samacharsecretary.com

रांची से लापता दोनों बच्चे स्लम बस्ती से बरामद

रांची. रांची में बीते कई दिनों से लापता बच्चे रामगढ़ के चितरपुर की स्लम बस्ती से बरामद कर लिए गए हैं। इस मामले में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए संदिग्धों से पुलिस पूछताछ कर रही है। इस मामले की जानकारी देते हुए स्थानीय लोगों ने बताया कि लड़का को बजरंग दल के युवकों ने देखा उसके बाद उसे अपने पास रखकर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस पहुंची और दोनों बच्चों को बरामद कर लिया। बच्चों के साथ पकड़े गए आरोपियों से रामगढ़ एसपी पूछताछ कर रहे हैं। बता दें कि रांची के जगन्नाथपुर मौसीबाड़ी खटाल से दो जनवरी को अंश और अंशिका लापता हुए थे। दोनों बच्चे की तलाश में रांची पुलिस की टीम दिल्ली, मुंबई, बंगाल, बिहार और यूपी के इलाके में लगातार छापेमारी कर रही थी। क्या बोले सीएम सोरेन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अपहरणकर्ताओं के चंगुल से दो मासूम बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराना बेहद राहत भरा और सराहनीय कार्य है। पिछले कुछ दिन व्यक्तिगत रूप से काफी परेशान करने वाले रहे, लेकिन अंततः पुलिस को सफलता मिली। दूसरे राज्य में हुई समान घटनाओं के तार जोड़कर रांची पुलिस ने अपराधियों तक पहुंच बनाई। रांची पुलिस व झारखंड पुलिस की टीम को बधाई और अंश और अंशिका के परिवार को शुभकामनाएं। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने टीम को ‘डीजी डिस्क’ देने की घोषणा की झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने रांची पुलिस को इस बड़ी कामयाबी के लिए बधाई दी है। एडीजी मनोज कौशिक के नेतृत्व में गठित रांची पुलिस की विशेष टीम ने अपहरण किए गए दोनों बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया है। डीजीपी ने कहा कि इस सफलता के पीछे पुलिस टीम की कड़ी मेहनत और ठोस रणनीति रही है। बच्चों की तलाश के लिए पुलिस ने सघन अभियान चलाते हुए ऑटो, ट्रेन और निजी वाहनों सहित सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर लगाए थे। साथ ही, अपराधियों की सूचना देने पर दो-दो लाख रुपये के इनाम की भी घोषणा की गई थी। डीजीपी ने बताया कि मीडिया में हुए व्यापक प्रचार-प्रसार और पुलिस की सक्रियता के कारण अपराधियों पर भारी दबाव बन गया था। इसी वजह से वे बच्चों को लेकर झारखंड से बाहर भागने में असफल रहे और अंततः पुलिस ने उन्हें रामगढ़ से बरामद कर लिया। इस सराहनीय कार्य के लिए ऑपरेशन में शामिल पूरी टीम को ‘डीजी डिस्क’ से सम्मानित किया जाएगा। मामले का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि इस अपहरण के पीछे मानव तस्करी में शामिल एक बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय था। पुलिस ने इस मामले में अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है, जो झारखंड के बाहर के रहने वाले हैं। फिलहाल पकड़े गए आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है ताकि इस गिरोह के पूरे नेटवर्क और इनके संपर्कों का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके।

