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नितिन नवीन भाजपा आलाकमान का ‘संदेश’ लेकर दो दिन के दौरे पर आए पटना

पटना. पटना एयरपोर्ट पर गुरुवार को जो दृश्य दिखा, वह सिर्फ एक नेता का स्वागत नहीं था, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर बदले सियासी मिजाज और संगठनात्मक अनुशासन का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था। बिहार मूल के युवा नेता और भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पटना आगमन पर जिस तरह दिग्गज नेताओं की कतार लगी, उसने साफ कर दिया कि अब संदेश ऊपर से आया है और उसका पालन जमीन पर दिख रहा है। दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे नितिन नवीन का एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, नीतीश कैबिनेट में भाजपा कोटे के कई मंत्री, वरिष्ठ पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। यह नजारा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि कुछ समय पहले तक ऐसा दृश्य देखने को नहीं मिलता था। दरअसल, नितिन नवीन के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद जब वे पहले पटना आए थे, तब कई बड़े भाजपा नेता एयरपोर्ट पर नजर नहीं आए थे। इस पर पार्टी आलाकमान ने नाराजगी जताते हुए साफ निर्देश दिया था कि नितिन नवीन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में हैं और उनके हर दौरे पर वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति अनिवार्य होगी। गुरुवार को पटना एयरपोर्ट पर दिखी एकजुटता को उसी निर्देश का सीधा असर माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने इस मौके पर कहा कि भाजपा में युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है और इसे लेकर कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने कहा कि संगठन में अनुशासन और नेतृत्व के प्रति सम्मान ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। उनके बयान को संगठनात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। नितिन नवीन का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं है। मकर संक्रांति के अवसर पर वे शुक्रवार को पटना में पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन करेंगे। खास बात यह है कि हर साल वे इस भोज का आयोजन करते रहे हैं, लेकिन कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला मकर संक्रांति कार्यक्रम है, जिसे सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि अध्यक्ष चुने जाने से महज पांच दिन पहले नितिन नवीन अचानक पटना पहुंचे थे, जिसने पहले ही राजनीतिक हलकों में अटकलों को हवा दे दी थी। अब उनके स्वागत और आगामी भोज को संगठन में उनकी मजबूत होती स्थिति और आलाकमान के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, नितिन नवीन का पटना आगमन भाजपा के भीतर नेतृत्व, अनुशासन और संदेश की राजनीति का स्पष्ट संकेत बनकर उभरा है- जहां अब स्वागत भी निर्देश के साथ होता है और संदेश भी पूरे दमखम के साथ जाता है।

झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष बने आदित्य साहू

रांची. भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में संगठनात्मक नेतृत्व की कमान आदित्य साहू को सौंपकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी अब राज्य में अपेक्षाकृत युवा, ऊर्जावान और जमीनी नेतृत्व के सहारे अपनी राजनीतिक धार को तेज करना चाहती है। निचले स्तर से संगठन में काम करते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद तक पहुंचे साहू का सफर भाजपा की कैडर आधारित राजनीति का उदाहरण है। उनका चयन केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि झारखंड में भाजपा की भविष्य की रणनीति का संकेत भी है। वहीं, इस चयन से ओबीसी समाज को भी साधने का प्रयास किया गया है। झारखंड भाजपा का नेतृत्व लंबे समय तक अपेक्षाकृत वरिष्ठ और अनुभव आधारित चेहरों के हाथ में रहा है। ऐसे नेतृत्व ने संगठन को स्थिरता तो दी, लेकिन बदले हुए सामाजिक–राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप आक्रामक विस्तार की कमी भी महसूस की गई। इसके विपरीत आदित्य साहू का राजनीतिक विकास छात्र राजनीति, मंडल और जिला स्तर के संगठनात्मक कार्यों से होकर हुआ है। यह अनुभव उन्हें कार्यकर्ताओं की वास्तविक चुनौतियों और अपेक्षाओं को समझने में मदद करता है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो साहू का नेतृत्व माडल अधिक सहभागी और संवाद आधारित प्रतीत होता है। कैडर आधारित ताकत पर फोकस आदित्य साहू बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि भाजपा की असली ताकत उसका समर्पित कैडर है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में भाजपा की सफलता का प्रमुख कारण मजबूत बूथ संरचना और प्रशिक्षित कार्यकर्ता माने जाते हैं। झारखंड में भाजपा संगठनात्मक रूप से मौजूद तो है, लेकिन कई क्षेत्रों में बूथ स्तर की सक्रियता कमजोर रही है। साहू की रणनीति अन्य राज्यों के सफल मॉडल से सीख लेते हुए झारखंड में कैडर को पुनः सक्रिय करने की है। साहू के नेतृत्व की सबसे अहम विशेषता युवा नेतृत्व को आगे लाने की मंशा है। पार्टी के भीतर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि झारखंड जैसे युवा आबादी वाले राज्य में संगठन का चेहरा अपेक्षाकृत उम्रदराज दिखता है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भाजपा ने हाल के वर्षों में कई राज्यों में युवा प्रदेश अध्यक्षों और युवा मोर्चा से निकले नेताओं को आगे बढ़ाया है। आदित्य साहू भी इसी प्रयोग को झारखंड में लागू करना चाहते हैं, ताकि पार्टी नए कलेवर के साथ अधिकाधिक प्रभावी बन सके। सामाजिक समीकरणों की समझ झारखंड की राजनीति आदिवासी, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और शहरी–ग्रामीण विभाजन के जटिल सामाजिक ताने-बाने पर आधारित है। भाजपा पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वह आदिवासी और स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त संवेदनशीलता के साथ नहीं उठाती। साहू के सामने चुनौती है कि संगठन को सामाजिक रूप से अधिक समावेशी बनाया जाए। अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड में क्षेत्रीय अस्मिता का सवाल अधिक प्रभावशाली है। यदि साहू इस पहलू को संगठनात्मक रणनीति में सही ढंग से शामिल कर पाते हैं तो भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ सकती है। तुलनात्मक विश्लेषण करें तो जिन राज्यों में भाजपा ने संगठन को सरकार से ऊपर रखा, वहां पार्टी का आधार मजबूत हुआ। झारखंड में फिलहाल भाजपा सत्ता में नहीं है, इसलिए संगठन की भूमिका और भी अहम हो जाती है। साहू के सामने अवसर है कि वह विपक्ष में रहते हुए जन आंदोलनों, मुद्दा आधारित राजनीति और निरंतर जनसंपर्क के जरिए संगठन को सक्रिय रखें। चुनौतियां और संभावनाएं आदित्य साहू की राह आसान नहीं है। गुटबाजी, संसाधनों की कमी और सत्तारूढ़ गठबंधन की मजबूत पकड़ जैसी चुनौतियां उनके सामने हैं। लेकिन युवा टीम, स्पष्ट संगठनात्मक दृष्टि और कैडर आधारित कामकाज के जरिए वे इन चुनौतियों को अवसर में बदल सकते हैं। यदि वे अन्य राज्यों के सफल संगठनात्मक प्रयोगों को झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने में सफल होते हैं तो भाजपा फिर से राज्य में एक मजबूत और भरोसेमंद राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर सकती है। आदित्य साहू के नेतृत्व की प्रमुख विशेषताएं     निचले स्तर से प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर, संगठन की जमीनी समझ     छात्र राजनीति और मंडल–जिला संगठन का व्यावहारिक अनुभव     कैडर आधारित राजनीति पर स्पष्ट फोकस     वरिष्ठता नहीं, सक्रियता और प्रदर्शन को प्राथमिकता पूर्व नेतृत्व बनाम नया नेतृत्व     पूर्व नेतृत्व में अनुभव आधारित, अपेक्षाकृत स्थिर संगठन     सीमित युवा भागीदारी     बूथ स्तर पर असमान सक्रियता आदित्य साहू का मॉडल     युवा और ऊर्जावान नेतृत्व     बूथ, मंडल और मीडिया प्रबंधन पर समान जोर     लगातार संवाद और फीडबैक आधारित संगठन संगठनात्मक रणनीति के प्रमुख बिंदु     बूथ स्तर पर कार्यकर्ता नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की योजना     मंडल और जिला इकाइयों में युवाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी     प्रशिक्षण शिविरों और संगठनात्मक कार्यशालाओं पर जोर अन्य राज्यों से सीख     गुजरात, यूपी, एमपी में मजबूत कैडर माडल की सफलता     बंगाल में विपक्ष में रहते हुए संगठन विस्तार का उदाहरण     छत्तीसगढ़ में बूथ मैनेजमेंट और माइक्रो प्लानिंग का प्रभाव झारखंड की विशेष चुनौतियां     आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भरोसे की कमी     क्षेत्रीय अस्मिता और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी का आरोप     सत्ता से बाहर होने के कारण सीमित संसाधन     संगठन के भीतर गुटीय संतुलन आदित्य साहू के सामने अवसर     युवा आबादी से सीधा जुड़ाव     संगठन को आंदोलनकारी स्वरूप देने की संभावना     सरकार बनाम संगठन की बहस में संगठन को केंद्र में लाने का मौका     भाजपा को मजबूत वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने का अवसर

