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जल गंगा संवर्धन अभियान से रैपुरा रेंज की रामडोल एवं दाने बाबा झिरियों में लौटा जल

भोपाल दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में स्थित रामडोल की झिरिया एवं दाने बाबा की झिरिया में जल गंगा संवर्धन अभियान में प्राकृतिक झिरियों की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य कराया गया। इसके परिणामस्वरूप इन झिरियों को पुनर्जीवन मिला और भीषण गर्मी में भी इनमें जल बना हुआ है। इससे झिरियों के आसपास के वन क्षेत्रों में वन्य पक्षियों की वापसी हुई है तथा क्षेत्र की जैव-विविधता पुनर्जीवित हो उठी है। प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के छत्ते अब शहद से भरे दिखाई दे रहे हैं। पक्षियों के घोंसले फिर आबाद हो गए हैं और अन्य वन्यजीवों की सक्रियता भी बढ़ी है। वन क्षेत्र में दूधराज (एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर), ब्लैक-नैप्ड मोनार्क, किंगफिशर, बाज, उल्लू, मोर, हरियल तथा जंगली मुर्गा सहित अनेक पक्षी प्रजातियाँ विहार कर रही हैं। कई पक्षियों के घोंसलों में अंडे भी पाए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि यह क्षेत्र अब वन्यजीवों, स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल प्राकृतिक आवास बन गया है। स्थानीय ग्रामीणों और वनकर्मियों ने बताया कि पिछली गर्मियों तक भीषण गर्मी के दौरान यहां की प्राकृतिक झिरियाँ सूख जाया करती थीं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वन विभाग ने इन झिरियों की पहचान कर उनकी सफाई और मरम्मत कराई। वन विभाग के प्रयासों से इस वर्ष इन झिरियों में जल निरंतर प्रवाहित हो रहा है। जल स्रोतों से वन्यजीवों और पक्षियों को राहत मिल रही है। साथ ही मधुमक्खियों, तितलियों और अन्य छोटे जीवों के लिए भी यह वन क्षेत्र महत्वपूर्ण पारिस्थितिक आश्रय बन गया है। जल संरक्षण और जैव-विविधता संरक्षण का यह समन्वित प्रयास दक्षिण पन्ना वनमंडल में प्राकृतिक संरक्षण के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है।  

देश में सर्वाधिक 13 लाख 41 हजार से अधिक किसानों से हुआ गेहूं का उपार्जन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ का उपार्जन हुआ है। मध्यप्रदेश को गेहूं खरीदी के लिये 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केन्द्र सरकार द्वारा इस लक्ष्य को 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नम्बर-1 है, वहीं गेहूं उपार्जन के मामले में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। प्रदेश में लघु एवं सीमांत किसानों से सबसे पहले गेहूं की खरीदी की गई। कुल 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया। सतत मॉनिटरिंग प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये थे, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी थी। किसानों को हुआ 23,708.13 करोड़ से अधिक का भुगतान किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 23,708.13 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। उपार्जित गेहूं में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन का परिवहन भी किया जा चुका है। यह उपार्जित गेहूं का 93 प्रतिशत है। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया है। संभागवार उपार्जन रीवा संभाग में 6 लाख 15 हजार 851 मीट्रिक टन, जबलपुर में 12 लाख 73 हजार 667, शहडोल में 70 हजार 666, सागर में 8 लाख 56 हजार 968, भोपाल में 28 लाख 47 हजार 284, नर्मदापुरम में 9 लाख 22 हजार 508, उज्जैन में 22 लाख 84 हजार 47, इंदौर में 8 लाख 62 हजार 719, ग्वालियर में 4 लाख 36 हजार 805 और चंबल संभाग में 2 लाख 40 हजार 581 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ है।  उपार्जन के समुचित प्रबंध प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया गया। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई थी। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई थीं।  

मंगोलिया के लिए भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के पवित्र अस्थि अवशेष श्रद्धापूर्वक रवाना

