samacharsecretary.com

CM मोहन यादव के जन्मदिन पर पीएम मोदी और अमित शाह की बधाई, वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण उपहार

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav आज अपने जीवन के 62वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस खास मौके पर देश के शीर्ष नेताओं Narendra Modi और Amit Shah ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की। राजनीतिक बधाइयों के बीच सीएम यादव ने अपने जन्मदिन को खास अंदाज में मनाने का फैसला लिया है। वे Veerangana Durgavati Tiger Reserve में बामनेर नदी किनारे एक दर्जन कछुओं को जल में छोड़ेंगे, जिससे वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही चीतों के पुनर्वास के लिए सॉफ्ट रिलीज बोमा का भूमिपूजन कर प्रदेश को एक नई पहचान देने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की, वहीं अमित शाह ने प्रदेश में चल रहे जनहितैषी कार्यों की सराहना की। इन शुभकामनाओं ने इस दिन को और भी खास बना दिया। सीएम यादव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने इस विशेष दिन को प्रकृति और वन्यजीवों की सेवा को समर्पित कर रहे हैं — जो विकास और पर्यावरण के संतुलन का सशक्त संदेश है।

आगर मालवा, इंदौर और मंदसौर में तेल शॉर्टेज की अफवाहें, पेट्रोल पंपों पर लोगों की भारी भीड़

 इंदौर /मंदसौर  मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाधित होने के बाद से सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर अफवाहें फैल रही है. इन्हीं अफवाहों के बीच मध्य प्रदेश और गुजरात के कई जिलों में अफरा-तफरी मच गई. इंदौर, आगर मालवा, मंदसौर, नीमच समेत गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा, गांधीनगर, सूरत और राजकोट में मंगलवार से पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं. लोग ड्रम, केन, बोतल और कुप्पियों में ईंधन भरकर ले जाने लगे. जिससे कुछ पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म हो गया, जिसके बाद पंप बंद कर दिए गए. प्रशासन का साफ कहना है कि किसी भी तरह की कमी नहीं है, फिर भी लोग घबराकर पेट्रोल-डीजल के लिए घंटों लाइन में लगे हुए हैं।  इंदौर में मंगलवार को करीब तीन दर्जन से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही भीड़ जुट गई. वाहन चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ा. कई जगह पंप कर्मचारी और ग्राहकों के बीच बहस भी हुई. कुछ पंपों पर पेट्रोल खत्म होने के बाद बोर्ड लगा दिया गया और बाहर हुजूम जमा हो गया. पंप संचालकों ने बताया कि रात में टैंकर आने के बाद सुबह से सप्लाई फिर सुचारू हो जाएगी   । जिला आपूर्ति नियंत्रक एम.एल. मारू ने स्पष्ट जानकारी देते हुए कहा,'इंदौर जिले में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कोई कमी नहीं है. सभी पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और डिपो से लगातार सप्लाई हो रही है. अफवाहों पर ध्यान न दें, अनावश्यक घबराहट में ईंधन का संग्रह न करें. अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  इंदौर कलेक्टर ने भी नागरिकों से अपील की कि पैनिक खरीदारी न करें. उन्होंने कहा कि बेवजह की भीड़ से सिर्फ अव्यवस्था बढ़ रही है और आम लोगों को परेशानी हो रही है।  मालवा में भी हालात बेकाबू इसी तरह आगर मालवा जिले में दोपहर बाद से पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखी गई. ट्रैक्टरों पर बड़े-बड़े ड्रम और केन लेकर किसान पहुंचे, तो कुछ लोग मोटरसाइकिल, कार और यहां तक कि एम्बुलेंस लेकर कतार में लग गए. सोशल मीडिया पर 'पंप बंद होने वाले हैं, पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा' वाली अफवाह ने पूरे जिले में घबराहट फैला दी।  आगर मालवा की कलेक्टर प्रीति यादव ने खुद वीडियो जारी कर लोगों को आश्वस्त किया, 'जिले में ईंधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. कोई दिक्कत नहीं है, घबराएं नहीं।  मंदसौर में पंपों पर स्टॉक खत्म? वहीं, मंदसौर और नीमच में भी सैकड़ों लोग गाड़ियां लेकर पंपों पर पहुंच गए. जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवाने की वजह से कुछ पंपों पर स्टॉक खत्म हो गया. स्कूल छोड़ने वाले ऑटो, दूध बांटने वाले वाहन और किसान डीजल स्टॉक करने लगे हैं. पेट्रोल खत्म होने के बाद कुछ पंपों के डिस्प्ले को काले कपड़े से ढक दिया गया, ताकि और लोग न आएं।  गुजरात के बड़े शहरों में अफरा-तफरी गुजरात में अहमदाबाद से शुरू हुई अफवाह शाम तक देखते ही देखते वडोदरा, गांधीनगर, सूरत और राजकोट तक फैल गई. ऑफिस टाइम के बाद लोग सीधे पेट्रोल पंपों पर पहुंच गए, जिससे देर रात तक अफरातफरी मची रही. सरकार और तेल कंपनियों द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बावजूद सोशल मीडिया के मैसेज ने लोगों में डर पैदा कर दिया।  कई लोगों ने बताया, 'सोशल मीडिया पर मैसेज देखा तो एहतियातन आ गए.' कुछ की गाड़ी में डीजल खत्म हो गया था, लेकिन लंबी लाइन का सामना करना पड़ा।  पेट्रोल डीलर एसोसिएशन ने दर्ज कराई शिकायत इसी बीच राजकोट में तो पेट्रोल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल चुडासमा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के सेल्स हेड अमित जायसवाल ने शिकायत में कहा कि चुडासमा ने सार्वजनिक रूप से झूठा बयान दिया कि पंपों पर स्टॉक खत्म हो गया है. इससे जनता में दहशत फैली और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया।  इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है, ताकि भविष्य में कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति अफवाहें फैलाकर अराजकता न फैलाए. सरकारने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर किसी भी व्यक्ति ने अफवाह फैलाई या फिर काला बाजारी की तो उनके खिलाफ कानूनी कारवाई की जाएगी. राज्य सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री ने भी अफवाहों से दूर रहने की अपील की थी। 

