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बाबा रणजीत की प्रभातफेरी में 7 लाख श्रद्धालुओं का उमड़ा आस्था का सैलाब, 4.5 किमी का सफर 7 घंटे में पूरा

इंदौर  इंदौर के पश्चिमी क्षेत्र से शुक्रवार सुबह चार बजे रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी निकली, जिसमें दो लाख से अधिक लोगों जुटे। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों की ऊर्जा कम होने का नाम नहीं ले रही थी। चारों तरफ भगवा पताकाएं, भजन गाती मंडलियां, भक्ति में डूबे लोगों का हुजूम सड़क पर नजर आया। रणजीत अष्टमी के मौके पर इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर से रणजीत बाबा की विशाल प्रभातफेरी निकाली गई। स्वर्ण रथ पर विराजित बाबा के दर्शन पाने के लिए 5.2 डिग्री सेल्सियस की ठंड में छह से सात लाख भक्त पहुंचे। इतनी भीड़ होने के कारण यात्रा को 4.5 किलोमीटर सफर में 7 घंटे का समय लगा।  रात से ही रणजीत हनुमान मार्ग पर प्रभातफेरी की तैयारियां शुरू हो गईं थीं। सुबह 32वें क्रम पर बाबा रणजीत का रथ था। रथ के आगे भजन मंडल, नृतक दल, नासिक ढोल पर कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। प्रभातफेरी को लेकर ट्रैफिक और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम नजर आए।सुबह चार बजे मंदिर परिसर से बाबा रणजीत अपने पारंपरिक रथ में सवार होकर निकले। इस दौरान भव्य आतिशबाजी हुई। प्रभातफेरी धीरे-धीरे महूनाका की तरफ बढ़ी। अन्नपूर्णा, दशहरा मैदान, नरेंद्र तिवारी मार्ग होते हुए प्रभातफेरी फिर मंदिर पहुंची।  प्रभातफेरी द्रविड़ नगर, महू नाका, दशहरा मैदान और अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए वापस मंदिर में संपन्न हुई। यात्रा की शुरुआत सुबह 5 बजे हुई थी, जो दोपहर करीब 12 बजे संपन्न हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित दीपेश व्यास के मुताबिक, यात्रा में 3 झांकियां शामिल की गई थीं। एक में भक्तों को आशीर्वाद देते हुए राम दरबार, दूसरे में माता अंजनि की गोद में भगवान हनुमान लला और तीसरे में रणजीत लोक का प्रेजेंटेशन दिखाया गया। 71 भजन मंडली भी आई थीं। इनमें तीन महाकाल की मंडली थी। यात्रा के बाद सवा लाख रक्षा सूत्र बांटा जाना है। कुछ आज तो बाकी रोज बांटे जाएंगे। रामायण पर आधारित दो झांकियों का निर्माण कराया गया था। जिसे भक्तों ने खूब सराहा। इसके अलावा 20 से ज्यादा भजन मंडलियां भी प्रभातफेरी में चलीं। प्रभातफेरी में शामिल भक्त नंगे पैर चले। कुछ भक्त झाड़ू भी लगा रहे थे।  तीन मार्गों पर वाहन प्रतिबंधित थे प्रभात फेरी के दौरान शहर में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया था। शुक्रवार सुबह तीन बजे से फूटीकोठी, उषा नगर और अन्नपूर्णा मार्ग पर वाहन प्रतिबंधित रहे। इसके अलावा फूटी कोठी चौराहा से रणजीत हनुमान रोड होकर महुनाका चौराहा तक आवागमन बंद रहा।  पांच सौ पुलिस जवान रहे तैनात रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी में पांच सौ से ज्यादा पुलिस जवान तैनात रहे। इसके अलावा मार्ग के बड़े भवनों से भी पुलिस जवान निगरानी किए। ड्रोन के जरिए भी पुलिस संदिग्ध लोगों पर नजर रखी। रथ के आसपास भी पुलिस सुरक्षा का घेरा बना रहा। चार किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग से जुड़ी गलियों में भी पुलिस जवान तैनात रहे और गलियों में बैरिकेड लगाए गए थे।  आपात स्थिति के लिए एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड तैयार प्रभातफेरी में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 3 एम्बुलेंस नरेंद्र तिवारी मार्ग, महू नाका चौराहा और दशहरा मैदान पर तैयार रखी गई थीं। 3 फायर ब्रिगेड गाड़ियां भी तैनात थीं। मार्ग पर बने सभी मंच लेफ्ट साइड पर लगाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित न हो। प्रभातफेरी में सबसे आगे पुलिस बल, प्रचार वाहन, बैनर, बैंड, ध्वज वाहक, झांकियां, महाकाल मंडलियां, महिला मंडल, एलईडी झांकियां, अतिथि वाहन और अंत में रणजीत बाबा का स्वर्ण रथ था। इसके बाद सफाई टीम और एम्बुलेंस चल रही थी।

