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भोपाल में मर्चुरी के बाहर मिले दो नवजातों के अधजले शव, नाल नहीं कटी, पुलिस ने शुरू की जांच

 भोपाल  हमीदिया अस्पताल परिसर में मर्चुरी के सामने मिले जुड़वा नवजात शिशुओं के अधजले शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है, लेकिन मामला और भी उलझ गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार पीएम रिपोर्ट में डॉक्टरों के हवाले से शिशुओं की मौत का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया है। बीते बुधवार दोपहर को हमीदिया अस्पताल परिसर में मर्चूरी के सामने एक पन्नी में लिपटे हुए दो नवजात शिशुओं के अधजले शव मिले थे। दोनों शिशु जुड़वा थे और हैरान करने वाली बात यह थी कि उनकी नाल नहीं काटी गई थी। एक नवजात का शव बुरी तरह जला हुआ था, जबकि दूसरे पर भी जले होने के निशान थे। अस्पताल की मर्चुरी कर्मचारियों की सूचना पर कोहेफिजा पुलिस ने शवों को जब्त कर लिया था। कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि नवजात शिशुओं की पीएम रिपोर्ट मिल गई है, लेकिन मृत्यु का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। अवैध प्रसव की आशंका, क्या शिशुओं को मरने के लिए छोड़ा पुलिस ने आशंका जताई है कि या तो किसी ने अवैध रूप से प्रसव कराने के बाद शिशुओं को मरने के लिए छोड़ दिया और फिर शव को जलाने की कोशिश की गई या फिर अस्पताल से जुड़े किसी कर्मचारी ने प्रसव के बाद उनका अवैध निपटान करने का प्रयास किया। पुलिस घटनास्थल के आसपास के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और हमीदिया अस्पताल में हाल में हुए बच्चों के जन्म से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है ताकि शिशुओं के माता-पिता तक पहुंचा जा सके। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एफ.आई.एच. हॉकी पुरुष जूनियर्स विश्व कप-2025 में कांस्य पदक जीतने पर टीम को बधाई दी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एफ .आई. एच. हॉकी पुरुष जूनियर्स विश्व कप-2025 में भारतीय पुरुष जूनियर हॉकी टीम को कांस्य पदक जीतकर नया इतिहास रचने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभूतपूर्व उपलब्धि युवाओं को समर्पण, अनुशासन और निरंतर प्रयास के साथ अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा देने वाली है।  

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने विक्रम अवार्ड-2023 पर अंतरिम रोक लगाई, कोर्ट ने दूसरी दावेदार से मांगा जवाब

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने साहसिक खेलों के लिए दिए जाने वाले विक्रम अवार्ड-2023 का आयोजन करने पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने दूसरी दावेदार भावना डेहरिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई पांच जनवरी, 2026 को निर्धारित की। कहा कि तब तक विक्रम अवार्ड-2023 आयोजन न किया जाए। सीहोर निवासी पर्वतारोही मेघा परमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा व अधिवक्ता अतुल जैन ने पक्ष रखा। दलील दी कि याचिकाकर्ता इस अवार्ड की सही दावेदार है, इसलिए अंतिम निराकरण तक उक्त अवार्ड किसी अन्य को नहीं दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मप्र शासन ने साहसिक खेलों के लिए विक्रम अवार्ड 2023 की घोषणा की है। इसके लिए छिंदवाड़ा की पर्वतारोही भावना डेहरिया का चयन किया गया है। याचिकाकर्ता को भावना के चयन पर कोई आपत्ति नहीं है। उसका कहना है कि 22 मई 2019 को दुनिया की सबसे ऊंची छोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वालों में वह अग्रणी थीं। भावना डेहरिया से पहले तिरंगा फहराया था। दोनों के बीच पांच घंटे का अंतराल था। मेघा सुबह पांच बजे चोटी पर पहुंच गई थीं, जबकि भावना पौने 10 बजे पहुंची थीं। इस लिहाज से भावना की भांति मेघा का भी विक्रम अवार्ड पर हक है। नियम शिथिल करें विगत सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता तन्खा ने दलील दी थी कि 2022 में विक्रम अवार्ड के चयन की प्रक्रिया में नियमों को शिथिल करते हुए प्रदेश के दो पुरुष खिलाड़ियों पर्वतारोही भगवान सिंह और रत्नेश पांडेय के नामों पर मुहर लगाई थी। दोनों के बीच लक्ष्य हासिल करने में एक घंटे का अंतराल था। एक वर्ष में सिर्फ एक खिलाड़ी को अवार्ड देने का नियम बदलने का दृष्टांत सामने है। याचिकाकर्ता मेघा के लिए विक्रम अवार्ड पाने का नामांकन प्रक्रिया के अनुसार यह अंतिम अवसर है। कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में संचालित बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में याचिकाकर्ता मेघा परमार को ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया गया था और भावना को यह अवसर मेघा के बाद हासिल हुआ।

