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कोडीनयुक्त कफ सिरप से कमाई और हवाला का आरोप, दुबई तक फैले नेटवर्क पर 38 हजार पन्नों की चार्जशीट

लखनऊ उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की कमाई से बढ़ा कारोबार दुबई और अन्य देशों तक पहुंचा है। कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार की जांच में अब सप्लाई नेटवर्क से लेकर रकम के कथित हवाला हस्तांतरण और दुबई में निवेश तक के साक्ष्य मिले है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ की जांच से जुड़े इनपुट के अनुसार, मामले के आरोपित शुभम जायसवाल ने अपने पिता के नाम पर झारखंड में शैली ट्रेड्स फर्म बनाई थी। तीन अलग-अलग फर्मों के जरिए कई स्तरों पर बिलिंग कराता था और इसी व्यवस्था के माध्यम से कारोबार का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। 500 करोड़ रुपये के दुबई में होटल कारोबार की जानकारी जांच में करीब 500 करोड़ रुपये के दुबई में होटल कारोबार की जानकारी भी सामने आई है। आरोप है कि कफ सिरप के कारोबार से अर्जित रकम का एक हिस्सा हवाला के जरिये दुबई पहुंचाया गया, जहां शुभम अपने मौसेरे भाई गौरव जायसवाल के साथ होटल कारोबार कर रहा है। इस रकम के स्रोत और निवेश से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के दस्तावेजों के आधार पर महत्वपूर्ण होगी। 38 हजार पन्नों की चौथी चार्जशीट एसटीएफ ने इस मामले में करीब 38 हजार पन्नों की चौथी चार्जशीट लखनऊ एनडीपीएस, न्यायालय में दाखिल की है। इसमें शुभम जायसवाल, उसके मौसेरे भाई गौरव जायसवाल, विकास सिंह नर्वे और अमित जायसवाल को आरोपित किया गया है। चार्जशीट में लेनदेन, बिलिंग और वर्क ऑर्डर से जुड़े दस्तावेज शामिल किए जाने की जानकारी है। 14 आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट इससे पहले दाखिल आरोपपत्रों के साथ अब तक 14 आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किए जाने की बात सामने आई है। एसटीएफ की जांच में वाराणसी, चंदौली, सोनभद्र और गाजियाबाद समेत कई जिलों में शैली ट्रेड्स के माध्यम से बिलिंग किए जाने की कड़ियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित फर्मों के जरिए खरीदे और बेचे गए सिरप की वास्तविक सप्लाई कहां हुई और रकम का लेनदेन किन खातों के माध्यम से किया गया। कोडीनयुक्त सिरप की सप्लाई नेपाल व बांग्लादेश की सीमा पार एसटीएफ जांच में कोडीनयुक्त कफ सिरप की सप्लाई नेपाल और बांग्लादेश की सीमा पार किये जाने की पुष्टी हुई हैं। इस पहलू में यह पता लगाना अहम है कि माल किन खरीदारों तक पहुंचा और सीमा पार नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका थी। कोडीनयुक्त कफ सिरप का नशे के लिए दुरुपयोग किए जाने की आशंका के बीच एसटीएफ बिलिंग और सप्लाई के दस्तावेजों का मिलान कर रही है। अवैध कारोबार करीब दो वर्ष से चल रहा जांच में यह भी आरोप है कि संबंधित अवैध कारोबार करीब दो वर्ष से चल रहा था। दिसंबर 2024 के अंतिम दिनों में जांच एजेंसी की ओर से नोटिस भेजे जाने के बाद कारोबार रोकने और जनवरी-मार्च 2025 में बचे हुए माल को फिर बेचने की कोशिश किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच और गिरफ्तारियों का दायरा बढ़ने पर शुभम और गौरव भारत छोड़कर दुबई भाग गया। अब दुबई में होटल कारोबार, निवेश के स्रोत और भारत में संचालित फर्मों के साथ संभावित वित्तीय संबंधों की पुष्टि हुई है। बैंक खातों और सप्लाई रूट की पड़ताल कर साक्ष्य जुटाए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन और एसटीएफ ने पिछले वर्ष इस सिंडिकेट का खुलासा किया था। जांच में सामने आया कि गिरोह एबॉट कंपनी से कफ सिरप की खेप खरीदकर विभिन्न राज्यों में बेचता था और इसकी आपूर्ति नेपाल व बांग्लादेश तक करता था। एसटीएफ ने नेटवर्क, बैंक खातों और सप्लाई रूट की पड़ताल कर साक्ष्य जुटाए हैं। जांच के मुताबिक, अवैध कारोबार से कई सौ करोड़ रुपये की कमाई की गई। चार्जशीट में शुभम व गौरव के अलावा अमित जायसवाल और विकास सिंह नर्वे को भी आरोपी बनाया गया है।  

