samacharsecretary.com

त्योहार से पहले बड़ा हादसा: नोएडा-भिंड मार्ग पर भीषण सड़क दुर्घटना, दो बच्चों समेत 3 की जान गई

भिंड नोएडा से गोहद स्थित गृह गांव में होली मनाने आ रहे कार सवार परिवार से आगरा में ट्रक टकरा गया। हादसे में दो बच्चों सहित तीन लोगों की मौत हो गई। चार लोग घायल हो गए। जानकारी के अनुसार 32 वर्षीय रामकुमार पुत्र बांकेलाल जाटव निवासी कीरतपुरा थाना गोहद नोएडा के सेक्टर 93 में परिवार सहित रहते थे। होली मनाने के लिए रामकुमार सोमवार रात कार से गोहद आ रहे थे। ट्रक की टक्कर से कार के उड़े परखच्चे, तीन की मौत मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे आगरा-फतेहाबाद के बीच बाह की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने सामने से आ रही स्विफ्ट कार को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। कार में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीम को वाहन काटना पड़ा। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद रामकुमार जाटव, चार वर्षीय बेटे मनदीप के अलावा छह वर्षीय तनु पुत्री भूरे जाटव निवासी कीरतपुरा को मृत घोषित कर दिया। कई लोग गंभीर घायल, ट्रक चालक फरार जबकि 40 वर्षीय भूरे जाटव, उनकी पत्नी 35 वर्षीय चंद्रिका, बेटी आठ वर्षीय अनन्या के अलावा रेखा पत्नी रामकुमार जाटव घायल हैं। भूरे जाटव की गंभीर हालत देखते हुए ग्वालियर में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। आर्थिक तंगी और अस्पताल के बिल ने बढ़ाई परेशानी हादसे के बाद मृतक रामकुमार जाटव के भाई राजकुमार जाटव ने आगरा में न्यू आगरा थाने में आवेदन देकर बताया कि हादसे में उनके भाई सहित भतीजों की मौत हो गई है। जबकि घायल श्री हरि अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि घायलों का बिल 97 हजार रुपये हो गया है। जबकि घायलों के स्वजन मजदूरी करते थे, इसलिए परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। अस्पताल प्रबंधन बिना बिल भरे हुए मरीजों को डिस्चार्ज नहीं कर रहा है।  

नशे में किया खतरनाक कमेंट, उमा भारती के परिवार को धमकी देने वाला युवक पकड़ा गया

टीकमगढ़ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की बहू और जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह लोधी को इंटरनेट मीडिया पर हाइड्रोजन बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपित की पहचान अर्जुन चढ़ार निवासी खरगापुर के रूप में हुई है। एसडीओपी राहुल कटरे ने बताया कि 22 फरवरी को जीडब्ल्यू बृजेंद्र कुशवाहा नामक एक फेसबुक प्रोफाइल से जिपं अध्यक्ष उमिता सिंह की पोस्ट पर लिखा था हमारे पास हाइड्रोजन बम है, हम बनाना जानते हैं। नेताओं को हम खुद ही मारेंगे। इस कमेंट में जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके पति, पूर्व मंत्री राहुल सिंह लोधी को जान से मारने की सीधी धमकी दी गई थी। साक्ष्य मिटाने के लिए तोड़ा मोबाइल पुलिस पूछताछ में आरोपित अर्जुन चढ़ार ने बताया कि घटना वाले दिन उसने अत्यधिक शराब का सेवन कर रखा था। नशे की हालत में वीडियो देखते समय अचानक जिपं अध्यक्ष की आइडी सामने आने पर उसने बोलकर यह कमेंट कर दिया था। मामला तूल पकड़ते ही घबरा गया और उसने साक्ष्य मिटाने के लिए अपना आठ साल पुराना मोबाइल तोड़कर फेंक दिया। सिम निकालकर दूसरे मोबाइल में भी डाली, लेकिन साइबर सेल ने आइएमइआइ नंबर और तकनीकी विश्लेषण के जरिए उसे खरगापुर से दबोच लिया।  

