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प्री-SIR जांच ने बढ़ाई सियासी हलचल, जालंधर की चार विधानसभा सीटों पर असर के संकेत

जालंधर. जालंधर में चल रही प्री-एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के शुरुआती चरण में बड़ी संख्या में मतदाताओं का डाटा 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा पाया है। शुरुआती फिल्ट्रेशन में 3,03,529 ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनकी पुरानी सूची में पुष्टि नहीं हो सकी। चुनावी भाषा में इन्हें “अनमैप्ड वोटर” कहा जा रहा है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी शहर की चार विधानसभा सीटों—नॉर्थ, सेंट्रल, वेस्ट और कैंट—में सामने आई है। इन चारों हलकों में कुल 1,94,339 मतदाता फिलहाल अनट्रेस बताए गए हैं। प्री-एसआईआर की प्रगति और आंकड़े जिले में प्री-एसआईआर का काम अब तक 81.67% पूरा हो चुका है। कुल 16,50,212 पंजीकृत मतदाताओं में से 13,46,683 के रिकॉर्ड 2003 की सूची के साथ सफलतापूर्वक मैप किए जा चुके हैं। इस दौरान करीब 2.85 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में त्रुटियां भी सामने आई हैं, जिनमें पता, उम्र या अन्य विवरण शामिल हैं। शहरी सीटों पर घट-बढ़ से बदल सकते है खेल जालंधर की शहरी विधानसभा सीटों पर अक्सर जीत-हार का अंतर 5 से 15 हजार वोट के बीच रहता है। ऐसे में यदि 1.94 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में संशोधन, सत्यापन या नाम कटौती होती है, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। फिलहाल सेंट्रल और वेस्ट सीट आम आदमी पार्टी के पास हैं, जबकि नॉर्थ और कैंट कांग्रेस के कब्जे में हैं। शहरी इलाकों में भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक भी प्रभावशाली माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि अनमैप्ड मतदाताओं में बड़ी संख्या प्रवासी परिवारों, किरायेदारों या नए वोटरों की हुई, तो सभी दलों की रणनीति में बदलाव तय है। प्रवासी मतदाता बने बड़ी चुनौती जालंधर नॉर्थ, सेंट्रल और वेस्ट इलाकों में बाहरी राज्यों से आकर बसे लोगों की संख्या काफी है। कई मतदाताओं का वोट अब भी उनके मूल राज्यों में दर्ज है, जबकि कुछ ने वर्षों में कई बार पता बदला है। ऐसे में मतदाता सूची का शुद्धिकरण आगामी चुनावों से पहले अहम राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है। यदि घर-घर सर्वे के दौरान भी अनमैप्ड मतदाताओं की पुष्टि नहीं हो पाती, तो चुनाव विभाग की ओर से उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। 7 जून को सभी पोलिंग बूथों पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे (सुबह 10 से शाम 4 बजे), जहां बीएलओ 2003 की सूची से मैपिंग में मदद करेंगे। 25 जून से 24 जुलाई 2026 तक बीएलओ घर-घर जाकर इन्यूमरेशन फॉर्म भरवाएंगे। एसआईआर के तहत यह फॉर्म भरना अनिवार्य है; फॉर्म न भरने पर नाम ड्राफ्ट वोटर सूची में शामिल नहीं होगा। मतदाता स्वयं भी जानकारी और सहायता के लिए voters.eci.gov.in का उपयोग कर सकते हैं। पंजाब में चुनाव आयोग पंजाब ने एसआईआर प्रक्रिया की तारीखों में बदलाव किया है- प्रारंभिक प्रकाशन: 3 अगस्त 2026 दावे व आपत्तियां: 3 अगस्त से 2 सितंबर 2026 निपटारा/नोटिस चरण: 3 अगस्त से 28 सितंबर 2026 अंतिम प्रकाशन: 1 अक्टूबर 2026

छात्रों के लिए नया नियम: अब 8वीं-12वीं के रिजल्ट में होगी पूरे साल के प्रदर्शन की गणना

