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मादक पदार्थों के खिलाफ सख्ती, किशनगंज पुलिस ने बनाई विशेष एएनटीएफ टीम

किशनगंज बिहार के किशनगंज जिले में बढ़ते मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से पुलिस कप्तान ने बड़ा कदम उठाया है। किशनगंज पुलिस ने बिहार की पहली एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) का गठन किया है। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि जिले को सूखे नशे के कारोबार से मुक्त कराने के लिए यह विशेष टीम पूरी गंभीरता और रणनीति के साथ काम करेगी। एसपी संतोष कुमार ने बताया कि बिहार में पहली बार किसी जिले में इस प्रकार की विशेष एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों, उनके नेटवर्क, फंडिंग और आकाओं तक पहुंच कर पूरे अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करना है। इस विशेष टास्क फोर्स का नेतृत्व एसडीपीओ मंगलेश कुमार सिंह करेंगे, जबकि इंस्पेक्टर राजू को इसका प्रभारी बनाया गया है। टीम में कुल 12 पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल किए गए हैं, जिन्हें विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जेल से छूटने के बाद भी रहेगी निगरानी पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। एएनटीएफ उन तस्करों की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखेगी जो जेल से छूट चुके हैं या भविष्य में रिहा होंगे। ऐसे लोगों पर प्रिवेंटिव एक्शन लेते हुए दोबारा अपराध में शामिल होने से रोकने की रणनीति तैयार की गई है। एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी करेगी, जिसके माध्यम से आम लोग गुप्त रूप से मादक पदार्थों की तस्करी या सेवन से जुड़ी जानकारी पुलिस तक पहुंचा सकेंगे। एसपी संतोष कुमार ने कहा कि बिहार में पहली बार किसी जिले में इस प्रकार की विशेष एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों, उनके नेटवर्क, फंडिंग और आकाओं तक पहुंच कर पूरे अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करना है। युवाओं को जागरूक करने पर भी रहेगा जोर एसपी संतोष कुमार ने कहा कि पुलिस केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि युवाओं और आम लोगों के बीच जागरूकता अभियान भी चलाएगी। स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों पर नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा ताकि युवा पीढ़ी को इस जाल में फंसने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि जो लोग नशे के सेवन के आदी हैं, उन्हें नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती करवाने की दिशा में भी पहल की जाएगी। पुलिस प्रशासन का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून से नहीं बल्कि सामाजिक सहयोग और जागरूकता से भी जीती जा सकती है। एसपी ने जिलेवासियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किशनगंज को सूखे नशे से मुक्त कराना पुलिस की प्राथमिकता है और इस मिशन को हर हाल में पूरा किया जाएगा। एएनटीएफ का मुख्य कार्य जिले और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय मादक पदार्थ तस्करी गिरोहों की पहचान करना, उनके आपराधिक इतिहास का अध्ययन करना तथा उनके नेटवर्क और सप्लाई चैन की पूरी जानकारी जुटाना होगा। पुलिस इन अपराधियों का विस्तृत डोजियर तैयार करेगी ताकि संगठित रूप से इनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। एसपी ने कहा कि यह टास्क फोर्स सूचना संकलन और सत्यापन के बाद छापेमारी करेगी तथा कानूनी कार्रवाई को अंजाम देगी। इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त लोगों की संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस का प्रयास रहेगा कि गिरफ्तार तस्करों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाकर जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए।

