samacharsecretary.com

बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव, कई IPS अधिकारियों की नई पोस्टिंग

 पटना  सम्राट चौधरी सरकार ने बिहार पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 16 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया है। गृह विभाग ने रविवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) सुधांशु कुमार को अब एडीजी विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नैयर हसनैन बीसैप भेजे गए वहीं, नैयर हसनैन खान को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से हटाकर बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीसैप) की जिम्मेदारी दी गई है। विकास वैभव को मगध क्षेत्र (गया) का पुलिस महानिरीक्षक (IG) बनाया गया है। अधिसूचना के अनुसार, असैनिक सुरक्षा के एडीजी और 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी परेश सक्सेना को इसी विभाग में पुलिस महानिदेशक (DG) बनाया गया है। तकनीकी सेवाएं एवं संचार के एडीजी निर्मल कुमार आजाद को पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के एडीजी डॉ. अमित कुमार जैन अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के एडीजी होंगे। बजट, अपील एवं कल्याण के एडीजी डॉ. कमल किशोर सिंह को रेलवे में एडीजी बनाया गया है, जबकि एडीजी प्रोविजनिंग अजीताभ कुमार को राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण की जिम्मेदारी दी गई है। एडीजी (प्रशिक्षण) संजय सिंह अब एडीजी (बजट, अपील एवं कल्याण) होंगे। चर्चित आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा को राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो से हटाकर एडीजी तकनीकी सेवाएं एवं संचार बनाया गया है। विकास वैभव बने मगध के आईजी एडीजी सुरक्षा अमृत राज को एडीजी साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई की जिम्मेदारी दी गई है। गृह विभाग (विशेष शाखा) के विशेष सचिव केएस अनुपम को अपराध अनुसंधान विभाग में एडीजी (कमजोर वर्ग) बनाया गया है। विकास वैभव को बिहार राज्य योजना परिषद के परामर्शी पद से हटाकर मगध क्षेत्र का पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया है। रेलवे आईजी पी. कन्नन को आईजी प्रोविजनिंग बनाया गया है। वहीं, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के आईजी रंजीत कुमार मिश्र अब अपराध अनुसंधान विभाग के आईजी होंगे। बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के आईजी संजय कुमार को विशेष शाखा का पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है।

बिहार के व्यापारी बंगाल से लीची खरीदकर महानगरों की मांग पूरी करने को मजबूर

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर के व्यापारी अपना कारोबार बचाने के लिए इस बार पश्चिम बंगाल से लीची खरीद रहे हैं। जिले में मौसम की मार और स्टिंक बग कीट के प्रकोप से बगानों में 30 फीसदी लीची भी नहीं बची है। किसान अपने बगान को देख हताश हैं तो जिले के दर्जनों बड़े व्यापारी बंगाल का रूख कर रहे हैं। दरअसल, यहां के किसानों से खरीदे गए लीची के बगान की हालत देख व्यापारी झांकने आना भी नहीं चाहते। यही कारण है कि जिले के कांटी, मीनापुर, बोचहां आदि प्रखंडों के दर्जनों व्यापारी बंगाल जाकर किसानों का लीची का बाग खरीद रहे हैं। बंगाल की लीची से पूरा करेंगे महानगरों का ऑर्डर कांटी के लीची व्यापारी बबलू शाही ने बताया कि मुजफ्फरपुर से हर साल 50 टन से अधिक लीची बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, लखनऊ समेत देश के विभिन्न शहरों में भेजते हैं। इस बार भी मंजर देख हमलोग उत्साहित थे। आज 30 फीसदी लीची भी नहीं दिख रही है। प. बंगाल में 15 मई से लीची की तुड़ाई शुरू होने लगती है, इसलिए हमारे साथ दर्जनों व्यापारी बंगाल आए हैं। इस बार बंगाल से ही लीची खरीद महानगरों की मांग पूरी करेंगे। मुशहरी के व्यापारी संतू महतो ने बताया कि 12 एकड़ लीची का बाग खरीदा था। आज किसानों को पैसे देने लायक भी लीची नहीं है। उद्यान रत्न किसान भोलानाथ झा ने कहा कि लीची की हालत देख बाग में जाना छोड़ दिए हैं। कमजोर फसल से दो लाख मजदूरों के रोजगार पर संकट बिहार लीची एसोसिएशन के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि मुजफ्फरपुर जिले में 15 हजार हेक्टेयर में लीची के बाग हैं। इससे हर साल सीजन में दो लाख से अधिक मजदूरों को रोजगार मिलता था। हर साल करीब 125 हजार टन लीची का उत्पादन होता है। फसल बर्बाद होने पर भी 70-80 हजार टन लीची मिल जाती थी। इस बार 25 से 30 हजार टन लीची उत्पादन भी मुश्किल है। बताया कि जिले में छोटे-बड़े मिलाकर तीन हजार से अधिक बगान हैं। एक बगान में 25 से 50 मजदूरों को एक माह तक रोजगार मिलता था। वहीं, लीची प्रसोसेसिंग यूनिट के संचालक आलोक केडिया ने बताया कि लीची के सीजन में ग्रेड बी लीची का पल्प तैयार होता है। इसमें लीची की छिलाई में मजदूरों को काम मिलता है। इस बार फसल कमजोर होने से मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ेगा। इसके आलवा ट्रांसपोटिंग तुड़ाई, गुच्छा बनाने में मजदूर को काम मिलता है।