चंडीगढ़. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने एजुकेशन सिस्टम में कुछ बदलाव किए हैं। मिली जानकारी के अनुसार सैशन 2026-27 के लिए 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के फाइनल रिजल्ट में साल भर होने वाली सभी परीक्षाओं के अंक जोड़े जाएंगे। जी हां, बोर्ड ने राज्य के सभी स्कूलों को उक्त आदेश जारी कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार साल 2026-27 के लिए 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा का अंतिम निर्णय अब बाइमंथली एग्जाम, टर्म एग्जाम, प्री-बोर्ड एग्जाम के नंबरों के साथ होगा। इसके लिए छात्रों को सालभर अच्छा प्रदर्शन करके दिखाना होगा ताकि साल के अंत में फाइनल रिजल्ट उनका अच्छा आए। बता दें कि उक्त आदेश बोर्ड ने सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी, सहायता प्राप्त एफिलिएटिड और एसोसिएटिड मान्यता प्राप्त स्कूलों को जारी किए हैं। गौरतलब है कि पहले भी बोर्ड ने उक्त आदेश जारी किए थे लेकिन प्राइवेट स्कूल अपनी मर्जी से प्री-बोर्ड एग्जाम आदि के नंबर लगा देते थे। बता दें कि अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि बोर्ड ने साफ आदेश जारी किए हैं कि समय-समय पर सभी बच्चों के प्रत्येक परीक्षा के अंक साइट पर अपलोड किए जाएंगे। इतना ही नहीं इन सभी अंकों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा ताकि कल को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो। इतना ही नहीं सभी स्कूलों को रिजल्ट आने के बाद कम से कम 3 साल तक सारा डाटा संभाल कर रखना होगा। बोर्ड की फ्लाइंग टीम या कोई भी टीम किसी भी समय स्कूलों में पहुंचकर उक्त डाटा चैक कर सकती है। बोर्ड द्वारा उक्त कदम इसीलिए उठाया गया है ताकि बच्चे सालभर पढ़ाई पर ध्यान दें और साल के अंत में फाइनल एग्जाम दौरान रट्टा मारकर पास होने की कोशिश न करें। इसके अलावा इस प्रक्रिया से ड्रॉपआउट में भी कमी देखने को मिलेगी। साथ ही जो स्कूल अपने चहेते छात्रों को अपनी मर्जी से नंबर दे देते हैं इस पर भी रोक लगेगी और हर छात्र अपनी मेहनत के हिसाब से अंक हासिल करेगा जिससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और होनहार छात्रों का हौंसला भी बढ़ेगा।  

पंजाब भाजपा में बदलाव की बयार, नए चेहरे के साथ बदला 2027 चुनाव का पूरा गेमप्लान

चंडीगढ़  पंजाब भाजपा में प्रदेशाध्यक्ष बदलने का फैसला केवल संगठनात्मक फेरबदल नहीं माना जा रहा। सुनील जाखड़ की जगह केवल सिंह ढिल्लों को कमान सौंपने को पार्टी की चुनावी दिशा में बदलाव और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पुनर्संतुलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक रूप से यह फैसला ऐसे समय आया है जब पंजाब की राजनीति अपने सबसे दिलचस्प दौर में प्रवेश कर रही है।सत्ता में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार अब शासन के मूल्यांकन के दौर में है। कांग्रेस नेतृत्व और संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) अपने पुराने प्रभाव को फिर से खड़ा करने की लड़ाई लड़ रहा है। इसी बीच भाजपा ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने साफ कर दिया कि वह अब पंजाब में केवल उपस्थिति नहीं, हिस्सेदारी बढ़ाने की राजनीति करना चाहती है। प्रदेशाध्यक्ष बदलने के इस फैसले को समझने के लिए केवल व्यक्तियों को नहीं, बल्कि पंजाब की बदलती राजनीति को पढ़ना होगा। प्रदेशाध्यक्ष बदलकर भाजपा ने केवल अपने कार्यकर्ताओं को संदेश नहीं दिया है। यह कदम विपक्षी दलों के लिए भी संकेत माना जा रहा है। कांग्रेस के सामने अब अपना पारंपरिक सामाजिक आधार बचाए रखने की चुनौती होगी। आप को सत्ता विरोधी माहौल को संभालना होगा। वहीं अकाली दल के लिए यह संकेत है कि भाजपा अब पुराने गठबंधन वाले ढांचे में लौटने के बजाय स्वतंत्र विस्तार की राह पर भी आगे बढ़ रही है। फिलहाल इतना साफ दिखाई देता है कि पंजाब भाजपा ने प्रदेशाध्यक्ष बदलकर केवल नया चेहरा नहीं चुना। उसने 2027 की लड़ाई के लिए अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं तय कर दी हैं। अब असली सवाल यह नहीं कि ढिल्लों अध्यक्ष के तौर पर कितने सफल होंगे। सवाल यह भी है कि क्या भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक पहचान की नई परिभाषा को गढ़ पाएगी। केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेशाध्यक्ष बनाना पार्टी की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती से निपटने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। गठबंधन टूटने के बाद भाजपा को पहली बार यह समझ आया कि पंजाब में स्वतंत्र राजनीतिक ताकत बनने के लिए उसे अपने सामाजिक आधार का विस्तार करना होगा। –-राजनीतिक खालीपन को पढ़ रही भाजपा पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक अकाली दल सिख नेतृत्व और ग्रामीण सामाजिक आधार का सबसे बड़ा केंद्र रहा। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी राजनीतिक पकड़ कमजोर हुई है और भाजपा शायद इसी बदलते परिदृश्य को अवसर के रूप में देख रही है। पार्टी चाहती है कि सिख समाज का एक हिस्सा उसे भी राजनीतिक विकल्प के रूप में देखना शुरू करे। इसी वजह से ढिल्लों का चयन केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और प्रतीकात्मक राजनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। –भाजपा के लिए अस्तित्व नहीं, विस्तार की परीक्षा आने वाला विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए केवल सीटों का मुकाबला नहीं होगा। यह चुनाव तय करेगा कि पार्टी पंजाब में गठबंधन आधारित राजनीति से आगे निकलकर स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति बन पाती है या नहीं। भाजपा के सामने चुनौती कई स्तरों पर है। उसे अपना शहरी आधार बनाए रखना होगा। सिख मतदाताओं में भरोसा बनाना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन खड़ा करना होगा और राज्य के वास्तविक मुद्दों को अपने राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाना होगा।