वोकल फॉर लोकल का स्वप्न हो रहा है साकार

भोपाल मध्यप्रदेश की अनेक शिल्प कलाओं और कृषि, उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर "जीआई टैग" प्राप्त होना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के स्वप्न को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के उन्नत किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, शिल्पकारों और उन्हें प्रोत्साहित करने वाले विभागों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। इन्हें मिल चुका है जीआई टैग बैतूल जिले की पारंपरिक शिल्प कला भरेवा कला को यह राष्ट्रीय पहचान मिली है। क्राफ्ट विलेज टिगरिया की भरेवा व कला को जीआई टैग मिला है। राष्ट्रपतिमती द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में (दिसंबर 2025 में) भरेवा शिल्प के कलाकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से भी सम्मानित किया। बैतूल के अलावा छतरपुर जिले के खजुराहो के स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर जिले के ही पारंपरिक काष्ठ शिल्प, ग्वालियर के पत्थर शिल्प, ग्वालियर की पेपर मैश कला जीआई टैग प्राप्त करने में सफल रही है। प्रदेश के अन्य जीआई टैग उत्पाद इस प्रकार हैं: चंदेरी साड़ी, महेश्वरी साड़ी और फैब्रिक, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के लेदर के खिलौने, दतिया और टीकमगढ़ के बेल मेटल वेयर, उज्जैन का बटीक प्रिंट, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग, वारासिवनी की हैंडलूम साड़ी, ग्वालियर की ज्यामितीय पैटर्न की कालीन, पन्ना का हीरा, डिंडोरी का लोहा शिल्प, बालाघाट का चिन्नौर चावल, रीवा का सुंदरजा आम, सीहोर और विदिशा का शरबती गेहूं, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त रूप से महोबा देशावरी पान, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र का नागपुरी संतरा, झाबुआ जिले का कड़कनाथ मुर्गा, रतलाम का सेव, मुरैना की गजक, बुंदेलखंड क्षेत्र का कठिया गेहूं और जावरा का लहसुन शामिल है। मध्यप्रदेश के अन्य अनेक उत्पाद भी जीआई टैग प्राप्त होने की श्रृंखला में शीघ्र शामिल होंगे। इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा आवश्यक प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2024 और 2025 में विशेष उपलब्धि मध्यप्रदेश में वर्ष 2024 में बुंदेलखंड के कठिया गेहूं और रतलाम जिले के जावरा के लहसुन को जीआई टैग प्राप्त हुआ। इसी तरह वर्ष 2025 में प्रदेश के पांच उत्पाद को जीआई टैग मिला। इनमें छतरपुर जिले के खजुराहो का स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर का ही पारंपरिक फर्नीचर, बैतूल का भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर का पत्थर शिल्प और ग्वालियर का ही पेपर मैश क्राफ्ट शामिल है। जीआई टैग प्रदान करने का कार्य उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है। पंजीकरण की प्रक्रिया के बाद जीआई टैग की वैधता 10 वर्ष के लिए होती है, जिसे नवीनीकरण का लाभ भी मिलता है। जीआई टैग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री अर्थात (ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री) केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। किसी उत्पाद की प्रामाणिकता की दृष्टि से जीआई टैग मिलना बहुत महत्व रखता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में दार्जिलिंग की चाय को भारत के प्रथम जीआई टैग प्राप्त होने का गौरव मिला था।  

हर क्षेत्र में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के किए जा रहे हैं समेकित प्रयास