उज्जैन के महाकाल मंदिर में अब भक्तों को मिलेगा 24 घंटे लड्डू प्रसाद, नया काउंटर शुरू

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में अब भक्तों को चौबीस घंटे भगवान महाकाल का लड्डू प्रसाद मिल सकेगा। मंदिर समिति पं.सूर्यनारायण व्यास यात्री गृह (हरसिद्धि धर्मशाला) के सामने नया प्रसाद काउंटर स्थापित करने जा रही है। बता दें वर्तमान में भक्तों को परिसर स्थित प्रसाद काउंटरों से सुबह 6 से रात 11 बजे तक ही लड्डू प्रसाद मिल पाता है। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा श्री महाकाल महालोक, मंदिर परिसर तथा मंगलनाथ मंदिर स्थित काउंटर से लड्डू प्रसाद का विक्रय किया जाता है। यह सभी काउंटर मंदिरों की व्यवस्था अनुसार पट खुलन के बाद खोले जाते हैं तथा पट बंद होने पर बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में इन काउंटरों से 24 घंटे प्रसाद विक्रय नहीं किया जा सकता है। इसलिए मंदिर समिति ने भक्तों को 24 घंटे प्रसाद विक्रय करने के लिए हरसिद्धि धर्मशाला के बाहर नया काउंटर शुरू करने का निर्णय लिया है। इस काउंटर से दोनों प्रकार के श्री अन्न रागी तथा बेसन के लड्डू प्रसाद का विक्रय किया जाएगा। 400 रुपये किलो लड्डू, विभिन्न पैक में उलब्ध बेसन व रागी के लड्डू की कीमत एक समान 400 रुपये किलो है। समिति 100 ग्राम, 200 ग्राम व 500 ग्राम के पैक में प्रसाद का विक्रय कर रही है। इसकी कीमत क्रमश: 50 रुपये, 100 रुपये तथा 200 रुपये है।

डॉ. मोहन यादव का उभरता मध्यप्रदेश: नीतियों और निवेश से आकार ले रहा औद्योगिक नवयुग

