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देशभर के मेधावी व आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को UGC का सहारा, मिलेगी भारी वित्तीय मदद

ग्वालियर आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों के लिए आशा छात्रवृत्ति कार्यक्रम 2025 शुरू किया गया है। इस योजना के तहत देशभर के 23 हजार 230 छात्रों को शिक्षा के स्तर के अनुसार 15 हजार रुपये से 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। छात्रवृत्ति का लाभ स्कूली शिक्षा के साथ उच्च शिक्षा के छात्रों को भी मिलेगा। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे इस योजना की जानकारी छात्रों तक व्यापक रूप से पहुंचाएं, ताकि कोई भी जरूरतमंद छात्र आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। UGC ने SBI के साथ शुरू की योजना दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भारतीय स्टेट बैंक के साथ इस योजना को शुरू किया है। यह छात्रवृत्ति योजना भारतीय स्टेट बैंक की प्लेटिनम जुबली वर्षगांठ के उपलक्ष्य में शुरू की गई है, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। एसबीआई फाउंडेशन की इस योजना के अंतर्गत कुल 23 हजार 230 विद्यार्थियों को चयनित किया जाएगा, जिनमें से 20 हजार छात्र स्कूल स्तर (कक्षा नौ से 12) के होंगे और तीन हजार 230 विद्यार्थी देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों के होंगे।  बता दें कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों को शिक्षा जारी रखने में सहायता देना है जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने की स्थिति में आते हैं। एसबीआई फाउंडेशन ने इस वर्ष लगभग 90 करोड़ रुपये का फंड स्कालरशिप के लिए निर्धारित किया है। छात्र sbiashascholarship.co.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पात्रता और आवेदन की शर्तें यूजीसी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस स्कॉलरशिप के लिए-आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए। पिछली कक्षा में न्यूनतम 75% अंक या 7.0 सीजीपीए अनिवार्य है। स्कूल छात्रों की पारिवारिक वार्षिक आय तीन लाख या उससे कम होनी चाहिए। कॉलेज/विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ने वाले छात्रों की आय सीमा छह लाख रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है। किन छात्रों को लाभ मिलेगा यह स्कॉलरशिप कई स्तरों पर दी जाएगी कक्षा नौ-12 के छात्र। देश के एनआईआरएफ टॉप 300 या नैक ए रेटेड संस्थानों में पढ़ रहे स्नातक,स्नातकोत्तर और एमबीबीएस छात्र। आईआईटी और आईआईएम के छात्र। एससी/एसटी छात्र जो विदेश के टॉप 200 विश्वविद्यालयों में मास्टर डिग्री कर रहे हों। यूजीसी ने दिए ये निर्देश यूजीसी सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे स्कॉलरशिप से संबंधित जानकारी छात्रों और संकाय सदस्यों तक पहुंचाएं।-संस्थान की वेबसाइट, नोटिस बोर्ड, इंटरनेट मीडिया, न्यूजलेटर आदि पर इसे प्रमुखता से प्रकाशित करें।-एसबीआई फाउंडेशन द्वारा भेजी गई स्कालरशिप सामग्री, पोस्टर और क्यूआर कोड को छात्रों में वितरित करें।

MP में पराली संकट गहराया: सख्ती के बावजूद नहीं थम रही आग, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी

भोपाल सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और कई शहरों में प्रदूषण का खतरनाक स्तर होने के बाद भी पराली जलाने की घटनाएं रुक नहीं पा रही हैं। स्थिति यह है कि नवंबर माह में अब तक इसके लिए संवेदनशील पांच बड़े राज्यों में पराली जलाने के 21 हजार 266 मामले सामने आए हैं। इनमें अकेले मध्य प्रदेश में 11 हजार 442 यानी 50 प्रतिशत से अधिक मामले हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा सैटेलाइट से लिए गए चित्रों के अनुसार, चौंकाने वाली बात यह है कि गत 16 नवंबर को एक ही दिन में 1520 मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए हैं। पराली जलाने वालों पर कार्रवाई में ढिलाई इसी माह नवंबर में उत्तर प्रदेश में 3780, पंजाब में 3434, राजस्थान में 2104, हरियाणा में 3218 और दिल्ली में दो मामले दर्ज किए गए। बता दें कि सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से पराली जलाने के मामलों की निगरानी और पुष्टि की जाती है, लेकिन ऐसे मामले लगातार सामने आने के बाद भी पराली जलाने वालों पर कार्रवाई में ढिलाई की जा रही है। मध्य प्रदेश का उदाहरण लें तो राजधानी भोपाल तक में एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा रही है। यह स्थिति तब है जब प्रदेश के चार महानगर- भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर की हवा में आए दिन प्रदूषण गहरा जाता है।   इन महानगरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक या मध्यम श्रेणी में है। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा सभी कलेक्टरों को पराली जलाने के मामले में कार्रवाई के निर्देश के बाद कुछ दिन प्रशासन ने सतर्कता दिखाई लेकिन फिर ढिलाई शुरू हो गई। पिछले पांच दिन में सिर्फ दतिया में एक किसान के विरुद्ध एफआईआर की जानकारी सामने आई है। अन्य सालों से तुलना करें तो नवंबर अंत तक पराली जलाने के मामलों की यही स्थिति रह सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे कमी आएगी। हालांकि, तब तक आंकड़ा 15 हजार से अधिक पहुंच जाएगा, जो मध्य प्रदेश में अब तक की सर्वाधिक संख्या होगी। यह अच्छी बात है कि अभी कोहरा नहीं पड़ रहा है नहीं तो पराली के धुआं से प्रदूषण का स्तर वर्तमान से डेढ़ से दो गुना तक बढ़ सकता था। मध्य प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में एक्यूआई का स्तर शहर — एक्यूआई– श्रेणी भोपाल- 289 – खराब ग्वालियर – 289 – खराब जबलपुर -207 – खराब सागर – 236 – खराब इंदौर – 133 – मध्यम देवास – 178 – मध्यम नोट : एक्यूआई का स्तर 0 से 50 को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक माना जाता है। इस माह पिछले सात दिन में पांच राज्यों में पराली जलाने के मामले तिथि– मप्र– उप्र — पंजाब– राजस्थान — हरियाणा 21 —1125 — 250 — 30 — 82 — 11 20 — 625 — 98 — 12 –58– 2 19 — 658 — 115 — 16 — 90– 11 18 — 641 — 377– 15– 65 — 6 17 — 822 — 384 — 31 — 103 — 10 16 — 1520 — 461 — 95 — 125 — 47

