samacharsecretary.com

20 दिसम्बर को भोपाल में आयोजित होगी शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक

शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक भोपाल में 20 दिसम्बर को 20 दिसम्बर को भोपाल में आयोजित होगी शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक भोपाल में 20 दिसम्बर को शहरी विकास मंत्रियों की अहम क्षेत्रीय बैठक भोपाल शहरी विकास मंत्रियों उत्तरी एवं मध्य राज्यों की क्षेत्रीय बैठक केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MOHUA) के तत्वाधान में शनिवार  20 दिसंबर 2025 को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने जा रही है। बैठक का मुख्य उ‌द्देश्य प्रमुख शहरी विकास परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। यह मंच राज्यों को परियोजनावार प्रगति प्रस्तुत करने, कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को साझा करने, सर्वोत्तम परंपराओं के आदान-प्रदान तथा मंत्रालय से नीतिगत एवं रणनीतिक मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगा। इस क्षेत्रीय बैठक में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्रीश्री कैलाश विजयवर्गीय एवं अन्य चार राज्यों के छतीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश के शहरी विकास मंत्री एवं राज्यमंत्री, केन्द्र सरकार एवं राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल होंगे। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण स्वच्छ सर्वेक्षण वर्ष 2025-26 के लिए टूलकिट का विमोचन होगा, जो स्वच्छता, स्थिरता तथा नागरिक केंद्रित शहरी शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करेगा। बैठक से राज्यवार एवं मिशनवार कार्यान्वयन चुनौतियों की पहचान कार्यक्रमों को मजबूत बनाने के लिये व्यावहारिक अनुशंसाएँ केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा शहरी शासन एवं सेवा वितरण में सुधार के लिए ठोस रणनीतिक सुझाव भी प्राप्त होंगे।

भोपाल मध्यप्रदेश का दूसरा शहर जहां मेट्रो शुरू, एक दिन में 17 ट्रिप, तेज रफ्तार में यात्रा

