samacharsecretary.com

मुख्यमत्री की मंशानुरुप विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई

पालकी में भगवान चन्द्रमोलेश्वर व मनमहेश हाथी पर विराजित होकर भक्तों का कुशल-क्षेम लेने उज्जैन नगर भ्रमण पर निकले मुख्यमंत्री डॉ. यादव डमरु और झांझ मंजीरे बजाते हुए पूरे सवारी मार्ग पर चले पैदल मुख्यमत्री की मंशानुरुप विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई अलग-अलग स्थानों पर 8 जनजातीय दलों के द्वारा दी गई प्रस्तुति मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भगवान महाकाल की श्रावण माह की दूसरी सवारी में हुए शामिल उज्जैन  श्रावण माह का दूसरा सोमवार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को भगवान महाकाल की श्रावण माह की दूसरी सवारी में शामिल हुए। भगवान महाकालेश्वर पालकी में चन्द्रमोलेश्वर के रूप में तथा हाथी पर मनमहेश के स्वरूप में विराजित होकर अपने भक्तों को दर्शन देने और अपनी प्रजा का कुशल-मंगल जानने नगर भ्रमण पर निकले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सवारी निकलने के पूर्व सभा मंडप में पालकी का पूजन-अर्चन किया। सर्वप्रथम भगवान महाकालेश्वर भगवान का षोडशोपचार से पूजन-अर्चन कर आरती की गई। भगवान श्रीमहाकाल की सवारी धूमधाम से निकाली गई जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर 08 जनजातीय दलों के द्वारा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव संपूर्ण सवारी मार्ग पर बाबा महाकाल की आराधना और भजन-कीर्तन करते हुए नंगे पांव चले। इस दौरान उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालुहेडा, महापौर मुकेश टटवाल, संजय अग्रवाल आदि ने भगवान महाकालेश्वर का पूजन-अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हुए। भगवान महाकालेश्वर की दूसरी सवारी के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव पूरे सवारी मार्ग पर डमरु और झांझ मंजीरे बजाते हुए पैदल चले। स्कूली विदयार्थियों द्वारा घोष वादन किया गया और श्रध्दालुओं के भोले शंभु भोलेनाथ के जयकारों से संपूर्ण उज्जैन नगरी गुंजायमान हुई। एम्बुलेन्स को निकलने के लिए जगह दी सवारी के दौरान रोगी को ले जा रही एम्बुलेन्स को सवारी मार्ग के बीच से निकलने के लिए श्रध्दालुओं द्वारा ढाबा रोड व कमरी मार्ग पर रास्ता प्रदान किया गया। सम्पूर्ण सवारी मार्ग में श्रद्धालुओं ने जय महाकाल के उद्घोष के साथ पुष्प वर्षा की।   महाकाल के चन्द्रमोलेश्वर स्वरूप को गार्ड ऑफ ऑनर भगवान चन्द्रमोलेश्वर पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। पालकी जैसे ही महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में सवार चन्द्रमोलेश्वर भगवान को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दिया गया। सवारी मार्ग में श्रद्धालुओं ने जय महाकाल के घोष के साथ अवन्तिका नगरी के राजाधिराज पालकी में विराजित भगवान चन्द्रमोलेश्वर व हाथी पर आरूढ़ भगवान मनमहेश पर पुष्पवर्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर सवारी में पुलिस बैंड की प्रस्तुति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरुप 350 पुलिस के जवानों द्वारा पुलिस बैंड के माध्यम से नम: शिवाय ॐ नमः शिवाय, हर हर शंभू देवा महादेवा, मेरे घर राम आए है, देवा हो देवा गणपति देवा, ॐ जय शिव ओमकारा ,सत्यम शिवम सुन्दरम आदि शिवभजनों की सु-मधुर धुनों की प्रस्तुतियां दी गई