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कैबिनेट विस्तार से पहले बड़ा खुलासा: डिप्टी CM के लिए तीन नाम, 18 नेताओं की एंट्री तय

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) अब सरकार गठन की तैयारियों में जुट गया है। चुनाव नतीजों के बाद जेडीयू (JDU) और बीजेपी (BJP) दोनों पार्टियों में बैठकों का दौर जारी है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  के एक बार फिर सत्ता संभाल सकते हैं। वहीं NDA के करीब 18 नेताओं का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। जेडीयू ने कल विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। उम्मीद है कि नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जिसके बाद सरकार गठन की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ लेगी। वहीं दूसरी तरफ BJP की बैठक भी कल होने की संभावना है। इस बैठक में मंत्री पदों का फॉर्मूला, डिप्टी सीएम का चयन, पर अंतिम चर्चा होगी। सरकार में JDU का कद बढ़ेगा, 11 मंत्री बन सकते हैं हालांकि 2025 के चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, परंतु नई सरकार में जेडीयू का कद और भी मजबूत होने वाला है। जानकारी के मुताबिक, 11 JDU नेता मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। कुल मिलाकर करीब 18 मंत्री शपथ लेंगे। वहीं डिप्टी मुख्यमंत्री पद के लिए बीजेपी में तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं- सम्राट चौधरी, रामकृपाल यादव, मंगल पांडे। इनमें से किसी एक को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। आज नीतीश देंगे इस्तीफा, उसी दिन पेश होगा दावा सीएम हाउस सूत्रों के मुताबिक, आज नीतीश कुमार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। इसी दिन वे नई सरकार बनाने का दावा भी पेश कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, 20 नवंबर को नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। JDU और BJP कोटे से इन नेताओं का मंत्री बनना तय विजय चौधरी (JDU) सम्राट चौधरी (BJP) नितिन नवीन (BJP) बिजेंद्र यादव (JDU) श्रवण कुमार (JDU) मंगल पांडेय(BJP) अशोक चौधरी (JDU) लेसी सिंह (JDU) रामकृपाल यादव(BJP) जमा खान (JDU) मदन सहनी (JDU) रजनीश कुमार (BJP) जयंत राज (JDU) महेश्वर हजारी (JDU) संतोष निराला (JDU)

निशांत कुमार का बड़ा बयान: जनता का भरोसा फिर जीतेंगे नीतीश

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के परिवार के सदस्यों की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने जीत का श्रेय मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की 20 साल की मेहनत को दिया और आशीर्वाद के लिए जनता का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने रविवार को कहा, "यह बिहार की जनता का आशीर्वाद और समर्थन है। मेरे पिता ने पिछले 20 सालों में जो कड़ी मेहनत की है, उसका फल मिला है, इसके लिए जनता का धन्यवाद करते हैं।" उन्होंने कहा, "मैं बिहार की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने एक बार फिर मेरे पिता पर भरोसा जताया और उन्हें यह जीत दिलाई। पूरी उम्मीद होगी कि पिताजी जनता के विश्वास पर खरा उतरें और पहले जो विकास किया है, उसको जारी रखें।" मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बड़े भाई सतीश कुमार ने आईएएनएस से कहा, "बहुत कुछ किया गया है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। उनके दिमाग में सब कुछ योजनाबद्ध है, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित हैं। वे बिहार के लिए और भी बहुत कुछ करेंगे। जब एक और कार्यकाल पूरा होगा, तो आप बिहार को चमकते हुए देखेंगे।" इससे पहले, बिहार चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उनसे मिले सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने जनता को भरोसा दिया कि सबके सहयोग से बिहार और आगे बढ़ेगा व बिहार देश के सबसे ज्यादा विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल होगा। गौरतलब है कि 243 सदस्यी बिहार विधानसभा में एनडीए ने चुनाव के दौरान 202 सीटों पर जीत हासिल की। एनडीए के घटक दलों में शामिल भाजपा को सबसे अधिक 89 सीटें मिली, जबकि 85 सीटें जीतकर जदयू राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी। इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को चार सीटों पर विजय प्राप्त हुई।

चुनावी नतीजों पर खेसारी लाल यादव भावुक—कहा, ‘नेता बनने की चाह नहीं थी’

