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पावर स्टार पवन सिंह ने तोड़ी चुप्पी, कहा – विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है। इसी बीच भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नहीं लड़ने का ऐलान किया है। दरअसल, पवन सिंह ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा, "मैं पवन सिंह अपने भोजपुरीया समाज से बताना चाहता हूँ कि मैं बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ज्वाइन नहीं किया था और नाहीं मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना है। मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं और रहूंगा"  

लालू प्रसाद यादव ने मढ़ौरा सीट से दाखिल किया नामांकन, सफलता अब भी दूर

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के पहले दिन नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवारों में एक नाम ऐसा भी रहा जिसने सभी का ध्यान खींचा है, वह लालू प्रसाद यादव है। लेकिन चौकिए मत, यह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख प्रमुख लालू प्रसाद यादव नहीं हैं, बल्कि उनका हमनाम है, जो लगातार चुनाव लड़ने की अपनी आदत के लिए जाना जाता है। हालांकि अब तक सफलता उससे कोसों दूर रही है। पैंतालीस वर्षीय यह ‘हमनाम' सारण जिले के जादो रहीमपुर गांव के निवासी हैं। उन्होंने शुक्रवार को मढ़ौरा विधानसभा क्षेत्र से नामांकन पत्र दाखिल किया। यह विधानसभा क्षेत्र सारण लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जो लंबे समय से राजद प्रमुख और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के नाम से जुड़ी रही है। अपने पैतृक गांव से फोन पर बातचीत में लालू प्रसाद यादव ने बताया, ‘‘मैंने पहली बार 2001 में चुनाव लड़ा था, जब वार्ड पार्षद के पद के लिए मैदान में उतरा था।'' रहीमपुर गांव राज्य की राजधानी पटना से करीब 150 किलोमीटर दूर है। दिलचस्प बात यह है कि सारण वही लोकसभा सीट है जिसने 1977 से कई बार मशहूर लालू प्रसाद यादव को संसद में भेजा है। हालांकि, बिहार के इस कम चर्चित लालू प्रसाद यादव को उनके लगातार लेकिन असफल चुनावी प्रयासों के कारण ‘धरती पकड़' की उपाधि मिल चुकी है। वह अपने मशहूर नाम के बोझ से बेपरवाह दिखते हैं। उन्होंने गर्व से याद किया, ‘‘मैंने 2014 के लोकसभा चुनाव में राबड़ी देवी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस समय वह अपने पति की जगह मैदान में थीं, जिन्हें चारा घोटाला मामले में दोषसिद्धि के बाद चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरा दिया गया था।'' उस चुनाव में राबड़ी देवी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजीव प्रताप रूड़ी से हार गई थीं। वह यह भी गर्व से बताते हैं कि उन्होंने ‘‘2017 और 2022 के राष्ट्रपति चुनाव'' में भी नामांकन किया था, लेकिन यह कहे जाने पर कि दोनों बार उनका नामांकन रद्द कर दिया गया था, वह मुस्कुरा देते हैं। खेती-किसानी करने वाले इस शख्स के पास चुनावी रोमांच का शौक पूरा करने के लिए खूब वक्त है। शायद इसी वजह से उन्हें याद करने में कठिनाई होती है कि उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव और हाल में हुए विधानसभा उपचुनाव में किस सीट से पर्चा भरा था। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा ख्याल है कि लोकसभा में मैं महाराजगंज से उम्मीदवार था। विधानसभा उपचुनाव में या तो तरारी या रुपौली से लड़ा था।'' उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘‘मैं निर्दलीय उम्मीदवार नहीं हूं। कृपया मेरा हलफनामा देखिए। मैं जन संभावना पार्टी का उम्मीदवार हूं।'' मानो वह खुद को और दूसरों को यह यकीन दिलाना चाहते हों कि उनके जैसे लोगों के साथ भी कोई राजनीतिक धारा जुड़ी है।  