जिस पर श्रद्धालु मंत्र मुग्ध होकर झूमे। बाबा महाकाल की एक झलक के लिए असंख्य श्रद्धालु हुए आतुर भगवान श्रीमहाकाल की सवारी के दौरान पूरी उज्जैन नगरी शिवमय हो गई। महाकालेश्वर भगवान की सवारी में हजारों भक्त झांझ, मंजीरे, डमरू, ढोल आदि वाद्य बजाते हुए महाकाल की आराधना करते हुए पालकी के साथ चल रहे थे। साथ ही उज्जैन के बाहर से आये हुए भक्तगण भी बाबा की एक झलक पाने के लिए उत्सुक थे। महाकालेश्वर भगवान की सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए रामघाट पहुंची। रामघाट पर भगवान चन्द्रमोलेश्वर का मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा माँ क्षिप्रा के जल से अभिषेक पूजन किया गया। रामघाट के दूसरी तरफ दत्त अखाडा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार किया गया। साथ ही कलाकार सुलक्ष्मी तलरेजा के द्वारा भगवान शिव पर आधारित भजन प्रस्तुत किए गए। भगवान महाकालेश्वर की पालकी के रामघाट पहुंचने पर शंखनाद और भगवान महाकालेश्वर की आरती की गई। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने यहां भगवान महाकालेश्वर का पूजन अर्चन कर प्रदेश की सुख समृद्धि और विकास की कामना की। पूजन – अर्चन के उपरांत भगवान महाकाल की सवारी रामघाट से रामानुज कोट ,  मोढ की धर्मशाला, कार्तिकचौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। जहाँ परंपरानुसार सिंधिया स्टेट की ओर से गोपाल मंदिर के पुजारी द्वारा पालकी में विराजित चन्द्रमोलेश्वर का पूजन किया गया। सवारी गोपाल मंदिर से पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। जहाँ पुनः आरती उपरांत सवारी का विश्राम हुआ। 8 जनजातीय कलाकारों के दल ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप बाबा महाकालेश्वर की सवारी को भव्य स्वरुप देने के लिए 08 जनजातीय कलाकारों के दल ने महाकालेश्वर भगवान की दूसरी सवारी में सहभागिता की। जनजातीय दलों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देकर कला संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरी। छवीलदास भावली के नेतृत्व में नासिक महाराष्ट्र के जनजातीय सौगी मुखोटा नृत्य एवं अजय कुमार के नेतृत्व में हरियाणा का लोकनृत्य हरियाणवी घुमर के दल ने महाकालेश्वर मंदिर परिसर व शहनाई द्वार के पास अपने साथियों के साथ प्रस्तुति दी। खेमराज के नेतृत्व में राजस्थान का गैर-घूमरा जनजातीय नृत्य व रवि अहिरवार के नेतृत्व में मध्यप्रदेश छतरपुर के बरेदी लोकनृत्य की कोट मोहल्ला चौराहे पर प्रस्तुति दी गई। अज्जू सिसोदिया के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में झाबुआ का भगोरिया नृत्य एवं बनेसिंह भाई के नेतृत्व में गुजरात जनजातीय राठ नृत्य दल ने रामानुजकोट पर अपनी संस्कृति व कला का प्रदर्शन लोकनृत्य के माध्यम से किया। माँ क्षिप्रा के तट रामघाट पर उडीसा के लोकनृत्य शंख ध्वनि सुनील कुमार साहू के नेतृत्व में व छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य लोकपंथी का दिनेश कुमार जागड़े के नेतृत्व में दलों ने महाकालेश्वर भगवान के सवारी के आगमन पर प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। चलित रथ में लगी एलईडी से श्रद्धालुओं ने किए दर्शन बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन के लिए सवारी के आगे और पीछे एलईडी लगे 2 रथ चले, जिस पर सवारी के लाइव प्रसारण के माध्यम से श्रद्धालुओं ने सुगमता पूर्वक दर्शन किए। 

