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स्वास्थ्य सुरक्षा का बड़ा ऐलान: MP के कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस इलाज, सीमा 35 लाख

भोपाल राजस्थान और हरियाणा की तरह प्रदेश सरकार अपने 10 लाख से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों और पेंशनरों के उपचार के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना लाने जा रही है। राज्य के बजट में इसकी घोषणा हो सकती है। योजना अंशदायी, कैशलेस होगी और इसमें गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अधिकतम 35 लाख रुपये तक की सुविधा रहेगी। कर्मचारी का स्वयं, पति-पत्नी, आश्रित बच्चों का फोटोयुक्त कार्ड बनेगा। पेंशनर भी योजना के दायरे में आएंगे। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इसका खाका खींच लिया है। कर्मचारी संगठनों से सुझाव भी ले लिए गए हैं। अब इसे वित्त विभाग की अनुमति से कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी करेगी संचालनविभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना का संचालन राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा किया जाएगा। इसमें कानूनी, बीमा क्षेत्र और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ रहेंगे। तकनीकी टीम भी रहेगी जो क्लेम प्रोसेसिंग, हेल्थ पैकेज, अस्पतालों की संबद्धता आदि काम देखेगी। टास्क फोर्स का गठन भी किया जाएगा, जो योजना की समीक्षा और नीतिगत निर्णय से जुड़े मामले देखेगी।   योजना की पात्रताकर्मचारी पति-पत्नी, माता-पिता, आश्रित दो बच्चे, दत्तक बच्चे, तलाकशुदा पुत्री और पति-पत्नी पेंशनर पति-पत्नी। पात्र हितग्राही का पंजीयन एमपीएसइडीसी के माध्यम से होगा। यूनिक आइडी डिजिटल कार्ड बनाए जाएंगे। आश्रितों की जानकारी का अनुमोदन कार्यालय प्रमुख करेंगे। हितग्राही को प्रत्येक वर्ष आश्रितों की जानकारी का सत्यापन कराना अनिवार्य रहेगा। पेंशनर का पंजीयन पेंशनर कोड के आधार पर होगा। कार्ड में पेशनर के पे बैंड और विभाग का उल्लेख भी रहेगा। दवा-उपकरण के लिए बीस हजार रुपये प्रतिवर्षबीमित कर्मचारी को ओपीडी, दवा और उपकरण के लिए बीस हजार रुपये प्रतिवर्ष मिलेंगे। उपकरण और इंप्लांट का व्यय सीजीएचएस पैकेज दरों के अनुसार होगा। आपातकालीन स्थितियों में असंबद्ध अस्पतालों लिए प्रतिपूर्ति आपातकालीन परिस्थितियों में असंबद्ध अस्पतालों में भी उपचार कराया जा सकेगा। इसमें होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति की जाएगी। योजना में राज्य के सभी आयुष्मान योजना से संबद्ध अस्पताल, भारत सरकार की स्वास्थ्य योजना से जुड़े अस्पताल, राज्य के बाहर के चिन्हित उच्च गुणवत्ता वाले अस्पताल शामिल होंगे। प्रस्तावित अंशदान कर्मचारी के लिए श्रेणी-मासिक अंशदान वेतन बैंड एक से पांच- 250 रुपये वेतन बैंड छह- 450 रुपयेवेतन बैंड सात से 11- 650 रुपये वेतन बैंड 12 से 17- 1,000 रुपये पेंशनर के लिए- 500 रुपये प्रतिमाह

रनवे बना खतरे की वजह: भोपाल एयरपोर्ट पर 2 माह में 12 किलो रबर जमा, विमान सुरक्षा पर सवाल

