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किसानों को मिली बड़ी राहत, गेहूं उपार्जन की तारीख बढ़ाई गई, नया अपडेट जानें

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन की तारीखों को आगे बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से अबतक अपनी फसलें सरकार को न बेच पाने वाले किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। गेहूं उपार्जन व्यवस्था में आ रही दिक्कतों के बीच राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए अहम निर्णय लिए हैं। सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्जाट करते हुए कहा कि, जिन किसानों का अब तक स्लॉट नहीं मिल पाया है, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, ताकि वो अपनी फसल आसानी से बेच सकें। आपको बता दें कि, अबतक समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन खरीदी की तारीख 9 मई 2026 निर्धारित थी, जिसे मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने बढ़ाकर 23 मई तक कर दिया है। यानी किसान सरकार को अपनी फसल समर्थन मूल्य पर नई निर्धारित तारीख तक बेच सकते हैं। इसी के साथ, मुख्यमंत्री डॉ यादव ने प्रदेश में गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के भी निर्देश दिए हैं। लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा- सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि, गेहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों को निर्देशानुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध करने की व्यवस्था कर स्थितियां सुनिश्चित करें। उपार्जन केंद्र पर चल रही गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। गेहूं के लिए FAQ क्राइटेरिया में रिलेक्सेशन सीएम के निर्देश पर उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्था कर ली गई है। किसान जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज का विक्रय आसानी से कर सकेगा। गेहूं के लिए एफएक्यू मापदंड में शिथिलता प्रदान की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर करने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। खरगोन में सीएम का औचक निरीक्षण इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को खरगोन जिले की मंडलेश्वर तहसील के कतरगांव स्थित उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद किसानों से बातचीत की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बताया गया कि, महेश्वर प्रवास के दौरान वो अचानक केंद्र पहुंचे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण भी कर सकते हैं। केंद्रों पर की गई ये व्यवस्थाएं उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और राज्य सरकार द्वारा 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि समेत 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के लिए गेहूं उपार्जन एवं स्लॉट बुकिंग की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई कर दी है। अब तक कितनी गेहूं खरीदी? बता दें कि अबतक प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए 9.83 लाख किसानों द्वारा 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। प्रदेश में अभी तक 5 लाख 8 हजार 657 किसानों से 22 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस साल युद्ध के विपरीत हालातों के बावजूद किसानों के हित में सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य तय किया है।

सिवनी हवाला कांड में हाईकोर्ट ने दी राहत, डीएसपी समेत 3 की एफआईआर रद्द, कोर्ट ने कहा- काल डिटेल से अपराध सिद्ध नहीं होता