हिमांशु भाऊ गैंग पर STF का शिकंजा, हरियाणा में तीन बदमाश अरेस्ट

चरखी दादरी. एसटीएफ ने इमलोटा गांव के पास कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर हिमांशु उर्फ भाऊ के तीन गुर्गों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से तीन पिस्तौल और कुल 50 कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस द्वारा की गई शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि आरोपित इन हथियारों का इस्तेमाल झज्जर जिले के बेरी नगर पालिका चेयरमैन बिल्लू की हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए करने वाले थे। चरखी दादरी सदर थाना पुलिस ने तीनों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक अक्टूबर की रात एसटीएफ की टीम वांछित अपराधियों की तलाश में इमलोटा बस अड्डे पर मौजूद थी। इसी दौरान टीम को गुप्त सूचना मिली कि गैंगस्टर हिमांशु उर्फ भाऊ, जो विदेश में बैठकर अपनी गैंग के लिए हत्या व फिरौती जैसी वारदातें करवाता है। झज्जर का रहने वाला है नीरज उसने अपने साथियों को हथियार उपलब्ध करवाए हैं। सूचना के आधार पर टीम ने इमलोटा से मोरवाला जाने वाली सड़क पर रेड की। इस दौरान मौके पर तीन युवक एक प्लसर मोटरसाइकिल के साथ खड़े मिले। पुलिस ने उन्हें काबू कर पूछताछ की तो उनकी पहचान झज्जर जिले के दुबलधन निवासी रोहित उर्फ बासिया, नितिन और झज्जर जिले के ही कोट निवासी नीरज के रूप में हुई। पुलिस ने उक्त युवकों की तलाशी ली तो रोहित उर्फ बासिया के कब्जे से माल्होत्रा संस ईगल लिखा पिस्तौल बरामद हुआ। इसकी मैगजीन में 10 कारतूस और अलग से एक मैगजीन में 10 कारतूस मिले। नितिन से जिगाना पीएक्स-9 लिखा पिस्तौल बरामद हुआ। उसकी मैगजीन में 10 कारतूस और जेब से 12 कारतूस मिले। वहीं नीरज से क्यूगिर रोमानिया लिखा पिस्तौल बरामद हुआ, जिसकी मैगजीन में आठ कारतूस मिले। तीनों आरोपित हथियारों के संबंध में कोई लाइसेंस या परमिट पेश नहीं कर सके। पुलिस ने हथियारों सहित उन्हें काबू कर आगामी कार्रवाई शुरू की है। मोबाइल फोन भी कब्जे में लिया पुलिस ने रोहित के कब्जे से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया। इस मोबाइल में स्नैपचैट एप पर एक आइडी से बातचीत होना पाया गया। इस संबंध में भी जांच की जा रही है। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में तीनों आरोपितों ने कथित तौर पर हिमांशु उर्फ भाऊ के गैंग से जुड़े होने और उसके कहने पर हथियार अपने पास रखने की बात कही है। वहीं, ये भी सामने आया है कि हथियार बेरी में बिल्लू चेयरमैन की हत्या के लिए भेजे गए थे।

फर्जी पासपोर्ट कांड में STF का बड़ा एक्शन, 12 अफसरों पर शक; मास्टरमाइंड रियाल के अलग-अलग शहरों से 4 पासपोर्ट