Jharkhand University Act 2026 लागू, नियुक्ति और प्रमोशन नियम बदलेंगे

 रांची  झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के लागू होने के बाद उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग इसके अनुपालन के लिए लगभग आधा दर्जन स्टैच्यूट (परिनियम) गठित करने की तैयारी कर रहा है। सारे परिनियम विश्वविद्यालयों में संरचनात्मक सुधार से संबंधित हैं। नए अधिनियम में कुलपतियों से लेकर विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के नियुक्ति, सेवाशर्त एवं प्रोन्नति से संबंधित प्रविधानों में बदलाव हुआ है। सभी से संबंधित अलग-अलग परिनियम लागू किए जाएंगे। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 के तहत विश्वविद्यालयों में पहली बार विभिन्न विभागों के लिए निदेशक पद के प्रविधान किए गए हैं। परिनियम गठित कर इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया भी निर्धारित की जाएगी। विश्वविद्यालयों में विभिन्न बोर्ड के गठन को लेकर भी नीतियां तैयार होंगी। विश्वविद्यालयों में अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मियों की नियुक्ति के लिए झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन की भी प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी। इसके लिए भी अलग से परिनियम गठित किया जाएगा। छात्रों तथा शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की शिकायतों के निपटारे के लिए कमेटी और न्यायाधिकरण के भी प्रविधान अधिनियम में पहली बार किए गए हैं। इन सभी निकायों के गठन के लिए भी परिनियम गठित किया जाएगा। छात्रसंघ चुनाव के लिए भी प्रविधान छात्र संघ चुनाव के लिए भी प्रविधान में बदलाव किया गया है। साथ ही पहली बार प्रति कुलाधिपति के पद का प्रविधान किया गया है। गठित होने वाले सारे परिनियम पर कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल की भी स्वीकृति ली जाएगी। परिनियम में विश्वविद्यालयों, अंगीभूत एवं संबद्ध कालेजों तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारों का स्पष्ट रेखांकन किया जाएगा। बताते चलें कि राज्यपाल की स्वीकृति के बाद राज्य में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय सेवा अधिनियम अधिसूचित हो चुका है। इस अधिनियम को लागू करने के लिए ही विभिन्न परिनियमों का गठन किया जा रहा है।

ठेला-खोमचा पर महंगाई की मार, फास्ट फूड की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी

रांची  शहर में बढ़ती महंगाई के बीच अब ठेला-खोमचा और स्ट्रीट फूड भी आम लोगों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है। गैस सिलिंडर की किल्लत और ब्लैक में अधिक कीमत पर गैस खरीदने की मजबूरी ने फास्ट फूड से लेकर पारंपरिक नाश्ते तक की कीमतें बढ़ा दी है। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग, मजदूर, छात्र और रोज कमाकर खाने वाले लोगों पर पड़ रहा है, जो सस्ते और गर्म खाने के लिए ठेला-खोमचा पर निर्भर रहते हैं। शहर के कई इलाकों में एग रोल, चौमिन, पकौड़ी, समोसा, जलेबी, कचौड़ी और कुलचा-नान जैसे खाद्य पदार्थों के दाम में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है। पहले 30 से 40 रुपये में मिलने वाला एग रोल अब 60 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं 8 रुपये में बिकने वाला समोसा, आलू चाप और कचौड़ी अब 10 रुपये से लेकर कई जगहों पर 15 रुपये प्रति पीस तक बिक रहा है। गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से दुकानदारों को उठानी पड़ रही परेशानी इसी तरह 10 रुपये प्लेट मिलने वाली पकौड़ी अब 20 रुपये तक पहुंच गई है। जलेबी का भाव भी 30 रुपये पाव से बढ़कर 40 रुपये पाव हो गया है। कुलचा-नान और अन्य फास्ट फूड की कीमतों में भी लगभग 20 रुपये तक का इजाफा देखा जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शहर के कई फास्ट फूड दुकानदारों ने बताया कि जितनी संख्या में गैस सिलेंडर की जरूरत होती है, उतनी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मजबूरी में उन्हें अधिक कीमत देकर बाहर से गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। एक गैस सिलिंडर पांच से छह दिनों तक चलता एक फास्ट फूड संचालक ने बताया कि चौमिन, चिल्ली और एग रोल बनाने में रोजाना अधिक गैस की खपत होती है। लेकिन गैस नहीं मिलने से खर्च बढ़ गया है, जिसके कारण खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाने पड़े हैं। वहीं एक समोसा दुकानदार ने कहा कि उनकी दुकान में एक गैस सिलेंडर पांच से छह दिनों में खत्म हो जाता है। समय पर सिलेंडर नहीं मिलने पर उन्हें ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ती है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई छोटे दुकानदार घरेलू गैस सिलिंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन यह उनकी मजबूरी बन चुकी है। बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी उधर, ठेला-खोमचा में खाना खाने वाले लोगों का कहना है कि उनकी आय सीमित है और बड़े होटल या रेस्टोरेंट में खाना उनके बजट से बाहर है। ऐसे में ठेला-खोमचा ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा है। लोगों ने बताया कि कम कीमत में ताजा और गर्म खाना मिलने के कारण वे वर्षों से स्ट्रीट फूड पर निर्भर हैं, लेकिन अब यहां भी लगातार बढ़ती कीमतों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

