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विजय मेवाड़ा के हत्यारों के लिए फांसी की सजा की मांग, परिजनों और हिंदू संगठनों ने निकाला कैंडल मा

भोपाल  राजधानी के अशोका गार्डन इलाके में होटल संचालक विजय मेवाड़ा की हत्या के बाद आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और फांसी की मांग को लेकर हिंदूवादी संगठनों,  परिजनों और क्षेत्रीय नागरिकों ने रविवार को एक शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। हजारों की संख्या में लोग इस मार्च में शामिल हुए। विजय मेवाड़ के हत्यारों को फांसी की सजा देने मांग करते हुए नारे लगाए। कैंडल मार्च में शामिल हुए मंत्री सारंग यह कैंडल मार्च नेहरू स्कूल चौराहे से शुरू होकर प्रभात चौराहे तक पहुंचा और फिर वापस नेहरू स्कूल चौराहे पर समाप्त हुआ। पूरे मार्ग में लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर मृतक विजय मेवाड़ा को श्रद्धांजलि दी और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। मार्च में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग भी शामिल हुए। उनके साथ हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी सहित कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। आरोपियों ने चाकू से कर दिया था हमला गौरतलब है कि 30 मार्च को अशोका गार्डन थाना क्षेत्र में प्रभात पेट्रोल पंप के पास 35 वर्षीय विजय मेवाड़ा पर धारदार हथियारों से हमला किया गया था। वह अपनी चाय होटल बंद कर कर्मचारियों को छोड़ने जा रहे थे, तभी मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम, फरमान उर्फ आरिस और मोहम्मद इमरान उर्फ ब्रावो ने विवाद के बाद उन पर ताबड़तोड़ वार किए। गंभीर रूप से घायल विजय ने हमीदिया अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फरमान और इमरान को पहले ही पकड़ लिया गया था, जबकि मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम फरार था, जिस पर 30 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। मुख्य आरोपी का हुआ शॉर्ट एनकाउंटर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आसिफ रातीबड़ क्षेत्र में छिपा हुआ है। जब पुलिस टीम उसे पकड़ने पहुंची और गिरफ्तार कर वापस ला रही थी, तभी आरोपी ने पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें आसिफ के पैर में गोली लग गई। उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अवैध हथियार भी बरामद  पुलिस कमिश्नर संजय सिंह के अनुसार, आरोपी के खिलाफ अब तक 9 आपराधिक मामले सामने आए हैं और उसके अन्य आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। आरोपी के पास से अवैध हथियार भी बरामद किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसे हथियार कहां से मिले और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। हिंदूवादी संगठन सड़कों पर उतरे इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। इससे पहले अशोका गार्डन थाने पर हनुमान चालीसा पाठ और चक्काजाम भी किया गया था। वहीं, सकल हिंदू समाज ने एनएसए लगाने, बुलडोजर कार्रवाई और आरोपियों को फांसी देने की मांग की है। इलाके में अब भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पुलिस हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।