BJP को चुनावी झटका: मिश्री लाल यादव ने छोड़ी पार्टी, RJD में एंट्री तय

पटना  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक और तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, अब दरभंगा की अलीनगर विधानसभा सीट से विधायक मिश्रीलाल यादव ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में दलितों और अन्य पिछड़े समुदायों को उनका हक नहीं मिल रहा है। दरअसल, मिश्री लाल यादव ने शनिवार को पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की और आरोप लगाया कि संगठन में दलितों और अन्य पिछड़े समुदायों को उनका हक नहीं मिल रहा है। दरभंगा ज़िले की अलीनगर सीट से विधायक यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वह पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को अपना इस्तीफ़ा सौंपेंगे। पार्टी ने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सूत्रों ने बताया कि यादव इन अटकलों से नाराज हैं कि इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा और भाजपा अलीनगर से गायिका मैथिली ठाकुर को मैदान में उतार सकती है। राजद में होंगे शामिल! विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के टिकट पर 2020 का चुनाव लड़ने वाले मिश्री लाल यादव ने कहा, "मैंने पहली बार एनडीए के लिए अलीनगर सीट जीती है। पहले, कई अन्य उम्मीदवार, जिनके पास बहुत पैसा और बाहुबल था, ऐसा करने में नाकाम रहे थे।" यादव ने अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि वह राजद नीत विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक के संपर्क में हैं।

उपचुनाव से पहले सुरक्षा समीक्षा: झारखंड पुलिस ने पड़ोसी राज्यों के साथ की बैठक

रांची झारखंड में 11 नवंबर को होने वाले घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए सुरक्षा प्रबंधों को अंतिम रूप देने में पुलिस सक्रिय हो गई है। इस कड़ी में आईजी अभियान ने बीते शुक्रवार को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय सभागार में पश्चिम बंगाल और ओडिशा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में चुनाव से पहले सुरक्षा-व्यवस्था को मजबूत बनाना था। बैठक में तीनों राज्यों के बीच अंतररज्यीय समन्वय को बढ़ावा देने और संयुक्त कारर्वाई पर जोर दिया गया। विशेष रूप से अवैध शराब, मादक पदार्थों, अवैध हथियारों और अवैध धन की आवाजाही को रोकने की रूपरेखा पर चर्चा हुई। इसके लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में मिरर चेक पोस्ट स्थापित करने और उनकी सक्रियता बढ़ाने का निर्णय लिया गया। घाटशिला निर्वाचन क्षेत्र के आसपास के जिलों जैसे पश्चिम बंगाल के झारग्राम और पुरुलिया तथा ओडिशा के मयूरभंज में विशेष मिरर चेक पोस्ट बनाए जाएंगे और उन्हें चौबीसों घंटे सक्रिय रखा जाएगा। यह कदम न सिर्फ अवैध गतिविधियों को रोकने में मदद करेगा, बल्कि सीमा पार से अपराधियों और नक्सलियों की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखने में सहायक होगा। बैठक में अंतररज्यीय वांछित अपराधियों, वारंटियों और हिस्ट्रीशीटरों के खिलाफ संयुक्त रूप से कार्रवाई करने और खुफिया जानकारी साझा करने पर भी सहमति बनी। इससे प्रभावी और तेज पुलिसिया कार्रवाई सुनिश्चित होगी और संगठित अपराधियों की सक्रियता को कम करने में मदद मिलेगी। इन सभी तैयारियों का उद्देश्य उपचुनाव के दौरान एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और स्वतंत्र मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करना है, ताकि सभी मतदाता भयमुक्त होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।  

