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पंजाब सरकार का बड़ा कदम: शहरी क्षेत्रों में नया कानून और 8 नए पार्क का विकास

जालंधर/चंडीगढ़ प्रदेश भर में वन क्षेत्र के अंतर्गत रकबे में वृद्धि के साथ-साथ आने वाली पीढय़िों के लिए स्वच्छ और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक के नेतृत्व में वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग ने वर्ष 2025 के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इन महत्वपूर्ण पहलों में 8 वन एवं प्रकृति जागरूकता पार्कों का विकास शामिल है। इनमें से ग्रीनिंग पंजाब मिशन के तहत चार पार्क पठानकोट में, 2 पटियाला में तथा 1-1 अमृतसर और होशियारपुर में विकसित किए जा रहे हैं। कैबिनेट मंत्री श्री लाल चंद कटारूचक के नेतृत्व में वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है। उल्लेखनीय है कि पठानकोट में गांव घरोटा में 0.50 हेक्टेयर, गांव कटारूचक में 0.75 हेक्टेयर, हैबत पिंडी में 0.60 हेक्टेयर क्षेत्र में पंचायत भूमि पर तथा आई.टी.आई. बमियाल में पर्यावरण पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इसी प्रकार पटियाला में बैरन माइनर सहित दो स्थानों पर पर्यावरण पार्क विकसित किए जा रहे हैं। अमृतसर में गांव जगदेव कलां में पर्यावरण पार्क बनाया जा रहा है, जबकि होशियारपुर के बसी पुरानी में एक वन चेतना प्रगति पर है। हैबत पिंडी में पार्क के संबंध में इंटरलॉकिंग टाइलों वाले नेचर ट्रेल का कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि झूलों और ओपन एयर शेल्टर (गज़ेबो) की स्थापना इस समय चल रही है। राज्य सरकार का यह सदैव प्रयास रहा है कि अधिक से अधिक हरियाली सुनिश्चित की जाए और साथ ही आने वाली पीढय़िों के लिए पर्यावरण संरक्षण के उपाय किए जाएं। इसी क्रम में वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग, पंजाब ने ‘पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ ट्रीज़ एक्ट, 2025’ का मसौदा तैयार किया है, जिसका उद्देश्य हरित आवरण बनाए रखना, पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित करना तथा पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के साथ-साथ मिट्टी संरक्षण करना है। यह अधिनियम पंजाब के सभी शहरी क्षेत्रों में लागू होगा। 

मुलाजिमों की छुट्टी पर मान सरकार का आदेश, नए निर्देश जारी

लुधियाना  नगर निगम में फर्जी तरीके से ए.टी.पी. व एम.टी.पी. की कुर्सी पर बैठने वालों की छुट्टी होगी, जिसके तहत सरकार ने सी.डी.सी. चार्ज वापस लेने का आदेश जारी कर दिया है। इस मामले में खुलासा हुआ है कि नगर निगम में सरकार की मंजूरी के बिना एस.ई. रंजीत सिंह को एम.टी.पी. का चार्ज दिया गया है। इसके अलावा 4 रैगुलर ए.टी.पी. खाली बैठे होने के बावजूद इंस्पैक्टर गुरविंद्र सिंह लक्की, कुलजीत मांगट, नवनीत खोखर व हैड ड्राफ्ट्समैन जगदीप सिंह को ए.टी.पी. का चार्ज दिया गया है। यह हालात खाली बैठे रैगुलर ए.टी.पी. राज कुमार, रणधीर सिंह, सुनील कुमार, निरवाण को तो मजाक का पात्र बना ही रहे हैं, इससे करैंट ड्यूटी चार्ज देने बारे सरकार के निर्देशों का भी उल्लंघन हो रहा है जिसके मद्देनजर लोकल बॉडीज विभाग द्वारा नगर निगम प्रशासन को फटकार लगाई गई है। इस संबंध में जारी सर्कुलर में साफ कहा है कि किसी भी मुलाजिम को करैंट डयूटी चार्ज देने के लिए पर्सोनल विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन किया जाए जिसके आधार पर किसी भी मुलाजिम को सी.डी.सी. चार्ज देने पर रोक लगा दी गई है और जिन मुलाजिमों को एडीशनल चार्ज दिया गया है, उसे तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं। इस आर्डर में यह भी क्लीयर कर दिया गया है कि किसी मुलाजिम को सी.डी.सी. चार्ज देने वाले आफिसर की जिम्मेदारी होगी। अब देखना यह है कि गलत तरीके से दिया गया ए.टी.पी. व एम.टी.पी. का चार्ज वापस लेने के मामले में कमिश्नर द्वारा क्या फैसला किया जाएगा। नेताओं की सिफारिश पर तोड़े जा रहे हैं नियम जहां तक नगर निगम में ए.टी.पी. व एम.टी.पी. को सी.डी.सी. चार्ज देने के नियमों के उल्लंघन का सवाल है, उसके लिए नेताओं की सिफारिश का हवाला दिया जाता है जिसका सबूत यह है कि नगर निगम में मुलाजिमों की पोस्टिंग जोन की जगह हल्का वाइज की जा रही है और नेताओं की पसंद के मुताबिक ही कुछ देर बाद मुलाजिमों की ट्रांसफर कर दी जाती है। इस दौर में अब सी.डी.सी. चार्ज देने बारे सरकार के ऑर्डर लागू करने के मामले में अफसरों के सामने नेताओं की सिफारिश को नजरअंदाज करने की चुनौती भी आ गई है।