स्थापना दिवस पर विशेष- शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर

स्थापना दिवस पर विशेष- शून्य से शिखर तक भाजपा का सफर भोपाल भाजपा की कुल उम्र कांग्रेस के शासन काल से कम होने के बावजूद भी आज सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। आज बीजेपी का 44वां स्थापना दिवस है। अपने स्थापना दिवस आयोजन के तहत पीएम के संबोधन से लेकर देश में अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम किए जा रहे हैं। बीजेपी ने 2 से 303 सांसदों तक का सफर पूरा कर बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का आकार ले लिया है।   देश में आपातकाल के वापस लेने के बाद बीजेएस ने कई अन्य छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर जनता पार्टी का गठन किया। जनता पार्टी ने 1977 के लोकसभा चुनाव में सफलता का स्वाद चखा और मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री बनाकर केंद्र में सरकार बनाई। जनता पार्टी का प्रयोग अधिक दिनों तक नहीं चल पाया। दो-ढाई वर्षों में ही अंतर्विरोध सतह पर आने लगा। कांग्रेस ने भी जनता पार्टी को तोड़ने में राजनीतिक दांव-पेंच खेलने से परहेज नहीं किया। भारतीय जनसंघ से जनता पार्टी में आये सदस्यों को अलग-थलग करने के लिए ‘दोहरी-सदस्यता’ का मामला उठाया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध रखने पर आपत्तियां उठायी जानी लगीं। यह कहा गया कि जनता पार्टी के सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य नहीं बन सकते। 4 अप्रैल, 1980 को जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति ने अपने सदस्यों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य होने पर प्रतिबंध लगा दिया। पूर्व के भारतीय जनसंघ से संबद्ध सदस्यों ने इसका विरोध किया नतीजतन मोरारजी देसाई को 1980 में पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह के कारण इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा और नए चुनाव हुए। जनता पार्टी 1980 में भंग हो गई और इसके सदस्यों ने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ इसके पहले अध्यक्ष के रूप में भाजपा (BJP) का गठन किया।  और जनता पार्टी से अलग होकर 6 अप्रैल, 1980 को एक नये संगठन ‘भारतीय जनता पार्टी’ की घोषणा की, इस प्रकार भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई। 1984 के चुनावों में पार्टी की भारी हार से भाजपा को झटका लगा. बीजेपी को सिर्फ 2 सीटों पर संतोष करना पड़ा. साल 1989 में नौवीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में BJP को 85 सीटें हासिल हुईं. हालांकि, 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के साथ इसका ग्राफ ऊपर चढ़ने लगा।  पंडित श्यामा प्रसाद, दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांतों के अनुसार राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का साधन नहीं है। समाज को अपेक्षित दिशा में प्रगति पथ पर ले जाना भी उसका कार्य है। इसके लिये संगत दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जो संगत विचारधारा से प्राप्त होता है। आज भारत के सभी राजनैतिक दल विचारधारा शून्यता के शिकार हैं। भाजपा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, एकात्म मानववाद तथा पंचनिष्ठाओं की संगत विचारधाराओं के आधार पर संगठन का नियमन कर रही है। शासन की नीति में भी ये दिखाई दे रहा है । भाजपा अपने ध्येनिष्ठ कार्यकर्ताओं की शक्ति के दम पर 13 साल का केन्द्रीय शासन एवं प्रदेशों में भाजपा की सरकारों ने अन्य दलों की सरकारों की तुलना में अच्छा शासन दिया है। दस वर्षों से श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सकारात्मक सुशासन की प्रक्रिया भले ही तीव्र गति से चल रही हो, पर व्यवस्थाओं की पुरानी विकृतियों का शमन करने में अभी भी कुछ समय लगेगा। (मनोज बाबू चौबे) 

नया फोर लेन बायपास दो राज्यों के बीच सांस्कृतिक कड़ी बनेगा: मुख्यमंत्री डॉ यादव

दो राज्यों को सांस्कृतिक डोर से जोड़ेगा नया फोर लेन बायपास : मुख्यमंत्री डॉ यादव मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी एवं केन्द्रीय मंत्री गडकरी का जताया आभार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को दिन-प्रतिदिन नई-नई सौगात देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा रविवार को मध्यप्रदेश (ज़िला निवाड़ी) और उत्तर प्रदेश (ज़िला झाँसी) राज्यों में, झांसी के लिए 15.5 किमी लंबाई के 4-लेन वाले दक्षिणी बाईपास के निर्माण और बंगाय खास से ओरछा तिगेला तक राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और राष्ट्रीय राजमार्ग-39 को जोड़ने वाली लिंक रोड के लिए 631.73 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी गई है। यह बायपास और लिंक रोड दो बड़े प्रदेशों के नागरिकों को एक सांस्कृतिक डोर से हमेशा के लिए जोड़ देगा। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर), राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर), राष्ट्रीय राजमार्ग-39, राष्ट्रीय राजमार्ग-539, राष्ट्रीय राजमार्ग-552 इन पाँच राजमार्गों के जंक्शन पर स्थित है, जिसके कारण शहर के भीड़भाड़ वाले मुख्य इलाके से होकर गुज़रने वाले ट्रैफिक में भारी बढ़ोतरी होती है। झांसी में एक नया औद्योगिक शहर (BIDA) भी बसाया जा रहा है, जहां भारी माल ढुलाई की ज़रूरत होगी। उन्होंने कहा कि दक्षिणी बाईपास झांसी के आस-पास से गुज़रने वाले शहरों के बीच के ट्रैफिक के लिए एक निर्बाध रास्ता बनाएगा, जिससे शहर के अंदर यात्रा का समय कम होगा और शहर में ट्रैफिक का दबाव घटेगा। इससे प्रायद्वीपीय भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत के बीच, झांसी से होकर गुज़रने वाले पाँच राष्ट्रीय राजमार्गों के रास्ते माल की आवाजाही में लगने वाला समय भी कम होगा। यह बाईपास ओरछा तिगेला पर खत्म होता है, जो UNESCO की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल है और जहाँ जहाँगीर महल, राम राजा मंदिर और बेतवा वन्यजीव अभयारण्य स्थित हैं। हाईवे तक बेहतर पहुंच से इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और विकास को भी गति मिलेगी।  