वंदे भारत अपग्रेड: इंदौर–नागपुर रूट पर 16 कोच की नई ट्रेन, सीट क्षमता दोगुनी

इंदौर रेलवे बोर्ड ने इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस में कोचों की संख्या बढ़ाकर 16 कर दी है। 24 नवंबर से यह ट्रेन दोगुनी सीटों के साथ चलेगी, जिससे लगभग 1200 यात्री यात्रा कर सकेंगे। व्यस्त मार्ग पर यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, जिससे यात्रियों को आरामदायक सफर मिलेगा।     इंदौर-नागपुर वंदे भारत में कोच बढ़े।     सीट क्षमता हुई दोगुनी, 1200 यात्री।     24 नवंबर से नया बदलाव होगा लागू।  इससे प्रतिदिन 600 अतिरिक्त यात्रियों को आरामदायक और तेज यात्रा का अवसर मिलेगा—जो त्योहारों और भीड़भाड़ के समय राहत का बड़ा कारण बनेगा। व्यस्ततम रूट, मांग लगातार बढ़ रही थी इंदौर–भोपाल–नागपुर रेल मार्ग मध्य भारत के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूटों में शामिल है। विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, कारोबारी और ट्रैवलर्स की भारी आवाजाही के कारण वंदे भारत में सीटें अक्सर फुल रहती थीं। वेटिंग लिस्ट भी लगातार बढ़ रही थी। इंदौर और भोपाल शिक्षा व व्यापार केंद्र हैं, वहीं नागपुर एक बड़ा औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब है। ऐसे में 16 कोच का स्थायी विस्तार यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस दिन से मिलेगा नई सुविधा का लाभ ट्रेन नंबर 20911 इंदौर-नागपुर व ट्रेन नंबर 20912 नागपुर-इंदौर में 24 नवंबर से इस सुविधा का लाभ यात्रियों को मिलेगा। वंदे भारत ट्रेन की एग्जीक्यूटिव क्लास के कोच में 52 तो चेयरकार कोच में 78 सीटें होती हैं। कोच बढ़ने से सीटों की संख्या भी बढ़ेगी। वंदे भारत (Indore Nagpur Vande Bharat Train) का 16 कोच वाला अपग्रेडेड रैक बुधवार को दिल्ली से इंदौर पहुंचा है। त्योहारी सीजन में फुल थी ट्रेन कोचिंग डिपो में इसका (Indore Nagpur Vande Bharat Train) मेंटेनेंस किया जा रहा है। मालूम हो, पहले यह ट्रेन इंदौर से भोपाल चल रही थी। यात्रियों की संख्या कम होने से इसे नागपुर तक कर दिया गया। त्योहारी सीजन में यह ट्रेन फुल रही। यात्रियों को वेटिंग मिली। कोच दोगुना होने से यात्रियों को आसानी से सीट मिल जाएगी। वंदे भारत ट्रेन में बीते चार माह से सीटें फुल जा रही थी। इस कारण रेलवे ने वंदे भारत के कोच बढ़ा दिए है। इंदौर से नागपुर तक ट्रेन चलाने की मांग हमेशा से उठती रहती है। दो साल पहले इंदौर से भोपाल के बीच वंदे भारत ट्रेन का संचालन शुरू किया था। यह ट्रेन सुबह सवा छह बजे जाती है। इंदौर से भोपाल तक के लिए इस ट्रेन को कम यात्री मिलते थे। बाद में वंदेभारत ट्रेन का विस्तार इंदौर से नागपुर तक किया गया। इसके बाद ट्रेन को अच्छे यात्री मिलने लगे। त्यौहार के समय इस ट्रेन में सीट नहीं मिलती है। पहले दिल्ली भेज दिए थे रैक वंदे भारत के लिए सितंबर माह में रैक आए थे, लेकिन उसका उपयोग रेलवे ने दिल्ली पटना ट्रेन के लिए कर दिया था। अब वे रैक वापस इंदौर भेजे है। दो दिन पहले रैक इंदौर लाए गए। अब 24 नवंबर से 16 कोच के साथ ट्रेन इंदौर से नागपुर के लिए रवाना होगी। उधर इंदौर नगर निगम ने भी इंदौर से नागपुर के लिए बस सेवा शुरू की है। पिछले दिनों हरी झंडी देकर मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने बस को रवाना किया था।  

राज्य के 15 अफसरों को IAS–IPS में प्रमोशन, पांच पुलिस अफसरों का चयन IPS अवॉर्ड के लिए

भोपाल मध्यप्रदेश में राजधानी दिल्ली में हुई डीपीसी (Departmental Promotion Committee) की अहम बैठक में राज्य सेवा के 1997-98 बैच के 15 अधिकारियों के प्रमोशन पर विचार किया गया। इसमें राज्य पुलिस सेवा के पांच अफसरों को IPS अवॉर्ड के लिए चुना गया है। दो वरिष्ठ अफसर अटके जांच के कारण वरिष्ठता सूची में शीर्ष पर आए सीताराम ससत्या और अमृत मीणा के नाम पर प्रारंभिक स्तर पर पेच फंस गया, क्योंकि दोनों पर विभागीय जांच लंबित है। सूत्रों के अनुसार, अमृत मीणा को प्रोविजनल IPS बनाया गया है — यानी दो माह बाद होने वाली अगली डीपीसी तक उन्हें क्लीनचिट लेनी होगी, वरना प्रमोशन स्वतः निरस्त माना जाएगा। वहीं सीताराम ससत्या को प्रोविजनल सूची में भी स्थान नहीं मिला। पहले नोटिफिकेशन निरस्त, अब दोबारा डीपीसी इससे पहले 12 सितंबर को डीपीसी हुई थी, लेकिन नोटिफिकेशन जारी न होने और तकनीकी कारणों से प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद 21 नवंबर को दोबारा डीपीसी की गई, जिसमें प्रमोशन को लेकर अंतिम विचार हुआ। इन अधिकारियों को मिला IPS अवॉर्ड सूत्रों के मुताबिक इस डीपीसी में निम्न अफसरों का नाम IPS अवॉर्ड सूची में शामिल किया गया है: अमृत मीणा (प्रोविजनल) विक्रांत मुराब सुरेंद्र कुमार जैन आशीष खरे राजेश रघुवंशी हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। डीपीसी में शामिल प्रमुख अधिकारी डीपीसी की बैठक में MP मुख्य सचिव अनुराग जैन, एसीएस होम शिव शेखर शुक्ला, डीजीपी कैलाश मकवाना शामिल हुए।

