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एनजीटी ने शिवालिक इलाके में निर्माण गतिविधियों पर दिखाई सख्ती, प्रशासन से मांगा जवाब

चंडीगढ़. पंजाब के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील शिवालिक और कंडी क्षेत्र में वर्षों से जारी निर्माण गतिविधियों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकरण ने मोहाली, रूपनगर, नवांशहर, गुरदासपुर और पठानकोट के डिप्टी कमिश्नरों को नोटिस जारी कर उन जमीनों का पूरा रिकार्ड पेश करने को कहा है, जिन्हें पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (पीएलपीए) के दायरे से बाहर किया गया था। इन क्षेत्रों में निर्माण और नई राज्य नीति को लेकर उठे सवालों के बीच यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है। दरअसल, राज्य सरकार के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग ने पिछले वर्ष 20 नवंबर को लो इंपैक्ट ग्रीन हैबिटैट्स (एलआईजीएच) नीति अधिसूचित की थी। इस नीति के जरिए पीएलपीए से बाहर की गई जमीनों पर पहले से मौजूद ढांचों को नियमित करने और सीमित निर्माण गतिविधियों को अनुमति देने का प्रावधान रखा गया। लेकिन इस नीति को पर्यावरण संरक्षण के लिए खतरा बताते हुए सार्वजनिक कार्रवाई समिति के प्रतिनिधि जसकीरत सिंह ने एनजीटी में याचिका दायर की। जमीनों की वास्तविक सीमा तय नहीं याचिका में कहा गया कि जिन जमीनों को पीएलपीए से बाहर किया गया, उनका सीमांकन आज तक स्पष्ट रूप से नहीं हुआ। वर्ष 2010 में पंजाब के तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया था कि इन क्षेत्रों का सीमांकन राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) फंड से कराया जाएगा। इसके बावजूद 15 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जमीनों की वास्तविक सीमा तय नहीं की जा सकी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सीमांकन न होने का फायदा उठाकर शिवालिक की तलहटी और कांडी बेल्ट में सैकड़ों अवैध इमारतें, फार्म हाउस और स्थायी ढांचे खड़े कर दिए गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत निर्माण यह निर्माण सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और पंजाब इको-टूरिज्म नीति 2018 के विपरीत बताए गए हैं। उक्त नीति में ऐसे क्षेत्रों में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने पांचों जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से पहले विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करें। इस रिपोर्ट में संबंधित क्षेत्रों में बने निर्माणों का ब्यौरा, कथित उल्लंघनों की जानकारी, किसे अनुमति दी गई और अवैध निर्माण रोकने के लिए प्रशासन ने क्या कार्रवाई की, यह सब शामिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। याचिका में यह भी रेखांकित किया गया कि एलआईजीएच नीति जिन पांच जिलों में लागू की गई है, वे पंजाब के कुल वन क्षेत्र का करीब 68 प्रतिशत हिस्सा समेटे हुए हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को नियमित करने की नीति पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। पंजाब में कुल वन क्षेत्र महज 3.67 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय मानक 33 प्रतिशत से काफी कम है। जानें क्या है मामला गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2005 में इन इलाकों की कुछ जमीनों को पीएलपीए से बाहर किया गया था। इसके बाद 2006 और 2009 में केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी भी मिली थी। हालांकि यह छूट केवल वास्तविक कृषि और आजीविका संबंधी जरूरतों के लिए थी। व्यावसायिक गतिविधियों और स्थायी निर्माण पर स्पष्ट रोक लगाई गई थी। अब एनजीटी के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार की नई नीति, डिलिस्टेड जमीनों पर बने निर्माण और प्रशासन की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि डीसी की रिपोर्ट के बाद मामले में और सख्त निर्देश सामने आ सकते हैं, जिससे कई निर्माण परियोजनाओं और भूमि उपयोग के मामलों पर असर पड़ सकता है।

105 निकाय चुनावों से तय होगी पंजाब की सियासी दिशा, विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी हलचल