मप्र के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ मोहन जी यादव की सरकार के दो वर्ष पूर्ण हो गए हैं । भोपाल  किसी भी राज्य का विकास केवल परियोजनाओं और आंकड़ों से नहीं मापा जाता, बल्कि उस दृष्टि से पहचाना जाता है जो शासन को दिशा देती है। मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्ष इसी दृष्टि के सशक्त उदाहरण के रूप में उभरे हैं। यह कालखंड प्रशासनिक निरंतरता का नहीं, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, निवेश–मित्र वातावरण और संरचनात्मक सुधारों का काल रहा है। ‘उद्योग करना आसान’ जैसी अवधारणाओं को व्यवहार में उतारते हुए सरकार ने मध्यप्रदेश को निवेशक, विश्वास आधारित राज्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। नीति आधारित शासन और औद्योगिक स्पष्टता डॉ. मोहन यादव सरकार की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उसने विकास को आकस्मिक निर्णयों पर नहीं, बल्कि सुस्पष्ट नीतिगत ढांचे पर आधारित किया। एक साथ 18 नीतियों को लागू करना केवल प्रशासनिक घोषणा नहीं, बल्कि यह संकेत है कि सरकार उद्योग, सेवा, कृषि, पर्यटन, तकनीक और ऊर्जा, सभी क्षेत्रों को एक साझा विकास दृष्टि से देख रही है। इन नीतियों के माध्यम से निवेशकों को यह भरोसा मिला कि राज्य में नियम अस्थिर नहीं हैं और प्रक्रियाएँ अनुमानित तथा पारदर्शी हैं। औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति, आईटी, आईटीईएस और इलेक्ट्रॉनिक्स निवेश नीति, स्टार्ट-अप नीति और लॉजिस्टिक्स नीति ने मध्यप्रदेश को पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नवीन और उभरते क्षेत्रों के लिए भी आकर्षक बनाया। डिजिटल स्टेट नीति और ड्रोन आधारित सेवाओं को प्रोत्साहन देने वाली नीति ने यह स्पष्ट किया कि सरकार केवल वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयारी कर रही है। निवेशक–मित्र वातावरण और प्रशासनिक भरोसा इन दो वर्षों में राज्य सरकार ने निवेश को केवल आमंत्रण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि निवेशक के साथ खड़े रहने की नीति अपनाई। ‘निवेशक मित्र नीति’ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने वाला व्यक्ति या संस्था अकेली नहीं है; सरकार उसकी प्रक्रियात्मक, संरचनात्मक और प्रशासनिक आवश्यकताओं में सहभागी है। सिंगल विंडो सिस्टम, समयबद्ध स्वीकृतियाँ और स्पष्ट उत्तरदायित्व ने प्रशासन को निवेश के लिए सहयोगी बनाया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 इस नीति का प्रत्यक्ष परिणाम रही, जहाँ ₹26 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव सामने आए। यह उपलब्धि केवल एक आयोजन की सफलता नहीं, बल्कि उस भरोसे का परिणाम है जो सरकार ने उद्योग जगत में निर्मित किया। इसी क्रम में सात रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और चौदह इंटरैक्टिव सेशन्स ने यह सुनिश्चित किया कि निवेश संवाद केवल राजधानी तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के विभिन्न अंचलों तक पहुँचे। रोजगार, कौशल और मानव संसाधन का पुनर्गठन मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में रोजगार को केवल सांख्यिकीय लक्ष्य के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण के माध्यम के रूप में देखा गया। 23 लाख से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन इस बात का प्रमाण है कि निवेश को कौशल और स्थानीय संसाधनों से जोड़ा गया। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और उद्योग–शैक्षणिक समन्वय के प्रयासों ने रोजगार को अल्पकालिक नहीं, बल्कि स्थायी आर्थिक आधार प्रदान करने की दिशा में कार्य किया। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास नीति के माध्यम से युवाओं को आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने का प्रयास किया गया। इससे रोजगार केवल महानगरों तक सीमित न रहकर छोटे शहरों और औद्योगिक अंचलों तक पहुँचा। नवीकरणीय ऊर्जा और हरित विकास की दिशा विकास की आधुनिक अवधारणा पर्यावरणीय संतुलन के बिना अधूरी मानी जाती है। इस दृष्टि से मोहन यादव सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा नीति को विकास का अभिन्न अंग बनाया। 278 मेगावाट की सोलर परियोजनाएँ और सैकड़ों एकड़ में ऊर्जा आधारित निवेश यह दर्शाते हैं कि मध्यप्रदेश ने हरित विकास को विकल्प नहीं, अनिवार्यता के रूप में स्वीकार किया है। नवीकरणीय ऊर्जा नीति ने न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया, बल्कि राज्य को निवेशकों के लिए एक जिम्मेदार और दीर्घकालिक दृष्टि वाला गंतव्य भी बनाया। यह नीति आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को ऊर्जा आधारित उद्योगों का केंद्र बनाने की क्षमता रखती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स : औद्योगिक प्रवाह की रीढ़ औद्योगिक विकास का वास्तविक आधार मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। लॉजिस्टिक्स नीति, औद्योगिक कॉरिडोर और परिवहन नेटवर्क के विस्तार ने मध्यप्रदेश को कनेक्टिविटी आधारित राज्य के रूप में उभारा है। सड़क, एक्सप्रेस-वे और माल परिवहन की बेहतर व्यवस्था ने उद्योगों के लिए लागत घटाई और समयबद्ध आपूर्ति को संभव बनाया। यह इंफ्रास्ट्रक्चर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि, पर्यटन और सेवाक्षेत्र के विस्तार में भी सहायक बना। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को बहुआयामी गति मिली। पर्यटन, संस्कृति और आर्थिक पुनर्जीवन डॉ. मोहन यादव सरकार की एक विशिष्ट पहचान यह रही कि उसने विकास को सांस्कृतिक जड़ों से अलग नहीं किया। पर्यटन नीति, फिल्म पर्यटन नीति और धार्मिक–सांस्कृतिक स्थलों के विकास ने यह स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश अपनी विरासत को केवल स्मृति नहीं, बल्कि आर्थिक संसाधन के रूप में देखता है। महाकाल लोक, राम वन गमन पथ और अन्य धार्मिक–पर्यटन परियोजनाओं ने न केवल राज्य की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया, बल्कि स्थानीय रोजगार और सेवा क्षेत्र को भी नई ऊर्जा दी। यह मॉडल दर्शाता है कि संस्कृति और विकास एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। प्रशासनिक कार्यशैली : निर्णय, संवाद और मैदान में उपस्थिति मुख्यमंत्री मोहन यादव की कार्यशैली उनकी निरंतर सक्रियता में परिलक्षित होती है। वे केवल नीतियाँ घोषित करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनके क्रियान्वयन की सतत समीक्षा भी करते रहे। उद्योगपतियों, अधिकारियों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के साथ निरंतर संवाद ने प्रशासन को अधिक उत्तरदायी बनाया। यह कार्यशैली शासन को कागजी प्रक्रियाओं से निकालकर परिणाम आधारित प्रशासन की ओर ले जाती है, जहाँ निर्णय का मूल्यांकन उसके प्रभाव से होता है। निष्कर्ष : हम कह सकते है कि डॉ मोहन यादव की सरकार ने मप्र में एक नवयुग की ठोस आधारशिला रख दी है ,क्योंकि मोहन यादव सरकार के ये दो वर्ष मध्यप्रदेश के लिए परिवर्तन के संकेत नहीं, बल्कि परिवर्तन की ठोस आधारशिला हैं। नीतिगत स्पष्टता, निवेश–मित्र वातावरण, रोजगार सृजन, हरित ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और सांस्कृतिक चेतना—इन सभी का समन्वय एक ऐसे विकास मॉडल की ओर संकेत करता है जो राज्य को केवल विकसित नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाता है। यदि यही नीति–निरंतरता और प्रशासनिक सक्रियता बनी रहती है, तो आने वाले … Read more