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि आज का दिन भारत और मध्यप्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है। यह पावन अस्थि अवशेष न केवल हमारी अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर हैं, बल्कि वैश्विक शांति और सौहार्द के प्रतीक भी हैं। मंत्री पटेल राजा भोज एयरपोर्ट पर भगवान बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्र और महामोद्गलायन के पवित्र अवशेषों को राजकीय सम्मान के साथ मंगोलिया रवाना करने के कार्यक्रम के संबोधित कर रहे थे। मंत्री पटेल ने कहा कि भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों के मंगोलिया में प्रदर्शन करने से वैश्विक पहचान मिलेगी। उन्होंने रेखांकित किया कि भगवान बुद्ध के इन महान शिष्यों की पवित्र अस्थियां संपूर्ण विश्व में केवल तीन देशों—भारत,लंका एवं म्यांमार में ही संरक्षित हैं, जो हमारे प्रदेश और देश के लिए अत्यंत गौरव की बात है। इससे मंगोलिया सहित सभी देशों के बौद्ध अनुयायी प्रदेश में आने के लिए प्रेरित होंगे। मंत्री पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सांस्कृतिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार जन-जन की आस्था और देश के आध्यात्मिक मूल्यों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल का स्मरण करते हुए बताया कि जब वे भारत के संस्कृति मंत्री थे, तब एक विशेष नीति बनाई गई थी कि जिस देश से एक लाख से अधिक पर्यटक भारत आएंगे, वहां उनकी स्थानीय भाषा में साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। इसी नीति के तहतलंका से दो लाख से अधिक पर्यटकों के आगमन पर सांची में उनकी भाषा में साइन बोर्ड लगाए गए, जिससे श्रद्धालुओं को सांची और अन्य बौद्ध स्थलों की यात्रा के दौरान सुगमता और आत्मीयता का अनुभव होता है। उन्होंने बल देकर कहा कि सांची केवल अपने पाषाण स्तूपों के कारण विश्व धरोहर स्थल नहीं है, अपितु इन चैतन्य अस्थि अवशेषों की पावन उपस्थिति के कारण वैश्विक श्रद्धा का केंद्र है, जिसके कारण विश्व भर से पर्यटक यहाँ खिंचे चले आते हैं। पूर्व में इन अवशेषों की सफल थाईलैंड यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के साथ हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध अत्यंत प्राचीन और प्रगाढ़ हैं, और यह यात्रा इन संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी। सांची आध्यात्मिक वैभव का अनुपम खजाना — पूज्य बानगल उपतिस्स नायक थेरी कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित बौद्ध धर्मगुरु बड़े गुरु पूज्य बानगल उपतिस्स नायक थेरी ने सांची की महत्ता को बताते हुए कहा कि सांची केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक वैभव का एक अनमोल खजाना है। बौद्ध जगत में इस स्थान की महिमा अतुलनीय है। उन्होंने पूर्व के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि जब ये पवित्र अस्थि अवशेष पूर्व में थाईलैंड प्रवास पर गए थे, तब वहां लगभग 5.5 मिलियन (55 लाख) से अधिक श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धाभाव से इनकी पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने कहा कि बौद्ध परंपरा में इन अवशेषों (रेलिक्स) का स्थान सर्वोपरि है और उन्हें सांची जैसी पवित्र धरा का कस्टोडियन (संरक्षक) बनने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि भगवान बुद्ध की यह विरासत विश्व बंधुत्व की एक अमूल्य निधि है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मूल मंत्र 'विकास भी, विरासत भी' का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय और आध्यात्मिक प्रकल्प संपूर्ण विश्व को यह दिग्दर्शित करते हैं कि भारत आदि काल से विश्वगुरु रहा है और अपनी इसी सांस्कृतिक संपन्नता के कारण सदैव विश्वगुरु के पद पर सुशोभित रहेगा। कलेक्टर मिश्रा ने अपनी व्यक्तिगत अनुभूतियों को साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ है, जो स्वयं भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल और उनसे जुड़े अत्यंत पवित्र क्षेत्रों से घिरा हुआ है। ऐसे में भोपाल की धरती पर इस पावन विदाई समारोह का साक्षी बनना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस गरिमामयी आयोजन के माध्यम से मध्यप्रदेश की पहचान मध्य एशिया के देश मंगोलिया तक सुदृढ़ रूप से पहुंचेगी। भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यक्रम अन्य देशों के साथ आयोजित किए जाएंगे, जो हमारे प्रदेश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण हैं क्योंकि मध्यप्रदेश ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से समृद्ध प्रदेश है। इस गरिमामयी प्रस्थान समारोह में छोटे गुरु पूज्य बानगल विमल तिस्स थेरी, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (आईबीसी) के संचालक कर्नल यश सक्सेना, संस्कृति विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी राजेश कुमार गुप्ता सहित अनेक प्रबुद्ध जन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी गणमान्य नागरिकों ने मंत्रोच्चार और पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के बीच भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों को मंगोलिया यात्रा के लिए भावभीनी और श्रद्धापूर्वक विदाई दी।    

