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रक्षाबंधन के मौके पर भोपाल की सड़कों पर बदलेगा ट्रैफिक रूट, पुराने शहर में लगेंगे प्रतिबंध

 भोपाल रक्षाबंधन पर शहर के प्रमुख बाजारों में खरीदी करने वालों की भीड़ को देखते हुए भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने शनिवार (9 अगस्त) को पार्किंग और यातायात व्यवस्था में बदलाव किया है। जुमेराती, चौक बाजार, न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, बैरागढ़ समेत कई इलाकों में व्यवस्था में बदलाव।पुलिस का कहना है कि भीड़ और जाम से बचने के लिए लोग अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और वाहन केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़े करें। पुराना शहर में लोडिंग व चार पहिया वाहनों की एंट्री बंद जनकपुरी, जुमेराती, छोटे भैया चौक, घोड़ा नक्कास चौक, हनुमानगंज और आजाद मार्केट जैसे भीड़भाड़ वाले आंतरिक बाजारों में त्योहार के दिन लोडिंग वाहन, ऑटो रिक्शा और चार पहिया वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा।     करोंद, डीआईजी बंगला, सिंधी कॉलोनी और शाहजहांनाबाद से आने वाले चार पहिया वाहन भोपाल टॉकीज चौराहे से बाल विहार ग्राउंड में पार्क होंगे।     भारत टॉकीज की ओर से आने वाले दोपहिया वाहन सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में पार्क किए जाएंगे।     संगम टॉकीज से सब्जी मंडी होकर आने वाले तीन और चार पहिया वाहन सब्जी मंडी परिसर में पार्क होंगे।     लखेरापुरा, इतवारा, मारवाड़ी रोड, इब्राहिमपुरा से चौक बाजार जाने वाले वाहनों की एंट्री बंद रहेगी। इन्हें सरस्वती स्कूल के पास मल्टीलेवल पार्किंग और सदर मंजिल के पास पार्क किया जाएगा। 10 नंबर मार्केट में वन-वे ट्रैफिक भीड़ के समय वंदेमातरम् चौक से 10 नंबर मार्केट की ओर जाने वाले वाहन केवल 10 नंबर मार्केट तिराहे होते हुए नेशनल अस्पताल तक ही जा सकेंगे। इसी तरह साढ़े 10 नंबर स्टॉप से भी यही रूट रहेगा। नेशनल अस्पताल से 10 नंबर मार्केट और वंदेमातरम् चौक की ओर सीधा आवागमन बंद रहेगा। न्यू मार्केट, एमपी नगर और बैरागढ़ में तय पार्किंग न्यू मार्केट में मल्टीलेवल पार्किंग (टीटी नगर थाने के पास) का उपयोग करना होगा। भीड़ बढ़ने पर रंगमहल चौक से थाना चौक और टीटी क्रॉस से थाना चौक की ओर यातायात डायवर्ट किया जाएगा। एमपी नगर जोन-1 और बैरागढ़ (चंचल चौक) में भी मल्टीलेवल पार्किंग का उपयोग करना अनिवार्य होगा। व्यापारियों से अपील पुलिस ने कहा है कि व्यापारी माल लोडिंग- अनलोडिंग का काम केवल रात 12 बजे से सुबह 7 बजे के बीच करें। वहीं निर्धारित स्थानों पर ही वाहन पार्क करें, जिससे जाम से बचा जा सके। भीड़भाड़ से बचने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना बेहतर होगा।  