ब्राह्मण की बेटी की मांग पर IAS संतोष वर्मा पर गिरी गाज, सीएम ने उठाया कड़ा कदम

 भोपाल मध्य प्रदेश सरकार IAS अफसर और अजाक्स (AJAKS) के प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा के खिलाफ बड़ा एक्शन लेने जा रही है. अशोभनीय और विवादित बयानों के चलते IAS को नौकरी से बर्खास्त करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है, जिसके बाद वर्मा को उनके पद से हटाकर बिना काम के GAD (सामान्य प्रशासन विभाग) में अटैच कर दिया गया है. यह कार्रवाई IAS वर्मा के 23 नवंबर को भोपाल में AJAKS के स्टेट लेवल कन्वेंशन में यह कहने के बाद हुई है, "जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान नहीं कर देता और वह उससे रिश्ता नहीं बना लेता, तब तक उसे (बेटे को) रिजर्वेशन मिलना चाहिए." उनके बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया, जिससे ब्राह्मण समुदाय में गुस्सा फैल गया. IAS वर्मा के बयान के बाद, न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही थी. एक जज के खिलाफ रची साजिश वर्मा हाल के महीनों में कई विवादों के केंद्र में रहे हैं. इंदौर की अदालतों से मिली रिपोर्टों से पता चलता है कि उसने कथित तौर पर एक घरेलू मामले में बरी होने के लिए मनगढ़ंत फैसले तैयार करने के लिए एक न्यायाधीश के साथ साजिश रची, जिससे आईएएस पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त हो सके. सूत्रों के अनुसार, वर्मा ने विभागीय पदोन्नति समिति के माध्यम से पदोन्नति के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए न्यायिक रिकॉर्ड में हेरफेर किया. जालसाजी के आरोपों के अलावा, वर्मा को सार्वजनिक मंचों पर अपने भड़काऊ बयानों के लिए भी आलोचना का सामना करना पड़ा है. एक वायरल वीडियो में उन्हें भड़काऊ बयान देते हुए सुना गया, जिसकी सामुदायिक संगठनों और न्यायपालिका ने कड़ी आलोचना की. सरकार ने इन टिप्पणियों को ‘गंभीर दुर्व्यवहार; और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन करार दिया, जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई का मामला और मजबूत हो गया. IAS संतोष वर्मा ने दिया था विवादित बयान 23 नवंबर, 2025 को भोपाल में M.P. अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJJAKS) के एक कन्वेंशन के दौरान संतोष वर्मा ने कहा था, “रिजर्वेशन तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को न दे दे, या (उसका) उसके साथ रिश्ता न हो जाए”. इस बात की कई ब्राह्मण संगठनों और कम्युनिटी के नेताओं ने बहुत बुराई की, और इसे “अभद्र, जातिवादी और ब्राह्मण बेटियों का बहुत अपमान करने वाला” कहा. मुख्यमंत्री के निर्देश का अनुपालन करते हुए, कृषि विभाग ने वर्मा को कृषि विभाग में उप सचिव के पद से हटा दिया है. उन्हें बिना किसी विभागीय कार्यभार या कार्य के जीएडी पूल से जोड़ दिया गया है, जिससे वे प्रभावी रूप से प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग हो गए हैं. केंद्र को बर्खास्तगी की सिफारिश करके और विभागीय आरोप लगाकर, राज्य ने संकेत दिया है कि धोखाधड़ीपूर्ण पदोन्नति और कदाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब अंतिम निर्णय केंद्र सरकार पर निर्भर करता है, जो वर्मा को आईएएस से हटाने के प्रस्ताव पर कार्रवाई करेगी.