बिहार के 10 शहरों की हवा हुई सबसे जहरीली

पटना. बिहार के छोटे शहरों में हवा लगातार खराब रह रही है। राज्य के 10 शहरों की हवा में पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 की मात्रा बढ़ी रहती है। जिन छोटे शहरों की हवा ज्यादा जहरीली है, उनमें आरा, हाजीपुर, कटिहार, मोतिहारी, अररिया, बेगूसराय, बेतिया, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर और बक्सर शामिल है। आरा और हाजीपुर का राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से अधिक रहा। इस बीच पटना में हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। खुले नाले से निकलने वाले अमोनिया गैस भी हवा में पीएम 2.5 बना रही है। इससे वायु प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। छोटे शहरों में भी वायु प्रदूषण को बढ़ाने में खुले नालों की महत्वपूर्ण भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। आईआईटी बीएचयू के अध्ययन के अनुसार खुले नाले से अमोनिया गैस निकल रही है। यह वाहनों से निकलने वाले सल्फर डाईऑक्साइड(एसओ2) से मिलकर पीएम 2.5 बन रहा है। पीएम2.5 यानी महीन धूलकण। दोनों गैस के आपस में मिलने से महीन कण बन रहे हैं। इसके कारण पीएम2.5 की मात्रा लगातार बढ़ी हुई पायी जा रही है। पटना के वायु प्रदूषण में कमी जरूर आयी है, लेकिन पीएम2.5 अक्सर बढ़ा हुआ रहता है। ऐसी ही स्थिति सूबे के अन्य छोटे शहरों की भी है। खुले नालों को बंद करना होगा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डॉ. डीके शुक्ला ने बताया कि अध्ययन की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि पटना के खुले नाले से निकल रही अमोनिया गैस से भी पीएम 2.5 बढ़ रहा है। अभी अंतिम रिपोर्ट आनी बाकी है। शहरों के खुले नालों को बंद करने से ही पीएम2.5 में कमी आएगी। हालांकि कई खुले नालों को बंद किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद इस संबंध में कार्ययोजना बनाकर सरकार को भेजा जाएगी। खुले नाले में आर्गेनिक मेटेरियल होते हैं। गंदगी और कचरा के कारण अमोनिया गैस निकलती है। शहर के वायु में पहले से ही वाहनों से निकलने वाले सल्फरडाई ऑक्साइड मौजूद रहता है। दोनों के मिलने से भी पीएम2.5 बन रहा है। धूप निकलने पर अमोनिया हवा में प्रवेश कर जाता है। अंतिम रिपोर्ट आने में अभी दो महीने और लगेंगे बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने आईआईटी बीएचयू को पटना में वायु प्रदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए अध्ययन करने को लेकर समझौता किया था। अध्ययन के लिए एक साल का समय निर्धारित था, जो अब पूरा हो चुका है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने में अभी दो महीने का समय और लगेगा। आईआईटी बीएचयू की टीम ने पटना के खुले नाले का सैंपल लेकर उसकी जांच की थी। अभी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि खुले नाले से निकलने वाली अमोनिया गैस के कारण भी वायु में पीएम2.5 की मात्रा बढ़ रही है।

पटना एम्स में बन रहा बिहार का पहला स्किन बैंक

पटना. अब जले हुए मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी. पटना एम्स में बनने जा रहा नया भवन बिहार में बर्न ट्रीटमेंट की तस्वीर बदलने वाला है. मार्च 2026 से एम्स पटना में अत्याधुनिक बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग का नया भवन पूरी तरह चालू हो जाएगा. नया भवन पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित होगा. इसमें कुल 50 बेड की व्यवस्था की गई है, जिसमें 12 आईसीयू बेड शामिल होंगे. मरीजों के ऑपरेशन के लिए मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं. इसके अलावा स्किन बैंक, डरमाटोम मशीन, हाइड्रोथेरेपी टब जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी होंगी, जो अब तक राज्य के किसी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं. बिना हाथ लगाए होगी जख्मों की सफाई इस केंद्र की सबसे खास बात हाइड्रोथेरेपी टब है, जिससे मरीजों के जख्मों की सफाई बिना हाथ लगाए की जा सकेगी. इससे संक्रमण का खतरा कम होगा और मरीज को कम दर्द का सामना करना पड़ेगा. माइक्रोस्कोप की मदद से सर्जरी की जाएगी, जिससे सटीक और सुरक्षित ऑपरेशन संभव होगा. कॉस्मेटिक सर्जरी की भी मिलेगी सुविधा यह केंद्र सिर्फ बर्न मरीजों तक सीमित नहीं रहेगा. यहां कॉस्मेटिक सर्जरी और अन्य तरह की प्लास्टिक सर्जरी की सुविधा भी मिलेगी. माइक्रोवस्कुलर सर्जरी, एंडोस्कोपिक सर्जरी और लेजर सेवाएं भी यहां उपलब्ध कराई जाएंगी. इससे बिहार के मरीजों को इलाज के लिए बाहर के बड़े शहरों में जाने की मजबूरी नहीं रहेगी. भवन में इलाज के साथ-साथ मरीजों की संपूर्ण देखभाल की भी व्यवस्था होगी. यहां नर्सिंग स्टाफ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, तकनीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, सोशल वर्कर, हैंड थेरेपी विशेषज्ञ और डाइटिशियन की तैनाती की जाएगी. इसका उद्देश्य सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि मरीजों को शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ करना है. मार्च से शुरू होने की उम्मीद बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा सिंह के अनुसार भवन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. जिन मशीनों का ऑर्डर दिया गया है, उनकी आपूर्ति जल्द हो जाएगी. उम्मीद है कि मार्च महीने से मरीजों को यहां आधुनिक और समर्पित इलाज की सुविधा मिलने लगेगी.