बिहार में सामाजिक बहिष्कार का फरमान: परिवार ने बेटी का कराया प्रतीकात्मक दाह संस्कार

मुजफ्फरपुर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रेम विवाह करने वाली एक युवती को गांव की पंचायत ने सामाजिक रूप से ‘मृत’ घोषित कर दिया। पंचायत के दबाव में परिजनों ने अपनी ही बेटी का प्रतीकात्मक दाह संस्कार कर दिया। मामला जिले के मड़वन प्रखंड क्षेत्र के एक गांव का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार युवती अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई थी। इस घटना के बाद गांव में नाराजगी फैल गई और पंचायत बुलाई गई। पंचायत ने युवती के परिवार के सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुनाया। पंचायत ने परिवार के सामने रखी शर्त ग्रामीणों ने परिवार से कहा कि यदि उन्हें गांव और समाज में फिर से रहना है तो अपनी बेटी का पूरी तरह बहिष्कार करना होगा। पंचायत का फरमान इतना कठोर था कि परिवार को बेटी को ‘मृत’ मानने के लिए मजबूर होना पड़ा। बताया जा रहा है कि गांव और समाज में अपनी जगह बनाए रखने के लिए परिजनों ने बेटी को कागजों और रस्मों में मृत घोषित कर दिया। प्रेमी के साथ शादी कर ससुराल चली गई युवती मामले में पहले युवती के परिजनों ने करजा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवती को बरामद किया और कोर्ट में पेश किया। न्यायालय में युवती ने बयान दिया कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से युवक के साथ शादी की है। उसने अपने पति के साथ रहने की इच्छा जताई। युवती ने अपने परिजनों पर ससुराल पक्ष को प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने युवती को उसकी इच्छा के अनुसार उसके ससुराल भेज दिया। जिंदा लड़की की निकाली गई अर्थी पंचायत के फैसले के बाद युवती के परिवार ने गांव वालों के साथ मिलकर उसका सांकेतिक दाह संस्कार किया। ग्रामीणों के अनुसार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार पूरे कार्यक्रम को किया गया। बताया गया कि युवती का प्रतीकात्मक शव तैयार किया गया, जिसमें उसकी तस्वीर रखी गई। इसके बाद अर्थी सजाकर गांव में शव यात्रा निकाली गई।   श्मशान घाट में किया गया पुतले का दाह संस्कार शव यात्रा के बाद लोगों ने श्मशान घाट पहुंचकर मंत्रोच्चारण के बीच पुतले का दाह संस्कार कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा कार्यक्रम उसी तरह किया गया, जैसे किसी व्यक्ति के निधन के बाद अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। घटना के बाद गांव में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है, लेकिन अधिकांश लोग खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वहीं यह मामला सामाजिक सोच और पंचायत के फैसलों को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।  