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वस्थ प्रदेश ही समृद्ध प्रदेश की आधारशिला है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के व्यापक विस्तार, गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाओं की उपलब्धता और चिकित्सा शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सुनियोजित प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह शहरी क्षेत्र में निवास करता हो या दूरस्थ ग्रामीण अंचल में, उसे समयबद्ध और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 23 हजार 747 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। राज्य सरकार का संकल्प है कि स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सुदृढ़ अधोसंरचना के माध्यम से नए आयाम दिए जाएँ। प्रदेश को सशक्त, स्वस्थ और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में तेजी से अग्रसर करने लिए सतत और सशक्त प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 4,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, रोग नियंत्रण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना एवं संचालन के लिए 1,934 करोड़ रुपये तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए 782 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। सामुदायिक, उप एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण के लिए 580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बेहतर होगी। आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन के लिये 550 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के लिए 750 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। अस्पतालों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों का विस्तार प्रदेश में विगत दो वर्षों में पाँच नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। एमबीबीएस सीटों की संख्या 2,275 से बढ़कर 2,850 तथा स्नातकोत्तर सीटें 1,262 से बढ़कर 1,468 हो गई हैं। इंदौर, रीवा एवं सतना के चिकित्सा महाविद्यालयों के उन्नयन के साथ ही भोपाल, इंदौर, रीवा, जबलपुर, सागर एवं ग्वालियर में उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ विकसित की गई हैं। पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए धार, बैतूल, पन्ना और कटनी में एलओए जारी किया जा चुका है। अन्य 9 जिलों में प्रक्रिया प्रगतिरत है। चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालयों के लिए 3,056 करोड़ रुपये और जिला एवं सिविल अस्पतालों के लिए 2,049 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अस्पतालों एवं औषधालयों के भवन निर्माण के लिये 527 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण (राज्य सहायित) के लिए 580 करोड़ रुपये तथा चिकित्सा महाविद्यालयों में उन्नयन कार्यों के लिए 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही नवीन नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये एवं पी.जी. पाठ्यक्रमों के सुदृढ़ीकरण हेतु 79 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। आयुष्मान योजना क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश शीर्ष पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत प्रदेश में 4 करोड़ 46 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए आयुष्मान वय वंदना योजना के अंतर्गत 15 लाख 48 हजार कार्ड बनाकर मध्यप्रदेश शीर्ष पर है। इस योजना से 1,118 शासकीय एवं 720 निजी चिकित्सालय संबद्ध हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में आयुष्मान भारत योजना के लिए 2,139 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त नॉन-एसईसीसी हितग्राहियों के लिए 863 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। विशेष कार्यक्रम एवं अधोसंरचना मिशन बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 408 करोड़ रुपये तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत 401 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अंतर्गत सुपरस्पेशलिटी अस्पताल स्थापना के लिए 148 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश में डिजिटल स्वास्थ्य पहल को भी निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में 55 जिला चिकित्सालय, 158 सिविल चिकित्सालय, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1,442 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 10,256 उप स्वास्थ्य केन्द्रों में कुल 48 हजार बिस्तर उपलब्ध हैं। मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में नए जिला चिकित्सालयों की स्थापना की कार्यवाही प्रचलन में है। उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में निवासरत गर्भवती महिलाओं के लिए 228 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं, जो मातृ मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। चिकित्सा शिक्षा एवं मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण प्रदेश में 3,850 चिकित्सक पदों एवं 1,256 नर्सिंग अधिकारी पदों पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। परिचारिकाओं के प्रशिक्षण के लिए 67 करोड़ रुपये तथा एएनएम एवं हेल्थ विजिटर्स को परिवार कल्याण प्रशिक्षण हेतु 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार भारतीय चिकित्सा पद्धति को भी बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में 8 नवीन आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। अधोसंरचना विस्तार, चिकित्सा शिक्षा सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन भर्ती और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सुलभ, किफायती और सर्वसमावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित कर आत्मनिर्भर, सशक्त एवं स्वस्थ मध्यप्रदेश का निर्माण करना है।

