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अब तक 554 कारखानों ने प्राप्त की रेटिंग

भोपाल  मध्यप्रदेश शासन के श्रम विभाग द्वारा संचालित श्रम स्टार रेटिंग पहल को प्रदेशभर में उद्योगों से सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। इस पहल का उद्देश्य कारखानों में श्रम कानूनों के पालन को सुनिश्चित करना तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना है। संचालक औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं सुरक्षा मध्‍यप्रदेश इंदौर श्रीमती नमिता तिवारी ने बताया है कि अब तक प्रदेश के 554 कारखानों ने स्व-मूल्यांकन के माध्यम से श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त की है। इनमें बड़ी, मध्यम और लघु श्रेणी की विभिन्न विनिर्माण इकाइयाँ शामिल हैं, जो इस पहल की व्यापक स्वीकार्यता और औद्योगिक क्षेत्रों में इसके प्रभावी प्रसार को दर्शाती हैं। श्रम स्टार रेटेड कारखाने इस बात का प्रमाण होते हैं कि संबंधित कार्यस्थलों पर बाल श्रम और बंधुआ श्रम पूर्णतः प्रतिबंधित हैं तथा श्रमिकों के अधिकारों का समुचित संरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। संचालक औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं सुरक्षा इंदौर ने इस पहल में सक्रिय सहभागिता के लिए सभी कारखानों का आभार व्यक्त किया है। विशेष रूप से, श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने वाले पहले पाँच कारखानों की सराहना की गई है, जिन्होंने इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाते हुए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया। श्रम रेटिंग में प्रथम पांच कारखाने संचालक औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं सुरक्षा मध्‍यप्रदेश इंदौर ने बताया कि UltraTech Cement Limited Unit Birla White कटनी, JK White (Unit of J K Cement Ltd.) कटनी, Mahakaushal Refractories Pvt. Ltd. कटनी, Udaipur Beverages Ltd. जबलपुर एवं KEC International Ltd. जबलपुर श्रम स्टार रेटिंग प्राप्‍त करने वाले प्रथम पांच कारखाने हैं। इस प्रणाली को अपनाने से न केवल श्रमिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि उद्योगों को भी कई प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होते हैं। इससे उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ता है, निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है और बाजार में संस्थानों की प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। साथ ही, प्रमाणित कारखानों को उपभोक्ताओं द्वारा प्राथमिकता मिलने की संभावना भी अधिक रहती है, जिससे उनकी ब्रांड वैल्यू और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मजबूत होती है। संचालक औद्योगिक सुरक्षा ने प्रदेश के अन्य कारखानों से भी अपील की है कि वे इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लें और श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त कर अपने संस्थान को सुरक्षित, उत्तरदायी और विश्वसनीय कार्यस्थल के रूप में स्थापित करें।  

सतना में सुरक्षा पर सवाल, वन स्टॉप सेंटर की दीवार लांघकर फरार हुईं तीन नाबालिग बालिकाएं

सतना शहर के जवाहर नगर स्थित वन स्टॉप सेंटर से 27 अप्रैल की देर रात तीन नाबालिग बालिकाएं खिड़की के रास्ते बाहर निकल गईं। घटना की जानकारी सोमवार सुबह सामने आने पर केंद्र प्रबंधन में हलचल मच गई। मामले की सूचना तत्काल सिटी कोतवाली थाना पुलिस को दी गई, जिसके बाद बालिकाओं की तलाश शुरू कर दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीनों बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के निर्देश पर अस्थायी रूप से वन स्टॉप सेंटर में रखा गया था। सतना और बिजनौर की रहने वाली हैं बालिकाएं इनमें से एक बालिका उत्तर प्रदेश के बिजनौर की रहने वाली है, जबकि अन्य दो सतना जिले के पौराणिक टोला और रामपुर बघेलान क्षेत्र से संबंधित हैं। बताया जा रहा है कि जिस डोरमेट्री में बालिकाएं ठहरी थीं, वहां की पीछे की खिड़की को क्षतिग्रस्त कर वे एक-एक कर बाहर निकलीं और परिसर से दूर चली गईं। केंद्र में सीसीटीवी कैमरे और मुख्य द्वार पर सुरक्षा कर्मी की तैनाती होने के बावजूद, पीछे की ओर खुले मैदान की दिशा से निकलने की आशंका जताई जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और परिजनों से ली जा रही मदद घटना की सूचना मिलते ही अधीक्षिका द्वारा पुलिस को अवगत कराया गया। सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न टीमों का गठन किया है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य संभावित स्थानों पर तलाश की जा रही है। साथ ही, आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालकर सुराग जुटाने का प्रयास जारी है। पुलिस द्वारा बालिकाओं के परिजनों और परिचितों से भी संपर्क किया जा रहा है, ताकि संभावित स्थानों की जानकारी मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि बालिकाओं की सुरक्षित बरामदगी प्राथमिकता है और सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।