DIG भुल्लर के रिश्वत कांड की जांच तेज, गृह मंत्रालय ने लिया मामला

चंडीगढ़ रोपड़ रेंज के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर पर लगे भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोप अब नई मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। सीबीआई ने उनके खिलाफ ट्रायल शुरू करने के लिए गृह मंत्रालय से मंजूरी मांगी है, क्योंकि पंजाब सरकार के पास केवल निलंबन या ट्रांसफर का अधिकार है। जांच में भुल्लर के घर से 7.36 करोड़ नकद, 2.5 किलो सोना, 24 ब्रांडेड घड़ियां और विदेशी शराब बरामद हुई थी। पहले 8 लाख रुपये की रिश्वत का मामला दर्ज हुआ था, और बाद में आय से अधिक संपत्ति का केस भी जुड़ा। भुल्लर ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि पंजाब सरकार से सेंक्शन लिए बिना सीबीआई की कार्रवाई अवैध है। इस याचिका पर अब तक तीन बार सुनवाई हो चुकी है। इसके अलावा, भुल्लर ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी भी दाखिल की थी, जिसे सुनवाई से पहले ही वापस ले लिया गया। 

कनाडा में सख्त आव्रजन नियमों का असर, 55 हजार लोगों को किया गया देश से बाहर

हलवारा आव्रजन नियमों में सख्ती और डिपोर्टेशन के कारण कनाडा की जनसंख्या में ऐतिहासिक गिरावट आई है। सरकार की ओर से 2025 में 55,000 से अधिक लोगों को डिपोर्ट करने और आव्रजन प्रतिबंधों के कारण 4 करोड़ 18 लाख की आबादी वाला कनाडा अब तक की सबसे बड़ी जनसंख्या कमी से जूझ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार कनाडा की जनसंख्या घटकर 4 करोड़ 16 लाख हो गई है जो जनसंख्या में गिरावट के रूप में इतिहास में दर्ज की गई है। आव्रजन नीति में सख्ती से कनाडा के शिक्षा क्षेत्र पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है। शिक्षण संस्थानों में सन्नाटा छा गया है और कई निजी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कटौती की गई है। पगार देने में असमर्थ होने के कारण कई संस्थान सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन हालात में सुधार की कोई उम्मीद नहीं दिखती। इससे वहां के शैक्षणिक माहौल में भी मंदी आई है। कनाडा में शरणार्थियों की बढ़ती संख्या भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। यूक्रेन, अफगानिस्तान और कई मुस्लिम देशों से आए लाखों शरणार्थियों का बोझ कनाडा की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। इन शरणार्थियों को प्रति माह 2,000 से 2,500 डॉलर का भत्ता और रहने की सुविधाएं देने से सरकार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों से हुई अरबों डॉलर की कमाई का बड़ा हिस्सा इन शरणार्थियों की देखभाल पर खर्च हो रहा है। इससे मूल निवासियों में असंतोष बढ़ा है और बेरोजगारी दर में वृद्धि हुई है। आव्रजन नीति में बदलाव कनाडा की प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में आव्रजन नीति में बड़े बदलाव आए हैं। 2022 में, पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 2023 से 2025 तक 15 लाख प्रवासियों को स्वीकार करने का लक्ष्य रखा था लेकिन कार्नी सरकार के आने के बाद यह लक्ष्य घटाकर 12 लाख कर दिया गया।  अक्तूबर 2024 में नए लक्ष्य के तहत 2026 और 2027 के लिए आव्रजन लक्ष्यों में भी कटौती की गई। इसके परिणामस्वरूप, कनाडा के शिक्षा और श्रम बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कनाडा में शरणार्थी आवेदन की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। 2022 में 161,000 शरण आवेदन दर्ज किए गए थे जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 505,000 तक पहुंचने की संभावना है। इससे कनाडा की आर्थिक स्थिति पर और दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद, शरणार्थियों के लिए पहले की उदार नीतियों का असर आज कनाडा की स्थिति पर साफ नजर आ रहा है। सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा कनाडा में शरणार्थियों की संख्या बढ़ने से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा है। शरणार्थियों को भत्ता देने और आवास की व्यवस्था करने में कनाडा की सरकार को भारी खर्च उठाना पड़ रहा है, जो देश की आर्थिक हालत को और भी कमजोर कर रहा है।    