MPBSE ने द्वितीय परीक्षा की कॉपियां जांची, अब छात्रों को रिजल्ट का इंतजार

भोपाल  माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की ओर से बोर्ड 10वीं व 12वीं की द्वितीय परीक्षा का दो चरणों में मूल्यांकन कार्य पूरा हो गया है। पहला चरण दो से 11 जुलाई तक और दूसरा 12 से 20 जुलाई तक चला। 28 या 29 जुलाई को परिणाम जारी कर दिया जाएगा। इस परीक्षा में साढ़े तीन लाख अभ्यर्थियों की नौ लाख उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। उधर, माशिमं भोपाल के एक केंद्र पर 12वीं के विद्यार्थियों द्वारा 10वीं का प्रश्नपत्र हल करने के मामले में मूल्यांकन किस तरह होगा। इस संबंध में मंडल की परीक्षा समिति 24 जुलाई को निर्णय लेगी। गलत प्रश्नपत्र हल करने वाले उत्तरपुस्तिकाओं को समिति में भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में समिति निर्णय लेगी। तीसरी बार परीक्षा के तनाव से नहीं गुजरना होगा मंडल के सचिव केडी त्रिपाठी का कहना है कि विद्यार्थियों का नुकसान नहीं होगा, उन्हें फिर से तीसरी बार परीक्षा के तनाव से नहीं गुजरना होगा। इस प्रकरण में दोषी केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षक पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं अब तक स्कूल शिक्षा विभाग ने केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षक पर कोई कार्रवाई नहीं की है। स्कूल शिक्षा विभाग ने केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षक को निलंबित नहीं किया है। बता दें, कि अरेरा कॉलोनी स्थित शासकीय नवीन उमावि के परीक्षा केंद्र पर 19 जून को 12वीं के विद्यार्थियों को 10वीं कक्षा का अंग्रेजी का पर्चा दे दिया था। उसे उन्होंने हल करा लिया।

MP पंचायत चुनाव में तकनीकी कदम: IPBMS से होगा सरपंच व जनपद सदस्य चयन

मतदान 22 जुलाई को सुबह 7 बजे से दमोह पंचायत उप निर्वाचन-2025 में त्रि-स्तरीय पंचायतों में रिक्त पद के लिये 22 जुलाई को सुबह 7 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक मतदान होगा। सरपंच पद के लिये 49 और जनपद पंचायत सदस्य के 5 पदों के लिये मतदान होगा। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग अभिषेक सिंह ने जानकारी दी है कि इनमें से सागर जिले की 4 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिये 9 मतदान केन्द्रों और दमोह जिले के वार्ड-16 के जनपद सदस्य के निर्वाचन के लिये 9 मतदान केन्द्रों में इंटीग्रेटेड पोलिंग बूथ मैनेजमेंट सिस्टम (आईपीबीएमएस) से मतदान कराया जायेगा। इन मतदान केन्द्रों की मतदान प्रकिया का सीधा प्रसारण भी किया जायेगा। इसके लिये राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय के सामने तथा सागर और दमोह में एक-एक स्क्रीन लगाई जायेगी। सागर जिले के जनपद पंचायत जैसीनगर की ग्राम पंचायत अगरा, औरिया, जनपद पंचायत खुरई की ग्राम पंचायत मुहासा और जनपद पंचायत राहतगढ़ की ग्राम पंचायत सेमरालहरिया के मतदान केन्द्रों में इंटीग्रेटेड पोलिंग बूथ मैनेजमेंट सिस्टम से मतदान कराया जायेगा। शेष पदों पर पूर्व की भांति मतदान कराया जायेगा।   इंटीग्रेटेड पोलिंग बूथ मैनेजमेंट सिस्टम राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पेपरलेस बूथ की नवीन पहल की गई है। इसमें मतदान केन्द्रों में मतदाता और मतदानकर्मियों द्वारा किये जाने वाला पूरा काम डिजिटल माध्यम से किया जाता है। उल्लेखनीय है कि इस नवीन पहल के तहत वर्ष 2024 में भोपाल जिले के बैरसिया तहसील की ग्राम पंचायत रतुआ रतनपुर और रीवा जिले के अतरैला ग्राम पंचायत के सरपंच पद के लिये मतदान सफलतापूर्वक किया जा चुका है। जनपद पंचायत सदस्य के लिये पहली बार इंटीग्रेटेड पोलिंग बूथ मैनेजमेंट सिस्टम से मतदान करवाया जा रहा है।   