भोपाल क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों फीट की ऊंचाई से जब कोई विशालकाय विमान जमीन को छूता है, तो असल में रनवे पर क्या होता है? हम अक्सर सुरक्षित लैंडिंग पर तालियां बजाते हैं, लेकिन उस सुरक्षित लैंडिंग के पीछे एयरपोर्ट के रनवे पर एक 'काली परत' की कहानी छिपी है, जिसे अगर समय रहते न हटाया जाए, तो यह किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर इन दिनों रातों के सन्नाटे में एक विशेष अभियान चल रहा है। यह अभियान है रनवे की 'घिसाई और सफाई' का। दरअसल, विमानों की लैंडिंग के दौरान टायरों और रनवे के बीच जो घर्षण (रगड़) होता है, उससे वहां रबर जमा होने लगता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि हर दो महीने में यह जमा हुआ रबर करीब १० से १२ किलो तक हो जाता है।   क्यों जमा होता है इतना रबर? एविएशन जानकार कहते हैं कि जब कोई विमान लैंड करता है, तो उस वक्त उसकी रफ़्तार २३० से २६० किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। इतने भारी-भरकम विमान का वजन और इतनी तेज गति जब जमीन से टकराती है, तो टायरों का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाता है। गर्मी इतनी ज्यादा होती है कि टायरों की सतह का कुछ हिस्सा पिघलकर रनवे पर ही चिपक जाता है। धीरे-धीरे यह रबर परत-दर-परत जमा होता रहता है। फिसलने का डर और बारिश का खतरा एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, रनवे पर जमा यह रबर सामान्य दिनों में तो खतरनाक है ही, लेकिन बारिश के मौसम में यह 'मौत का जाल' बन सकता है। जब रबर पर पानी पड़ता है, तो वहां फिसलन बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में विमान के स्किड होने (फिसलने) और ब्रेक लगाने पर भी न रुकने का खतरा पैदा हो जाता है। ब्रेकिंग दूरी बढ़ जाने से विमान रनवे से बाहर भी जा सकता है। रात के अंधेरे में हाई-प्रेशर तकनीक का कमाल चूंकि दिन में उड़ानों का आना-जाना लगा रहता है, इसलिए रबर हटाने का यह बेहद तकनीकी काम रात में किया जाता है। इसके लिए 'हाई प्रेशर वाटर जेट' तकनीक का इस्तेमाल होता है। आसान शब्दों में कहें तो पानी की इतनी तेज बौछार मारी जाती है कि रनवे की सतह को नुकसान पहुंचाए बिना, उस पर चिपका हुआ जिद्दी रबर उखड़ जाए। यह काम विशेष मशीनों और सफाई कर्मियों द्वारा पूरी सावधानी से किया जाता है। 75% घर्षण है जरूरी राजा भोज एयरपोर्ट के निदेशक रामजी अवस्थी के अनुसार, सुरक्षित लैंडिंग के लिए रनवे का घर्षण स्तर (फ्रिक्शन लेवल) कम से कम ०.७५ होना अनिवार्य है। यह वह मानक है जो तय करता है कि तेज रफ़्तार विमान सुरक्षित दूरी में रुक पाएगा या नहीं। यही कारण है कि डीजीसीए और एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया ने रनवे की नियमित जांच और सफाई को अनिवार्य कर रखा है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। अगली बार जब आप लैंडिंग करें, तो याद रखिएगा कि आपकी सुरक्षा के लिए रनवे की उस काली सड़क को भी नियमित रूप से'नहलाया-धुलाया' जाता है।

Republic Day Special: इन देशभक्ति कविताओं के साथ दें दमदार भाषण, पाएं तालियों की गूंज

