से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए मौजूदा सरकार की आलोचना की। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि पंजाब में बदलाव की आवश्यकता है और पार्टी आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर सक्रिय रूप से अभियान चला रही है। विपक्ष और सियासी प्रतिक्रियाएँ रैली के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। कुछ नेताओं ने कार्यक्रम को राजनीतिक दिखावा बताते हुए दावा किया कि राज्य में पार्टी को स्थानीय समर्थन नहीं मिल रहा। वहीं भाजपा नेताओं ने रैली में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को अपनी बढ़ती राजनीतिक ताकत का संकेत बताया। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। पंजाब लंबे समय से किसानों के आंदोलनों का केंद्र रहा है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि नीतियों और कर्ज राहत जैसे मुद्दे लगातार राजनीति में प्रमुख बने हुए हैं। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक विरोध जारी रहेगा। ऐसे में मोगा की यह घटना राज्य में किसान राजनीति और चुनावी रणनीतियों के बीच बढ़ते टकराव को भी दर्शाती है।

विश्वभर के विद्वान जुटेंगे ब्रैम्पटन में, तीन दिन तक चलेगा पंजाबी विचारों का महोत्सव

चंडीगढ़ कनाडा के ब्रैम्पटन में 17 से 19 जुलाई तक 12वां विश्व पंजाबी सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें दुनिया भर के लेखक, विद्वान और सामाजिक चिंतक पंजाबी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा वैश्विक विस्तार पर चर्चा करेंगे। ब्रैम्पटन में होगा विश्व पंजाबी सम्मेलन कनाडा के शहर Brampton में 17 से 19 जुलाई तक 12वां विश्व पंजाबी सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। यह तीन दिवसीय आयोजन पंजाबी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सम्मेलन में विभिन्न देशों से लेखक, शिक्षाविद, कलाकार और सामाजिक चिंतक भाग लेंगे और पंजाबी समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार साझा करेंगे। सम्मेलन को पंजाबी चिंतकों और रचनाकारों के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है, जहां भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में साहित्यिक सत्र, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और संवाद आयोजित किए जाएंगे, जिनमें प्रवासी पंजाबी समुदाय के योगदान और बदलते वैश्विक परिदृश्य में पंजाबी संस्कृति की भूमिका पर विशेष फोकस रहेगा। भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर मंथन इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पंजाबी भाषा के संरक्षण, प्रचार और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी विरासत पहुंचाने के उपायों पर विचार करना है। विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा करेंगे कि डिजिटल युग और प्रवासी समाज के बढ़ते प्रभाव के बीच पंजाबी भाषा को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है और इसे शिक्षा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से कैसे आगे बढ़ाया जाए। सम्मेलन में दुनिया के कई देशों से पंजाबी समुदाय के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो अपने अनुभव और पहल साझा करेंगे। आयोजकों का मानना है कि विदेशों में बसे पंजाबी समाज ने भाषा और संस्कृति को जीवित रखने में अहम योगदान दिया है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से विभिन्न देशों में रहने वाले पंजाबी समुदाय के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा मिलता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बढ़ेगा उत्साह तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान साहित्यिक चर्चाओं के साथ-साथ संगीत, कविता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पंजाबी कला और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि भाषा और संस्कृति के प्रति जुड़ाव और मजबूत हो सके।

बार काउंसिल चुनाव का असर: जालंधर कोर्ट में तीन दिन तक नहीं होगा काम

जालंधर. जालंधर की जिला बार एसोसिएशन ने बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के आगामी चुनावों को लेकर कचहरी परिसर में 16, 17 और 18 मार्च को “नो वर्क डे” घोषित किया है। यह फैसला एसोसिएशन की एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में लिया गया। बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के चुनाव 17 और 18 मार्च को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में आयोजित किए जाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि सदस्य चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर सकें, साथियों से संपर्क कर सकें और अधिक से अधिक मतदान के लिए अपील कर सकें। एसोसिएशन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि “नो वर्क डे” किसी विरोध, धरने या हड़ताल के रूप में नहीं रखा गया है, बल्कि इसका उद्देश्य वकीलों को चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर देना है। इससे अधिवक्ताओं को अदालत के काम और चुनावी गतिविधियों के बीच किसी तरह की दुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। बताया गया है कि जालंधर से करीब 3500 अधिवक्ताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल हैं। सभी वकीलों से अपील की गई है कि वे बड़ी संख्या में मतदान में हिस्सा लें और वोट का उपयोग करें। इस बार जालंधर से बार काउंसिल चुनाव में चार उम्मीदवार मैदान में हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि इनमें से कोई प्रतिनिधि बार काउंसिल में पहुंचकर जालंधर बार की आवाज को प्रभावी तरीके से उठाएगा।