आठ नगर निगमों को मिलेंगे नए मेयर, 7 पद सामान्य और मोगा सीट आरक्षित घोषित

मोगा. पंजाब में हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों के बाद अब मेयर पदों के चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। स्थानीय निकाय विभाग ने आठ नगर निगमों में मेयर पदों के आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार मोगा नगर निगम में मेयर का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि शेष सात नगर निगमों में मेयर पद सामान्य श्रेणी के लिए खुले रहेंगे। स्थानीय निकाय विभाग द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 26 मई 2026 को अबोहर, बटाला, बरनाला, बठिंडा, कपूरथला, मोगा, पठानकोट और साहिबजादा अजीत सिंह नगर नगर निगमों के आम चुनाव संपन्न हुए थे। चुनाव परिणाम आने के बाद अब मेयर पदों के आरक्षण और चुनाव संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2017 में लागू किए गए मेयर पदों के आरक्षण संबंधी नियमों के तहत निर्धारित रोस्टर प्रणाली के अनुसार मोगा नगर निगम का मेयर पद पिछड़े वर्ग (BC) के लिए आरक्षित किया गया है। इसके अलावा अबोहर, बटाला, बरनाला, बठिंडा, कपूरथला, पठानकोट और साहिबजादा अजीत सिंह नगर में मेयर पद सामान्य श्रेणी के लिए उपलब्ध रहेगा। मंडलायुक्तों को भेजे गए आदेश इस संबंध में जालंधर, फिरोजपुर, पटियाला, रूपनगर और फरीदकोट के मंडलायुक्तों को पत्र भेजकर आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि नगर निगमों के नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के बाद मेयर चुनाव के लिए बैठक बुलाई जाए और चुनाव प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न कराई जाए। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां मेयर पद आरक्षित श्रेणी के लिए निर्धारित किया गया है, वहां संबंधित श्रेणी के पात्र सदस्य को ही मेयर चुना जाना सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

आध्यात्मिक जगत को बड़ी क्षति, मां देवी राजरानी के ब्रह्मलीन होने से श्रद्धालु भावुक

जालंधर. जालंधर के बस्ती शेख स्थित राजेश्वरी धाम की गद्दी नशीन एवं संचालिका मां देवी राजरानी शनिवार को ब्रह्मलीन हो गईं। उनके निधन का समाचार मिलते ही श्रद्धालुओं, अनुयायियों तथा धार्मिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वर्षों से सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ी मां देवी राजरानी के निधन को धार्मिक क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। मां देवी राजरानी लंबे समय से राजेश्वरी धाम के माध्यम से धार्मिक और आध्यात्मिक सेवाओं में सक्रिय थीं। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा सनातन संस्कृति, धार्मिक मूल्यों और सामाजिक जागरूकता के प्रसार को समर्पित किया। उनके मार्गदर्शन में राजेश्वरी धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि अनेक श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत भी रहा। समाज में पहुंचाया सकारात्मक संदेश धार्मिक कार्यक्रमों, सत्संगों और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने समाज में सकारात्मक संदेश देने का निरंतर प्रयास किया। उनके सान्निध्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुड़े और उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में सम्मान मिला। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर के बाद धाम में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगातार जारी रहा। मां देवी राजरानी के निधन पर शहर की विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। कई प्रमुख हस्तियों ने इसे समाज और धार्मिक जगत की अपूरणीय क्षति बताया। श्रद्धांजलि संदेशों में उनके सरल स्वभाव, धार्मिक समर्पण और समाज सेवा के कार्यों को याद किया गया। आज शाम होगा अंतिम संस्कार परिवारजनों और धाम प्रबंधन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार मां देवी राजरानी का अंतिम संस्कार शनिवार को शाम साढ़े तीन बजे बस्ती शेख श्मशानघाट में किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