सिवनी सिवनी हवाला कांड एक बार फिर सुर्खियों में है, जब इस मामले की सुनवाई कर रही हाई कोर्ट ने आरोपियों को बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने डीएसपी पंकज मिश्रा, आरक्षक प्रमोद सोनी और व्यापारी पंजू गिरी गोस्वामी की याचिका पर सुनवाई के बाद एफआईआर रद्द करने के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, इसी केस में आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज कर दी गई है। यह मामला पिछले साल अक्टूबर में सामने आया था, जब पुलिस ने सीलादेही चौक पर महाराष्ट्र के हवाला कारोबारी सोहन लाल परमार की कार से 2.96 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की थी। विवाद तब शुरू हुआ जब पुलिस रिकॉर्ड में केवल 1.45 करोड़ रुपये की रकम दर्ज की गई। इस पर आरोप लगे कि रकम की असली मात्रा छुपाई गई। इसके बाद लखनवाड़ा थाना में सिवनी पुलिस की तत्कालीन एसडीओपी पूजा पाण्डेय और डीएसपी पंकज मिश्रा सहित 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। 81 फोन कॉल और व्हाट्सएप चैट थे आधार राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि घटना के दौरान मिश्रा और पूजा पांडे के बीच 81 बार फोन पर बातचीत हुई थी। साथ ही आरोप लगाया गया कि मिश्रा ने अपने मोबाइल से कुछ अहम व्हाट्सएप चैट और वीडियो हटाए (डिलीट किए), जिससे उनकी भूमिका संदिग्ध बनती है। हाईकोर्ट ने खारिज कर दी FIR? जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने केस डायरी का विश्लेषण करते हुए पाया कि केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) किसी अपराध को साबित करने के लिए काफी नहीं है। कोर्ट ने साफ कहा कि बातचीत का कोई रिकॉर्ड या ट्रांसक्रिप्ट पेश नहीं किया गया, जिससे साजिश साबित हो सके। पंकज मिश्रा को न पैसा मिला, न नाम आया कोर्ट ने यह भी माना कि मिश्रा के पास से कोई भी रकम बरामद नहीं हुई और न ही किसी गवाह या शिकायतकर्ता ने उनका नाम लिया। साथ ही यह भी कहा गया कि सूचना साझा करना एक पुलिस अधिकारी की ड्यूटी का हिस्सा हो सकता है। SC केस का हवाला देकर FIR और चार्जशीट की रद्द जबलपुर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित भजन लाल केस का हवाला देते हुए कहा कि जब FIR में प्रथमदृष्टया (पहली नजर में) अपराध नहीं बनता, तो ऐसी कार्यवाही जारी रखना न्याय के खिलाफ है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संदेह कितना भी गहरा हो, वह सबूत की जगह नहीं ले सकता। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने DSP पंकज मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, उन्हें पूरी तरह आरोपों से मुक्त कर दिया है। हाई कोर्ट ने दी तीन आरोपियों को राहत हाई कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई में तीन आरोपियों के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पैरवी की। कोर्ट ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। कोर्ट के अनुसार, मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं जो साजिश या आपसी मिलीभगत साबित करते हों। 2.96 करोड़ जब्त किए रिकॉर्ड में 1.45 करोड़ दिखाए यह मामला 8 अक्टूबर 2025 को सिवनी में सामने आए हवाला कांड से जुड़ा है। उस समय डीएसपी पूजा पाण्डेय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सीलादेही चौक पर महाराष्ट्र के हवाला कारोबारी सोहनलाल परमार की कार से करीब 2.96 करोड़ रुपए नकद जब्त किए थे। आरोप था कि पुलिस टीम ने पूरी रकम जब्त की, लेकिन रिकॉर्ड में सिर्फ 1.45 करोड़ रुपए ही दिखाए गए। मामला सामने आने पर लखनवाड़ा थाना में एसडीओपी पूजा पाण्डेय, डीएसपी पंकज मिश्रा सहित 11 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया था। साजिश या समझौते का ठोस सबूत नहीं मामले की सुनवाई जस्टिस हिमांशु जोशी की अदालत में हुई। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों के बीच पहले से कोई साजिश या आपसी समझौता था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोप केवल शक और अनुमान पर आधारित हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मात्र से अपराध सिद्ध नहीं होता। साजिश के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं। ऐसे में मुकदमा चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) और 238(b) के आवश्यक तत्व इन आरोपियों पर लागू नहीं होते, इसलिए चार्जशीट और सभी आपराधिक कार्यवाही रद्द की जाती है। नीरज राजपूत को राहत नहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जिस टीम ने कार रोकी और नकदी बरामद की, उसमें उसकी भूमिका महत्वपूर्ण थी, इसलिए उसके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि केवल कॉल रिकॉर्ड या संदेह के आधार पर किसी को आपराधिक मुकदमे में नहीं फंसाया जा सकता। जांच एजेंसियों को गंभीर मामलों में भी ठोस साक्ष्य पेश करना अनिवार्य है। कोर्ट का निर्णय: आरोप आधारहीन और शक पर आधारित हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामला केवल अनुमान और संदेह पर आधारित है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर कोई अपराध सिद्ध नहीं होता। इसका कोई सुनिश्चित सबूत नहीं मिला है कि आरोपितों के बीच मिलीभगत या अपराधिक साजिश रची गई हो। चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही पर रोक कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) और 238(b) के अनुसार यह माना कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाना कानून का दुरुपयोग होगा। इसलिए चार्जशीट को निरस्त करते हुए आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का निर्देश दिया। आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज हालांकि, आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका को कोर्ट ने खारिज किया है। कोर्ट के अनुसार, उसने टीम के साथ कार रोकी और रकम की जब्ती में भूमिका निभाई थी, इसलिए उसके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल शक और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति को बिना ठोस सबूत के आपराधिक मुकदमे में नहीं लाया जा सकता। यह फैसला जांच एजेंसियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल है कि अब उन्हें गंभीर मामलों में स्पष्ट और मजबूत साक्ष्य पेश करना होगा।

डॉ. मोहन यादव का किसानों के बीच अचानक दौरा, चाय पर चर्चा में CM ने पूछा भुगतान और तौल व्यवस्था