सरकारी भर्तियों में बड़ा सुधार, एक परीक्षा से खुलेंगे कई विभागों के द्वार

भोपाल  सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें एक ही पद के लिए बार-बार परीक्षाएं नहीं देनी होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग ने नई भर्ती प्रणाली को लेकर प्रारूप तैयार किया है। यह प्रस्ताव मुख्य सचिव अनुराग जैन के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंजूरी ली जाएगी। इस प्रस्ताव के अमल में आने से न केवल परीक्षार्थियों का समय और धन बचेगा, बल्कि भर्ती प्रणाली भी अधिक दक्ष और पारदर्शी बनेगी। यह बदलाव खासतौर पर युवाओं के लिए बड़ा राहत भरा साबित होगा। भर्ती प्रक्रिया में ये होंगे अहम बदलाव  नए प्रस्ताव के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) केवल 6 प्रकार की परीक्षाएं आयोजित करेगा, जिसमें प्रशासनिक सेवा और वन सेवा शामिल होंगी। MPESB (पूर्व में व्यापमं) 5 प्रमुख श्रेणियों की परीक्षाएं आयोजित करेगा, जिसमें इंजीनियरिंग, शिक्षा, कृषि, स्नातक एवं परास्नातक डिग्रीधारकों के लिए परीक्षाएं होंगी। एक मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर नियुक्तियां होंगी। उम्मीदवारों को आवेदन के समय विभागों के वैकल्पिक नाम भरने होंगे, जिससे चयन के बाद विभाग बदलने की समस्या नहीं रहेगी। परीक्षार्थियों को क्या होगा लाभ  अब हर पद के लिए अलग-अलग परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। परीक्षा शुल्क की बचत होगी। चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण होगी। परीक्षा परिणामों को लेकर होने वाले विवाद भी कम होंगे। वर्तमान में पीएससी सालभर में 25 और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड ( MPESB) करीब 30 प्रकार की परीक्षाएं आयोजित करता है, जिससे अभ्यर्थियों को बार-बार आवेदन और परीक्षा देने की परेशानी होती है। नई नीति के लागू होते ही यह दोहराव खत्म होगा।  चार प्रमुख श्रेणियों में परीक्षाएं आयोजित करने की तैयारी है स्नातक स्तरीय परीक्षा- सभी ग्रुप-सी के पदों के लिए हायर सेकेंडरी स्तरीय परीक्षा- 12वीं पास योगयता पर आधारित पदों के लिए तकनीकी पदों के लिए परीक्षा- इंजीनियरिंग,आइटीआइ आदि तकनीकी योग्यता वाले पद शिक्षक पात्रता परीक्षा- उच्च माध्यमिक,माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षक पदों के लिए आवेदन के समय करेंगे अभ्यर्थी करेंगे च्वाइस फिलिंग विभिन्न विभागों की एक जैसी भर्ती के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा होगी, लेकिन पेपर एक जैसा तैयार किया जाएगा। अभ्यर्थियों को आवेदन करते समय च्वाइस फिलिंग करनी होगी कि वे किसी पद के लिए आवेदन किया है और परीक्षा दी है।उसके हिसाब से मेरिट सूची तैयार होगी। इस बदलाव से लाभ एक ही परीक्षा से अनेक विभागों में चयन की संभावना। विभिन्न विभागों के लिए बार-बार आवेदन और परीक्षा की जरूरत नहीं। अभ्यर्थियों का समय, पैसा और मानसिक तनाव कम होगा। भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जल्द होगी। मेरिट के आधार पर निष्पक्ष नियुक्तियां संभव होंगी। साल 2025 की आगामी ये परीक्षाएं प्रस्तावित हैं आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा-अगस्त 2025 प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-अगस्त-सिंतबर 2025 समूह-02 उपसमूह-03 -अक्टूबर 2025 समूह-01 उपसमूह-02 -अक्टूबर 2025 संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग-सितंबर 2025 समूह-02 उपसमूह-04-नवंबर 2025 क्षेत्ररक्षक,जेल प्रहरी परीक्षा-नवंबर 2025 समूह-03 उपयंत्री-जनवरी 2026 आइटीआई में प्रशिक्षण अधिकारियों के पदों की चयन परीक्षा-फरवरी 2026 समूह-02 उपसमूह02 -मार्च 2026 सूबेदार,शीघ्रलेखक,सहायक उप निरीक्षक चयन परीक्षा-अप्रैल 2026 पुलिस आरक्षक जीडी भर्ती परीक्षा -अप्रैल 2026 सहायक उप निरीक्षक (कंप्यूटर) एवं प्रधान आरक्षक (कंप्यूटर) भर्ती परीक्षा- मई 2026 ईएसबी का क्या कहना है? ईएसबी के संचालक साकेत मालवीय ने कहा कि एक ही ग्रुप की एक जैसे समकक्ष पदों के लिए चार परीक्षाएं कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब साल भर में करीब 30 परीक्षाओं के बदले चार परीक्षाएं होंगी। अगर शासन से मंजूरी मिलती है तो इसे लागू किया जाएगा। पीएससी से केवल राज्य प्रशासनिक परीक्षाएं नए बदलावों के तहत एमपीपीएससी अब केवल राज्य प्रशासनिक सेवा, वन सेवा, इंजीनियरिंग, शिक्षा और कृषि सेवा जैसी प्रमुख परीक्षाएं आयोजित करेगा। एमपीईएसबी द्वारा स्नातक, 12वीं और पीजी स्तरीय पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। अब तक की व्यवस्था एमपीपीएससी(Government Jobs Rules Change) सालभर में 25 तो ईएसबी 30 परीक्षाएं आयोजित करता था। अब पीएससी से 6 तो एमपीईएसबी 5 होंगी। बदलाव के ये फायदे     बार-बार परीक्षा देने की जरूरत नहीं।     परीक्षा शुल्क में कमी आएगी।     एक परीक्षा से विभिन्न में चयन संभव।     आवेदन के समय इच्छित विभाग चुनेंगे।     एकीकृत मेरिट सूची बनेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सौगात: प्रदेश के बच्चों को 4.30 लाख साइकिलों का वितरण