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल है, लेकिन सियासी दलों ने अपनी-अपनी एक्सरसाइज शुरू कर दी. इससे पहले सियासी दलों की अग्निपरीक्षा निकाय चुनावों में होनी है, जिसके लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है. यही वजह है कि पंजाब में हो रहे स्थानीय निकाय चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है।   पंजाब की 105 स्थानीय निकायों में चुनाव हो रहे हैं, जहां पर 26 मई को मतदान है.  इन निकाय चुनावों का सीधा असर पंजाब के 117 विधानसभा सीटों में से करीब 90 सीट के सियासी समीकरणों पर पड़ेगा. निकाय चुनावों के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए आगामी चुनाव से पहले बहुत कुछ तय कर देंगे।  निकाय चुनाव के जरिए आम आदमी पार्टी अपने सियासी माहौल को बनाए रखने की कवायद करेगी, तो कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी जैसी पार्टियां अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए बेताब हैं. ऐसे में देखना है कि निकाय चुनाव में क्या किसका दबदबा रहता है?  पंजाब के 105 निकाय के लिए चुनाव  पंजाब के 105 सीटों के लिए निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, जहां पर 26 मई को चुनाव जबकि नतीजे 29 मई को आएंगे. 105 नगर निकाय में 8 नगर निगमों, 76 नगर कौंसिल (नगर पालिका) और 21 नगर पंचायतों में चुनाव है. बठिंडा, मोहाली,होशियारपुर, मोगा, पठानकोट, बटाला, अबोहर और कपूरथला नगर निगम के पार्षद सीटों पर चुनाव है. ऐसे ही नगर पालिका और नगर पंचायत के लिए भी अलग-अलग वार्डों में चुनाव है।  चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 105 नगर निकाय के लिए कुल  10,809 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए थे. इसमें 713 प्रत्याशियों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं, जिसके बाद  10096 उम्मीदवार ही मैदान में रह गए।  पंजाब के जिन 8 नगर निगमों में चुनाव हो रहे हैं, उसे अलग-अलग वार्डों (सीटों) पर पार्षदों के लिए 2003 उम्मीदवार बचे हैं.  76 नगर कौंसिल की सीटों के लिए 6,887 उम्मीदवार मैदान में है तो 21 नगर पंचायत के लिए मैदान में 1,206 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं.  हालांकि, नामांकन वापस लिए जाने के बाद उम्मीदवारों के अंतिम आंकड़े सामने आ सकेंगे।  2027 चुनाव का सेमीफाइनल  पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव है, जिसके चलते निकाय चुनाव को 2027 के सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है. पंजाब का निकाय चुनाव सिर्फ मेयर या पार्षद चुनने का जरिया नहीं है. यह पंजाब की राजनीति का वो थर्मामीटर है, जो यह मापेगा कि सूबे में राजनीतिक हवा किस तरफ बह रही है. निकाय चुनाव के बाद सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजों से प्रदेश के सियासी माहौल का पता चल सकेगा।  निकाय चुनाव में मिलने वाली हार जीत को सियासी दल अपने-अपने हिसाब से पेस करेंगे.  निकाय चुनाव सभी दलों के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव सीधे तौर पर एक करोड़ से ज्यादा शहरी मतदाताओं से जुड़े हुए हैं. इन चुनावों में 90 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टियों का टेस्ट होगा. सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है ताकि चुनाव से पहले जीत मिल सके और उसका फायदा विधानसभा चुनाव में पार्टियों को मिले।  किसके लिए कितना अहम बना चुनाव बीजेपी अब पंजाब में सरकार बनाने का सपना देख रही है, जिसके लिए निकाय चुनाव काफी अहम है. राघव चड्डा सहित आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों को बीजेपी ने अपने साथ मिलाने के बाद सियासी समीकरण को साधने की कवायद की है, लेकिन इन नेताओं की पहली अग्निपरीक्षा निकाय चुनाव में होनी है।  वहीं, पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के लिए अपने सियासी साख को बचाए रखना के चुनाव माना जा रहा है.  'आप' प्रमुख शहरों के निगमों पर कब्जा बरकरार रखती है, तो 90 विधानसभा सीटों पर उसका कैडर मजबूत होगा. ऐसे में अगर नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है और विधायकों पर परफॉर्मेंस का दबाव दोगुना हो जाएगा।  कांग्रेस पंजाब में मुख्य विपक्षी दल है. लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं. शहरी इलाकों में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक रहा है. इन चुनावों में अगर कांग्रेस अच्छा करती है, तो वह 90 विधानसभा सीटों पर खुद को 'आप' के एकमात्र विकल्प के रूप में स्थापित कर लेगी।  वहीं, शिरमणि अकाली दल इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है, पार्टी के भीतर अंतर्कलह और नेतृत्व संकट जगजाहिर है. अकाली दल के लिए अर्ध-शहरी और कस्बाई इलाकों की सीटें बेहद अहम हैं. इन निकाय चुनावों में अगर अकाली दल खाता खोलने या सम्मानजनक सीटें पाने में नाकाम रहता है, तो कम से कम 40-50 विधानसभा सीटों पर उसका वजूद खतरे में पड़ जाएगा।     