मालवा-निमाड़ बना सियासी केंद्र, आदिवासियों के बीच आधार मजबूत करने में जुटी भाजपा

भोपाल आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में कैबिनेट की बैठक कर भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि वह आदिवासियों में पार्टी के आधार को और मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने मालवा- निमाड़ से इसकी शुरुआत कर यह भी बता दिया है कि इसके केंद्र में मालवा- निमाड़ अंचल रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट को मंत्रालय के बंद कमरों से निकालकर सीधे आदिवासी अंचल और खेतों के बीच ले जाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ग्रामीण और किसान मतदाता हैं। बैठक के अलावा आदिवासियों की आस्था के केंद्र भीलट देव मंदिर में कैबिनेट के सदस्यों द्वारा माथा टेकना इस समुदाय को भावनात्मक रूप से पार्टी से जोड़ने का प्रयास भी रहा। बता दें, आदिवासी मतदाताओं के झुकाव से ही मध्य प्रदेश में सरकार बनती है। इन दिनों नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी आदिवासियों को साधने के लिए निरंतर प्रवास कर रहे हैं। मालवा-निमाड़ अंचल में कांग्रेस के 12, भाजपा के आठ और एक सीट पर भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) का विधायक है। इस संख्या को देखते हुए भी भाजपा को यहां विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। मिशन-2028 की तैयारी  भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव यानी मिशन 2028 की तैयारी नागलवाड़ी में कैबिनेट कर आरंभ कर दी है। उसका पहला लक्ष्य आदिवासी वर्ग का भरोसा जीतना है। दरअसल, वर्ष 2013 तक भाजपा के पास प्रदेश की कुल 47 एसटी आरक्षित सीटों में से दो- तिहाई सीटें हुआ करती थी लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का जनाधार खिसक गया था। खासतौर से आदिवासी वर्ग ने भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इस कारण प्रदेश में कमल नाथ सरकार बन गई थी। वर्ष 2018 में राज्य की 47 एसटी आरक्षित सीटों में से भाजपा केवल 16 सीटें जीत पाई थी, जबकि कांग्रेस ने 30 सीटों पर कब्जा किया था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव की तुलना में यह भाजपा के लिए 15 सीटों का बड़ा नुकसान था। हालांकि भाजपा को कुल वोट शेयर (41.6%) कांग्रेस (41.5%) से थोड़ा अधिक मिला था, लेकिन आदिवासी अंचल में सीटों के नुकसान ने उसे बहुमत से दूर कर दिया। वर्ष 2018 के झटके के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदली, जिसके परिणाम 2023 के चुनावों में दिखे। पार्टी ने एसटी सीटों पर अपनी संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर ली। यही कारण है कि नागलवाड़ी जैसी बैठकें केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरी सुधारात्मक रणनीति का हिस्सा हैं। 'प्रयोगधर्मी' नेता की पहचान बना रहे डॉ. मोहन यादव नागलवाड़ी में आयोजित बैठक को 'कृषि कैबिनेट' नाम भी दिया गया। इससे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राजनीतिक छवि में सुधार और मजबूती आने की पूरी संभावना है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। कैबिनेट को सुदूर गांव तक ले जाना डॉ. मोहन यादव को एक इनोवेटिव और 'आउट ऑफ द बॉक्स' सोचने वाले मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करता है। यह छवि उन्हें पिछली सरकारों के पारंपरिक ढर्रे से अलग करती है। मुख्यमंत्री का आदिवासी अंचल में जाकर उन्हीं के बीच बैठना और भीलट देव जैसे स्थानीय लोक-देवताओं को सम्मान देना, उन्हें आदिवासियों के बीच 'अपना व्यक्ति' के रूप में प्रस्तुत करता है। यह छवि 2018 के 'आदिवासी विरोधी यानी एंटी-ट्राइबल' नैरेटिव को काटने में मददगार होगी। एक ही बैठक में 27,746 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रस्तावों को मंजूरी देना उन्हें एक अच्छा प्रशासक के रूप में प्रस्तुत करता है। इससे यह संदेश जाता है कि वह केवल घोषणाएं नहीं करते, बल्कि बजट का प्रविधान भी साथ रखते हैं। भाजपा की मौजूदा सक्रियता बताती है कि वह 21 प्रतिशत आदिवासी आबादी के महत्व को समझ चुकी है और इसे लेकर वर्ष 2028 में किसी भी प्रकार की जोखिम नहीं लेना चाहती।  

मोहन सरकार की आदिवासी वोटरों पर नजर, बड़वानी बैठक से निकाय चुनाव की रणनीति का इशारा