पटना बिहार चुनाव का परिणाम 14 नवंबर को आया और NDA को प्रचंड बहुमत मिला। अब नीतीश अपनी सरकार बनाने की तैयारी कर रहे हैं और विपक्षी खेमे में अफरा-तफरी मची हुई है। इसी बीच भोजपुरी के हीरो और छपरा से आरजेडी के उम्मीदवार खेसारी लाल यादव चुनाव में पटखनी खाने के बाद कह रहे हैं कि वह कभी नेता नहीं बनना चाहते थे। राजनीति की दुनिया सबसे अलग है। चुनाव लगभग 8 हजार वोटों से हारने के बाद खेसारी लाल यादव का सुर बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं चुनाव के पहले छपरा सीट को जीतने के लिए दनादन चुनाव प्रचार किए, जनता का समर्थन पाने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिए। इतना ही नहीं प्रचार करने के दौरान अपने बयानबाजी से कई भोजपुरी कलाकारों से व्यक्तिगत विवाद भी कर लिए उसके बाद भी चुनाव जीतने में असफल रहे। मुझे नेता बनना ही नहीं था- खेसारी अब एक नीजी चैनल से बात करते हुए खेसारी लाल यादव ने कहा कि मैं नेता बनना ही नहीं चाहता था. मैं शुरू से चुनाव के विरोध में था. सच पूछिए तो मैं राजनीति में आना ही नहीं चाहता था। ना ही मैं जीवन में कभी नेता बन पाऊंगा, क्योंकि मैं दिमाग से कभी सोचता ही नहीं। मेरे जीवन मैं जो भी चीजें सोचता हूं दिल से सोचता हूं। और दिल से सोचने वाले लोग ऐसी जगह पर नहीं रह सकते। हार मिली तो भावुक हो गए खेसारी खेसारी लाल यादव को शायद उम्मीद नहीं थी की चुनावी परिणाम उनके पक्ष में नहीं होगा। इसलिए रिजल्ट आने के बाद वह भावुक हो गए थे। वीडियो में बात करते हुए वो अपने आंसू छिपाते हुए नजर आए, उन्होंने जनता का शुक्रिया अदा किया और कहा था कि- 'मैं हमेशा से एक बेटे की तरह आप लोगों के बीच में रहना चाहता था। और रहूंगा भी। आगे भी यही प्रयास करूंगा कि बेटे की तरह आपका प्यार और स्नेह लूं। हमने प्रयास किया। मेरी टीम और मुझसे जुड़े सारे लोगों ने बहुत मेहनत की. जीत हार अपनी जगह है। मेरे दिल और जुबान पर आप लोगों के लिए हमेशा सम्मान था और रहेगा।''  

बिहार कैबिनेट का संभावित फार्मूला: NDA में मंत्री पदों का बंटवारा कैसे होगा?

पटना  बिहार चुनाव में एनडीए ने भारी बहुमत हासिल किया है। एनडीए को 202 विधानसभा सीटों पर जीत मिली है तो विपक्षी महागठबंधन मात्र 35 सीटों पर सिमट गया है। अब सरकार गठन की कवायद तेज हो गई है। बिहार की नई एनडीए सरकार का स्वरूप कैसा होगा, किस दल से कितने मंत्री बनेंगे यह सवाल बिहार वासियों के मन में कौंध रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक किस दल से कितने मंत्री होंगे इस पर मोटा मोटी सहमति बन गई है। हालांकि अंतिम समय में इसमे फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।   सूत्रों के हवाले से बताया है कि सीएम नीतीश कुमार के अलावे जेडीयू से 14+1 विधायक मंत्री बन सकते हैं। इसी प्रकार विधायकों की संख्या को देखते हुए बीजेपी के 15 से 16 विधायक मंत्री बन सकते हैं। चिराग पासवान की लोजपा आर के 3 मंत्री बनाए जाने की संभावना है। वहीं जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो के एक विधायक मंत्री बन सकते हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेह लता देवी और जीतनराम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन के मंत्री बनने की चर्चा हो रही है। जानकारी के अनुसार नीतीश मुख्यमंत्री बनेंगे और भाजपा से दो डिप्टी सीएम हो सकते हैं। उनकेे अलावा लोजपा से एक डिप्टी सीएम हो सकता है। बीजेपी के सम्राट चौधरी डिप्टी सीएम फिर से बन सकते हैं। लोजपा के 19 विधायक जीतकर आए हैंं। पार्टी चीफ और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान न सिर्फ इलेक्शन में ऐक्टिव रहे बल्कि अभी भी पटना में जमे हुए हैं। शनिवार को उन्होंने सीएम आवास जाकर नीतीश कुमार से मुलाकात की। डिप्टी सीएम के तौर पर विजय सिन्हा का पत्ता कट सकता है। जदयू से सीएम तो बीजेपी से विधानसभा स्पीकर होंगे। विजय सिन्हा को फिर से इसका जिम्मा मिल सकता है। 2020 में भी उन्हें स्पीकर बनाया गया था। इस बार के चुनाव में जदयू को 85 तो बीजेपी को 89 सीटें मिलीं। चिराग की लोजपा को 19, मांझी की हम को पांच तो उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो से 4 सीटों पर सफलता मिली। विपक्ष में राजद के 25 तो कांग्रेस के 6 उम्मीदवार जीतकर आए। माले के तीन सीपीएम के के एक विधायक हैं। असदुद्दीन औवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने फिर से पांच सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाबी हासिल किया है तो मायावती कि बहुजन समाज पार्टी(बसपा) का एक उम्मीदवार जीतकर आया। मुकेश सहनी की वीआईपी और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का खाता भी नहीं खुला।  