चिराग के दही-चूड़ा भोज में चेतन के पास पहुंचे CM नीतीश

पटना. मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सियासी ताकत दिखाने का मंच बन गया। गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक के बाद एक कई दही-चूड़ा आयोजनों में शिरकत कर राजनीतिक संदेश दिए। कभी चिराग पासवान के ऑफिस पहुंचे, तो कभी बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद के घर जाकर उपस्थिति दर्ज कराई। चिराग पासवान के भोज में पहुंचे CM, किया अभिवादन केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी खास मानी जा रही है। यहां सीएम ने हाथ हिलाकर मौजूद लोगों और मीडिया का अभिवादन किया। इस मुलाकात को NDA के भीतर बढ़ती सहजता और तालमेल के रूप में देखा जा रहा है। भोज में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। चेतन आनंद के घर पहुंचे नीतीश, पांच मिनट की मुलाकात भी मायनेदार इसके बाद मुख्यमंत्री जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पहुंचे, जहां वे करीब पांच मिनट रुके। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और PHED मंत्री संजय कुमार भी मौजूद थे। चेतन आनंद ने कहा कि व्यस्त शेड्यूल के बावजूद सीएम ने समय निकाला और आशीर्वाद दिया। उन्होंने बताया कि NDA के साथ-साथ विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया था। मंत्रिमंडल विस्तार पर चेतन आनंद की सधी हुई प्रतिक्रिया विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर चेतन आनंद ने सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे किसी तरह की अनर्गल इच्छा नहीं रखते और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय होगा। राजनीतिक गलियारों में इसे संतुलन साधने वाला बयान माना जा रहा है। आनंद मोहन की रिहाई से मजबूत हुई नजदीकी गौरतलब है कि चेतन आनंद के पिता आनंद मोहन की रिहाई में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अहम भूमिका रही थी। इसके बाद फ्लोर टेस्ट के दौरान चेतन आनंद ने RJD को झटका देते हुए नीतीश कुमार का साथ दिया था। तभी से आनंद मोहन परिवार और मुख्यमंत्री के रिश्ते और मजबूत माने जा रहे हैं। तेजप्रताप से रत्नेश सदा तक, 14 जनवरी का सियासी कैलेंडर 14 जनवरी को तेजप्रताप यादव के आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज में लालू यादव, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, प्रभुनाथ यादव और चेतन आनंद की मौजूदगी ने अलग सियासी संकेत दिए। लालू यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे तेजप्रताप से नाराज नहीं हैं। वहीं पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के आवास पर भी दही-चूड़ा भोज हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री, राज्यपाल और NDA के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। दही-चूड़ा के बहाने दिखी गठबंधन की तस्वीर कुल मिलाकर, इस मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज सिर्फ खान-पान का आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए गठबंधन की मजबूती, रिश्तों की गर्माहट और भविष्य की राजनीति के संकेत भी साफ तौर पर नजर आए। बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा एक बार फिर सियासी भाषा बोलता दिखा।