भीषण गर्मी से तप रहा मध्यप्रदेश, IMD ने जारी किया हीटवेव अलर्ट

भोपाल नौतपा के चौथे दिन भी मध्य प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में रहा। प्रदेश के 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। खजुराहो सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि बड़े शहरों में ग्वालियर का पारा 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने प्रदेश के 48 जिलों में हीटवेव और तेज गर्मी का अलर्ट जारी किया है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले तीन दिनों में कई जिलों में आंधी और वर्षा की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार भोपाल में 43.8 डिग्री, जबलपुर में 44 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री और इंदौर में 41.8 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया। इधर, दमोह जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र में गुरुवार शाम अचानक मौसम बदला और करीब आधे घंटे तक ओलावृष्टि हुई। इसके बाद वर्षा का दौर जारी रहा, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। नौतपा के बीच आंधी-बारिश का भी अनुमान नौतपा के दौरान इस बार गर्मी के साथ वर्षा और तेज आंधी का असर भी देखने को मिल रहा है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं वर्षा दर्ज की गई है। 29 से 31 मई के बीच प्रदेश के अधिकांश जिलों में वर्षा और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। इन जिलों में हीटवेव का अलर्ट मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं सागर, दमोह, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली सहित 10 जिलों में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। भोपाल, ग्वालियर, रायसेन, विदिशा और उज्जैन समेत 32 जिलों में येलो अलर्ट जारी है। लू से बचने के लिए सावधानी जरूरी मौसम विज्ञानियों ने लोगों को दोपहर 12 से तीन बजे तक घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी पीने, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और शरीर को हाइड्रेट रखने की अपील की गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मई के अंतिम दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और वर्षा का असर बढ़ेगा, जिससे तापमान में कुछ गिरावट आने की संभावना है।  