ऑकलैंड में सिख नगर कीर्तन पर विवाद: प्रदर्शनकारियों ने सीएम मान से की हस्तक्षेप की अपील

अमृतसर  न्यूजीलैंड के साउथ ऑकलैंड में  सिख समुदाय की ओर से आयोजित नगर कीर्तन के रास्ते को कुछ स्थानीय लोगों ने रोक दिया और विरोध प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनकारियों ने दिस इज न्यूजीलैंड, नॉट इंडिया और यह हमारी जमीन है, हमें रहने दो जैसे बैनर लहराए। नगर कीर्तन गुरुद्वारा नानकसर ठाठ इशर दरबार से शुरू होकर अपने स्थान पर लौट रहा था। तभी करीब 30-35 स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन शुरू किया। यह लोग अपोस्टल बिशप ब्रायन तामाकी से जुड़े थे जो पेंटेकोस्टल चर्च के प्रमुख हैं। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी के साथ हाका प्रदर्शन भी किया। हालांकि, न्यूजीलैंड पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और प्रदर्शनकारियों को रास्ते से हटा दिया। इस विरोध के दौरान सिख समुदाय के लोग असमंजस में पड़ गए क्योंकि विरोध की कोई स्पष्ट वजह नहीं थी। सिख समुदाय ने पूरी तरह से संयम दिखाया। न्यूजीलैंड पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर शांति बनाई और नगर कीर्तन को गुरुद्वारे तक पहुंचने दिया। केंद्र सरकार करे हस्तक्षेप: सीएम मान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटना पर कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड एक विकसित देश है और इस प्रकार की घटना वहां पहले कभी नहीं देखी गई। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह न्यूजीलैंड सरकार से बात करे और इस मामले पर कड़ा संदेश भेजे। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में एंटी-इमिग्रेशन भावना फैल रही है और हमारे नागरिक शांति और सद्भाव की मिसाल हैं। भारतीय मूल के लोग न्यूजीलैंड के विकास में अहम योगदान दे रहे हैं उनके खिलाफ इस तरह के प्रदर्शनों से पूरे समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचता है। एसजीपीसी ने भी किया विरोध इस घटना पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सिख धर्म की बुनियाद भाईचारे, मानवता और शांति पर टिकी हुई है। नगर कीर्तन का विरोध सिख धर्म की पवित्र परंपराओं पर हमला है। धामी ने न्यूजीलैंड और भारत सरकार से अपील की कि इस मामले में उचित कदम उठाए जाएं और सिख समुदाय को अपने धार्मिक अधिकारों के अनुसार सुरक्षित वातावरण मिले। नगर कीर्तन का आयोजन सिख धर्म की एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है जो समाज में आपसी सौहार्द, प्रेम और एकता का संदेश देती है। इस प्रकार के आयोजनों का विरोध करना गुरु साहिबान के सार्वभौमिक संदेश पर सीधा प्रहार है।  

गुरु ग्रंथ साहिब के लापता स्वरूपों की जांच के लिए पंजाब सरकार ने बनाई SIT, 16 पर दर्ज है FIR