महेश्वर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक दिन पहले ही कहा था कि वे कभी भी और कहीं भी उपार्जन केंद्रों का अचानक निरीक्षण कर सकते हैं। कुछ ही घंटों बाद मोहन यादव खरगोन में थे। उन्होंने गुरुवार को सुबह अचानक कतरगांव में बनाए गए उपार्जन केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों से भी चर्चा की और उनके साथ चाय भी पी। किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (MP CM Mohan Yadav) ने कल यानी 29 अप्रैल को जो कहा था, वैसा ही 30 अप्रैल को किया। उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक दौरा कर सकते हैं। और, हुआ भी यही। डॉ. यादव एक दिन पहले ही 29 अप्रैल को महेश्वर पहुंच गए थे जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया था। गुरुवार को सुबह मोहन यादव कतरगांव के उपार्जन केंद्र का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद किसानों के साथ सीएम का सीधा संवाद भी हुआ। सीएम ने किसानों के साथ चाय भी पी। गेहूं उपार्जन की व्यवस्था के बीच अपने साथ सीएम को पाकर किसानों के चेहरे पर मुस्कान थी। मोहन यादव ने उपार्जन केंद्र की व्यवस्था करने वाले कर्मचारियों को दिशा-निर्देश भी दिए। महेश्वर विधानसभा के दौरे पर आए सीएम ने रात्रि विश्राम के बाद सुबह हेलीपैड के लिए प्रस्थान किया था। हालांकि, उन्होंने अचानक अपना काफिला बड़वाह मार्ग की ओर मोड़ दिया। सीधे कतरगांव खरीदी केंद्र पहुंच गए। मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर वहां मौजूद किसान और कर्मचारी हैरान रह गए। बता दें कि मुख्यमंत्री ने बुधवार को महेश्वर प्रवास के दौरान संकेत दिए थे कि व्यवस्थाओं को परखने के लिए किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का निरीक्षण कर सकते हैं। उपार्जन केंद्र पर क्या है खास 0-किसानों के लिए उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठक और कई अन्य सुविधाओं की व्यवस्था। 0-अब किसान किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय कर सकते हैं। 0-उपार्जन केन्द्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है। 0-सरकार जिलों में और भी तौल कांटे बढ़ा रही है। 0-सरकार ने चमकविहीन गेहूं की सीमा भी 50 प्रतिशत कर दी है। 0-सूकड़े दाने की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक की गई है। 0-क्षतिग्रत दानों की सीमा बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक की गई है। 0-बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं मिलेंगी। सीएम ने किसानों से की सीधी बात सीएम ने किसी औपचारिक प्रोटोकॉल का पालन किए बिना किसानों से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें भुगतान समय पर मिल रहा है? तौल में गड़बड़ी तो नहीं हो रही। सीएम ने मौजूद कलेक्टर भव्या मित्तल और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को धूप में खड़े न रहना पड़े। उन्होंने ठंडे पानी और बैठने की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। निरीक्षण के दौरान महेश्वर विधायक राजकुमार मेव भी उनके साथ थे, जिनसे सीएम ने क्षेत्र की कृषि समस्याओं पर फीडबैक लिया। सीएम ने तौल और भुगतान में पारदर्शिता के निर्देश सीएम ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि गेहूं की स्लॉट बुकिंग से लेकर तौल और भुगतान तक की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार ने तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी है। आवश्यकता पड़ने पर इसे और बढ़ाया जाएगा। सीएम ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार 2625 रुपए प्रति क्विंटल (बोनस सहित) की दर से उनके गेहूं का पाई-पाई भुगतान करेगी। निरीक्षण के बाद सीएम ने कहा कि आने वाले दिनों में वे प्रदेश के किसी भी जिले में अचानक उतरकर केंद्रों की स्थिति का जायजा ले सकते हैं, इसलिए प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहना चाहिए। युद्ध के बावजूद बड़ा लक्ष्य सरकार ने इस साल युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए 9.83 लाख किसानों द्वारा 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। एमपी में अब तक 5 लाख 8 हजार 657 किसानों से 22 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था।