मेडिकल स्टोर बंद होने से चंडीगढ़ में असर, राहत बनी PGI और सरकारी अस्पतालों की दवा व्यवस्था

चंडीगढ़. दवा बिक्रेताओं के राष्ट्रव्यापी बंद का असर आज चंडीगढ़ में भी देखने को मिलेगा। शहर की अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे। मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए प्रशासन ने पीजीआई, जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16 और विभिन्न सिविल अस्पतालों सहित 52 मेडिकल स्टोर खुले रखने का निर्णय लिया है। पीजीआई के न्यू ओपीडी, एडवांस ट्रामा सेंटर, कार्डियक सेंटर, एडवांस्ड आइ सेंटर और गोल मार्केट स्थित कई मेडिकल स्टोर शामिल हैं। इसके अलावा जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16, सेक्टर-22 और सेक्टर-45 स्थित सिविल अस्पतालों के मेडिकल स्टोर भी खुले रहेंगे। प्रशासन ने विभिन्न क्षेत्रों में स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों को भी चालू रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि आम लोगों को सस्ती और जरूरी दवाएं आसानी से मिल सकें। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बंद के दौरान जिन मेडिकल स्टोरों को खुला रखने की अनुमति दी गई है, वे पूरे दिन कार्यरत रहेंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है और जरूरत पड़ने पर सूचीबद्ध मेडिकल स्टोरों से दवाएं प्राप्त की जा सकती हैं।

