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PM Modi का 75वां जन्मदिन रांची में धूमधाम से, लोगों के लिए ‘सेवा पखवाड़ा’ विशेष आयोजन

रांची झारखंड की राजधानी रांची में रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने बीते शनिवार को अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में होने वाले सेवा पखवाड़ा कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। यह पखवाड़ा 17 सितंबर से लेकर 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। सेठ ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी महानगर रांची और भाजपा ग्रामीण इकाई मिलकर इस पखवाड़ा को एक उत्सव की तरह पूरे जिले में मनाएंगे। इसकी शुरुआत विशेष धार्मिक अनुष्ठान के साथ होगी और फिर विभिन्न सामाजिक व जनहितकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। सेठ ने कहा कि सेवा पखवाड़ा की शुरुआत 17 सितंबर को हवन कार्यक्रम से होगी। इसी दिन से रांची और उसके ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर अनेक कार्यक्रम शुरू होंगे। सांसद ने बताया कि इस पखवाड़ा में कला महोत्सव, रक्तदान शिविर और स्वास्थ्य शिविर जैसे आयोजन प्रमुख रहेंगे। इन कार्यक्रमों का लक्ष्य आम जनता को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाना और समाज के विभिन्न वर्गों को सम्मानित करना है। इस अवसर पर सांसद ने जानकारी दी कि शहर में 3000 सोलर लाइट्स का उद्घाटन किया जाएगा। साथ ही 75 नर्सें और 75 सफाई कर्मियों को सम्मानित किया जाएगा। ये वे लोग हैं जिन्होंने समाज में अपनी सेवाओं से महत्वपूर्ण योगदान प्रस्तुत किया है। संजय सेठ का कहना था कि मोदी के 75वें जन्मदिन पर सेवा और समर्पण का संदेश आम जनता तक पहुंचाना ही इन कार्यक्रमों की मुख्य उद्देश्य है। इसके अलावा इस पखवाड़ा में 75 पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया जाएगा। सेठ ने बताया कि देश की सेवा में योगदान देने वाले इन सैनिकों को सम्मानित करना भारतीय जनता पार्टी के लिए गर्व का विषय होगा। इसी क्रम में 75 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और 75 खिलाड़ी भी सम्मान समारोह का हिस्सा होंगे। सांसद का मानना है कि यह पहल समाज के हर वर्ग से जुड़े लोगों को प्रेरित करने का काम करेगी। इस पखवाड़ में कई और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने सेवा और विकास की राह पकड़ी है। उनके 75वें जन्मदिन पर आयोजित यह सेवा पखवाड़ा उसी सोच का प्रतीक है जिसमें समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इस पखवाड़ा में साइक्लोथोन का मोराबादी में भी आयोजन किया जाएगा जिसमें 30000 लोग शामिल होंगे और साइक्लोथोन का हिस्सा बनेंगे। सेठ ने कहा कि भाजपा की कोशिश है कि इस पखवाड़ा में हर नागरिक की भागीदारी हो और यह आयोजन झारखंड की धरती से सेवा, सम्मान और समर्पण का संदेश पूरे देश तक पहुंचे।  

