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ईओयू ने डीए मामले में अनुभूति श्रीवास्तव के तीन ठिकानों पर की छापेमारी

– वास्तविक आय से 78.91 प्रतिशत अधिक अवैध आय के मिले प्रमाण – ईओयू के डीआईजी ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में दी जानकारी पटना, आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामले में सिवान नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) अनुभूति श्रीवास्तव के ठिकानों पर ईओयू ने छापेमारी की। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की अलग-अलग टीमों ने ईओ के उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर के एडेल्को ग्रीन्स स्थित पैतृक आवास, पटना के रूपसपुर थाना के तिलकनगर स्थित अर्पणा मेंशन के फ्लैट नंबर 406-बी एवं 407-बी तथा सिवान नगर कार्यपालक पदाधिकारी कार्यालय समेत अन्य ठिकानों पर सघन छापेमारी की। इस दौरान बड़ी संख्या में निवेश संबंधित दस्तावेजों के अलावा ज्वेलरी, कैश, बैंक खाते समेत अन्य कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनकी जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितने की अवैश संपत्ति बरामद की गई है। यह जानकारी ईओयू के डीआईजी (आर्थिक अपराध) मानवजीत सिंह ढिल्लो ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी।        डीआईजी ने कहा कि अब तक की जांच में उनके खिलाफ 71 लाख 1 हजार 908 रुपये की अवैध संपत्ति का पता चला है, जो उनके वैद्य आय से 78.91 प्रतिशत अधिक है। जांच में यह बात सामने आई है कि अनुभूति श्रीवास्तव ने सीवान जिला में पदस्थापना के दौरान अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध आय अर्जित की है। इस मामले को लेकर ईओयू में एफआईआर भी दर्ज की गई है। अनुभूति श्रीवास्तव के खिलाफ 31 अगस्त 2021 को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम की धारा 13(1)(बी) के अंतर्गत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई थी। आय से अधिक संपत्ति मामले में उस समय भी इनके खिलाफ हुई कार्रवाई में 230 प्रतिशत अवैध आय का मामला सामने आया था। उस समय जांच में यह पाया गया था कि नवंबर 2013 से सितंबर 2021 के बीच आय के वैध स्रोतों से 1 करोड़ 99 लाख 77 हजार रुपये से अधिक की संपत्ति बरामद की गई थी। इस मामले में उनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र समर्पित किया गया है। यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। निलंबन मुक्त होने के बाद उनकी तैनाती रक्सौल, सहरसा के बाद सीवान में हुई। मधुबनी का कुख्यात तस्कर हुआ गिरफ्तार डीआईजी ने बताया कि मादक पदार्थों एवं द्रव्यों की तस्करी के मामले में मधुबनी के बिस्फी थाना क्षेत्र का रहने वाला कुख्यात तस्कर प्रभाकर चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे एनसीबी कोलकाता के सहयोग से गिरफ्तार कर जयपुर स्थित केंद्रीय कारा भेजा गया है। प्रभाकर के खिलाफ केंद्रीय वित्त मंत्रालय के स्तर से वारंट जारी किया गया था। वह पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल और बिहार में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में बेहद सक्रिय था। उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। पेपर लीक कांडः तीन महीने में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन आया सामने सिपाही पेपर लीक गिरोह का मुख्य आरोपी राजकिशोर साह को गिरफ्तार कर लिया गया है। केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के पेपर लीक से संबंधित मामले की जांच ईओयू के स्तर से की जा रही है। राजकिशोर अरवल जिला के करपी थाना के बख्तारी गांव का रहने वाला है। उसके बैंक खातों की जांच में पाया गया कि तीन महीने में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आय़ा है। इसमें बड़ा हिस्सा संजीव मुखिया गिरोह को ट्रांसफर हुआ है। इस मामले में दो कोचिंग संचालकों मुकेश सर और चंदन सर का नाम प्रमुखता से सामने आई है। इन दोनों का सत्यापन हो गया है। जल्द इनकी गिरफ्तारी होगी। कुछ अन्य कोचिंग संचालकों के नाम भी सामने आए हैं। सिम बॉक्स मामले में देवघर से हुई गिरफ्तारी ईओयू की साइबर टीम ने सिम बॉक्स मामले में देवघर के पारो थाना क्षेत्र से मुकेश को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले इस मामले में वैशाली से सुल्तान को भी गिरफ्तार किया गया था। उसके साथ मुकेश के काफी चैट और पैसे की लेनदेन से जुड़े साक्ष्य बरामद किए गए हैं। इससे संबंधित काफी साक्ष्य बरामद मिलने के बाद उसकी गिरफ्तारी की गई है। सिम बॉक्स मामले में 21 जुलाई को सबसे पहले सुपौल से हर्षित कुमार को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वैशाली और इससे जुड़ा देवघर का कनेक्शन सामने आने के बाद गिरफ्तारी की गई है। यह जानकारी डीआईजी (साइबर) संजय कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पेट्रोलिंग यूनिट 432 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें 115 वेबसाइटों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। शेष मामलों की जांच जारी है। साइबर से जुड़े मामलों का निपटारा भी बड़ी संख्या में किया जा रहा है।