रिवाल्वर थीम और लग्जरी पेंडेंट की चर्चा, यूएस ज्वेलरी शो में दिखा सिद्धू मूसेवाला का अनोखा अंदाज

लास वेगास/चंगीगढ़. अमेरिका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय ज्वेलरी प्रदर्शनी में दिवंगत पंजाबी सुपरस्टार सिद्धू मूसेवाला के नाम से जुड़ा एक खास ज्वेलरी पीस लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लास वेगास में 5 जून को हुए प्रतिष्ठित ज्वेलरी ट्रेड इवेंट में यह पेंडेंट पहली बार सार्वजनिक रूप से पेश किया गया, जिसे न्यूयॉर्क की एक जानी-मानी ज्वेलरी कंपनी ने तैयार किया है। इस पेंडेंट की सबसे बड़ी खासियत इसकी कलात्मक डिजाइन है। इसमें पगड़ी पहने, रिवाल्वर लिए हुए चेहरे की आकृति बनाई गई है, जो मूसेवाला की पहचान और उनकी सांस्कृतिक छवि को दर्शाती है। हीरों और रत्नों की बारीक जड़ाई इसे एक हाई-एंड कस्टम ज्वेलरी पीस का रूप देती है। इस एक्सक्लूसिव पेंडेंट की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 2 लाख अमेरिकी डॉलर बताई जा रही है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग डेढ़ से पौने दो करोड़ रुपये के बराबर है। कंपनी की जानकारी के मुताबिक, इस पेंडेंट में कुल 81.92 कैरेट के नेचुरल डायमंड्स जड़े गए हैं, जबकि इसे 14 कैरेट गोल्ड से तैयार किया गया है। पेंडेंट का वजन लगभग 400 ग्राम बताया जा रहा है, जो इसे बेहद खास और प्रीमियम बनाता है। कंपनी ने इस पेंडेंट का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा किया है, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। दुनियाभर से फैंस और ज्वेलरी एक्सपर्ट्स इस अनोखी क्रिएशन पर चर्चा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी कलाकार को समर्पित इस तरह की ज्वेलरी उसकी अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता और स्थायी प्रभाव को दर्शाती है। प्रदर्शनी के दौरान मौजूद भारतीय दर्शकों ने न सिर्फ सिद्धू मूसेवाला को पहचाना, बल्कि उनके नाम से जुड़े इस पेंडेंट को खरीदने में भी दिलचस्पी दिखाई। बातचीत के दौरान कंपनी के प्रतिनिधि ने उनके गाने भी सुनाए और बताया कि मूसेवाला के ट्रैक आज भी दुनियाभर में लाखों लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं।