अपेक्स बैंक के नवनियुक्त प्रशासक महेंद्र सिंह यादव की भव्य पदभार यात्रा संपन्न

भोपाल अपेक्स बैंक के नवनियुक्त प्रशासक महेंद्र सिंह यादव ने आज सांय 5:00 बजे अपेक्स बैंक के सुभाष यादव समन्वय भवन में अपनी विशाल पदभार यात्रा के साथ प्रवेश किया l  आपके साथ मध्य प्रदेश शासन के माननीय सहकारिता तथा खेलकूद व युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, माननीय पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, भोपाल के विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दस सबनानी, मध्य प्रदेश सहकारिता प्रकोष्ठ के संयोजक किशनसिंह भटोल, प्रदेश मंत्री श्रीमती राजो मालवीय, प्रवक्ता अजय सिंह यादव, नगर निगम के अध्यक्ष किशन सिंह सूर्यवंशी, पूर्व नगर निगम अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह चौहान, रविंद्र यति सहित विशाल जन समूह ने यात्रा के रूप में पहुंचकर आयोजन को गरिमामयी बनाया . इस पदयात्रा को प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने  प्रदेश बी जे पी कार्यालय से रवाना किया. यह यात्रा का लिंक रोड नंबर 1 पर लगभग 20 जगह स्वागत मंचों के माध्यम से स्वागत हुआ, तदुपरान्त अपेक्स बैंक प्रांगण में पहुंची. पदभार ग्रहण कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के सहकारिता एवं खेलकूद व युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने महेंद्र सिंह यादव जी को संगठन एवं पार्टी का एक कर्मठ निष्ठावान कार्यकर्ता बताया तथा मध्य प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व व माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश का सहकारी साख आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की आकांक्षाओं के अनुरूप मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में निरंतर प्रगति पद पर अग्रसर है एवं महेंद्र सिंह यादव मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रदेश कि सहकारी साख संरचना को और मजबूती प्रदान करेंगे यह मुझे विश्वास है. उन्होंने यादव के सफल कार्यकाल के लिए मंगल कामनाएं दीं. उन्होंने आगे बताया कि हमारी सरकार ने  0% ब्याज पर किसानों के लिए ऋण उपलब्ध कराकर देश के आम सर्वहारा वर्ग की सेवा करने का जो संकल्प लिया है उसमें हम सब सहभागिता करते हुए निरंतर अग्रसर रहेंगे.  समाज कल्याण मंत्री नारायण सिंहअपेक्स बैंक के नवनियुक्त प्रशासक महेंद्र सिंह यादव जी में आज अपराह्न 5:00 बजे अपेक्स बैंक के सुभाष यादव समन्वय भवन में अपनी विशाल पदभार यात्रा को साथ प्रवेश किया आपके साथ मध्य प्रदेश शासन के माननीय सहकारिता तथा खेलकूद्वा युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग मध्य प्रदेश की माननीय पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा भोपाल के विधायक भगवान दास सबनानी रामेश्वर शर्मा मध्य प्रदेश सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रादेशिक अध्यक्ष कृष्ण सिंह भटोल प्रदेश मंत्री राजू मालवीय प्रादेशिक प्रवक्ता अजय सिंह यादव राय जिला अध्यक्ष ग्रामीण नगर निगम के अध्यक्ष किशन सिंह सूर्यवंशी पूर्व नगर निगम अध्यक्ष डॉक्टर सुरजीत सिंह चौहान सहित विशाल जैन समूह ने यात्रा के रूप में पहुंचकर आयोजन को गरिमा में बनाया .  इस भाव पदयात्रा का शुभारंभ प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जी एवं सरकार माननीय सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश शरण जी ने करवाया कराया यह यात्रा लिंक रोड नंबर 1 से लगभग 20 जगह स्वागत मंचों के माध्यम से स्वागत के उपरांत अपेक्स बैंक प्रांगण में पहुंची  अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता जी ने आरंभ में अतिथियों का स्वागत किया एवं के बारे में प्रकाश डाला कार्यक्रम में विश्वास कैलाश सारंगी भगवान दास सबनानी नारायण सिंह कुशवाहा भगवान दास सबनानी ने अपने उद्गार व्यक्त किया  मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री एवं खेलकूद वायु व कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने महेंद्र सिंह यादव जी को संगठन एवं पार्टी का एक कर्मठ विस्थापन कार्तिक कार्यकर्ता बताया तथा मध्य प्रदेश के शीश नेतृत्व व माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश का सहकारी शाखा आंदोलन माननीय नरेंद्र मोदी जी एवं मनीष अमित शाह जी की आकांक्षाओं के अनुरूप मध्य प्रदेश में डॉक्टर मोहन यादव जी के नेतृत्व में निरंतर प्रगति पद पर अग्रसर होगा एवं महेंद्र सिंह यादव मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहकारी सख्त संरचना को और मजबूती प्रदान करेंगे यह में विश्वास दिलाता हूं उन्होंने यादव के सफल एवं शुद्धिक जीवन की मंगल कामनाएं विधि उन्होंने आगे बताया कि हमारी सरकार ने विकास 0% ब्याज पर किसानों के लिए ऋण उपलब्ध कराकर देश के आम सर्वहारा वर्ग की सेवा करने का जो संकल्प लिया है उसमें हम सब सहभागिता करते हुए निरंतर अग्रसर रहेंगे.  इसलिए अवसर पर ऊर्जा मंत्री प्रदुभन सिंह तोमर भी उपस्थित रहें. समाज कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने बताया कि महेंद्र यादव जी के साथ उनके लगभग 35 वर्ष पुराना रिश्ता है और मेरे जीवन की शुरुआत भी सहकारिता से ही हुई है निश्चित रूप से यादव अपेक्स बैंक के प्रशासक के रूप में अपने दीघा अनुभवों एवं समर्पित कार्यशैली से अपेक्स बैंक को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रयास करने में सफल होंगे और जन आकांक्षाओं पर खरे उतरेंगे.  इस अवसर पर विधायक भगवान दास सबनानी ने भी महेंद्र सिंह यादव जी के साथ अपनी लगभग तीन दशक की राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्हें एक सरल सहज हुआ निष्ठावान व्यक्ति बताया.  पदभार ग्रहण करने के उपरांत महेंद्र सिंह यादव ने अपने उद्बोधन में प्रदेश के नेतृत्व एवं माननीय मुख्यमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त किया और बताया कि मैं स्वयं एक किसान पृष्ठभूमि से संबंध रखता हूं मुझे याद है पूर्ववर्ती सरकारों में जब 18 परसेंट 15% ब्याज दर पर किसानों को बहुत मुश्किल से उपलब्ध हो पाता था और किसान साहूकारों के चंगुल में फंसा रहता था लेकिन 2013 के बाद जब मध्य प्रदेश में हमारी सरकार आई तब हमारी सरकार ने 0% ब्याज पर किसानों को सरल प्रक्रिया से ऋण उपलब्ध कराकर सर्वहारा वर्ग की सेवा का जो बीड़ा उठाया था वह आज पूरे प्रदेश में फली भूत हो रहा है.  कार्यक्रम की शुरू में अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक महोदय ने अतिथियों का स्वागत किया एवं स्वागत उद्बोधन में कहां की दिनांक 14 अप्रैल से मध्य प्रदेश में माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर एवं माननीय से सहकारिता मंत्री जी की मार्गदर्शन में प्रदेश में नए 10 लाख सदस्य बनाने का अभियान शुरू हुआ है जिसमें अभी तक 4 लाख सदस्य बन चुके हैं एवं 60000 लोगों ने अंश पूंजी जमा कर … Read more