रायसेन में आज सीएम से मिलेगी 1548 करोड़ के निवेश और विकास परियोजनाओं की भेंट

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव औद्योगिक विकास को धरातल पर उतारने के अपने सतत प्रयासों के क्रम में शुक्रवार को रायसेन जिले के तामोट औद्योगिक क्षेत्र में निवेश संवाद, इकाइयों के भूमिपूजन, लोकार्पण और आशय पत्र वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री तामोट में संचालित सागर मैन्युफैक्चरर प्रा. लि. की इकाई का भ्रमण करेंगे और रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित सामाजिक कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेसर्स आनंद टैक लास्ट प्राइवेट लिमिटेड प्लास्टिक पार्क का भ्रमण भी करेंगे। वे उद्योगपतियों से संवाद करेंगे और प्रदेश में बन रहे निवेश अनुकूल वातावरण से उन्हें अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव औद्योगिक क्षेत्र तामोट में 566 करोड़ रुपये के निवेश एवं 1781 रोजगार देने वाली 14 इकाइयों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण के साथ आशय पत्र वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 416 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी करेंगे। वे औद्योगिक क्षेत्र तामोट में 300 करोड़ के निवेश एवं 970 रोजगार देने वाली 6 इकाइयों का भूमिपूजन और 116 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश एवं 211 रोजगार देने वाली 6 इकाइयों का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री उद्यमियों को भूमि आवंटन से संबंधित आशय-पत्र प्रदान करेंगे और औद्योगिक विकास के प्रति प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं को साझा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह प्रयास निवेशकों को आश्वस्त करने के साथ-साथ युवाओं के लिए नए रोजगार अवसरों का रास्ता भी खोलेगा। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा एमएसएमई प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह प्रदेश की औद्योगिक रणनीति और नीतिगत परिवर्तनों की जानकारी साझा करेंगे। जे.बी.एम, विनप्रो और मंडीदीप औद्योगिक एसोसिएशन जैसे प्रमुख निवेशक समूहों के प्रतिनिधि प्रदेश में निवेश अनुकूल माहौल और प्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों के संबंध में विचार साझा करेंगे। 

राज्य स्तरीय बैठक में बनी रणनीति, 13 अगस्त को होगा नशामुक्ति संकल्प

भोपाल केन्द्र सरकार के निर्देश पर “नशामुक्त भारत अभियान (NMBA)” अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय नशामुक्ति समिति की बैठक सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण प्रमुख सचिव, श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर की अध्यक्षता में मंत्रालय में संपन्न हुई। बैठक में भारत सरकार सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार दिनांक 1 अगस्त से 31 अगस्त 2025 तक चलाए जा रहे वृहद नशामुक्ति जनजागरूकता अभियान की जानकारी दी गई। साथ ही 13 अगस्त 2025 को पूरे प्रदेश में एक साथ QR कोड एवं e-Pledge के माध्यम से सामूहिक नशामुक्ति शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सभी विभागों से सहभागिता की अपील की गई। नशे से बचाव के लिए जनजागरूकता की दिशा में राज्य शासन के विभिन्न विभागों, धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक संगठनों एवं नशामुक्ति क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा अपने विचार एवं सुझाव भी प्रस्तुत किए गए। बैठक में उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, आयुष, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, अनुसूचित जाति कल्याण, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, जेल, श्रम, जनजातीय कार्य, महिला एवं बाल विकास, जन-अभियान परिषद, राज्य स्काउट-गाइड, धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक संगठन – अखिल विश्व गायत्री परिवार, इस्कॉन मंदिर, आर्ट ऑफ लिविंग, रामचन्द्र मिशन एवं नशामुक्ति के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।  

रक्षाबंधन पर Ekaa Welfare Foundation द्वारा रोड सेफ्टी अवेयरनेस अभियान – एक रक्षासूत्र, सुरक्षा के नाम