बिहार विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति खतरे में, सभी 6 विधायक JDU में शामिल होने की संभावना

पटना  बिहार की राजनीति में एक बार फिर दलबदल के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के सभी छह विधायक पाला बदलकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक रंजन, आबिदुर रहमान, मोहम्मद कामरुल होदा और मनोज बिस्वान जदयू नेतृत्व के संपर्क में हैं। हाल ही में पटना स्थित सदाकत आश्रम में आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज से सभी छह विधायकों ने दूरी बनाए रखी। 8 जनवरी को प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम द्वारा बुलाई गई 'मनरेगा बचाओ' अभियान की बैठक में भी विधायक शामिल नहीं हुए। जदयू के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि कांग्रेस विधायक अपनी पार्टी की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हैं और उनके जदयू में शामिल होना बस कुछ ही दिनों की बात है। विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि जदयू को 85 सीटें मिली थीं। यदि कांग्रेस के 6 विधायक जदयू में आते हैं, तो जदयू की संख्या 91 हो जाएगी, जिससे वह भाजपा को पछाड़कर सदन में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। दूसरी ओर, भाजपा भी पीछे नहीं है। वह उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 'राष्ट्रीय लोक मोर्चा' (RLM) के असंतुष्ट विधायकों पर नजर गड़ाए हुए है ताकि अपना शीर्ष स्थान बरकरार रख सके। कुशवाहा की पार्टी में फूट के आसार एनडीए के घटक दल RLM के 4 में से 3 विधायक रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक को कैबिनेट मंत्री बनाने से पार्टी के विधायक नाराज हैं। हाल ही में इन विधायकों ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की, जिससे पार्टी टूटने की अटकलें तेज हो गई हैं। RCP की घर वापसी की चर्चा जदयू के पूर्व कद्दावर नेता आरसीपी सिंह नीतीश कुमार से अलग होकर प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' में शामिल हो गए थे। उनके भी दोबारा जदयू में आने की अटकलें हैं। हाल ही में एक 'कुर्मी सम्मेलन' में नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की मौजूदगी को राजनीतिक गलियारों में बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक मेलजोल: जदयू के दही-चूड़ा भोज में पहुंचे नीतीश कुमार, भाजपा दफ्तर में भी दिखी हलचल

पटना बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज को लेकर सियासत जमकर हो रही है। इस बीच, बुधवार को जहां एक ओर जदयू के भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए, वहीं भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी किसान मोर्चा द्वारा आयोजित चूड़ा-दही भोज में बिहार सरकार के कई मंत्री और कार्यकर्ता पहुंचे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मकर संक्रांति के अवसर पर पटना में पूर्व मंत्री एवं जदयू विधायक रत्नेश सादा के आवास पर जदयू द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। रत्नेश सादा ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, विधायक श्याम रजक, विधायक शीला कुमारी, विधायक संतोष कुमार निराला, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमार वर्मा सहित बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारीगण, कार्यकर्तागण एवं गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। इधर, भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी 'कार्यकर्ता मिलन सह दही-चूड़ा भोज' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, मंत्री मंगल पांडेय सहित बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता उपस्थित हैं। बता दें कि बिहार में कुछ लोग बुधवार को मकर संक्रांति मना रहे हैं जबकि कुछ लोग कल यानी गुरुवार को मनाएंगे। सियासी गलियारे में हालांकि चूड़ा-दही पार्टी पर सबकी नजरें हैं। इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर चर्चा के केंद्र में राजद के अध्यक्ष लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के चूड़ा-दही भोज पर सबकी नजरें हैं। उन्होंने बुधवार को अपने आवास पर चूड़ा-दही महाभोज का आयोजन किया है। खास बात यह है कि उन्होंने इस भोज में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी नेताओं को आमंत्रित किया है।