मुजफ्फरपुर के नए निगम आयुक्त ऋतुराज ने स्वच्छ गंगा मिशन और एआइ से निगरानी को बताया प्राथमिकता

मुजफ्फरपुर. ऋतुराज प्रताप सिंह ने नगर आयुक्त का पदभार संभाल लिया। उपनगर आयुक्त अमीत कुमार ने उनको प्रभार सौंपा। पदभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि शहर का स्वच्छ, स्वस्थ एवं सुंदर बनाना उनका लक्ष्य होगा। शहर की विकास योजनाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को संज्ञान में लेकर तत्काल दूर किया जाएगा। पदभार संभालने के बाद महापौर निर्मला देवी से औपचारिक मुलाकात की। महापौर ने भी बुके देकर उनका स्वागत किया। वहीं, एक दर्जन पार्षदों ने भी नगर आयुक्त को बुके देकर स्वागत किया। इसके बाद नगर आयुक्त ने कार्यालय के सभी शाखा का निरीक्षण किया और कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया। बताते चलें कि विक्रम विरकर के तबादले के बाद एक माह तक नगर आयुक्त का पद खाली था। निगम कार्यालय से निकलने के बाद नगर आयुक्त ने कंपनीबाग स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर पहुंच मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी कंपनी के प्रबंध निदेशक का कार्यभार भी संभाला। उन्होंने कमांड सेंटर का निरीक्षण किया। नए नगर आयुक्त के सामने होंगी कई चुनौतियां पदभार संभालने के बाद नए नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह के सामने कई चुनौतियां होंगी। सबसे बड़ी चुनाैती नगर निगम बोर्ड एवं सशक्त स्थायी समिति की बैठकों में लिए गए लंबे समय से लंबित निर्णयों के अनुपालन की होगी। उनके सामने नगर निगम आडिटोरियम के विकास के लिए 13.67 करोड़ एवं घिरनी पोखर के विकास के लिए 2.62 करोड़ रुपये की योजना को जमीन पर उतारने की होगी। पूर्व नगर आयुक्त ने शहरवासियों को नये साल पर एआइ आधारित स्मार्ट निगरानी व्यवस्था देने की घोषणा की थी जिसे पूरा करने की कवायद करनी होगी। मुजफ्फरपुर में स्वच्छता सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए 3.86 करोड़ रुपये से शौचालय का निर्माण कार्य में पूरा करना होगा। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन-2 के अंतर्गत 77.40 करोड़ रुपये से फरदो नाला के पानी का उपचार कर व्यवसायिक उपयोग के लिए किए जा रहे प्रयास को पूरा कराना होगा। शहरवासियों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन की दिशा में 50 टन प्रतिदिन क्षमता वाले मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी के निर्माण की कवायद करनी होगी। स्मार्ट सिटी की बची योजनाओं को तेजी से पूरा कराने के लिए उनको प्रयास करना होगा। सिटीज-2.0 योजना को जमीन उतारने की बड़ी चुनौती उनके सामने होगी।