अमृतसर  पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लापता पावन सरूपों से जुड़े मामलों की जांच को तेज करने के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। यह एसआईटी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन, पंजाब की ओर से गठित की गई है। ये जांच कमेटी पुलिस कमिश्नर अमृतसर गुरप्रीत सिंह भुल्लर की देखरेख में कार्य करेगी। ये टीम 7 दिसंबर 2025 को दर्ज एफआईआर 168 के तहत दर्ज मामलों की जांच करेगी। यह केस अमृतसर के पुलिस स्टेशन ‘सी’ डिवीजन में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 295, 295-ए, 120-बी, 409 और 465 के तहत दर्ज है। SIT का काम 7 दिसंबर 2025 को दर्ज FIR नंबर 168 के तहत दर्ज मामलों की जांच करना है। यह केस अमृतसर के पुलिस स्टेशन ‘C’ डिवीजन में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 295, 295-A, 120-B, 409 और 465 के तहत दर्ज किया गया है। SIT के चेयरमैन जगतप्रीत सिंह, अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी टीम में शामिल SIT के चेयरमैन के रूप में एआईजी विजिलेंस मोहाली, जगतप्रीत सिंह, पीपीएस को नियुक्त किया गया है। टीम में अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जिनमें डीसीपी (जांच) अमृतसर रविंदरपाल सिंह संधू, अतिरिक्त डीसीपी अमृतसर हरपाल सिंह संधू, एसपी/डी पटियाला गुरबंस सिंह बैस, एसीपी लुधियाना बेअंत जुनेजा और एसीपी/डी अमृतसर हरमिंदर सिंह शामिल हैं। आवश्यकता पड़ने पर अन्य पुलिस अधिकारियों को भी SIT में जोड़ा जा सकेगा।इस FIR में कुल 16 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनमें एसजीपीसी के 10 प्रमुख सदस्य शामिल हैं। इनमें डॉ. रूप सिंह (पूर्व मुख्य सचिव), मंजीत सिंह (धर्म प्रचार समिति पूर्व सचिव), गुरबचन सिंह, सतिंदर सिंह, निशान सिंह, परमजीत सिंह, गुरमुख सिंह, जुझार सिंह, बाज सिंह और दलबीर सिंह शामिल हैं। इसके अलावा कमलजीत सिंह, कुलवंत सिंह, जसप्रीत सिंह, एक अन्य गुरबचन सिंह, एक अन्य सतिंदर सिंह और अमरजीत सिंह का नाम भी FIR में शामिल है। SIT का गठन निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए SIT का गठन इस बात का संकेत है कि पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चोरी हुए पवित्र स्वरूपों की जांच निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी तरीके से हो, ताकि धार्मिक संस्थाओं और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और न्याय सुनिश्चित किया जा सके। विशेष जांच टीम के चेयरमैन एआईजी विजिलेंस मोहाली जगतप्रीत सिंह पीपीएस को नियुक्त किया गया है। उनके साथ टीम में डीसीपी (जांच) अमृतसर रविंदरपाल सिंह संधू, अतिरिक्त डीसीपी अमृतसर हरपाल सिंह संधू, एसपी-डी पटियाला गुरबंस सिंह बैस, एसीपी लुधियाना बेअंत जुनेजा और एसीपी-डी अमृतसर हरमिंदर सिंह को सदस्य बनाया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य पुलिस अधिकारियों को भी एसआईटी में शामिल किया जा सकेगा। 328 पवित्र स्वरूपों के मामले में जमानत खारिज, कोर्ट ने बेल आवेदन ठुकराए यह FIR भाई बलदेव सिंह वडाला, भाई बलदेव सिंह सिरसा और अन्य लोगों की शिकायत पर दर्ज की गई थी। आरोपियों ने इसके बाद जमानत (बेल) के लिए आवेदन दायर किए, जो अमृतसर की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गुरबीर सिंह की कोर्ट में लंबित थे। हाल ही में इस मामले में अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह फैसला 20 दिसंबर 2025 को सुनाया गया। राज्य की ओर से इस मामले की पैरवी अमृतपाल सिंह खेहरा, जिला अटॉर्नी प्रॉसीक्यूशन अमृतसर, और अमरपाल सिंह, जिला अटॉर्नी लीगल अमृतसर ने की।  

सिद्धू का विरोधियों पर हमला: ‘मैं बाज की तरह जीता हूं, भूखा-कमजोर नहीं हूं’