बड़े भाई के दही-चूड़ा भोज से नदारद रहे तेजस्वी, तेज प्रताप का आया हल्का-फुल्का बयान

पटना बिहार के पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया, जिसमें कई नेताओं ने शिरकत की। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी अपने बेटे के आवास पहुंचे और उन्हें आशीर्वाद दिया। हालांकि, तेज प्रताप के छोटे भाई एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। पिता के भोज में आने पर तेज प्रताप खुश नजर आए, तो भाई के नहीं आने पर उन्होंने चुटकी ले ली।   पटना में अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान बुधवार को तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनके दही-चूड़ा भोज में पिता (लालू) और राज्यपाल आए। दोनों ने आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बड़े-बुजुर्ग से आशीर्वाद लेते हुए कुछ नया काम करना है। इसके बाद पूरे बिहार में यात्रा निकालेंगे। खबर लिखे जाने तक तेजस्वी यादव अपने बड़े भाई के घर भोज में नहीं पहुंचे। जब तेज प्रताप से इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा- तेजस्वी को न्योता भेज दिया, छोटे भाई हैं, थोड़ा लेट से सोकर उठते हैं। घर जाकर तेजस्वी को न्योता दिया था न्योता एक दिन पहले तेज प्रताप अपनी मां राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर गए थे और मां-पिता के साथ ही अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया था। दरअसल, अनुष्का यादव से रिलेशन की बात सामने आने के बाद पिछले साल तेज प्रताप यादव को लालू ने आरजेडी और अपने परिवार से बेदखल कर दिया था। इसके बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई और अकेले बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा। हालांकि, वह खुद महुआ सीट से चुनाव हार गए और उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। अब तेज प्रताप अपनी बिहार समेत अन्य राज्यों में अपनी राजनीतिक जड़ें मजबूत करने में जुटे हैं। इसी क्रम में दही-चूड़ा भोज में उन्होंने एनडीए, महागठबंधन समेत सभी दलों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया।  

लालू से मिलने और तेजस्वी के नहीं पहुंचने पर पर गदगद दिखे तेज प्रताप

पटना. मकर संक्रांति के अवसर पर जनशक्ति जनता दल के मुखिया और लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप की दही-चूड़ा पार्टी से बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस पार्टी में न सिर्फ सभी पार्टियों के नेता शिरकत कर रहे हैं, बल्कि लालू परिवार भी एक होता दिखाई दे रहा है। खास बात ये थी कि इस भोज में राजद के प्रमुख लालू यादव शामिल हुए और उन्होंने तेज प्रताप को आशीर्वाद दिया, तो तेज प्रताप ने भी अपनी भावना व्यक्त की। तेज प्रताप ने कहा कि अगर तेजू भैया की दावत सुपर डुपर हिट नहीं होगी, तो किसकी होगी। दही-चूड़ा की शानदार दावत का आयोजन किया गया था। हमारे माता-पिता हमारे लिए भगवान हैं, इसलिए मुझे उनका आशीर्वाद मिलता रहेगा। सब लोग आएंगे। वो थोड़ा लेट सोकर उठते हैं: तेज प्रताप भाई तेजस्वी के अभी तक नहीं पहुंचने पर तेज प्रताप ने कहा कि हमने निमंत्रण पत्र दे दिया है, हमारे छोटे भाई हैं वो थोड़ा लेट सोकर उठते हैं। वह भी आएंगे। तेज प्रताप के इस बयान से यह भी साफ हो गया है कि इस भोज में नेता प्रतिपक्ष और तेज प्रताप के छोटे भाई तेजस्वी यादव भी शिरकत करेंगे। इसको लेकर तेज प्रताप के बड़े मामा प्रभुनाथ यादव ने भी बयान दिया है। प्रभुनाथ यादव ने कहा, "मैं अपने भांजे को आशीर्वाद देने दही-चूड़ा की दावत में आया हूं ताकि वह तरक्की करे और लोगों की सेवा करे। मैं अपने बड़े भांजे को आशीर्वाद देने आया हूं। पूरा परिवार इकट्ठा होगा।"