प्रदेश में अधोसंरचना और उद्योगों के समन्वित विस्तार को मिलेगा सशक्त आधार

भोपाल  मध्यप्रदेश में औद्योगिक प्रगति को नई गति देने और निवेश के लिए दीर्घकालिक आधार तैयार करने की दिशा में इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का प्रथम चरण एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में स्थापित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 2 मई को इस परियोजना के प्रथम चरण का भूमि-पूजन करेंगे। यह कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक संरचना को अधिक संगठित, सक्षम और निवेश का आदर्श गंतव्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा, जिसमें अधोसंरचना, उद्योग और शहरी विकास को एकीकृत रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण, नीति समर्थन और बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार कार्य किया जा रहा है। इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर इसी क्रम में एक ऐसा विकास मॉडल प्रस्तुत करता है, जहां औद्योगिक गतिविधियों, वाणिज्यिक विस्तार और नागरिक सुविधाओं का संतुलित समावेश सुनिश्चित किया गया है। यह परियोजना निवेशकों को एक सुव्यवस्थित, पूर्व नियोजित और अधोसंरचना से परिपूर्ण स्थान उपलब्ध कराएगी, जिससे उद्योगों की स्थापना और विस्तार की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकेगी। कनेक्टिविटी आधारित विकास: लॉजिस्टिक्स दक्षता और क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ावा इंदौर-पीथमपुर इकॉनामिक कॉरिडोर 20.28 कि.मी. लंबाई में फैलाव के साथ इन्दौर एयरपोर्ट के समीप सुपर कॉरिडोर को पीथमपुर निवेश क्षेत्र से सीधे जोड़ेगा। परियोजना का विस्तार 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है, जिसके समुचित विकास के लिए कुल 2360 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अधोसंरचना की दृष्टि से 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क के साथ दोनों ओर सुव्यवस्थित बफर ज़ोन विकसित किया जाएगा, जो इस कॉरिडोर को एक आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विस्तार योग्य स्वरूप प्रदान करेगा। यह मार्ग एनएच-47 और एनएच-52 को जोड़ते हुए न केवल इन्दौर शहर के यातायात दबाव को कम करेगा, बल्कि माल परिवहन की गति और विश्वसनीयता को भी बढ़ाएगा। इस कनेक्टिविटी का प्रभाव केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह औद्योगिक इकाइयों के लिए लागत में कमी, समय की बचत और सप्लाई चेन की दक्षता में सुधार के रूप में भी सामने आएगा, जो निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र बनेगा। निवेश सशक्तिकरण का आधार : औद्योगिक क्लस्टर्स का एकीकरण इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, पीथमपुर निवेश क्षेत्र, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क, पीएम मित्र पार्क और विक्रम उद्योगपुरी जैसे प्रमुख औद्योगिक स्थानों को एकीकृत रूप में जोड़ते हुए एक मजबूत औद्योगिक नेटवर्क तैयार करेगा। इस प्रकार का समेकित विकास निवेशकों को अलग-अलग स्थानों के बजाय एक संगठित इकोसिस्टम में कार्य करने का अवसर प्रदान करता है, जहां कनेक्टिविटी, संसाधन और बाजार तक पहुंच एक साथ उपलब्ध होती है। इससे बड़े निवेश प्रस्तावों को गति मिलेगी और प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार अधिक सुव्यवस्थित ढंग से हो सकेगा। साथ ही, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए भी बड़े उद्योगों के साथ जुड़कर आगे बढ़ने के अवसर विकसित होंगे। सेक्टर-आधारित विकास: आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स को नई ऊर्जा यह कॉरिडोर इन्दौर को आईटी और फिनटेक गतिविधियों के लिए एक सशक्त स्थान के रूप में स्थापित करने की दिशा में सहायक सिद्ध होगा। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी विकास की गति तेज होने की संभावनाएं हैं। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और इन्दौर की स्थापित औद्योगिक पहचान को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना विभिन्न सेक्टरों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती है। लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, तेज कनेक्टिविटी और नियोजित अधोसंरचना उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाएगी, जिससे प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकेगा। संतुलित शहरीकरण और भविष्य उन्मुख अधोसंरचना का विकास इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, उज्जैन-इन्दौर मेट्रोपॉलिटन रीजन में एक महत्वपूर्ण विकास धुरी के रूप में कार्य करेगा। यह परियोजना केवल औद्योगिक विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत वाणिज्यिक, आवासीय और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का भी नियोजित विकास किया जाएगा, जिससे एक संतुलित और सुव्यवस्थित शहरी संरचना विकसित हो सके। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह कॉरिडोर बहुविकल्पीय कनेक्टिविटी, ट्रैफिक प्रबंधन और बड़े आयोजनों के दौरान सुचारू आवागमन सुनिश्चित करने में भी सहायक होगा। इस प्रकार यह परियोजना दीर्घकालिक शहरी और आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है। इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और शहरी विस्तार को एकीकृत रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है, जो मध्यप्रदेश को एक संतुलित, सक्षम और प्रतिस्पर्धी आर्थिक प्रणाली की ओर अग्रसर करेगा।  

इंदौर में बनेगा प्रदेश का पहला क्वांटम कंप्यूटर, हाई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा कदम