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल आज  20 दिसंबर से मेट्रो सिटी बन जाएगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्‌टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मेट्रो का उद्घाटन करेंगे। 6.22 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर मेट्रो में सवार होकर शहर को देखेंगे। पहले ही दिन से चुकाना होगा किराया आज 20 दिसंबर को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे. जबकि 21 दिसंबर से आम लोग इसमें यात्रा कर सकेंगे. भोपाल मेट्रो में यात्रा करने के लिए शहरवासियों को पहले दिन से ही किराया चुकाना होगा. इसके लिए भोपाल मध्य प्रदेश मेट्रो कॉर्पोरेशन भोपाल ने भोपाल मेट्रो का शेड्यूल भी जारी कर दिया है. खास बात यह है कि एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन पहुंचने में मेट्रो को महज 3 से 4 मिनट ही लगेंगे. सुबह 9 से शाम 7 बजे तक 17 राइड मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक एस कृष्णा चैतन्य ने बताया, '' भोपाल मेट्रो का संचालन सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक किया जाएगा. इस दौरान सुभाष नगर से एम्स साकेत नगर तक मेट्रो की 17 राइड रहेगी. तय शेड्यूल के अनुसार सुभाष नगर स्टेशन से एम्स अस्पताल तक 9 राइड जबकि एम्स से सुभाष नगर तक 8 राइड रहेंगी. शुरुआत में एक ही मेट्रो का संचालन किया जाएगा. लेकिन यदि ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है, तो और मेट्रो भी चलाई जा सकती हैं.'' भोपाल में पहले चरण में 27 मेट्रो ट्रेन चलनी है, इनमें से 8 मेट्रो ट्रेन भोपाल डिपो में पहुंच चुकी हैं. 6.22Km में 8 स्टेशन…शुरुआत सुबह 9 बजे से भोपाल में मेट्रो के दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं। पहला ऑरेंज लाइन करोंद से एम्स के बीच 16.74 किलोमीटर लंबा है। वहीं दूसरा प्रोजेक्ट ब्लू लाइन 14.16 किलोमीटर भदभदा से रत्नागिरि तक है। दोनों के लिए डिपो सुभाष नगर में बना है। वहीं पुल बोगदा में जंक्शन बनेगा, यानी ट्रेनें यहां से क्रॉस होंगी। सबसे पहले ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स तक 6.22 किमी की शुरुआत हो रही है। इसमें 8 स्टेशन (सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अलकापुरी और एम्स) शामिल हैं। एक रूट पर 75 मिनट के अंदर मेट्रो ट्रिप पूरी करेगी। एक दिन में कुल 17 ट्रिप होंगी, जिसमें एम्स से सुभाष नगर के बीच 9 और सुभाष नगर से एम्स के बीच 8 ट्रिप शामिल हैं। पहली ट्रेन सुबह 9 बजे से एम्स स्टेशन से चलेगी और आखिरी स्टेशन सुभाष नगर तक 40 मिनट में पहुंचेगी। वहीं आखिरी ट्रेन भी एम्स से ही शाम 5 बजे चलेगी, जो शाम 6.25 बजे सुभाष नगर पहुंच जाएगी। 3 जोन में बांटा किराया, अधिकतम 40 रुपए रहेगा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भोपाल मेट्रो का किराया 3 जोन में बांटा है। इसमें कुल 8 स्टेशन हैं। पहले दो स्टेशन का किराया 20 रुपए है। 3 से 5 स्टेशन का 30 रुपए और 6 से 8 स्टेशन का किराया 40 रुपए लगेगा। उदाहरण के तौर पर यदि आप डीबी मॉल स्टेशन से रानी कमलापति स्टेशन जाते हैं तो आपको 20 रुपए चुकाने होंगे, लेकिन यदि आप एम्स तक की यात्रा कर रहे हैं तो आपको 40 रुपए किराया देना पड़ेगा। भोपाल मेट्रो का किराया कितना है? मेट्रो कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि भोपाल मेट्रो का किराया भी अन्य शहरों के बराबर ही रहेगा. पहले दो मेट्रो स्टेशनों के लिए 20 रुपये का किराया तय किया गया है. जबकि 3 से 5 स्टेशन तक सफर करने के लिए 30 रुपये का किराया चुकाना होगा. वहीं 6 से 8 स्टेशनों तक यात्रा करने के लिए 40 रुपये भुगतान करना होगा. कॉर्पोरेशन के एमडी कृष्णा चैतन्य ने बताया कि ये किराया करीब 7.5 किलोमीटर की दूरी के लिए है. बाद में एम्स से करोंद तक जब मेट्रो का संचालन होगा, तब इसका अधिकतम किराया 70 रुपए रहेगा. भोपाल मेट्रो में फ्री राइड क्यों नहीं? अधिकारियों ने बताया कि इंदौर प्रदेश का पहला शहर था, जहां मेट्रो का संचालन सबसे पहले शुरु किया गया था. इसलिए वहां जाय राइड यानी एक सप्ताह तक बिना किराए के यात्रा करने की छूट थी. जबकि इसके बाद तीन महीने तक किराए में छूट दी गई थी. लेकिन भोपाल मेट्रो को लेकर सरकार की कोई प्रमोशनल पॉलिसी नहीं है, इसलिए भोपाल मेट्रो में यात्रियों को पहले दिन से ही किराया चुकाना होगा.