गोपालगंज में जल-जीवन-हरियाली अभियान में 230 पुराने तालाबों का होगा जीर्णोद्धार

गोपालगंज. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत इस साल 230 तालाबों का जीर्णाेद्धार कराया जाएगा। जिले में पूर्व में चिह्नित किए गए 887 तालाबों में से पहले चरण में 198 तालाबों की दशा को सुधारने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। दूसरे चरण में इन तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के बाद उनका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई है। लगातार गिरते जलस्तर में सुधार की पहल के बाद जिले में जल जीवन हरियाली योजना के तहत जिले में 3100 तालाबों को चिह्नित कर उनका जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया गया था। पहले चरण में एक एकड़ से अधिक 887 तालाबों को चिह्नित कर उनका जीर्णोद्धार करने का काम बीते साल में शुरू किया गया। अब 198 तालाबों के जीर्णोद्धार का काम अंतिम दौर में पहुंच गया है। अब इन तालाबों में पानी भी मौजूद रहने लगा है। इस साल शेष बचे 693 तालाबों में से 230 तालाबों के जीर्णोद्धार करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। सभी पंचायत में एक-एक मॉडल तालाब निर्माण की योजना मनरेगा के तहत जिले की सभी 230 पंचायतों में एक-एक मॉडल तालाब बनाने की योजना पर भी काम प्रारंभ किया गया है। इन तालाबों में साल के 12 माह तक लगातार पानी का स्तर सामान्य बनाए रखने के लिए विद्युत चालित पंप लगाए जाने की योजना है, ताकि तालाबों में कभी भी पानी की कमी जैसी समस्या पैदा नहीं हो। इस योजना के तहत 13 पंचायत में तालाब निर्माण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। पानी भरने के लिए लगेगा विद्युत चालित पंप वैसे तालाब जिनका जीर्णोद्धार किया जा रहा है, वहां गर्मी के दिन भी पानी की कमी नहीं होगी। इसके तहत संबंधित तालाब के आसपास मोटर चालित पंप लगाए जाएंगे। पंप के सहारे ऐसे तालाब में गर्मी के दिन में पानी भरने की व्यवस्था होगी। ताकि इन तालाबों में सालों भर पानी भरा रह सके। भव्य दिखेंगे चिह्नित किए गए पुराने तालाब पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार के दौरान इस बात का भी ख्याल रखने का निर्देश दिया गया है कि तालाब की भव्यता कहीं से भी कम नहीं दिखे। इसके लिए तालाब के चारों ओर पौधों को लगाने की भी योजना है, ताकि पेड़ की छाया के साथ पर्यावरण को भी स्वच्छ रखा जा सके।