मध्य प्रदेश में शीतलहर का प्रकोप, इंदौर में 5.2 डिग्री, भोपाल और ग्वालियर में पारा गिरा; 5 जिलों में अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। प्रदेश का तापमान 5 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। अधिकांश शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। शहडोल का कल्याणपुर एक बार फिर सबसे सर्द रहा। यहां न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री रहा। वहीं इंदौर में बीते 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया। दरअसल, पचमढ़ी से भी ठंडी इंदौर की रात रही है। यहां रात का तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, बीती रात अधिकांश शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे ही रहा। राजगढ़ में 5.2 डिग्री, नौगांव में 6.4 डिग्री, उमरिया में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, मलाजखंड में 7.2 डिग्री, मंडला में 7.6 डिग्री, रायसेन, शिवपुरी-नरसिंहपुर में 8 डिग्री, बैतूल में 8.5 डिग्री, छिंदवाड़ा-खजुराहो में 9 डिग्री, सतना में 9.1 डिग्री, टीकमगढ़-रतलाम में 9.5 डिग्री, दमोह में 9.8 डिग्री और दतिया में 9.9 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के मुताबिक, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हुई बर्फबारी से मध्य प्रदेश में कड़ाके की सर्दी देखने को मिल रही है। प्रदेश में आ रही उत्तरी हवाओं के चलते शीतलहर की स्थिति बनी है। आज शुक्रवार को पांच जिलों भोपाल, इंदौर, राजगढ़, शाजापुर और सीहोर में कोल्ड वेव का अलर्ट है। इससे पहले गुरुवार को भोपाल, इंदौर, राजगढ़, सीहोर और रायसेन में शीतलहर चली। वहीं शहडोल में कोल्ड डे यानी, शीतल दिन रहा। प्रदेश में पारा 5 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। अधिकांश शहरों में 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। शहडोल का कल्याणपुर सबसे ठंडा रहा, यहां न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। इंदौर में 4.5 डिग्री, पचमढ़ी में 4.8 डिग्री, राजगढ़ में 5 डिग्री और शाजापुर के गिरवर में 5.2 डिग्री तापमान रहा। 204 किमी की रफ्तार से बह रही जेट स्ट्रीम मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर भी है। यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 204 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी है। इस कारण शुक्रवार को भी शीतलहर का अलर्ट है। क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इसकी रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा इस बार सर्दी बढ़ाएगी। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही होना है। उत्तर से बर्फीली हवाएं आ रही देश के उत्तरी हिस्से यानी, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बर्फबारी हुई है। इस वजह से हवा की रफ्तार उत्तरी हो गई हैं। बर्फीली हवा की वजह से ही प्रदेश में शीतलहर की स्थिति है। दिसंबर में भी रिकॉर्ड तोड़ रही सर्दी मौसम विभाग की माने तो इस बार सर्दी का असर तेज है। भोपाल में नवंबर की सर्दी का 84 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है, जबकि इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी है। ऐसी ही सर्दी दिसंबर में भी है। इंदौर में दिसंबर की सर्दी का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहेगी ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही अनुमान है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी रहेगी     ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आएंगी।     भोपाल संभाग के सीहोर-विदिशा में ठंड का जोर रहेगा।     सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड पड़ेगी।     जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडौरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड रहेगी। 20-22 दिन चल सकती है कोल्ड वेव मौसम एक्सपर्ट की मानें तो दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं चलेंगी। जनवरी में यह 20 से 22 दिन तक चल सकती है। इसलिए रहेगा कड़ाके की ठंड का दौर ला नीना ने दिया ठंड को लंबा धक्का     मौसम केंद्र भोपाल के रिटायर्ड डायरेक्टर डीपी दुबे के अनुसार वैश्विक मौसम मॉडल (विश्व मौसम संगठन, भारत मौसम विज्ञान विभाग आदि) संकेत दे रहे थे कि इस बार ला नीना सक्रिय रहेगा। ला नीना का मतलब, प्रशांत महासागर का ठंडा होना। जैसे ही समुद्र ठंडा होता है, हवा और ज्यादा ठंडी होकर एशिया-भारत की ओर दबाव से धकेली जाती है। यह वही ठंड है जिसने नवंबर से … Read more

मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के दो वर्ष पूरे, आज सीएम डॉ. मोहन यादव देंगे सरकार की कामकाजी रिपोर्ट

भोपाल  मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार के दो साल पूरे होने पर आज राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी सरकार के काम और उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा पेश करेंगे। 13 दिसंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. यादव ने शासन में तेजी, पारदर्शिता और जनकल्याण पर विशेष जोर दिया। दो वर्षों में सरकार ने विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। किसानों, महिलाओं, युवाओं और उद्योगों पर केंद्रित योजनाओं ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में मदद की है। किसानों के लिए भावांतर योजना, पशुपालन प्रोत्साहन, खेतों में सौर संयंत्र लगाने की पहल और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह की बढ़ी हुई राशि, 35 प्रतिशत आरक्षण और नारी सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं ने उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है। युवाओं के लिए नई पुलिस भर्ती, स्वास्थ्य संस्थानों में बड़े पैमाने पर पदों का सृजन, सीएम राइज स्कूलों को सांदीपनि मॉडल में विकसित करना और साइबर तहसील, ई-चेक गेट व संपदा-2.0 जैसे डिजिटल सुधार सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। बुनियादी ढांचे में पीएम मित्र पार्क, मुरैना सोलर-स्टोरेज प्रोजेक्ट, केन-बेतवा लिंक, रेलवे कोच निर्माण, उज्जैन मेडिसिटी, एयर एम्बुलेंस सेवा, पांच नए एयरपोर्ट और इंदौर मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट प्रदेश को आधुनिक स्वरूप दे रहे हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में श्रीकृष्ण पाथेय, श्रीराम राजा लोक, विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, प्रमुख शहरों में महानाट्य, डोंगला वैद्यशाला, तारामंडल और 19 क्षेत्रों में शराबबंदी जैसे निर्णय भी ऐतिहासिक रहे हैं। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री इन सभी पहल और प्रोजेक्ट्स की विस्तृत जानकारी साझा करेंगे और आने वाले समय के लिए नई रूपरेखा भी प्रस्तुत करेंगे।  

बाबा रणजीत की प्रभातफेरी में 7 लाख श्रद्धालुओं का उमड़ा आस्था का सैलाब, 4.5 किमी का सफर 7 घंटे में पूरा