राजगढ़: शादी में शामिल होने आई बहनों की ज्वैलरी पार, ट्रेन में 90 लाख का माल गायब

राजगढ़ राजगढ़ में अपने ताऊजी के बेटे की शादी में शामिल होने के लिए उज्जैन से राजगढ़ आई दो बहनों की बीना-नागदा ट्रैन से करीब 90 लाख रूपये की ज्वैलरी चोरी हो गई। ज्वैलरी चोरी जाने की भनक दोनों बहनों को उस समय लगी जब सोमवार को माता पूजन के कार्यक्रम में ज्वैलरी पहनने के लिए उन्होंने बैग खोला। इसके बाद ब्यावरा जीआरपी थाने पहुंचकर शिकायत की है। जानकारी के मुताबिक राजग़ढ की भाजपा पार्षद सरोज कटारिया की दोनों बेटियों आशा व राजकुमारी का विवाह उज्जैन के नलिया बाकड क्षेत्र में रहने वाले कैलाश सुल्तानिया व होकम सुल्तानिया से हुआ है। एक मई को राजगढ़ में दोनों बहनों के ताऊजी के बेटे की होना है। ऐसे में आशा व राजकुमारी रविवार को विवाह समारोह में शामिल होने के लिए अपने बच्चों के साथ दोपहर 12.30 बजे उज्जैन से बीना-नागदा ट्रैन में सवार हुई थी। साथ में वह कपड़े व जैवरात के बैग भी लेकर आई थी। दोनों बहनों की ज्वैलरी एक साथ उन्होंने एक ही बैग में रखी थी। आशा ने बताया कि हम दोपहर 12.30 बजे उज्जैन से ट्रैन में सवार हुए और शाम करीब 5 बजे ब्यावरा उतरे थे। ब्यावरा से राजगढ़ अपने घर पहुंच गए।लेकिन इसी बीच बदमाशों ने बैग में रखी ज्वैलरी को पार कर दिया। ज्वैलरी गायब होने के बाद हमन शिकायत करने के लिए ब्यावरा रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाना आए हैं। पहनने के लिए बैग खोला तब पता की चोरी हो गई     आशा ने बताया कि हमने रविवार को राजगढ पहुंचकर बैग सहित अन्य सामान रख दिया था।     हमें अंदेशा भी नहीं था कि चोरी हो गई।सोमवार को भाई की माता पूजन का कार्यक्रम था।     सुबह जब तैयार होने के दौरान ज्वैलरी पहनने के लिए हमने बैग खोला तो उसमें से ज्वैलरी गायब थी।     जिस स्थान पर ज्वैलरी रखी गई थी वह गायब थी। यह देखकर हमारे होश उड़ गए।     काफी खोजबीन की लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं लगा।     साथ में मौजूद बच्चों से भी पूछा, लेकिन किसी को इस बारे में जानकारी नहीं थी।     इसके बाद हम शिकायत दर्ज कराने ब्यावरा सिटी थाने पहुंचे थे।     वहां से हमें जीआरपी के लिए बोला गया।फिर जीआरपी थाने पहुंचकर पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया है। बैग का लगा रहा था, चैन खोलकर चीरा लगाया और निकाली ज्वैलरी बदमाशों ने चोरी की वारदात को इस तरह से अंजाम दिया है कि किसी को कोई भनक न लग सके।जिस बैग में ज्वैलरी लगी थी उसमें बकायदा ताला लगार रखा था।राजगढ पहुुंचने तक बैग में ताला लगा रहा।सोमवार को उन्होंने बकायदा ताला खोला।ताला खोलने पर नजर आया कि बदमाशों ने जैवरात चोरी करने के लिए न तो ताला तोड़ा न ही साईड की जैब की चैन तोड़ी।बल्कि चैन को खोला और उसी में से चाक लगाकार यानि की अंदर के कपड़े को काटकर जैवरात वाले बैग को निकाला और गायब कर दिया।चैन के अंदर कट लगा देखकर संदेह हुआ कि शायद चोरी हो गई। बैग के पास बैठे थे बच्चे, 2 बजे के आसपास चोरी की आशंका बताया गया है कि आशा अपने बेटे सक्षम 15 वर्ष, बेटी कृतिका 19 वर्ष व राजकुमारी अपने बेटे हार्दिक व भविष्य करीब 10-10 वर्ष के साथ राजगढ़ आ रही थी।ट्रैन में जिस बैग में ज्वैलरी रखी थी उसके आसपास 10-10 वर्ष के दोनों बालक बैठे हुए थे। परिजनों को आशंका है कि उज्जैन् से बढ़ने के बाद रास्ते में करीब 2 बजे के आसपास बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया है।उन्हें संदेह है कि शायद उन्होंने पहले चोरी की वारदात को अंजाम दिया और उसके बाद वह दूसरे किसी डिब्बे में जाकर बैठ गए। ये जेवरात हुए चोरी -रानी हार, करीब 10 तौला -छोटा हार, तीन तौला -चूड़ी छह, 11 तौला -झुमकी, एक तौला -अंगूठी 4, 10-10 ग्रामj -चेन-2, 10-10 ग्राम की -चांदी की करदौनी दो, 250-250 ग्राम की -सहित अन्य जैवरात शामिल हैं।     मेरी दोनों बहने उज्जैन से शादि में शामिल होने के लिए राजगढ़ आ रही थी।रास्ते में बीना-नागदा ट्रैन से बैग में मौजूद करीब 90 लाख की ज्वैलरी बदमाशों ने चुरा ली।आज जब पता लगा तो हम पहले सिटी थाना ब्यावरा शिकायत करने पहुंचे थे।वहां से जीआरपी थाना रेलवे स्टेशन पहुंचे हैं। शिकायत दर्ज करा रहे हैं।