8 घंटे की पूछताछ के बाद CBI ने त्विषा की सास को लिया हिरासत में

भोपाल नोएडा की अभिनेत्री व मॉडल त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में सास रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया। गुरुवार शाम को सीबीआई टीम ने उन्हें घर से गिरफ्तार किया। इसके लिए टीम सुबह 10 बजे घर पहुंच गई थी और करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। सीबीआई ने उन्हें भोपाल के मैनिट स्थित कैंप में रखा है। वहीं, त्विषा के पति समर्थ सिंह को पहले ही सीबीआई रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। घर पर घटनास्थल की मैपिंग कराई और जांच की समर्थ 29 मई तक की रिमांड पर है। सीबीआई की पांच सदस्यीय टीम ने डीआईजी अब्दुल जब्बार के नेतृत्व में गुरुवार को सुबह गिरिबाला के घर पर घटनास्थल की मैपिंग कराई और विभिन्न बिंदुओं पर जांच-पड़ताल की। इसके बाद गिरिबाला से लगातार पूछताछ की गई। देर शाम गिरफ्तारी के दौरान घर के बाहर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। सीबीआई टीम ने सुरक्षा कारणों से अपनी गाड़ी घर के अंदर पार्क कराई और उसी में गिरिबाला को बैठाकर मैनिट स्थित सीबीआई कैंप कार्यालय ले गई। तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सवाल किए पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने गिरिबाला, त्विषा व समर्थ के रिश्तों को लेकर सवाल किए। उन्होंने मामले से जुड़े कई तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर भी सवाल किए। जांच एजेंसी पहले ही इस मामले में कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जब्त कर चुकी है। हाई कोर्ट ने इसलिए रद की थी अग्रिम जमानत बता दें कि बुधवार देर रात एक बजे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को भोपाल न्यायालय से 15 मई को दी गई अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। हाई कोर्ट ने माना था कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। जबकि वाट्सएप चैट्स और गवाहों के बयानों में सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हैं। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रहीं। इन तथ्यों के आधार पर न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का संदर्भ देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है। न्यायिक सेवा में कई अहम पदों पद रहीं हैं गिरिबाला भोपाल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से 2024 में रिटायर्ड हुईं गिरिबाला सिंह मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा की वरिष्ठ और अनुभवी न्यायिक अधिकारी रही हैं। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई की। उन्होंने 1988 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर सिविल जज (क्लास-2) के रूप में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया। 2010- 2011 में उच्च न्यायिक सेवा का हिस्सा बनीं। 2018 में भोपाल में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहीं। इसके अतिरिक्त वह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलसचिव रह चुकी हैं। गैस राहत कोर्ट भोपाल की न्यायाधीश भी रहीं। वर्तमान में भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-2 की अध्यक्ष हैं।  

संवेदनशील और प्रभावशाली शायरी के माध्यम से बद्र ने साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बनाई

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रख्यात शायर एवं साहित्यकार बशीर बद्र के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बशीर बद्र ने अपनी संवेदनशील और प्रभावशाली शायरी के माध्यम से साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी ग़ज़लों और रचनाओं ने मानवीय भावनाओं, रिश्तों और सामाजिक संवेदनाओं को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त किया। उनकी लेखनी आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी। श्री शुक्ल ने कहा कि बशीर बद्र का निधन साहित्य एवं कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी रचनाएँ सदैव साहित्य प्रेमियों के हृदय में जीवित रहेंगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों, प्रशंसकों एवं साहित्य जगत के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।  

“हरियाली बचाओ-भोपाल बचाओ” के नारों से गूंजा अयोध्या नगर मुख्य मार्ग

भोपाल भोपाल के अयोध्या नगर मुख्य मार्ग पर हजारों हरे-भरे पेड़ों की कटाई के विरोध में रविवार को पर्यावरण प्रेमियों, समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश सरकार और नगर निगम के खिलाफ लोगों ने नाराजगी जताते हुए पर्यावरण संरक्षण की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने “वृक्ष हत्या बंद करो”, “हरियाली बचाओ-भोपाल बचाओ” और “पेड़ बचेंगे तो जीवन बचेगा” जैसे नारों के साथ विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विकास कार्यों के नाम पर शहर की हरियाली समाप्त की जा रही है, जिससे पर्यावरण संतुलन पर गंभीर असर पड़ेगा। इस आंदोलन में पर्यावरण प्रेमी उमा शंकर तिवारी, प्रदीप मोनू सक्सेना, भाई दीपक गुप्ता, भाई अभिनव मुकेश यादव, एकजोट सिंह, मुकेश सिंह सहित बड़ी संख्या में नागरिक और समाजसेवी शामिल हुए। सभी ने कटे हुए वृक्षों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन भी रखा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अयोध्या नगर मुख्य मार्ग पर काटे गए पेड़ केवल लकड़ी नहीं थे, बल्कि शहर के “फेफड़े” थे, जो लोगों को स्वच्छ हवा और पर्यावरण संतुलन प्रदान करते थे। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह अंधाधुंध पेड़ों की कटाई जारी रही तो आने वाले समय में शहर को भीषण गर्मी और प्रदूषण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति ने प्रशासन से मांग की कि पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले कम से कम 10 नए पौधे लगाए जाएं और उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए। साथ ही इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की गई। पर्यावरण प्रेमी उमा शंकर तिवारी और प्रदीप मोनू सक्सेना ने कहा कि यह आंदोलन केवल पेड़ों को बचाने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का संघर्ष है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और नगर निगम ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।  