भोपाल  सोमवार को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में हुई प्रदेश की पहली किसान कैबिनेट बैठक को मोहन सरकार का आदिवासी वोटर पर सीधा फोकस माना जा रहा है। 2027 के निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल जिले बड़वानी के नागलवाड़ी में पहली किसान कैबिनेट आयोजित की। यह बैठक भीलट देव मंदिर परिसर में टेंट-तंबू में हुई और मंत्रिमंडल ने आदिवासी संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया में भी सहभागिता की। इसने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम किसानों के साथ-साथ आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। आदिवासी वर्ग पर परंपरागत रूप से कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछले एक दशक में भाजपा ने इस वर्ग में अपना आधार बढ़ाया है।  47 विस सीटें एसटी के लिए आरक्षित प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि रतलाम जिले की सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी को सफलता मिली। मालवा–निमाड़ अंचल में आदिवासी वर्ग की 22 सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने 11, भाजपा ने 10 और एक भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की। यह क्षेत्र आदिवासी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।  22% आबादी, 84 सीटों पर असर प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। 47 सीटें आरक्षित होने के बावजूद यह वर्ग करीब 80 से अधिक सीटों पर जीत-हार तय करने की स्थिति में माना जाता है।  2023 में कांग्रेस ने दिखाई मजबूती  2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 30 आदिवासी सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया था, जबकि भाजपा 16 सीटों तक सीमित रह गई थी। मालवा–निमाड़ में भी भाजपा को 22 सीटों में से केवल 6 सीटें मिली थीं। वहीं, 2023 में भाजपा ने वापसी करते हुए 24 सीटें जीतींं। हालांकि, इस चुनाव में कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई, इसके बावजूद  उसने आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 22 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, मालवा निमाड़ में दोनों ही पार्टियों ने आधी आधी सीटों पर जीत दर्ज की।  आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित प्रदेश की सीटों का गणित  – 2013 में आरक्षित 47 सीटों में से 31 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता। वहीं, मालवा निमाण की 22 सीटों में से 15 भाजपा, 6 कांग्रेस और 1 सीट निर्दलीय को मिली।  – 2018 में आरक्षित 47 सीटों में से 16 सीटों पर भाजपा सिमट गई। वहीं, कांग्रेस ने 30 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। वहीं, मालवा-निर्माण की 22 सीटों में से 6 भाजपा, 15 कांग्रेस और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।  – 2023 में आरक्षित 47 सीटों में से 24 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट पर निर्दलीय के खाते में आई। वहीं, मालवा- निर्माण की 22 सीटों में से 11 पर कांग्रेस, 10 पर भाजपा और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की।  2027 में सेमीफाइनल और 2028 में फाइनल बता दें, अगले दो साल मोहन सरकार के लिए अग्नि परीक्षा के हैं, इसलिए अब उसे तमाम वो काम करके दिखाना होंगे, जिनका वादा भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किया है। इनमें सबसे बड़ा वादा लाडली बहना योजना में शामिल बहनों को हर माह 3000 रुपये देने का है। अभी इसकी आधी राशि दी जा रही है। अगले तीन साल में इसे दोगुना करना है। यदि भाजपा यह करने में सफल रही तो 2027 के निकाय चुनाव और इसके बाद 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उसकी सत्ता में वापसी की राह कोई नहीं रोक सकेगा।  आदिवासी किसानों को आखिर क्या मिला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि दो दशक से सत्ता में काबिज भाजपा सरकार ने 'कृषक कल्याण वर्ष 2026' के अंतर्गत भोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में पहली "कृषि कैबिनेट" की बैठक आयोजित की। दावा किया गया था कि इससे किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई योजनाए लाई जाएंगी, ताकि आय दोगुनी हो सके। लेकिन बड़वानी और निमाड़ क्षेत्र के किसानों को आखिर क्या मिला?   