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग इस वर्ष नि:शुल्क साइकिल प्रदाय योजना में 4 लाख 30 हजार बच्चों को नि:शुल्क साइकिल का वितरण करेगा। साइकिल वितरण की शुरूआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरू पूर्णिमा महोत्सव में भोपाल के शासकीय कमला नेहरू सांदीपनि विद्यालय के सर्व सुविधा युक्त भवन के लोकार्पण समारोह से की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 50 बच्चों को नि:शुल्क साइकिलें वितरित की। प्रदेश में अब तक एक लाख से अधिक बच्चों को उनकी पात्रतानुसार नि:शुल्क साइकिल का वितरण किया जा चुका है। नि:शुल्क साइकिल प्रदाय योजना में ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत विद्यार्थी जो कि शासकीय विद्यालयों में कक्षा 6 और 9 में अध्ययनरत हैं, वह जिस ग्राम का निवासी है उस ग्राम में शासकीय माध्यमिक या हाई स्कूल संचालित नहीं है और उसे अपने विद्यालय तक पहुचंने के लिये 2 किलोमीटर या इससे अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है, उन बच्चों कक्षा 6 या 9 में प्रथम प्रवेश पर एक बार नि:शुल्क साइकिल दिये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में स्थित कन्या छात्रावास में पढ़ने वाली छात्राएं, जिनकी शाला छात्रावास से 2 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर है उन्हें भी इस योजना में नि:शुल्क साइकिल प्रदाय की जा रही है। विभागीय अधिकारियों को निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के पहले सभी पात्र विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिल वितरण के निर्देश दिये हैं। संचालनालय स्तर पर नि:शुल्क साइकिल वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है। कक्षा 6 में पढ़ने वाले बच्चों को 18 इंच और कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले बच्चों को 20 इंच की साइकिल वितरित की जा रही है। विभागीय अधिकारियों को साइकिल वितरण के पहले उनके उचित भंडारण के संबंध में भी निर्देश दिये गये हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष विभागीय योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों को उचित समय पर दिये जाने के संबंध में कार्ययोजना तैयार की है।

इंदौर की छात्राओं को बनाया जा रहा धर्मांतरण का टारगेट, ब्राह्मण युवती का शोषण और धर्मांतरण की कोशिश