एमपी सरकार ने 71210 किलोमीटर सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण पूरा किया, बड़ी पहल

भोपाल   मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” और GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के माध्यम से कार्य प्रणाली में नवाचार का नया अध्याय जोड़ा है। विभाग ने यह महसूस किया कि सड़कों, पुलों और भवनों से संबंधित पूर्ण एवं प्रमाणिक डेटा के अभाव में योजनाओं का निर्माण अक्सर अनुमान के आधार पर करना पड़ता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह संकल्प लिया कि सुधार की शुरुआत प्रमाणिक डेटा से की जाएगी। “आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है” इस कहावत को चरितार्थ करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” का विकास किया गया, जिससे विभाग की परिसंपत्तियों का वैज्ञानिक और डिजिटल सर्वे संभव हो सका। इसके अंतर्गत अब तक राज्य की 71210 किलोमीटर सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण कराया जा चुका है। ऐप के माध्यम से प्रदेश में तीन दिवसीय विशेष सड़क सर्वेक्षण अभियान संचालित किया गया, जिसमें विभाग के अभियंता स्वयं मैदान में उतरकर अपने-अपने क्षेत्रों की सड़कों का विस्तृत सर्वेक्षण करने में जुटे। सर्वेक्षण के दौरान सड़क की चौड़ाई, पेवमेंट का प्रकार, राइट ऑफ वे (ROW), शोल्डर तथा सड़क की वर्तमान स्थिति सहित विभिन्न तकनीकी मापदंडों का डिजिटल रूप से डेटा संकलित किया गया। 2975 शासकीय भवनों तथा 1426 पुलों का सर्वे भी किया व्यापक सर्वेक्षण में अब तक 71,210 किलोमीटर से अधिक सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण किया जा चुका है। इसके साथ ही 2975 शासकीय भवनों तथा 1426 पुलों का सर्वे भी किया गया है। इस प्रक्रिया के दौरान नगरीय निकाय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा अन्य एजेंसियों की सड़कों के साथ लोक निर्माण विभाग की सड़कों की सीमाएं भी स्पष्ट रूप से चिन्हित की गई हैं। इससे विभाग के पास अपनी प्रत्येक परिसंपत्ति का अद्यतन, डिजिटल और प्रमाणिक डेटा उपलब्ध हो गया है, जिसके आधार पर अब निर्णय अनुमान के बजाय तथ्यात्मक आधार पर लिए जा सकेंगे। प्रमाणिक GIS आधारित डेटा उपलब्ध होने के बाद विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क प्लानिंग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। पहले योजनाएं पारंपरिक पद्धति से कागजों पर तैयार की जाती थीं, किंतु अब पहली बार भास्कराचार्य संस्थान के तकनीकी सहयोग से विभाग के इंजीनियरों द्वारा प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके लिए एक विशेष “मास्टर प्लान मॉड्यूल” विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की कनेक्टिविटी का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकता है। इस मॉड्यूल के जरिए यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि किन पर्यटन स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। लोक निर्माण विभाग की यह पहल केवल एक योजना नहीं बल्कि प्रदेश के अधोसंरचना विकास के लिए तकनीक आधारित दीर्घकालिक दृष्टि का परिचायक है। GIS, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से भविष्य में सड़क निर्माण और उन्नयन की योजनाएं अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनेंगी। यह पहल प्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन और सुदृढ़ अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।