अमरपुर चुनाव: चिराग के समर्थन से जयंत राज कुशवाहा को बड़ी जीत की उम्मीद

अमरपुर  अमरपुर विधानसभा सीट बांका जिले में स्थित है…अमरपुर विधानसभा क्षेत्र बांका लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह सीट साल 1951 से ही अस्तित्व में है। इस सीट पर पहली बार साल 1951 में विधानसभा के चुनाव हुए और कांग्रेसी कैंडिडेट पशुपति सिंह चुनाव जीते थे। 1957 और 1962 में भी इस सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा रहा और शीतल प्रसाद भगत चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 1967 में एस.एन. सिंह और 1969 में सुख नारायण सिंह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। साल 1972 में भारतीय जन संघ के कैंडिडेट जनार्दन यादव विधायक बने थे। इसके बाद 1977 में भी जनार्दन यादव ही अमरपुर से विधायक चुने गए थे, लेकिन इस बार वे जनता पार्टी के तरफ से चुनावी मैदान में थे। इसके बाद 1980 और 1985 में कांग्रेस कैंडिडेट नील मोहन सिंह विधायक चुने गए थे। 1990 में इस सीट पर निर्दलीय माधो मंडल चुनाव जीते थे। 1995 से 2005 तक इस सीट पर आरजेडी का कब्जा रहा और सुरेंद्र प्रसाद सिंह लगातार तीन बार अमरपुर से विधायक चुने गए थे। 2010 और 2015 में जेडीयू कैंडिडेट जनार्दन मांझी लगातार दो बार विधायक चुने गए।  2020 में यहां से जेडीयू कैंडिडटे जयंत राज ने जीत हासिल की थी। जयंत राज प्रभावशाली कोइरी लीडर हैं। साथ ही में वे बिहार सरकार में मंत्री भी हैं, इसलिए अमरपुर में उनकी दावेदारी इस बार भी पक्की लग रही है। वहीं 2020 के चुनाव में अमरपुर सीट पर जेडीयू कैंडिडेट जयंत राज ने जीत हासिल की थी। जयंत राज को 54 हजार तीन सौ आठ वोट मिला था तो कांग्रेस कैंडिडेट जितेंद्र सिंह 51 हजार एक सौ 94 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। इस तरह से जयंत राज ने जितेंद्र सिंह को महज तीन हजार एक सौ 14 वोट के कम अंतर से हरा दिया। वहीं एलजेपी कैंडिडेट मृणाल शेखर 40 हजार तीन सौ आठ वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में अमरपुर सीट पर जेडीयू कैंडिडेट जनार्दन मांझी ने जीत हासिल की थी। जनार्दन मांझी ने बीजेपी कैंडिडेट मृणाल शेखर को 11 हजार सात सौ 69 वोटों से हराया था। जनार्दन मांझी को कुल 73 हजार सात सौ सात वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे मृणाल शेखर को कुल 61 हजार नौ सौ 34 वोट मिले थे तो वहीं 6 हजार आठ सौ 18 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं 2010 में अमरपुर सीट पर जेडीयू उम्मीदवार जनार्दन मांझी ने जीत हासिल की थी। मांझी ने आरजेडी कैंडिडेट सुरेंद्र प्रसाद सिंह को 18 हजार 7 वोटों से हराया था। जनार्दन मांझी को कुल 47 हजार तीन सौ वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे सुरेंद्र प्रसाद सिंह को कुल 29 हजार दो सौ 93 वोट मिले थे तो वहीं तीसरे स्थान पर रहे कांग्रेस कैंडिडेट राकेश कुमार सिंह को कुल 9 हजार पांच सौ 83 वोट मिले थे। वहीं 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में अमरपुर सीट पर आरजेडी कैंडिडेट सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जीत हासिल की थी। सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार वेदानंद सिंह को 2 हजार चार सौ एक वोट के अंतर से हराया था। सुरेंद्र प्रसाद सिंह को कुल 33 हजार छह सौ 79 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे वेदानंद सिंह को कुल 31 हजार दो सौ 78 वोट मिले थे तो वहीं तीसरे स्थान पर रहे लोजपा कैंडिडेट बेबी देवी को कुल 10 हजार 82 वोट मिले थे। अमरपुर विधानसभा सीट पर कोइरी,यादव,ब्राह्मण,भूमिहार,राजपूत,रविदास और कुर्मी वोटरों की निर्णायक संख्या है। वहीं मुस्लिम वोटरों का भी चुनावी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। 2020 के चुनाव में अमरपुर सीट पर लोजपा कैंडिडेट ने 40 हजार तीन सौ आठ वोट लाया था। हालांकि इसके बावजूद जेडीयू लीडर जयंत राज ने कम मार्जिन से विधानसभा चुनाव जीत लिया था। इस बार अगर लोजपा का वोट जेडीयू की तरफ ट्रांसफर हुआ तो जयंत राज बड़ी मार्जिन से जीत दर्ज कर सकते हैं।