इंदौर  मध्यप्रदेश हाईटेक टेक्नोलॉजी की दौड़ में बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) में 3 साल में क्वांटम कम्प्यूटर तैयार होंगे। ये कम्प्यूटर रूम टेम्परेचर पर काम करेंगे। ऐसा करने वाला यह मध्यप्रदेश (MP)का इकलौता संस्थान होगा। यह तकनीक नई दवाइयों की खोज में मददगार होगी। अभी दवाइयों की खेाज में वर्षों लगते हैं। यह सिस्टम अणुओं के व्यवहार को सटीक सिमुलेट करेगा। दुर्लभ बीमारियों की दवा जल्द बन सकेगी। इंटरनेट सुरक्षा ज्यादा मजबूत होगी। साइबर सिक्योरिटी बढ़ेगी। ट्रैफिक, फ्लाइट शेड्यूल में आ रहीं ऑप्टिमाइजेशन की समस्या भी यह हल करेगा। इससे ईंधन बचेगा। 8000 से ज्यादा आवेदन आए देश के 23 संस्थानों में एक हमारे देश में नेशनल क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम कम्यूप्टिंग लैब के लिए 8000 से ज्यादा आवेदन आए। इनमें से 23 संस्थान चुने। ज्यादातर आइआइटी-ट्रिपल आइटी हैं। मध्यप्रदेश से राज्य इंजीनियरिंग कॉलेज SGSITS को चुना। संस्थानों को डिपार्टमेंट ऑफ साइंस-टेक्नोलॉजी (डीएसटी) 1-1 करोड़ रुपए फंड देगा। स्टूडेंट्स को मिलेंगे नए कोर्स और ड्यूल डिग्री के अवसर संस्थान में क्वांटम कम्प्यूटिंग की पढ़ाई और रिसर्च को बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां पहले से 15 सीटों पर एमटेक इन क्वांटम कम्प्यूटिंग कोर्स चल रहा है। अब बीटेक में 20 क्रेडिट का माइनर प्रोग्राम शुरू होगा। हर सेमेस्टर 5-5 क्रेडिट दिए जाएंगे। इस कोर्स में 30 सीटें रहेंगी। इसे करने वाले छात्रों को बीटेक के साथ अतिरिक्त डिग्री मिलेगी। राजीव गांधी प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (RGPV) से जुड़े छात्र ड्यूल डिग्री प्रोग्राम में भी हिस्सा ले सकेंगे। स्टार्टअप-रिसर्च को बढ़ावा क्वांटम कम्प्यूटिंग इंटर डिसिप्लिनरी क्षेत्र। इसमें कम्प्यूटर साइंस, आइटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फिजिक्स और मैथ्स जैसे विषयों के विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे।     लैब में छात्रों को क्वांटम डिवाइस बनाने की ट्रेनिंग।     इंटर्नशिप और स्टार्टअप शुरू करने में भी मदद मिलेगी।     संस्थान क्वांटम मटेरियल पर भी काम करेगा। देश में ऐसा…     देश में क्वांटम टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने 4 बड़े हब आइआइटी दिल्ली, बॉम्बे, चेन्नई और खडग़पुर पहले से काम कर रहे हैं।     उन्हें स्टार्टअप और रिसर्च के लिए 800 करोड़ फंड दिया। 8 स्टार्टअप शुरू।     आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू सरकार ने बड़ा निवेश किया।     40 क्यूबिट का सिस्टम स्थापित किया है। विश्व में 1000 क्यूबिट तक के क्वांटम कम्प्यूटर। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा कदम यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश (MP) ही नहीं, देश के लिए भी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा कदम साबित होगा। आने वाले 3 साल में लक्ष्य पूरा होने पर इंदौर क्वांटम टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। -जेटी एंड्रूस थॉमस, एचओडी, फिजिक्स, एसजीएसआइटीएस

मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा में बदलाव, 64 कॉलेजों के बंद होने से शिक्षा पर असर

भोपाल  मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। प्लेसमेंट के घटते अवसर और पारंपरिक ब्रांचों में छात्रों की कम होती रुचि ने कई कॉलेजों के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि इस साल भी कई इंजीनियरिंग कॉलेज सीटें सरेंडर करने की तैयारी में हैं। पिछले साल प्रदेश में 754 सीटें सरेंडर की गई थीं। हाल इतने बुरे हैं कि बीते 10 सालों में प्रदेश के 64 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), मशीन लर्निंग (एमएल) और ई-मोबिलिटी जैसी आधुनिक ब्रांचों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके चलते कॉलेज इन क्षेत्रों में सीटें बढ़ाने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेज रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि अब छात्र और अभिभावक केवल उन्हीं संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां बेहतर प्लेसमेंट की गारंटी हो। इससे छोटे और कम पहचान वाले कॉलेजों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश के इंजीनियरिंग क्षेत्र में जबर्दस्त बदलाव आ रहा है। एक ओर जहां इंजीनियरिंग कॉलेजों में ताला लग रहा है, 5 दर्जन से ज्यादा कॉलेज बंद हो चुके हैं वहीं नए कोर्सेस की डिमांड बढ़ भी रही है। प्लेसमेंट के दबाव से यह स्थिति बन रही है। नई ब्रांच में रुचि, पुरानी में गिरावट प्रदेश में इंजीनियरिंग की कुल 75722 सीटों में से पिछले साल सबसे ज्यादा 20 हजार से अधिक एडमिशन केवल कंप्यूटर साइंस (सीएसई) में हुए। इसके विपरीत, कई पारंपरिक और विशेष ब्रांचों की हालत बेहद खराब रही। एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, बायोटेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, ई व्हीकल्स जैसी 12 ब्रांचों में पिछले दो साल से सीटें लगभग खाली रहीं। बदलती प्राथमिकताएं: 2015-16 में जहां प्रदेश में 200 इंजीनियरिंग कॉलेज और करीब 95 हजार सीटें थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 138 कॉलेज और 74722 सीटों तक सिमट गई है। यह गिरावट स्पष्ट संकेत देती है कि इंजीनियरिंग शिक्षा अब केवल संख्या का खेल नहीं रह गया, बल्कि गुणवत्ता और रोजगार से सीधे जुड़ गई है। प्रमुख बिंदु इंजीनियरिंग क्षेत्र में जबर्दस्त बदलाव एमपी के इंजीनियरिंग कॉलेजों में लग रहा ताला एक दशक में 5 दर्जन से ज्यादा कॉलेज बंद हुए प्लेसमेंट के दबाव से स्थिति बदली स्टूडेंट का नई ब्रांच की ओर रुझान एआइ की सबसे ज्यादा डिमांड इंजीनियरिंग की पुरानी सीटें सरेंडर कर रहे कॉलेज नए कोर्सेस के लिए भेजे प्रस्ताव दस साल में स्थिति सत्र -कॉलेज- सीट 2025-26- 138- 74722 2024-25- 142- 63338 2023-24- 140- 71400 2022-23- 143- 69966 2020-21- 150- 56008 2019-20- 162- 59000 2018-19- 160- 65000 2017-18- 197- 79899 2016-17- 194- 90303 2015-16- 200- 94980  