हरनौत में कृषि सखियों की बहाली पर गड़बड़ी का आरोप, डीएम ने जांच के दिए आदेश

हरनौत राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत सभी प्रखंडों में पिछले साल दो-दो कृषि सखियों की बहाली की गयी है। इनका काम किसानों से आंकड़ा जुटाना और उन्हें प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करना था। जीविका की अनुशंसा पर कृषि विभाग द्वारा बहाली की जानी थी। इस बहाली में अब गड़बड़ी की आशंका सामने आ रही है। हरनौत प्रखंड की दो महिलाओं ने डीएम को आवेदन देकर जांच की मांग की है। इस मामले पर जिला कृषि पदाधिकारी व जीविका डीपीएम के विरोधाभाषी बयान देकर आमने-सामने आ गये हैं। वहीं डीएम कुंदन कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया है।आवेदन के अनुसार जीविका की ओर से दोनों का चयन किया गया था। जीविका के प्रखंड परियोजना प्रबंधक ने दोनों के नामों की अनुशंसा कर पत्र प्रखंड कृषि कार्यालय को भेजा था। बाद में पता चला कि उनके स्थान पर किसी और की बहाली कर ली गयी है। यानि, जीविका की अनुशंसा की अनदेखी की गयी। जीविका के सूत्रों की मानें तो कई प्रखंडों से ऐसे मामले सामने आये हैं। जीविका की ओर से भेजे गये नामों को हटाकर अन्य की बहाली कर ली गयी। क्या है आरोप हरनौत के प्रेमलता देवी व मुन्नी देवी ने डीएम को बताया कि जीविका की ओर से उन्हें चुना गया था। बीपीएम ने पत्र देकर उन्हें सूचना दी थी। उन्होंने जिला कृषि कार्यालय में मिट्टी जांच की ट्रेनिंग भी ली। इसके बाद उन्हें किसानों की सूची तैयार करने का काम दिया गया। गांव-गांव घूमकर उन्होंने किसानों से जानकारी लेकर सूची बनायी। प्रखंड कृषि कार्यालय में इस जानकारी को कंम्प्यूटर पर अपलोड कराया। करीब तीन महीने तक उन्होंने काम किया। इसके बाद प्रखंड कृषि कार्यालय से बताया गया कि किसी दूसरे का चयन कर लिया गया है। एक दूसरे पर टाल रहे कृषि विभाग-जीविका के अधिकारी इस मामले को कृषि विभाग व जीविका के अधिकारी एक-दूसरे पर टाल रहे हैं। कृषि विभाग इसका ठीकरा जीविका पर फोड़ रहा है। वहीं, जीविका का कहना है कि उन्होंने नामों की अनुशंसा की थी। बहाली का काम कृषि विभाग का था। दोनों महिलाएं एक से दूसरे विभागों में चक्कर लगा रही हैं। डीएओ ने स्पष्ट रूप से कहा कि बहाली हो गयी है। अब इस मामले में कुछ नहीं हो सकता है। जानकार बताते हैं कि यह बात तय है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी हुई है। गड़बड़ी किसने और क्यों की है, यह जांच का विषय है।