भोपाल देश इस साल अपना 77वां गणतंत्र दिवस (77th Republic Day 2026) मनाने जा रहा है। 26 जनवरी का यह दिन न केवल एक राष्ट्रीय पर्व है, बल्कि यह हमारे संविधान की शक्ति और लोकतंत्र की महानता का उत्सव भी है। स्कूल, कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में इस गौरवशाली दिन के लिए तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। यदि आप भी इस अवसर पर मंच से अपनी बात रखना चाहते हैं, तो यहां एक प्रभावी और कविताओं से सुसज्जित भाषण का प्रारूप दिया गया है, जो श्रोताओं के दिलों में देशभक्ति का संचार कर देगा: गणतंत्र दिवस 2026: भाषण का प्रारूप नमस्कार, मैं……(नाम), आज राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के पावन मौके पर यहां पर उपस्थित सभी महानुभावों/ अतिथिगण/ टीचर एवं सभी भैया बहनों का अभिवादन करता हूं। जैसे कि हम सभी जानते हैं कि हम यहां पर देश के 76वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में यहां उपस्थित हुए हैं। आज ही के दिन 1950 में भारत ने अपने संविधान को अपनाया और एक संप्रभु गणराज्य के रूप में अस्तित्व में आया। इस वर्ष भारत गणतंत्र देश के रूप में 77वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। इन 77 वर्षों के अंदर ही हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक बनकर सामने आया है।   हमारे देश के संविधान को डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने तैयार किया था। डॉ. अंबेडकर के अलावा इस संविधान सभा में जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, पंडित गोविंद बल्लभ पंत, आचार्य जेबी कृपलानी, शरत चंद्र बोस, सच्चिदानंद सिन्हा थे। इस संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे थे। भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया था। इसके दो माह बाद 26 जनवरी 1950 को इसे देशभर में लागू कर दिया गया। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मैं एक कविता सुनाने वाला हूं देखो फिर से गणतंत्र दिवस आ गया, जो आते ही हमारे दिलो-दिमाग पर छा गया। यह है हमारे देश का राष्ट्रीय त्यौहार, इसलिए तो सब करते हैं इससे प्यार। इस अवसर का हमें रहता विशेष इंतजार, क्योंकि इस दिन मिला हमें गणतंत्र का उपहार। आओ लोगों तक गणतंत्र दिवस का संदेश पहुचाएं, लोगों को गणतंत्र का महत्व समझाएं। गणतंत्र द्वारा भारत में हुआ नया सवेरा, इसके पहले तक था देश में तानाशाही का अंधेरा। क्योंकि बिना गणतंत्र देश में आ जाती है तानाशाही, नहीं मिलता कोई अधिकार वादे होते हैं हवा-हवाई। तो आओ अब इसका और ना करें इंतजार, साथ मिलकर मनाये गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार।। हमारा संविधान दुनिया का सबसे बेहतरीन संविधान माना जाता है क्योंकि इसमें गरीब हो अमीर सभी के लिए स्वतंत्रता, समानता और न्याय का अधिकार देता है। संविधान में किसी भी प्रकार की ऊंच नीच को स्थान नहीं दिया गया है जो मजबूत राष्ट्र को मजबूती प्रदान करता है। यह दिन हमें हमारे अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाता है और सभी लोगों के प्रति समान व्यवहार करने का उचित पाठ पढ़ाता है।