 ग्वालियर प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार करने वाले अंतरराज्यीय रैकेट के खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में भोपाल, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल के 12 पुलिस अधिकारियों व अन्य विभागों के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जो अब STF की रडार पर हैं। साल 2021 में बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनाने का यह खेल ग्वालियर के डबरा से शुरू हुआ था। 17 फर्जी पासपोर्ट्स पर एक ही गवाह, एक ही पता और एक ही मोबाइल नंबर होने के बावजूद पुलिस को भनक तक नहीं लगी, जिससे पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उस समय ग्वालियर डबरा थाना प्रभारी के रूप में विनायक शुक्ला व थाना पर पासपोर्ट वैरीफिकेशन सेल का इंचार्ज प्रधान आरक्षक भूपेन्द्र गुर्जर हुआ करता था। इन दोनों से एसटीएफ जल्द तलब कर पूछताछ करेगी। विदेश मंत्रालय ने 3 साल पहले (2023 में) PHQ को चेताया था रैकेट की पैठ भोपाल से डबरा तक फैली हुई थी। विदेश मंत्रालय ने 2023 में ही मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) को रिपोर्ट भेजकर फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने के प्रति आगाह किया था। इसके बाद भी पीएचक्यू से कोई ठोस संदेश जारी नहीं किया गया। जिसका नतीजा यह रहा कि आज इन 70 बांग्लादेशियों के फर्जी दस्तावेज व पासपोर्ट ने पूरे देश की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। 100 के पार पहुंच सकती है संख्या प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट की संख्या 100 के पार जाने की आशंका है। क्योंकि एसटीएफ को कुछ और भी संदिग्ध पासपोर्ट मिलने की उम्मीद है। साथ ही साल 2021-22 और उसके बाद के दो साल में डबरा सहित इन शहरों से जितने पासपोर्ट बने हैं उनमें कई संदिग्ध की श्रेणी में आ रहे हैं। एसटीएफ की पांच टीम मध्य प्रदेश के बाहर दबिश दे रही हैं। रैकेट का मुख्य नेटवर्क ग्वालियर और भोपाल में सक्रिय था। भोपाल के गोविंदपुरा के एक ही पते पर 40 फर्जी पासपोर्ट के आवेदन तैयार कर अलग-अलग जिलों के पासपोर्ट सेल में वेरिफिकेशन के लिए भेजे जाते रहे और पासपोर्ट बनते रहे। इसी तरह दूसरा सबसे बड़ा गढ़ ग्वालियर का डबरा रहा था। यहां से एक ही पते पर 17 बांग्लादेशियों के भारतीय दस्तावेज बने और पासपोर्ट तैयार हुए। आवेदन आने से पहले ही थाने में बजती थी घंटी- 'अर्जेंट है, जल्दी निकालो' स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में खुलासा हुआ है कि संदिग्ध पासपोर्ट आवेदन वेरिफिकेशन के लिए डबरा थाने पहुंचने से पहले ही वहां फोन आ जाता था। थाने में कहा जाता था आवेदन अर्जेंट है, इसे जल्दी क्लियर करके निकालो। एक फोन कॉल पर पासपोर्ट आनन-फानन में वैरिफिकेशन कर निकाल दिया जाता था। अब तक यह चार पकड़े गए बांग्लादेशियों के मध्य प्रदेश से फर्जी पासपोर्ट कांड में मास्टर माइंड रियाल चौधरी, जाय चौधरी बरुआ, महाराष्ट्र के उल्लासनगर से पकड़ा गया प्रियान राय और विप्लव अधिकारी को साउथ दिल्ली से पकड़ा