भोपाल प्रशासन अलर्ट: होली पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 108 एंबुलेंस रहेगी ऑन स्टैंडबाय

भोपाल होली और रंगपंचमी के उल्लास के बीच किसी भी अप्रिय स्थिति या चिकित्सीय आपातकाल से निपटने के लिए राजधानी का स्वास्थ्य अमला पूरी तरह अलर्ट हो गया है। शहर के प्रमुख अस्पतालों के साथ-साथ हर थाना क्षेत्र और भीड़भाड़ वाले इलाकों में 108 एंबुलेंस की विशेष तैनाती की गई है। सीएमएचओ ने सभी अस्पतालों को आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के निर्देश जारी किए हैं। थाना क्षेत्रों और प्रमुख केंद्रों पर एंबुलेंस की तैनाती 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि एम्स, हमीदिया, जेपी अस्पताल, काटजू अस्पताल और बैरागढ़ जैसे प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ शहर के सभी 22 थाना क्षेत्रों में एंबुलेंस तैनात रहेगी। ये वाहन जीवन रक्षक उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ (ईएमटी) से सुसज्जित होंगे, ताकि सड़क दुर्घटना, आगजनी या विवाद की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। 104 हेल्पलाइन से घर बैठे लें डॉक्टरी सलाह त्योहार के दौरान यदि किसी को सामान्य स्वास्थ्य समस्या होती है, तो उसे अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है। प्रदेश सरकार की 104 हेल्थ हेल्पलाइन सुबह आठ से रात आठ बजे तक सक्रिय रहेगी। इसके माध्यम से अनुभवी डॉक्टरों से मुफ्त परामर्श, मानसिक तनाव की स्थिति में काउंसलिंग और नजदीकी ब्लड बैंक या अस्पताल की जानकारी ली जा सकती है। सेहतमंद होली के लिए विशेषज्ञों की सलाह सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि शहरवासी केमिकल युक्त रंगों से बचें। रंगों में लेड ऑक्साइड और कॉपर सल्फेट जैसे तत्व होते हैं, जो आंखों और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंग खेलने से पहले शरीर पर तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं और पूरी बांह के कपड़े पहनें। शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहें। आंखों में धुंधलापन, खुजली या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यहाँ उपलब्ध रहेगी तुरंत सहायता प्रमुख केंद्र – एम्स भोपाल, जेपी अस्पताल, हमीदिया, आनंद नगर, कोलार, बैरागढ़। थाना क्षेत्र – एमपी नगर, हबीबगंज, टीटी नगर, अशोका गार्डन, निशातपुरा सहित जिले के सभी ग्रामीण व शहरी थाना क्षेत्र। आपातकालीन नंबर – 108 (एंबुलेंस), 104 (स्वास्थ्य परामर्श)।

त्वरित कार्रवाई से बचीं दो घायलों की ज़िंदगियाँ, सड़क दुर्घटना में गंभीर घायलों को समय पर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  मऊगंज जिले के थाना मऊगंज क्षेत्र में डायल-112 जवानों की त्वरित, सजग एवं संवेदनशील कार्यवाही से सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए एक पुरुष एवं एक महिला को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। संकट की इस घड़ी में डायल-112 टीम ने जिस तत्परता और जिम्मेदारी का परिचय दिया, वह सेवा एवं कर्तव्यनिष्ठा की सराहनीय मिसाल है। 02 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम, डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना मऊगंज क्षेत्र अंतर्गत मऊगंज बाईपास के पास एक मोटर साइकिल को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी है, जिससे मोटर साइकिल सवार पुरुष एवं एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थाना मऊगंज में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री रजनीश यादव एवं पायलट श्री प्रवेश चतुर्वेदी शीघ्र घटनास्थल पर पहुँचे और स्थिति का त्वरित आकलन करते हुए राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया। दुर्घटना में मोटर साइकिल सवार पुरुष एवं साथ में बैठी महिला घायल अवस्था में पाए गए। डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाए दोनों घायलों को एफआरव्ही वाहन की सहायता से सुरक्षित रूप से सिविल चिकित्सालय मऊगंज पहुँचाया, जहाँ उनका तत्काल उपचार प्रारंभ कराया गया। डायल-112 की इस त्वरित, संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही के कारण घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सकी, जिससे संभावित गंभीर परिणामों को टाला जा सका। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना सिद्ध करती है कि मध्यप्रदेश पुलिस हर आपात स्थिति में आमजन की सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए सदैव तत्पर, सजग और समर्पित है।  