नेशनल लोक अदालत 13 दिसम्बर को

भोपाल नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 13 दिसम्बर-2025 को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत के संबंध में सभी नगर निगमों एवं नगर पालिकाओं को कर एवं प्रभार वसूली के लिए निर्देश दिये गये हैं। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोंडवे ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि लोक अदालत में अधिकतम मामलों का निराकरण सुनिश्चित किया जाये। करदाताओं को बकाया कर, जल प्रभार एवं अन्य उपभोक्ता प्रभार जमा करने के लिये प्रोत्साहित किया जाये। विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम-1961 तथा म.प्र. नगर निगम अधिनियम-1956 के प्रावधानों के तहत देय करों एवं प्रभारों पर निर्धारित सीमा तक ब्याज एवं अर्थदंड (पेनाल्टी) में छूट प्रदान की जा सकेगी। नेशनल लोक अदालत के दौरान कर एवं प्रभार वसूली को सुगम बनाने के लिए ई-नगर पालिका पोर्टल के माध्यम से भुगतान की सुविधा उपलब्ध रहेगी। नागरिकों को नेशनल लोक अदालत के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिये गये हैं।  

महाकाल मंदिर में 1 जनवरी से फूलों की भारी माला पर प्रतिबंध, नया आदेश जारी

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला पहनाने पर रोक लगाने की तैयारी कर ली गई है। मंदिर के उद्घोषणा कक्ष से भक्तों को नए नियम की जानकारी देने के लिए लगातार उद्घोषण की जा रही है। मंदिर समिति का भक्तों से अनुरोध है कि वे भगवान के लिए अजगर माला नहीं खरीदें। एक जनवरी से इस पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए वर्ष 2017 में लगी एक जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्लिंग के क्षरण की जांच तथा उसे रोकने के उपाय करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की टीम गठित की थी। विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से जांच शुरू की तथा ज्योतिर्लिंग की सुरक्षित रखने के लिए अनेक सुझाव दिए। इसमें एक सुझाव भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में फूल अर्पण का था। लेकिन पिछले कुछ समय से विशेषज्ञों के सुझाव को दरकिनार करते हुए भगवान को फूलों की मोटी व बड़ी माला पहनाई जा रही थी। मंदिर के आसपास हारफूल की दुकानों पर भी 10 से 15 किलो वजनी मालाओं का विक्रय किया जा रहा था। 500 से 2100 रुपये तक बिकने वाली इन अजगर मालाओं को भक्त खरीद रहे थे। मंदिर के भीतर इन्हें भगवान को पहनाया भी जा रहा था। मामले में नईदुनिया ने 28 नवंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, इसके बाद मंदिर प्रशासन ने इस पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। प्रवेश द्वार पर पड़ताल के बाद मिलेगा प्रवेश नया नियम लागू होने के बाद मंदिर के विभिन्न द्वारों पर तैनात गार्ड भक्तों द्वारा भगवान को अर्पण करने के लिए लाई जा रही पूजन सामग्री की जांच करेंगे। बड़ी व भारी फूल माला को गेट पर ही अलग रखवा दिया जाएगा। किसी भी सूरत में बड़ी फूल माला मंदिर के भीतर जाने नहीं दी जाएगी। यह व्यवस्था एक जनवरी से सख्ती से लागू होगी। बड़ी व भारी फूल माला पर लगेगी रोक     सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला अर्पित करने पर रोक लगाई जा रही है। एक जनवरी से इस पर सख्ती से रोक रहेगी। – प्रथम कौशिक, प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति  