सहरसा में 52 करोड़ की लागत से क्वालिटी और टाइम लिमिट में बनाएं सड़क: सांसद

सहरसा. खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजेश वर्मा ने मंगलवार को सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने सबसे पहले निर्माणाधीन एसएच-95 और 412 करोड़ की लागत से बन रहे डेंगराही घाट पुल का निरीक्षण किया। इसके बाद, महिषी प्रखंड के झाड़ा पंचायत में 52 करोड़ की लागत से बनने वाली बहोरबा से बेलडाबर सड़क का जायजा लिया। सांसद ने खगड़िया जिले के प्रसिद्ध मां कात्यायनी मंदिर में पूजा अर्चना की और फिर एसएच-95 का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यस्थल पर मौजूद इंजिनियरों से कार्य की प्रगति की जानकारी ली। सांसद ने कहा कि इस सड़क के बन जाने से खगड़िया और सहरसा का सीधा जुड़ाव होगा। निरीक्षण के दौरान साम्हरखुर्द पंचायत के मुखिया दारा सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सांसद से एसएच-95 को साम्हरखुर्द से जोड़ने की मांग की। सांसद ने इस पर अपने निधि से सड़क देने का आश्वासन दिया। इसके बाद, सांसद का काफिला डेंगराही घाट पहुंचा, जहां पुल निर्माण कर रहे कंपनी के कर्मियों से बातचीत की। ग्रामीणों ने पुल की गुणवत्ता और नक्शे पर आपत्ति जताई, जिस पर सांसद ने पटना में इंजिनियरों से चर्चा करने का आश्वासन दिया। झाड़ा पंचायत में ग्रामीणों ने बहुरबा-बेलडाबर सड़क का मुद्दा उठाया, जिस पर सांसद ने कहा कि यह सड़क एक वर्ष में पूरी कर ली जाएगी।

झारखंड में 50 करोड़ की सरकारी जमीन पर गरजा बुलडोजर

धनबाद. धनबाद में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले भू माफिया की हिम्मत इतनी बढ़ी हुई है कि दिन के उजाले में बिनोद बिहारी चौक पर सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दस पक्की दुकानें खड़ी कर दीं। लगभग 50 करोड़ रुपए की इस सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल पिछले एक महीने से चल रहा था। डीसी को सूचना मिलने पर धनबाद अंचल कार्यालय की टीम ने धनबाद थाने की टीम के साथ मिलकर सभी दस अवैध दुकानों को तोड़ दिया। डीसी आदित्य रंजन के निर्देश पर एवं एसडीओ लोकेश बारंगे के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर आठ लेन रोड के बिनोद बिहारी महतो चौक को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इस दौरान कार्यपालक दंडाधिकारी नारायण राम तथा धनबाद सीओ रामप्रवेश कुमार ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाई गई दुकानें, अस्थाई निर्माण तथा पक्के निर्माण को हटाकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया। जिला प्रशासन के इस अभियान से आसपास अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। विरोध करने पहुंची महिला को हिरासत में लिया: जिस समय दुकानों को तोड़ा जा रहा था, उसी समय एक महिला वहां पहुंचकर हंगामा करने लगी। महिला ने इसे अपनी जमीन बताकर हंगामा करना शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद महिला पुलिस की टीम ने उसे हिरासत में लेकर धनबाद थाने के हवाले कर दिया। देर शाम उसे थाने से छोड़ा गया। जिला प्रशासन को सूचना मिली है कि किसी ने इस जमीन को बेचा भी है। इसकी जांच होने के बाद ही पूरा मामले सामने आएगा। सरकारी जमीन पर अवैध रूप से लिया बिजली कनेक्शन : अभियान के दौरान यह भी उजागर हुआ कि सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने वालों ने बिजली कनेक्शन भी ले रखा था। इसकी भी जांच की जाएगी। मौके से करीब 50 बोरी सीमेंट, स्टोन चिप्स सहित कुछ अन्य निर्माण सामग्री भी जप्त की गई है। डीसी ने सभी सीओ को अपने-अपने अंचल में ऐसा अभियान चलाकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने का निर्देश दिया है। विशेषकर अंचल के प्रमुख स्थान तथा उन स्थानों पर, जिसके कारण हमेशा ट्रैफिक जाम होता है। ट्राफिक जाम के कारण अक्सर स्कूली वाहन, एम्बुलेंस सहित जिले की बड़ी आबादी प्रभावित होती है। इस मामले की जानकारी देते हुए धनबाद के कलेक्टर आदित्य रंजन ने बताया कि बिनोद बिहारी चौक के समीप सरकारी जमीन पर कब्जे करने की शिकायत जिला प्रशासन को मिली थी। कई बार लोगों को उस सरकारी जमीन को खाली कर देने की सूचना भी दी गई थी। नोटिस के बाद भी किसी अवैध कब्जाधारी ने अतिक्रमण नहीं हटाया। जिसके बाद आज यह कार्रवाई की गई।