राजधानी पटना होगी तारों से मुक्त, अंडरग्राउंड पावर सप्लाई को मिली हरी झंडी

पटना बिहार की राजधानी पटना के लोगों को बिजली के खंभों एवं तारों के जाल से मुक्ति मिलने वाली है। शहर में अब बिजली की सप्लाई अंडरग्राउंड होगी। इसके लिए जमीन के अंदर केबल बिछाई जाएगी। नीतीश कैबिनेट से इस परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। बैठक में कुल 41 एजेंडे पारित हुए।   जानकारी के अनुसार, पटना शहर में अंडरग्राउंड केबलिंग के जरिए घरों में बिजली आपूर्ति की परियोजना का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत किया गया। इस परियोजना पर कुल 653 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। परियोजना के तहत पटना इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग (पेसू) के अंतर्गत 13 प्रमंडलों में भूमिगत केबलिंग के जरिए बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस परियोजना पर 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार द्वारा खर्च की जाएगी। जबकि शेष 40 फीसदी बजट बिहार सरकार खर्च करेगी। क्या होती है अंडरग्राउंड केबलिंग? अभी पटना में बिजली की सप्लाई खंभों पर लटके तारों से होती है। नई परियोजना में जमीन के अंदर भूमिगत केबल बिछाई जाएगी, जिससे विद्युत आपूर्ति की जाएगी। इससे आंधी-तूफान के समय बिजली की कटौती से छुटकारा मिलेगा। साथ ही तंग गलियों और चौक-चौराहों पर तार हवा में लटके रहने से हादसों का जोखिम भी कम होगा। इससे शहर की सौंदर्यता बढ़ेगी और बिजली चोरी से विद्युत विभाग को होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी।

जमीन रजिस्ट्री में बड़ा बदलाव: अब घर से ही पूरा होगा काम, बुजुर्गों के लिए खास ऐलान

पटना बिहार में अब घर बैठे जमीन की रजिस्ट्री हो जाएगी। नीतीश सरकार बुजुर्गों के लिए नई व्यवस्था लेकर आई है। इसके तहत 80 साल या उससे ज्यादा की उम्र को अपनी जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उन्हें घर पर ही जमीन निबंधन की सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात निश्चय-3 के तहत मंगलवार को यह घोषणा की।   सीएम नीतीश कुमार ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "कई बार ऐसा देखा गया है कि राज्य के वृद्धजनों, जिनकी उम्र 80 वर्ष या उससे ज्यादा है, उन्हें जमीन/ फ्लैट की रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों के निष्पादन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में 80 वर्ष या उससे ज्यादा की उम्र के लोगों के लिए जमीन/ फ्लैट के निबंधन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।" बुजुर्गों को मिलने वाली सुविधाएं-     घर बैठे जमीन निबंधन की सभी सेवाएं     मद्य निषेध, उत्पाद निबंधन विभाग की मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट के जरिए दस्तावेजों के निश्चित समय-सीमा के अंदर रजिस्ट्रेशन की सुविधा     आवेदन ऑनलाइन करना होगा     7 दिन के अंदर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी 1 अप्रैल से लागू होगी नई व्यवस्था, जमीन की अपडेटेड जानकारी भी मिलेगी बुजुर्गों को घर बैठे जमीन रजिस्ट्री की सुविधा 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। सीएम ने कहा, "अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जमीन खरीदने के इच्छुक व्यक्ति को संबंधित भूमि की अपडेटेड जानकारी उपलब्ध नहीं होती है, जिस कारण उन्हें समस्या होती है। इसे ध्यान में रखते हुए क्रेता और विक्रेता को जमीन की अपडेटेड जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। सीएम ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत आवेदकों के अनुरोध पर आवेदन करने के बाद निबंधन विभाग द्वारा अंचल कार्यालय से भूमि की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त कर क्रेता को उपलब्ध करा दी जाएगी। इससे आवेदकों को काफी सुविधा होगी और उन्हें जमीन के बारे में सही जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।  