पथ निर्माण विभाग का बड़ा फैसला, 185 अभियंताओं को मिलेगा करोड़ों का वेतन लाभ

 रांची  वित्तीय वर्ष 2022-23 में नियुक्त सहायक अभियंताओं को लगभग चार वर्षों के बाद विनियमन का फायदा देने का निर्णय लिया गया है। इसको लेकर पथ निर्माण विभाग ने आदेश जारी भी कर दिया गया है लेकिन, यह आदेश वित्त विभाग की ओर से जारी आपत्ति को दरकिनार कर निकाला गया है। अब सहायक अभियंताओं को विनियमन का लाभ मिलता है तो खजाने से करोड़ों की राशि निकल जाएगी। जेपीएससी के माध्यम से बहाल 185 सहायक अभियंताओं को 23 दिनों से लेकर 125 दिनों तक का वेतन बैठे-बिठाए मिलेगा। पूरी सूची में कुल मिलाकर चार लोग ही ऐसे हैं जिन्हें एक भी दिन के विनियमन का लाभ नहीं मिलेगा। झारखंड में सरकार की आंख में धूल झोंककर गबन करनेवाले कर्मियों का एक और कारनामा सामने आया है। राज्य में लगभग तीन वर्ष पूर्व नियुक्त सहायक अभियंताओं की नियुक्ति के साथ शर्त यह थी कि उन्हें प्रभार ग्रहण करने की तिथि से वेतन मिलेगा। कुछ कर्मियों ने पत्र जारी होने के साथ ही प्रभार ग्रहण कर लिया और कुछ अन्य को सेवा आवंटित होने में तीन-चार महीने का समय लग गया। इसके बाद वेतन के भुगतान काे लेकर सहायक अभियंताओं ने अपने विभाग से लेकर वित्त विभाग तक दौड़ लगाई। लंबे प्रयास के बावजूद वित्त विभाग ने पूर्व से निर्धारित सेवा शर्तों का हवाला देते हुए अभियंताओं की इस मांग का ठुकरा दिया और उनके मूल विभाग को भी आपत्ति की जानकारी दे दी। इसके बाद कई अभियंता कोर्ट भी गए लेकिन उनको अभी तक राहत नहीं मिली। इस बीच पथ निर्माण विभाग के द्वारा न्यायालय में लिए गए विभागीय निर्णय के विपरीत यूटर्न लेते हुए वित्त विभाग की सहमति के बगैर अपने स्तर से भुगतान का आदेश निर्गत कर दिया गया। इसके तहत जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि कोर्ट के निर्णय से फैसला प्रभावित होगा। हास्यास्पद यह है कि पथ निर्माण विभाग उच्च न्यायालय में अपील में भी गया हुआ है और वो मांग भी न्यायालय के बाहर ही पूरा कर दिया। सेवा शर्त में योगदान देने की तिथि से वेतन भुगतान की बात सहायक अभियंताओं की नियुक्ति के लिए विभाग की ओर से जारी सेवा शर्तों में स्पष्ट तौर पर उल्लेख है कि पदभार ग्रहण करने की तिथि से वेतन एवं भत्ता मिलेगा। आदेश की कंडिका 12 के अनुसार सेवा संहिता के नियम -58 एवं वित्तीय नियमावली के नियम 74 के तहत वेतन एवं भत्ता पदभार ग्रहण करने की तिथि से देय होगा। इस बीच, अभियंताओं ने लगातार प्रयास कर इस पत्र के इस अंश को संशोधित करवा लिया और नया आदेश जारी करवाया। नवंबर 2022 को जारी हुई थी अधिसूचना, मार्च में नियुक्त हुए सहायक अभियंताओं की नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना 14 नवंबर 2022 को जारी हुई थी। इसके कुछ दिनों के बाद इन अभियंताओं को पथ निर्माण विभाग में नियुक्ति का निर्देश मार्च 2023 में जारी किया गया है। इस आदेश के बाद लगभग 5 करोड़ रुपये तक का भुगतान करना पड़ेगा। डोरंडा में ज्वाइन करने को 30 दिन और साहेबगंज के लिए एक दिन का समय इन सहायक अभियंताओं को डोरंडा में ज्वाइन करने के लिए तीस दिनों का समय दिया गया तो साहिबगंज में ज्वाइन करने के लिए एक दिन का समय दिया गया। ज्ञात हो कि डोरंडा राजधानी के बीचों बीच है और विभाग से चंद किमी की दूरी पर है जबकि साहिबगंज एक तरह से झारखंड का अंतिम छोर है। वित्त विभाग की ओर से पूर्व में निर्धारित नियमों के अनुसार अधिकतम सात दिनों में ज्वाइन करने का प्रविधान है लेकिन कर्मियों को एक महीने का समय दिया गया है। आश्चर्यजनक है कि कुछ अभियंताओं की पोस्टिंग योगदान दिये बिना ही कर दी गई है।

शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति सुधार की तैयारी, 100 करोड़ की लागत से पाइपलाइन विस्तार

 रांची  राज्य के शहरी इलाकों में पेयजल स्वच्छता विभाग जलापूर्ति के लिए घरों तक पाइप लाइन बिछा चुका है। हालांकि कई शहरों में नए बसे क्षेत्र या नगर निगम की सीमा पर स्थित मोहल्लों में पाइप लाइन नहीं पहुंचाया जा सका है। अब नगर विकास विभाग और पेयजल स्वच्छता विभाग ने शहरों के बचे हुए क्षेत्र में भी पाइप लाइन बिछाने और साल के अंत तक घरों में पानी पहुंचाने की योजना बनाई है। इसके लिए 100 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। बचे हुए तीन लाख घरों तक पानी पहुंचाने के अलावा इस पाइप लाइन में विस्तार की संभावना भी है। राज्य सरकार अपने बजट से यह योजना पूर्ण करेगी। नगर निकायों से इसके लिए लिस्ट सौंपने को कहा गया है। जिन घरों तक पाइपलाइन पहुंच चुका है, वहां भी जल्द ही जलापूर्ति प्रारंभ कर दी जाएगी। अमृत योजना पूर्ण होने पर आठ लाख घरों तक पहुंचेगा पानी राज्य में अमृत- एक और अमृत- दो के अलावा सुनिश्चित जल सुविधा की योजना चल रही है। इस साल तीनों योजनाओं के लिए पर्याप्त फंड भी उपलब्ध है। इसके पूर्ण होने पर आठ लाख नए घरों तक पानी पहुंचने लगेगा। केंद्र सरकार ने इन योजनाओं के अगले चरण की प्रारंभिक रिपोर्ट भी मांगी है। तीनों योजनाओं के पूर्ण होने के बाद इसका विस्तार भी किया जाएगा बरसात में जल की शुद्धता बनाए रखना चुनौती पेयजल स्वच्छता विभाग ने बारिश के बाद भूगर्भ जल में होने वाले प्रदूषण मानकों की जांच के लिए जिला स्तर पर तैयारियां की हैं। इसके अलावा खुले जल स्रोत की भी जांच की जाएगी। जल सहियाओं को इसके लिए किट उपलब्ध कराए गए हैं। जल में किसी तरह के प्रदूषण की जानकारी होने पर स्थानीय निकाय इसकी जगह दूसरे स्रोत से आपूर्ति की व्यवस्था करेंगे।  

पतरातू में राज्य स्तरीय इंफ्लुएंसर सम्मेलन, पर्यटन ब्रांडिंग पर होगी चर्चा

 रांची  राज्य सरकार राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट मीडिया इंफ्लुएंसरों का भी सहयोग प्राप्त करेगी। इसे लेकर इंफ्लुएंसर इंगेजमेंट पॉलिसी लागू की जाएगी। पर्यटन, कला संस्कृति एवं खेलकूद विभाग ने सोमवार को राज्य स्तरीय इंफ्लुएंसर सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें इस पॉलिसी का शुभारंभ होगा। यह सम्मेलन पतरातू स्थित होटल पर्यटन विहार में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य राज्य के प्रमुख इंटरनेट मीडिया इंफ्लुएंसर्स को एक मंच पर लाना है, जहां झारखंड के ब्रांडिंग और प्रमोशन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। पॉलिसी के लागू होने के बाद राज्य के इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन विभाग के साथ जुड़कर काम करने का मौका मिल सकेगा। इंफ्लुएंसर को भी होगा फायदा विभाग का मानना है कि यह पॉलिसी डिजिटल क्रिएटर्स और पर्यटन विभाग के बीच औपचारिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। पॉलिसी में झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों के डिजिटल माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने वाले इंफ्लुएंसर्स को पारिश्रमिक भी प्रदान किया जाएगा। साथ ही विभाग डिजिटल कंटेट के निर्माण में आवश्यक सहयोग भी प्रदान करेगा।