इस महीने बिहार वालों को मिलने वाली है ‘विज्ञान का तीर्थ’ की सौगात!

500 सीटों का ऑडिटोरियम, सेल्फी प्वॉइंट और 269 विज्ञान प्रदर्श वाली होगी सांइस सिटी पटना,  बिहार और खास कर पटना के लोगों को जल्‍द ही एक जबरदस्‍त सौगात मिलने वाली है। महान वैज्ञानिक और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की स्मृति में बन रही साइंस सिटी इसी माह के अंत तक जनता के लिए समर्पित होगी। भवन निर्माण विभाग ने इसकी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। लगभग 20.5 एकड़ में फैली यह भव्य साइंस सिटी मोईन-उल-हक स्टेडियम के पास तैयार की गई है। साइंस सिटी का निर्माण बिहार की विज्ञान और शिक्षा यात्रा को एक नई ऊंचाई देगा। होंगी ये पांच गैलरियां बी ए साइंटिस्ट्स गैलरी बेसिक साइंस गैलरी सस्टेनेबल प्लैनेट गैलरी स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी गैलरी बॉडी एंड माइंड गैलरी 26 थीम पर आधारित होगी गैलरी यहां बनाए जा रही पांच गैलरियों को 26 थीम से सजाया जाएगा। जिस पर 269 विज्ञान प्रदर्श लगाए जाएंगे। पहले चरण में बी ए साइंटिस्ट्स गैलरी और बेसिक साइंस गैलरी में 47 प्रदर्श स्थापित किए जा रहे हैं। जो विज्ञान में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए अद्भुत होगा। साइंस सिटी सिर्फ विज्ञान प्रदर्श तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह युवाओं और बच्चों के लिए ज्ञान और मनोरंजन का बेहतरीन संगम बनेगी। साइंस सिटी में ये भी ​​होगा खास 500 सीटों की क्षमता वाला आधुनिक ऑडिटोरियम 150 छात्रों व 3 शिक्षकों के लिए डोरमेटरी 4डी थियेटर, बहुउद्देशीय हॉल और प्री-फंक्शनल हॉल कैफेटेरिया, पार्किंग, पेयजल और शौचालय एट्रियम बनेगा आकर्षण साइंस सिटी का एट्रियम एरिया खास तौर पर आकर्षक का केंद्र होगा। यहां सेल्फी पॉइंट, डिजिटल पैनल और म्यूरल्स लगाए जा रहे हैं। यानी यहां सिर्फ विज्ञान ही नहीं, बल्कि खूबसूरत माहौल का भी अनुभव मिलेगा। विद्यार्थियों और युवाओं के लिए बड़ा तोहफ़ा भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि के मुताबिक साइंस सिटी का सिविल वर्क पूरा हो चुका है और प्रदर्शों की इंस्टॉलेशन तेजी से हो रही है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरी की जा रही है। यह साइंस सिटी न सिर्फ विद्यार्थियों बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए विज्ञान और नवाचार का अनूठा केंद्र बनने जा रही है।