सादगी का संदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बस में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ पहुंचे उज्जैन

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सादगी, मितव्ययिता और सुशासन के मंत्र को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में एक नई कार्य संस्कृति स्थापित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रशासनिक खर्चों में संयम और संसाधनों के संतुलित उपयोग को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने काफिले में वाहनों की संख्या सीमित रखते हुए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ एक ही बस में सवार होकर इंदौर से उज्जैन तक की यात्रा की। इस दौरान सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्था के लिये केवल तीन अन्य वाहन ही साथ रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल सादगीपूर्ण प्रशासन, ईंधन बचत और अनावश्यक खर्चों में कमी की दिशा में एक सकारात्मक संदेश है। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ यादव ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से जल गंगा संवर्धन अभियान सहित विभिन्न विकास कार्यों एवं जनहित योजनाओं पर चर्चा भी की।  

टिटहरी के 4 अंडों ने जगाई अच्छी बारिश की उम्मीद

भोपाल  दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में एक झिरिया के पास हाल ही में टिटहरी (रेड-वॉटल्ड लैपविंग) के 4 अंडे पाए गए हैं। सामान्यतः टिटहरी 2 या 3 अंडे देती है, जबकि 4 अंडों का समूह अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है। स्थानीय ग्रामीणों के बीच लंबे समय से यह रोचक मान्यता प्रचलित है कि यदि टिटहरी के घोंसले में 2 से अधिक अंडे हों, तो अच्छी और लंबे समय तक वर्षा होने की संभावना रहती है। झिरिया क्षेत्र में 4 अंडों का पाया जाना स्थानीय लोगों और वन अमले के बीच अच्छी बारिश की उम्मीदों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। यद्यपि इस विश्वास का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, फिर भी सदियों से संचित लोकज्ञान और प्रकृति अवलोकन की समृद्ध परंपरा पर ग्रामीण अंचलों में आज भी भरोसा किया जाता है। खुले पथरीले और कंकरीले भूभाग पर बिना पारंपरिक घोंसले के दिए गए ये अंडे प्रकृति की अद्भुत अनुकूलन क्षमता को दर्शाते हैं। अंडों का रंग और बनावट आसपास की मिट्टी एवं पत्थरों में इस प्रकार घुल-मिल जाते हैं कि उन्हें पहचान पाना कठिन हो जाता है, जिससे उन्हें प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। वन अधिकारियों के अनुसार, ऐसे पारंपरिक दावों का व्यवस्थित अभिलेखन और दीर्घकालीन अध्ययन भविष्य में रोचक निष्कर्ष दे सकता है। दक्षिण पन्ना वनमंडल द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में झिरियों के संरक्षण और पुनर्जीवन कार्यों से इन क्षेत्रों में पक्षियों एवं अन्य जीवों की गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है। टिटहरी जैसे संवेदनशील पक्षियों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि प्राकृतिक आवास और जलस्रोत पुनः जीवंत हो रहे हैं।  

जल संरक्षण अभियान को जनभागीदारी से मिला नया आयाम

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्राचीन अहिल्या कुंड के जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सभी से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। जल बचा कर भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत कबीरदास एवं संत रहीम के दोहों का उल्लेख करते हुए जल की महत्ता को सरल एवं प्रेरणादायी ढंग से समझाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल को जीवन, संवेदना और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। उन्होंने ग्रामीणों से वर्षा जल संरक्षण, तालाबों और कुंडों के संरक्षण तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य शासन जल संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है और जल गंगा संवर्धन अभियान से पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनसहभागिता से ही जल संरक्षण के प्रयास सफल होंगे और आने वाले समय में प्रदेश जल समृद्धि की दिशा में नई पहचान बनाएगा। निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्ला, गौरव रणदिवे, श्रवण सिंह चावड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। साथ ही पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, आईजी अनुराग, कलेक्टर शिवम वर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन, डीआईजी मनोज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राजेंद्र वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।