विगत तीन सप्ताह में विभिन्न जिलों से 3 करोड़ 73 लाख से अधिक के 1835 गुम/चोरी हुए मोबाइल बरामद

भोपाल रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर आमजन की खुशियों को सुरक्षित एवं सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन की शीघ्र बरामदगी हेतु विशेष प्राथमिकता के साथ प्रभावी कार्यवाही की गई है। आमजन की संपत्ति की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा आधुनिक तकनीकी संसाधनों, सायबर विश्लेषण, CEIR एवं NCRP पोर्टल के समन्वित उपयोग तथा थाना स्तर पर गठित विशेष टीमों के माध्यम से उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए गए हैं। विगत तीन सप्ताह में विभिन्न जिलों में कुल 1835 गुम/चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वैध स्वामियों को सुपुर्द किए गए हैं, जिनकी अनुमानित कुल कीमत 3 करोड़ रुपए से अधिक है। कई जिलों में स्थानीय स्तर पर विशेष अभियान संचालित कर होली के अवसर पर मोबाइल वितरण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे नागरिकों के चेहरे पर मुस्कान लौटी और पुलिस के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ। प्रमुख कार्यवाहियां ग्‍वा‍लियर होली के पावन पर्व पर आमजन को विशेष उपहार स्वरूप ग्वालियर पुलिस द्वारा गुम हुए मोबाइलों की बड़ी रिकवरी कर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की गई है। सायबर सेल ने CEIR पोर्टल के माध्यम से विभिन्न कंपनियों के कुल 551 गुम मोबाइल फोन देश के अलग-अलग राज्यों एवं शहरों से ट्रेस कर बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 33 लाख रुपए है। बरामद मोबाइलों में दृष्टिबाधित कर्मचारी, चिकित्सक, मजदूर दंपत्ति, फूलमाला विक्रेता, किस्तों पर मोबाइल लेने वाली श्रमिक महिला, सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा छात्र के मोबाइल शामिल थे, जिनके लिए यह उपकरण उनके जीवनयापन, शिक्षा अथवा दैनिक कार्य का प्रमुख साधन था। छतरपुर सायबर सेल एवं विभिन्न थानों की संयुक्त टीमों ने “ऑपरेशन विश्वास” के अंतर्गत 90 गुम मोबाइल फोन को ट्रेस कर उनके वास्तविक मालिकों को वापस किए। इन मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत लगभग 14 लाख रुपए है। एक अन्य कार्यवाही में पुलिस ने 110 गुम मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 15 लाख रुपए है। ये सभी मोबाइल केवल जिले से ही नहीं, बल्कि आंध्रप्रदेश, दिल्ली, महोबा, झांसी (उ.प्र.), सागर, पन्ना एवं निवाड़ी सहित विभिन्न स्थानों से तकनीकी ट्रैकिंग के माध्यम से प्राप्त किए गए। उज्जैन उज्जैन पुलिस ने CEIR पोर्टल एवं साइबर सेल की सहायता से दो अलग-अलग कार्यवाहियों में 409 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाए है।लौटाये गये मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत 73 लाख 50 हजार रुपए है। सिंगरौली सिंगरौली में “संचार साथी (CEIR) पोर्टल” के माध्यम से सायबर सेल एवं थाना/चौकी टीमों द्वारा तकनीकी कार्यवाही कर 172 गुम मोबाइल फोन बरामद किए है, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 42 लाख रुपए है। बरामद मोबाइल मध्यप्रदेश के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, दिल्ली, गुजरात एवं महाराष्ट्र जैसे विभिन्न राज्यों से ट्रैक किए गए है। मंडला पुलिस द्वारा सायबर डेस्क की सक्रियता एवं CEIR/NCRP पोर्टल के प्रभावी उपयोग से कुल 253 गुम मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 38 लाख रुपए है। पुलिस द्वारा मोबाइल वितरण की विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागू की गई, जिसके अंतर्गत जिला मुख्यालय के अतिरिक्त थाना स्तर पर भी सुपुर्दगी सुनिश्चित की गई। विशेष रूप से कान्हा नेशनल पार्क से लगे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में माइक्रोबीट अधिकारियों द्वारा हितग्राहियों के घर पहुंचकर मोबाइल सुपुर्द किए गए, जिससे नागरिकों को आवागमन की असुविधा से राहत मिली। इस मानवीय पहल ने पुलिस-जन संवाद को और सशक्त किया। कटनी कटनी के थाना कोतवाली पुलिस ने सब्जी मंडी स्थित एक मोबाइल स्टोर में हुई चोरी की घटना का त्वरित खुलासा किया। प्रकरण में सक्रिय अंतर्राज्यीय गिरोह के 03 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 20 मोबाइल फोन (अनुमानित कीमत लगभग 3 लाख 50 हजार रुपए) बरामद किए गए । गुना गुना पुलिस द्वारा गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन की खोज हेतु विशेष अभियान संचालित किया गया है। तकनीकी टीम एवं CEIR पोर्टल के माध्यम से कुल 213 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 50 लाख रुपए से अधिक है। बरामद मोबाइल उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द किए गए है। जबलपुर (जीआरपी) जबलपुर जीआरपी इकाई के थाना गाडरवारा पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 06 चोरी के मोबाइल फोन (अनुमानित कीमत लगभग 1 लाख 50 हजार रुपए) जप्त किए है। रतलाम जावरा थाना औद्योगिक क्षेत्र पुलिस द्वारा 11 गुम मोबाइल फोन (अनुमानित कीमत लगभग 2 लाख 50 हजार रुपए) बरामद किए गए। जनविश्वास सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर प्रयास प्रदेश के विभिन्न जिलों में की गई इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस आधुनिक तकनीकी संसाधनों एवं संवेदनशील पुलिसिंग के माध्यम से आमजन की संपत्ति की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। गुम एवं चोरी हुए मोबाइलों की निरंतर रिकवरी से नागरिकों में होली पर्व की खुशियों को दोगुना करने के साथ-साथ पुलिस के प्रति सुरक्षा एवं विश्वास की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।