भोपाल के आदमपुर खंती में कचरे के पहाड़ को हटाकर बनेगा हाईवे, आयोध्या बायपास पर होगा उपयोग

भोपाल आदमपुर खंती में वर्षों से ठोस कचरा का ढेर जमा है। यह भोपाल शहर के लिए मुसीबत है। अब कचरे का यह ढेर विकास का एक मजबूत आधार बनता जा रहा है। इसे लेकर एनएचआई ने एक प्रभावशाली पहल की है। साथ ही इस कचरे से मुक्ति के लिए स्थायी समाधान ढूंढा है। इस कचरे का इस्तेमाल अयोध्या बायपास के लगभग 16 किमी लंबे चौड़ीकरण कार्य में उपयोग किया जारहा है। साथ ही भोपाल–रायसेन से सागर तक NH-146 के निर्माण कार्यों में भी ऐसे पुनर्चक्रित मटेरियल के उपयोग को शामिल किया जा रहा है। इससे हरित और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे हो रहा है इस्तेमाल इस पहल के अंतर्गत आदमपुर खंती से प्राप्त ठोस कचरे का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जिसमें लगभग 10 लाख मीट्रिक टन सालिड वेस्ट के उपयोग का प्रावधान है। इसके साथ ही, कचरे के उपयोग से पूर्व उसके सैंपल लेकर लैब परीक्षण भी कराए गए हैं, ताकि निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता, सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जा सके। बदबू और प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति आदमपुर खंती के आसपास रहने वाले लोगों को वर्षों से बदबू, प्रदूषण, धुएं और आग लगने जैसी समस्याओं से परेशान हैं। कचरे के निस्तारण से लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही कचरे से उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम होंगे और आसपास का वातावरण अधिक स्वच्छ और सुरक्षित बन सकेगा। इस पहल के जरिए न केवल सालों से जमा कचरे के बड़े हिस्से को खत्म करने में मदद मिलेगी, बल्कि एक मिसाल भी पेश होगी। सड़क निर्माण में कचरे का उपयोग कैसे होता है? ऐसे खत्म होगा कचरे का ढेर कचरे की छंटाई- आदमपुर खंती से निकाले गए कचरे को अलग-अलग श्रेणियों-प्लास्टिक, धातु, कांच, जैविक और इनर्ट (मिट्टी/मलबा) में विभाजित किया जाता है, ताकि केवल उपयोगी सामग्री को आगे प्रोसेसिंग के लिए चुना जा सके। प्रोसेसिंग और ट्रीटमेंट- छांटे गए कचरे को प्रोसेस किया जाता है। प्लास्टिक वेस्ट को साफ कर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदला जाता है, जबकि इनर्ट कचरे को छानकर निर्माण के लिए उपयुक्त बनाया जाता है। अनुपयोगी और हानिकारक तत्वों को अलग कर सुरक्षित रूप से निस्तारित किया जाता है। बिटुमिनस मिक्स तैयार करना- प्रोसेस्ड प्लास्टिक को गर्म बिटुमेन में मिलाकर मजबूत बिटुमिनस मिक्स तैयार किया जाता है। इससे सड़क की बाइंडिंग क्षमता बढ़ती है, दरारें कम होती हैं और पानी का असर कम होता है, जिससे सड़क अधिक टिकाऊ बनती है। सड़क की परतों में उपयोग- इनर्ट कचरा सड़क की निचली परत में उपयोग किया जाता है, जबकि बिटुमेन-प्लास्टिक मिश्रण को ऊपरी परत में बिछाया जाता है। इससे सड़क की लोड-बेयरिंग क्षमता और स्थायित्व दोनों बढ़ते हैं। गुणवत्ता जांच और निगरानी- निर्माण के प्रत्येक चरण में मटेरियल और कार्य की गुणवत्ता की जांच की जाती है, ताकि सड़क सुरक्षा और दीर्घकालिक उपयोग के सभी मानकों को सुनिश्चित किया जा सके। 3R सिद्धांत पर आधारित सस्टेनेबल पहल इस पूरी पहल के तहत ‘3R – रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल’ की अवधारणा को अपनाकर कचरे का निरंतर और वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नया कचरा न्यूनतम उत्पन्न हो। हर दिन निकलने वाले विभिन्न प्रकार के कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए कई अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें ‘प्लास्टिक वेस्ट टू रोड कंस्ट्रक्शन’ एक सफल और प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। पर्यावरण और विकास का संतुलन इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक सहित सभी शहरी ठोस कचरे का 100% वैज्ञानिक प्रसंस्करण सुनिश्चित करना है, ताकि लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा को शून्य के करीब लाया जा सके। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत ‘प्लास्टिक वेस्ट से सड़क निर्माण’ की तकनीक स्वच्छता को टिकाऊ बुनियादी ढांचे से जोड़ते हुए सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