सरकारी अस्पतालों की मशीनें अब रहेंगी दुरुस्त, नई फंडिंग मंजूर

 पटना  राज्य में चिकित्सा उपकरणों को सुचारू रूप से चालू रखने के लिए चलाए जा रहे चिकित्सा उपकरण प्रबंधन एवं रख-रखाव कार्यक्रम के तहत राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहली किस्त जारी करने की स्वीकृति दी गई है। इस क्रम में 13 करोड़ 20 लाख रुपये की राशि खर्च के लिए मुक्त की गई है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने बिहार के स्वास्थ्य विभाग को उपकरणों के रखरखाव के लिए चालू वित्तीय वर्ष में कुल 50 करोड़ 82 लाख रुपये की आवश्यकता जताई थी, जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष की बकाया राशि का भुगतान भी शामिल है। समिति ने हवाला दिया कि प्रदेश के मेडिकल कलेज अस्पतालों से लेकर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्थापित उपकरणों को लगातार कार्यशील बनाए रखने के लिए लिए व्यापक रख-रखाव और प्रबंधन की व्यवस्था लागू की गई है। इसके लिए निविदा प्रक्रिया के माध्यम से एक सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन किया गया है। सरकार और एजेंसी से हुए करार के बाद उपकरणों के रखरखाव का कार्य जारी है। विभाग के अनुसार, पूर्व आकलन के अनुसार, राज्य के विभिन्न अस्पतालों में स्थापित उपकरणों की कुल संपत्ति का मूल्य करीब 978 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि इसे 1200 करोड़ रुपये तक होने की संभावना व्यक्त की गई है। इन उपकरणों के रख-रखाव पर सेवा शुल्क सहित हर वर्ष बड़ी राशि खर्च की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस व्यवस्था से सरकारी अस्पतालों में मशीनों की खराबी कम होगी और मरीजों को बेहतर व निर्बाध चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।  

रांची में कर्मचारी पेंशन विवाद, हाई कोर्ट ने सरकार की कार्यशैली पर जताई नाराजगी

रांची  झारखंड हाई कोर्ट में गुमला जिला के बैजनाथ जालान कालेज, सिसई के तृतीय वर्गीय कर्मचारी दिनेश साहू को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिए जाने के मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने उच्च शिक्षा निदेशक की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि जब समान परिस्थितियों वाले दूसरे कर्मियों को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ दिया जा चुका है, तो प्रार्थी को इससे वंचित रखना उचित नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित उच्च शिक्षा निदेशक सुधीर बाड़ा को निर्देश दिया कि वे आठ सप्ताह के भीतर मामले की पुनः समीक्षा कर दिनेश साहू को पंचम एवं छठा वेतनमान का लाभ देते हुए पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान सुनिश्चित करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले सप्ताह में निर्धारित करते हुए अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया था कि विभाग ने सकारण आदेश पारित कर प्रार्थी को एकल पीठ के आदेश के अनुरूप लाभ नहीं देने का निर्णय लिया है। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उस सकारण आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि दिनेश साहू का मामला उपेंद्र प्रसाद एवं अन्य कर्मियों के मामले के समान है। कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी का समायोजन और नियमितीकरण भी उसी पत्र के आधार पर हुआ था, जिसके आधार पर उपेंद्र प्रसाद एवं अन्य कर्मियों को लाभ मिला। इसलिए दिनेश साहू को भी वही लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रार्थी के मामले में सरकार ने अब तक कोई अपील दाखिल नहीं की है, जबकि उपेंद्र प्रसाद मामले में अपील समय सीमा के भीतर दाखिल नहीं होने के कारण खारिज हुई थी। इसका हवाला देकर प्रार्थी के मामले को लंबित रखना अनुचित है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने अदालत को बताया कि दिनेश साहू वर्ष 2022 में बैजनाथ जालान कालेज, सिसई (गुमला) से तृतीय वर्गीय कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें फिलहाल प्रोविजनल रूप से पंचम वेतनमान का लाभ मिल रहा है। उनकी सेवा समायोजन और नियमितीकरण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में वर्ष 2005 और 2007 में हुआ था। दिनेश साहू के मामले में सरकार ने एकल पीठ के आदेश को कभी चुनौती ही नहीं दी। बता दें कि हाई कोर्ट की एकल पीठ ने वर्ष 2024 में ही दिनेश साहू को पंचम एवं छठा वेतनमान का लाभ देते हुए पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान करने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन नहीं होने पर प्रार्थी ने अवमानना याचिका दाखिल की है।