चंडीगढ़  पूर्व क्रिकेटर व पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने एक रिएलिटी शो का एक प्रोमो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किया है। उसमें उन्होंने अपने विरोधियों को सीधा संदेश दिया है कि वो उनकी तरह स्नानघर के कबूतरों की तरह भूखे या कमजोर नहीं, बाज की जिंदगी जीता … सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो अपलोड करने से साफ है कि सिद्धू जल्दी कुछ बड़ा ऐलान करने वाले हैं। उन्होंने वीडियो में कहा, हमामों कबूतर का भूखा नहीं, मैं बाज की जिंदगी है जाहिदाना, पलटना झपटना झपट के पलटना, अरे खून गर्म रखने का ये तो है बहाना लाइनें कही हैं। इन लाइनों का अर्थ है कि स्नानघर के कबूतरों जैसा भूखा व कमजोर नहीं हूं। मैं तो बाज की जिंदगी जीता हूं जो संयम, स्वाभिमान और ऊंचाई वाली होती है। आसमान में पलटना, झपटना और झपटकर पलटना ये कोई बहाना नहीं है बल्कि यह अपने जोश जज्बे और आत्म सम्मान को जीवित रखने का तरीका है। नवजोत कौर सिद्धू ने अमृतसर में बढ़ाया मेल-जोल नवजोत कौर सिद्धू को कांग्रेस पार्टी ने सस्पेंड किया है उसके बाद न तो पार्टी ने उन्हें टर्मिनेट किया है और न ही इस पर कोई सफाई सामने आई है। इसी बीच नवजोत कौर सिद्धू ने अमृतसर में लोगों से मेलजोल बढ़ा दिया है और पिछले कुछ दिनों से वो लोगों के भोग व अन्य समारोहों में जाने लगी हैं। पत्नी के बयान के बाद पहली बार सिद्धू ने इस तरह का वीडियो अपलोड किया नवजोत कौर सिद्धू के 500 करोड़ वाले बयान ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचाकर रखी है। नवजोत कौर सिद्धू आए दिन सरकार और अन्य दलों के बड़े नेताओं से सवाल पर सवाल पूछ रही हैं। इस सब के बीच नवजोत सिंह सिद्धू अभी तक चुप थे। सिद्धू ने तब से पहली बार इस तरह का वीडियो अपलोड किया है। हालांकि यह वीडियो एक रिएलिटी शो का प्रोमो है। लेकिन वीडियो में जो शब्द हैं वो सीधे सीधे विरोधियों को जवाब देने वाले हैं। मनसिमरत शैरी ने शेयर किया सिद्धू का मूछों को ताव देने वाला वीडियो नवजोत सिंह सिद्धू के करीबी मनसिमरत सिंह शैरी ने सिद्धू का मूछों को ताव देने का वीडियो शेयर किया है। नवजोत सिंह सिद्धू के प्रशंसकों को उनका अंदाज बेहद पसंद आ रहा है। सिद्धू के मूछों को ताव देते का वीडियो सामने आने से पंजाब के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना है। वीडियो में सिद्धू के करेक्टर को लेकर क्या कहा, जानिए क्लीन करेक्टर: वीडियो की शुरुआत में सिद्धू को मूछों पर ताव देते हुए दिखाया है। वीडियो में कहा जा रहा है कि कभी देखा है 6 फुट 5 इंच का सरदार, जिसका क्लीन करेक्टर हो, किसी की तरफ आंख उठाकर नहीं देखता और कोई उस पर अंगुल नहीं उठा सकता। कोई दाग नहीं है। पंजाब को रिप्रजेंट करता है: वीडियो के अगले भाग में कहा कि सिद्धू पंजाब को पूरी दुनिया में रिप्रजेंट करते हैं। सिद्धू के बारे में कहा है कि बॉलीवुड में ​​​​​​​बैठा हो और पंजाब को रिप्रजेंट कर रहा है। वर्ल्ड का सबसे सोणा सरदार। जहां जाता है पंजाब को रिप्रजेंट करते हैं और पंजाब की बात करते हैं। जहां जाते हैं लगता है पंजाब आ गया: वीडियो में कहा है कि वो बंदा पंजाब की बात करता है। जहां वो जाते हैं चाहे बॉम्बे उतरते हैं दुनिया को लगता है पंजाब उतर रहा है। ​​​​​​​अमेरिका जाते हैं तो लगता है पंजाब आ गया। जहां जाते हैं वहां लगता है पंजाब आ गया। 21 हजार लोग देख चुके हैं: मनसिमरत सिंह शैरी ने जो वीडियो शेयर किया है उसको अब तक 21 हजार से ज्यादा लोग देख चुके हैं। 800 से ज्यादा लोग इसे लाइक कर चुके हैं।  