चीतों के पुनर्वास के लिये सॉफ्ट रिलीज बोमा का करेंगे भूमि-पूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने जन्म-दिन पर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में आज बामनेर नदी में एक दर्जन कछुओं को रिलीज करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव टाइगर रिजर्व में चीतों के पुनर्वास के लिये सॉफ्ट रिलीज बोमा का भूमि-पूजन भी करेंगे। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जो मध्यप्रदेश के 3 जिलों सागर, दमोह और नरसिंहपुर के 72 ग्रामों को जोड़ते हुए कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किलोमीटर का आकार लिये हुए है। मध्यप्रदेश का यह 7वाँ और भारत का 54वाँ टाइगर रिजर्व है। वर्ष 2023 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 32 टाइगर मौजूद हैं। इस अभयारण्य को मुख्य रूप से भेड़ियों की भूमि माना जाता है। यहाँ पर सर्वाधिक भेड़िये पाये जाते हैं। टाइगर रिजर्व में चीतों के अनुकूल भूमि उपलब्ध है। इस प्रकार की भूमि दक्षिण अफ्रीका में पायी जाती है। शीघ्र ही कूनो अभयारण्य से चीतों को लाकर यहाँ बसाया जायेगा। अभयारण्य में चिड़ियाँ की 240 प्रजातियाँ पायी जाती हैं, जो आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं। टाइगर रिजर्व में विभिन्न प्रजाति के पशु-पक्षी पाये जाते हैं, जिसमें टाइगर, पैंथर, भेड़िया, भालू, सियार, लकड़बग्घा, लोमड़ी, सुअर, नीलगाय, जंगली सुअर, चौसिंगा, काला हिरण, चिंकारा, कछुआ और मगरमच्छ सहित पशु-पक्षी मौजूद हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन के के साथ रोजगार की अपार संभावनाएँ हैं।  

MP Board Result: 10वीं-12वीं के परिणाम अप्रैल के दूसरे हफ्ते में, 5वीं-8वीं का रिजल्ट इस सप्ताह जारी होगा

भोपाल  मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल) की कक्षा 10वीं और 12वीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम अप्रैल के दूसरे सप्ताह में घोषित किए जाने की संभावना है। स्कूल शिक्षा विभाग ने मूल्यांकन कार्य को समय पर पूरा करने के लिए सभी केंद्रों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। वहीं कक्षा 5वीं और 8वीं के परिणाम इसी सप्ताह घोषित होने की प्रबल संभावना है।  16 लाख छात्रों का इंतजार इस वर्ष दोनों कक्षाओं की परीक्षाओं में करीब 16 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया है। उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में लगभग 20 हजार शिक्षक लगाए गए हैं और प्रक्रिया तेजी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। विभाग का लक्ष्य है कि परिणाम समय पर जारी कर छात्रों को आगे की पढ़ाई और करियर प्लानिंग के लिए पर्याप्त समय मिल सके। मूल्यांकन में तेजी, रिजल्ट की तैयारी शुरू अधिकारियों के अनुसार मूल्यांकन केंद्रों पर कार्य को तेज किया गया है। अंतिम चरण में पहुंचते ही रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि निर्धारित समय सीमा में परिणाम घोषित किए जा सकें। दो विषय में फेल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो छात्र केवल दो विषयों में अनुत्तीर्ण होंगे, उन्हें जून में पुनः परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों का पूरा वर्ष खराब होने से बचाया जा सकेगा। 5वीं और 8वीं का रिजल्ट इसी सप्ताह कक्षा 5वीं और 8वीं के परिणाम इसी सप्ताह घोषित होने की प्रबल संभावना है। इन परीक्षाओं का आयोजन राज्य शिक्षा केंद्र मध्य प्रदेश द्वारा किया गया था। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा हो चुका है। 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं फरवरी 2026 में आयोजित हुई थीं। रिजल्ट की अंतिम तारीख की घोषणा जल्द ही आधिकारिक पोर्टल पर की जाएगी। रिजल्ट कैसे देखें छात्र निम्न प्रक्रिया से अपना परिणाम देख सकेंगे आधिकारिक वेबसाइट rskmp.in या mpbse.nic.in पर जाएं होमपेज पर ‘Class 5th/8th Result 2026’ लिंक पर क्लिक करें रोल नंबर या समग्र आईडी दर्ज करें रिजल्ट स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगा 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का ऐलान, जल्द लॉन्च होगा स्टेट एआई मिशन, सुशासन और विकास में होगी तेजी