ग्रामीण सड़क निर्माण में बिहार अव्वल, राष्ट्रीय स्तर पर मिला सर्वोच्च सम्मान

पटना ग्रामीण बसावटों को पक्की सड़क से जोड़ने में बिहार को देश में अव्वल स्थान मिला है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 10 मई को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भेरूंदा में आयोजित राष्ट्रीय समारोह का आयोजन किया गया। इसमें बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग को इसके लिए राष्ट्रीय स्तर का सर्वोच्च सम्मान मिला है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सर्वाधिक गांव और टोलों को पक्की सड़कों से जोड़ने के मामले में बिहार ने यह कीर्तिमान स्थापित किया है। बिहार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अब तक 31,287 ग्रामीण बसावटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़कर देश भर में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। इस राष्ट्रीय रैंकिंग में मध्य प्रदेश 17,493 बसावटों के साथ दूसरे तथा ओडिशा 16,990 बसावटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा है। इसके साथ बिहार ने केवल ग्रामीण सड़कों के निर्माण में ही नहीं, बल्कि उनके गुणवत्तापूर्ण अनुरक्षण में भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों के अनुरक्षण एवं रखरखाव की श्रेणी में भी बिहार ने बड़े राज्यों के बीच पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। रखरखाव के मामले में बिहार दूसरे नंबर पर बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग ने 553 करोड़ रुपये खर्च कर ग्रामीण सड़कों का रखरखाव सुनिश्चित किया है। इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश 654 करोड़ रुपये के व्यय के साथ प्रथम, बिहार दूसरे तथा पश्चिम बंगाल 497.62 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर रहा है। विभागीय पदाधिकारी बताते हैं कि ग्रामीण कार्य विभाग के सतत प्रयास से राज्य के हर गांव तक सुरक्षित, सुगम और बारहमासी सड़क संपर्कता सुनिश्चित हो रही है।  

रैयती जमीन निबंधन प्रक्रिया होगी पारदर्शी, सीओ देंगे 10 दिनों में पूरी रिपोर्ट

पटना रैयती जमीन के निबंधन से पहले खरीदारों को उस जमीन के बारे में पूरी जानकारी जल्द मिलने लगेगी। बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के दो महकमों राजस्व एवं भूमि सुधार और मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इसकी तैयारी कर ली है। सभी सीओ को भी प्रशिक्षित किया जा चुका है। जमीन निबंधन के लिए मोबाइल यूनिट भी तैयार की गई है। इसी माह बिहार में इसकी शुरुआत होने की संभावना है। जमीन रजिस्ट्री कराते समय आवेदकों को निबंधन पोर्टल पर 13 तरह की जानकारी देनी होगी। सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत दस्तावेज निबंधन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। 16 फरवरी को ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने संयुक्त रूप से सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि पूर्ण जानकारी के अभाव में जमीन रजिस्ट्री होने से अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो रहे हैं। इसके बाद निर्णय लिया गया कि पक्षकार चाहें तो उनको संबंधित भूमि के बारे में आधिकारिक जानकारी दी जाएगी। जिस जमीन की रजिस्ट्री होनी है, आवेदकों को उसके लिए पोर्टल पर निबंधन कार्यालय का नाम, अंचल, मौजा, थाना संख्या, खाता संख्या, खेसरा, भूमि का रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी, जमाबंदी धारक का नाम, क्रेता, विक्रेता का नाम आदि बताना होगा। अंचलाधिकारी जांच-पड़ताल कर 10 दिनों में आवेदक को पूरी जानकारी एसएमएस से मुहैया कराएंगे। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव ने कहा कि जमीन निबंधन के पहले खरीदारों को इससे संबंधित पूरी जानकारी जल्द ही मिलने लगेगी। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। मोबाइल यूनिट भी तैयार कर ली गई है। सहयोग पोर्टल का आज शुभारंभ करेंगे मुख्यमंत्री इधर बिहार में आम लोगों की शिकायतों के तुरंत निष्पादन से संबंधित सहयोग पोर्टल का सीएम सम्राट चौधरी सोमवार को शुभारंभ करेंगे। पोर्टल बिहार सरकार का रीयल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम है। यह जनता की शिकायतों के समय पर, पारदर्शी और जवाबदेहीपूर्ण निवारण को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। यह नागरिकों को एक एकीकृत ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से शिकायतें दर्ज करने, स्थिति की जानकारी प्राप्त करने, रिमाइंडर भेजने और प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाएगा। यह प्रणाली बिहार सरकार के सभी विभागों में कुशल सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। आम लोगों से सुविधापूर्वक शिकायतें प्राप्त करने के लिए पंचायत में 19 मई से शिविर भी लगने हैं। 19 मई से प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय मंगलवार को पंचायत स्तर पर "सहयोग शिविर" आयोजित किया जाएगा।