लुधियाना सहित पूरे पंजाब में मेडिकल स्टोर बंद, मरीजों को अस्पतालों का सहारा

लुधियाना. लुधियाना में बुधवार को केमिस्टों की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। शहर के अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे आम लोगों और मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही शहर के विभिन्न इलाकों में दवा दुकानों के शटर गिरे दिखाई दिए और दवाइयां खरीदने पहुंचे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हुई जिन्हें रोजाना नियमित दवाइयों की आवश्यकता रहती है। कई बुजुर्ग मरीज और उनके परिजन एक मेडिकल स्टोर से दूसरे मेडिकल स्टोर तक भटकते दिखाई दिए। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें काफी दूर तक जाकर खुली दवा दुकानों की तलाश करनी पड़ी। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और संबंधित विभागों द्वारा समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा। इसी के विरोध में यह हड़ताल की गई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। सिविल अस्पताल के अंदर खुली दुकानें हालांकि राहत की बात यह रही कि सिविल अस्पताल और सीएमसी अस्पताल के भीतर संचालित फार्मेसियां खुली रहीं। वहां मरीजों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती रहीं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों और बाह्य रोगी विभाग में आने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिली। अस्पताल प्रशासन की ओर से भी दवाइयों की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए गए, ताकि मरीजों को ज्यादा परेशानी न हो। मोगा में ऑनलाइन दवा नीति के खिलाफ केमिस्टों का हल्लाबोल – ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की ओर से घोषित देशव्यापी हड़ताल के दौरान बुधवार को मोगा डिस्टिक केमिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले जिले की करीब 800 होलसेल व रिटेल दवा दुकानें बंद रखी गई। हड़ताल को लेकर जिले भर के केमिस्ट मोगा के सिविल अस्पताल के बाहर एकत्रित हुए इस दौरान सभी ने केंद्र सरकार की गलत पॉलिसी और पंजाब सरकार के नियमों में बदलाव न करने के चलते रोष जताया। इस दौरान सिविल अस्पताल में दवाई लेने वाले आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान मोगा डिस्ट्रिक्ट कैमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान राजीव गर्ग ,दीपक कुमार दीपू सचिव नवीन सूद व संजीव कुमार मिन्ना ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से चलाई गई ऑनलाइन स्कीम योजना उनके कारोबार के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है, क्योंकि कोविड़ काल के दौरान केंद्र सरकार ने ऑनलाइन दवाई सप्लाई करने को लेकर प्रस्ताव पारित किया था। कारोबार बहुत हद तक प्रभावित हो रहा लेकिन कोविड़ खत्म होने के बाद उस प्रस्ताव को रद नहीं किया गया। जिसके कारण उनका कारोबार बहुत हद तक प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि बड़ी कंपनियां ऑनलाइन माध्यम से दवाइयां 40 प्रतिशत तक कम कीमत पर बेच रही हैं, जिससे स्थानीय मेडिकल स्टोर और दवा सप्लायरों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। हड़ताल के दौरान एसोसिएशन के प्रधान राजीव गर्ग ,दीपक कुमार दीपू सचिव नवीन सूद बताया कि ऑनलाइन कंपनियों को ज्यादा कमीशन दिया जाता है। इससे छोटे दुकानदार आर्थिक दबाव में आ गए हैं। यही नही ड्रग विभाग की गाइडलाइन बहुत सख्त है ऑनलाइन की आड़ में प्रतिबंधित दवाइया सप्लाई की जा रही हैं। लेकिन ऑनलाइन सप्लाई करने वाले कारोबारी पर कोई भी कार्रवाई नहीं होती है। अगर लोकल केमिस्ट कोई प्रतिबंधित दवाई बेचता है तो उसके खिलाफ ड्रग विभाग कार्रवाई कर देता है। इस मौके पर समस्त एग्जीक्यूटिव के सदस्य मौजूद थे।

पंजाब नगर निकाय चुनाव का बिगुल तेज, 7623 उम्मीदवारों की दावेदारी; 29 मई को होगा फैसला

चंडीगढ़. पंजाब में आठ नगर निगम, नगर कौंसिल और नगर पंचायत की 105 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में प्रत्याशियों का फाइनल लिस्ट सामने आ चुकी है। पंजाब राज्य चुनाव आयोग की ओर से बुधवार को नामांकन वापिस के बाद उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी कर दी है। जानकारी अनुसार अब चुनावी मैदान में 7623 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा। निकाय चुनाव के लिए 26 मई को पंजाब के जिलों में मतदान होगा। चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रत्याशियों की फाइनल लिस्ट के तहत नगर निगम के लिए 386 लोगों ने नाम वापिस ले लिया साथ ही चार प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए हैं। अब नगर निगम में 1613 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। उधर नगर कौंसिल चुनाव के लिए 1695 प्रत्याशियों ने पर्चा वापस ले लिया है। कौंसिल चुनाव में 47 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। ऐसे में अब चुनावी मैदान में 5144 उम्मीदवारों के बीच ही मुकाबला होगा। नगर पंचायत की सीटों के लिए 312 प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिया है। 28 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। नगर पंचायत की सीटों के लिए अब 866 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। जानकारी अनुसार नगर निगम नगर कौंसिल और नगर पंचायत की 105 सीटों के लिए कुल 10809 आवेदन जमा हुए थे। स्क्रूटनी के बाद 10096 उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के योग्य पाया गया। मंगलवार को नामांकन वापसी की अंतिम दििन था। चुनाव से जुड़ी खास बातें – 26 मई को सभी 105 सीटों के लिए मतदान होगा। 29 मई को मतगणना और रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। नगर निगम की सीटों के लिए अब 1695 उम्मीदवार ही मैदान में नगर कौंसिल की सीटों के लिए 5144 उम्मीदवार ही बचे मैदान में नगर पंचायत के लिए अब 866 उम्मीदवार मैदान में हैं।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उम्रदराज और कम पढ़े-लिखे होने पर नंबरदार को नहीं हटाया जा सकता