भोपाल  रक्षाबंधन का पर्व जहाँ भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक है, वहीं यह एक-दूसरे की सुरक्षा और जिम्मेदारी का भाव भी जगाता है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए आज 08 अगस्त 2025, व्यापम चौराहा, भोपाल पर Ekaa Welfare Foundation द्वारा एक विशेष रोड सेफ्टी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से लोगों से अपील की गई कि वे हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना, गति सीमा का पालन करना और ट्रैफिक नियमों को गंभीरता से लेना अपनी आदत बनाएं – न कि सिर्फ एक औपचारिकता। फाउंडेशन की अध्यक्ष सुश्री नेहा बग्गा ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को भावुक कर देने वाला संदेश देते हुए कहा:  "राखी का यह धागा सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि एक वादा है – अपनों की सुरक्षा और जीवन की हिफ़ाज़त का। जब कोई व्यक्ति सड़क पर निकलता है, तो उसके पीछे कोई उसका इंतज़ार करता है – माँ, बहन, जीवनसाथी या बच्चे। आइए, इस रक्षाबंधन पर हम यह संकल्प लें कि हम खुद को और दूसरों को सुरक्षित रखने के लिए हर नियम का पालन करेंगे। यही सबसे बड़ी सेवा है अपनों के प्रति – और यही सच्चा रक्षा-सूत्र भी।" उन्होंने आगे कहा:  "हमारी यही कामना है कि हर व्यक्ति अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुँचे, हर रिश्ता जीवित रहे और हर परिवार मुस्कुराता रहे। रक्षाबंधन का यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन की रक्षा, सबसे बड़ा उपहार है।" कार्यक्रम के अंत में फाउंडेशन की ओर से लोगों को प्रतीकात्मक राखियाँ, सुरक्षा-संदेश वाले स्टिकर्स और ट्रैफिक नियमों से संबंधित जागरूकता सामग्री वितरित की गई। आयोजन में स्थानीय नागरिकों, युवाओं और ट्रैफिक पुलिस के प्रतिनिधियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

गर्मी की वापसी! अगस्त की शुरुआत सूखी, एमपी में थमी बारिश

भोपाल  सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि अभी एक मानसून ट्रफ, एक अन्य ट्रफ और एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम की एक्टिविटी है, लेकिन प्रदेश में इसका कोई असर नहीं है। इस वजह से भारी बारिश का दौर थमा हुआ है। 10 अगस्त तक ऐसा ही मौसम बना रहेगा। कहीं-कहीं हल्की बारिश जरूर होगी। शिवपुरी में हल्की बारिश, खजुराहो में पारा 35 डिग्री पर पहुंचा बुधवार को शिवपुरी में ही हल्की बूंदाबांदी हुई। दूसरी ओर, छतरपुर के खजुराहो में पारा 35 डिग्री पर पहुंच गया। ग्वालियर, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, ग्वालियर, दमोह, नौगांव, रीवा, सतना, सिवनी, उमरिया में पारा 33 डिग्री या इससे अधिक दर्ज किया गया। वहीं, नर्मदापुरम, जबलपुर, मंडला, सीधी, टीकमगढ़ में 34 डिग्री के पार रहा। भोपाल में अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री दर्ज किया गया। दो महीने में गिरा 28 इंच, अगस्त में 0.7 इंच ही मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से 31 जुलाई तक प्रदेश में औसत 28 इंच बारिश हो गई, लेकिन 1 से 6 अगस्त के बीच सिर्फ 0.7 इंच पानी ही गिरा। हालांकि, यह कुल कोटे की 77% है। वहीं, अब तक 40 प्रतिशत बारिश ज्यादा हो चुकी है। दूसरे सप्ताह में होगी तेज बारिश अगस्त के दूसरे सप्ताह में तेज बारिश का दौर शुरू होगा, जो आखिरी तक चलता रहेगा। ऐसे में बारिश का कोटा अगस्त में ही पूरा हो जाएगा। हालांकि, अब तक ग्वालियर समेत 9 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है, लेकिन इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों की तस्वीर बेहतर नहीं है। पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में औसत से 45% और पश्चिमी हिस्से यानी, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में 36% बारिश अधिक हुई है। जुलाई में बने थे बाढ़ के हालात जुलाई में प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने थे। खासकर पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। आखिरी दिनों में रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया। खेत-मंदिर और पुल डूब गए। वहीं, डैम ओवरफ्लो हो गए। गुना में सबसे ज्यादा पानी गिरा, इंदौर सबसे पीछे इस बार सबसे ज्यादा पानी गुना में गिरा है। यहां 45.8 इंच बारिश हो चुकी है। निवाड़ी में 45.1 इंच, मंडला-टीकमगढ़ में 44 इंच और अशोकनगर में 42 इंच के करीब बारिश हो चुकी है।