था। अब तक यह चार पकड़े गए हैं। जबकि 08 की तलाश में एसटीएफ की अलग-अलग टीम दबिश दे रही हैं। जांच के घेरे में तत्कालीन TI व आरक्षक जिस अवधि (2021) में डबरा से ये फर्जी पासपोर्ट वेरीफाई हुए, उस दौरान विनायक शुक्ला (वर्तमान में दतिया में DSP) डबरा थाना प्रभारी थे, जबकि पासपोर्ट वेरिफिकेशन सेल का जिम्मा प्रधान आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर के पास था। कुछ समय के लिए सुरेंद्र सिंह भी थाना प्रभारी रहे। STF यह पता लगा रही है कि थाने में पहले से फोन कौन करता था और उसे आवेदनों की गुप्त जानकारी कैसे मिलती थी। मास्टरमाइंड रियाल चौधरी के खुद के बने थे 4 फर्जी पासपोर्ट एसटीएफ और पुलिस की पूछताछ में रैकेट के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रियाल चौधरी के खुद के 4 पासपोर्ट बने हैं और चारों में ही फर्जी दस्तावेज लगाए गए थे। उसने डबरा के दो स्थानीय दलालों के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। एसपी राजेश भदौरिया के अनुसार, रियाल से पूछताछ के आधार पर 5 अलग-अलग टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर छापेमारी के लिए भेजी गई हैं। बौद्ध विहार के एक भिक्षु के तीन अलग-अलग नाम आए थे सामने बांग्लादेशियों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनाने के मामले में खुलासा हुआ है। डबरा के जिस बुद्ध विहार के पते से 17 बांग्लादेशियों के भारतीय पासपोर्ट बने, वहां के भिक्षु के ही तीन अलग-अलग नाम सामने आए हैं। आधार कार्ड में नाम रामेश्वर जाटव, वोटर आईडी में भंते संघप्रिय और मठ की दीवार पर रांघप्रिय महाथेरो लिखा है। आधार में रामेश्वर जाटव के पिता का नाम नारायण जाटव और पता दतिया का है। वहीं वोटर आईडी में उनका नाम भंते संघप्रिय और पिता का नाम नारायण दर्ज है। इस पर उनका कहना है कि कुछ दिन पहले ही बौद्ध धर्म अपनाया है। धर्म अपनाने के बाद नाम संघप्रिय रखा गया। इस पर कुछ नहीं कहा कि नया नाम मिलने पर क्या दस्तावेज भी बदल जाते हैं। मठों में कौन आया और कौन गया… बौद्ध मठ का कोई रिकॉर्ड ही नहीं, इसलिए अब वह जांच के घेरे में हैं। STF की जांच में एक और गंभीर बात सामने आई है। बुद्ध मठों में आने-जाने वाले लोगों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिला है। मठ में कौन आया, कहां से आया, कितने दिन रुका और कब चला गया, इसका हिसाब नहीं है। संदेह के आधार पर मठों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एमपी के बाहर दबिश दे रहीं पांच टीम इस मामले में एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि फर्जी पासपोर्ट मामले में हमारी पांच टीम मध्यप्रदेश के बाहर दबिश दे रही हैं। साथ ही पांच साल में फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज बनाने से लेकर पासपोर्ट वैरीफिकेशन तक कई विभागों और पुलिस थानों तक यह फाइल पहुंचीं। इनसे जुड़े पुलिस अफसर, पुलिसकर्मी व अन्य विभाग के कर्मचारियों की सूची बनाई है। सभी हमारी जांच के दायरे में हैं और उनसे पूछताछ की जाएगी। कई आरोपियों के दो से तीन दस्तावेज भी मिले हैं।