मान सरकार का बड़ा कदम: स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए हजारों एएनएम और नर्सों की भर्ती मंजूर

चंडीगढ़ प्रदेश के स्वास्थ्य देखभाल ढांचे को मजबूत एवं बेहतर बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने घोषणा की कि वित्त विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन.एच.एम.) के अंतर्गत ए.एन.एम. एवं स्टाफ नर्सों के 1,568 रिक्त पदों को भरने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। भर्ती अभियान के बारे में अधिक जानकारी देते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इस मंजूरी के तहत ए.एन.एम. के कुल 2,000 स्वीकृत पदों में से 729 रिक्त पदों एवं स्टाफ नर्सों की 1896 स्वीकृत पदों में से 839 रिक्त पदों को भरा जाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि स्टाफ की कमी के कारण स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में कोई रुकावट न आए और इसलिए इन ठेका-आधारित पदों को भरने को प्राथमिकता दी गई है। इस पहल के प्रति मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि इन भर्तियों से वार्षिक कुल 48.88 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रभाव पड़ने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ए.एन.एम. पदों के लिए वार्षिक 18.98 करोड़ रुपये एवं स्टाफ नर्स के लिए 29.90 करोड़ रुपये का खर्च वहन करेगी। उन्होंने बताया कि स्वीकृत वेतन संरचना के तहत ए.एन.एम. के लिए 21,700 रुपये एवं स्टाफ नर्सों के लिए 29,700 रुपये प्रति माह वेतन निर्धारित किया गया है। वित्त मंत्री चीमा ने आगे बताया कि योग्यता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भर्ती प्रक्रिया बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट द्वारा लिखित परीक्षा के माध्यम से करवाई जाने का प्रस्ताव है। उन्होंने आगे कहा कि वित्त विभाग ने यह मंजूरी इस शर्त पर दी है कि स्वास्थ्य विभाग इन नियुक्तियों के बारे में पर्सनल विभाग से आवश्यक सहमति सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की स्वास्थ्य देखभाल एवं शिक्षा को प्राथमिकता देने की दृढ़ प्रतिबद्धता को उजागर करते हुए वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस फैसले से प्रदेश सरकार अपने स्वास्थ्य देखभाल कार्यबल को मजबूत करेगी ताकि पंजाब के लोगों के लिए और बेहतर एवं मानक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। उन्होंने कहा कि इन रिक्त पदों को भरने से निस्संदेह राज्य की प्रभावी एवं कुशल स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्रदान करने की क्षमता में वृद्धि होगी, जो वर्तमान प्रदेश सरकार की अपने नागरिकों की भलाई के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

धार्मिक शहरों में शराब-मीट बिक्री पर रोक, भगवंत मान ने उठाया बड़ा कदम, श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए शटल बस