जबलपुर: कॉन्स्टेबल द्वारा वकील को पीटे जाने के 14 दिन बाद FIR, अफसरों पर समझौते का दबाव, हाईकोर्ट में याचिका

जबलपुर जबलपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में अधिवक्ता के साथ मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस आरक्षक पर घर में घुसकर हमला करने के आरोप के बाद पहले पुलिस की निष्क्रियता और फिर देरी से दर्ज एफआईआर ने पूरे घटनाक्रम को विवादों में ला दिया है। अब मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां 29 अप्रैल को सुनवाई प्रस्तावित है। मामूली विवाद से शुरू हुआ हिंसक घटनाक्रम-समीक्षा टाउन निवासी अधिवक्ता पंकज शर्मा के अनुसार 11 अप्रैल की शाम बच्चों के शोर को लेकर हुए विवाद के बाद मदनमहल थाने में पदस्थ आरक्षक साकेत तिवारी उनके घर पहुंचे और गाली-गलौच करते हुए मारपीट करने लगे। बीच-बचाव करने आई महिलाओं और पड़ोसियों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। सबूत होने के बावजूद नहीं हुई तत्काल कार्रवाई-घटना के बाद पीड़ित अधिवक्ता सिविल लाइन थाने पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से पूरी घटना की जानकारी दी। आरोप है कि पुलिस ने स्पष्ट सबूत होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में रुचि नहीं दिखाई और समझौते के लिए दबाव बनाया। कोर्ट की शरण के बाद हरकत में आई पुलिस-कार्रवाई न होने पर अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। इसके बाद 25 अप्रैल को, घटना के लगभग 14 दिन बाद, सिविल लाइन थाने में आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल-पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता धर्मेंद्र सोनी ने दर्ज एफआईआर की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एफआईआर जल्दबाजी में और त्रुटिपूर्ण तरीके से दर्ज की गई, जिसमें न तो आवेदक को सूचित किया गया और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए। आरोपी ने खाली किया मकान, दबाव के आरोप-एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी आरक्षक ने अपना किराए का मकान खाली कर दिया। वहीं, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए पुलिस द्वारा दबाव बनाया जा रहा था और मना करने पर काउंटर केस की धमकी दी गई। 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई-अब इस पूरे मामले पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस बी.पी. शर्मा की एकलपीठ 29 अप्रैल को सुनवाई करेगी, जिसमें मारपीट और कथित तौर पर त्रुटिपूर्ण एफआईआर से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। बच्चों के शोर से आगबबूला हुआ आरक्षक सिविल लाइन समीक्षा टाउन में रहने वाले अधिवक्ता पंकज शर्मा 11 अप्रैल की शाम करीब 6:30 बजे घर पर आराम कर रहे थे। बाहर बच्चों का शोर हो रहा था, जिस पर उनकी पत्नी ने उन्हें शांत होकर खेलने के लिए कहा। यह बात पास में ही किराए से रहने वाले पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी को पता चली। वह शहर के मदन महल थाने में पदस्थ है। आरक्षक अधिवक्ता के घर पहुंचा और गाली-गलौच करने लगा। पास खड़े पड़ोसियों ने विवाद को शांत कराने की कोशिश की। इसी बीच अचानक आरक्षक साकेत तिवारी ने वकील पर हमला कर दिया। पड़ोसी वकील को बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आरक्षक लगातार हमला करता रहा, जिससे उनके चेहरे पर चोट आई। घटना के बाद अधिवक्ता पंकज शर्मा सिविल लाइन थाने पहुंचे और टीआई को वीडियो फुटेज के जरिए सिपाही साकेत तिवारी की करतूत बताई, लेकिन पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया। पीड़ित का कहना था कि कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उस पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा था। वकील बोले- 3 घंटे तक थाने में बैठे रहे अधिवक्ता पंकज शर्मा का कहना था कि बहुत ही मामूली बात पर वर्दी का रौब दिखाते हुए पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी ने उनके साथ मारपीट की। साकेत पड़ोस में प्रकाश सराठे के घर किराए से रहते हैं। वकील पंकज शर्मा का आरोप है कि वे रात में तीन घंटे तक थाने में बैठे रहे, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने FIR दर्ज नहीं की, बल्कि उस पुलिसकर्मी को भी वहां से अलग कर दिया, जो रिपोर्ट दर्ज करता है, ताकि वह शिकायत न लिख सके। पंकज शर्मा ने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपे, जिसमें विवाद होता दिख रहा है। मारपीट की जानकारी मिलते ही साथी अधिवक्ता सिविल लाइन थाने पहुंच गए। सीएसपी और टीआई ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए जांच की बात कही। लगातार शिकायतें कीं, कार्रवाई नहीं हुई अधिवक्ता पंकज शर्मा का कहना है कि पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ लगातार शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में 23 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर 29 अप्रैल को सुनवाई होनी है। पीड़ित को नहीं दी जानकारी याचिकाकर्ता पंकज शर्मा के वकील धर्मेंद्र सोनी का कहना है कि साकेत तिवारी के खिलाफ जल्दबाजी में जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें कई खामियां हैं, जिन्हें सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया जाएगा। उनका कहना है कि जब एफआईआर दर्ज की जा रही थी, तब आवेदक को न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए। जहां पंकज शर्मा के हस्ताक्षर होना थे, वहां किसी और के हस्ताक्षर कर दिए गए। धर्मेंद्र सोनी ने बताया कि एफआईआर की कंडिका 7 में आरोपी साकेत तिवारी का नाम होना था, वहां उसके अलावा एक और नाम शैलेंद्र सिंह मार्को का भी लिखा है। वह सिविल लाइन थाने में एएसआई के पद पर पदस्थ हैं और उनका इस केस से कोई ताल्लुक नहीं है। अधिवक्ता ने बताया कि जानबूझकर एफआईआर इस तरह लिखी गई है, ताकि बाद में उस पर सवाल खड़े हो सकें।