‘आप इस जमाने की होकर 5 बच्चे कर रही हो’, IAS विदिशा मुखर्जी ने प्रसूता पर किया तीखा बयान

 मैहर मध्य प्रदेश के मैहर की कलेक्टर IAS बिदिशा मुखर्जी इन दिनों अपने सख्त और संवेदनशील तेवरों के लिए चर्चा में हैं. हाल ही में जब वे मैहर के सिविल अस्पताल का औचक जायजा लेने पहुंचीं, तो वहां का नजारा देख वह खुद को रोक नहीं पाईं और एक 'सुपर वुमेन' की तरह समाज की कुरीतियों पर दहाड़ती नजर आईं. पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं… अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को जब यह पता चला कि एक महिला ने अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया है, तो वे दंग रह गईं।  उन्होंने महिला के पास जाकर बड़ी ही आत्मीयता, लेकिन दृढ़ता के साथ उसे समझाइश दी कि आज के महंगाई के दौर में इतने बच्चों का पालन-पोषण, उनकी अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना चुनौतीपूर्ण है. कलेक्टर ने महिला से सीधे सवाल किया कि आखिर इतने बड़े परिवार का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा? ​ अस्पताल में उनके इस तेवर ने वहां मौजूद कर्मचारियों और मरीजों के परिजनों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. यह पूरा घटनाक्रम समाज की उस गहरी सोच पर प्रहार करता है जहां आज भी 'पुत्र प्राप्ति' या अन्य सामाजिक कारणों से लगातार बच्चे पैदा किए जाते हैं।  महिला सशक्तिकरण का दिया उदाहरण कलेक्टर ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज जमाना बदल गया है. उन्होंने उदाहरण दिया कि "आज मध्य प्रदेश में 31% कलेक्टर महिलाएं हैं, हमारी पूरी टीम महिलाओं की है. फिर यह भेदभाव क्यों?" ग्राउंड स्टाफ को फटकार उन्होंने केवल महिला को ही नहीं टोका, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अमले और मैदानी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल दागे. कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आखिर परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता अभियान कहां है? उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि विभाग सिर्फ कागजों पर काम न करे, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों को छोटे परिवार के फायदों और मातृ स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करे।  कलेक्टर ने अस्पताल में मिल रहे भोजन की क्वालिटी की भी जांच की और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।   उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि मैहर एक नया जिला है और यहां महिला रोग विशेषज्ञ, नेफ्रोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन जैसे विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए वे निरंतर प्रयास कर रही हैं। 

भोजशाला विवाद में नया मोड़, मुस्लिम पक्ष ने MP हाई कोर्ट में 1935 के धार रियासत के फैसले का किया हवाला

 इंदौर/धार मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक स्मारक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के सामने एक अहम दस्तावेज पेश किया है. सीनियर वकील शोभा मेनन ने दावा किया कि तत्कालीन धार रियासत की अदालत ने 24 अगस्त 1935 को एक 'ऐलान' जारी कर इस परिसर को आधिकारिक रूप से 'मस्जिद' घोषित किया था।  वकील शोभा मेनन ने हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के सामने मुस्लिम समुदाय के मुनीर अहमद और अन्य लोगों की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका और रिट अपील के समर्थन में दलीलें पेश कीं।  1935 के 'ऐलान' का दावा मुस्लिम समुदाय की ओर से पैरवी करते हुए वकील शोभा मेनन ने दलील दी कि 1935 का यह आदेश एक राजपत्र (Gazette) के समान था, जिसमें शर्त रखी गई थी कि भविष्य में भी यहां नमाज अदा की जाती रहेगी।  उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले को धार्मिक चश्मे से देखने के बजाय 'कानून के स्थापित सिद्धांतों' और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर परखा जाए. बता दें कि ब्रिटिश राज के दौरान धार मध्य भारत में भोपाल एजेंसी के अधीन एक रियासत थी।  मेनन ने हाई कोर्ट से आग्रह किया कि वह भोजशाला विवाद को धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि कानून के सिद्धांतों के आधार पर परखे. उन्होंने विरोधाभासों की ओर इशारा करते हुए पिछले कुछ वर्षों में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर अदालती मामलों में मध्य प्रदेश सरकार और ASI की ओर से अलग-अलग समय पर व्यक्त की गई भिन्न-भिन्न राय का हवाला दिया।  शोभा मेनन ने कहा कि इस तरह बार-बार बदलते रुख कानून की नजर में असंगत, मनमाने और अस्वीकार्य हैं, क्योंकि सरकार से एक सुसंगत और स्थिर दृष्टिकोण अपनाने की उम्मीद की जाती है।  जनहित याचिकाओं पर सवाल उन्होंने भोजशाला मामले में 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' नामक संगठन कुलदीप तिवारी और एक अन्य व्यक्ति की ओर से दायर दो जनहित याचिकाओं पर सवाल उठाए. इन याचिकाओं में कहा गया है कि भोजशाला असल में एक सरस्वती मंदिर है और इस परिसर में पूजा-अर्चना का अधिकार केवल हिंदुओं को ही मिलना चाहिए।  इन PILs की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए मेनन ने तर्क दिया कि भोजशाला विवाद को व्यापक जनहित का मामला मानना ​​कानूनी रूप से सही नहीं है, क्योंकि यह मुख्य रूप से एक विशिष्ट धार्मिक समुदाय से जुड़ा मामला है।  भोजशाला मामले में सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी. हाई कोर्ट 6 अप्रैल से लगातार चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें इस स्मारक के धार्मिक स्वरूप को चुनौती दी गई है।  हिंदू समुदाय धार जिले में स्थित भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद होने का दावा करता है. यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है। 