गैंगस्टर नेटवर्क में टर्किश हथियारों की बढ़ती पैठ, जिगाना और PX-5 पिस्टल पर एजेंसियों की नजर

कुरुक्षेत्र  गांव रतनगढ़ के पास एसटीएफ द्वारा मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किए गए दोनों शूटरों से बरामद हथियार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय हथियार नेटवर्क की ओर गंभीर संकेत दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि आरोपितों के कब्जे से पीएक्स-5 टर्किश पिस्टल बरामद की गई हैं। पिछले कुछ समय से भारत में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क में टर्किश हथियारों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जानकारी के अनुसार, जोराकी, रेटे और जिगाना जैसी टर्किश पिस्टल्स अब अलग-अलग राज्यों में अपराधियों के बीच लगातार देखी जा रही हैं। हथियारों के प्रवेश के लिए एक संगठित सप्लाई चेन सक्रिय सूत्रों के अनुसार, ये टर्किश पिस्टल्स मूल रूप से तुर्किये में स्पोर्ट्स शूटिंग और सेल्फ-डिफेंस के लिए वैध रूप से तैयार की जाती हैं, लेकिन बाद में इनका बड़ा हिस्सा अवैध तस्करी नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच जाता है। यहां से यह हथियार यूरोप, पश्चिम एशिया और बाल्कन देशों के रास्ते होते हुए दक्षिण एशिया तक लाए जाते हैं। भारत में इन हथियारों के प्रवेश के लिए एक संगठित सप्लाई चेन सक्रिय है, जिसमें हथियारों को छोटे-छोटे खेपों में अलग-अलग देशों के डीलरों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद इन्हें सीमा पार तस्करी, कोरियर नेटवर्क, फर्जी बिलिंग और छिपे हुए लाजिस्टिक चैनलों के जरिए भारत लाया जाता है। कई मामलों में इन्हें पार्ट्स में अलग-अलग भेजकर बाद में असेंबल करने की भी बात सामने आई है। गैंगस्टरों की पसंद बनी टर्की मेड जिगाना पिस्टल जिगाना पिस्टल, जिसे तुर्किये की ड्यूरेबल और हाई-रिलायबिलिटी सेमी-आटोमैटिक पिस्टल माना जाता है और हाल के वर्षों में गैंगस्टर नेटवर्क में खास तौर पर चर्चित रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन टर्किश हथियारों का बढ़ता उपयोग संगठित अपराध के बदलते स्वरूप और अंतरराष्ट्रीय हथियार सप्लाई नेटवर्क की सक्रियता को दर्शाता है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी हैं कि आखिर ये आधुनिक टर्किश हथियार किन अंतरराष्ट्रीय रास्तों से भारत में प्रवेश कर रहे हैं और किन स्थानीय संपर्कों के जरिए गैंगस्टरों तक पहुंच रहे हैं। टीटी-30 और ग्लाक इससे पहले थी मनपसंद विदेशी हथियारों के मामले में इससे पहले गैंगस्टरों के बीच टीटी-30 और ग्लाक पिस्टल सबसे ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती थीं। लंबे समय तक रूस के टीटी-30 (स्टार-30 के नाम से भी जाना जाता) के चाइनीज माडल भारत के गैंग नेटवर्क में खूब इस्तेमाल हुए। वहीं पिछले कुछ सालों से आस्ट्रिया मेड ग्लाक गैंगस्टरों के बीच काफी लोकप्रिय थी। हालांकि अब पुराने टीटी और ग्लाक की जगह अब टर्की मेड पिस्टल्स जैसे जिगाना और अन्य हाई-एंड माडल तेजी से ले रहे हैं।

वन्य-जीव तस्कर वारंटी आरोपी मिश्रीलाल गिरफ्तार ग्वालियर से सीबीआई ने एसटीएसएफ के सहयोग से आरोपी को पकड़ा

भोपाल स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश की शिवपुरी इकाई एवं केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा 9 वर्षों से फरार एवं स्थाई वारंटी वन्य-जीव तस्कर आरोपी मिश्रीलाल माहौर पिता ख्याली राम माहौर निवासी गोहद जिला भिण्ड को मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर ग्वालियर की परमासीस ईस्ट कॉलोनी के पास से घेराबंदी कर संयुक्त कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया। आरोपी को बुधवार 11 मार्च को सीबीआई द्वारा भोपाल न्यायालय में प्रस्तुत किया जायेगा। स्टेट टाइगर फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा चंबल नदी में पाये जाने वाले अत्यंत दुर्लभ प्रजाति के वन्य-प्राणी टर्टल्स, रेड क्राउन रूफ टर्टल की विदेशों में बड़े पैमाने पर तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर 5 मई, 2017 को वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में कुल 16 आरोपियों को देश के 4 राज्यों से गिरफ्तार किया गया था। इसमें 11 विदेशी नागरिकों को आरोपी बनाया गया था। इस प्रकरण को सीबीआई को हस्तांतरित किया गया। सीबीआई द्वारा उक्त प्रकरण में कार्रवाई करते हुए 3 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