बिहार को मिलेगी बड़ी सौगात! PM मोदी करेंगे नेशनल मखाना बोर्ड और एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन

पूर्णिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल कोलकाता में सशस्त्र बलों के संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. एक महीने से भी कम समय में प्रधानमंत्री का यह दूसरा बंगाल दौरा होगा. अधिकारियों ने बताया कि 15 से 17 सितंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित अन्य लोग भी शामिल होंगे.  पीएम मोदी असम के जोरहाट से आज शाम कोलकाता पहुंचेंगे और यहां राजभवन में रात्रि विश्राम करेंगे. अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री 15 सितंबर की सुबह भारतीय सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय विजय दुर्ग (पूर्व में फोर्ट विलियम) में संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने 22 अगस्त को अपने पिछले पश्चिम बंगाल दौरे पर 5,200 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया था.    उन्होंने कोलकाता में तीन मेट्रो रेलवे लाइनों का उद्घाटन करने के बाद, नोआपाड़ा से जय हिंद एयरपोर्ट स्टेशन तक की यात्रा भी की थी, जिसके दौरान उन्होंने स्कूली बच्चों और मेट्रो निर्माण श्रमिकों के साथ बातचीत की थी. प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में शस्त्र बलों के संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद 15 सितंबर की दोपहर कोलकाता से बिहार के पूर्णिया के लिए रवाना होंगे. वह यहां 36,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे और एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री पूर्णिया एयरपोर्ट के नवनिर्मित टर्मिनल का भी उद्घाटन करेंगे, जो इस क्षेत्र की हवाई संपर्क की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगा. वह राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का उद्घाटन भी करेंगे, जिसकी स्थापना की घोषणा इस साल की शुरुआत में केंद्रीय बजट में की गई थी. पीएम मोदी मखाना को सुपर फूड कहते हैं, जिसकी बिहार में बहुतायत में खेती होती है. देश के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा बिहार में ही होता है. पीएम मोदी के दौरे को लेकर पूर्णिया में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जहां नेशनल और स्टेट हाईवे पर वाहनों का परिचालन भी आज मध्य रात्रि से 24 घंटे के लिए स्थगित रहेगा. 

बिहार विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व का नया समीकरण, शंकराचार्य ने घोषित किए ‘गो भक्त’ प्रत्याशी