विश्व स्तनपान सप्ताह में शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर हुआ मंथन

स्तनपान को प्रोत्साहन स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक निवेश स्तनपान: स्वास्थ्य लाभ के साथ सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण का आधार विश्व स्तनपान सप्ताह में शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर हुआ मंथन भोपाल  स्तनपान में निवेश करना न केवल एक स्वास्थ्य प्राथमिकता है, बल्कि यह एक सामाजिक एवं आर्थिक निवेश भी है, जो दीर्घकालिक रूप से समाज के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। यह एक प्रमाणित तथ्य है कि समुचित स्तनपान से शिशु मृत्यु दर में वांछित कमी लाई जा सकती है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए विश्व स्तनपान सप्ताह पर एनएचएम कार्यालय, भोपाल में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने की। संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुणा कुमार, संचालक आईईसी डॉ. रचना दुबे, सहित विभिन्न विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे। मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि शासकीय चिकित्सालयों की भांति निजी चिकित्सालयों को भी मातृ-शिशु हितैषी संस्थान के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। बैठक में स्तनपान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, इसके विकल्प के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने तथा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण, निगरानी तंत्र और सहयोगात्मक नीति-संशोधन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का प्रमुख उद्देश्य इन्फेंट मिल्क सब्सीट्यूट(आईएमएस) अधिनियम के प्रभावी प्रवर्तन एवं नीति निर्माण में सुधार के साथ-साथ शिशु एवं बाल आहार व्यवहारों को प्रोत्साहित करना था। साथ ही शासकीय तंत्र के सहयोग से निजी क्षेत्र को सशक्त बनाते हुए शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया। बैठक में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल से डॉ. मंजूषा गोयल (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग), डॉ. शबाना सुल्तान (विभागाध्यक्ष, स्त्री एवं प्रसूति रोग) तथा डॉ. शिखा मलिक (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग) उपस्थित रहीं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल से डॉ. ज्योतीनाथ मोदी (प्राध्यापक, स्त्री एवं प्रसूति रोग) ने सहभागिता की। इसके अतिरिक्त, डॉ. पंकज शुक्ला (भारतीय चिकित्सक संघ), डॉ. महेश महेश्वरी (भारतीय शिशु रोग अकादमी के अध्यक्ष), डॉ. श्वेता आनंद (संयुक्त सचिव, शिशु रोग अकादमी), डॉ. आभा जैन (स्त्री रोग विशेषज्ञ महासंघ की अध्यक्ष), डॉ. रणधीर सिंह (मध्यप्रदेश नर्सिंग होम संघ के अध्यक्ष), डॉ. मनीष शर्मा (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भोपाल) तथा डॉ. राकेश श्रीवास्तव (सिविल सर्जन, जयप्रकाश चिकित्सालय, भोपाल) भी उपस्थित रहे। यूनिसेफ, मध्यप्रदेश से सुपुष्पा अवस्थी (पोषण विशेषज्ञ), डॉ. प्रशांत कुमार (स्वास्थ्य विशेषज्ञ), सुझिमली बरुआ एवं सुमोनिका मोर्या (सामाजिक व्यवहार परिवर्तन विशेषज्ञ), तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से डॉ. हिमानी यादव (उपसंचालक, शिशु स्वास्थ्य) एवं राज्य स्तरीय सलाहकारों ने भी सहभागिता की।  

राज्यमंत्री पटेल ने मिलावटखोरों पर सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

भोपाल  लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने आगामी त्यौहारों के मद्देनज़र मिलावटी खाद्य सामग्री की संभावित बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क रहते हुए मिलावटखोरों के विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई करने के लिए कहा है। राज्य मंत्री पटेल ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी एवं गणेश चतुर्थी जैसे आगामी त्यौहारों के दौरान दूध, मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट की आशंका बढ़ जाती है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा उत्पन्न होता है। उन्होंने निर्देश दिए कि दूध एवं उससे बने उत्पादों के साथ-साथ फल-सब्जियों में केमिकल व कार्बाइड के उपयोग की भी कड़ी निगरानी की जाए। मिलावटी सामग्री पाए जाने पर तत्काल जब्ती और संबंधित खाद्य कारोबारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। राज्यमंत्री पटेल ने मिलावट के विरुद्ध जन-जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया है, जिससे नागरिक सजग रहें और उन्हें सुरक्षित व शुद्ध खाद्य सामग्री प्राप्त हो सके।  