मध्यप्रदेश: बिजली दरों में 10% से अधिक इजाफा, ग्राहकों पर खर्च का बोझ बढ़ेगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि करने की तैयारी चल रही है। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की टैरिफ पिटीशन मप्र विद्युत नियामक आयोग में लगाई है, जिसमें दावा किया गया है कि बिजली कंपनियां अपने घाटे की भरपाई के लिए यह वृद्धि करवाना चाहती हैं। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है। सूत्रों के अनुसार, मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने तीनों डिस्काम की तरफ से 30 नवंबर से पहले यह पिटीशन आयोग को सौंप दी है। आयोग ने पिटीशन को स्वीकार भी कर लिया है। अब जल्द ही इस पर सार्वजनिक सूचना जारी कर जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी। तारीख कंपनी वार होगी। जनसुनवाई के बाद आयोग तय करेगा कि बिजली की दरों में कितनी वृद्धि या कमी की जाए। यदि बिजली दरों में वृद्धि तय होती है तो वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक अप्रैल से इन्हें लागू किया जाएगा। मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला वित्तीय वर्ष महंगाई का नया झटका लेकर आ सकता है. राज्य में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की तैयारी शुरू हो गई है. मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विद्युत टैरिफ बढ़ाने की याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग में दाखिल कर दी है. टैरिफ पिटीशन स्वीकार, जल्द होगी जनसुनवाई सूत्रों के मुताबिक, तीनों डिस्कॉम की ओर से यह टैरिफ पिटीशन 30 नवंबर से पहले आयोग को सौंपी गई थी, जिसे नियामक आयोग ने स्वीकार कर लिया है. अब जल्द ही सार्वजनिक सूचना जारी कर कंपनीवार जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी. जनसुनवाई के बाद आयोग यह फैसला करेगा कि बिजली दरों में कितनी बढ़ोतरी या राहत दी जाए. यदि वृद्धि को मंजूरी मिलती है तो नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. हजारों करोड़ के घाटे में बिजली कंपनियां राज्य की तीनों विद्युत वितरण कंपनियां भारी वित्तीय संकट से जूझ रही हैं. आंकड़ों के अनुसार— मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर करीब 18,712 करोड़ रुपये का घाटा पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लगभग 16,378 करोड़ रुपये घाटे में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर 7,285 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान इसी घाटे की भरपाई को दर वृद्धि का मुख्य कारण बताया जा रहा है. पहले भी प्रस्ताव ज्यादा, मंजूरी कम पिछले पांच वर्षों में बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित दर वृद्धि और आयोग द्वारा स्वीकृत वृद्धि में बड़ा अंतर रहा है. 2021-22: प्रस्ताव 6.23%, मंजूरी 0.63% 2022-23: प्रस्ताव 8.71%, मंजूरी 2.64% 2023-24: प्रस्ताव 3.20%, मंजूरी 1.65% 2024-25: प्रस्ताव 3.86%, मंजूरी 0.07% 2025-26: प्रस्ताव 7.52%, मंजूरी 3.46% इस बार कंपनियों ने 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है, जिससे उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है. उपभोक्ताओं पर सीधा असर यदि प्रस्तावित बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है तो घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की मासिक बिजली बिल राशि में उल्लेखनीय इजाफा हो सकता है. आने वाले दिनों में जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ता संगठन और सामाजिक संस्थाएं अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगी. टैरिफ बढ़ोतरी से राहत उपभोक्ताओं को टैरिफ बढ़ोतरी से राहत मिलती रही है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग मानी जा रही हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आयोग ने बढ़ोतरी की मांग के मुकाबले बहुत कम वृद्धि स्वीकृत की थी. अब जबकि प्रदेश में सहकारिता चुनाव प्रस्तावित हैं, राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद बड़ी राहत की उम्मीद कम लग रही है. सूत्रों का अनुमान है कि इस बार दरें 4 से 6 प्रतिशत की सीमा में तय हो सकती हैं, जिससे नए साल में बिजली बिल बढ़ना लगभग निश्चित माना जा रहा है. 

स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत प्रतिबद्धता का परिणाम: एनीमिया मुक्त भारत में एमपी दो तिमाही से नंबर-1

एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम में लगातार 2 तिमाही से मध्यप्रदेश प्रथम यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, समर्पण और टीमवर्क का प्रतिफल: उप मुख्यमंत्री शुक्ल वर्ष 2025-26 में 70 लाख से अधिक बच्चों और 9 लाख 42 हज़ार गर्भवती महिलाओं की जाँच 45 लाख महिलाओं एवं बच्चों को चिकित्सकीय उपचार भोपाल  मध्य प्रदेश में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों एवं महिलाओं में रक्त की कमी को दूर करने के लिए निरंतर और समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। एनीमिया मुक्त होने का अर्थ है कि बच्चों और महिलाओं के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य हो, जिससे उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सके। यह कार्यक्रम मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में स्थापित हुआ है। प्रदेश में किए गए सतत और प्रभावी प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत भारत सरकार की एचएमआईएस रैंकिंग में मध्य प्रदेश ने लगातार पिछली दो तिमाही में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, समर्पण और टीमवर्क का प्रतिफल है। उन्होंने अभियान से जुड़े समस्त चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं मैदानी अमले की सराहना करते हुए कहा कि इन सभी के अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और सेवा भाव के कारण ही इतने व्यापक स्तर पर जांच, उपचार और जागरूकता संभव हो पाई है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों को बधाई देते हुए अपेक्षा व्यक्त की कि वे इसी समर्पण के साथ कार्य करते हुए प्रदेश को पूर्ण रूप से एनीमिया मुक्त बनाने के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर रहेंगे। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान प्रदेश में दस्तक अभियान के प्रथम चरण का संचालन 22 जुलाई से 16 सितम्बर 2025 तक किया गया। इस अवधि में 6 माह से 59 माह तक के कुल 70.62 लाख बच्चों में डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से हीमोग्लोबिन की जांच सुनिश्चित की गई। जांच के पश्चात लगभग 35.21 लाख अल्प एवं मध्यम एनीमिक बच्चों को आवश्यक चिकित्सकीय उपचार प्रदान किया गया, जबकि 3,575 गंभीर एनीमिया से ग्रस्त बच्चों को चिन्हांकित कर जिला स्तर पर रक्ताधान अथवा यथोचित प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। अभियान के अंतर्गत प्रदेश की 9.42 लाख गर्भवती महिलाओं की एनीमिया जांच की गई। जांच के दौरान 3.02 लाख मध्यम से गंभीर तथा 10,660 अतिगंभीर एनीमिक महिलाओं को चिन्हांकित किया गया, जिन्हें आयरन एवं फोलिक एसिड (आई.एफ.ए.), आयरन सुक्रोश, एफ.सी.एम. तथा आवश्यकता अनुसार रक्ताधान के माध्यम से उपचारित किया गया। इन प्रयासों से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ सुरक्षित मातृत्व को भी बढ़ावा मिला है। एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए प्रदेश में अपनाई गई बहुआयामी रणनीति एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए प्रदेश में बहुआयामी रणनीति अपनाई गई है, जिसमें आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों एवं सिरप का नियमित वितरण, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, बच्चों में कृमि नियंत्रण (डिवॉर्मिंग) अभियान, पोषण युक्त आहार को बढ़ावा, किशोरियों के लिए साप्ताहिक आयरन सप्लीमेंटेशन, स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में स्क्रीनिंग तथा पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियानों का संचालन शामिल है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से सूचना एवं व्यापक प्रचार-प्रसार कर नागरिकों को जागरूक भी किया गया है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा एनीमिया मुक्त भारत अभियान की शुरुआत वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) के अंतर्गत की गई थी। इस अभियान का वर्तमान लक्ष्य मातृ एवं बाल स्वास्थ्य में सुधार लाना तथा बच्चों और महिलाओं को एनीमिया मुक्त बनाना है। मध्य प्रदेश में किए जा रहे समर्पित प्रयास इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं और एक स्वस्थ, सशक्त एवं सक्षम समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।  

मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र तक इंदौर-मनमाड़ रेल, रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी, मुआवजे पर विवाद