इंदौर  इंदौर के पश्चिमी क्षेत्र से शुक्रवार सुबह चार बजे रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी निकली, जिसमें दो लाख से अधिक लोगों जुटे। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों की ऊर्जा कम होने का नाम नहीं ले रही थी। चारों तरफ भगवा पताकाएं, भजन गाती मंडलियां, भक्ति में डूबे लोगों का हुजूम सड़क पर नजर आया। रणजीत अष्टमी के मौके पर इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर से रणजीत बाबा की विशाल प्रभातफेरी निकाली गई। स्वर्ण रथ पर विराजित बाबा के दर्शन पाने के लिए 5.2 डिग्री सेल्सियस की ठंड में छह से सात लाख भक्त पहुंचे। इतनी भीड़ होने के कारण यात्रा को 4.5 किलोमीटर सफर में 7 घंटे का समय लगा।  रात से ही रणजीत हनुमान मार्ग पर प्रभातफेरी की तैयारियां शुरू हो गईं थीं। सुबह 32वें क्रम पर बाबा रणजीत का रथ था। रथ के आगे भजन मंडल, नृतक दल, नासिक ढोल पर कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। प्रभातफेरी को लेकर ट्रैफिक और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम नजर आए।सुबह चार बजे मंदिर परिसर से बाबा रणजीत अपने पारंपरिक रथ में सवार होकर निकले। इस दौरान भव्य आतिशबाजी हुई। प्रभातफेरी धीरे-धीरे महूनाका की तरफ बढ़ी। अन्नपूर्णा, दशहरा मैदान, नरेंद्र तिवारी मार्ग होते हुए प्रभातफेरी फिर मंदिर पहुंची।  प्रभातफेरी द्रविड़ नगर, महू नाका, दशहरा मैदान और अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए वापस मंदिर में संपन्न हुई। यात्रा की शुरुआत सुबह 5 बजे हुई थी, जो दोपहर करीब 12 बजे संपन्न हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित दीपेश व्यास के मुताबिक, यात्रा में 3 झांकियां शामिल की गई थीं। एक में भक्तों को आशीर्वाद देते हुए राम दरबार, दूसरे में माता अंजनि की गोद में भगवान हनुमान लला और तीसरे में रणजीत लोक का प्रेजेंटेशन दिखाया गया। 71 भजन मंडली भी आई थीं। इनमें तीन महाकाल की मंडली थी। यात्रा के बाद सवा लाख रक्षा सूत्र बांटा जाना है। कुछ आज तो बाकी रोज बांटे जाएंगे। रामायण पर आधारित दो झांकियों का निर्माण कराया गया था। जिसे भक्तों ने खूब सराहा। इसके अलावा 20 से ज्यादा भजन मंडलियां भी प्रभातफेरी में चलीं। प्रभातफेरी में शामिल भक्त नंगे पैर चले। कुछ भक्त झाड़ू भी लगा रहे थे।  तीन मार्गों पर वाहन प्रतिबंधित थे प्रभात फेरी के दौरान शहर में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया था। शुक्रवार सुबह तीन बजे से फूटीकोठी, उषा नगर और अन्नपूर्णा मार्ग पर वाहन प्रतिबंधित रहे। इसके अलावा फूटी कोठी चौराहा से रणजीत हनुमान रोड होकर महुनाका चौराहा तक आवागमन बंद रहा।  पांच सौ पुलिस जवान रहे तैनात रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी में पांच सौ से ज्यादा पुलिस जवान तैनात रहे। इसके अलावा मार्ग के बड़े भवनों से भी पुलिस जवान निगरानी किए। ड्रोन के जरिए भी पुलिस संदिग्ध लोगों पर नजर रखी। रथ के आसपास भी पुलिस सुरक्षा का घेरा बना रहा। चार किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग से जुड़ी गलियों में भी पुलिस जवान तैनात रहे और गलियों में बैरिकेड लगाए गए थे।  आपात स्थिति के लिए एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड तैयार प्रभातफेरी में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 3 एम्बुलेंस नरेंद्र तिवारी मार्ग, महू नाका चौराहा और दशहरा मैदान पर तैयार रखी गई थीं। 3 फायर ब्रिगेड गाड़ियां भी तैनात थीं। मार्ग पर बने सभी मंच लेफ्ट साइड पर लगाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित न हो। प्रभातफेरी में सबसे आगे पुलिस बल, प्रचार वाहन, बैनर, बैंड, ध्वज वाहक, झांकियां, महाकाल मंडलियां, महिला मंडल, एलईडी झांकियां, अतिथि वाहन और अंत में रणजीत बाबा का स्वर्ण रथ था। इसके बाद सफाई टीम और एम्बुलेंस चल रही थी।