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पटियाला जिले के एक गांव में पिछले 10 वर्षों से कार्यरत 7वीं पास नंबरदार (गांव के मुखिया) की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस हर्ष बुंगर की पीठ ने स्पष्ट किया कि पंजाब भूमि राजस्व नियमों के तहत नंबरदार के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय नहीं है, इसलिए केवल कम पढ़े-लिखे होने के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने बदलते दौर में नंबरदार की जिम्मेदारियों को देखते हुए पंजाब सरकार से नियमों में संशोधन कर न्यूनतम योग्यता 'मैट्रिक' (10वीं) तय करने पर विचार करने का अनुरोध किया है। योग्यता और उम्र की तुलना पर कोर्ट का रुख याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि वह 12वीं पास है और वर्तमान नंबरदार से अधिक युवा व शिक्षित है, इसलिए वह इस पद के लिए बेहतर विकल्प है। इस पर जस्टिस हर्ष बुंगर ने कहा कि जब नियमों में कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित ही नहीं है, तो केवल कम शैक्षणिक योग्यता के आधार पर चुने गए उम्मीदवार को अयोग्य नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने उम्र के तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि आयु का महत्व केवल व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और कर्तव्यों के निर्वहन के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया है जिससे यह साबित हो कि वर्तमान नंबरदार अपनी उम्र के कारण काम करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा, पिछले 10 वर्षों से उनकी कार्यकुशलता को लेकर कोई शिकायत भी दर्ज नहीं है। पड़ोसी राज्य हरियाणा का दिया हवाला सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि नंबरदार के कर्तव्यों को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि उस व्यक्ति को पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा की बुनियादी समझ हो। उन्होंने पड़ोसी राज्य हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नंबरदार के पद के लिए न्यूनतम योग्यता 'मिडिल पास' (8वीं) तय है, जबकि पंजाब में ऐसा कोई नियम नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा  " यह अदालत इस विचार पर है कि एक नंबरदार द्वारा निभाए जाने वाले कर्तव्यों की प्रकृति को देखते हुए यह वांछनीय होगा कि ऐसे व्यक्ति के पास कम से कम मैट्रिक स्तर की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हो।" अदालत ने इस आदेश की प्रति राज्य के वकील को भेजने का निर्देश दिया है ताकि इसे संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जा सके और पंजाब सरकार इस पद के लिए नियम पुस्तिका में बदलाव करने पर गंभीरता से विचार कर सके।

वैश्विक तनाव का पंजाब पर असर, कच्चा माल महंगा होने से अमृतसर में ठप पड़ रही मशरूम खेती