इंदौर   इंदौर, जिसे मिनी मुंबई के नाम से जाना जाता है. इसी शहर में एक ब्राह्मण युवती के साथ धर्मांतरण और दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है. पीड़िता ने सुल्तान रोशन नागोरी पर संगीन आरोप लगाए हैं, जिसमें शारीरिक शोषण, धर्म परिवर्तन का दबाव, और अश्लील फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग शामिल है. लसुड़िया पुलिस ने शिकायत के आधार पर सुल्तान के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और दुष्कर्म सहित कई धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है.पीड़िता ने कहा कि सुल्तान ने उसके ऊपर जादू-टोना भी करवाया ताकि वह उसके प्रभाव में आ जाए. युवती ने आरोप लगाया कि इंदौर में मुस्लिम युवक खासकर कोचिंग में पढ़ने वाली हिंदू लड़कियों को टारगेट करते हैं. उसने बताया कि लगभग 10 हजार हिंदू लड़कियां मुस्लिम लड़कों के निशाने पर हैं. कॉल सेंटर और टेलीपरफॉर्मेंस के कार्यस्थलों पर भी धर्मांतरण के लिए स्लीपर सेल सक्रिय हैं. युवती ने कहा कि हिंदू लड़कियों को मुसलमान लड़कों की टीम में रखा जाता है, जहां उन्हें बताया जाता है कि “अल्लाह ने तुम्हें हमारे लिए बनाया है.” इसके बाद उन्हें खाने में नशा देकर शारीरिक शोषण किया जाता है. नशा देकर शारीरिक शोषण पीड़िता ने बताया कि सुल्तान ने 2018 से उसके साथ शारीरिक शोषण शुरू कर दिया था. उसने धमकी दी कि अगर उसने धर्म परिवर्तन नहीं किया तो उसके अश्लील फोटो और वीडियो वायरल कर देगा. होटल में शारीरिक संबंध के दौरान सुल्तान ने कई फोटो और वीडियो बनाए, जिससे दबाव बनाकर वह युवती को मुसलमान बनने के लिए मजबूर करता रहा. इस कारण पीड़िता 2019 में पंजाब चली गई और वहां नौकरी करने लगी.हालांकि, 2020 में सुल्तान की शादी के बाद, मार्च 2025 में युवती इंदौर लौटी और टेली परफॉर्मेंस में नौकरी शुरू की, लेकिन 6 जून 2025 को सुल्तान ने फिर से उससे संपर्क किया और पुराने फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर शारीरिक संबंध बनाए पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए लसुड़िया थाने में शिकायत दर्ज की. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुल्तान को हिरासत में लिया. इस मामले ने शहर में सनसनी फैला दी है, और जांच में स्लीपर सेल्स और धर्मांतरण के कथित नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.

सावधान! बिजली उपभोक्ताओं को साइबर ठग बना रहे निशाना: ऊर्जा मंत्री की चेतावनी

बिजली उपभोक्ता सायबर जालसाजों से रहें सावधान : ऊर्जा मंत्री तोमर बिजली बिल का भुगतान बिजली कंपनी के अधिकृत गेटवे अथवा बिजली कंपनी के कैश काउण्टर पर करें : ऊर्जा मंत्री तोमर सावधान! बिजली उपभोक्ताओं को साइबर ठग बना रहे निशाना: ऊर्जा मंत्री की चेतावनी भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने बिजली बिलों का नकद भुगतान कंपनी के जोन, वितरण केन्द्र कार्यालय, पीओएस मशीन अथवा अधिकृत भुगतान केन्द्रों जैसे एम.पी.ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेन्टर, आईसेक्ट कियोस्क पर ही करें। उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के केशलेश भुगतान के लिये कंपनी के पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, पेटीएम ऐप, व्हाट्सएप एवं उपाय मोबाइल ऐप के माध्यम से भी बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने उपभोक्ताओं से सायबर जालसाजों से बचने की अपील की है। बिजली कंपनी के सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकारियों ने बताया है कि कंपनी अंतर्गत विद्युत देयकों के भुगतान के लिए उपभोक्ता पहचान नंबर यानि आईवीआरएस नंबर की जरूरत होती है। आईवीआरएस नंबर के आधार पर ही जोन, वितरण केन्द्रों या अन्य गेटवे एमपी ऑनलाइन, पेटीएम, फोन, गूगल, अमेजन, व्हाट्सएप आदि पर बिजली बिलों का भुगतान होता है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी मोबाइल नंबर से आए फोन के आधार पर किसी भी मोबाइल नंबर पर देयकों की राशि अंतरित न करें। साथ ही अपना पिन नंबर भी किसी के साथ साझा न करें। कंपनी के संज्ञान में आया है कि सायबर जालसाजों द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज अथवा आई.व्ही.आर. तकनीक से फोन कॉल पर नंबर दबाने के लिये कहा जाता है। जालसाजों द्वारा बिल भुगतान कराने के लिये बिजली कुछ घंटों बाद काट दी जाएगी, जैसा भय बनाया जाता है और इसके लिए बिल भुगतान करने के लिये विशेष नंबर दबाएं अथवा मोबाइल नंबर विशेष पर संपर्क कर बकाया राशि जमा कराएं, जैसे संदेश दिये जाते हैं, जो सायबर ठगी है। इस प्रकार के एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज एवं आई.व्ही.आर. फोन कॉल फर्जी हैं, इन पर ध्यान नहीं दिया जाए। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि इस प्रकार के फर्जी सायबर जालसाजों से सतर्क और सावधान रहें।  