रक्षा उत्पादन में एमपी की बड़ी भूमिका, भारतीय सेना को मिलेंगे 10 ‘अजेय’ टैंक

जबलपुर भारतीय सेना के मुख्य युद्धक दो टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य वीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में पूरा कर लिया गया है। अब इसे रोल-ऑन प्रक्रिया के लिए तैयार किया जा रहा है, जो सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी की जाएगी। इसके बाद टैंक को अंतिम परीक्षण के लिए हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी (चेन्नई) भेजा जाएगा। टेस्टिंग में सफलता मिलने पर वीएफजे को 10 टी-72 टैंकों (T-72 Tanks) की नई खेप मिलने की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी। 2023 के दौरान कार्य में हुई थी भारी कमी रक्षा कंपनी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने वाली वीएफजे में वर्ष 2023 के दौरान कार्य की भारी कमी हो गई थी। 1500 करोड़ रुपए तक उत्पादन क्षमता वाली फैक्ट्री के पास उस समय मात्र 500-600 करोड़ रुपए का कार्य शेष था। ऐसे में फैक्ट्री प्रबंधन भविष्य को ने देखते हुए टी-72 टैंक मेंटेनेंस, रिपेयरिंग एंड ओवरहालिंग (एमआरओ) परियोजना पर काम शुरू किया।   इस परियोजना के तहत कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए चेन्नई भेजा गया, जहां उन्होंने टी-72 टैंक की ओवरहालिंग की तकनीकी बारीकियां सीखी। अप्रैल 2025 में बीएफजे को दो टी-72 टैंक प्राप्त हुए थे थे, जिनकी मैकेनिकल ओवरहालिंग दिसंबर 2025 में पूरी कर ली गई है। दो चरणों में हो रहा ओवरहालिंग कार्य पहले चरण में टैंक के टरेट और हल की ओवरहालिंग की गई। टरेट टैंक का ऊपरी हिस्सा होता है, जिस पर गन माउंट रहती है और जो 360 डिग्री घूमने में सक्षम होती है। वहीं हल वह आधार होता है, जिस पर पूरा टैंक निर्भर रहता है। दूसरे चरण में टैंक के अंदरूनी और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की मरम्मत व बदलाव किया जाएगा।   टी-72 टैंक को सोवियत संघ में डिजाइन और निर्मित किया गया था। भारत ने 1970 के दशक में इसे आयात किया और बाद में हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी में इसका स्वदेशी निर्माण और उन्नयन शुरू हुआ। 'अजेय टैंक' के नाम से पहचाना जाने वाला टी-72 आज भी भारतीय सेना के टैंक बेड़े की रीढ़ है।   चेन्नई में होगा प्रशिक्षण- जनसंपर्क अधिकारी टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य पूरा हो चुका है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से निरीक्षण के बाद इसे टेस्टिंग के लिए चेन्नई भेजा जाएगा। इसके पश्चात भविष्य में 10 नए टैंकों की खेप मिलने की उम्मीद है, जिनमें मैकेनिकल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की ओवरहालिंग भी की जाएगी। -हर्ष भटनागर, जनसंपर्क अधिकारी, वीएफजे

मध्यप्रदेश में 12,000 आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी की आशंका, जानें कब तक फैसला

जबलपुर मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों (Outsourced Employees) की नौकरी पर 31 मार्च के बाद संकट के बादल मंडरा सकते हैं। वर्तमान में कार्यरत एजेंसियों की टेंडर अवधि इसी तिथि को समाप्त हो रही है, लेकिन अब तक नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इससे समय पर नई एजेंसी तय होने और कर्मचारियों को निरंतर काम मिलने की संभावना कमजोर नजर आ रही है। दस्तावेज अब तक तैयार नहीं सूत्रों के अनुसार ऊर्जा विभाग से टेंडर प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक दस्तावेज अब तक तैयार नहीं हो पाए है। इसी कारण वितरण कंपनियां नई निविदा प्रक्रिया प्रारंभ नहीं कर पा रही है। इस देरी का सीधा असर जिले के 12 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो विभिन्न कार्यों में वर्षों से सेवाएं दे रहे है। बताया जाता है कि विद्युत वितरण कंपनियां अलग-अलग कार्यों के लिए आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। यह पूरी प्रक्रिया टेंडर के जरिए होती है। हर वर्ष 31 मार्च को टेंडर अवधि समाप्त होती है। आमतौर पर एजेंसी बदलती है, लेकिन कर्मचारी उसी स्थान पर कार्यरत रहते हैं, केवल उनका नियोक्ता बदल जाता है।   जानकारों के मुताबिक नई निविदा प्रक्रिया सामान्यतः दो महीने पहले शुरू कर दी जाती है, क्योंकि टेंडर कई चरणों में पूरा होता है और इसमें पर्याप्त समय लगता है। हालांकि इस बार ऊर्जा विभाग द्वारा बीते करीब डेढ़ साल से एक नई संयुक्त टेंडर प्रणाली के दस्तावेज तैयार किए जा रहे है, जिसके तहत प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में एक साथ आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी निविदा निकाली जानी है। ऊर्जा विभाग के आदेश का इंतजार मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी फिलहाल ऊर्जा विभाग के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। विभागीय स्वीकृति मिलते ही टेंडर जारी किए जाने की विद्युद् ब्रह्मेति बात कही जा रही है। इस संबंध में मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के मानव संसाधन विभाग प्रमुख राजीव गुप्ता ने बताया कि ऊर्जा विभाग से आदेश प्राप्त होने के बाद ही नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