पटना में डिप्टी सीएम पद को लेकर भ्रम, विजय कुमार चौधरी ने बताया- पद समाप्त नहीं हुआ

 पटना  उप मुख्यमंत्री से जुड़ी मंत्रिमंडल विभाग की अधिसूचना को लेकर इंटरनेट मीडिया पर बहस चल रही है। यूजर प्रश्न पूछ रहे हैं-क्या राज्य में उप मुख्यमंत्री का पद समाप्त हो गया है? विभागीय सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने साफ किया-उप मुख्यमंत्री का पद समाप्त नहीं हुआ है। वह कायम है। हरेक अधिसूचना में पदनाम का उल्लेख करना जरूरी नहीं होता है। 7 मई की अधिसूचना पर शुरू हुई चर्चा बहस की शुरुआत सात मई की अधिसूचना से हुई है। इसमें मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विभागों को अधिसूचित किया गया है। पदनाम में मुख्यमंत्री और मंत्री लिखा हुआ है। विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम के साथ उप मुख्यमंत्री पदनाम का उल्लेख नहीं है। इन दोनों का नाम भी मंत्रियों की श्रेणी में है। नाम के साथ विभागों का विवरण दिया गया है। विभागीय सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने पूछने पर बताया कि 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री के अलावा दो उप मुख्यमंत्रियों का शपथ ग्रहण हुआ था। उस दिन जारी अधिसूचना में दोनों के पदनाम उप मुख्यमंत्री दिए गए हैं। वही मान्य है। वैसे, सोशल मीडिया के यूजर इस तर्क से सहमत नहीं हैं। वे पिछले साल के 21 नवंबर को जारी इसी विभाग की अधिसूचना का हवाला दे रहे हैं। डिप्‍टी सीएम के रूप में व‍िजय कुमार स‍िन्‍हा का नाम उसमें तत्कालनीन उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा के नाम के सामने उप मुख्यमंत्री लिखा हुआ है। वैसे संविधान में उप मुख्यमंत्री के पद का उल्लेख नहीं है। उसमें मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के अन्य पदधारक मंत्री, राज्य मंत्री, उप मंत्री आदि की चर्चा है। आज भी मुख्यमंत्री को छोड़ कर मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य मंत्री पद की ही शपथ लेते हैं। मुद्रण की भूल हो सकती है: उप मुख्यमंत्री सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नाम के साथ पदनाम का जिक्र नहीं होना मुद्रण की भूल हाे सकती है।विभाग वाले इसमें सुधार कर लेंगे।