दूसरी शादी पर झारखंड HC का फैसला, मुस्लिम शख्स को लगा बड़ा झटका

रांची झारखंड हाई कोर्ट ने पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने वाले धनबाद के पौथॉलाजिस्ट मोहम्मद अकील आलम को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 तक तहत शादी कर लिया है तो उसपर यही कानून लगेगा, ना कि उसका निजी या धार्मिक कानून। कोर्ट में आलम ने यह कहते हुए अपनी दूसरी शादी को वैध ठहराने की कोशिश की थी कि इस्लाम में चार शादियां वैध हैं, लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी अपील को खारिज कर दिया। क्या है मामला मामला झारखंड के धनबाद का है। यहां एक एक पैथॉलॉजिस्ट अकील आलम ने 4 अगस्त, 2015 को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की थी। शादी के कुछ महीने के बाद ही उनकी पत्नी 10 अक्टूबर, 2015 को घर छोड़कर अपने मायके देवघर चली गई। आलाम ने कोर्ट में पत्नी पर आरोप लगाया कि वो बिना कारण उन्हें छोड़कर चली गईं और बार-बार बुलाने पर भी नहीं लौटी। इसके बाद अकील ने देवघर फैमिली कोर्ट में वैवाहिक अधिकारों की बहाली की याचिका दाखिल की थी। लेकिन इस मामले पर पत्नी ने कोर्ट में बताया कि अकील आलम पहले से शादीशुदा थे और उनकी पहली पत्नी से दो बेटियां है। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति अकील आलम ने उसके पिता पर जयदाद नाम कराने के लिए कहा और जब ऐसा नहीं हुआ तो उसके साथ मारपीट की गई। फैमिली कोर्ट का फैसला फैमिली कोर्ट में सुनवाई के दौरान अकील आलम ने खुद माना था कि शादी के वक्त उनकी पहली पत्नी जीवित थीं। कोर्ट ने इस दौरान पाया कि अकील आलम ने शादी के समय रजिस्ट्रेशन में यह बात छिपाई थी। इसके अलावा अकील ने कहा था कि उनकी दूसरी शादी अवैध है, ताकि उसे मेंटेनेंस ना देना पड़े। अब अकील अपनी शादी को वैध बताकर पत्नी को वापस बुलाने की मांग कर रहा है। क्या बोला हाई कोर्ट फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अकील ने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया। झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस राजेश कुमार की बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 4 (ए) साफ कहती है कि शादी के समय किसी भी पक्ष की पहले से कोई जीवित पत्नी या पति नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह एक्ट नॉन ऑब्स्टांटे क्लॉज के साथ शुरू होता है, यानी स्पेशल मैरिज एक्ट का प्रावधान किसी भी अन्य कानून पर ज्यादा प्रभाव रखता है, फिर चाहे वो धार्मिक ही क्यों ना हो।

हादसे में तबाह ट्रक, उजड़े घर: सासाराम में टक्कर के बाद झारखंड चालक की मौत, दूसरा गंभीर

पटना बिहार के सासाराम में शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में झारखंड के एक ट्रक ड्राईवर की जान चली गई जबकि उत्तर प्रदेश के ट्रक चालक की हालत नाजुक बनी हुई है। मिली जानकारी के अनुसार, घटना अहले सुबह सासाराम चौसा पथ पर अमवलिया चर्च के समीप की है। मृतक शख्स की पहचान झारखंड के लातेहार जिले के बालूमाथ निवासी टुनटुन उर्फ धनेश्वर कुमार के रुप में हुई है जबकि उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिला का निवासी अर्जुन यादव घायल हो गया। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि अर्जुन यादव प्लाईवुड लोड कर सासाराम जा रहे थे। वहीं धनेश्वर कुमार टाटा कंपनी का सरिया लोड कर बक्सर जा रहे थे। इस दौरान सासाराम चौसा पथ पर अमवलिया चर्च के पास दोनों गाड़ियों में आमने-सामने की टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भयावह थी कि ट्रक गहरे पानी में पलट गया और झारखंड के ड्राईवर धनेश्वर कुमार की मौके पर मौत हो गई और यूपी चालक अर्जुन यादव घायल हो गया और उसका अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल सासाराम भेज दिया है।  

नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर हादसे पर शोक जताया, मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना की प्रकट

मुजफ्फरपुर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर थाना क्षेत्र में भीषण सड़क दुर्घटना में चार लोगों की मौत पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि यह दुर्घटना काफी दु:खद है। उन्होंने इस दुर्घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शान्ति तथा उनके परिजनों को दु:ख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