सुदेश महतो की सुरक्षा पर सवाल, आजसू प्रतिनिधिमंडल ने जांच की रखी मांग, मुख्य सचिव और DGP को सौंपा ज्ञापन

रांची झारखंड में आजसू पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव तथा डीजीपी से मिला और ज्ञापन सौंपकर पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं पार्टी प्रमुख सुदेश महतो की हत्या की साजिश उग्रवादियों द्वारा बार- बार रचे जाने और उनका नाम हिटलिस्ट में रखने की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एन आई ए) से करवाने और उनकी सुरक्षा की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की। मुख्य सचिव अलका तिवारी तथा डीजीपी अनुराग गुप्ता ने आजसू प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उग्रवादियों की हिटलिस्ट में सुदेश कुमार महतो का नाम बार- बार आने के संबंध में जांच करवाई जाएगी। आजसू पार्टी के शीर्ष नेताओं ने कहा कि इस बात का खुलासा होना चाहिए कि सुदेश महतो लगातार उग्रवादियों के निशाने पर क्यों हैं? प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो, मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत, केंद्रीय उपाध्यक्ष द्वय प्रवीण प्रभाकर एवं हसन अंसारी शामिल थे। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने बताया कि बार बार उग्रवादियों द्वारा सुदेश महतो की हत्या की साजिश की जानकारी सामने आती रहती है, लेकिन इसके कारणों का अभी तक पुलिस द्वारा खुलासा नहीं किया गया है। इस संबंध में पार्टी नेताओं ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी से मिलकर स्मारपत्र सौंपा। डॉ भगत ने कहा कि विगत 5 अगस्त को गुमला जिले के कामडारा थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए पीएलएफआई उग्रवादी माटिर्न केरकेट्टा ने भी सुदेश महतो को अपनी हिटलिस्ट में रखा था और हमले की फिराक में था। उसने 2023 में अनगड़ा थाना क्षेत्र में बैठक कर सुदेश महतो की हत्या की योजना बनाई थी, जिसका खुलासा पुलिस ने किया था। उग्रवादियों ने अपने सदस्य देव सिंह मुंडा को योजना के तहत आजसू में शामिल भी करवाया था। हसन अंसारी ने कहा कि इससे पूर्व किसी राजनेता द्वारा सुदेश महतो की हत्या के लिए उग्रवादियों को 5 करोड़ रुपयों की सुपारी देने की बात सामने आ चुकी है। इस बात का खुलासा होना चाहिए कि बार -बार किस कारण से हत्या की साजिश रची जा रही है और इस साजिश के पीछे कौन है? आजसू नेताओं ने कहा कि 2005 में सिल्ली से पोगड़ा जाने के रास्ते में केन बम लगाने की साजिश सामने आई थी। 2013 में पीएलएफआई कमांडर जीदन गुड़यिा द्वारा किसी राजनेता से 5 करोड़ की सुपारी ली गई थी, जिसके बाद 27 एवं 28यू जनवरी 2014 को सिल्ली प्रतिभा महोत्सव में टाइम बम लगाकर हमले का प्रयास किया गया। इसमें विफल होने पर 26 फरवरी 2014 को जोन्हा में एक विवाह समारोह में हमले की योजना बनाई गई, जिसे पुलिस और ग्रामीणों की तत्परता से विफल किया गया। बाद में खुलासा हुआ कि एक उग्रवादी देव सिंह मुंडा को साजिश के तहत आजसू में शामिल भी करवाया गया था। आजसू नेताओं ने बताया कि पीएलएफआई द्वारा 2014 में पार्टी के केंद्रीय महासचिव स्व तिलेश्वर साहु की भी हत्या हजारीबाग जिले के बरही में कर दी गई थी। आजसू नेताओं ने डीजीपी से मांग की कि पूर्व मंत्री एवं पार्टी के प्रधान महासचिव रामचंद्र सहिस की भी सुरक्षा वापस ले ली गई है, जिसे तुरंत वापस किया जाए।  

विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग

पटना  राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय भोजपुर में Blockchain Technology विषय पर 5 दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ,बिहार सरकार के अंतर्गत संचालित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज भोजपुर ,आरा  में  Blockchain Technology के विषय पर NIELIT Patna के सहयोग से निशुल्क 5 दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम 20 Aug- 26 Aug  तक आयोजित की जा रही है । यह कार्यक्रम ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल के द्वारा 4th सेमेस्टर के सीएसई एवं ईसीई के छात्रों के लिए आयोजित की जा रही है । इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों के स्किल डेवलपमेंट को बढ़ाना है ताकि प्लेसमेंट के लिए अपने को बेहतर बना सके.

खरीफ 2025 के मौसम के लिए सहकारिता विभाग ने ऑनलाइन आमंत्रित किया है आवेदन

बिहार राज्य फसल सहायता योजना: 31 अक्टूबर तक करें आवेदन  खरीफ 2025 के मौसम के लिए सहकारिता विभाग ने ऑनलाइन आमंत्रित किया है आवेदन फसल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक क्षति होने पर 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मिलेगा  20 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मिलेगी सहायता राशि  नगर पंचायत और नगर परिषद क्षेत्रों के किसान भी इस योजना के लिए हैं पात्र   पटना राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत खरीफ 2025 के मौसम के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन 31 अक्टूबर, 2025 तक निःशुल्क किए जा सकते हैं। इस योजना के तहत फसल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक क्षति होने पर 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और 20 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा। प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिए ही सहायता राशि दी जाएगी। रैयत, गैर-रैयत तथा आंशिक रूप से रैयत एवं गैर-रैयत श्रेणी के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। नगर पंचायत और नगर परिषद क्षेत्रों के किसान भी इसके लिए पात्र हैं। योजना के तहत अधिसूचित फसलों से संबंधित जिलों के नाम विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इस योजना के बारे में बताते हुए सहकारिता विभाग के मंत्री डॉ॰ प्रेम कुमार ने कहा है कि बिहार राज्य फसल सहायता योजना बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी, पूर्णतः निःशुल्क पहल है, जिसकी मदद से प्राकृतिक आपदाओं में क्षतिग्रस्त फसलों के लिए बिना किसी प्रीमियम के किसानों को वित्तीय सहारा प्रदान किया जाता है। सहकारिता विभाग इसे और अधिक पारदर्शी एवं सरल बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रहा है।  यह है आवेदन की प्रक्रिया कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत किसान सीधे योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत कृषि विभाग द्वारा सत्यापित रैयत श्रेणी के किसान केवल रैयत श्रेणी अथवा आंशिक रूप से रैयत तथा गैर-रैयत श्रेणी में ही आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के समय किसानों को फसल और बुआई के रकबे की जानकारी देनी होगी। फसल कटाई के समय प्रयोग आधारित उपज दर के आंकड़ों के आधार पर योग्य ग्राम पंचायतों या अधिसूचित क्षेत्र इकाई का चयन किया जाएगा। इसके बाद चयनित पंचायतों के आवेदक किसानों को नियमानुसार दस्तावेज अपलोड करने होंगे। योजना के निर्देशों के अनुसार, चयनित ग्राम पंचायतों के आवेदक किसानों का सत्यापन होने के बाद उनके आधार-लिंक्ड बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा। गलत या भ्रामक जानकारी देने पर आवेदन अस्वीकार कर दिए जाएंगे। इस संबंध में अधिक जानकारी सहकारिता विभाग की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन की याद में रांची में तैयार होगा स्मारक स्थल