ब्राह्मण की बेटी की मांग पर IAS संतोष वर्मा पर गिरी गाज, सीएम ने उठाया कड़ा कदम

 भोपाल मध्य प्रदेश सरकार IAS अफसर और अजाक्स (AJAKS) के प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा के खिलाफ बड़ा एक्शन लेने जा रही है. अशोभनीय और विवादित बयानों के चलते IAS को नौकरी से बर्खास्त करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है, जिसके बाद वर्मा को उनके पद से हटाकर बिना काम के GAD (सामान्य प्रशासन विभाग) में अटैच कर दिया गया है. यह कार्रवाई IAS वर्मा के 23 नवंबर को भोपाल में AJAKS के स्टेट लेवल कन्वेंशन में यह कहने के बाद हुई है, "जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान नहीं कर देता और वह उससे रिश्ता नहीं बना लेता, तब तक उसे (बेटे को) रिजर्वेशन मिलना चाहिए." उनके बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया, जिससे ब्राह्मण समुदाय में गुस्सा फैल गया. IAS वर्मा के बयान के बाद, न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही थी. एक जज के खिलाफ रची साजिश वर्मा हाल के महीनों में कई विवादों के केंद्र में रहे हैं. इंदौर की अदालतों से मिली रिपोर्टों से पता चलता है कि उसने कथित तौर पर एक घरेलू मामले में बरी होने के लिए मनगढ़ंत फैसले तैयार करने के लिए एक न्यायाधीश के साथ साजिश रची, जिससे आईएएस पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त हो सके. सूत्रों के अनुसार, वर्मा ने विभागीय पदोन्नति समिति के माध्यम से पदोन्नति के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए न्यायिक रिकॉर्ड में हेरफेर किया. जालसाजी के आरोपों के अलावा, वर्मा को सार्वजनिक मंचों पर अपने भड़काऊ बयानों के लिए भी आलोचना का सामना करना पड़ा है. एक वायरल वीडियो में उन्हें भड़काऊ बयान देते हुए सुना गया, जिसकी सामुदायिक संगठनों और न्यायपालिका ने कड़ी आलोचना की. सरकार ने इन टिप्पणियों को ‘गंभीर दुर्व्यवहार; और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन करार दिया, जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई का मामला और मजबूत हो गया. IAS संतोष वर्मा ने दिया था विवादित बयान 23 नवंबर, 2025 को भोपाल में M.P. अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJJAKS) के एक कन्वेंशन के दौरान संतोष वर्मा ने कहा था, “रिजर्वेशन तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को न दे दे, या (उसका) उसके साथ रिश्ता न हो जाए”. इस बात की कई ब्राह्मण संगठनों और कम्युनिटी के नेताओं ने बहुत बुराई की, और इसे “अभद्र, जातिवादी और ब्राह्मण बेटियों का बहुत अपमान करने वाला” कहा. मुख्यमंत्री के निर्देश का अनुपालन करते हुए, कृषि विभाग ने वर्मा को कृषि विभाग में उप सचिव के पद से हटा दिया है. उन्हें बिना किसी विभागीय कार्यभार या कार्य के जीएडी पूल से जोड़ दिया गया है, जिससे वे प्रभावी रूप से प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग हो गए हैं. केंद्र को बर्खास्तगी की सिफारिश करके और विभागीय आरोप लगाकर, राज्य ने संकेत दिया है कि धोखाधड़ीपूर्ण पदोन्नति और कदाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब अंतिम निर्णय केंद्र सरकार पर निर्भर करता है, जो वर्मा को आईएएस से हटाने के प्रस्ताव पर कार्रवाई करेगी.

नेशनल लोक अदालत 13 दिसम्बर को

भोपाल नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 13 दिसम्बर-2025 को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत के संबंध में सभी नगर निगमों एवं नगर पालिकाओं को कर एवं प्रभार वसूली के लिए निर्देश दिये गये हैं। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोंडवे ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि लोक अदालत में अधिकतम मामलों का निराकरण सुनिश्चित किया जाये। करदाताओं को बकाया कर, जल प्रभार एवं अन्य उपभोक्ता प्रभार जमा करने के लिये प्रोत्साहित किया जाये। विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम-1961 तथा म.प्र. नगर निगम अधिनियम-1956 के प्रावधानों के तहत देय करों एवं प्रभारों पर निर्धारित सीमा तक ब्याज एवं अर्थदंड (पेनाल्टी) में छूट प्रदान की जा सकेगी। नेशनल लोक अदालत के दौरान कर एवं प्रभार वसूली को सुगम बनाने के लिए ई-नगर पालिका पोर्टल के माध्यम से भुगतान की सुविधा उपलब्ध रहेगी। नागरिकों को नेशनल लोक अदालत के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिये गये हैं।