2646 नर्सिंग ऑफिसर और सिस्टर ट्यूटर पदों पर भर्ती, हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद आवेदन फिर से शुरू

जबलपुर  मध्यप्रदेश में नर्सिंग क्षेत्र के अभ्यर्थियों के लिए एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। नर्सिंग ऑफिसर और सिस्टर ट्यूटर के 2,646 पदों के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षा-2026 आयोजित की जा रही है। यह भर्ती लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत होगी, जिसका संचालन मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा किया जाएगा। खास बात यह है कि इस भर्ती से जुड़े मामलों में उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के तहत अभ्यर्थियों को आवेदन करने की अनुमति दी गई है। उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और अन्य शर्तों को ध्यानपूर्वक समझकर ही आवेदन करना होगा। इस भर्ती से संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए आवेदन करने की अनुमति दी है। इसके तहत पात्र याचिकाकर्ता अभ्यर्थी 29 अप्रैल से 3 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह अवसर केवल उन्हीं अभ्यर्थियों के लिए है, जो संबंधित याचिकाओं में शामिल हैं। प्रोविजनल रहेगी अभ्यर्थिता, परिणाम पर रोक उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार इन याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों की अभ्यर्थिता पूरी तरह प्रावधिक (प्रोविजनल) रहेगी। इसके साथ ही, उनके परीक्षा परिणाम अंतिम निर्णय आने तक रोके (Withheld) रखे जाएंगे। यानी चयन प्रक्रिया में शामिल होने के बावजूद अंतिम नियुक्ति न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगी। गलत जानकारी देने पर रद्द होगी अभ्यर्थिता आवेदकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदन पत्र में दी गई सभी जानकारी पूरी तरह सही और सत्य हो। किसी भी स्तर पर जानकारी गलत या भ्रामक पाए जाने पर अभ्यर्थिता निरस्त कर दी जाएगी। साथ ही, निर्धारित समय सीमा में आवेदन नहीं करने पर अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे, जिसकी जिम्मेदारी स्वयं उम्मीदवार की होगी। संयुक्त भर्ती में 2,646 पद भरे जाएंगे मध्यप्रदेश में संयुक्त भर्ती में 2,646 पद भरे जाएंगे। नर्सिंग ऑफिसर के 1,256 पद सरकारी अस्पतालों में और 954 पद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भरे जाएंगे। सिस्टर ट्यूटर के 218 पद भी इसी संयुक्त परीक्षा से भरे जाएंगे। पदों का स्वरूप और सैलरी नर्सिंग ऑफिसर- लेवल-7, वेतनमान 28,700 रुपए। यह पद नियमित और तृतीय श्रेणी सेवा के अंतर्गत आते हैं। सिस्टर ट्यूटर- लेवल-9, वेतनमान 36,200 रुपए। पद नियमित और तृतीय श्रेणी सेवा के अंतर्गत आते हैं। केवल ऑनलाइन होंगे आवेदन संयुक्त परीक्षा के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन होंगे। आधार आधारित पंजीयन अनिवार्य है। आवेदन संख्या सुरक्षित रखना जरूरी है। परीक्षा में फोटो आईडी (आधार, पैन, वोटर आईडी आदि) अनिवार्य है। रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन भी जरूरी है। सामान्य वर्ग को 500 रुपए देने होंगे संयुक्त भर्ती परीक्षा के लिए सामान्य वर्ग को 500 रुपए शुल्क देना होगा। MP के SC/ST/OBC/EWS/दिव्यांग उम्मीदवारों को 250 रुपए फीस देनी होगी। बैकलॉग पद के लिए कोई शुल्क नहीं है। पोर्टल शुल्क 60 रुपए (कियोस्क) और 20 रुपए (स्वयं लॉगिन) तय है। परीक्षा का पैटर्न भर्ती परीक्षा में 100 सवाल होंगे। हर प्रश्न 1 अंक का होगा। समय 2 घंटे मिलेगा। 25 अंक के सवाल सामान्य ज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान से होंगे। नर्सिंग विषय के 75 अंक के सवाल होंगे। परीक्षा दो शिफ्ट में होगी। पहली शिफ्ट 10 से 12 बजे और दूसरी 3 से 5 बजे होगी। चयन लिखित परीक्षा की मेरिट के आधार पर होगा। सामान्य वर्ग के लिए 50% और आरक्षित वर्ग के लिए 40% न्यूनतम अंक हैं। मेरिट के बाद नियुक्ति विभाग की जरूरत और सत्यापन पर निर्भर होगी।