अमृतसर  ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज में बाधा का असर अब पंजाब के मशरूम उद्योग पर भी साफ दिखने लगा है। हर वर्ष मई में शुरू होने वाली मिल्की मशरूम की खेती इस बार संकट में है। उर्वरक, कंपोस्ट और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से अधिकांश उत्पादकों ने खेती शुरू ही नहीं की। हालात यह हैं कि अमृतसर जिले के जंडियाला गुरु, मानांवाला, वेरका और अजनाला जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में केवल 20 प्रतिशत किसानों ने ही इस बार मशरूम उत्पादन का जोखिम उठाया है। मशरूम उत्पादक जागीर सिंह का कहना है कि युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों, कंपोस्ट और परिवहन लागत पर पड़ा है। उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़े पिछले कुछ सप्ताह में उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़ चुके हैं। जिन किसानों को पहले एक ट्राली कंपोस्ट 12 से 15 हजार रुपये में मिल जाती थी, उन्हें अब इसके लिए 35 से 40 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। उधर, जंडियाला गुरु के मशरूम उत्पादक सरबजीत सिंह का कहना है कि मिल्की मशरूम की खेती नियंत्रित वातावरण पर निर्भर करती है। इसमें तापमान, नमी और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन डीजल और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च अत्यधिक बढ़ गया है। उस पर प्लास्टिक पैकेजिंग और परिवहन भी महंगा हो चुका है। ऐसे में छोटे उत्पादकों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से मानांवाला क्षेत्र में उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हुई है। कई कंपनियों ने समय पर माल पहुंचाने में असमर्थता जताई है, जबकि कुछ ने सीधे दाम बढ़ा दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो आने वाले महीनों में मशरूम उत्पादन और घट सकता है। उल्लेखनीय है कि अमृतसर से उत्पादित मशरूम देश सहित विदेश में भी भेजा जाता है। अमृतसर का जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए अनुकूल है। यही कारण है कि अमृतसर स्थित खालसा कालेज में मशरूम उत्पादन के लिए एक वर्षीय डिप्लोमा भी शुरू किया गया है। मांग के मुकाबले उत्पादन बेहद कम रहेगा इस बार इस बार मांग के मुकाबले उत्पादन कम होगा। पंजाब में होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, फास्ट फूड कारोबार और घरों में मशरूम की मांग अधिक है। वेजीटेरियन लोगों के लिए मशरूम पहली पसंद है। खासकर मिल्की व बटन मशरूम की मांग गर्मियों में अधिक रहती है। लेकिन इस बार उत्पादन कम होने से बाजार में भारी कमी देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में मशरूम के दाम में 30 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। पहले स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन होने से आपूर्ति सामान्य बनी रहती थी, लेकिन इस बार कई यूनिट बंद पड़े हैं। जिन किसानों ने उत्पादन शुरू भी किया है, वे सीमित मात्रा में मशरूम तैयार कर रहे हैं ताकि नुकसान का जोखिम कम रहे। मशरूम उद्योग पूरी तरह आयात आधारित कच्चे माल पर निर्भर नहीं है, लेकिन उर्वरक, रसायन और ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा असर इसकी लागत पर पड़ता है। निकट भविष्य में उपभोक्ताओं को महंगे मशरूम खरीदने पड़ सकते हैं। होटल और कैटरिंग व्यवसाय में यदि आपूर्ति कम रही तो मेन्यू की लागत बढ़ाना मजबूरी बन जाएगी। वास्तविक स्थिति यह है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब आम लोगों की थाली तक पहुंचने लगा है। कभी सस्ती और पौष्टिक मानी जाने वाली मशरूम जल्द ही उपभोक्ता की पहुंच से दूर होने की संभावना है।  

पढ़ाई के सपनों के बीच मातम, UK में इकलौते बेटे की मौत से सदमे में परिवार

फाजिल्का. UK के एक पंजाबी युवक की मौत की दुखद खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार, गांव मम्मू खेड़ा के 24 साल के युवक की कल UK में मौत हो गई। मृतक की पहचान अर्शदीप पुत्र जगदेव सिंह निवासी गांव मम्मू खेड़ा के रूप में हुई है। परिवार वालों के अनुसार, अर्शदीप सिंह करीब 4 साल पहले स्टडी वीजा पर UK गया था। अब उसे वर्क परमिट मिल गया था और अर्शदीप सिंह वहां कंस्ट्रक्शन का काम कर रहा था। कल सुबह जब अर्शदीप सिंह नहीं उठा तो उसके रूममेट दोस्तों ने उसे जगाया। जब वह नहीं उठा तो उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। यहां आपको बता दें कि अर्शदीप सिंह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। जैसे ही उसकी मौत की खबर गांव में पहुंची तो मातम छा गया। परिवार वालों ने पंजाब सरकार और भारत सरकार से उनके शव को गांव वापस लाने में मदद की मांग की है।

नकली नोटों के बड़े रैकेट पर पुलिस का शिकंजा, पटियाला से 5.50 लाख की फेक करेंसी जब्त