इंदौर  मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र तक प्रस्तावित इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन के लिए रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। अगले 30 दिन में रेलवे लाइन के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण पर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। परियोजना में इंदौर जिले की तहसीलों के 19 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। किसान नेता हंसराज मंडलोई ने बताया कि इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना में जहां महाराष्ट्र सरकार चार गुना मुआवजा दे रही है, वहीं प्रदेश सरकार आदिवासी किसानों को केवल दोगुना मुआवजा दे रही है, जो असमानता को दर्शाता है। रेलवे प्रशासन इस परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण बता रहा है। विभाग का दावा है कि इस लाइन के बनने से इंदौर-मुंबई की दूरी करीब 250 किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं तमिलनाडु से दिल्ली की दूरी लगभग 680 किलोमीटर घटेगी। महू से जम्मू-कश्मीर तक सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलने और गुजरात के यात्रियों को भी आवागमन में सुविधा बढ़ने का दावा किया जा रहा है। महू क्षेत्र के 18 गांव होंगे प्रभावित महू (डॉ. आंबेडकर नगर) से शुरू होकर महाराष्ट्र के मनमाड़ तक जाने वाली रेलवे लाइन में महू विधानसभा क्षेत्र के 18 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इन गांवों के करीब 243 आदिवासी किसानों की 131.49 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट की कवायद वर्षों से चल रही है। वर्ष 2023 में टोकन राशि के रूप में दो करोड़ रुपये मिले थे। मप्र के हिस्से में डीपीआर-सर्वे का काम किया गया। काम जारी रखने के लिए 2024 के बजट में एक हजार रुपये की टोकन राशि दी गई थी। अब इस परियोजना के लिए 18 हजार 36 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। वर्तमान में इंदौर से देवास, उज्जैन, रतलाम, थांदला, दाहोद, गोधरा और वडोदरा होते हुए मुंबई जाना पड़ता है, जिसकी दूरी 828 किलोमीटर है। नई रेल लाइन बनने से 188 किलोमीटर की दूरी कम होगी और करीब पांच घंटे का समय बचेगा। प्रदेश में 905 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण रेलवे लाइन से सबसे ज्यादा फायदा मध्यप्रदेश को मिलेगा। कुल 309 किलोमीटर में से 170.56 किलोमीटर का हिस्सा मप्र में है। इसमें प्रदेश की कुल 905 हेक्टेयर निजी जमीन शामिल है। मप्र में बनने वाले 18 स्टेशनों में महू, कैलोद, कमदपुर, झाड़ी बरोदा, सराय तालाब, नीमगढ़, चिक्तायाबड़, ग्यासपुरखेड़ी, कोठड़ा, जरवाह, अजंटी, बघाड़ी, कुसमारी, जुलवानिया, सलीकलां, वनिहार, बवादड़ और मालवा स्टेशन शामिल हैं।

भोपाल में 20 दिसम्बर को शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक, सीएम डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल रहेंगे मौजूद

शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक (उत्तरी एवं मध्य राज्य) भोपाल में 20 दिसम्बर को बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल भी रहेंगे मौजूद भोपाल  केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक (उत्तरी एवं मध्य राज्यों) 20 दिसंबर शनिवार प्रात: 11 बजे कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र, भोपाल में आयोजित हो रही है। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रमुख शहरी विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच सहयोग और समन्वय को सुदृढ़ करना है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि यह बैठक राज्यों को योजना-वार प्रगति प्रस्तुत करने, क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं को साझा करने, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान तथा मंत्रालय से नीतिगत एवं रणनीतिक मार्गदर्शन प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी। क्षेत्रीय बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल और प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश के शहरी विकास मंत्री एवं राज्यमंत्री, भारत सरकार एवं राज्यो के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण स्वच्छ सर्वेक्षण वर्ष 2025-26 के लिए कार्य-दिशा पुस्तिका का विमोचन होगा। इस संबंध में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि यह कार्य-दिशा पुस्तिका स्वच्छता, स्थायित्व तथा नागरिक-केंद्रित शहरी प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक में पाँच सत्रों में महत्वपूर्ण विषयों पर होगी चर्चा बैठक के दौरान पाँच सत्रों में शहरी विकास से जुड़े प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इन सत्रों के माध्यम से केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही व्यवहारिक चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकेगा। अमृत योजना के अंतर्गत संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता तथा समयबद्ध पूर्णता से संबंधित विषयों पर विचार किया जाएगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये आवश्यक सुधारात्मक कदमों पर भी मंथन होगा। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत डंप स्थलों के वैज्ञानिक प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट निपटान तथा स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियों पर मंथन होगा। स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत निर्माणाधीन एवं स्वीकृत आवासों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी तथा लाभार्थियों को समय पर आवास उपलब्ध कराने में आ रही समस्याओं के समाधान पर विचार किया जाएगा। अंगीकार अभियान की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों एवं चुनौतियों की समीक्षा करते हुए अभियान को अधिक प्रभावी एवं जनसहभागिता आधारित बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। सत्र में शहरी परिवहन व्यवस्था के अंतर्गत नगर बस सेवाओं, भूमिगत रेल प्रणाली तथा पैदल मार्गों से संबंधित आवागमन व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। यातायात को सुगम, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिये आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। क्षेत्रीय बैठक से राज्य-वार एवं योजना-वार क्रियान्वयन चुनौतियों की पहचान, कार्यक्रमों को सशक्त बनाने के लिये व्यावहारिक अनुशंसाएँ, केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा शहरी प्रशासन एवं सेवा प्रदायगी में सुधार के लिए ठोस रणनीतिक सुझाव प्राप्त होगे।  