तेजस्वी के करीबी देवा गुप्ता ने सुबह की पोस्ट और शाम को STF ने किया गिरफ्तार

पटना. देवा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर पत्नी के साथ शादी की सालगिरह का भावुक संदेश साझा किया। कुछ ही घंटों बाद बिहार एसटीएफ ने पटना में छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र स्थित राधिका अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 301 में हुई। गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने दबिश दी और हिरासत में लिया। देवा को राजद नेता तेजस्वी यादव का करीबी माना जाता है।गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। पुलिस के अनुसार देवा गुप्ता पर हत्या, लूट, रंगदारी और जमीन कब्जे सहित 28 केस दर्ज हैं। मोतिहारी पुलिस की 100 अपराधियों की सूची में उनका नाम सबसे ऊपर था। एसपी ने उन पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। दो मामलों में वह लंबे समय से फरार बताए जा रहे थे। उन्हें 10 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद गिरफ्तारी से पहले उन्होंने कानूनी राहत ली थी। हाईकोर्ट से मिली थी अंतरिम राहत करीब दो महीने पहले पटना हाईकोर्ट ने सख्त कार्रवाई पर रोक लगाई थी। देवा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई लंबित रहने तक कार्रवाई टालने को कहा गया था। इसके बाद पुलिस की सीधी कार्रवाई कुछ समय के लिए रुकी रही। देवा ने अपने खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों का हवाला देते हुए याचिका दायर की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सुनवाई पूरी होने तक दंडात्मक कदम नहीं उठाए जाएंगे। अब STF की कार्रवाई के बाद कानूनी स्थिति फिर चर्चा में है। पत्नी मेयर, राजनीति में सक्रियता देवा गुप्ता की पत्नी प्रीति कुमारी मोतिहारी नगर निगम की मेयर हैं। 2022 में मेयर चुनाव से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई। 2025 में राजद ने देवा को चुनावी मैदान में उतारा था। इससे पहले लोकसभा टिकट की भी दावेदारी की गई थी। गिरफ्तारी के बाद प्रीति कुमारी ने कार्रवाई को बेवजह बताया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में बेल और स्टे मिल चुका है। तेजस्वी का नाम चर्चा में, सियासत गरम गिरफ्तारी के बाद तेजस्वी यादव का नाम राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था से जोड़कर सवाल उठा रहा है। राजद खेमे में इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया जा रहा है। एसटीएफ की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है। मामले ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब नजरें जांच एजेंसी और अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

फर्जी मार्कशीट से सरकारी नौकरी पाने का खेल उजागर, MP STF ने किया शिकंजा कसने का काम

ग्वालियर मध्य प्रदेश एसटीएफ ने शिक्षक भर्ती में हुए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। बीएड की फर्जी अंकसूचियों के जरिए सरकारी स्कूलों में नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कस दिया गया है। एसटीएफ ने इस मामले में 34 शिक्षकों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का प्रकरण दर्ज किया है, जिनमें से 8 आरोपी नामजद किए गए हैं। ग्वालियर के सात शिक्षक शामिल जानकारी के अनुसार, ये सभी शिक्षक ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी और इंदौर जिलों में पदस्थ हैं। इनमें से ग्वालियर जिले के सात शिक्षक शामिल हैं। एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि इन शिक्षकों ने फर्जी बीएड अंकसूचियों के आधार पर दस्तावेज जमा कर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के बाद नियुक्ति हासिल की थी। कई टीचर की एक जैसी मार्कशीट जांच में पाया गया कि कई शिक्षकों की अंकसूचियां हूबहू एक जैसी थीं। अंकों, विषयों और यहां तक कि क्रम संख्या तक में समानता थी। प्रारंभिक जांच में यह भी खुलासा हुआ कि एक संगठित गिरोह ने बीएड की हूबहू अंकसूचियाँ तैयार कर बेचने का काम किया, जिससे कई अभ्यर्थियों को अवैध रूप से सरकारी नौकरी मिल गई। मुख्य सरगना की हो रही पहचान एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गिरोह के मुख्य सरगना और सहयोगियों की पहचान की जा रही है। इनसे जुड़े शैक्षणिक संस्थानों और प्रमाणपत्र जारी करने वाले बोर्डों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस रैकेट का नेटवर्क राज्य के कई जिलों में फैला हुआ है। कई सर्टिफिकेट निकले फर्जी जांच के दौरान एसटीएफ ने शिक्षकों के दस्तावेजों को संबंधित विश्वविद्यालयों से सत्यापित कराया, जहां से यह साबित हुआ कि कई प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी हैं। इसके बाद सभी संदिग्ध शिक्षकों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और शासकीय सेवा में फर्जी दस्तावेजों से प्रवेश लेने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। फिलहाल एसटीएफ ने संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को भी पत्र लिखकर इन शिक्षकों की सेवाओं की जांच और निलंबन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है, आगे जांच में और भी नाम सामने आने की संभावना है।  