रांची झारखंड की राजधानी रांची में दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन का स्मृति स्थल बनेगा। इसके लिए भूमि चिन्हित करने का काम शुरू हो गया है। जानकारी के मुताबिक दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की याद में राजधानी रांची के हरमू रोड स्थित बाईपास में स्मृति स्थल का निर्माण किया जायेगा। इसके लिए नगर विकास विभाग ने झारखंड राज्य आवास बोर्ड से जमीन की मांग की है। आवास बोर्ड के तरफ से जमीन चिन्हित करने का काम शुरू कर दिया गया है। बाईपास रोड में डीपीएस स्कूल के पास स्थित भुसूर मौजा में गुरुजी का स्मृति स्थल बनाने पर विचार तेज है क्योंकि इस मुख्य मार्ग पर स्थित भुसूर मौजा में कई एकड़ जमीनें खाली पड़ी हैं। बताया जा रहा है कि स्मृति स्थल परिसर में चारों तरफ पार्क और बेहतर लाइटिंग की जाएगी। यहां दिशोम गुरु की एक प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।  

अब भी वक्त है संभल जाओ – राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को तेज प्रताप की कड़ी चेतावनी

पटना बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने मंगलवार को अपने छोटे भाई और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव को राज्य में होने वालेसे पहले पार्टी के भीतर ‘‘गद्दारों'' से सावधान रहने की सलाह दी। तेज प्रताप को हाल में उनके पिता और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। तेज प्रताप ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में यह भी दावा किया कि ‘‘कुछ गद्दार मेरे राजनीतिक करियर को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं।'' तेज प्रताप ने कहा, ‘‘मैं तेजस्वी से कहना चाहता हूं कि अब भी समय है। अपने आस-पास मौजूद ‘जयचंदों' से सावधान रहो, नहीं तो चुनाव में बहुत बुरे नतीजे देखने को मिलेंगे। अब आप कितने समझदार हैं, यह चुनाव परिणाम तय करेंगे।'' तेज प्रताप ने अपनी पोस्ट में एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें कांग्रेस की ‘वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान औरंगाबाद की नबीनगर विधानसभा सीट से राजद विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह के चालक के साथ कथित तौर पर मारपीट होती दिख रही है। इस वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि पंजाब केसरी नहीं कर सकी है। इस कथित घटना का हवाला देते हुए तेज प्रताप ने कहा, ‘‘मुझे समझ में नहीं आता कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने यह यात्रा लोकतंत्र बचाने के लिए निकाली है या इसे तोड़ने के लिए। जिस तरह नबीनगर विधानसभा क्षेत्र में विधायक के चालक और एक मीडियाकर्मी को ‘जयचंदों' द्वारा पीटा गया और गाली-गलौज की गयी, वह अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक है।'' "कुछ गद्दार मेरे राजनीतिक करियर को खत्म करने की साजिश रच रहे" एक अन्य पोस्ट में तेज प्रताप ने लिखा, ‘‘कुछ गद्दार मेरे राजनीतिक करियर को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं। लेकिन ये गद्दार नहीं जानते कि मेरा नाम तेज प्रताप यादव है। मैं और ज्यादा ताकत के साथ आगे बढ़ता रहूंगा। चाहे कितनी भी बड़ी साजिश रच ली जाए, मुझे कभी हरा नहीं सकते।'' मंगलवार को, तेज प्रताप ने इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पांच छोटे दलों का गठबंधन बनाने की भी घोषणा की। उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की, जिसमें पांच दलों- विकास वंचित इंसान पार्टी (VVIP), भोजपुरिया जन मोर्चा (बीजेएम), प्रगतिशील जनता पार्टी (पीजेपी), वाजिब अधिकार पार्टी (डब्ल्यूएपी) और संयुक्त किसान विकास पार्टी (एसकेवीपी) — के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी उपस्थित थे।  

पर्यटन को बढ़ावा देने की बड़ी पहल: बिहार में लग्जरी होटल और आलीशान रिसॉर्ट का निर्माण शुरू