मधुबनी बिहार की राजनीति में सनातन आस्था और गौ रक्षा का मुद्दा एक नया मोड़ आ गया है। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने रविवार को ऐलान किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में बिहार की सभी 243 सीटों पर गौ भक्त निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे। उन्होंने साफ कहा कि अब समय आ गया है कि सनातन धर्म की रक्षा और गौ माता के सम्मान के लिए राजनीति में भी गौ भक्त अपनी ताक़त दिखाएं। शंकराचार्य महाराज ने गौ मतदाता संकल्प यात्रा निकालकर इस अभियान की औपचारिक शुरुआत की। इसी कड़ी में मधुबनी के रांटी चौक स्थित एक होटल के सभागार में आयोजित सभा में उन्होंने कहा सनातन धर्म की रक्षा तभी संभव है जब हम गौ माता का संरक्षण करेंगे। गौ रक्षा केवल हमारी आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और समाज की आधारशिला भी है। उन्होंने राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे स्वयं राष्ट्रीय पार्टियों के दिल्ली स्थित कार्यालयों में गए और सभी नेताओं से मांग की कि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए संसद में अपना पक्ष रखें। लेकिन आज तक किसी भी राजनीतिक दल ने इस विषय पर अपना स्पष्ट रुख नहीं बताया। उन्होंने कहा जब किसी भी दल ने गौ माता को लेकर अपनी स्थिति नहीं स्पष्ट की, तब हमें विवश होकर बिहार में अपने प्रत्याशी खड़े करने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा की सभी सीटों पर उनके समर्थक गौ भक्त चुनाव लड़ेंगे। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद औपचारिक रूप से प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक की जाएगी। शंकराचार्य ने कहा कि देश में जीतने भी बुचरखाने हैं उन्हें बंद करें सरकार नहीं तो नोटिस भेजा जाएगा। गो माता को राष्ट्र माता घोषित करने की अपील सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य जी ने सनातनी हिन्दुओं से अपील की कि वे आगामी चुनाव में केवल उन्हीं उम्मीदवारों को वोट दें, जो गौ रक्षा और गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की प्रतिबद्धता दिखाते हों। उन्होंने कहा हमारी लड़ाई किसी दल या व्यक्ति से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है, जो हमारी आस्था और संस्कृति की उपेक्षा करती रही है। मौके पर राधवाचार्य, भाजपा प्रदेश नेता अमरनाथ प्रसाद , कुंदन सिंह, साजन सिंह शिवम, रामलखन दास, , चंदन ठाकुर, अरुण झा, अनुपम झा उर्फ राजा सहित कई लोग थे।

खाद्य निगम घोटाले पर गिरी गाज: बिहार सरकार ने 12 अफसरों को किया सस्पेंड

पटना खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने राज्य खाद्य निगम के छह सहायक प्रबंधक एवं छह गुणवत्ता नियंत्रक को खराब गुणवत्ता के खाद्यान्न की आपूर्ति किए जाने के संबंध में विभागीय जांचोपरांत निलंबन की कार्रवाई की है। इससे पूर्व विभाग द्वारा कल छह आपूर्ति निरीक्षकों/प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को निलंबित किया गया था।  खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग पूरे राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुकानों में खाद्यान्नों की गुणवत्ता, मात्रा एवं समय पर खाद्यान्न की उपलब्धता के संबंध में राज्यव्यापी 'जीरो ऑफिस डे 'अभियान के तहत निरीक्षण अभियान चला रहा है। अब तक राज्य में राज्य के कुल 53,869 सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों में से 49,209 सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों का निरीक्षण कार्य संपन्न कर लिया गया है।  इस निरीक्षण अभियान के तहत खाद्यान्न की मात्रा, गुणवत्ता एवं सही समय पर खाद्यान्न की उपलब्धता के संबंध में शिकायत निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अब तक कुल 10,735 सर्वजानिक जन वितरण प्रणाली दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, 108 प्राथमिक की दर्ज की गई है तथा 178 सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुकानों का लाइसेंस रद्द किया गया है।   

तेजस्वी का PM मोदी पर हमला: ‘पूर्णिया में नहीं विकास, केवल जुमलों का महापर्व’