नर्मदा पर स्वास्थ्य सेवा की नई पहल: पानी पर तैरते अस्पताल बनेंगे, नदी एम्बुलेंस नेटवर्क होगा विस्तारित

भोपाल मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के घाटों पर फ्लोटिंग अस्पताल शुरू कर नदी एम्बुलेंस का विस्तार किया जाएगा। इससे घाट पर आने वाले तीर्थयात्रियों, परिक्रमावासियों, आगंतुकों और स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने में सुगमता होगी। राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल आलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों में नदी किनारे बसे लोगों को चिकित्सीय सुविधाएं देने के लिए नदी एम्बुलेंस शुरू की गई हैं, जो आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार व दवाएं उपलब्ध कराने में मददगार साबित होंगी।   आदिवासी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण कदम खासकर बाढ़ प्रभावित और दूरदराज के आदिवासी इलाकों के लिए यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा वेलनेस और योग टूरिज्म में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए घाटों पर योग, ध्यान केंद्र और पार्क निर्माण भी किए जाएंगे। नर्मदा के घाटों पर प्रतिदिन 2.5 लाख आते हैं श्रद्धालु नर्मदा नदी के 861 घाटों पर प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख से अधिक पर्यटक, श्रद्धालु, तीर्थयात्री आते हैं। 396 सूक्ष्म आकार के घाटों पर एक लाख आठ हजार से अधिक, 338 मध्यम आकार के घाटों पर 95 हजार और 116 वृहद आकार के घाटों पर 65 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। डॉक्टर, नर्स सहित मेडिकल सुविधाओं से लैस होगा फ्लोटिंग अस्पताल यानी पानी पर तैरता हुआ अस्पताल, जो दूरदराज के इलाकों और द्वीपों पर रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएगा। यह चिकित्सा सेवाओं को नदी से लगे सड़क विहीन गांवों तक ले जाने में सक्षम होगा। डॉक्टर, नर्सिंग टीम व मेडिकल सुविधाओं से लैस ये अस्पताल आपातकालीन स्थितियों में भी मददगार होंगे। इनमें जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध होंगी।

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पर्यटन क्षेत्र में निवेश पर केंद्रित सत्र को संबोधित करेंगे मुख्यमंत्री

भोपाल देश का हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में नए आत्मविश्वास, नई ऊर्जा और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना चुका है। प्रदेश, प्रकृति की अनुपम सुंदरता, समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, गहन आध्यात्मिक आस्था और विविध वन्य जीवों का अद्भुत संगम है। इन्हीं विशेषताओं और निवेश संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पर्यटन क्षेत्र में निवेश पर केंद्रित सत्र को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के दूरदर्शी दृष्टिकोण से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश ने पर्यटन को समावेशी और सतत विकास के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया है। इसके परिणामस्वरूप हाल के वर्षों में प्रदेश में 13.30 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया है, जो मध्यप्रदेश के प्रति बढ़ते राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है। आध्यात्मिक पर्यटन मध्यप्रदेश की प्रमुख पहचान के रूप में स्थापित हुआ है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 6.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हो चुका है। इसके साथ ही खजुराहो, सांची, ओरछा, महेश्वर, अमरकंटक और चित्रकूट जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण केंद्र बने हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा पर्यटन नीति-2025 एवं फिल्म पर्यटन नीति-2025 के माध्यम से निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन और सतत पर्यटन विकास को नई दिशा दी गई है। फिल्म पर्यटन नीति-2025 के अंतर्गत मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माण के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। ग्रामीण पर्यटन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के 81 गांवों में 370 से अधिक होमस्टे विकसित किए गए हैं, जिन्हें 1000 तक विस्तारित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष आय और रोजगार उपलब्ध करा रही है। पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा के अंतर्गत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सिंगरौली और खजुराहो को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है। साथ ही पीएमश्री पर्यटन हेली सेवा के माध्यम से पर्यटकों को तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। “बेस्ट टूरिज्म स्टेट ऑफ द ईयर” सहित 18 राष्ट्रीय पुरस्कार, यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में प्रदेश के 4 धरोहर स्थलों का शामिल होना और देश की 69 यूनेस्को धरोहरों में से 15 का मध्यप्रदेश में स्थित होना प्रदेश की वैश्विक पर्यटन क्षमता और प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करता है। मध्यप्रदेश आज पर्यटन, परंपरा और प्रगति के संगम के साथ वैश्विक निवेशकों और पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।  