इंदौर में पहली बार दिखा ऐसा एक्शन, नगर निगम ने ढोल बजाकर और पीले चावल देकर शुरू की बकाया वसूली मुहिम

इंदौर  इंदौर में इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर नगर निगम ने ऐसा तरीका अपनाया है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हो रहे हैं और खुश भी। आमतौर पर कर बकायादारों को नोटिस भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार निगम की टीमें ढोल-ताशे बजाते हुए मोहल्लों और बाजारों में घूम रही हैं। कर्मचारियों ने दुकानदारों और करदाताओं को पीले चावल देकर 13 दिसंबर की लोक अदालत में आने का निमंत्रण दिया। राजवाड़ा और किशनपुरा जैसे व्यस्त बाजारों में बुधवार सुबह यह नजारा लोगों के लिए बिल्कुल अलग था। व्यापारियों ने भी नगर निगम की इस अनोखी पहल का स्वागत किया। 13 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि 13 दिसंबर को वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी। शहर के सभी 22 जोनल कार्यालय, रजिस्टार कार्यालय और निगम मुख्यालय में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में लोग अपना संपत्तिकर (Property Tax), जलकर (Water Tax) और बकाया अधिभार (Surcharge) कम राशि में निपटा सकेंगे। मकसद यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग एक ही दिन में अपने बकाए चुका सकें। राजवाड़ा में दुकान-दुकान पहुंचा निगम का न्यौता जोन 3 की टीम, सहायक राजस्व अधिकारी अनिल निगम के निर्देशन में, बुधवार को राजवाड़ा और किशनपुरा के बाजारों में निकली। कर्मचारियों ने ढोल-ताशे बजाकर दुकान-दुकान व्यापारियों को बताया कि लोक अदालत में बकाया अधिभार पर बड़ी छूट मिल रही है। व्यापारी भी इस तरीके से काफी प्रभावित दिखे। उनका कहना था कि यह तरीका नोटिस या मैसेज की तुलना में ज्यादा असरदार है, क्योंकि लोग तुरंत ध्यान देते हैं और बात समझ भी जाते हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर लोक अदालत वाले दिन नगर निगम करदाताओं की सुविधा के लिए खास इंतजाम करेगा। सभी जोनल कार्यालयों में भुगतान के लिए विशेष काउंटर, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग डेस्क, पीने के पानी की सुविधा, बैठने की व्यवस्था रखी जाएगी। इसके अलावा बकाया राशि के बिल और अधिभार में दी जा रही छूट की जानकारी भी वहीं तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। जानिए कितनी मिलेगी छूट 1. संपत्ति कर पर छूट 50,000 तक पुरानी बकाया राशि होने पर, आपको ब्याज में पूरी 100% छूट मिलेगी। अगर बकाया राशि 50,000 से 1 लाख के बीच है, तो आपको ब्याज में आधी छूट मिलेगी और अगर बकाया राशि 1 लाख से ज़्यादा है, तो भी आपको ब्याज में 25% की छूट मिलेगी। 2. जलकर पर छूट पानी के बिल की 10,000 तक की बकाया राशि पर, आपको ब्याज में पूरी 100% छूट मिलेगी। अगर बकाया राशि 10,000 से 50,000 के बीच है, तो आपको ब्याज में 75% की बड़ी छूट मिलेगी और अगर बकाया राशि 50,000 से ज़्यादा है, तो भी आपको ब्याज में 50% की छूट मिलेगी। इस बात का ध्यान रखें यह छूट केवल 13 दिसंबर, लोक अदालत वाले दिन ही लागू होगी।

मध्य प्रदेश की नई पहचान: धर्म, पर्यटन और अध्यात्म के क्षेत्र में 12 लोक और श्री राम वनगमन पथ का निर्माण