पटना बिहार के पूर्णिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 15 सितंबर 2025 को होने वाले इस दौरे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने तीखा तंज कसा है। बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी ने पीएम मोदी को 'जुमलों की बारिश' करने का आरोप लगाते हुए पूर्णिया के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) की बदहाली पर सवाल खड़े किए हैं। तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो शेयर कर सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमला बोला है। यह दौरा सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत करने के उद्देश्य से है, लेकिन विपक्ष इसे विकास के नाम पर प्रचार का हथियार बता रहा है। पीएम मोदी का दौरा और विकास परियोजनाएं आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी 15 सितंबर को पूर्णिया पहुंचेंगे, जहां वे पूर्णिया एयरपोर्ट पर नए सिविल एन्क्लेव का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, वे कई रेल परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे, जिसमें वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों को फ्लैग ऑफ करना शामिल है। यह दौरा बिहार में रेल और हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन परियोजनाओं से सीमांचल क्षेत्र के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि ये घोषणाएं कागजी हैं और जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आ रहा।   तेजस्वी की आलोचना और GMCH का हाल तेजस्वी यादव ने 13 सितंबर की रात पूर्णिया GMCH का अचानक निरीक्षण किया और वहां की बदतर स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जो वायरल हो गया। उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी जुमलों की बारिश करने आ रहे हैं। वे विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आय और सिंचाई की बात नहीं करेंगे। तेजस्वी ने पीएम से अपील की कि वे दौरा के दौरान GMCH का दौरा करें और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को साथ लाएं, ताकि 20 वर्षों की सरकार की नाकामी देख सकें। निरीक्षण में कई खामियां आई सामने निरीक्षण में सामने आई खामियां चौंकाने वाली हैं। GMCH में ICU और ट्रॉमा सेंटर का अभाव है, कार्डियोलॉजी विभाग नहीं चल रहा। एक बेड पर तीन-तीन मरीज लेटे हैं, बेडशीट 15-20 दिनों से नहीं बदली गई। ऑर्थोपेडिक और दिव्यांग मरीजों के लिए शौचालय पहुंच से बाहर हैं। नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है—255 स्वीकृत पदों पर केवल 55 भरे हैं, जिससे ड्यूटी पर मात्र 18 नर्सें हैं। डॉक्टरों के 80% पद खाली हैं, और पूरे कॉलेज में सिर्फ चार ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट हैं। कई विभाग बंद पड़े हैं, मेडिकल इंटर्न को छह माह से वेतन नहीं मिला।

बिहार चुनाव के मद्देनजर जीतन राम मांझी ने NDA को दी चुनौती, मंत्री पद छोड़ने की चेतावनी

पटना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अंदर क्या सबकुछ ठीक नहीं है? सीट बंटवारे को लेकर कोई गतिरोध नहीं होने का दावा तो बेकार लग रहा है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सीधे नहीं, लेकिन संकेतों में सीट को लेकर अपनी जिद का इजहार कर ही रहे। अब, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सीधे शब्दों में कह दिया है कि एनडीए के साथ रहते हुए लड़ने के लिए बिहार विधानसभा की 20 सीटें नहीं मिलीं तो वह 100 सीटों पर प्रत्याशी उतार देंगे। तो क्या जीतन राम मांझी बिहार चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं? और, आखिर इस जीत के पीछे की वजह क्या है? इस जिद के पीछे की वजह पहले जाननी चाहिए जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा- सेक्युलर के अभी चार विधायक हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के पहले उसके पास एक विधायक की ताकत थी। 2020 के चुनाव में उसे तीन सीटों का फायदा हुआ और विधायकों की संख्या हो गई चार। मांझी की पार्टी ने एनडीए समर्थन के साथ सात सीटों पर प्रत्याशी दिए थे। इनमें से एक पर जमानत जब्त हो गई थी। दरअसल, मांझी की पार्टी चार विधायकों और एक सांसद के बावजूद भारत निर्वाचन आयोग के लिए एक 'निबंधित गैर-मान्यताप्राप्त दल' है। निबंधित मान्यता प्राप्त दल बनने के लिए उसे बिहार में आठ विधायकों वाली पार्टी का ओहदा हासिल करना है। आठ या 10 सीटों पर लड़कर यह संभव नहीं है। ऐसे में आठ सुनिश्चित जीत के लिए 15 से 20 सीटों पर प्रत्याशी उतारना उसके लिए जीवन-मरण का प्रश्न है। केंद्रीय मंत्री की कुर्सी छोड़ने की हिम्मत जुटाएंगे? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के साथ मंत्री की कुर्सी संभालने वाले कुछ नेताओं को याद करना होगा। बिहार में उपेंद्र कुशवाहा इसका बड़ा उदाहरण हैं। वह केंद्रीय राज्यमंत्री थे, लेकिन कुर्सी छोड़ बिहार चुनाव में कूदे और लंबे समय तक वजूद की लड़ाई लड़ने के बाद फिर भाजपा की शरण में हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड को भारतीय जनता पार्टी से दूर करने में कथित तौर पर अहम भूमिका निभाने वाले राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह केंद्रीय मंत्री बनकर वापस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शान में कसीदे गढ़ते नजर आ रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में एनडीए से अलग होकर सरकारी आवास तक से बाहर रहने का दर्द झेल चुके चिराग पासवान केंद्रीय मंत्री बनकर अब एनडीए से कभी दूर नहीं होने की बात कहते हुए सीटों के लिए संकेत भर दे रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के पहले केंद्रीय मंत्री का पद छोड़कर भागे पशुपति कुमार पारस तब से अब तक वजूद की ही लड़ाई लड़ रहे हैं। अब जाकर इंडी एलायंस में ठौर मिलने का संकेत मिला है। इन केस स्टडी को आधार बनाकर चाणक्य इंस्टीट्यू ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा पक्के तौर पर कहते हैं-  "चार विधायकों और इकलौते सांसद वाली अपनी पार्टी को जीतन राम मांझी जितनी सीट दिला सकें, वही उनके लिए फायदेमंद रहेगा। वह खुद केंद्र में मंत्री हैं और बेटे राज्य में। ऐसे में वह एनडीए से बाहर जाकर न तो चिराग पासवान वाली पिछली गलती करेंगे और न उपेंद्र कुशवाहा या पशुपति कुमार पारस जैसा कुछ।" 