शीघ्र ही लांच करेंगे स्टेट एआई मिशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुशासन और विकास को नई गति देगा स्टेट एआई मिशन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से अनौपचारिक चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सुशासन के जरिए नागरिक सेवाओं और सुविधाओं को और भी सिविक-फ्रेंडली बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए नई-नई तकनीकों से जुड़कर प्रदेश में नवाचारों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात् आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आज के दौर का सर्वाधिक संभावनाशील सेक्टर है। शासन-प्रशासन व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सरकार भी आगे बढ़ रही है। अब इस दिशा में एआई की मदद ली जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम बहुत जल्द मध्यप्रदेश का अपना 'स्टेट एआई मिशन' लांच करने जा रहे हैं। यह एक लक्ष्य केंद्रित मिशन होगा। इस मिशन से शासन प्रणाली में कसावट और सुप्रबंधन लाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सुशासन एवं विकास को नई गति देने और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से इस मिशन को प्रारंभ किया जा रहा है। स्टेट एआई मिशन में कृषि, स्वास्थ्य, पोषण एवं आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संभावित जोखिमों की पूर्व पहचान संभव हो सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मिशन को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 में एआई तकनीक के लिए ढांचागत विकास किया जाएगा। वर्तमान एआई पहलों को एकीकृत कर आधारभूत तैयारी सुदृढ़ की जाएगी। वित्त वर्ष 2027-28 में सफल यूज़ केसेस को विभिन्न विभागों में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा तथा वित्त वर्ष 2028-29 से एआई को शासन की स्थायी संस्थागत क्षमता के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से अनौपचारिक रूप से चर्चा कर रहे थे। जयपुर में निवेशकों से मिले 5,055 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीते शनिवार को जयपुर प्रवास के दौरान वहां निवेशकों से हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि निवेशकों ने मध्यप्रदेश के प्रति अगाध स्नेह और अपनत्व जताया। विभिन्न औद्योगिक समूहों, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, फूड-प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों सहित 400 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी रही। सीआईआई राजस्थान के अध्यक्ष एवं न्यूरोइक्विलिब्रियम के एमडी रजनीश भंडारी ने स्वागत भाषण में मध्यप्रदेश की नीतियों एवं उसके क्रियान्वयन की तारीफ की। प्रमुख उद्योगपतियों मनीष गुप्ता (चेयरमैन, इनसोलेशन एनर्जी), महावीर प्रताप शर्मा (चेयरमैन, राजस्थान एंजेल्स) और के एल जैन (अध्यक्ष, राजस्थान चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) ने भी अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस इन्टरैक्टिव सेशन में बेहद सकारात्मक संवाद के बाद सरकार को वहां के निवेशकों से 5,055 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनसे लगभग 3,530 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जयपुर में मिले निवेश प्रस्ताव के यह आंकड़े बताते हैं कि देश-विदेश के निवेशकों के बीच मध्यप्रदेश की साख और हमारी औद्योगिक नीतियों के प्रति विश्वास कितनी तेजी से बढ़ रहा है। 139 दिन लगातार चलेगा तीसरा जल गंगा संवर्धन अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में तीसरा जल गंगा संवर्धन अभियान गत 19 मार्च से प्रारंभ हो चुका है। बीते दो अभियानों को अच्छा प्रतिसाद मिला। इस दौरान प्रदेश में नये कुंए, बावड़ियों, अमृत सरोवरों, तालाबों के साथ-साथ पुरानी जल संरचनाओं के पुनर्भरण और सूखी नदियों के पुनर्जीवन के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किये गये। बीते साल खंडवा जिले में जल संचयन के लिए अभूतपूर्व काम हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तीसरे अभियान में करीब 2500 करोड़ रुपए से प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों, नगरीय निकायों और पंचायत स्तर पर जल संवर्धन और संचयन कार्य किए जाएंगे। बीते सालों की तरह इस वर्ष भी जल संरक्षण के लिए विभिन्न कार्य किये जायेंगे। साथ-साथ नदियों, तालाबों, बावडियों और कुओं का जीर्णोद्धार भी मिशन मोड में किया जायेगा। नदियों के उद्गम क्षेत्रों में हरित विकास के लिये गंगोत्री हरित योजना में कार्य किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि हमारे जल गंगा संवर्धन अभियान को केंद्र सरकार से भी सराहना और समर्थन मिला है। जल बचाने के लिए देशभर में चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों में मध्यप्रदेश का जल गंगा संवर्धन अभियान अव्वल श्रेणी में आया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले वर्ष 2024 में करीब 30 दिन, दूसरे वर्ष 2025 में 120 दिन यह अभियान चलाया। मौजूदा साल में गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक कुल 139 दिन तक लगातार यह अभियान चलाया जाएगा। 3 से 5 अप्रैल तक बनारस में होगा सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भगवान काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी (बनारस) में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन किया जायेगा। यह वीर विक्रमादित्य के महात्म्य के दिनों-दिन बढ़ता प्रभाव है। उज्जैन में नैवेद्य लोक का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि उन्होंने हाल ही में उज्जैन में नैवेद्य लोक का लोकार्पण किया है। यह मालवांचल के व्यंजनों को एक प्लेटफार्म देने का प्रयोगात्मक प्रयास है। इसे इंदौर की छप्पन दुकानों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां कुल 108 दुकानें हैं, जो विभिन्न मालवी व्यंजनों का रसास्वादन कराती हैं। अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते सप्ताह आनंद विभाग के अधीन राज्य आनंद संस्थान द्वारा भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस मनाया गया। वे स्वयं इस आयोजन में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हमारे मनुष्यगत मनोभावों को अभिव्यक्त करने मनोरंजक का माध्यम बना। सरकार सबके जीवन में खुशहाली लाने के लिए ही तो काम कर रही है। इस प्रकार के आयोजनों से हमारी कार्यक्षमता और कार्यदक्षता सहित जीवन में खुशहाली भी बढ़ती है।  