रांची में फीस वसूली पर कार्रवाई, रांची के स्कूलों को चेतावनी

 रांची  जिले के निजी स्कूलों पर शुल्क वसूली और अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) गठन को लेकर सख्ती बरतते हुए उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने 16 सीबीएसई- 2 आईसीएसई स्कूलों को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। जिन स्कूलों ने वार्षिक फीस स्ट्रक्चर और (पीटीए) का विवरण नहीं दिया है, उनके खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि एडमिशन व एनुअल चार्ज के नाम पर वसूले गए शुल्क को इस वर्ष की मासिक फीस में समायोजित करने का एक्शन प्लान 10 से 15 दिनों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपा जाए। यह निर्देश रांची के मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में दिए गए। बैठक में जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्यों व प्रतिनिधियों ने शिरकत की। उपायुक्त ने (पीटीए) गठन की समीक्षा की, जिसमें बताया गया कि जिले के कुल 149 सीबीएसई- आईसीएसई स्कूलों में से 131 ने अभिभावक-शिक्षक संघ का गठन कर लिया है। शेष 18 स्कूलों ने अभी तक जानकारी नहीं दी है। इनमें से दो स्कूलों को शोकॉज नोटिस भेजा जाएगा। साथ ही, बैठक में अनुपस्थित स्कूलों की कार्यात्मक स्थिति की जांच के आदेश भी दिए गए। बैठक का मुख्य फोकस स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि और वार्षिक शुल्क वसूली पर रहा। चर्चा में पाया गया कि कई स्कूल प्रबंधन (आरटीई) राइट-टू-एजुकेशन नियमों का उल्लंघन करते हुए नर्सरी से 12वीं तक 37 से 106 प्रतिशत तक वार्षिक शुल्क बढ़ा रहे हैं। उपायुक्त ने जोर देकर कहा कि फीस संरचना तर्कसंगत, पारदर्शी और अभिभावक अनुकूल होनी चाहिए, ताकि परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने स्कूलों को निर्देशित किया कि स्कूल बस चालकों की पूरी जानकारी शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराएं, जिससे प्रशासन ड्राइवर का सत्यापन कर सके। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत कमजोर वर्ग के 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन के दिशा-निर्देश भी दोहराए गए। उपायुक्त ने चिंता जताई कि कुछ स्कूल टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) जारी करने के लिए 25 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं, जो चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है। जिला प्रशासन शिक्षा क्षेत्र में पूर्ण पारदर्शिता चाहता है। नए सत्र के लिए शीघ्र बीपीएल बच्चों की लाटरी आयोजित की जाएगी। एक्शन प्लान पर अगले 10 दिनों में साक्षात्कार या ऑनलाइन बैठक होगी। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने स्कूल प्रतिनिधियों से अपील की कि अभिभावकों के हित में नियमों का पालन करें। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस पहल से रांची के अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर उन परिवारों को जो महंगी फीस से जूझ रहे हैं। बैठक में यह पाया गया कि राइट टू एजुकेशन एक्ट का उलंघन कर सभी 149 निजी स्कूलों ने प्रति वर्ष वार्षिक शुल्क बढ़ाया है। जिनमें केवल 2 वर्षों में वार्षिक शुल्क 10 प्रतिशत बढ़ानी हैं। इसपर स्कूल प्रबंधन ने अपना जवाब में पुन: विचार करने का आश्वासन दिया। इसी दौरान जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश बैठक में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री उपस्थित सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्य व प्रतिनिधियों को सेंसस 2027 के अंतर्गत पोर्टल के माध्यम से स्वगणना करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है, इसके लिए बच्चों को भी जानकारी दें ताकि वो अपने माता-पिता अभिभावक को डिजिटल माध्यम से स्वगणना करने को कहें। जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज द्वारा बताया गया कि स्व-गणना अंतर्गत आनलाइन पोर्टल (एसई डाट सेंससडाट जीओभी डाट इन ) (se.census.gov.in) के माध्यम से स्वयं अपने परिवार व आवास संबंधी जानकारी आनलाइन उपलब्ध कराया जा सकता है। ये हैं बैठक में अनुपस्थित स्कूल जिन्हें किया गया शोकाज नोटिस     वाईबीएन पब्लिक स्कूल मैक्लुस्कीगंज     संत कोलंबस मूरबू     कैंब्रियन पब्लिक स्कूल रांची     सेंट्रल एकैडमी कांके     शाईन वैली स्कूल     रायल प्रोग्रेस स्कूल डकरा     झारखंड पब्लिक स्कूल डकरा     कैंब्रियन बीजूपाड़ा     सचिदानंद पब्लिक स्कूल डोरंडा     स्टार इंटरनेशनल स्कूल नगड़ी     एलए गार्डन स्कूल सामलोंग     छोटानागपुर पब्लिक स्कूल     आर्मी पब्लिक स्कूल दीपाटोली     सरस्वती शिशु विद्या मंदिर डकरा     सेंट्रल एकेडमी बरियातू     बलदेव पब्लिक स्कूल     उर्सुलाईन सिल्ली मूर     माउंट कार्मेंल ओरमाझी  