प्रयागराज कुंभ की बेहतर बिजली व्यवस्थाओं का सिंहस्थ में होगा अनुसरण

भोपाल. प्रयागराज मेला क्षेत्र में सेवाएं देने वाला मद्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड लखनऊ का तीन सदस्यीय दल मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर क्षेत्र के भ्रमण पर आया । दल ने इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर का विस्तार से भ्रमण किया। दल में प्रयागराज महाकुंभ में बिजली सेवाएं देने वाले वरिष्ठ अधिकारी सर्व मनोज गुप्ता, प्रवीण कुमार सिंह, अनूप कुमार सिन्हा शामिल रहे। इन्होंने प्रयागराज महाकुंभ मेले की व्यवस्थाओं संबंधी नॉलेज शेयरिंग की। पश्चिम क्षेत्र विदयुत वितरण कंपनी के अधिकारियों को कार्यशाला के माध्यम से कुंभ में बिजली प्रबंधन सिखाया। दल ने शुक्रवार अपराह्न पोलोग्राउंड स्थित बिजली कंपनी मुख्यालय में दिए प्रस्तुतिकरण में बताया कि मेला क्षेत्र जो मुख्य रूप से मैदान या नदी के तट पर होता है, वहां लगे बिजली पोल बिछुड़े या खोए लोगों व्यक्तियों को मिलाने के लिए कार्य करते हैं, इसकी लोकेशन, नंबरिंग, क्यूआर कोड से सही लोकेशन का एकदम पता लगाय़ा जा सकता है। प्रयागराज कुंभ में बीस हजार पोल पर स्पारल लाइटिंग लगाई गई थी, जिससे चारो ओर रोसन हुई, सूचना पट भी सभी दिशाओं से स्पष्ट दिखे। हर सेक्टर में एक एक इंजीनियर को प्रभारी बनाया गया था। साथ ही गंगा नदी के पीपा पुल के पास, 25 किमी दूर तक की पार्किंग क्षेत्र की लाइटिंग, 20 किमी क्षेत्र में नदी के पास की लाइटिंग व अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्था जुटाने के तौर तरीके बताए गए। प्रयागराज से आए दल ने सिंहस्थ 28 के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने पश्चिम क्षेत्र कंपनी मुख्यालय के कार्मिकों के सवालों का जवाब भी दिया जिससे प्रयागराज जैसी सुविधाओं को सिंहस्थ में भी अपनाया जा सके। प्रयागराज के दल का स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन भी किया गया। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक  प्रकाश सिंह चौहान, कार्यपालक निदेशक  गजरा मेहता, मुख्य अभियंता  एसएल करवाड़िया,  एससी वर्मा,  अचल जैन,  संजय मालवीय,  पवन जैन,  सीए ठकार आदि मौजूद रहे।  

गाडरवाड़ा की सबई रस्सी एवं दोना पत्तल बनाने की विधि मेले में आकर्षण का केन्द्र रही