सरिता विहार में STF का ऑपरेशन सफल, बरामद हुए भारी मात्रा में हथियार

नई दिल्ली स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली में बड़ी अनहोनी टल गई है. यहां स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने साउथ ईस्ट दिल्ली के सरिता विहार इलाके से हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया है. पुलिस के मुताबिक, बरामद हथियारों में 10 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल शामिल हैं. सभी हथियार अत्याधुनिक (सॉफ्टिकेटेड) श्रेणी के हैं और इनके साथ अतिरिक्त मैगजीन भी मिली है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अमित नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया है. उससे पूछताछ चल रही है. उसने बताया कि हथियारों की यह खेप मध्य प्रदेश से दिल्ली लाई गई थी. STF अधिकारियों का कहना है कि बरामद हथियारों का इस्तेमाल बड़े आपराधिक या आतंकी घटनाओं में किया जा सकता था. मामले में जांच जारी है और हथियारों की सप्लाई चेन का पता लगाया जा रहा है.  

STF ने किया बड़ा खुलासा: गाजियाबाद में चल रहा था नकली दूतावास, एक आरोपी दबोचा

नोएडा  उत्तर प्रदेश की नोएडा एसटीएफ (STF) ने 22 जुलाई को गाजियाबाद में एक फर्जी दूतावास का पर्दाफाश किया। पुलिस ने हर्ष वर्धन जैन नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। हर्ष वर्धन पर आरोप है कि वह खुद को कई देशों का एम्बेसडर बताकर लोगों को ठग रहा था। वह हवाला के जरिए पैसे का लेन-देन भी करता था। पुलिस के अनुसार, हर्ष वर्धन कविनगर में किराए के मकान में "वेस्ट आर्कटिक दूतावास" चला रहा था। वह खुद को West Arctica, Saborga, Poulvia, Lodonia जैसे देशों का कॉन्सुल या एम्बेसडर बताता था। लोगों को झांसा देने के लिए वह प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य महत्वपूर्ण लोगों के साथ अपनी फोटोशॉप की हुई तस्वीरें दिखाता था। पुलिस का कहना है कि हर्ष वर्धन का मुख्य काम कंपनियों और लोगों को विदेश में काम दिलाने के नाम पर दलाली करना था। वह शेल कंपनियों के माध्यम से हवाला रैकेट भी चला रहा था। जांच में पता चला है कि हर्ष वर्धन पहले चंद्रास्वामी और अदनान खगोशी (अंतर्राष्ट्रीय हथियार डीलर) के संपर्क में भी था। 2011 में उसके पास से एक अवैध सैटेलाइट फोन भी बरामद हुआ था, जिसके लिए कविनगर थाने में मामला दर्ज किया गया था। इतने दस्तावेज बरामद पुलिस ने हर्ष वर्धन के पास से कई चीजें बरामद की हैं। इनमें डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी चार गाड़ियां, माइक्रोनेशन देशों के 12 डिप्लोमैटिक पासपोर्ट, विदेश मंत्रालय की मोहर लगे फर्जी दस्तावेज, दो फर्जी पैनकार्ड, विभिन्न देशों और कंपनियों की 34 मोहरें, 2 फर्जी प्रेस कार्ड, 44,70000 रुपए नकद और कई देशों की विदेशी मुद्रा शामिल हैं। इसके अलावा, कई कंपनियों के दस्तावेज और 18 डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट भी बरामद हुई हैं। जांच जारी पुलिस ने कविनगर थाने में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, उक्त के संबंध में थाना कविनगर गाजियाबाद में अभियोग पंजीकृत कराकर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इसका मतलब है कि इस मामले में कविनगर थाने में FIR दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसटीएफ (STF) अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हर्ष वर्धन के इस गोरखधंधे में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को ठगा है और हवाला के जरिए कितने पैसे का लेन-देन किया है।