बिहार के रोहतास में औद्योगिक पुनर्जागरण की तैयारी, डालमियानगर रेल कारखाने को मिला बजट

 रोहतास  डालमियानगर औद्योगिक परिसर में चार दशक से पसरा अंधेरा अब छंटने की उम्मीद जगी है। रेलवे द्वारा 430.20 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने के बाद एक बार फिर इस ऐतिहासिक औद्योगिक परिसर के गुलजार होने की संभावना बढ़ गई है। कभी देश-विदेश में अपनी पहचान रखने वाला डालमियानगर औद्योगिक परिसर स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ा रहा है। ले‍क‍िन वर्तमान में यहां सन्‍नाटा है। एश‍िया के बड़े औद्योग‍िक समूह में थी गिनती एक समय एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक परिसरों में शामिल रोहतास उद्योग समूह का यह क्षेत्र दुधिया रोशनी से जगमगाता था, लेकिन वर्ष 1984 में रोहतास उद्योग समूह में तालाबंदी के बाद यहां सन्नाटा और अंधेरा छा गया। वर्ष 2007 से परिसमापन की प्रक्रिया में चल रहे रोहतास उद्योग समूह को रेलवे ने करीब 240 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसके बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी कि इस क्षेत्र की औद्योगिक पहचान फिर लौटेगी। लोकसभा चुनाव 2009 से पहले तत्कालीन रेलमंत्री Lalu Prasad Yadav ने यहां रेल वैगन मरम्मत कारखाने का शिलान्यास किया था। उस समय लोगों को लगा कि डालमियानगर के अच्छे दिन लौट आएंगे, लेकिन यूपीए-2 सरकार के दौरान यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। प्रधानमंत्री से मिलकर की गई मांग वर्ष 2015 में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन सांसद Upendra Kushwaha और शाहाबाद क्षेत्र के अन्य सांसदों ने प्रधानमंत्री से मिलकर यहां रेल कारखाना स्थापित करने की मांग उठाई। जून 2017 में रेल मंत्रालय में हुई बैठक में राइट्स को यहां रेल वैगन मरम्मत एवं कपलर कारखाना स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। केंद्र सरकार ने इसके लिए बजटीय प्रावधान भी किया। वर्ष 2018 में परिसर के कबाड़ की नीलामी 94 करोड़ रुपये से अधिक राशि में की गई। प्रस्तावित रेल कारखाने के लिए चिह्नित 219 एकड़ भूमि से कबाड़ हटाकर उसे समतल भी कर दिया गया। डीएफसीसी निर्माण बना बाधा इस परियोजना के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन (DFCC) का निर्माण बड़ी बाधा बन गया। प्रस्तावित रेल वैगन मरम्मत कारखाने के समीप से गुजर रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के कारण रेल लाइन ले जाना मुश्किल हो गया। रेलवे ने वर्ष 2020 में बजटीय प्रावधान होने के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाने में असमर्थता जताई। इसके बाद राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने प्रयास किया। उन्‍होंने रेलमंत्री अश्‍वि‍नी वैष्‍णव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद पहलेजा रेलवे स्टेशन के पास से फ्लाईओवर के जरिए डालमियानगर तक रेलवे ट्रैक ले जाने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को भेजा गया। अब रेलवे ने वर्ष 2026-27 के रेल बजट में डालमियानगर रेल वैगन मरम्मत कारखाने के लिए 430.20 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इससे इलाके के लोगों में एक बार फिर औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद जाग उठी है।  