अफीम की खेती पर कड़ा कदम: सरायकेला-खरसावां में पुलिस अभियान और ग्रामीणों की शपथ

रांची झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस ने इस वर्ष अफीम की अवैध खेती को रोकने और उसकी संभावना को नगण्य करने की दिशा में प्री कल्टीवेशन ड्राइव चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में अफीम जैसी मादक फसल की खेती को रोकना और लोगों को वैकल्पिक कृषि की ओर प्रोत्साहित करना है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक सरायकेला-खरसावां के नेतृत्व में आज दलभंगा ओपी परिसर में एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में स्थानीय मानकी मुण्डा, ग्रामीण प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आमजन ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान सभी ने एक स्वर में यह शपथ ली कि वे अफीम की खेती नहीं करेंगे और इस दिशा में पुलिस प्रशासन को पूरा सहयोग देंगे। बैठक में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सरायकेला ने उपस्थित ग्रामीणों को स्थानीय भाषा में अफीम की खेती और इसके सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि अफीम की खेती करना गंभीर कानूनी अपराध है, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे अफीम की जगह वैकल्पिक खेती अपनाकर न केवल कानूनन सुरक्षित रह सकते हैं, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बना सकते हैं। ग्रामीणों को धान, मक्का, दलहन और अन्य फसलों की खेती को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया। साथ ही पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया कि कृषि विभाग और प्रशासनिक सहयोग से किसानों को आवश्यक जानकारी व मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इस अभियान को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी पुलिस की पहल का स्वागत किया और इसे ग्रामीणों के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।  