पहले छोटे किसानों का खरीदा जाएगा गेहूं, फिर मध्यम एवं बड़े किसानों से होगी खरीदी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सरकार हर घड़ी किसानों के साथ, तय वक्त पर प्रारंभ होगी गेहूं खरीदी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहले छोटे किसानों का खरीदा जाएगा गेहूं, फिर मध्यम एवं बड़े किसानों से होगी खरीदी प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं केन्द्र एवं जूट कमिश्नर के साथ ही बारदाना प्रदाय एजेंसियों से लगातार सम्पर्क में है राज्य सरकार उपार्जन व्यवस्था की निगरानी के लिए बनाएं राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के किसानों का हर तरह से कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। हमारी सरकार हर घड़ी किसानों के साथ है। प्रदेश में तय वक्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं खरीदा जायेगा। उपार्जन प्रक्रिया में पहले छोटे किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। इसके बाद मध्यम एवं बड़े किसानों के गेहूं की खरीदी की जाएगी। स्लॉट बुकिंग वाले सभी किसानों का गेहूं चरणबद्ध रूप से खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं है। सरकार सभी व्यवस्थाएं कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में गेहूं उपार्जन कार्य के संबंध में सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह के सदस्य एवं कृषक प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। गेहूं उपार्जन में बारदान की उपलब्धता निरंतर बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में गेहूं खरीदी में किसानों को किसी भी प्रकार से बारदाने की समस्या नहीं आने दी जाएगी। केन्द्र सरकार, जूट कमिश्नर सहित अन्य बारदान प्रदाय एजेंसियों से बारदान आपूर्ति के लिए राज्य सरकार लगातार सम्पर्क बनाए हुए है। उपार्जन शुरू होने से पहले कराएं तौल केन्द्रों का निरीक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन व्यवस्था को सरल, सहज और सुविधाजनक बनाया जाये। किसानों को उपार्जन केन्द्र तक आने और गेहूं बेचने में किसी भी तरह की कठिनाई न होने पाये। मुख्यमंत्री ने उपार्जन व्यवस्था पर नियमित रूप से निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय एवं कृषि उपज मंडियों में भी कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन के दृष्टिगत प्रदेश के सभी तौल केंद्रों का 10 अप्रैल से पहले गहन निरीक्षण करा लिया जाए, जिससे किसानों में किसी भी तरह का संशय न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों के वर्तमान ढांचे में क्रमबद्ध सुधार किया जाये। सभी मंडियों को वैश्विक जरुरतों के मुताबिक अपग्रेड कर इन्हें वर्ल्ड क्लास मंडी की तरह तैयार किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन केंद्रों में आने वाले किसानों को सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पीने का पानी, बैठक, छाया, प्रसाधन एवं पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाये। किसी को भी किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत असुविधा का सामना न करना पड़े। किसी भी केन्द्र में किसानों/ट्रेक्टर-ट्राली की लंबी-लंबी कतारें न लगें, सभी किसानों का सहजता से गेहूं तुल जाये, ऐसी व्यवस्थाएं की जाएं। जिन किसानों से गेहूं खरीदा जाये, कम से कम समय में उनके खातों में भुगतान कर देने की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं। 10 अप्रैल से प्रारंभ हो जाएगी गेहूं खरीदी अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से एवं अन्य सभी संभागों में 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन प्रारंभ होने जा रहा है। उन्होंने बतायाकि जिन संभागों में 10 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होनी है, उनके लिए आगामी मंगलवार, 7 अप्रैल से पंजीकृत किसानों की स्लॉट बुकिंग प्रारंभ हो जायेगी। शुक्रवार, 10 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि उपार्जन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। उन्होंने बताया कि इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 40 रूपए प्रति क्विंटल बोनस का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन होना अनुमानित है। इसके लिए 3 लाख 12 हजार गठान बारदानों की आवश्यकता होगी। प्रदेश में गेहूं खरीदी आरंभ करने के लिए आवश्यक बारदान का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। केन्द्र सरकार की ओर से लिमिट भी तय कर दी गई है। राज्य सरकार को केन्द्र से हर जरूरी सहयोग भी मिल रहा है। जूट कमिश्नर कार्यालय सहित अन्य बारदाना प्रदायकर्ताओं से भी बारदान सामग्री प्राप्त की जा रही है। इसके साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति के निर्देश पर अतिरिक्त बारदान खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है। बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, प्रदेशाध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल सहित कृषक प्रतिनिधि और खाद्य, सहकारिता एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।  