चंडीगढ़  पंजाब की भगवंत मान सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य के तीन प्रमुख धार्मिक शहरअमृतसर (वॉल सिटी), तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को ‘पवित्र शहर’ का दर्जा दिया है. सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद अब इन शहरों की सीमा के भीतर मांस, शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान का यह कदम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उन फैसलों की याद दिलाता है, जहां उन्होंने मथुरा और अयोध्या जैसे तीर्थ स्थलों पर इसी तरह के कड़े प्रतिबंध लागू किए थे. धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए फैसला पंजाब सरकार के इस फैसले का उद्देश्य इन धार्मिक स्थलों की पवित्रता और आध्यात्मिक मर्यादा को बनाए रखना है. अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर (श्री हरमंदिर साहिब), आनंदपुर साहिब (खालसा पंथ की जन्मस्थली) और तलवंडी साबो (तख्त श्री दमदमा साहिब) करोड़ों सिखों की आस्था के केंद्र हैं. लंबे समय से सिख संगठन इन इलाकों में शराब और मीट की दुकानों को हटाने की मांग कर रहे थे. अब आधिकारिक आदेश के बाद इन क्षेत्रों में किसी भी तरह के नशीले पदार्थों या मांस का व्यापार कानूनी रूप से वर्जित होगा. क्या-क्या हुआ पूरी तरह बंद?  -मांस-मछली और नॉनवेज रेस्तरां।  -शराब के ठेके, बार, वाइन शॉप।  -सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, तंबाकू उत्पाद।  -हुक्का बार और सभी प्रकार के नशीले पदार्थ।  और क्या-क्या बदलेगा?  -पवित्र गलियारों में निर्माण और ऊंची इमारतों पर नियंत्रण होगा।  -अवैध कारोबार और अनुचित गतिविधियों पर सख्ती से पाबंदी लग सकेगी।  -धार्मिक पर्यटन में वृद्धि होगी और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।  -सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस चौकियां और स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार होगा।  -केंद्र से विशेष फंडिंग और परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।  अंतर-धार्मिक समिति गठित होगी पवित्र शहरों में सामाजिक सौहार्द और धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए एक अंतर-धार्मिक सलाहकार समिति का गठन किया जाएगा। इसमें सिख, हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति पवित्र क्षेत्रों में दिशा-निर्देशों और मर्यादाओं की निगरानी करेगी।    तीनों पवित्र शहर आस्था, इतिहास और परंपराओं के केंद्र 1. अमृतसर: श्री हरिमंदिर साहिब की पावन धरती  अमृतसर की पहचान श्री हरिमंदिर साहिब से है जो खुले घर की अवधारणा पर आधारित है। यहां हर धर्म और जाति का व्यक्ति का खुले मन से स्वागत होता है। इसके चारों द्वार भी इसी भावना को जाहिर करते हैं। तीर्थस्थल का केंद्र अमृत सरोवर है जिसमें स्नान को आत्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। नाम जपो, किरत करो, वंड-छको की परंपरा को जीवन का आधार माना जाता है। -गुरुद्वारा परिसर में चलने वाला लंगर हर दिन लाखों लोगों को भोजन कराता है। यह समानता, सेवा और मानवता का अनुपम उदाहरण। -श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में स्थित श्री अकाल तख्त सिख धर्म के पांच तख्तों में सर्वोच्च है। यहां समुदाय से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। यहां से जारी आदेश देश-विदेश में बैठे हर सिख के लिए सर्वमान्य है।  -यहां कई ऐतिहासिक स्थल है। इन स्थानों का संबंध सिख इतिहास, गुरुओं के जीवन और साहित्यिक विरासत से है। -वैसाखी, बंदी छोड़ दिवस, शहीदी दिवस सहित कई अवसरों पर लाखों श्रद्धालु यहां नतमस्तक होने के लिए पहुंचते हैं।   2. श्री आनंदपुर साहिब: खालसा पंथ की जन्मभूमि -श्री आनंदरपुर साहिब वीरता, बलिदान और आध्यात्मिक परंपराओं का केंद्र है। 30 मार्च 1699 को दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहां खालसा पंथ की स्थापना की थी। यहीं पांच प्यारों को अमृत छकाकर पहला खालसा रूप दिया गया। -यहां स्थित किला आनंदगढ़ साहिब को सिखों की रक्षा, पराक्रम और आत्म-सम्मान का प्रतीक माना जाता है। -यहां गुरु साहिब ने जपजी साहिब, चंडी दी वार, अकाल उस्तत जैसे महान ग्रंथों की रचना की।  -1705 के चमकौर युद्ध और आगे के संघर्षों की शुरुआत इसी पवित्र धरती से हुई। यह स्थान धार्मिक स्वतंत्रता की लड़ाई का प्रतीक है। -पांच तख्तों में एक श्री केसगढ़ साहिब लाखों सिखों की आस्था का केंद्र है।  3. तलवंडी साबो: गुरु की काशी -श्री तलवंडी साबो ज्ञान, अध्यात्म और ग्रंथ संपादन की पवित्र भूमि है। सिख धर्म के पांच तख्तों में से एक श्री दमदमा साहिब यहीं स्थित है।  -1705–06 के दौरान श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहां लगभग दस माह ठहरकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अंतिम और अधिकृत संस्करण तैयार कराया। इसी कारण इसे गुरु की काशी भी कहा जाता है।  -तलवंडी साबो लंबे समय तक सिख शिक्षा और विद्वता का केंद्र रहा। यहां गुरबाणी, इतिहास, भाषाओं और शास्त्रों की शिक्षा दी जाती थी। -यहां बिताए समय में श्री गुरु साहिब ने सिख समुदाय को संगठित किया और कठिन दौर में नई शक्ति प्रदान की। यह स्थान ईश्वर-भक्ति, सत्य और त्याग के संदेशों का केंद्र है।  -हर वर्ष यहां बैसाखी मेला और जोड़ मेला लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। तीनों पवित्र शहर आस्था, इतिहास और परंपराओं के केंद्र 1. अमृतसर: श्री हरिमंदिर साहिब की पावन धरती  अमृतसर की पहचान श्री हरिमंदिर साहिब से है जो खुले घर की अवधारणा पर आधारित है। यहां हर धर्म और जाति का व्यक्ति का खुले मन से स्वागत होता है। इसके चारों द्वार भी इसी भावना को जाहिर करते हैं। तीर्थस्थल का केंद्र अमृत सरोवर है जिसमें स्नान को आत्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। नाम जपो, किरत करो, वंड-छको की परंपरा को जीवन का आधार माना जाता है। -गुरुद्वारा परिसर में चलने वाला लंगर हर दिन लाखों लोगों को भोजन कराता है। यह समानता, सेवा और मानवता का अनुपम उदाहरण। -श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में स्थित श्री अकाल तख्त सिख धर्म के पांच तख्तों में सर्वोच्च है। यहां समुदाय से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। यहां से जारी आदेश देश-विदेश में बैठे हर सिख के लिए सर्वमान्य है।  -यहां कई ऐतिहासिक स्थल है। इन स्थानों का संबंध सिख इतिहास, गुरुओं के जीवन और साहित्यिक विरासत से है। -वैसाखी, बंदी छोड़ दिवस, शहीदी दिवस सहित कई अवसरों पर लाखों श्रद्धालु यहां नतमस्तक होने के लिए पहुंचते हैं।   2. श्री आनंदपुर साहिब: खालसा पंथ की जन्मभूमि -श्री आनंदरपुर साहिब वीरता, बलिदान और आध्यात्मिक परंपराओं का केंद्र है। 30 मार्च 1699 को दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने … Read more