नई विधानसभा में ‘करोड़पति और अपराधी’ का बोलबाला, आधे से अधिक विधायकों की धांधली भरी पृष्ठभूमि

पटना  बिहार की नई विधानसभा (Bihar election 2025) एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में है। एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) और बिहार इलेक्शन वॉच का जारी ताजा विश्लेषण यह बताता है कि नई विधानसभा में जीतकर आए आधे से अधिक विधायक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं। वहीं मऔर उच्च शिक्षित विधायकों की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 243 निर्वाचित विधायकों में 130 पर आपराधिक मामले 2025 के विधानसभा चुनाव में चुने गए 243 विधायकों में से 130 (53%) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह संख्या 2020 की तुलना में 15 प्रतिशत कम है। पिछले चुनाव में 68 प्रतिशत (163 विधायक) के खिलाफ आपराधिक मुकदमे थे। इस बार 102 (42%) विधायक गंभीर धाराओं में आरोपी हैं, जबकि 2020 में यह आंकड़ा 51 प्रतिशत था। छह विजेताओं पर हत्या और 19 पर हत्या के प्रयास के मामले दर्ज हैं। नौ विधायकों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामलों का उल्लेख अपने हलफनामे में किया है। किन दलों के कितने विधायक गंभीर मामलों में आरोपी?     भाजपा: 89 में 43 विधायक (48%)     जदयू: 85 में 23 (27%)     राजद: 25 में 14 (56%)     लोजपा (रामविलास): 19 में 10 (53%)     कांग्रेस: 6 में 3 (50%)     एआईएमआईएम: 5 में 4 (80%)     राष्ट्रीय लोक मोर्चा: 4 में 1 (25%)     भाकपा माले: 2 में 1 (50%)     माकपा, आइआइपी, बसपा: सभी के एक-एक विधायक गंभीर मामलों में आरोपी विधानसभा में 15 साल में 4 गुना बढ़ी करोड़पतियों की संख्या विधानसभा की आर्थिक तस्वीर भी चौंकाने वाली है। 243 में से 218 विधायक (90%) करोड़पति हैं। यह आंकड़ा पिछले विधानसभा (2020) के 81 प्रतिशत से काफी अधिक है। इस बार विजेता विधायकों की औसत घोषित संपत्ति 9.02 करोड़ तक पहुंच गई है, जो 2020 में मात्र 4.32 करोड़ थी। 2010 में सिर्फ 45 करोड़पति विधायक थे। अर्थात 15 साल में यह संख्या चार गुना से अधिक हो गई है।   कौन-से दल में सबसे अधिक अमीर विधायक?     राजद: 25 में 24 विधायक (96%)     जदयू: 85 में 78 (92%)     भाजपा: 89 में 77 (87%)     लोजपा-आर: 19 में 16 (84%)     हम: 5 में 4 (80%)     कांग्रेस, रालोमो, माकपा, आइआइपी, बसपा: सभी के सभी विधायक करोड़पति     भाकपा माले: 2 में 1 करोड़पति  धनबल और आपराधिक छवि अब भी प्रमुख कारक बने हुए हैं 2010 में विधायकों की औसत संपत्ति 82 लाख थी, जो 2015 में बढ़कर 3.02 करोड़ और अब 2025 में 9 करोड़ से भी ऊपर पहुंच गई है। नए विधायकों की प्रोफाइल स्पष्ट करती है कि बिहार की राजनीति में धनबल और आपराधिक छवि अब भी प्रमुख कारक बने हुए हैं। हालांकि आपराधिक मामलों में मामूली कमी दिखती है, लेकिन करोड़पतियों की बढ़ती संख्या चुनावी राजनीति की बदलती दिशा की ओर संकेत करती है। चुनावी सुधारों और पारदर्शिता पर बहस इस रिपोर्ट के बाद एक बार फिर तेज़ होना तय है। 