सुनील वर्मा को मिला ‘लोक संपर्क सम्मान’, भोपाल में जनसंपर्क विभाग में उत्साह

भोपाल पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया की भोपाल इकाई द्वारा ‘राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस-2026’ के अवसर पर 26 अप्रैल को जेके अस्पताल के सीएमई हॉल में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पत्रकारिता-जनसंपर्क क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। इस श्रृंखला में जनसंपर्क विभाग के उप संचालक सुनील वर्मा को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘लोक संपर्क सम्मान’ प्रदान किया गया। गौरतलब है कि, जनसंपर्क विभाग के उप-संचालक सुनील वर्मा ने अपने कार्यों के जरिए जनसंपर्क के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। उनका व्यक्तित्व सरल, सौम्य और विनम्र है। यह व्यवहार उन्हें सभी वर्गों में लोकप्रिय बनाता है। वे अपने व्यवहार और कार्यशैली से यह सिद्ध करते हैं कि जनसंपर्क केवल सूचना का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि लोगों के साथ संवेदनशील और भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की प्रक्रिया भी है। वे एक ऐसे अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं, जो अपने सहयोगियों और आमजन दोनों के प्रति समान रूप से संवेदनशील रहते हैं और सभी का ध्यान रखते हैं। समर्पण और नवाचार के लिए सम्मान जनसंपर्क के प्रति वर्मा की निष्ठा और समर्पण उनके कार्यों में स्पष्ट झलकता है। संवाद को सशक्त बनाने, सूचनाओं को प्रभावी ढंग से प्रसारित करने और शासन तथा जनता के बीच मजबूत कड़ी बनने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है। यही वजह है कि वे विभाग में एक विश्वसनीय और प्रेरणास्रोत नाम बन चुके हैं। उन्हें यह सम्मान जनहित के प्रति प्रतिबद्धता, उत्कृष्ट कार्यशैली और जनसंपर्क के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के लिए दिया गया। नारी शक्ति का भी वंदन गौरतलब है कि, कार्यक्रम में जनसंपर्क विभाग की सहायक संचालक निहारिका मीणा और हिमांशी बजाज को भी सम्मानित किया गया। मंच पर सभी हस्तियों को वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर, प्रख्यात साहित्यकार उर्मिला शिरीष और एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के कुलगुरू डॉ. नरेंद्र कुमार थापक ने सम्मानित किया। बदलते जनसंपर्क पर हुई चर्चा बता दें, कार्यक्रम के दौरान जनसंपर्क और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका और समाज के साथ प्रभावी संवाद की जरूरत जैसे अहम विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। यह आयोजन केवल सम्मान समारोह तक सीमित था, बल्कि अनुभवों के आदान-प्रदान और नए विचारों को साझा करने का मंच भी था।

नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर टवेरा और ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर, 5 की मौत, 7 घायल

नर्मदापुरम  मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में आधी रात हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. टवेरा कार और अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली की आमने-सामने टक्कर में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 लोग घायल हो गए. हादसा नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर आंचलखेड़ा के पास हुआ, जहां टक्कर इतनी तेज थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. यह घटना उस समय हुई जब कार सवार लोग एक शादी समारोह से लौट रहे थे. अचानक हुए इस हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया।  रात करीब 1 बजे हुए इस हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद कार के परखच्चे उड़ गए. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जोरदार आवाज के साथ दोनों वाहन आपस में भिड़े और कुछ ही पलों में चीख-पुकार मच गई. आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने का प्रयास किया. हादसे के तुरंत बाद पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ।  आमने-सामने की टक्कर बनी मौत की वजह प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, टवेरा और ट्रैक्टर-ट्रॉली के बीच सीधी भिड़ंत हुई. ट्रॉली में अनाज भरा हुआ था, जिससे उसका वजन ज्यादा था और टक्कर का असर भीषण रहा. कार सवारों को संभलने का मौका नहीं मिला।  शादी से लौट रहे थे सभी लोग बताया जा रहा है कि कार में सवार सभी लोग एक शादी समारोह से लौट रहे थे. खुशी के माहौल में घर लौटते वक्त अचानक यह हादसा हुआ. परिवार और रिश्तेदारों के बीच खुशी का माहौल कुछ ही पलों में शोक में बदल गया।  घायलों का इलाज जारी, कुछ की हालत गंभीर हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के अनुसार, कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है. प्रशासन की ओर से बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है।  तेज रफ्तार और कम दृश्यता का असर पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि हादसे की वजह तेज रफ्तार और रात के समय कम दृश्यता हो सकती है. हाईवे पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण ड्राइवर को सामने से आ रहे वाहन का अंदाजा नहीं लग पाया।  जांच में जुटी पुलिस, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा रहा है। 