11 हवाई पट्टियां निजी हाथों में, सरकार ने शुरू किया जमीन अधिग्रहण

भोपाल  मध्य प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए हवाई पट्टियों की संख्या बढ़ाई जा रही है। अभी आठ हवाई अड्डों के अलावा 23 हवाई पट्टियां हैं। यह उपयोग में रहें और बेहतर मेंटेनेंस होता रहे, इसके लिए 11 हवाई पट्टियां निजी संस्थाओं को उपयोग के लिए दी गई हैं। सिवनी, ढाना (सागर), गुना, रतलाम, उज्जैन, बिरवा (बालाघाट), उमरिया, छिंदवाड़ा, मंदसौर, नीमच और शिवपुरी की हवाई पट्टी को उड़ान प्रशिक्षण, अन्य विमानन गतिविधियों के संचालन के लिए निजी संस्थाओं को सौंपा गया है। अधिकारियों के अनुसार शिवपुरी और उज्जैन की हवाई पट्टियों के विकास व विस्तार के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हवाई पट्टियों को क्षेत्रीय हवाई अड्डों के रूप में विकसित किया जा रहा है। नियमित हवाई सेवा के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू इससे नियमित हवाई सेवाएं शुरू की जा सकेंगी। इनके लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई की जा रही है। केंद्र की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS) के तहत 2024-25 में दतिया हवाई पट्टी को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को दिया गया था। दतिया प्रदेश का 8वां एयरपोर्ट। यहां से छोटे विमानों का संचालन शुरू हो चुका है। सरकार की इस पहल का बड़ा असर कहां? सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा असर प्रदेश के पर्यटन और औद्योगिक क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है। उज्जैन, छिंदवाड़ा, शिवपुरी और सिवनी जैसे शहर पहले से ही धार्मिक, प्राकृतिक और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। लेकिन सीमित कनेक्टिविटी के कारण इनकी पूरी क्षमता का उपयोग ही नहीं हो पा रहा है। अब सेवाएं शुरू होने से इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने और निवेश आने की उम्मीद है।  टूरिज्म को बढ़ावा खासतौर पर उज्जैन, जो महाकाल लोक के कारण देश-दुनिया भर के श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वहां हवाई सुविधा बढ़ने से यात्रा और आसान हो जाएगी। इसी तरह शिवपुरी और बालाघाट जैसे क्षेत्र, जो नेशनल पार्क और प्राकृतिक पर्यटन के लिए जाने जाते हैं। वहां भी पर्यटकों की पहुंच बढ़ेगी। स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा इसके अलावा उड़ान प्रशिक्षण और एविएशन की गतिविधियों के शुरू होने से स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पायलट ट्रेनिंग, ग्राउंड स्टाफ, मेंटेनेंस और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा। समय पर जमीन अधिग्रहण से विकास तक का काम तो होगा बड़ा फायदा हालांकि इस पूरी योजना में सफलता की कहानी इन हवाई पट्टियों का विकास समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगी। एयरलाइंस कंपनियां इन रूट्स पर नियमित सेवाएं शुरू करें। जमीन अधिग्रहण, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और संचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं अगर तय समय सीमा में पूरी होती हैं, तो इसका पूरा फायदा प्रदेश को मिलेगा। सरकार का पूरा फोकस फिलहाल छोटे शहरों को बड़े हवाई नेटवर्क से जोड़ने पर है। इससे आने वाले समय में मध्य प्रदेश के उभरते हवाई कनेक्टिविटी हब के रूप में भी सामने आ सकता है।