दूषित पानी से प्रभावित इंदौर, जांच में जुटी राज्य समिति

भोपाल/इंदौर मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में दूषित जल पीने से हुई त्रासदी की जांच के लिए राज्य स्तरीय समिति बनाई गई है, जिसमें अध्यक्ष के अलावा तीन सदस्य होगें। आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि इंदौर नगर में प्रदूषित जल आपूर्ति के घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा कर निष्कर्ष, सुझाव एवं अनुशंसाएं प्रस्तुत करने के लिए राज्य शासन ने अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन संजय कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक समिति में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी. नरहरि, आयुक्त संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोडवे को सदस्य बनाया गया है। आयुक्त इंदौर संभाग, इंदौर सुदाम खाड़े को सदस्य-सचिव नामित किया गया है। राज्य स्तरीय यह समिति इंदौर के भागीरथपुरा में घटित घटना के वास्तविक कारणों एवं आवश्यक तथ्यों का परीक्षण करना एवं घटना से संबंधित प्रशासनिक, तकनीकी एवं प्रबंधनगत कमियों का विश्लेषण करेगी। समिति घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना, भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए आवश्यक सुझाव देना और अन्य मसलों को भी जांच में शामिल कर सकेगी। समिति संबंधित विभागों से आवश्यक अभिलेख, प्रतिवेदन एवं जानकारी प्राप्त कर सकेगी तथा आवश्यकता होने पर स्थल निरीक्षण भी करेगी। समिति द्वारा जांच प्रतिवेदन यथाशीघ्र किन्तु अधिकतम एक माह के भीतर राज्य शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। दरअसल पिछले दिनों इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल पीने से बड़ी तादाद में लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग बीमार हुए थे। इसके बाद सरकार ने कई अधिकारियों के तबादले किए और निलंबन भी किया। इस पर राजनीति भी खूब हो रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इंदौर का दौरा कर चुके हैं।

अब बिना नली के जांच: 2040 में पिल एंडोस्कोपी से हार्ट व फैटी लिवर मरीजों को राहत

इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल द्वारा राष्ट्रीय स्तर की इंदौर जीआई कान्क्लेव का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय आयोजन में देशभर के लिवर और एंडोस्कोपी विशेषज्ञों ने गैस्ट्रोएंट्रोलाजी में हो रहे आधुनिक शोध और इलाज की नई तकनीकों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने चर्चा की कि वर्ष 2040 तक आज की जटिल एंडोस्कोपी जांच एक साधारण पिल (कैप्सूल) से संभव हो जाएगी। यह कैप्सूल न सिर्फ पाचन तंत्र की जांच करेगा, बल्कि फैटी लिवर, हार्ट की बीमारी और लकवे जैसी गंभीर समस्याओं की पहचान और इलाज में भी मददगार होगा। इसके अलावा शराब के बढ़ते सेवन और उससे जुड़ी लिवर बीमारियों पर विशेष चिंता जताई गई।   विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर इलाज नहीं होने पर मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है। कान्क्लेव में पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित वरिष्ठ लिवर विशेषज्ञ शिव सरिन की पुस्तक ओन योर बाडी का विमोचन किया गया। साथ ही पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित एंडोस्कोपी विशेषज्ञ डी नागेश्वर रेड्डी का सम्मान किया गया। इंदौर के वरिष्ठ चिकित्सक सुनील जैन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। कांफ्रेंस के आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी अमित अग्रवाल ने बताया कि कांफ्रेंस के पहले दिन सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) पर आधारित 16 जटिल केस किए गए। इनमें गालब्लैडर कैंसर, पैंक्रियाज कैंसर, पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट में प्लास्टिक और मेटैलिक स्टेंट डालना, गैस्ट्रिक वैरिक्स में ग्लू और काइल से इलाज जैसे मामले शामिल रहे। लंबे समय से खून की उल्टी से पीड़ित मरीजों का ईयूएस के माध्यम से सफल उपचार भी किया गया। लाइव डेमो के जरिए ईयूएस एनाटामी को समझाया गया और बायोप्सी व स्टेंट डालने की प्रक्रिया बताई गई। इसके अलावा कांफ्रेंस में एल्कोहालिक लिवर डिजीज, मेटाबालिक एल्कोहालिक लिवर डिजीज (मेट-एएलडी), फैटी लिवर और एसाइटिस यानी पेट में पानी भरने की समस्या पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि अधिकांश लिवर रोग शराब, फैटी लिवर और गलत खानपान से होते हैं। इस दौरान नई दिल्ली के आदर्श चौधरी, अमित महदेव, मुंबई के अनिल अरोरा, हैदराबाद के प्रमोद गर्ग आदि को सम्मानित किया गया।