पटना  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने वाला बड़ा फैसला लिया गया है। बैठक में कुल 16 एजेंडों पर मुहर लगी, जिनमें राजगीर और वैशाली में फाइव स्टार होटल और रिसॉर्ट बनाने की योजना को स्वीकृति दी गई। कहां बनेंगे होटल और रिसॉर्ट कैबिनेट की ओर से राजगीर (नालंदा) और वैशाली में होटल और रिसॉर्ट बनाने का प्रस्‍ताव पास किया है। राजगीर में 10 एकड़ भूमि पर दो पांच सितारा होटल और वैशाली में 10 एकड़ भूमि पर एक पांच सितारा रिसॉर्ट बनाने की योजना है। इन परियोजनाओं का निर्माण पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर होगा। इसके तहत जमीन निजी निवेशकों को निर्धारित अवधि के लिए लीज पर दी जाएगी। लीज अवधि समाप्त होने के बाद इनके संचालन और प्रबंधन पर सरकार निर्णय लेगी। पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं में बढ़ोतरी राजगीर और वैशाली बिहार के प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल हैं। यहां हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। अभी तक इन जिलों में अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले होटल कम होने के कारण पर्यटकों को दिक्कतें होती थीं। नए होटल और रिसॉर्ट बनने से पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और उनकी संख्या में वृद्धि होगी। पर्यटन उद्योग और रोजगार को बढ़ावा     इन परियोजनाओं से बिहार के पर्यटन उद्योग को नई पहचान मिलेगी।     विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।     स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के अवसर बढ़ेंगे।     होटल और रिसॉर्ट के आसपास आर्थिक व सामाजिक गतिविधियां तेज होंगी। बिहार का बढ़ता पर्यटन महत्व बताते चलें कि बिहार ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से समृद्ध प्रदेश है। बौद्ध, जैन और हिंदू धर्म से जुड़े कई प्रमुख स्थल यहां हैं। लेकिन उच्च स्तरीय होटलों की कमी पर्यटकों के लिए चुनौती बनी हुई थी। लिहाजा सरकार अब इस कमी को दूर कर बिहार को पर्यटन के मानचित्र पर उभारना चाहती है। जिसका प्रयास सरकार के स्‍तर से भी कर दिया गया है।  

अकेले वन विभाग ने अब तक राज्यभर में लगाए हैं 96 लाख पौधे

वन महोत्सव में अबतक लगे 1 करोड़ 39 लाख पौधे      अकेले वन विभाग ने अब तक राज्यभर में लगाए हैं 96 लाख पौधे  जीविका ने 10 लाख और मनरेगा से 42 लाख से अधिक पौधे लगाए गए      पटना राज्य में वन महोत्सव के अवसर पर अबतक एक करोड़ से भी अधिक पौधे लगे गए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में वन महोत्सव की शुरुआत विगत 13 जुलाई को पौधरोपण करके की थी। इसके तहत आगामी तीन महीने में व्यापक स्तर पर 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वन महोत्सव के दौरान सागवान, महोगनी, सेमल, जामुन, अर्जुन समेत विभिन्न प्रजातियों के पौधे राज्यभर में लगाए जा रहे हैं। इसका मुख्य उदेश्य वनों का संरक्षण, पौधरोपण और हरित आवरण को विस्तार देना है।        पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में पौधरोपण के लक्ष्य को पाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग, जीविका समूह, मनरेगा, सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों के अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों के स्तर से बड़े पैमाने पर पौधे लगे है। अकेले वन विभाग के स्तर से 96 लाख पौधे लगाए गए हैं। वहीं, जीविका समूह के द्वारा 10 लाख, मनरेगा के माध्यम से 42 लाख, सरकारी एवं गैर सरकारी स्कूलों एवं कॉलेजों से 1 लाख, 43 हजार के अतिरिक्त बागवानी एवं कृषि विभाग के स्तर से 42 हजार पौधे लगाये जा चुके हैं।        मौजूदा अगस्त महीने में ही अबतक 1 करोड़, 39 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से कोई भी किसान या व्यक्ति इन पौधों को 10 रुपये प्रति पौधे की दर पर शुल्क देकर खरीद सकता है। इन पौधों का संरक्षण अगले तीन वर्ष तक करने के बाद वन विभाग द्वारा उन्हें प्रति पेड़ 60 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। मिशन “मेरी लाईफ” के तहत आम लोगो के बीच जन जागरूकता के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। जो लोग पौधरोपण कर रहे है, उन्हें पांच पौधे मुफ्त में दिए जा रहे हैं।      प्रत्येक स्कूल के छात्र को 2-2 पौधे के अलावा सरकारी स्कूल और कॉलेज को मुफ्त पौधे दिए जायेंगे। राज्य के विभिन्न जिलों में स्थापित पौधशालाओं में कई प्रजातियों के पौधे उपलब्ध हैं, जिन्हें वहां से प्राप्त किये जा सकते हैं। इससे जुड़ी जानकारी देने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग ने एक कॉल सेंटर बना रखा है, जिसका फोन नंबर 0612-2226911 है।