लालू के ‘लाल’ को NDA का न्योता! विजय सिन्हा के भोज में दिखे तेज प्रताप यादव

पटना मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार की सियासत गर्माई हुई है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के पटना स्थित आवास पर मंगलवार को आयोजित दही-चूड़ा भोज में सियासी जमावड़ा देखने को मिला। पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी सिन्हा के भोज में पहुंचे, जो राजनीतिक गलियारे में चर्चा का केंद्र रहा। वहीं, तेज प्रताप को एनडीए से न्योता भी मिलने लगा है। नीतीश सरकार के दो मंत्रियों ने इस मौके पर कहा कि अगर वे एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है।   डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। इसमें सूबे के कई नेताओं को न्योता दिया गया था। सिन्हा के भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत अन्य मंत्री, विधायक समेत कई नेता एवं कार्यकर्ता पहुंचे। हालांकि, इसमें चर्चा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप की रही। क्या बोले विजय सिन्हा और तेज प्रताप पत्रकारों से बातचीत में विजय सिन्हा ने कहा कि ‘एक बिहारी सब पर भारी’ का भाव जगाना है। तेज प्रताप की एनडीए में एंट्री के सवाल पर उन्होंने कहा कि आने वाले भविष्य में पता चल जाएगा। वहीं, जेजेडी चीफ ने भी इस पर कहा, “पता चल जाएगा, अभी क्यों बताना है।” तेज प्रताप ने कहा कि दही-चूड़ा भोज का आमंत्रण दिया गया था। हम अपना धर्म निभाने आए हैं। नेता लोग मिलते जुलते रहते हैं राजनीति अलग है। तेज प्रताप को एनडीए में आने का न्योता? रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतीश सरकार में मंत्री एवं हम सुप्रीमो जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने कहा कि तेज प्रताप यादव एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है। हालांकि, यह उनकी मर्जी के ऊपर निर्भर करता है। मंत्री रामकृपाल यादव ने भी तेज प्रताप के एनडीए में आने पर उनका स्वागत करने की बात कही। दरअसल, लालू परिवार और आरजेडी से बेदखल होने के बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई थी। उन्होंने हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर प्रत्याशी भी उतारे। हालांकि, जेजेडी एक भी सीट नहीं जीत पाई। चुनाव के बाद तेज प्रताप ने नीतीश सरकार को अपना नैतिक समर्थन दे दिया। इसके बाद से उनकी एनडीए नेताओं से नजदीकी की चर्चा चलती रही है। अब तेज प्रताप के भोज पर निगाहें तेज प्रताप यादव ने भी बुधवार को दही-चूड़ा भोज रखा है। पिछले दिनों वे विजय सिन्हा को निमंत्रण देने उनके आवास पर भी पहुंचे थे। उन्होंने एनडीए और महागठबंधन के कई नेताओं को दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया है। उनके यहां कौन-कौन नेता पहुंचते हैं। ऐसे में सबकी निगाहें उनके भोज पर टिक गई हैं।  