हिंदू धर्म से था लगाव, बालाघाट में जगद्गुरु शंकराचार्य के सान्निध्य में मोहसिन ने अपनाया सनातन

बालाघाट जात-पात में बंटे सकल सनातनी हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए हिंदू एकता परिचय देने के लिए बालाघाट जिला मुख्यालय के इतवारी कृषि उपज मंडी के प्रागंण में मंगलवार को विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन अनंत श्री धर्म सम्राट श्रीमद जगत स्वामी श्री प्रज्ञानानंद सरस्वती महाराज के मुख्य आतिथ्या में किया गया। आयोजित इस हिंदू सम्मेलन में जगत गुरु शंकराचार्य की मौजूदगी में बालाघाट के मोहसिन ने सनातन धर्म से प्रेरित होकर हिंदू धर्म को अपनाया है, उनके इस घर वापस पर जगत गुरु ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी जन सनातनी है, बस उनकी घर वापसी का इंतजार सभी को है। चार साल से इंतजार कर रहा था मोहसिन     सनातन धर्म अपनाने को लेकर पूर्व में वार्ड क्रमांक 19 आजाद चौक व वर्तमान में वार्ड क्रमांक 13 गर्रा निवासी ने बताया कि वे बचपन से ही हिंदू धर्म व विचार के प्रति आकर्षित रहे हैं।     हिंदू धर्म सभी को एक साथ मिलकर रहने का संदेश दिया जाता है, यहां गाय को माता मानकर पूजा जाता है।     इस कारण से वे सदैव से ही हिंदू धर्म के प्रति लालायित रहे है। उन्होंने बताया कि विगत चार वर्षाें से सनातन धर्म अपनाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन उचित मंच नहीं मिल पा रहा था।     जब पता चला कि हिंदू सम्मेलन हो रहा है, और जगत गुरु भी यहां मौजूद तो इससे बेहतर मौका उन्हें दूसरा ओर नहीं मिलना था।     बता दें कि मोहसिन शेख के घर पर उनकी मां और मौसी है उन्होंने वर्तमान में अकेले ही सनातन धर्म को अपनाया है। हिंदू सम्मेलन बनेगा घर वापसी का माध्यम हिंदू सम्मेलन के दौरान विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष यज्ञेश लालु चावड़ा ने कहा कि ये बड़े ही हर्ष का विषय है कि एक मुस्लिम भाई ने आज घर वापसी की है, और सनातन धर्म को अपनाया है, जो भी मुस्लिम भाई या अन्य जो भटक गए है और दूसरा धर्म अपना लिए है उनके लिए भी हिंदू सम्मेलन वापसी का माध्यम है, जो भी भाई घर वापस आना चाहते है वे बिना किसी झिझक के घर वापसी कर सकते है, आगामी समय में भी ऐसे हिंदू सम्मेलन पूरे देशभर में आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान जिला संयोजक शुभम श्रीवास सहित अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।