चुनावी माहौल में नई रणनीति: पंजाब में भाजपा ने लगाए महाराजा रंजीत सिंह के कटआउट

जालंधर. मोगा में भारतीय जनता पार्टी की बदलाव रैली के दौरान आज कई कुछ ऐसा देखने को मिला, जो अकसर भाजपा की रैली में पहले कभी नहीं देखा गया। भाजपा वाकई ही पंजाब को लेकर इस बार कितनी गंभीर है, वो आज की रैली में देखने को मिला। रैली के दौरान कई इस तरह की व्यवस्थाएं की गईं, जिससे भाजपा की रैली की सफलता की संभावनाएं बढ़ गईं। मोगा में आज की रैली के दौरान स्थल के पास कुछ कटआऊट लगाए गए थे, जिनमें भाजपा के शीर्ष नेताओं के फोटो थे। लेकिन उसमें एक ऐसी तस्वीर थी, जो पंजाब के लोगों के लिए खास अहमियत रखती है। यह तस्वीर थी, शेरे पंजाब महाराज रंजीत सिंह की। उनकी तस्वीर के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ तथा पंजाब के बड़े नेताओं की तस्वीरें थीं। महाराजा रंजीत सिंह की तस्वीर को अगर भाजपा का मास्टरस्ट्रोक कहा जाए तो वह गलत नहीं होगा। महाराजा रंजीत सिंह पंजाब के इतिहास में युगपुरुष के तौर पर जाने जाते थे। जिन्होंने सिख मिसलों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई। अफगान के आक्रमणों को रोका। अंग्रेजों को सीमाओं से दूर रखा और पंजाब को आर्थिक समृद्धि तथा सांस्कृतिक पुनर्गठन का केंद्र बनाया। उन्होंने 11 सिख मिसलों को एक झंडे के नीचे लाकर पंजाब को एक विशाल और संगठित साम्राज्य में बदला। शेर-ए- पंजाब की उपाधि से महाराजा रंजीत सिंह आज भी याद किए जाते हैं। पंजाब के लिए उनकी देन हर सिख हिंदू के लिए अहम भूमिका रखती है। भाजपा ने मोगा रैली के दौरान जिस तरह से महाराजा रंजीत सिंह को अहमियत दी, यह बात साबित करता है कि पंजाब को इस समय वाकई में ही ऐसे एक युगपुरुष की जरूरत है। महाराजा रंजीत सिंह ने कभी किसी को बेवजह तंग परेशान नहीं किया। कहा तो यह भी जाता है कि उन्होंने युद्ध के अलावा कभी किसी की जान नहीं ली और न ही कभी सिंहासन पर बैठे। हरमंदिर साहिब को सोने से सजाने का अभियान भी उनकी ही देन है। भाजपा इस कोशिश के साथ शायद यह संदेश देना चाहती है कि पंजाब में एक बार फिर से ऐसे साम्राज्य की जरूरत है, जहां पर आम जनता से जुड़ी समस्याओं का हल हो सके। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपने भाषण में महाराजा रंजीत सिंह का जिक्र करने के साथ साथ पंजाब का कर्ज, धर्म परिवर्तन, ड्रग्स, लॉ एंड आर्डर का जिक्र भी किया, जो इस समय सबसे बड़ी समस्याएं हैं।

स्टेज पर दिखा भावुक दृश्य: गुरदास मान ने छोटे सिद्धू के पैर छुए, मूसेवाला को कविता से किया याद

मानसा. पंजाबी संगीत जगत के वरिष्ठ गायक गुरदास मान रविवार सुबह दिवंगत गायक सिद्धू मूसेवाला के गांव मूसा पहुंचे। यहां उन्होंने मूसेवाला की हवेली में जाकर परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया जब गुरदासमान ने पहले शुभदीप (सिद्धू मूसेवाला) के भाई के पैरों को छुआ और उसके बाद छोटे मूसेवाला ने भी उनके पैरों को छू सिर झुकाया। जानकारी के अनुसार गुरदास मान शनिवार रात मानसा में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से सिद्धू मूसेवाला को याद करते हुए विशेष रूप से लिखी गई कविता भी सुनाई। कविता की पंक्तियां सुनकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। मान ने मंच से कहा था कि वह सिद्धू के शहर आए हैं और उसके घर गए बिना वापस नहीं लौटेंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सिद्धू मूसेवाला की आवाज और उसकी शायरी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। उन्होंने मंच से पंक्तियां पढ़ते हुए सिद्धू को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उसके गीत और उसका जज्बा हमेशा याद रखा जाएगा। छोटे सिद्धू को देखते ही रह गए गुरदास मान रविवार सुबह गुरदास मान सीधे गांव मूसा पहुंचे। इस दौरान जब सिद्धू की माता चरण कौर ने उनका स्वागत किया तो गुरदास मान ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद जब उन्होंने सिद्धू के छोटे भाई को देखा तो वे भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह तो बिल्कुल हूबहू शुभदीप जैसा दिखाई देता है, वही चेहरा और वही जज्बा नजर आता है। इसके बाद अचानक से गुरदास मान ने छोटे सिद्धू के पैरों को छू लिया। इसके बाद माता चरण कौर ने छोटे शुभदीप को गुरदास मान के पैर छूने को कहा। गुरदास मान ने छोटे सिद्धू के नन्हें हाथों को अपने हाथों में लिया और चूम लिया। बोले- क्या बात है, ग्रेट…। शुभदीप की तस्वीर को किया सेल्यूट इसके बाद गुरदास मान मूसेवाला की हवेली के अंदर गए। सबसे पहले उनकी तस्वीर को नमन किया। उन्होंने तस्वीर के सामने खड़े होकर श्रद्धांजलि अर्पित की और कुछ क्षण मौन भी रखा। इसके बाद गुरदासमान ने उनकी तस्वीर को सेल्यूट भी किया। गुरदास मान ने इस दौरान परिवार के साथ कुछ समय बिताया और सिद्धू मूसेवाला को याद करते हुए कहा कि उसका नाम और उसकी आवाज हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी। उनके इस दौरे के दौरान गांव मूसा में भावनात्मक माहौल बना रहा।