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 19 को सीतामढ़ी आएँगे

सीतामढ़ी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 19 जनवरी को जिले में प्रस्तावित समृद्धि यात्रा को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने अभी तैयारी से शुरू कर दी है। इस कड़ी में पुलिस अधीक्षक अमित रंजन ने जिले में सुरक्षा बलों की कमी को ध्यान में रखते हुए पुलिस विभाग में सभी प्रकार की स्वीकृत छुट्टियों को तत्काल प्रभाव से रद कर दिया गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान विधि-व्यवस्था संधारण को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया गया है। सभी पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को मुख्यालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। हालांकि विशेष परिस्थिति या अत्यावश्यक कारणों में सक्षम पदाधिकारी की अनुमति से ही छुट्टी प्रदान की जाएगी। इस निर्णय के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। वहीं आवश्यक सुरक्षा तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यहां बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के क्रम में 19 जनवरी को सीतामढ़ी जिले में आएंगे। इस दौरान सीतामढ़ी के अलावा वे बेलसंड भी जाएंगे। वहां बागमती नदी पर मीनापुर-बेलसंड पथ में चंदौली घाट पर उच्चस्तरीय आरसीसी पुल का उद्घाटन के साथ बागमती नदी के बायें तटबंध के किलोमीटर 7.27 से 81.19 तक उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण, सुरक्षात्मक व कालीकरण का निरीक्षण भी करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री Nitish Kumar हितनारायण उच्चविद्यालय चंदौली बेलसंड में जिले में चल रही महत्वपूर्ण परियोजनाओं का कार्यारंभ, उदघाटन व विभिन्न विभागों की ओर से तैयार किए गए स्टाल का निरीक्षण करेंगे तथा विभिन्न लाभुक समूहों से संवाद कर विकास की जमीनी हकीकत से भी रू-ब-रू होंगे। तत्पश्चात इनसभी से प्राप्त फीडबैक के आधार पर शाम में समाहरणालय स्थित परिचर्चा भवन में अधिकारियों के साथ बैठक कर इसकी समीक्षा भी करेंगे।  डीएम ने किया हास्कूल परिसर का निरीक्षण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के क्रम में आगामी 19 जनवरी को सीतामढ़ी आएंगे। इसे लेकर पूरा प्रशासनिक महकमा तैयारियों में जुट गया है। डीएम रिची पांडेय पूरी प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ सोमवार को बेलसंड पहुंचे। यहां नवनिर्मित बागमती नदी पुल का निरीक्षण करते हुए कहा अधिकारियों को कई निर्देश दिए। मुख्यमंत्री यहां विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास व उदघाटन करेंगे। नवनिर्मित बागमती नदी पर मीनापुर-बेलसंड पथ में चंदौली घाट पर उच्चस्तरीय आरसीसी पुल के उदघाटन को लेकर पूरी तैयारी की जा रही है। डीएम पूरी टीम के साथ हितनारायण उच्चविद्यालय चंदौली का निरीक्षण करते हुए विकासात्मक स्टाल के लिए स्थानों को चयन करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए। वहीं जीविका दीदियों का स्टालों को निर्धारण व सुरक्षा को व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया। होर्डिंग व पोस्टर लगाने के लिए स्थल का निर्धारण विभागीय एवं सरकार प्रायोजित कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित होर्डिंग व पोस्टर लगाने का निर्देश जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी कमल कुमार सिंह हो दिया। डीएम ने निर्देश देते हुए कहा कि हर हाल में निर्धारित समय से पहले तैयारियां संबंधी सभी कार्य पूर्ण करा लें। इस दौरान हाई स्कूल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था व मुख्यमंत्री के आवागमन संबंधी मार्ग को दुरुस्त करने के निर्देश दिया गया। जीविका दीदियों से लेंगे फीडबैक मुख्यमंत्री अपने समृिद्ध यात्रा के दौरान जीविका दीदियों से फीडबैक लेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री से जीविका दीदियों के लिए संभावित संवाद कार्यक्रम की भी तैयारियां की जा रही हैं। वहीं, जीविका डीपीएम को इसके लिए आवश्यक तैयारियों करने का निर्देश दिया गया है। मौके पर अपर समाहर्ता संजीव कुमार, डीडीसी संदीप कुमार, डीपीआरओ कमल कुमार सिंह, एसडीओ सदर आनंद कुमार के अलावा कई पदाधिकारी आदि मौजूद रहे।