भोपाल  धर्म- अध्यात्म, संस्कृति और पर्यटन के संगम से मध्य प्रदेश में विकास की त्रिवेणी बह रही है। प्रदेश इन क्षेत्रों में नई पहचान बना रहा है। प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उज्जैन में वर्ष 2024 में सात करोड़ पर्यटक आए, जबकि 2023 में यह संख्या पांच लाख थी। श्रीमहाकाल महालोक बनने के पहले उज्जैन में प्रतिवर्ष आने वाले पर्यटकों की संख्या 30 से 40 लाख के भीतर रहती थी। यानी महालोक बनने के बाद पर्यटकों की संख्या 20 गुना तक बढ़ गई है। इसमें विदेश पर्यटक भी शामिल हैं। इसी तरह से प्रदेश में 12 लोक और बन रहे हैं, जिससे देश-दुनिया में मप्र की नई पहचान बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा धार्मिक पर्यटन बढ़ाने के लिए प्रमुख स्थलों के विकास की है। धर्म, संस्कृति और पर्यटन का सबसे अच्छा गठजोड़ प्रदेश में बन रहे 1,450 किलोमीटर के राम वनगमन पथ में दिखेगा। अभी प्रदेश के 10 ऐसे जिलों के 40 स्थलों को चिह्नित किया गया है, जहां से भगवान श्रीराम वनवास के दौरान गुजरे थे। कुछ ऐसे जिलों को भी शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जो भगवान श्रीराम से जुड़े हैं। इन जिलों को सड़क मार्ग से एक सर्किट की तरह जोड़ा जाएगा। वहां सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इस तरह से कृष्ण पाथेय का निर्माण किया जा रहा है। इसका केंद्र उज्जैन का सांदीपनि आश्रम होगा। श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़े स्थलों की पहचान का काम चल रहा है। इससे राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्माम को भी जोड़ा जाएगा। इस तरह कृष्ण पाथेय के रूप में एक बड़ा धार्मिक और पर्यटन सर्किट बनने जा रहा है। राजस्थान सरकार भी इसमें सहयोग कर रही हैं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच इस विषय पर एक-दूसरे का सहयोग करने की सहमति बन चुकी है। कहां कौन सा लोक बन रहा ओरछा में रामराजा लोक, पांढुर्णा के जामसावली में हनुमान लोक, सीहोर में सलकनपुर में देवी लोक, सागर में संत रविदास लोक, जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक और रानी अवंतीबाई स्मारक, अमरकंटक में मां नर्मदा महालोक, खरगोन में देवी अहिल्याबाई लोक, बड़वानी में नागलवाड़ी लोक और ओंकारेश्वर में एकात्म धाम बनाया जा रहा है। पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा एवं पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने के लिए पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा नवंबर 2025 से प्रारंभ की गई है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए हेलीकाप्टर की सुविधा निजी एजेंसी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। चीता प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 मे अपने जन्म दिवस पर श्योपुर में नामीबिया से लाए गए आठ चीते छोड़े थे। इसके बाद मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य को भी चीतों का बसेरा बनाया गया है। अब नौरादेही में भी चीते बसाने की तैयारी है। पर्यटकों की सुविधा के लिए बफर में सफर का कांसेप्ट शुरू किया है। रातापानी और माधव नए टाइगर रिजर्व बनाए गए हैं।

यूनियन कार्बाइड के कचरे में घातक मरक्यूरी, हाईकोर्ट ने जताई गंभीर चिंता, याचिका दायर