राज्य के 24 हजार से भी अधिक गांवों को पक्की सड़कों की मिली सौगात

ग्रामीण सड़कों के निर्माण में लक्ष्य का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण राज्य के 24 हजार से भी अधिक गांवों को पक्की सड़कों की मिली सौगात 500 से कम आबादी वाले टोलों को संपर्कता देने के लिए राज्य में चलाई जा रही है मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना पटना बिहार सरकार ने ग्रामीण सड़कों के विकास को माध्यम बनाकर राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को एक नई दिशा देने का सफल प्रयास किया है। मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना (एमएमजीएसवाय) के अंतर्गत राज्य में अबतक 40 हजार 893 किमी से भी अधिक सड़कों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। जबकि ग्रामीण कार्य विभाग ने कुल 49 हजार, 541.7 किलोमीटर सड़क के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यानी लक्ष्य का 80 प्रतिशत से भी अधिक निर्माण कार्य को पूरा कर लिया गया।         इन सड़कों के निर्माण से राज्य के 24 हजार से भी अधिक गांवों को पक्की सड़कों की सौगात मिली है। चूंकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 500 तक की आबादी वाले टोलों को ही शामिल लिया जा सकता है। इसलिए इससे छोटी आबादी वाले टोलों को संपर्कता देने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना की शुरुआत वर्ष 2013 में की गई थी। अब हर टोले को पक्की बारहमासी सड़क से जोड़ने की दिशा में ग्रामीण कार्य विभाग जुटा हुआ है।        ग्रामीण कार्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत 49 हजार, 541.309 किमी लंबाई की कुल 33 हजार 618 किमी सड़कों के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें अबतक 80 प्रतिशत से भी अधिक परियोजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं। यह राज्य में ग्रामीण संपर्कता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। ग्रामीण सड़कों की निर्माण का जिलावार आंकड़ा सड़क निर्माण की संख्या और लंबाई के आधार पर मुजफ्फरपुर जिला इस योजना के क्रियान्वयन में राज्यभर में अव्वल है। मुजफ्फरपुर के लिए निर्धारित अबतक 2830.99 किलोमीटर सड़कों के निर्माण का लक्ष्य है। जिसके विरुद्ध 2581.278 किमी सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इसके बाद मधुबनी जिला में कुल 2455.21 किमी का निर्माण पूर्ण हो चुका है। जबकि, अररिया में 2628.175 किमी के लक्ष्य के विरुद्ध 2305.858 किमी और पूर्वी चंपारण में 2770.415 किमी के लक्ष्य के विरुद्ध 2180.896 किमी सड़क का निर्माण पूरा किया जा चुका है। ग्रामीण सड़कों के निर्माण से न केवल आवागमन सुगम हुआ है, बल्कि सड़क सुरक्षा में भी व्यापक सुधार दर्ज की गई है। इससे न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिला है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। साथ ही राज्य में कृषि व औद्योगिक गतिविधियों को रफ़्तार मिल रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से ग्रामीण आबादी को शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य सेवाओं तक आसान पहुंच मिली है, जिससे सामाजिक और आर्थिक विकास को मजबूती मिली है।