Madhya Pradesh सरकार का बड़ा तोहफा, 75%+ अंक लाने वाले छात्रों को मिलेगा लैपटॉप अनुदान

भोपाल. प्रदेश में इस साल भी 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वालों की संख्या बढ़ी है। इसका असर मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना पर भी पड़ा है। इस साल इस योजना के तहत करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि दी जाएगी। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 26 हजार ज्यादा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल से उन सभी विद्यार्थियों की सूची मांगी है, जिन्होंने 12वीं परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। विभाग द्वारा सूची के सत्यापन के बाद पात्र विद्यार्थियों के खातों में सीधे राशि ट्रांसफर की जाएगी। जून व जुलाई में विद्यार्थियों को लैपटाप की राशि प्रदान करने की तैयारी है। इस योजना पर इस साल सरकार करीब 302 करोड़ रुपयों से अधिक खर्च करने जा रही है। हर साल बढ़ रहा आंकड़ा वर्ष लैपटॉप पाने वालों की संख्या 2023 – 78000 2024 – 90,000 2025 – 94,500 16 साल पहले शुरू हुई थी योजना मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना की शुरुआत वर्ष 2009-10 में की गई थी। प्रारंभ में इस योजना के तहत केवल 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को ही पात्र माना जाता था। उस समय लाभार्थियों की संख्या करीब 20 से 25 हजार के बीच रहती थी। बाद में इसे घटाकर 70 प्रतिशत किया गया। कुछ वर्षों से 75 प्रतिशत अंक का मानक तय किया गया है। स्कूल टॉपर को स्कूटी मिलती है राज्य सरकार मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए अन्य योजनाएं भी चला रही है। शासकीय स्कूलों में 12वीं कक्षा के टॉपर विद्यार्थियों को स्कूटी प्रदान करने की योजना भी लागू है। इसमें स्कूल स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला छात्र या छात्रा पात्र होता है। 1.21 लाख विद्यार्थियों को राशि इस बार मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। मंडल से ऐसे विद्यार्थियों की सूची मांगी गई है। – धर्मेंद्र शर्मा, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय।

मरीजों और परिजनों को राहत, एम्स भोपाल में 400 वाहनों की नई पार्किंग बनेगी

एम्स भोपाल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के मुख्य द्वार पर नई पार्किंग का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके शुरू होने से न केवल अस्पताल परिसर व्यवस्थित नजर आएगा, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों को वाहन सुरक्षित खड़े करने की बड़ी सुविधा मिलेगी। फिलहाल पार्किंग स्थल पर फिनिशिंग का काम चल रहा है, जिसके बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं एम्स भोपाल में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। एम्स के पीआरओ डॉ. केतन मेहरा ने बताया कि नई पार्किंग में 400 से अधिक वाहनों को खड़ा करने की व्यवस्था की गई है। फिनिशिंग कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा। आने-जाने में कोई बाधा नहीं आएगी व्यवस्थित पार्किंग होने से अस्पताल परिसर में यातायात भी सुचारू रहेगा और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को आने-जाने में कोई बाधा नहीं आएगी। वर्तमान में एम्स की ओपीडी रोजाना चार हजार से अधिक रहती है। ऐसे में यहां आने वाले लोगों को वाहन खड़ा करने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। जगह के अभाव में लोग अपने वाहन बाहर मैदान या सड़कों के किनारे खड़े करने को मजबूर थे, जिससे अक्सर वाहन चोरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। नई पार्किंग शुरू होने के बाद इस समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।  