जबलपुर   यूनियन कार्बाइड का जहरीला पीथमपुर में नष्ट किए जाने के बाद अब उसकी राख चिंता का विषय बनी हुई है. इस मामले में दायर एक अन्य याचिका की सुनवाई के दौरान बताया गया कि जहरीले कचरे से निकली 900 मीट्रिक टन राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंताजनक हैं. राख में मरक्यूरी है, जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जपान व जर्मनी के पास है. ऐसे में इसकी घनी आबादी के पास लैंडफिलिंग करना भविष्य में खतरनाक साबित हो सकता है. यूनियन कार्बाइड की राख को लेकर याचिका साल 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा था. पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कचरे के विनष्टीकरण की रिपोर्ट पेश की गई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने राख को घनी आबादी के पास लैंडफिल किए जाने पर रोक लगा दी थी. इसी दौरान एक अन्य याचिका दायर की गई, जिसमें राख को भविष्य के लिए खतरनाक बताया गया. इसके बाद हाईकोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ किए जाने के आदेश जारी किए थे. राख को दूर ले जाने पर विचार करे सरकार हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में कहा था कि जहरीले कचरे की राख की लैंडफिलिंग के आदेश के बावजूद भी सरकार ने दूसरे स्थान के संबंध में जानकारी नहीं दी. सरकार द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया गया है. राख अभी भी जहरीली है और अगर इसे ठीक से नहीं रोका गया तो भूकंप जैसी किसी प्राकृतिक आपदा के कारण उसे रोकने वाला स्ट्रक्चर गिरने पर एक और आपदा हो सकती है. ऐसे में राज्य सरकार को राख ऐसी जगहों पर ले जाने की संभावना पर विचार करना चाहिए जो इंसानी बस्तियों, पेड़-पौधों और पानी के सोर्स से बहुत दूर हों. कंटेनमेंट सिस्टम टूट भी जाए, तो भी इसके बुरे असर बहुत कम हों. यूनियन कार्बाइड की राख में मरक्युरी की मात्रा अधिक इंटरविनर याचिका में कहा गया है कि जहरीले कचरे में मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड रिपोर्ट में बताई गई तय लिमिट से मरक्यूरी की मात्रा अधिक है. वहीं, इस मामले में सरकार की ओर से अधिवक्ता ने एक एनिमेटेड वीडियो प्रेजेंटेशन के साथ यह दलील दी कि जहरीली राख को रोकने के लिए जो स्ट्रक्चर बनाया है, सबसे मॉडर्न सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है. हालांकि, हाईकोर्ट इस बात से संतुष्ट नहीं हुआ कि प्रस्तावित कंटेनमेंट स्ट्रक्चर किसी भी तरह की जियो-टेक्टोनिक एक्टिविटी या भूकंप से होने वाले नुकसान से पूरी तरह सुरक्षित है. युगलपीठ ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बारिश में नई सड़कें बह जाती हैं और पुल गिर जाते हैं, और इससे भी बुरा जब ओवरब्रिज 90 डिग्री मोड़ के साथ बनाए जाते हैं, जिससे यह राज्य पूरे देश में मजाक का पात्र बन जाता है. ऐसे राज्य की इंजीनियरिंग की काबिलियत पर पूरा भरोसा करना तबाही को न्योता देना हो सकता है. इस कोर्ट की चिंता को सरकार का मजाक उड़ाने जैसा नहीं समझना चाहिए, बल्कि कोर्ट जो सावधानी बरत रहा है, वह एक बार चोट खाने के बाद दूसरी बार बचने जैसा है. कोर्ट ने याद दिलाया भोपाल गैस कांड का वो दिन हाईकोर्ट में युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी जारी रखते हुए कहा कि भोपाल में फैक्ट्री तब तक सुरक्षित थी? जब तक कोई मुसीबत नहीं आई और लगभग बीस हजार लोगों की जान एक पल में चली गई. पांच लाख दूसरे लोगों को अपनी बाकी की जिंदगी सांस लेने और कई तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ा रहा है. इसलिए, जब जहरीली राख को रोकने की बात आती है, शायद आखिरी सांस तक, तो कोई भी सावधानी ज्यादा नहीं होती. इसलिए जहरीली राख की लैंडफिलिंग साइट को आबादी के पास रखना कोर्ट को मंजूर नहीं. लैंडफिलिंग के लिए अलग जगह चुनें : हाईकोर्ट युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि जहरीली कचरे की रखा की लैंडफिलिंग के लिए सबसे अच्छी टेक्निकल एक्सपर्टीज पाने ग्लोबल टेंडर निकालाजाए. कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में भी जानकारी प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं.इसके अलावा लैंडफिलिंग के लिए दूसरा स्थान चयन करने के भी निर्देश दिए हैं. राख में मरक्यूरी, ये इंसानों के लिए कितनी खतरनाक? WHO के मुताबिक, '' मरक्यूरी यानी पारा इंसानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है. आमतौर पर हर व्यक्ति किसी न किसी स्तर पर मरक्यूरी के संपर्क में आता है, हालांकि इसकी मात्रा बहुत कम होती है. लेकिन मरक्यूरी की मात्रा अधिक हो और ये सांस या भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाए तो ये फेफड़े और दिमाग को डैमेज कर देती है. दूषित मछलियों और शेलफिश में भी मरक्यूरी की मात्रा अधिका होती है, जिससे किडनी भी खराब हो सकती हैं. यह प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी बेहद खतरनाक है, क्योंकि ये गर्भ में पल रहे बच्चे और जीवन के शुरुआती दिनों में बच्चे के विकास में बाधा डाल सकती है.''