रांची नगर निगम 6 साल बाद भी पाइप लाइन से नहीं कर पाया पानी और गैस की सप्लाई

रांची. रांची नगर निगम के अंतर्गत वार्ड नंबर 51 देवीनगर हेसाग हटिया में जल संकट को लेकर आयोजित जागरण आपके द्वार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान वार्डवासियों ने एक स्वर में वर्षों से लंबित बुनियादी सुविधाओं को लेकर नाराजगी जताई और प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर सवाल उठाए। स्थानीय लोगों ने बताया कि हेसाग क्षेत्र में करीब छह साल पहले पेयजल आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन आजतक नल में एक बूंद पानी नहीं पहुंचा। पानी की यह समस्या सालों से बनी हुई है, लेकिन गर्मी के मौसम में यह विकराल रूप ले लेती है। लोगों को मजबूरी में कुएं और बोरिंग पर निर्भर रहना पड़ता है। कई परिवारों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज के इलाकों तक जाना पड़ता है। गर्मी के दिनों में प्रशासन द्वारा टैंकर के माध्यम से पानी आपूर्ति करने का दावा किया जाता है, लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी साबित होती है। टैंकर से मिलने वाला पानी जरूरत के हिसाब से बेहद कम होता है, जिससे अक्सर लोगों के बीच विवाद की स्थिति भी बन जाती है। महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। गैस पाइपलाइन बिछा, लेकिन कनेक्शन का सालों से इंतजार पेयजल के साथ-साथ गैस पाइपलाइन का मुद्दा भी लोगों के गुस्से की बड़ी वजह है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाके में गैस पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन अब तक गैस कनेक्शन चालू नहीं किया गया। आज भी लोग गैस कनेक्शन का इंतजार कर रहें है। आज भी लोग रसोई गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। कई बार पूरा दिन सिलेंडर के इंतजार में निकल जाता है। वार्ड में बुनियादी ढांचे की हालत भी बेहद खराब है। कई गलियों में सड़कें टूटी हुई हैं, बरसात में कीचड़ और गर्मी में धूल से लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है। नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने से गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे रात में अंधेरा छाया रहता है और असामाजिक तत्वों का डर बना रहता है। इसके अलावा बिजली के जर्जर खंभे और झूलते तार किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। डोर-टू-डोर कचरा उठाव की व्यवस्था भी नियमित नहीं है, जिससे जगह-जगह कचरे का ढेर लगा रहता है और बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। वृद्धा पेंशन व विधवा पेंशन दोंनों ही बनना बंद सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं में भी वार्ड पिछड़ा हुआ है। पिछले कई वर्षों से वार्ड की कई महिलाओं का वृद्धा पेंशन और विधवा पेंशन कार्ड नहीं बन पाया है। बार-बार आवेदन देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिससे गरीब और जरूरतमंद महिलाएं आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि निकाय चुनाव नहीं होने के कारण वार्ड की समस्याओं को उठाने और समाधान कराने वाला कोई जनप्रतिनिधि नहीं है। अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं होता।     छह साल से पानी की पाइपलाइन पड़ी है, लेकिन आज तक नल से पानी नहीं आया। गर्मी में हालत बद से बदतर हो जाती है। प्रशासन सिर्फ कागजों पर काम दिखा रहा है। -पूजा देवी     गैस पाइपलाइन बिछने के बाद भी कनेक्शन नहीं मिला। आज भी सिलेंडर के लिए लाइन में लगना पड़ता है। महिलाओं का समय और मेहनत दोनों बर्बाद हो रहा है। – रीना गुप्ता     टैंकर से पानी मिलता है, लेकिन वह बहुत कम होता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए पानी जुटाना सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। लोग पाइपलाइन सेवा शुरू करने की मांग कर रहें है। – सीता शर्मा     सड़क और नाली की हालत खराब है। बरसात में घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। शिकायत करने पर कोई सुनने वाला नहीं है। मुख्य सड़क पर वर्षेा से स्ट्रीट लाइट खराब है। -सुनील गुप्ता     स्ट्रीट लाइट खराब रहने से रात में डर लगा रहता है। महिलाएं और बच्चियां बाहर निकलने से डरती हैं। शिकायत करने पर भी कोई सुनने वाला नहीं है। लोग सिर्फ टैक्स भर रहें है। – रामचंद्र शर्मा     बिजली के झूलते तार कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं, लेकिन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। कई नए मोहल्ले में बिजली के खंभे नही है। आवेदन के बाद भी खंभा नहीं लग रहा है। – मुन्नी देवी     डोर-टू-डोर कचरा उठाव सही से नहीं होता। गंदगी की वजह से बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। स्मार्ट सिटी में चौ-चौराहों पर कचरे फेंकने को मजबूर है। सुनने वाला मौन है। – प्रीति देवी     गरीबों की कोई सुनवाई नहीं है। लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द जलापूर्ति, गैस कनेक्शन और अन्य बुनियादी सुविधाएं बहाल करने की मांग करती हूं। ताकि वार्डवासियों को राहत मिल सके। -साधु कुमार