खुशबुओं की राह पर मध्यप्रदेश, फूलों में देश का अगुआ बनने की ओर, जल्द बनेगा पूरे देश का सिरमौर

विशेष समाचार मध्यप्रदेश फूलों के उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर जल्दी ही बनेगा देश का सिरमौर भोपाल  मध्यप्रदेश ने फूलों के उत्पादन में देश में अलग पहचान बनाई है। देश में मध्यप्रदेश पुष्प (फूल) उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में उद्यानिकी के कुल 27.71 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में फूल उत्पादन की भागीदारी 42 हजार 978 हैक्टेयर है। प्रदेश के किसानों द्वारा वर्ष 2024-25 में 5 लाख 12 हजार 914 टन फूलों का उत्पादन किया गया है, जो रिकार्ड है। वह दिन दूर नहीं जब फूलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश देश का सिरमौर बनेगा। प्रदेश में किसानों का फूलों के उत्पादन के प्रति बढ़ता रूझान ही है कि गत चार वर्षों में फूलों का उत्पादन रकबा जो वर्ष 2021-22 में 37 हजार 647 हैक्टेयर था वह वर्ष 2024-25 में बढ़कर 42 हजार 976 हैक्टेयर और उत्पादन में 86 हजार 294 टन की बढ़ोत्तरी हुई है। किसानों की आय को दोगुना करने और खेती को लाभ का धंधा बनाने में केन्द्र और राज्य सरकार किसान को कैश-क्रॉप की ओर प्रेरित कर रही है। छोटी कृषि जोत रखने वाले किसान, जिनके पास एक-दो एकड़ या तीन एकड़ की कृषि भूमि है, वे फूलों का उत्पादन कर अच्छा लाभ कमा सकते है। मध्यप्रदेश के उत्पादित फूलों की मांग देश के महानगरों के साथ विदेशों में भी बढ़ी है। गुना जिले के गुलाब की महक जयपुर, दिल्ली, मुम्बई के बाद अब पेरिस और लंदन में भी पहुँच रही है। शिक्षित युवाओं के साथ गांव में रहने वाले ग्रामीण किसान भी फूलों के उत्पादन की ओर आकर्षित हुए है। राजधानी भोपाल की ग्राम पंचायत बरखेड़ा बोदर की रहने वाली श्रीमती लक्ष्मीबाई कुशवाह धान, गेहू, सोयबीन की खेती छोड़कर गुलाब, जरबेरा और गेंदा के फूल का उत्पादन कर, हर महीने तीन से चार लाख रूपये कमा रही है। ऐसे अनेक उदाहरण है, जिनसे प्रदेश में फूलों का उत्पादन बढ़ा है। मध्यप्रदेश में प्रमुख रूप से उत्पादित किये जाने वाले फूलों में गेंदा, गुलाब, सेवन्ती, ग्लेडूलस, रंजनीगंधा तथा औषधीय पुष्पों में इसेवगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली और कोलिक्स है। प्रदेश में सर्वाधिक उत्पादन क्षेत्र गेंदा के फूल का है। किसानों द्वारा 24 हजार 214 हैक्टेयर में गेंदे की खेती की जा रही है। दूसरे स्थान पर गुलाब है जिसका रकबा 4 हजार 502 हैक्टेयर और तीसरे स्थान पर सेवन्ती एक हजार 709 हैक्टेयर, चौथे स्थान पर ग्लेडूल्स एक हजार 58 हैक्टेयर, पांचवें स्थान पर रंजनीगंधा 263 हैक्टेयर सहित अन्य पुष्प 11 हजार 227 हैक्टेयर में बोए जा रहे है। प्रदेश में फूलों की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता 15.01 मैट्रिक टन है, जो फूलों की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस उत्पादकता के लिये प्रदेश की जलवायु, यहाँ की मिट्टी के साथ सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और किसानों को शासन का सहयोग है। फूलों के उत्पादन से लेकर फूलों की गुणवत्ता में सुधार और मार्केटिंग महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर मध्यप्रदेश शासन उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग लगातार काम कर रहा है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2024-25 में उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र में 14 हजार 438 हैक्टेयर का विस्तार हुआ है और इसमें फूलों का रकबा 5329 हैक्टेयर बढ़ा है। प्रदेश में 33 प्रतिशत से अधिक फूलों (पुष्प) के उत्पादन को प्रोत्साहित करने में उद्यानिकी विभाग की हाइटेक नर्सरी, प्रशिक्षण के माध्यम से कृषकों को तकनीकी की जानकारी प्रदान करना लगातार जारी है। इसी कड़ी में केन्द्र सरकार के सहयोग से ग्वालियर जिले में 13 करोड़ रूपये की लागत से हाइटेक फ्लोरी कल्चर नर्सरी विकसित की जा रही है। यह नर्सरी मध्यप्रदेश में पुष्प उत्पादन के लिये वरदान साबित होगी। वह दिन दूर नहीं जब मध्यप्रदेश फूलों के उत्पादन में देश का सिरमौर बनेगा।  

उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने आचार्य बालकानंद गिरी से की सौजन्य भेंट

भोपाल उपमुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने नई दिल्ली में आनंदपीठाधीश्वर, अनंत श्री विभूषित, श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज (तपोनिधि, पंचायती श्री आनंद अखाड़ा) से सौजन्य भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उपमुख्यमंत्री  शुक्ल ने स्वामी बालकानंद गिरी से धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की और मार्गदर्शन प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि संत समाज का आशीर्वाद और विचारशील मार्गदर्शन लोककल्याण की दिशा में प्रेरक होता है। उपमुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा, हमारी आध्यात्मिक चेतना और संतों की सेवा भावना ही समाज में समरसता, शांति और नैतिक मूल्यों की स्थापना करती है। उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं के सान्निध्य से सेवा और सद्भाव की प्रेरणा मिलती है, जो शासन के जनहितकारी प्रयासों को भी सार्थक दिशा प्रदान करती है।  

पेयजल आपूर्ति के लिए बिछाई जाएगी पाइपलाइन : राज्यमंत्री गौर

विभिन्न विकासकार्यों की समीक्षा की भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने मंत्रालय में विभिन्न विकासकार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पेयजल, सीवेज, सड़क और नाली निर्माण से जुड़ी सुविधाओं पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने गोविंदपुरा के वार्ड 72 की सागर सिटी, सागर धाम और यशोदा नगर में पेयजल आपूर्ति के स्थायी हल करने के लिए पाइपलाइन बिछाने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि जनता से जुड़े कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्य समय-सीमा में पूर्ण हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है, और गोविंदपुरा क्षेत्र भी इसमें पीछे नहीं रहेगा। जर्जर आंगनबाड़ी भवन तोड़ने और नए निर्माण के निर्देश राज्यमंत्री गौर ने वार्ड 72 के बिहारी कॉलोनी स्थित जर्जर आंगनबाड़ी भवन को तत्काल तोड़ने और नई आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए। मालीखेड़ी, दशहरा मैदान, शबरी नगर जैसी बस्तियों में सम्पवेल चालू कर पानी और सड़क निर्माण की योजना भी तत्काल शुरू करने को कहा। जनप्रतिनिधियों की जानकारी में लाएं कार्य राज्यमंत्री गौर ने कहा कि जो भी कार्य किए जा रहे हैं, उनकी जानकारी संबंधित जनप्रतिनिधियों को अवश्य दी जाए। भ्रमण के दौरान नागरिकों से मिली शिकायतों का समाधान पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। सीवेज, सड़क निर्माण कार्यों में तेज़ी लाएं वार्ड 73 की चांदवाड़ी कॉलोनी, शिव नगर, लक्ष्मी नगर आदि क्षेत्रों में सीवेज समस्या के समाधान के लिए ट्रंक लाइन डालने और अमृत 2.0 योजना से जोड़ने के निर्देश दिए। वार्ड 74 के ग्राम खेजड़ा, भानपुर मल्टी से महोली, इकोग्रीन कॉलोनी सहित अन्य क्षेत्रों में सड़क निर्माण, सीमांकन और सीवेज से संबंधित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।