भोपाल. अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में 11:00 बजे से दो दिवसीय कार्यशाला- अकाष्ठीय वनोपज से सामुदायिक विकास-"वनों की समृद्धि को सामुदायिक जनकल्याण से जोड़ना" विषय पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन श्री व्ही. एन. अंबाड़े, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के मुख्य आतिथ्य में हुआ। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री व्ही. आर. खरे, सेवानिवृत्त वन बल प्रमुख भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून की महानिदेशक, श्रीमती कंचन देवी, सेवानिवृत्त वन बल प्रमुख श्री रमेश के. दवे, डॉ. अभय कुमार पाटिल तथा म.प्र. राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक डॉ. समीता राजोरा उपस्थित रहे। कार्यशाला में वनों से विनाश विहीन विदोहन के लिये नई तकनीकों की जानकारी ग्रामीण संग्राहकों तक पहुंचाने के लिये वन परिक्षेत्रवार कार्यक्रम चलाना चाहिए जिससे वनों का विस्तार हो एवं वनों से प्राप्त होने वाली वनोपजों का संरक्षण एवं पैदावार बढ़ाई जा सके, के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई । मेले में आज तीसरे दिन सुबह से हर्बल उत्पादों की खरीदी में लोगों का भारी रूझान दिखाई दिया । ईको टूरिज्म बोर्ड द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में डायनासौर स्कल्पचर लोगों की जिज्ञासा का केन्द्र बना रहा। एम.एफ.पी. पार्क द्वारा तैयार किये गये नवीन उत्पादों को खरीदने एवं इनके उपयोग की जानकारी प्राप्त करने के लिये आगंतुकों ने खासी रूचि दिखाई। नरसिंहपुर जिला यूनियन के समिति गाडरवाड़ा की सबई रस्सी एवं दोना पत्तल बनाने की विधि भी आम जन के आकर्षण का केन्द्र रहीं। जिला यूनियन हरदा, बालाघाट द्वारा निर्मित कराये गये बांस के फर्नीचर एवं सजावट के सामानों को भी लोगों द्वारा सराहा जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्रदेश की विभिन्न जिला यूनियनों एवं प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों तथा वन-धन केन्द्रों द्वारा जड़ी-बूटियों के मिश्रण से निर्मित की गई जन उपयोगी एवं स्वास्थ्य के लिए हितकर खाद्य सामग्रियों की खरीददारी भी बढ़-चढकर लोगों द्वारा की जा रही है। खरीदने एवं इनके उपयोग की जानकारी प्राप्त करने के लिये आगंतुकों ने खासी रूचि दिखाई। नरसिंहपुर जिला यूनियन के समिति गाडरवाड़ा की सबई रस्सी एवं दोना पत्तल बनाने की विधि भी आम जन के आकर्षण का केन्द्र रहीं। जिला यूनियन हरदा, बालाघाट द्वारा निर्मित कराये गये बांस के फर्नीचर एवं सजावट के सामानों को भी लोगों द्वारा सराहा जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्रदेश की विभिन्न जिला यूनियनों एवं प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों तथा वन-धन केन्द्रों द्वारा जड़ी-बूटियों के मिश्रण से निर्मित की गई जन उपयोगी एवं स्वास्थ्य के लिए हितकर खाद्य सामग्रियों की खरीददारी भी बढ़-चढ़कर लोगों द्वारा की गई । आज हुए कार्यक्रम में स्कूली छात्र-छात्राओं के फैंसी ड्रेस / सोलो एक्टिंग प्रतियोगिता मे 06 विद्यालयों के लगभग 20 छात्र-छात्राओं द्वारा प्रतियोगिता में भाग लिया गया। अपरान्ह में श्रीमती सुरेखा कामले द्वारा ध्रुपद गायन, तत्पश्चात् श्री दिलीप धौलपुरे द्वारा कबीर वाणी तथा अपरान्ह 4.30 बजे से जे.के. म्युजिकल ग्रुप द्वारा ऑर्केस्ट्रा की रंगारंग प्रस्तुति के उपरांत सायं 7.00 बजे से विरासत सूफी को म्युजिकल प्रस्तुति का लोगों ने भरपूर आनंद लिया। प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को संघ की प्रबंध संचालक, डॉ० समीता राजोरा द्वारा पुरूस्कार प्रदान किये गये। निःशुल्क चिकित्सा के लिये स्थापित ओ.पी.डी. में 105 से अधिक आयुर्वेदिक चिकित्सक़ों एवं परंपरागत वैद्यों द्वारा 250 से अधिक लोगों को निःशुल्क परामर्श देकर लाभान्वित किया गया। यह ओ.पी.डी. मेला अवधि में निःशुल्क प्रतिदिन की भांति जारी रहेगी । शनिवार 20 दिसम्बर के कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में अकाष्ठीय वनोपज से सामुदायिक विकास "वनों की समृद्धि को सामुदायिक जनकल्याण से जोड़ना" विषय पर कार्यशाला एवं निःशुल्क चिकित्सा शिविर प्रातः 10.30 बजे से होगा। प्रातः 10.30 से 3.00 बजे तक छात्र-छात्राओं की चित्रकला प्रतियोगिता, अपरान्ह 3.00 से 3.45 बजे तक बुन्देली गायन, 4.30 से 6.30 तक राजस्थानी लोकनृत्य, 4.30 से 6.30 तक सरगम म्यूजिकल ग्रुप द्वारा ऑर्केस्ट्रा एवं सायं 7.00 बजे से मानसरोवर आयुर्वेदिक कॉलेज द्वारा फ्लैश मॉब तथा इसके उपरांत "एक शाम वन विभाग के नाम" (फॉरेस्ट मैलोडी) की प्रस्तुति दी जावेगी।  