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मां को नमन कर साझा की भावुक तस्वीर, सोशल मीडिया पर वायरल

पटना  मातृ दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भावुक संदेश और वीडियो साझा कर अपनी मां को याद किया। सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट में उन्होंने मातृत्व की महत्ता, त्याग और संस्कारों की भावना को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया। माता को नमन करती तस्‍वीर की साझा मुख्यमंत्री ने अपनी दिवंगत माता पार्वती देवी को नमन करते हुए एक तस्वीर भी साझा की। तस्वीर पर लिखा था, मां ही पहली गुरु, पहली मित्र और ईश्वर का सबसे सुंदर स्वरूप है। एक मां का स्नेह, त्याग और आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। इसके साथ उन्होंने समस्त मातृशक्ति को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि ईश्वर से उनकी प्रार्थना है कि सभी माताएं सदैव स्वस्थ, सुखी और सम्मानित रहें। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मां केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि त्याग, ममता और संस्कारों की सबसे बड़ी शक्ति होती हैं। वह बिना किसी अपेक्षा के अपना पूरा जीवन परिवार और बच्चों के लिए समर्पित कर देती हैं। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान और उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। 2022 में हो गया था सम्राट चौधरी की माता का निधन मुख्यमंत्री का यह भावुक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी भावनाओं की सराहना करते हुए अपनी माताओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी की माता पार्वती देवी का वर्ष 2022 में निधन हो गया था। वे वर्ष 1998 के उपचुनाव में समता पार्टी के टिकट पर विधायक भी चुनी गई थीं। राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भूमिका को आज भी याद किया जाता है।  

रमा निषाद बनीं बिहार सरकार की सबसे अमीर मंत्री, करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

पटना बिहार सरकार के 10 मंत्री मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अधिक अमीर हैं। सीएम सहित 35 मंत्रियों में 32 करोड़पति हैं। केवल तीन ही मंत्री लखपति हैं। सबसे अधिक धनी भाजपा कोटे की पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद हैं जबकि सबसे कम संपत्ति वाले लोजपा आर कोटे के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास 6.38 करोड़ की संपत्ति है। महिला मंत्रियों की औसत संपत्ति पुरुष मंत्रियों से तीन गुना अधिक है। सरकार में पांच महिला मंत्री हैं। इनकी औसत संपत्ति 16 करोड़ से अधिक है। वहीं पुरुष मंत्रियों की औसत संपत्ति 4.68 करोड़ है। आंकड़ों के अनुसार, शीर्ष पांच स्थान पर रहे मंत्रियों के पास मंत्रिमंडल की कुल संपत्ति का 46 फीसदी है। सभी मंत्रियों की कुल संपत्ति 220.89 करोड़ है। पांच शीर्ष मंत्रियों के पास 102 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। जबकि पांच सबसे गरीब मंत्रियों के पास सिर्फ 3 करोड़ 63 लाख की संपत्ति है। रमा सबसे अमीर, श्वेता दूसरे स्थान पर सबसे अधिक अमीर मंत्री रमा निषाद के पास 31.86 करोड़ की संपत्ति है। दूसरे स्थान पर डॉ. श्वेता गुप्ता हैं, जिनके पास 29.24 करोड़ की संपत्ति है। तीसरे स्थान पर अशोक चौधरी हैं, जिनके पास 22.39 करोड़ की संपत्ति है। अन्य मंत्रियों में शीला कुमारी के पास 9.50 करोड़, डॉ. दिलीप जायसवाल के पास 9.33 करोड़, शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के पास 9.25 करोड़, विजय कुमार सिन्हा के पास 8.81 करोड़, श्रेयसी सिंह की 7.62 करोड़ तो दामदोर रावत के पास 6.70 करोड़ की संपत्ति है। कुमार शैलेन्द्र के पास 6.68 करोड़ संपत्ति है।