छुट्टियों की झड़ी! 15 से 18 अगस्त तक स्कूल-कॉलेजों में ताला

उज्जैन अगस्त महीने में लगातार छुट्टियां मिल रही हैं। जिसके चलते आप कहीं परिवार के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मध्यप्रदेश के उज्जैन में ये छुट्टियां और भी खास होने वाली हैं, क्यों कि अगले हफ्ते 15 अगस्त से 18 अगस्त तक लगातार छुट्टियां पड़ रही हैं। चार दिन लगातार मिलेगी छुट्टी इस हफ्ते की बात करें 9 अगस्त को रक्षाबंधन और 10 अगस्त को रविवार है। इसमें दो दिन की लगातार छुट्टी मिल रही है। ऐसे ही अगले हफ्ते 15 को स्वतंत्रता दिवस, 16 को जन्माष्टमी, 17 को रविवार और सोमवार उज्जैन में बाबा महाकाल की राजसी सवारी के चलते उज्जैन तहसील में अवकाश घोषित रहेगा।   बाकी लोगों को मिलेंगी एकसाथ तीन छुट्टी उज्जैन जिले के बाहर के लोगों को एक साथ तीन छुट्टियां मिलेंगी। जिसमें लोग अपने परिवार के साथ तीन दिन का वीकेंड मनाने जा सकते हैं। 

स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी की भीड़ ने बढ़ाई रेलवे की चुनौती, फुल हुईं सभी प्रमुख ट्रेनें

इंदौर अगस्त से त्योहारी सीजन शुरू हो रहा है। त्योहारी सीजन में ट्रेनों पर दबाव बढ़ गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गई तेजस एक्सप्रेस में अब सीटें फुल होना शुरू हो गई हैं। कुछ ट्रेनों में टिकटों की बुकिंग बंद हो गई है। वहीं, बसों के किराए में भी 20 फीसदी बढ़ोतरी हो गई है। भाई-बहन के त्योहार रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में यात्रियों का एक शहर से दूसरे शहरों, गांवों, कस्बों में आना-जाना होता है। अगस्त में रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त (शनिवार) और 10 अगस्त (रविवार) को आ रहा है। दो दिन की छुट्टी आ रही है। 8 अगस्त की छुट्टी ले ली जाए तो तीन दिन का सप्ताहांत मिल जाएगा। इसी तरह 15 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश एवं 16 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी जैसे बड़े राष्ट्रीय त्योहार आ रहे हैं।   तीन दिन का वीकेंड मिल रहा है 17 अगस्त को रविवार होने से यात्रियों को तीन दिन का सप्ताहांत मिल रहा है। इन त्योहारों का सप्ताह के अंतिम दिनों में आने से ट्रेनों पर दबाव बढ़ गया है। फिर आगामी महीनों में गणेश चतुर्थी, नवदुर्गा, दशहरा एवं दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार आएंगे। पश्चिम रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं विशेष रूप से यात्रा की मांग को ध्यान में रखते हुए मुंबई सेंट्रल और इंदौर स्टेशनों के बीच विशेष किराए पर सुपरफास्ट तेजस स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। यह ट्रेन 23 जुलाई से 29 अगस्त तक चलेगी। त्योहारी सीजन में इस ट्रेन में किराया ज्यादा होने के बाद भी यात्रियों में रुझान बढ़ने लगा है। इसमें थर्ड एसी किराया 1803, सेकंड एसी 2430 और फर्स्ट 3800 रुपए है। बसों के किराए में बढ़ोतरी इंदौर से मुंबई, पुणे, नागपुर सहित अन्य शहरों तक चलने वाली बसों में यात्रियों का आवागमन लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण कई बस संचालकों ने किराए में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। बसों में आमतौर पर 1500 से 2000 रुपए किराया लगता है, जो त्योहारी सीजन में बढ़कर 2500 से 3000 रुपए तक हो गया है।