बिना वैध अनुमति नहीं होगी रजिस्ट्री, अनधिकृत कॉलोनियों पर प्रशासन का बड़ा फैसला

पटियाला/सनौर. पटियाला डिवेल्पमेंट अथॉरिटी, पटियाला (पी.डी.ए.) की मुख्य प्रशासक अपरना एम.बी. ने बताया है कि पी.डी.ए. द्वारा जिला पटियाला में बिना स्वीकृति के अस्तित्व में आई अनधिकृत कॉलोनियों के विरुद्ध पापरा एक्ट, 1995 की धाराओं के तहत बनती कार्रवाई की जा रही है। मुख्य प्रशासक ने बताया कि इस संबंध में कई अनधिकृत कॉलोनियों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई है तथा संबंधित सब-रजिस्ट्रारों को इन 100 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों में प्लॉटों की रजिस्ट्रियां दर्ज न करने संबंधी भी लिखा गया है। अपरना एम.बी. ने आगे बताया कि कॉलोनाइजरों एवं प्रमोटरों द्वारा इन अनधिकृत कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं जैसे पानी, सीवरेज और बिजली की सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जातीं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी मेहनत की कमाई इन अनधिकृत कॉलोनियों में न लगाएं और इन अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित प्लॉटों की कोई खरीद-फरोख्त न करें। पी.डी.ए. की मुख्य प्रशासक ने लोगों को सूचित किया कि इन अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित प्लॉटों के लिए पी.डी.ए. कार्यालय द्वारा एन.ओ.सी. जारी नहीं किए जाते। इन अनधिकृत कॉलोनियों की पूरी सूची पी.डी.ए. पटियाला कार्यालय की वैबसाइट पर भी देखी जा सकती है। उन्होंने ऐसे कॉलोनाइजरों और प्रमोटरों को भी चेतावनी दी है कि वे किसी भी प्रकार की कॉलोनी विकसित करने से पहले पुड्डा के नियमों के अनुसार सक्षम अधिकारी से लाइसेंस प्राप्त करें, अन्यथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अनधिकृत कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

चोरी से परेशान किसान बोले- बार-बार नुकसान क्यों? QR कोड दो, रकम सीधे ले जाओ

फरीदकोट. फरीदकोट के गांव पक्की कलां में ट्यूबवेल मोटरों की लगातार हो रही चोरियों से परेशान किसानों ने चोरों को ही एक अनोखा प्रस्ताव दे दिया है। किसानों का कहना है कि चोर उनकी मोटरें चोरी करने की बजाय खेतों में अपना यूपीआई (UPI) स्कैनर या क्यूआर कोड लगाकर चले जाएं, वे आपस में पैसे इकट्ठे करके उनके खाते में डाल देंगे, लेकिन उनकी कृषि मशीनरी को नुकसान न पहुंचाया जाए। यह अनोखी अपील उस समय सामने आई जब बीती रात चोरों ने गांव के खेतों से करीब 25 ट्यूबवेल मोटरें चोरी कर लीं। एक ही रात में बड़ी संख्या में मोटरों की चोरी के बाद किसानों ने अपना रोष और बेबसी जाहिर करने के लिए एक पोस्टर तैयार किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़ित किसानों का कहना है कि धान की रोपाई के महत्वपूर्ण समय में मोटरों की चोरी उनके लिए बड़ा संकट बन जाती है। मोटरों के गायब होने से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है और फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। उनका आरोप है कि बार-बार हो रही चोरियों के बावजूद न तो पुलिस और न ही प्रशासन इस समस्या पर प्रभावी रोक लगा सका है। गांव के किसानों ने कहा कि हर साल ऐसी घटनाओं के कारण उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मोटरों की चोरी से फसलों का पूरा चक्र प्रभावित हो जाता है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है। इसी कारण वे मजबूरी में यह कहने को विवश हुए हैं कि चोर मोटरों को हाथ न लगाएं और बदले में पैसे ले जाएं। गांव के किसान और मजदूर रात के समय खेतों में बने कमरों में रहकर मोटरों की रखवाली करते थे, लेकिन अब चोरी करने वाले गिरोहों के हथियारबंद होने के कारण लोग डर महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि अंधेरा होते ही खेत सुनसान हो जाते हैं और किसान अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। बताया जा रहा है कि ये चोरी करने वाले गिरोह 10 से 12 सदस्यों के होते हैं और चोरी की गई मोटरों को तोड़कर कबाड़ियों को बेच देते हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पहले भी ऐसे मामलों में कुछ चोरीशुदा मोटरें कबाड़ियों से बरामद की जा चुकी हैं। किसानों की यह अनोखी अपील उनकी बेबसी और कृषि उपकरणों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाती है, जिसने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

अमृतसर में बंद का असर, ऑपरेशन ब्लू स्टार बरसी पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात

अमृतसर. घल्लूघारा दिवस के मौके पर दल खालसा की तरफ से बुलाए गए अमृतसर बंद का शहर में बड़ा असर दिखा। दल खालसा नेताओं ने हॉल गेट बाजार में मार्च निकाला और दुकानदारों से अपनी दुकानें बंद रखने की अपील की। ​​हालांकि, इस दौरान बाजार की ज्यादातर दुकानें पहले से ही बंद थीं। दल खालसा नेता परमजीत सिंह ने कहा कि 1984 के घल्लूघारा के जख्म आज भी सिख समुदाय के दिलों में ताजा हैं। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय ने उस घटना के गुनहगारों को अभी तक माफ नहीं किया है और हर साल दुनिया इस घटना को याद करके अपना दर्द बयां करती है। दल खालसा नेता परमजीत सिंह ने कहा कि दल खालसा हर साल 5 जून को मार्च निकालता है और 6 जून को बंद का आह्वान करता है ताकि 1984 के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा सके। परमजीत सिंह ने कहा कि पिछले कई दिनों से व्यापारियों और शहरवासियों से संपर्क कर इस दुख में भागीदार बनने की अपील की जा रही थी। उन्होंने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी शहर के लोगों और व्यापारियों ने पूरा सहयोग दिया है, जिसके लिए वह उनके आभारी हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल स्टोर, अस्पताल और इमरजेंसी सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया है, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। अकाल तख्त साहिब से जारी संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जत्थेदार ने अपने संबोधन में शहीदों को याद करने के साथ-साथ पंथ के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला और सिख समुदाय से एकजुट होकर उनका सामना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण माहौल रहा और कोई शोर-शराबा या नारेबाजी नहीं हुई। दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था, ताकि कोई शरारती तत्व माहौल खराब न कर सके। उन्होंने कहा कि शहर में लगातार निगरानी रखी गई और कानून व्यवस्था पूरी तरह से बनी रही। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दल खालसा की ओर से बुलाई गई बंद की कॉल को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा इंतजाम पहले से ही मजबूत कर दिए गए थे।

धार्मिक स्थलों को उड़ाने की धमकी के बाद बढ़ी चौकसी, मुक्तेश्वर धाम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जुगियाल/पठानकोट. पंजाब के विभिन्न धार्मिक स्थलों को बम से उड़ाने की धमकियां मिलने के बाद जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इसी के तहत जिला पठानकोट के गांव डूंग स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन मुक्तेश्वर धाम की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया गया है। धमकी भरे पत्र में मुक्तेश्वर धाम का नाम सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन लगातार सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा कर रहा है तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए डी एस पी धार कलां राजेश कक्कड़ ने बताया कि मुक्तेश्वर धाम में सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित करते हुए मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (वॉक-थ्रू मेटल डिटेक्टर) स्थापित किया गया है। अब गुफाओं एवं मंदिर परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को इस सुरक्षा जांच प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। यह उपकरण किसी भी व्यक्ति के पास मौजूद हथियार, चाकू या अन्य संदिग्ध धातु सामग्री का तुरंत पता लगाने में सक्षम है। किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु मिलने पर यह अलार्म के माध्यम से सुरक्षा कर्मियों को तत्काल सतर्क कर देगा। इसके अलावा मंदिर परिसर, पार्किंग क्षेत्र तथा आसपास के संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। मंदिर के ऊपरी पार्किंग स्थल के समीप क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) को चौबीसों घंटे तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। सुरक्षा एजेंसियां मंदिर में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और नियमित गश्त भी जारी है। डीएसपी राजेश कक्कड़ ने बताया कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे सुरक्षा जांच में पूर्ण सहयोग करें तथा किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस अथवा मंदिर प्रबंधन को दें। ओर किसी भी तरह का पैनिक माहौल ना बनाए।  आस्था और इतिहास का केंद्र है मुक्तेश्वर धाम  प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व से भरपूर मुक्तेश्वर धाम क्षेत्र की सबसे प्राचीन धार्मिक धरोहरों में से एक माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां स्थित गुफाओं का निर्माण किया था। सैकड़ों वर्षों पुराना यह तीर्थस्थल आज भी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष महाशिवरात्रि, हिंदू नववर्ष तथा अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशाल मेले आयोजित होते हैं, जिनमें लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पर्यटन की दृष्टि से यह धाम पूरे क्षेत्र की पहचान माना जाता है।  मंदिर कमेटी ने दिया प्रशासन को पूर्ण सहयोग का भरोसा   मंदिर कमेटी के चेयरमैन भीम सिंह, अध्यक्ष भाग सिंह, अंकुश तनवाल, सुरेंद्र कुमार, पुरुषोत्तम सिंह, दिलबाग सिंह तथा नरेश कुमार ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि पुलिस प्रशासन द्वारा किए जा रहे सभी सुरक्षा प्रबंधों में मंदिर कमेटी पूरा सहयोग कर रही है। कमेटी पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए उठाया गया हर कदम स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस और मंदिर प्रबंधन के संयुक्त प्रयासों से मुक्तेश्वर धाम में आने वाले श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में दर्शन कर सकेंगे। वहीं जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।