राज्यमंत्री गौर ने किया 1.18 करोड़ के विकासकार्यों का भूमिपूजन

भोपाल. पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शुक्रवार को वार्ड 65 और 68 में करीब 1 करोड़ 18 लाख रुपये की लागत से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का संकल्प है कि हर रहवासी तक बुनियादी सुविधाएं और नागरिक उपयोग की संरचनाओं की पहुंच हो। ओपन जिम, सड़क और सामुदायिक सुविधाएं न सिर्फ क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाएंगी, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर को भी बेहतर बनाएंगी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने वार्ड 65 स्थित आईटीआई स्टाफ कैंपस में बाउंड्री वॉल, पाथवे निर्माण, ओपन जिम इक्विपमेंट तथा सीसी रोड निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया, जिसकी लागत लगभग 27 लाख रुपये है। इसके अलावा गीत गणेश कॉलोनी में बाउंड्री वॉल निर्माण, सांस्कृतिक मंच एवं शेड तथा जिम इक्विपमेंट लगाने के कार्यों का भूमिपूजन किया गया। वहीं सागर स्टेट कॉलोनी में पेविंग ब्लॉक, सौंदर्यीकरण और ओपन जिम इक्विपमेंट के कार्यों का भूमिपूजन किया गया, जिसकी लागत लगभग 37 लाख रुपये है। वार्ड 68 के अयोध्या नगर एवं सेक्टर पार्क में पेविंग ब्लॉक, एन सेक्टर में चबूतरा एवं आरसीसी नाली निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया गया। इस दौरान राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने स्थानीय रहवासियों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। रहवासियों ने गलियों में सड़क पर अतिक्रमण के कारण हो रही परेशानी से अवगत कराया, जिस पर मंत्री श्रीमती गौर ने तुरंत अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। सचिदानंद नगर और किरण नगर में सीसी रोड, सुखसागर फेस-1 में सीसी रोड तथा भवानी कैंपस फेस-2 में शेड एवं चबूतरा निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया गया। वार्ड 68 के इन सभी विकास कार्यों पर लगभग 53 लाख रुपये की लागत आएगी। इस अवसर पर पार्षद श्रीमती शिरोमणि शर्मा, श्रीमती उर्मिला मोर्य,  लव कुश यादव,  भीकम सिंह बघेल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय रहवासी उपस्थित रहे।  

झाबुआ में जल संरक्षण, सिंचाई और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा

भोपाल. महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन किसानों की आय वृद्धि, जल संरक्षण और क्षेत्रीय विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रहा है। इसी क्रम में जल संसाधन विभाग द्वारा झाबुआ जिले में नवीन जल संसाधन परियोजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे पेटलावद क्षेत्र सहित पूरे जिले के विकास को नई गति मिलेगी। सुश्री भूरिया ने बताया कि पेटलावद क्षेत्र में 15.8 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न जल संसाधन परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर लगभग 480 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। स्वीकृत योजनाओं में मुंडत बैराज (लागत 5.99 करोड़ रुपये) से 360 हेक्टेयर तथा मुकामपुरा तालाब नहर रहित योजना (लागत 3.53 करोड़ रुपये) से 120 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि माही नदी पर स्थित श्रृंगेश्वर घाट के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य हेतु 628.21 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति भी प्रदान की गई है। इस परियोजना से नदी तटों का संरक्षण सुनिश्चित होगा तथा धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जल संसाधनों के समुचित उपयोग के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है। श्रृंगेश्वर घाट का विकास क्षेत्र की धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करेगा और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक अवसरों का विस्तार होगा। सुश्री भूरिया ने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वीकृत परियोजनाएं झाबुआ जिले के किसानों, युवाओं और स्थानीय समुदाय के लिए दीर्घकालीन लाभकारी सिद्ध होंगी तथा जिले की विकास यात्रा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।