वाहन मॉडिफाई करना महंगा, चालान और बीमा में परेशानी का खतरा

इंदौर. इंदौर शहर में गाड़ियों को स्टाइलिश बनाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। एलईडी लाइट, तेज आवाज वाले साइलेंसर, हाई पावर म्यूजिक सिस्टम और स्ट्रक्चर में बदलाव युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं, लेकिन यह शौक कई बार सीधे कानून के दायरे में ला खड़ा करता है। परिवहन नियमों के मुताबिक वाहन में बिना अनुमति किए गए बदलाव अवैध हैं और इसके लिए भारी चालान से लेकर गाड़ी जब्ती तक की कार्रवाई हो सकती है। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वाहन निर्माता द्वारा तय स्पेसिफिकेशन में बदलाव नहीं किया जा सकता। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार सबसे ज्यादा कार्रवाई जिन मामलों में होती है, उनमें शामिल हैं – हाई बीम या रंगीन एलईडी-फ्लैश लाइट, मॉडिफाइड या तेज आवाज वाले साइलेंसर, गाड़ी की बॉडी-चेसिस में बदलाव, मूल रंग बदलना (बिना आरटीओ अनुमति), फैंसी या नियम विरुद्ध नंबर प्लेट और ओवरसाइज टायर या ग्राउंड क्लीयरेंस में छेड़छाड़। ट्रैफिक अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में हर महीने सैकड़ों चालान बनाए जा रहे हैं। कई बार वाहन जब्त कर कोर्ट कार्रवाई भी की जाती है। हादसे में कौन जिम्मेदार कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर मॉडिफिकेशन की वजह से हादसा होता है तो प्राथमिक जिम्मेदारी वाहन मालिक की होती है। हालांकि, अगर यह साबित हो जाए कि गैरेज ने गलत तरीके से बदलाव किया या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया, तो उस पर भी कार्रवाई हो सकती है। वाहन में अनधिकृत बदलाव कराना खुद मालिक का निर्णय होता है, इसलिए दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी से बचना आसान नहीं होता। इंश्योरेंस क्लेम पर भी खतरा इंश्योरेंस एडवाइजर आशीष शर्मा का कहना है कि इंश्योरेंस कंपनियां वाहन के मूल ढांचे के आधार पर पॉलिसी जारी करती हैं। यदि गाड़ी में बिना जानकारी दिए बदलाव किया गया है, तो क्लेम खारिज किया जा सकता है। आग लगने या शार्ट सर्किट के मामलों में विशेष जांच होती है मॉडिफाइड वायरिंग या बैटरी मिलने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है साइलेंसर या इंजन में बदलाव से जुड़े एक्सीडेंट भी क्लेम विवाद में आते हैं क्या करें कोई भी बदलाव कराने से पहले आरटीओ से अनुमति लें केवल प्रमाणित एसेसरीज का उपयोग करें इंश्योरेंस कंपनी को बदलाव की जानकारी दें क्या न करें साइलेंसर, लाइट या नंबर प्लेट में अवैध बदलाव लोकल गैरेज से बिना मानक के फिटिंग गाड़ी की बाडी या इंजन में छेड़छाड़। इंश्योरेंस क्लेम, वारंटी में भी परेशानी  कंपनियां तय मापदंड के अनुसार वाहन बनाती हैं, जिनमें सुरक्षा पर विशेष फोकस होता है। बदलाव से कई बार सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी हो जाती है, इसलिए मॉडिफिकेशन नहीं कराना चाहिए। मॉडिफिकेशन के बाद इंश्योरेंस क्लेम में भी परेशानी आती है। वहीं कंपनी द्वारा दी जा रही वाहन की वारंटी भी खत्म हो सकती है। बदलाव करने से अच्छा है कि वाहन का अपर माडल चुनें, ताकि ओरिजनल फिटिंग मिले। – आदित्य कासलीवाल, वाइस प्रेसिडेंट, ऑटो मोबाइल एसोसिएशन