प्री-मानसून बारिश से बिहार में रिकॉर्ड 193% अधिक वर्षा, कई जिलों में तेज हवाएं

 पटना पुरवा के प्रभाव के बीच पूरे बिहार में नमी का प्रसार लगातार जारी है। इस कारण उत्तर बिहार के 19 जिलों में आंधी-पानी का अलर्ट जारी किया गया है। इन स्थानों पर 50-60 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने के आसार हैं। वहीं, पटना में बादल छाये रहेंगे। मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार अगले पांच-छह दिनों तक हवा के रुख में बदलाव के कुछ खास आसार नहीं हैं। पटना सहित दक्षिण बिहार में आंशिक बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। रविवार को पटना सहित 11 जिलों के तापमान में वृद्धि दर्ज की गई। मौसम विभाग की ओर से रविवार को जारी बारिश आंकड़ों के अनुसार पूर्णिया के जलालगढ़ में सर्वाधिक वर्षा 35 मिमी दर्ज की गई। राज्य भर में प्री-मानसून के दौरान प्रदेश में अब तक सामान्य से 193 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। सामान्य वर्षा का मानक 37.8 मिलीमीटर जबकि सूबे में इस दौरान 111 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई है। पटना का अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस एवं 38.4 डिग्री सेल्सियस के साथ भभुआ में सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया। कहां कितनी बारिश लखीसराय के चानन में 32.2 मिमी, भभुआ के मोहनियां में 25.6 मिमी, नालंदा के सरमेरा में 25.2 मिमी, जमुई के लक्ष्मीपुर में 22.6 मिमी, मुंगेर के संग्रामपुर में 22.4 मिमी, नालंदा के बिंद में 20, गयाजी में 18.8, कटिहार के मनिहारी में 18.2, नालंदा के सिलाव में 17.4, दरभंगा के जाले में 17.2, सीतामढ़ी के डुमरा में 16.8, भभुआ के अधवारा में 14.8, नवादा के रजौली में 14.8, औरंगाबाद में 14.6 मिमी, शेखपुरा में 14.2 मिमी, बेगूसराय के मटियानी में 12.6 मिमी, नालंदा के अस्थावां में 12.4 मिमी एवं पूर्णिया के श्रीनगर में 12.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। गयाजी जिले में कैसा मौसम मौसम विशेषज्ञ एस के पटेल ने बताया कि 10 मई को हिमालय के क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ बना है। इसका असर 12 मई से हो सकता है। गयाजी जिले में अगले दो दिनों में पुरवैया चलेगी। अभी नमी वाला हवा चल रही है। इसलिए लू से राहत रहेगी। उन्होंने बताया कि अभी सुबह से धूप निकलने और दोपहर बाद ही मौसम बिगड़ने का अनुमान है। दोपहर बाद तेज हवा व गरज के साथ बारिश के आसार बने हैं।