लुधियाना में एक्साइज पॉलिसी लागू: 32 शराब ग्रुप का रिन्यूअल, बढ़ी लाइसेंस फीस

लुधियाना. पंजाब सरकार की नई एक्साइज पॉलिसी के तहत वर्ष 2026-27 के लिए शराब के ठेकों की अलॉटमैंट रिन्यू प्रक्रिया के माध्यम से शुरू हो गया है। शुक्रवार को लुधियाना में कई लाइसैंसधारी ठेकेदारों ने सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करते हुए अपने-अपने ठेकों को सफलतापूर्वक रिन्यू करवा लिया। विभागीय जानकारी के अनुसार इस वर्ष रिन्यूअल प्रक्रिया के तहत लाइसैंस फीस में लगभग 6.5 प्रतिशत वृद्धि की गई है, जबकि अन्य शुल्कों को मिलाकर कुल 7.1 प्रतिशत तक बढ़ौतरी तय की गई है। इसी आधार पर ठेकेदारों द्वारा अपने-अपने ग्रुप रिन्यू करवाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार नई नीति के तहत इस बार लुधियाना जिले में शराब ठेकों के कुल 44 ग्रुप बनाए गए हैं। इनमें से 31 ग्रुप नगर निगम (एम.सी.) क्षेत्र से संबंधित हैं, जबकि 13 ग्रुप ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए गए हैं। शुक्रवार तक प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 32 ग्रुपों के ठेके रिन्यू हो चुके हैं, जबकि 12 ग्रुप अभी रिन्यू प्रक्रिया से बाहर हैं। विभाग का कहना है कि जो ग्रुप रिन्यू नहीं हुए हैं, उन्हें अब ई-टैंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से अलॉट किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार ई-टैंडरिंग के जरिए पारदर्शिता बनी रहेगी और प्रतिस्पर्धा के आधार पर सरकार को बेहतर राजस्व मिलने की संभावना है। जानकारों का मानना है कि 7.1 प्रतिशत फीस वृद्धि के बावजूद कई पुराने ठेकेदारों ने अपने ग्रुप रिन्यू करवाना ही बेहतर समझा है। उनका कहना है कि यदि ठेके ई-टैंडरिंग में जाते हैं तो नई बोली प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं। उधर एक्साइज विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नई पॉलिसी के तहत सभी लाइसैंसधारियों को सरकार द्वारा तय नियमों और शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में ई-टेंडरिंग के माध्यम से शेष ग्रुपों की अलॉटमैंट भी पूरी कर ली जाएगी जिसके बाद जिले में वर्ष 2026-27 के लिए शराब बिक्री व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी। देसी शराब 20–30 रुपए तक महंगी होने की संभावना  नई एक्साइज पॉलिसी के तहत एक्साइज फीस में हुई बढ़ौतरी के कारण आने वाले समय में शराब की कीमतों में इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। कारोबार से जुड़े सूत्रों के अनुसार बढ़ी हुई फीस और संचालन खर्च को देखते हुए देसी शराब की एक बोतल पर करीब 20 से 30 रुपए तक बढ़ौतरी की गई है। कारोबारियों का कहना है कि नई पॉलिसी के तहत सरकार द्वारा ड्यूटी में वृद्धि की गई है, वहीं शराब कंपनियों ने भी अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि देसी शराब के साथ-साथ अंग्रेजी शराब और बीयर की कीमतों में भी बढ़ौतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम कीमतों का फैसला कंपनियों और बाजार की स्थिति को देखते हुए किया जाएगा। दीप नगर इलाके में नए ठेके के विरोध में प्रदर्शन महानगर के दीप नगर इलाके के पास नए शराब ठेके के खुलने पर स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि रिहायशी क्षेत्र में ठेका खुलने से माहौल प्रभावित होगा। विरोध के बाद फिलहाल बताया जा रहा है कि ठेके को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।