डॉ. मोहन यादव: सहजता, स्पष्टता और संघर्ष से गढ़ा एक नेतृत्व

भोपाल  मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपने यशस्वी जीवन के 62वें जन्म दिवस पर पूरे प्रदेश से कोटि कोटि बधाईयां और शुभकामनाएं मिल रही हैं यह स्वाभाविक भी है इसलिए इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है क्योंकि उन्हें अपने जन्म दिवस पर जितनी शुभकामनाएं और बधाईयां मिल रही हैं। वे उससे कहीं अधिक के हकदार हैं उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने प्रथम कार्यकाल के आधे से भी कम समय में जो शानदार लोकप्रियता अर्जित की है उसने सत्ता और संगठन के उस वर्ग को भी आश्चर्यचकित कर दिया है जो दिसम्बर 2023 में उन्हें मुख्यमंत्री पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने पर यह धारणा बना चुका था कि उन्हें मध्यप्रदेश के 19 वें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपने का जो फैसला पार्टी हाई कमान ने किया है वह अपने आप में किसी बहुत बड़े जोखिम से कम नहीं है परन्तु मुख्यमंत्री पद की बागडोर संभालते ही मोहन यादव ने अपने साहसिक फैसलो से यह साबित कर दिया कि प्रदेश के बहुमुखी विकास की नयी इबारत लिखने के संकल्प की पूर्ति के लिए वे बड़े से बड़ा जोखिम लेने के लिए तैयार हैं। उनकी इस कार्य शैली ने उन्हें चंद महीनों में ही पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व का चहेता मुख्यमंत्री बना दिया। मुख्यमंत्री यादव के ताबड़तोड़ फैसलों का यह सिलसिला आज भी अबाध गति से जारी है। मोहन यादव किसी अधिकारी को नहीं बख्शते चाहे वह कितने भी बडे पद पर क्यों न हो। जन हित से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही या सुस्ती वे कभी बर्दाश्त नहीं करते। भ्रष्टाचार से उन्हें सख्त नफ़रत है और ऐसे किसी भी मामले की जानकारी उनके संज्ञान में आते ही मुख्यमंत्री का कठोर फैसला आने में चंद घंटे भी नहीं लगते। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जन्मदिन मेरे लिए केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि उन स्मृतियों को याद करने का समय भी है, जो उनके राजनीतिक सफर के साथ जुड़ी रही हैं। एक मित्र और पत्रकार के रूप में मैंने उन्हें न केवल मंचों पर, बल्कि बेहद सामान्य और अनौपचारिक परिस्थितियों में भी करीब से देखा है। मेरी उनसे पहली मुलाकात उस समय हुई, जब वे उज्जैन विकास प्राधिकरण के चेयरमैन बने थे। स्थान था—भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा जी का निवास। वह मुलाकात एक औपचारिक परिचय से शुरू हुई, लेकिन समय के साथ यह संवाद निरंतर बढ़ता गया। हम भाजपा के पूर्व संगठन महामंत्री अरविंद मेनन जी के कार्यालय में भी बैठकर लंबी चर्चा होती थी| उज्जैन के मेरे कुछ पत्रकार साथी मोहन जी के बेहद करीब थे, और उसी कारण मेरी भी उनसे निकटता बनी। बाद में जब वे पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन बने, तब भी यह संपर्क और संवाद बना रहा। उस दौर में एक बात जो हमेशा स्पष्ट दिखती थी—वे केवल पद के नेता नहीं, बल्कि विचार और संवाद के व्यक्ति हैं। मोहन यादव एक प्रभावशाली वक्ता हैं। विभिन्न न्यूज़ चैनलों की डिबेट में वे पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते थे। कई बार ऐसा होता था कि वे पार्टी का प्रतिनिधित्व करते थे और मैं विशेषज्ञ के तौर पर उसी चर्चा का हिस्सा होता था। डिबेट खत्म होने के बाद जो अनौपचारिक संवाद होता था, वही असली पहचान बनाता था। मुझे आज भी याद है—हमारे बड़े भाई रिजवान अहमद सिद्दीकी, जो न्यूज़ वर्ल्ड से जुड़े थे, डिबेट के बाद हम सबको काहवा पिलाते थे। उसी दौरान संघ, संगठन और समसामयिक विषयों पर घंटों चर्चा होती थी। उन चर्चाओं में मोहन जी का दृष्टिकोण हमेशा स्पष्ट, तार्किक और संतुलित रहता था। मैंने उनके कई साक्षात्कार भी किए हैं। हर बार एक बात समान रही—उनकी सहजता और सरलता। आज जब वे मुख्यमंत्री हैं, तब भी उनके व्यवहार में कोई कृत्रिमता नहीं दिखती। वे आज भी एक आम व्यक्ति की तरह संवाद करते हैं, न कि केवल एक औपचारिक राजनेता की तरह। हाल के वर्षों में उनके नेतृत्व का एक आक्रामक पक्ष सामने आया है—प्रशासनिक सख्ती और त्वरित निर्णय। उनके फैसलों ने उन्हें एक जन-नेता के रूप में स्थापित किया है। लेकिन एक मित्र के तौर पर यह कहना भी जरूरी है कि यह सफर अभी अधूरा है। मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि मुख्यमंत्री बनने के दो वर्षों बाद भी उनमें राजनीतिक दुर्गुण नहीं आए हैं। वे आज भी स्पष्टवादी हैं, निर्णय लेने में संकोच नहीं करते। लेकिन एक महत्वपूर्ण कमी जो महसूस होती है, वह है—एक मजबूत सलाहकार टीम का अभाव। किसी भी बड़े नेता के लिए केवल व्यक्तिगत क्षमता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि एक सशक्त और अनुभवी सलाहकारों की टीम भी उतनी ही जरूरी होती है। यदि यह कमी दूर हो जाए, तो उनके निर्णय और भी प्रभावी और दूरगामी हो सकते हैं। यह निर्विवाद है कि अपने अब तक के कार्यकाल में उन्होंने कई ऐसे निर्णय लिए हैं, जिन्होंने उन्हें जनता के बीच एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया है। लेकिन उनकी मंजिल केवल यहीं तक सीमित नहीं है—अभी उनका सफर लंबा है। मैंने उन्हें करीब से देखा है—एक कार्यकर्ता, एक वक्ता, एक संवादकर्ता और अब एक मुख्यमंत्री के रूप में। उनकी सबसे बड़ी ताकत यही है कि वे बदलते नहीं हैं—पद बदलता है, लेकिन व्यक्ति वही रहता है। उनके जन्मदिन पर एक मित्र के तौर पर मेरी यही शुभकामना है कि वे अपनी इसी सरलता, स्पष्टता और प्रतिबद्धता को बनाए रखते हुए मध्यप्रदेश को एक नई दिशा दें। सफ़र अभी बाकी है, ये मुकाम आख़िरी नहीं, जो थाम ले इरादे, उसके लिए कोई राह मुश्किल नहीं। ज़मीन से जुड़े रहो तो आसमान भी झुकता है, जो बदलने निकले वक़्त को, वो खुद भी रुकता नहीं।  