झारखंड के विकास का रोडमैप तैयार: 2050 विज़न पर CM हेमंत की बड़ी घोषणा

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार 2050 तक राज्य को विकसित बनाने पर काम कर रही है, जिसमें महिलाओं, युवाओं, किसानों और आदिवासियों के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सोरेन रांची के मोरहाबादी मैदान में झारखंड के स्थापना दिवस के रजत जयंती समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में बोल रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों से संबंधित 8,799 करोड़ रुपये की 1,087 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास भी किया। सोरेन ने कहा, “हम 2050 तक झारखंड को एक विकसित व समृद्ध राज्य बनाने के लिए अगले 25 वर्ष के विजन पर काम कर रहे हैं। आप जल्द ही देखेंगे कि प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए राज्य का समग्र विकास कैसे किया जाता है।”  

तेजस्वी यादव ने 17 नवंबर को बुलाई समीक्षा बैठक, चुनावी हार पर करेंगे मंथन

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं, चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए RJD अब महामंथन करने जा रही है। दरअसल, तेजस्वी यादव ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर पार्टी विधायकों और सभी राजद उम्मीदवारों की अहम बैठक बुलाई है। सुबह 11 बजे होगी बैठक बताया जा रहा है कि एक पोलो रोड स्थित सरकारी आवास पर सुबह 11 बजे बैठक हो सकती है। इधर, बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की करारी हार तथा पार्टी के महज 25 सीटों पर सिमट जाने के बाद लालू परिवार की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं और अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने परिवार से नाता तोड़ने के साथ राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया है। रोहिणी आचार्य ने एक चौंकाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे यही करने को कहा था। मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।' रोहिणी की सोशल मीडिया पोस्ट लालू प्रसाद यादव के राजद परिवार में कथित मतभेदों की ओर इशारा करती है। इसी साल 25 मई को लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को एक महिला को लेकर उठे विवाद के बाद पार्टी और परिवार दोनों से निकाल दिया था। इस कार्रवाई के लिए तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के करीबी संजय यादव को जिम्मेदार ठहराया था। बाद में तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई और चुनाव लड़ा, हालांकि महुआ विधानसभा क्षेत्र से लगभग 50 हजार वोटों से हार गए, वहीं महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी प्रसाद यादव कड़े मुकाबले के बाद अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे।  

झारखंड ठंड से कांपा, मैकलुस्कीगंज का न्यूनतम पारा 6 डिग्री

रांची  झारखंड में ठंड का सितम देखने को मिल रहा है। नवंबर महीने में ही लोग स्वेटर और शाल में दिख रहे हैं। इसी महीने में ही लोगों का ठंड के कारण हाल बेहाल हो गया है। वहीं, मौसम विभाग के मुताबिक दिन-प्रतिदिन ठंड में इजाफा होगा। मैकलुस्कीगंज का पारा पहुंचा 6 डिग्री राज्य में ठंड का सितम जारी है। बीते शनिवार को मैकलुस्कीगंज का पारा 6 डिग्री तक पहुंच गया। यह इस ठंड का अब तक का सबसे कम तापमान के रूप में रिकॉर्ड है। वहीं कई जिलों के तापमान में 7 डिग्री तक की गिरावट देखी गई है। मौसम विभाग ने रांची सहित रामगढ़, बोकारो, गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, लातेहार लोहरदगा, गुमला, खूंटी और सिमडेगा में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है।  दरअसल, पहाड़ी इलाकों में समय से पहले बर्फबारी ने निचले राज्यों में ठंड बढ़ा दी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों में ठंड बढ़ने की सम्भावना है। ठंड के बढ़ने के कारण लोगों में सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी हल्की बीमारियों के लक्षण भी बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से सर्दी से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।  