सीटों का गणित तय: लालू-गांधी बातचीत से खत्म हुआ गतिरोध

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर सहमति बन गई है. सूत्रों के मुताबिक, कल देर रात तक चली बैठक में सीटों की संख्या पर लगभग अंतिम निर्णय लिया गया. हालांकि, कुछ सीटों को लेकर अब भी घटक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं. राजद अध्यक्ष लालू यादव और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच फोन पर बातचीत भी हुई है और सीटों पर फंसा पेच खत्म हो गया है. माना जा रहा है कि जल्द ही सीटों का ऐलान हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, महागठबंधन में आरजेडी को 135, कांग्रेस को 55, वीआईपी को 18, भाकपा माले को 20, सीपीआई को 6, सीपीएम को 4, जेएमएम को 2, आरएलजेपी को 2 और आईपी गुप्ता को 1 सीट दिए जाने की संभावना है. कुछ सीटों पर घटक दलों के बीच कैंडिडेट एडजेस्टमेंट का भी फॉर्मूला अपनाया जाएगा. हालांकि, माना जा रहा है कि 12 सीटों पर पेच अब भी फंसा है. विवादित सीटों में वीआईपी का दावा आरजेडी की शेखपुरा, सिमरी बख्तियारपुर, भभुआ, बड़हरा, महिषी और गौराबराम सीटों पर है. कांग्रेस ने आरजेडी की बायसी, बहादुरगंज और सहरसा सीट मांगी हैं, जबकि आरजेडी ने भाकपा माले की घोसी और पालीगंज सीट पर दावा किया है. सीपीआई ने आरजेडी की हरलाखी सीट पर दावेदारी जताई है. जेएमएम को कटोरिया और मनिहारी सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है. पशुपति पारस की तरफ से नहीं बन पाई सहमति आरएलजेपी नेता पशुपति पारस कुशेश्वरस्थान या वैशाली में एक सीट चाहते हैं, जिसमें सूरजभान सिंह को एडजस्ट करने की शर्त रखी गई है. सूत्रों के मुताबिक, इन विवादित सीटों पर आज सहमति बनने के बाद महागठबंधन 12 या 13 अक्टूबर को सीट शेयरिंग का औपचारिक ऐलान कर सकता है. इस बीच, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी शनिवार को तेजस्वी यादव के एक पोलो रोड स्थित आवास पर पहुंचे और लंबी बैठक हुई. एनडीए में सीट शेयरिंग पर मंथन जारी उधर, एनडीए में भी सीट बंटवारे पर मंथन जारी है. दिल्ली में आज एनडीए के शीर्ष नेताओं की बैठक हो रही है. बीजेपी के प्रदेश प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावडे, सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल, ऋतुराज सिन्हा और मंगल पांडे दिल्ली पहुंच चुके हैं. जेडीयू नेता ललन सिंह और संजय झा भी आज दिल्ली जाएंगे. सूत्रों के अनुसार, एनडीए में एलजेपी (रामविलास) को गोविंदगंज सीट देने पर सहमति बन गई है, लेकिन ब्रह्मपुर सीट पर बीजेपी अब भी तैयार नहीं है. उपेंद्र कुशवाहा बाजपट्टी और शेखपुरा सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं, जबकि जीतन राम मांझी 7 सीटों से कम मिलने पर नाराज बताए जा रहे हैं और आज बीजेपी नेताओं से मुलाकात करेंगे.

दिवाली-छठ पर घर जाने के लिए इन रूट पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें

रांची त्योहारों के सीजन में झारखंड की राजधानी रांची से यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने दिवाली और छठ पर्व के दौरान विशेष ट्रेनों का विस्तृत संचालन किया है। ये ट्रेनें रांची से देश के विभिन्न महत्वपूर्ण और धार्मिक स्थलों के लिए चलाई जा रही हैं, ताकि पर्वों के दौरान लोगों को यात्रा में किसी भी तरह की असुविधा न हो। इस बार कुल सात विशेष स्पेशल ट्रेनों का प्रबंध किया गया है, जो अलग-अलग तिथियों और स्थलों पर नियमित रूप से चलेंगी। सबसे पहले अजमेर-रांची पूजा, दिवाली एवं छठ स्पेशल (09619/09620) ट्रेन 28 सितंबर से 30 नवंबर 2025 तक हर रविवार को चलेगी। इसके अलावा रांची से आनंद विहार टर्मिनल के लिए साप्ताहिक दिवाली/छठ स्पेशल (02877/02878) 17 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक शुक्रवार को और आनंद विहार से 19 अक्टूबर से 2 नवंबर तक रविवार को चलेगी। रांची से आरा के लिए भी साप्ताहिक विशेष ट्रेन (08640/08639) 28 सितंबर से 2 नवंबर तक रविवार को, जबकि आरा से 29 सितंबर से 3 नवंबर तक सोमवार को चलेगी। जयनगर के लिए साप्ताहिक दिवाली-छठ स्पेशल (08105/08106) ट्रेन 18 अक्टूबर से 1 नवंबर तक शनिवार को और जयनगर से 19 अक्टूबर से 2 नवंबर तक रविवार को चलेगी। पूर्णिया कोर्ट साप्ताहिक विशेष ट्रेन (08626/08625) रांची से 17 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक शुक्रवार को, तथा पूर्णिया कोर्ट से 18 अक्टूबर से 1 नवंबर तक शनिवार को चलेगी। कामाख्या के लिए भी पूजा, दिवाली और छठ विशेष ट्रेन (08621/08622) 27 सितंबर से 1 नवंबर तक शनिवार को और वहां से 29 सितंबर से 3 नवंबर तक सोमवार को चलाई जाएगी। गोरखपुर के लिए साप्ताहिक दिवाली-छठ स्पेशल (08629/08630) ट्रेन रांची से 18 अक्टूबर से 1 नवंबर तक शनिवार को और गोरखपुर से 19 अक्टूबर से 2 नवंबर तक रविवार को चलेगी। रेल प्रशासन ने बताया कि इन ट्रेनों में सामान्य, स्लीपर और एसी कोच उपलब्ध होंगे, जिससे हर तरह के यात्री आराम से यात्रा कर सकेंगे। त्योहारों के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस बार यह कदम उठाया गया है ताकि वे सुगमता से और सुरक्षित यात्रा कर सकें। रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे अपनी यात्रा पहले से ही बुक कर लें ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस पहल से त्योहारों के दौरान रांची और जुड़े इलाकों में यात्रा व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।  