मोहन सरकार के दो साल का रिपोर्ट कार्ड: मुख्यमंत्री आज देंगे जनता को सरकार की प्रगति का ब्योरा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर 12 दिसंबर को जनता के सामने कार्यकाल का लेखा जोखा पेश करेंगे। इस मौके पर वे भोपाल में पत्रकार वार्ता को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि पत्रकार वार्ता में वे सरकार की दो वर्षों की उपलब्धियों, प्रमुख परियोजनाओं और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से जानकारी साझा करेंगे। मुख्यमंत्री की पत्रकार वार्ता के अगले दिन, 13 दिसंबर को, प्रभारी मंत्रीगण अपने-अपने संभागीय और जिला मुख्यालयों में जिला विकास सलाहकार समितियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद मीडिया को संबोधित कर अपने क्षेत्रों में हुई उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी देंगे। 14 दिसंबर को बाकी जिलों में भी प्रभारी मंत्री जिला सलाहकार समितियों की बैठक कर पत्रकार वार्ता करेंगे। इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे जिला स्तर पर हुए कार्य, उपलब्धियां और आगामी कार्ययोजना की पूरी जानकारी साझा करें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही सभी विभागों की समीक्षा कर उनकी उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने, सड़क और पुल निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार, कृषि और उद्योग में नवाचार तथा रोजगार सृजन जैसी प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है। यह आयोजन सरकार की पारदर्शिता और जनता के साथ संवाद को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम होगा। 

मुख्यमंत्री मोहन यादव 14 दिसंबर को इंदौर में मेट्रो, बीआरटीएस और सड़कों के निर्माण पर लेंगे अहम निर्णय