अद्भुत प्रयास: सदर अस्पताल की मेडिकल टीम ने 24 साल के युवक को दिया नया जीवन

रांची  डाॅक्टरों को भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि वे जीवन बचाने और दर्द दूर करने का काम करते हैं। भगवान हमें जीवन देता है, जबकि डॉक्टर उस जीवन को बचाने और बनाए रखने के लिए अथक प्रयास करते हैं, खासकर मुश्किल और जानलेवा बीमारियों में। ताजा मामला रांची सदर अस्पताल से आया है। अनगड़ा थाना क्षेत्र के जरगा गांव निवासी 24 वर्षीय मरीज को बेहद गंभीर हालत में सदर अस्पताल लाया गया था। उसका गला गहरी चोट के साथ सांस की नली तक कट चुका था। परिजन खून से भीगे गमछे में उसका गला लपेटकर पहुंचे थे। डॉक्टरों की टीम ने 15 मिनट बाद ही ऑपरेशन शुरू कर दिया। टीम ने मिलकर खून जांच, ABG और सेरोलॉजी जैसे सभी टेस्ट तुरंत पूरे किए। एनेस्थीसिया टीम ने तैयारी कर मरीज को बेहोश किया और ऑपरेशन शुरू हो गया। लगभग 2 घंटे तक यह ऑपरेशन चला। वहीं, फिलहाल मरीज आईसीयू में में है। आने वाले 72 घंटे उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं। यह पूरा ऑपरेशन निशुल्क किया गया।

बिहार की राजनीति में नई हलचल: JDU के बिना सरकार गठन पर संजय झा ने क्या कहा?

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली ऐतिहासिक जीत और 200 से अधिक सीटों का जादुई आंकड़ा पार करने के बाद राजनीतिक हलचल तेज है। इसबार के चुनावी आंकड़ों को देखने के बाद कयासों का बाजार भी गर्म है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बिहार की 243 सीटों में से सबसे ज्यादा बीजेपी ने 89 सीटें जीती हैं। वहीं सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड को 85 सीटें मिली हैं। सीटों की संख्या में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसके बाद से कुछ लोगों का दावा है कि भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाएगी। हालांकि, जेडीयू ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू के दौरान ऐसे तमाम अटलकों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए एकजुट है। भाजपा और जेडीयू के अलावा एनडीए में शामिल चिराग पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास ) को 19 सीटें मिली हैं। वहीं, जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) को पांच सीटें, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा चार सीटें जीतने में सफल रही है। ऐसे में यह संख्या 202 तक पहुंच जाती है। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा। लालू यादव की पार्टी को सिर्फ 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं सहयोगी दल कांग्रेस को छह सीटें मिली हैं। इसके अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन को दो सीटें मिली हैं। असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम पांच सीटें जीतने में कामयाब रही है। इसके अलावा इंडियन इन्क्लुसिव पार्टी (IIP), माकपा और बहुजन समाज पार्टी को एक-एक सीट मिली है। संख्या को देखते हुए कयासों का बाजार गरमाया हुआ है। नीतीश के बिना भाजपा के सरकार चलानी की अटकलें लगाई जा रही हैं। एक थ्योरी यह भी गढ़ी जा रही है कि नीतीश कुमार और विपक्ष के तमाम दलों के साथ सरकार बन सकती है। उसमें ओवैसी का भी साथ रहे। इन तमाम अटकलों को लेकर संजय झा से सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि क्या बिना जेडीयू के भी सरकार बना सकती है बीजेपी? क्या नीतीश ही पांच साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे? संजय झा ने साफ शब्दों में जवाब देते हुए कहा, “मैं इस तरह की अटकलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। समय आने पर सब स्पष्ट हो जाएगा। एनडीए के भीतर किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है।” एनडीए की अंदरूनी राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? इस सवाल के जवाब पर संजय झा ने कहा “डायनमिक्स वही रहेंगे। हम सब मिलकर काम कर रहे हैं और हमारे बीच बेहतरीन तालमेल है। इतनी बड़ी जीत के बाद हमारा फोकस सिर्फ यह है कि हम जनता के लिए डिलीवरी करें। केंद्र और राज्य के बीच संबंध पहले से ही बहुत अच्छे हैं।” उन्होंने कहा, “यह जीत एनडीए के एकजुट होकर लड़ने का नतीजा है। इसमें चिराग पासवान भी शामिल हैं। अगर सभी गठबंधन साझेदार एकसाथ नहीं होते, तो 200 का आंकड़ा पार करना संभव नहीं था।”