एमपी सरकार का फैसला: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आधारित फिल्म ‘शतक’ हुई टैक्स फ्री

भोपाल आरएसएस पर बनी फिल्म 'शतक' को मध्य प्रदेश में टैक्स फ्री कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा करते हुए अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इसकी जानकारी दी है। सीएम मोहन ने लिखा कि, हिंदी फिल्‍म 'शतक' को सम्पूर्ण मध्य प्रदेश में टैक्स फ्री किया है। ये फिल्म राष्ट्रसेवा और संस्कारों की उस परंपरा को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दशकों से जीवित रखा है। फिल्म 'शतक' संदेश देती है कि संगठित विचार, चरित्र और सेवा भाव से ही एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव है। फिल्म 20 फरवरी 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई है, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (2155) के 100 साल की यात्रा दिखाई है। फिल्‍म की शुरुआत 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (डॉक्टरजी) द्वारा संघ की स्थापना से होती है। इसमें दिखाया है कि, कैसे एक छोटे से समूह से शुरू हुआ ये संगठन आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है।   -प्रमुख व्यक्तित्व फिल्म में संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार और उनके उत्तराधिकारी गुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) के जीवन और उनके संघर्षों को प्रमुखता से दिखाया है। फिल्म में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में संघ के योगदान, विभाजन के समय की स्थिति, दादरा और नगर हवेली की मुक्ति, कश्मीर का मुद्दा और 1975 के आपातकाल के दौरान संगठन के संघर्षों का चित्रण किया गया है। -AI से बनाए गए ग्राफिक्स इस फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि, इसमें 1 (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और उन्नत ग्राफिक्स का इस्तेमाल कर वीर सावरकर, महात्मा गांधी, सरदार पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को पर्दे पर जीवंत किया गया है। फिल्म की कहानी को बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने अपनी आवाज़ दी है।