MP बोर्ड अपडेट: 1.29 लाख छात्रों ने नहीं पास की 5वीं-8वीं, मई में होगी रीटेस्ट

भोपाल प्रदेश में पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में इस बार बड़ी संख्या में विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हुए हैं। दोनों कक्षाओं के करीब 1.29 लाख विद्यार्थी 33 प्रतिशत अंक भी हासिल नहीं कर सके। अब इन विद्यार्थियों को एक और मौका देते हुए मई के दूसरे सप्ताह में पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसमें पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थी भी शामिल हो सकेंगे। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिलों और स्कूलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। जहाँ पांचवीं में करीब 62 हजार और आठवीं में करीब 67 हजार विद्यार्थी फेल हुए हैं, ऐसे विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से पुनः परीक्षा में शामिल होना होगा। कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक व्यवस्था विभाग का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को एक और अवसर देकर उन्हें अगली कक्षा में आगे बढ़ने का मौका दिया जा सके। राज्य शिक्षा केंद्र ने स्कूलों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे फेल हुए विद्यार्थियों के लिए विशेष तैयारी कराएं। इसके तहत अतिरिक्त कक्षाएं, अभ्यास सत्र और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि विद्यार्थी पुनः परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। स्कूलों को यह भी कहा गया है कि कमजोर छात्रों की पहचान समय रहते की जाए और उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सहयोग दिया जाए। 33 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले नहीं होंगे प्रोन्नत दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई विद्यार्थी पुनः परीक्षा में भी न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे उसी कक्षा में दोबारा अध्ययन करना होगा। यानी ऐसे छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नत नहीं किया जाएगा। शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे नियमित रूप से अतिरिक्त समय देकर विद्यार्थियों को पढ़ाएं और अभ्यास प्रश्नों के माध्यम से उनकी समझ मजबूत करें। विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझाते हुए बार-बार पुनरावृत्ति कराई जाए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकें। अतिरिक्त कक्षाएं और अभिभावकों की भूमिका स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि 5वीं और 8वीं में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की तैयारी के लिए स्कूलों में विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएं। इन कक्षाओं में विषयवार कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर विशेष जोर दिया जाए। इसके साथ ही, अभिभावकों को भी बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने और नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया जाए। शिक्षकों को कहा गया है कि वे विद्यार्थियों के मन से परीक्षा का डर निकालें और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करें ताकि अगली परीक्षा में सफलता सुनिश्चित हो सके।  

स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025 लागू

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में किसानों को पशुपालन के लिए प्रेरित कर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर होंगे। हमारा संकल्प है कि हम प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को निरंतर बढ़ाएंगे और वर्ष 2028 तक प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाएंगे। गो-संरक्षण और गो-संवर्धन सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में पशुपालन विभाग को अब गौपालन विभाग का नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में “स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025” लागू की गई है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में उपलब्ध गोवंश के आश्रय और भरण-पोषण के लिए 5 हजार से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। प्रदेश के आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जिलों में आदर्श गौशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में इनके निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं। ग्वालियर स्थित आदर्श गौशाला में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत योगदान देता है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में सांची ब्रांड को और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ करार किया गया है। गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में गौसंवर्धन बोर्ड के माध्यम से गौशालाओं को चारा-भूसा अनुदान के लिए 505 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। गौशालाओं में गोवंश के बेहतर आहार की व्यवस्था के लिए प्रति गोवंश दी जाने वाली सहायता राशि 20 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। घायल अथवा असहाय गायों के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहनों की व्यवस्था भी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पशुपालन और डेयरी विकास को गति देने के लिए “मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना” का नाम परिवर्तित कर “डॉ. भीमराव अंबेडकर विकास योजना” किया गया है। इस योजना के अंतर्गत 25 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए लगभग 42 लाख रुपये तक ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें 25 से 33 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और संग्रहण को बढ़ाने के लिए व्यापक योजना बनाई गई है। दुग्ध संकलन क्षमता को बढ़ाते हुए 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक दुग्ध संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। अगले 5 वर्षों में दूध संकलन कवरेज वाले गांवों की संख्या 9 हजार से बढ़ाकर 26 हजार करने का लक्ष्य है। इसी अवधि में प्रदेश के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना की जाएगी। अब तक प्रदेश में 1,181 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है और 617 निष्क्रिय समितियों को पुनः सक्रिय बनाया गया है। इसमें लगभग 150 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन भी शामिल है। दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के हर ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है। गो-संरक्षण और गो-संवर्धन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम और नस्ल सुधार कार्यक्रम सहित विभिन्न योजनाओं का प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन जारी है। अति पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया और भारिया के पशुपालकों के लिए प्रदेश के 14 जिलों में मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना संचालित की जा रही है, जिसमें 90 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो मुर्रा भैंस या गाय प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में संचालित किया जा रहा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 1500 “मैत्री” (मल्टीपर्पज आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन टेक्नीशियन इन रूरल इंडिया) केंद्रों की स्थापना की जा रही है, जिसके माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान द्वारा पशु नस्ल सुधार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।  