पलामू में जबरदस्त मुठभेड़: सुरक्षाबलों ने 5 लाख का इनामी नक्सली किया ढेर

पलामू,  झारखंड के पलामू जिले के मनातू जंगल में रविवार को सुरक्षाबलों और प्रतिबंधित नक्सली संगठन टीएसपीसी (तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी) के बीच हुई मुठभेड़ में 5 लाख का इनामी नक्सली मुखदेव यादव मारा गया। जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों ने 10 लाख के इनामी कमांडर शशिकांत को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। कोबरा, झारखंड जगुआर और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम जब कॉम्बिंग कर रही थी, तभी नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में मुखदेव यादव मारा गया। मुखदेव पर कई गंभीर मामले दर्ज थे और वह तीन सितंबर को पलामू में हुई उस मुठभेड़ में भी शामिल था, जिसमें पुलिस के दो जवान शहीद हुए थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रविवार का अभियान अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन है, जिसमें 200 से अधिक सुरक्षाकर्मी शामिल रहे। शशिकांत के दस्ते में 8 से 10 सदस्य होने की जानकारी मिली है, जिनमें मुखदेव और एक अन्य इनामी नक्सली नगीना भी शामिल था। इसके पहले 7 सितंबर को पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा थाना क्षेत्र के बुर्जुवा पहाड़ी पर मुठभेड़ में पुलिस और सुरक्षा बलों ने दस लाख के इनामी नक्सली अमित हांसदा उर्फ अपटन को ढेर कर दिया था। बोकारो जिले के ढोडी गांव का रहने वाला अमित 96 नक्सली वारदातों में वांटेड था। झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में हर महीने औसतन तीन नक्सली मुठभेड़ में मारे जा रहे हैं। पुलिस का अनुमान है कि फिलहाल राज्य में 100 से 150 माओवादी सक्रिय हैं। फिलहाल 58 नक्सली इनामी सूची में हैं, जिन पर कुल 5 करोड़ 46 लाख रुपए का इनाम घोषित है। झारखंड पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में भाकपा माओवादी के 13 बड़े नक्सली हैं, जिनमें मिसिर बेसरा, पतिराम मांझी और असीम मंडल पर एक-एक करोड़ का इनाम है। इनके अलावा, अनमोल, मोछु, अजय महतो, अगेन अंगरिया, अश्विन, पिंटू लोहरा, चंदन लोहरा, जयकांत और रापा मुंडा भी सूची में शामिल हैं। इस साल नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ी मुठभेड़ 21 अप्रैल को हुई थी, जब बोकारो जिले के लुगु पहाड़ पर एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक सहित आठ माओवादी मारे गए थे। झारखंड पुलिस और केंद्रीय बल मार्च 2026 तक राज्य को नक्सल मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत अभियान चला रहे हैं। इस वर्ष जनवरी से अब तक कुल 24 नक्सली मारे जा चुके हैं।  

डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में रिम्स शासी परिषद बैठक, स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए निर्देश जारी

रांची झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान रांची (रिम्स), में आज रिम्स शासी परिषद की एकक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने की। बैठक में जस्टिस अमरेश्वर सहाय, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, स्थानीय विधायक सुरेश कुमार बैठा, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, रिम्स निदेशक, रांची विश्वविद्यालय के कुलपति, रिमपास निदेशक, वित्त विभाग के प्रधान सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में झारखंड उच्च न्यायालय के गाइडलाइन्स के आलोक में 16 प्रमुख एजेंडों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इसमें परचेजिंग में देरी और उससे उत्पन्न समस्याएं, ट्रॉमा सेंटर की सुविधाएं व खामियां, रखरखाव व्यवस्था और खराब वेंटीलेटरों की स्थिति, आवश्यक मशीनों की खरीद और उपयोग, इलाज की वर्तमान स्थिति और सुधार की रूपरेखा शामिल था। शेष एजेंडों पर विचार के लिए 9 अक्टूबर को दोबारा बैठक बुलाई जाएगी। बैठक में यह भी तय हुआ कि रिम्स की व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अंसारी ने कहा कि एम आर आई मशीन की खरीद प्रक्रिया को त्वरित गति देने का आदेश निदेशक को दिया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी ड्यूटी के दौरान बाहर प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री डा. इरफान अंसारी ने कहा कि कोर्ट के निर्देश पर परिषद की बैठक बुलाई गई थी और कोर्ट को संतुष्ट करने के लिए विस्तृत जवाब भी दिया गया है। वहीं, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी विभाग पर सवाल उठाए और कहा कि रिम्स की स्थिति सही नहीं है। झारखंड ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीज भी यहां इलाज के लिए आते हैं।