 इंदौर  इंदौर में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे। रेसीडेंसी कोठी में आयोजित बैठक में मुख्य मुद्दा मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड रुट का रहेगा। पिछले दिनों नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजवर्गीय ने मेट्रो ट्रेन रुट का दौरा किया था। तब उन्होंने मेट्रो रुट बंगाली काॅलोनी से अंडग्राउंड करने पर जोर दिया है। मेट्रो के रुट में बदलाव होगा या फिर पुराना रुट ही रहेगा। इस पर मुख्यमंत्री फैसला ले सकते है। इसके अलावा बीआरटीएस की बस रेलिंग हटाने में हो रही देरी को लेकर भी बैठक में चर्चा होगी। 9 माह तक रेलिंग नहीं हटाए जाने पर हाईकोर्ट भी नाराज हो चुका है। बीआरटीएस पर नए ब्रिज भी बनाए जाना है। इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी आ चुकी है। इस पर भी फैसला हो सकता है। इसके अलावा अन्य प्रोजेक्टों पर भी चर्चा होगी। बैठक में सभी विभागों के अफसर भी मौजूद रहेंगे। नर्मदा-कालीसिंध लिंक परियोजना और संचालित हो रही नर्मदा-शिप्रा लिंक योजना के बारे में भी बात होगी। सिंहस्थ को लेकर शहर में हो कामों की समीक्षा भी की जाएगी। मास्टर प्लान की 23 सड़कों के लिए काम भी शहर में शुरू हो चुके है, लेकिन कुछ सड़कों के लिए अभी बाधक निर्माण नहीं टूटे है।  मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशनों का काम शुरू इंदौर में मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशनों का काम भी शुरू हो गया है। एमजी रोड के समीप भाऊ शिंदे खेल परिसर में स्टेशन के लिए खुदाई भी शुरू हो गई है। मेट्रो कार्पोरेशन ने खुदाई के लिए मशीनें भी भेज दी है। इसके अलावा दूसरी जगहों पर भी अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए सर्वे हो गया है। आठ से अधिक मेट्रो स्टेशन बनाए जाना है। यदि मेट्रो के अंडरग्राउंड रुट में बदलाव होता है तो उनकी संख्या और बढ़ सकती है।  

म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग को देगा 400 ईव्हीएम

राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव की उपस्थिति में हुआ एमओयू भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी के तहत किराये पर सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग को 400 ईव्हीएम उपलब्ध करायेगा। इस संबंध में गुरुवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव की उपस्थिति में सचिव मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह और सचिव सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग सुश्री ग्लोरिया नामचू ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव ने कहा कि ईव्हीएम शेयरिंग के मामले में मध्यप्रदेश पॉयनियर स्टेट है। उन्होंने बताया कि ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी के तहत छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग को ईव्हीएम किराये पर दी जा चुकी हैं। इसी तरह जम्मू-कश्मीर एवं महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन को भी ईव्हीएम किराये पर देने के लिये एमओयू हो चुका है। अन्य राज्यों के साथ भी एमओयू की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी को-ऑपरेटिव फेडरेलिजम का बेहतर उदाहरण है। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि मध्यप्रदेश में स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज के एमओयू से सिक्किम और मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के बीच संबंध और सुदृढ़ होंगे। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2014-15 में स्थानीय निर्वाचन में ईव्हीएम का उपयोग शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि ईव्हीएम के माध्यम से चुनाव कराने में सहूलियत होने के साथ ही पारदर्शिता भी बनी रहती है। श्री सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ को 2 हजार ईव्हीएम और महाराष्ट्र को 25 हजार कंट्रोल यूनिट और एक लाख बेलेट यूनिट किराये पर दी गयी हैं। सचिव सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग सुश्री नामचू ने इस एमओयू पर कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी सिक्किम जैसे छोटे राज्यों के लिये बहुत उपयोगी है। सुश्री नामचू ने कहा कि इससे राज्यों का आर्थिक बोझ कम होगा और सरलता से स्थानीय चुनाव कराये जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपयोग की जा रहीं निर्वाचन की अन्य नवीनतम तकनीकों के बारे में भी जानकारी मिलेगी, जिसका उपयोग सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग करेगा। ईव्हीएम को किराये पर देने के लिये प्रति कंट्रोल यूनिट 400 एवं प्रति बीयू 200 रुपये की दर निर्धारित है। किराये की राशि अग्रिम रूप से ली जाती है। ईव्हीएम के परिवहन का पूरा व्यय राज्य निर्वाचन आयोग सिक्किम वहन करेगा। ईव्हीएम मशीन आवश्यक सुरक्षा के साथ ले जानी होगी एवं निर्वाचन के बाद स्वयं ही मध्यप्रदेश के संबंधित जिलों में जमा करानी होगी। इस दौरान सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री राजेन राय और उप संचालक श्री टी.टी. लेपचा, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री मनोज मालवीय, श्री सुतेश शाक्य, सुश्री संजू कुमारी, श्री मुकुल गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।