राज्यपाल ने सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन को जन-आंदोलन बनाने का आहवान किया

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन प्रयासों को जन-आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने  आहवान करते हुए कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र को अपनाकर ही इस अनुवांशिक बीमारी से समाज को मुक्त किया जा सकता है। राज्यपाल  पटेल रविवार को बदनावर के सिविल अस्पताल के नवीन भवन के आभासी माध्यम से लोकार्पण के बाद मेगा स्वास्थ्य शिविर को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल  पटेल ने कहा है कि सिकल सेल उपचार के विषय मे भ्रामक जानकारियों से भ्रमित नहीं हो। सिकल सेल उपचार के प्रति किसी भी प्रकार की भ्रांति नही पालें। केवल पंजीकृत चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार ही दवाइयों का नियमित सेवन करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बीमारी को निरंतर उपचार और सही जानकारी के माध्यम से ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 31 लाख से अधिक जांचें की जा चुकी हैं। जनजातीय क्षेत्रों में विशेष रूप से जागरूकता बढ़ाने के लिए “सिकल सेल मित्र” तैयार किए जा रहे हैं, जो इस मिशन में सेतु का कार्य करेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाते हुए मरीजों के लिए डिजिटल कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे उपचार अधिक सुगम और प्रभावी होगा।  राज्यपाल  पटेल ने बदनावर प्रवास के दौरान 'संकल्प से समाधान अभियान' के समापन कार्यक्रम मे शासन कि विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ प्रदान किए। स्थल पर शासकीय विभागों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यपाल के समक्ष जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर अंचलों तक पहुँचाने के उद्देश्य से जिला रेडक्रॉस सोसायटी धार एवं अरविंदो आयुर्विज्ञान संस्थान, इन्दौर के मध्य अनुबंध (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। अनुबंध के तहत जिले के प्रत्येक विकासखंड में प्रति तीन माह में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा वृहद स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा।  “संकल्प से समाधान अभियान” के तहत 80 शिविरों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित किए गए है। राज्यपाल को वर्ष 2025-26 में रेडक्रॉस की गतिविधियों से परिचित कराया गया। बताया गया कि  जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, सिकल सेल जागरूकता रैली, रक्तदान शिविर, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, पोषण कार्यशालाएं एवं CPR प्रशिक्षण जैसे नवाचार किए गए है। साथ ही स्वच्छता अभियान एवं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से जन-जागरूकता को भी बढ़ावा दिया गया है। वृहद स्वास्थ्य शिविर में विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा 688 मरीजों का निःशुल्क उपचार किया गया, जिसमें 384 महिलाएं एवं 304 पुरुष शामिल हुये।         इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री  सावित्री ठाकुर, विधायक  नीना विक्रम वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेढ़ा, नगर पालिका अध्यक्ष  मीना शेखर यादव,  पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और शहीद नरेंद्रसिंह राठौर के परिवार के सदस्य उपस्थित थे।    