बिहार की सियासत में हलचल: RJD के दो विधायक थामेंगे कमल का दामन

पटना  बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले हलचल तेज हो गई है। कैमूर जिले से दो विधायकों, भभुआ से भरत बिंद और मोहनियां से संगीता कुमारी ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में नई सरगर्मी पैदा कर दी है। दोनों नेता फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) में हैं, लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर जीत दर्ज की थी। सूत्रों के मुताबिक, बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने दोनों विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही, विधानसभा के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि भरत बिंद और संगीता कुमारी दोनों ही BJP के टिकट पर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।   RJD से BJP की ओर सफर भरत बिंद और संगीता कुमारी ने 2020 के चुनाव में RJD के टिकट पर जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे थे। दोनों ने बाद में पार्टी से नाता तोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। इस कदम से नाराज़ RJD नेता तेजस्वी यादव ने उस समय विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दोनों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, तब कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। अब दोनों के औपचारिक इस्तीफे ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। BJP में टिकट की जंग तेज राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भरत बिंद और संगीता कुमारी के इस्तीफे BJP के लिए संगठन विस्तार का अवसर हैं। दोनों नेता अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रखते हैं और भाजपा के टिकट पर आगामी चुनाव लड़ने के लिए प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। कैमूर और आस-पास के इलाकों में भाजपा की रणनीति के तहत इन नेताओं का इस्तीफा एक सोचा-समझा कदम माना जा रहा है। कांग्रेस विधायक का भी इस्तीफा वहीं, चेनारी विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुरारी गौतम ने भी इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि वे भी भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। यह कदम न केवल कांग्रेस के लिए झटका है, बल्कि यह भाजपा की रणनीति में एक और अहम जोड़ मानी जा रही है। महागठबंधन को लगा बड़ा झटका महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-लेफ्ट) के लिए ये इस्तीफे किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। तीनों विधायक जिन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे RJD और कांग्रेस दोनों के परंपरागत वोटबैंक वाले क्षेत्र रहे हैं। अब इन सीटों पर भाजपा की पकड़ मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। तेज होते समीकरण बिहार में चुनावी माहौल अब पूरी तरह से गरमा गया है। टिकट वितरण को लेकर सभी दलों में जोरदार खींचतान चल रही है। RJD, कांग्रेस और JDU जहां अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं, वहीं भाजपा लगातार विपक्षी दलों से प्रभावशाली चेहरों को जोड़कर अपनी ताकत बढ़ा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन इस्तीफों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि आने वाले महीनों में बिहार की राजनीति में और भी बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल, टिकट के दावेदारों की बढ़ती संख्या और गठबंधन के अंदर की खींचतान बिहार की राजनीति को और दिलचस्प बना रही है।