रांची विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में परिचय पत्र न बनने से अभी और होगी देरी

रांची. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में वोटर लिस्टर तैयार होने के बावजूद छात्र संघ चुनाव 2025-26 में देरी होगी। इसका कारण यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के परिचय पत्र नहीं बनवा सका। परिचय पत्र बनवाने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। कई एजेंसियों से कोटेशन मांगे गए। जिसमें एक एजेंसी ने सबसे कम 82 रुपये प्रति आईकार्ड बनाने का प्रस्ताव दिया। मगर विवि के वित्त विभाग ने आईकार्ड के लिए पैसा नहीं दिया। पैसे के अभाव में विवि प्रशासन आईकार्ड नहीं बनवा सका। आईकार्ड नहीं बनने की वजह से चुनावी प्रक्रिया अधर में लटक गई है। जबकि स्टूडेंट इलेक्शन फीस के नाम पर प्रति छात्र 70 रुपये और स्टूडेंट यूनियन फीस के नाम पर प्रति छात्र 30 रुपये छात्रों से वसूले गए है। डीएसपीएमयू में करीब 14,000 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इनसे गत सात साल में करीब 98 लाख रुपये वसूले गए हैं। डीएसपीएमयू प्रशासन छात्रों से राशि वसूलने के बाद भी समय पर आईकार्ड नहीं बनवा सका। जबकि विवि प्रशासन द्वारा छात्र संघ चुनाव को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। वोटर लिस्ट (इलेक्ट्रोल रोल) तैयार कर लिया गया है, जिसमें यूजी- पीजी और बीएड कोर्स के वोटर शामिल हैं। वोटर लिस्ट एप्रूवल के लिए सभी विभागों को भेजा गया। सबकुछ समय पर चल रहा था, मगर आईकार्ड नहीं बनने की वजह से चुनाव में विलंब होगा। वर्ष 2019 में 8,706 छात्रों ने जिन 5 पदों के लिए मतदान किया था, वही चुनाव अब 2025-26 में 16,774 मतदाताओं के साथ दोबारा होना है। इस बार मतदाताओं की संख्या दोगुनी हो चुकी है। ऐसे में इस बार का चुनाव सिर्फ छात्र प्रतिनिधियों के चयन का माध्यम नहीं, बल्कि यह विश्वविद्यालय की प्रशासनिक क्षमता, शैक्षणिक व्यवस्था और छात्र राजनीति की दिशा पर सीधा जनमत बन चुका है। छात्राओं के हाथ में जीत-हार डीएसपीएमयू में कुल मतदाताओं में 8,454 छात्राएं (50.4%) और 8,320 छात्र (49.6%) हैं। डीएसपीएमयू छात्र संघ चुनाव के इतिहास में यह पहला मौका है, जब छात्राएं निर्णायक बहुमत में हैं। यानी छात्र संघ की सत्ता की चाबी छात्राओं के हाथ में है। उनकी संख्या 50 प्रतिशत से अधिक होने के कारण उनकी सुरक्षा सहित अन्य मुद्दे छाए रहेंगे। इसमें गर्ल्स हास्टल, सुरक्षा, समय पर परीक्षा व रिजल्ट, क्वालिटी एजुकेशन, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहेगा। ओबीसी कैटेगरी का सबसे अधिक वोट है। इसी प्रकार यूजी छात्रों का दबदबा पहले से ज्यादा है। पांच पद के लिए होगा मतदान छात्र संघ चुनाव लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार होगा। कुल पांच पदों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और उप सचिव के पद के लिए मतदान होगा। चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराया जाएगा।