पंचायत प्रोत्साहन योजना में 14 जिलों ने किया बेहतर प्रदर्शन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से मध्यप्रदेश की पंचायतों को केन्द्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है। वे निरंतर सशक्त बन रही हैं। केन्द्र सरकार कीयोजनाओं का लाभ उठाते हुए प्रदेश की पंयायतों विकास की गतविधियों को बेहतर क्रियान्वित कर रही हैं। मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान और पंचायतों का प्रोत्साहन देने की योजना में अच्छा प्रदर्शन किया है। पंचायतों को प्रोत्साहन देने की योजना का उद्देश्य पंचायतों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक भावना को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को उनके अच्छे विकासात्मक कार्यों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन सहित पुरस्कार दिए जा रहे हैं। भोपाल, नरसिंहपुर, सागर, छतरपुर, सीधी, पूर्वी निमाड़, हरदा, उज्जैन, जबलपुर, इंदौर, नीमच, गुना, ग्वालियर और झाबुआ पंयायतों ने प्रोत्साहन योजना में अच्छा प्रदर्शन किया है। ग्राम पंचायत विकास योजना और परियोजना क्रियान्वयन एक सतत प्रक्रिया है। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों का उपयोग करते हुए कुल 16,773 परियोजना कार्य पूरे किए गए हैं। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान का प्राथमिक उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों और उनके पदाधिकारियों की क्षमता निर्माण कर पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाना, ग्राम पंचायत भवन और कम्प्यूटरीकरण जैसी अधोसंरचनात्मक सहायता प्रदान करना है। ई-पंचायतों पर मिशन मोड परियोजना (एमएमपी-ईपंचायत) में पंचायतों के डिजिटलीकरण की दिशा में ई-गवर्नेंस परियोजनाओं को वित्तपोषित किया जाता है। इससे पीआरआई के कामकाज में कार्यदक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता आई है। वर्तमान में पंद्रहवें वित्त आयोग (एफएफसी) के तहत, राज्यों के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को केन्द्रीय वित्त आयोग की हस्तांतरित निधि आवंटित की जाती है। आयोग के अनुदान के दो घटक हैं—टाइड और अनटाइड। अनटाईड अनुदान कुल अनुदान का 40% है। इसका उपयोग वेतन या अन्य स्थापना व्यय को छोड़कर संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित 29 विषयों में स्थान-विशिष्ट की जरूरतों के लिए किया जा सकता है। टाइड अनुदान कुल अनुदान का 60% है। इसका उपयोग बुनियादी सेवाएं प्रदान करने के लिए किया जा सकता है जैसे स्वच्छता और खुले में शौच से मुक्ति, घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, मल और गाद प्रबंधन, पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन जैसे कार्य शामिल है। यदि किसी स्थानीय निकाय ने एक श्रेणी की जरूरतों को पूरी तरह से पूरा कर दिया है, तो वह अन्य श्रेणी की धनराशि का उपयोग कर सकता है। उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदेश में पीआरआई के निर्वाचित प्रतिनिधियों और उनके पदाधिकारियों को मिलाकर 9 लाख पदाधारियों को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आनंद जैसे उत्कृष्टता संस्थानों के सहयोग से नेतृत्व/प्रबंधन विकास कार्यक्रम में प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्य उद्देश्य संचार, निर्णय लेने, वित्तीय प्रबंधन और टकराव समाधान सहित आवश्यक नेतृत्व कौशल को निखारना है। वर्तमान में पंचायती राज संस्थाओं की क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि वे स्वयं के राजस्व स्रोतों को जुटा सकें। अब तक प्रदेश के 3,275 प्रतिभागियों को ओएसआर मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ई-गवर्नेंस पंचायतों में ई-गवर्नेंस को मजबूत बनाने और बढ़ावा देने के लिए, डिजिटल इंडिया पहल के तहत, स्थानीय ग्रामीण शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यदक्षता लाने के लिए विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप विकसित किए हैं। सिंगल साइन ऑन डिजिटल प्लेटफॉर्म, ईग्रामस्वराज ऐप पंचायत स्तर पर योजना, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इस ऐप को सार्वजनिक निधि प्रबंधन प्रणाली, सरकारी ई-मार्केटप्लेस और ऑडिट ऑनलाइन ऐप के साथ एकीकृत किया गया है ताकि भुगतान में कोई परेशानी न हो, खरीद प्रक्रिया पारदर्शी हो और पंचायतों के खातों की लेखापरीक्षा की जा सके। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मध्यप्रदेश में 23,011 ग्राम पंचायतों में से 22,978 ग्राम पंचायतों (99.85%) ने अपने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को ईग्रामस्वराज पर अपलोड किया है और 21,950 ग्राम पंचायतों (95.5%) ने ईग्रामस्वराज-पीएफएमएस इंटरफेस के माध्यम से विक्रेताओं को 2156.10 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं।  