35 कार्यों का औचक निरीक्षण

भोपाल  लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से माह में दो बार औचक निरीक्षण की व्यवस्था की गई है जिसके अंतर्गत 23 मार्च को मुख्य अभियंताओं के 7 दलों द्वारा प्रदेश के सीहोर, पांढुर्णा, भिण्ड, बड़वानी, मऊगंज, उज्जैन एवं पन्ना जिलों में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कुल 35 कार्यों का रेंडम आधार पर परीक्षण किया गया। इनमें से 21 कार्य लोक निर्माण विभाग (सड़क एवं पुल), 5 कार्य पीआईयू (भवन), 6 कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम, 2 कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम तथा 1 कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित थे। निरीक्षण दलों द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदनों की समीक्षा बैठक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। बैठक में प्रमुख अभियंता (सड़क/पुल)  के.पी.एस. राणा, प्रमुख अभियंता (भवन)  एस.आर. बघेल, सहित सभी मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं निरीक्षणकर्ता अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा बैठक में निरीक्षण प्रतिवेदनों के आधार पर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। शहडोल जिले में शहडोल–चुहरी–लफड़ा–मायका रोड के नवीनीकरण कार्य की स्थिति संतोषजनक नहीं पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार मैसर्स शुभ कंस्ट्रक्शन को ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने को कहा गया है। छिंदवाड़ा जिले के परासिया में कन्या शिक्षा परिसर के निर्माण कार्य की प्रगति धीमी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार मैसर्स ओम एसोसिएट्स, रायपुर को नोटिस जारी कर 30 मई 2026 तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं होने की स्थिति में अनुबंधानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में निर्देश दिए गए कि पुराने निरीक्षण प्रतिवेदनों के अनुपालन को आगामी बैठकों से पूर्व सुनिश्चित किया जाए तथा उनकी समीक्षा अगली औचक निरीक्षण बैठक में की जाएगी। सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का निराकरण संतोषजनक रूप से करते हुए शिकायतकर्ता को अवगत कराने तथा आगामी माह की ग्रेडिंग में सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही पुल-पुलियों की मरम्मत को प्राथमिकता देने, रोड सेफ्टी एवं ब्रिज सेफ्टी ऑडिट शीघ्र पूर्ण करने तथा लोक पथ ऐप में प्राप्त शिकायतों का निराकरण चार दिवस की समय-सीमा में करने के निर्देश भी दिए गए। निर्माण स्थलों पर लगाए जाने वाले कार्य प्रगति बोर्ड में संबंधित एजेंसी एवं अधिकारी का नाम स्पष्ट रूप से अंकित करने को भी कहा गया।