एम्स भोपाल तक सीमित नहीं रहेगी सुविधा, अब मेडिकल कॉलेजों में भी होंगे ब्रेन-डेड मरीजों से अंगदान

भोपाल  एमपी के सभी ट्रॉमा सेंटर और मेडिकल कॉलेजों में ब्रेन-डेड मरीजों के अंग दान करने की व्यवस्था होगी। साथ ही ब्रेन डेड मरीज के परिवारों से अंगदान की मंजूरी के लिए जरूरी काउंसलिंग के लिए स्थायी काउंसलर की नियुक्ति भी की जाएगी।दरअसल, अंगदान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की गाइडलाइन आई है। प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इनमें से कई का पालन पहले से किया जा रहा है। अब सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। NOTTO से जारी निर्देश में कहा गया कि प्रदेश के सभी ट्रॉमा सेंटर्स में अंग एवं ऊतक प्राप्ति (ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन) की व्यवस्था विकसित की जाए। उन्हें THOTA अधिनियम के तहत अंग प्राप्ति केंद्र के रूप में पंजीकृत किया जाए। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों में भी चरणबद्ध तरीके से यह सुविधाएं विकसित की जाएं। हर साल 11 सौ ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन, MP की हिस्सेदारी 0.7% भारत में हर साल 11 सौ के करीब ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन होते हैं। जिसमें तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात की हिस्सेदारी 82% से अधिक है। वहीं, मध्यप्रदेश की 0.7 प्रतिशत, राजस्थान की 0.6 प्रतिशत और छत्तीसगढ की 0.3 प्रतिशत हिस्सेदारी रहती है। इसकी दो बड़ी वजह हैं, इनमें पहली सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशनकी व्यवस्था ना होना और दूसरी जागरूकता की कमी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इसको लेकर हाल में सरकार का विजन स्पष्ट किया है। जिसका एक उदाहरण यह कि इस 15 अगस्त को प्रदेश के सभी अंगदाताओं का राजकीय सम्मान किया जाएगा। ऑर्गन वेटिंग लिस्ट में महिलाओं को प्राथमिक्ता नई गाइडलाइन के अनुसार, हर राज्य में अब ऑर्गन वेटिंग लिस्ट में महिलाओं को अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान किया जाएगा। इसके अलावा, यदि किसी पूर्व दिवंगत दाता के निकट संबंधी को अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो, तो उसे प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, NOTTO ने साफ किया है कि नई गाइडलाइन का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, अंगदान में पारदर्शिता लाना और लैंगिक असमानता को दूर करना है। यही वजह है कि जन-जागरूकता को बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर ब्रांड एम्बेसडर भी नियुक्त किए जाएं। इन गाइडलाइन का प्रदेश में पहले से हो रहा पालन     मृतक दाता के परिवार के सदस्यों को राज्य और जिला स्तर पर सार्वजनिक समारोहों जैसे 15 अगस्त, 26 जनवरी, राज्य स्थापना दिवस आदि पर सम्मानित किया जाना।     आपातकालीन कर्मियों और एम्बुलेंस स्टाफ को सड़क दुर्घटना या स्ट्रोक से पीड़ित संभावित दाताओं की पहचान और अस्पताल के अंग दान समन्वयक को समय पर सूचित करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना। ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन वाला एम्स अकेला सरकारी संस्थान मध्यप्रदेश में फिलहाल ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन की व्यवस्था राजधानी के 3 समेत कुल 6 अस्पतालों में ही मौजूद है। इनमें एम्स भोपाल यह सुविधा वाला अकेला सरकारी अस्पताल है। इसके साथ, भोपाल और इंदौर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह व्यवस्था शुरू करने का काम अब तक कागजों में ही सीमित है। किडनी ट्रांसप्लांट में भोपाल आगे भोपाल के दो प्रमुख सरकारी अस्पताल, एम्स और हमीदिया में किडनी ट्रांसप्लांट रफ्तार पकड़ रहा है। एक तरफ एम्स में 11 किडनी ट्रांसप्लांट हुए, जिसमें से 3 कैडेवरिक ऑर्गन (यानी ब्रेन डेड मरीज से मिली किडनी) ट्रांसप्लांट थे। वहीं, गांधी मेडिकल कॉलेज में 10 किडनी ट्रांसप्लांट हुए और यह सभी लाइव थे। यानी, परिजनों ने अपनों को नया जीवन देने के लिए अपनी किडनी दान की। इसके अलावा, भोपाल का बंसल अस्पताल 400 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। इन दोनों कैटेगरी (सरकारी और निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट) में भोपाल प्रदेश में सबसे आगे हैं। लेकिन, देश में देखें तो टॉप 10 में भी नहीं है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश काफी पीछे मध्य प्रदेश स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO) की कंवीनर डॉ. कविता कुमार ने कहा कि अंगदान के मामले में मध्यप्रदेश अभी शुरुआती दौर में है, जैसे एक छोटा बच्चा चलना सीख रहा हो। इस क्षेत्र में अभी काफी काम बाकी है। सबसे अहम है कि अंगदान पर ज्यादा चर्चा हो और सही जानकारी लोगों तक पहुंचे। जब लोग इसके बारे में बात करेंगे, तो जागरूकता बढ़ेगी। उन्हें इसके फायदे समझ में आएंगे। एक बार जब लोग जान जाएंगे कि अंगदान से कितने लोगों की जान बच सकती है, तब राज्य में अंगदान का ग्राफ तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने आगे कहा, सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन शुरू होना जरूरी है। इसके लिए अलग से मैनपावर, पर्याप्त स्पेस और एक बड़े सेटअप की जरूरत होती है। गांधी मेडिकल कॉलेज के पास मैनपावर और जगह तो है, लेकिन ऑर्गन रिट्रीवल के लिए आवश्यक मशीनें और जांच की सुविधा अभी विकसित करनी है। अच्छी बात यह है कि सरकार इस दिशा में काफी सक्रिय है। हमें भरोसा है कि जल्द ही प्रदेश में अंगदान की स्थिति बेहतर होगी और इसका ग्राफ ऊपर जाएगा। आठ अंगों को दान कर सकते हैं लोग     18 या उससे ‎अधिक उम्र के बाद ‎जीवित डोनर या तो‎ एक किडनी या लीवर ‎का केवल एक हिस्सा‎दान कर सकता है।     ‎किसी भी उम्र का ब्रेन‎स्टेम मृत डोनर 8‎ महत्वपूर्ण अंगों को‎ दान कर सकता है। ‎इनमें हार्ट, 2 फेफड़े,‎ लीवर, 2 किडनी,‎ पैंक्रियाज और छोटी‎ आंत, कॉर्निया, हड्डी,‎ त्वचा और हार्ट वाल्व ‎शामिल हैं।‎ लिविंग ऑर्गन डोनेशन     सबसे पहले डोनर के कुछ मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं। यह जानने के लिए व्यक्ति डोनेशन के लिए उपयुक्त है।     इन टेस्ट में सबसे महत्वपूर्ण दो पहलू हैं। डोनर और रिसीवर की कंपैटिबिलिटी और डोनर की मेडिकल कंडीशन यानी उसका शारीरिक रूप से स्वस्थ होना।     सारे टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव होने और डॉक्टर के सर्टिफिकेट के बाद डोनर की बॉडी से डोनेट किया जा रहा हिस्सा सर्जिकली रिमूव किया जाता है और उसे रिसीवर की बॉडी में ट्रांसप्लांट किया जाता है।     डोनर को भी ऑर्गन डोनेशन के बाद कई हफ्तों में मेडिकल सुपरविजन में रखा जाता है। ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन किसी भी कारण से हुई आकस्मिक मृत्यु के बाद … Read more