भोपाल मेट्रो की लागत आसमान छू रही, भूमिगत कॉरिडोर में देरी पर अफसरों की चुप्पी

भोपाल राजधानी में मेट्रो के भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण को लेकर मेट्रो प्रबंधन के दावों और हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है। एक तरफ भोपाल रेलवे स्टेशन से पुल पातरा तक ट्विन टनल के निर्माण के लिए जिस टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उद्घाटन 30 मार्च को बड़ी धूमधाम से किया गया था, वह अब तक एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसा इसलिए क्योंकि टीबीएम के पीछे लगाए जाने वाले बूस्टिंग के पार्ट अब तक इंस्टॉल नहीं हुए हैं। जबकि उद्घाटन के समय मेट्रो के अफसरों ने मशीन चालू कर फोटो खिंचवाए थे, लेकिन तकनीकी खामियों और प्रशासनिक चुप्पी ने पूरी परियोजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह देखकर कहना गलत नहीं होगा कि जब तैयारी पूरी नहीं थी, तो जल्दबाजी में उद्घाटन का दिखावा क्यों किया गया। हालांकि, इस सवाल का जवाब भी मेट्रो के अधिकारी देने से कतरा रहे हैं। मशीन से बूस्टिंग सिस्टम गायब: 6 दिन बाद भी प्रगति शून्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टीबीएम को आगे धकेलने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रणाली यानी बूस्टिंग सिस्टम अब तक सक्रिय नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि इस प्रणाली से जुड़े कुछ अनिवार्य कलपुर्जे अभी तक मशीन में फिट ही नहीं किए गए हैं। उद्घाटन के समय प्रबंधन ने दावा किया था कि मशीन प्रतिदिन 5 से 7 मीटर की खुदाई करेगी, लेकिन छह दिन बीत जाने के बाद भी प्रगति शून्य है। बिना बूस्टिंग सिस्टम के मशीन का आगे बढ़ना तकनीकी रूप से संभव नहीं है, जिससे प्रोजेक्ट की समयसीमा पर असर पड़ना तय है। जर्जर इमारतें और सुरक्षा चिंताएं बनीं रोड़ा खुदाई शुरू न होने के पीछे तकनीकी कारणों के अलावा सुरक्षा के पहलू भी अहम हैं। हमीदिया रोड स्थित शालीमार ट्रेड सेंटर की हालत अत्यंत जर्जर है। टनल का मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरना है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुदाई के दौरान होने वाले कंपन के कारण किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए काम को आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटाई जा पा रही है। जर्जर इमारतों को सुरक्षित करना या उन्हें खाली कराना प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। इंदौर पर फोकस, भोपाल की रफ्तार सुस्त परियोजना से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि एमपी मेट्रो का पूरा ध्यान फिलहाल इंदौर मेट्रो पर केंद्रित है, जहां दूसरे चरण के कॉरिडोर के उद्घाटन की जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। इस प्राथमिकता के चक्कर में भोपाल मेट्रो की रफ्तार प्रभावित हो रही है। संसाधनों और तकनीकी टीम का बड़ा हिस्सा इंदौर प्रोजेक्ट में व्यस्त होने के कारण भोपाल के भूमिगत कार्य में अपेक्षित गति नहीं आ पा रही है। लागत में वृद्धि: सरकारी खजाने पर बढ़ेगा बोझ पुल पातरा से सिंधी कॉलोनी तक के 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के लिए ट्विन टनल का निर्माण रीढ़ की हड्डी के समान है। अगले दो महीनों में 400 मीटर खुदाई का जो लक्ष्य रखा गया था, वह अब नामुमकिन नजर आ रहा है। प्रोजेक्ट में हो रही हर दिन की देरी से निर्माण लागत लाखों रुपये बढ़ रही है, जिसका सीधा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ेगा। देरी से न केवल बजट प्रभावित होगा बल्कि शहरवासियों को भी लंबे समय तक निर्माण जनित असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा। टीबीएम चालू है, लेकिन बूस्टिंग का काम शुरू नहीं हुआ है। जल्द ही बूस्टिंग का काम शुरू होगा। जमीन के नीचे कितनी खुदाई हो चुकी है, इसकी जानकारी बाद में बताएंगे। – धीरज शुक्ला, पीआरओ, एमपी मेट्रो