ड्रोन से इंदौर में ट्रैफिक पर सख्ती, 2430 मामलों में हुई कार्रवाई

इंदौर शहर में यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यातायात पुलिस द्वारा आधुनिक तकनीकों का उपयोग निरंतर बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में लगातार ड्रोन सर्विलांस के माध्यम से प्रमुख चौराहों एवं मुख्य मार्गों पर व्यस्तम समय के दौरान प्रभावी निगरानी की जा रही है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध ड्रोन से प्राप्त इनपुट के आधार पर मौके पर तैनात यातायात पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई। इसमें गलत पार्किंग, संकेत उल्लंघन, गलत दिशा आदि पर कार्रवाई की गई। चारों जोनों में विस्तारित ड्रोन सर्विलांस ड्रोन सर्विलांस के दायरे को और अधिक विस्तारित करने के लिए यातायात के चारों जोनों में अलग-अलग ड्रोन टीमों द्वारा लगातार व्यस्तम समय में कार्य किया जा रहा है। डीसीपी (यातायात) राजेश कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में व्यस्तम समय के दौरान मुख्य चौराहों, मार्गों में ड्रोन के माध्यम से यातायात व्यवस्था की निगरानी की गई। ड्रोन में लगे पीए सिस्टम द्वारा अनाउंसमेंट भी किए गए, जिससे आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा सकें। कंट्रोल रूम और वायरलेस के जरिए त्वरित यातायात प्रबंधन ड्रोन सर्विलांस टीम द्वारा जहां कहीं भी यातायात बाधित पाया गया, वहां से तत्काल वायरलेस के माध्यम से कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। कंट्रोल रूम द्वारा नजदीकी ट्रैफिक पॉइंट को सूचित कर त्वरित रूप से यातायात व्यवस्था को सुचारु कराया गया। आगामी समय में भी यातायात पुलिस द्वारा शहर के प्रमुख मार्गों एवं चौराहों को चिह्नित कर ड्रोन सर्विलांस के माध्यम से इस प्रकार की कार्रवाई निरंतर जारी रखी जाएगी।  

बड़ा प्रशासनिक विवाद, बंगाल ने MP में पकड़े गए 3,259 लोगों को बताया अपना नागरिक

भोपाल मध्य प्रदेश में पुलिस द्वारा संदिग्ध बांग्लादेशी के रूप में पिछले वर्ष चिह्नित किए गए 3,278 लोगों में से 19 के अलावा बाकी को बंगाल सरकार ने अपने राज्य का निवासी माना है। बंगाल सरकार ने स्वीकार किया है कि इन लोगों के [Aadhaar Redacted], राशन कार्ड और मतदाता परिचय पत्र उनके यहां से ही बने हैं। 19 लोगों के दस्तावेज को वैध नहीं माना था, इसलिए इन्हें बांग्लादेश भेजने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस ने नियमानुसार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपा था। मुख्य सचिव और पुलिस टीमों की सक्रियता बता दें, केंद्र सरकार ने जून, 2025 में सभी राज्यों से संदिग्ध बांग्लादेशियों की पहचान और उनके दस्तावेज का सत्यापन कराने के लिए कहा था। इसके बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन ने गृह व अन्य संबंधित विभागों और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें संदिग्धों को चिह्नित करने के तरीके व आगे की प्रक्रिया पर चर्चा हुई थी। सभी जिलों में थाना प्रभारियों को इन्हें चिह्नित करने की जिम्मेदारी दी गई। इसमें उनकी भाषा, काम आदि को आधार बनाया गया। अभियान में 3,278 लोगों को चिह्नित किया गया था। बंगाल भेजी गईं पुलिस की 20 टीमें संदिग्धों के दस्तावेज की पड़ताल के लिए मध्य प्रदेश से पुलिस की 20 टीमें बंगाल भेजी गई थीं। एक टीम ने तीन से चार जिलों में जाकर शासकीय कार्यालयों से दस्तावेज की पुष्टि की, जिनमें 3,259 को सही बताया गया। हालांकि, मध्य प्रदेश का गृह विभाग बंगाल सरकार द्वारा दस्तावेज को वैध ठहराए जाने को फिलहाल अंतिम नहीं मान रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फिर से सत्यापन कराया जा सकता है। एमपी गृह विभाग दोबारा करा सकता है सत्यापन दरअसल, आशंका यह रहती है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बंगाल में आकर फर्जी तरीके से दस्तावेज न बनवा लिए हों। इसी कारण अधिकारियों का कहना है कि संदेह होने पर फिर सत्यापन कराया जाएगा। यह सतत चलने वाली प्रक्रिया है। प्रशासन का मानना है कि सुरक्षा के लिहाज से पहचान और दस्तावेजों की सत्यता की गहराई से जांच करना अनिवार्य है ताकि किसी भी प्रकार की घुसपैठ की आशंका को समाप्त किया जा सके।