पटियाला पंजाब को सुरक्षित राज्य बनाने के लिए चलाई गई मुहिम के दौरान नकली भारतीय करेंसी नोटों (एफआईसीएन) के प्रचलन को करारा झटका देते हुए काउंटर इंटेलिजेंस पटियाला ने जाली करेंसी मॉड्यूल में शामिल चार व्यक्तियों को 5.50 लाख रुपये की नकली करेंसी सहित गिरफ्तार कर इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। यह जानकारी पुलिस महानिदेशक पंजाब गौरव यादव ने दी। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान नाजर खान निवासी गांव झुनीर मलेरकोटला, राज मोहम्मद निवासी धूरी संगरूर, मुख्तियार सिंह उर्फ गुरजीत सिंह निवासी गांव मलिकपुर जींद हरियाणा और आसिफ अली निवासी मलेरकोटला के रूप में हुई है। डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि बरामद की गई नकली भारतीय करेंसी में सभी 500 रुपये के नोट हैं। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि गिरफ्तार किया गया राज मोहम्मद आपराधिक पृष्ठभूमि वाला आरोपी है और उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट से संबंधित एक एफआईआर दर्ज है। डीजीपी ने कहा कि इस नेटवर्क को लेकर जांच की जा रही है।  इस ऑपरेशन के बारे में जानकारी देते हुए एआईजी सीआई पटियाला डॉ. सिमरत कौर ने बताया कि सीआई यूनिट मलेरकोटला की टीम द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान दो संदिग्ध व्यक्तियों नाजर खान और राज मोहम्मद को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से 4 लाख रुपये की नकली भारतीय करेंसी के नोट बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आगे की जांच के दौरान दो अन्य आरोपियों मुख्तियार सिंह उर्फ गुरजीत सिंह और आसिफ अली  भी गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से 1.5 लाख रुपये के अन्य नकली भारतीय करेंसी नोट बरामद किए गए हैं। एआईजी ने कहा कि आगे की जांच के दौरान आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। 

भीषण गर्मी से बचें, गुरदासपुर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को किया सतर्क

गुरदासपुर. जिले में लगातार बढ़ रहे तापमान और हीट वेव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग गुरदासपुर ने एडवाइजरी जारी की है। सिविल सर्जन डॉ. महेश कुमार प्रभाकर ने लोगों से गर्मी के मौसम में विशेष सावधानी बरतने और शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब मैदानी इलाकों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है, तो उसे हीट वेव माना जाता है। अत्यधिक गर्मी शरीर के तापमान नियंत्रित करने वाले सिस्टम को प्रभावित करती है और कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इन लोगों को हीट स्ट्रोक का ज्यादा खतरा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नवजात शिशु, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, मजदूर, मोटापे से ग्रस्त लोग, मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति तथा दिल, किडनी, लिवर या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हीट स्ट्रोक के अधिक खतरे में रहते हैं। हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या करें – सुबह और शाम के समय ही बाहर की गतिविधियां करें। हर आधे घंटे में पानी पीते रहें, चाहे प्यास न लगे। हल्के रंग और सूती कपड़े पहनें। धूप में निकलते समय सिर को टोपी, छाता, गमछा या स्कार्फ से ढकें। बाहर जाते समय हमेशा जूते या चप्पल पहनें। धूप में काम करने वाले लोग समय-समय पर छांव में आराम करें। अपने साथ हमेशा पानी रखें। तरबूज, खीरा, संतरा, अंगूर और टमाटर जैसे पानी से भरपूर फल व सब्जियां खाएं। नींबू पानी, लस्सी और नारियल पानी जैसे घरेलू पेय पदार्थों का सेवन करें। सनस्क्रीन और धूप का चश्मा इस्तेमाल करें। कम मात्रा में लेकिन बार-बार भोजन करें। ठंडे पानी से नहाएं और शरीर को ठंडा रखें। क्या न करें दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच धूप में बाहर निकलने से बचें। शराब, चाय, कॉफी और ज्यादा मीठे या कार्बोनेटेड पेय पदार्थों का सेवन न करें। तला-भुना और बासी भोजन खाने से बचें। बच्चों और पालतू जानवरों को बंद गाड़ी में अकेला न छोड़ें। तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत कब पड़ती है स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यदि तेज सिरदर्द, चक्कर आना, बेहोशी, सांस लेने में दिक्कत, तेज धड़कन, उल्टी, शरीर का तापमान 40 डिग्री से अधिक होना, मांसपेशियों में ऐंठन या मानसिक संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गुरप्रीत कौर ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से संबंधित दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। वहीं डॉ. महेश कुमार प्रभाकर ने अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।