मान सरकार का बड़ा फैसला: 1,568 एएनएम व स्टाफ नर्स पदों पर भर्ती से स्वास्थ्य ढांचा होगा सशक्त

चंडीगढ़ प्रदेश के स्वास्थ्य देखभाल ढांचे को मजबूत एवं बेहतर बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने घोषणा की कि वित्त विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन.एच.एम.) के अंतर्गत ए.एन.एम. एवं स्टाफ नर्सों के 1,568 रिक्त पदों को भरने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। भर्ती अभियान के बारे में अधिक जानकारी देते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इस मंजूरी के तहत ए.एन.एम. के कुल 2,000 स्वीकृत पदों में से 729 रिक्त पदों एवं स्टाफ नर्सों की 1896 स्वीकृत पदों में से 839 रिक्त पदों को भरा जाएगा।  उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि स्टाफ की कमी के कारण स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में कोई रुकावट न आए और इसलिए इन ठेका-आधारित पदों को भरने को प्राथमिकता दी गई है। इस पहल के प्रति मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि इन भर्तियों से वार्षिक कुल 48.88 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रभाव पड़ने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ए.एन.एम. पदों के लिए वार्षिक 18.98 करोड़ रुपये एवं स्टाफ नर्स के लिए 29.90 करोड़ रुपये का खर्च वहन करेगी। उन्होंने बताया कि स्वीकृत वेतन संरचना के तहत ए.एन.एम. के लिए 21,700 रुपये एवं स्टाफ नर्सों के लिए 29,700 रुपये प्रति माह वेतन निर्धारित किया गया है। वित्त मंत्री चीमा ने आगे बताया कि योग्यता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भर्ती प्रक्रिया बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट द्वारा लिखित परीक्षा के माध्यम से करवाई जाने का प्रस्ताव है। उन्होंने आगे कहा कि वित्त विभाग ने यह मंजूरी इस शर्त पर दी है कि स्वास्थ्य विभाग इन नियुक्तियों के बारे में पर्सनल विभाग से आवश्यक सहमति सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की स्वास्थ्य देखभाल एवं शिक्षा को प्राथमिकता देने की दृढ़ प्रतिबद्धता को उजागर करते हुए वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस फैसले से प्रदेश सरकार अपने स्वास्थ्य देखभाल कार्यबल को मजबूत करेगी ताकि पंजाब के लोगों के लिए और बेहतर एवं मानक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। उन्होंने कहा कि इन रिक्त पदों को भरने से निस्संदेह राज्य की प्रभावी एवं कुशल स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्रदान करने की क्षमता में वृद्धि होगी, जो वर्तमान प्रदेश सरकार की अपने नागरिकों की भलाई के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।