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा- भारतीय परम्परा में खेल, सामाजिक प्रबंधन और जीवन पद्धति का अभिन्न अंग

भोपाल  भारतीय परम्परा में खेल, सामाजिक प्रबंधन और जीवन पद्धति का अभिन्न अंग था। हमारे पूर्वजों ने खेलों को हजारों वर्षों पूर्व स्थापित किया था और अतीत के उन कालखंडों में हम खेलों के क्षेत्र में अग्रणी थे। खेल के परिप्रेक्ष्य में भारतीय दृष्टि व्यापक थी। भारतीय दृष्टि में खेल, केवल मनोरंजन नहीं बल्कि शारीरिक और बौद्धिक विकास के माध्यम होते थे। मनुष्य के समग्र विकास की दृष्टि से भारत में खेल खेले जाते थे। यह बात उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने शनिवार को भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के ज्ञान-विज्ञान भवन में क्रीड़ा भारती प्रदेश समिति द्वारा आयोजित "खेल सृष्टि-भारतीय दृष्टि" विषय पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ कर कही। मंत्री श्री परमार ने संगोष्ठी में "भारतीय दर्शन में खेलों के पुरातन इतिहास एवं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में खेलों में भारतीय दृष्टि के महत्व" के आलोक में अपने विचार व्यक्त किए। उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि विश्व एक परिवार है। "वसुधैव कुटुंबकम्" का दृष्टिकोण विश्व को भारत की देन है। कोविड के संकटकाल में भारत ने आत्मानुशासन का पालन करते हुए, विश्व के विभिन्न देशों को निशुल्क वैक्सीन उपलब्ध करवाकर इसी दृष्टिकोण का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत किया है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि खेल के मैदानों से सेवा का संकल्प पूरा होगा। खेल से शरीर और मन स्वस्थ होता है और स्वस्थ मन से खिलाड़ी समाज में सेवा का संकल्प पूरा करेंगे और प्रेरणा का केंद्र बनेंगे। मंत्री श्री परमार ने संवेदना के साथ खेलों को आगे बढ़ाने और वैचारिक प्रवाह को सतत् जारी रखने का आह्वान भी किया। उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में, परंपरागत खेलों का समावेश किया है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि हर खेल की अपनी अलग दृष्टि होती है। उन्होंने तीरंदाजी का उदाहरण देकर कहा कि इस खेल में एकाग्रता की आवश्यकता होती है। यह तीरंदाजी के खेल की अपनी विशिष्ट दृष्टि है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि समय के सापेक्ष हमने विभिन्न विदेशी खेलों को भी हमने अपनाया है, जो भारतीयता के साथ आत्मसात करने की सीख देता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि क्रीड़ा भारती "क्रीड़ा से निर्माण चरित्र का, चरित्र से निर्माण राष्ट्र का" के विचार को चरितार्थ कर रही है। मंत्री श्री परमार ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए समिति को बधाई भी दी। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में क्रीड़ा भारती श्री अशोक अग्रवाल ने कहा कि खेल से राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सद्भाव सुदृढ़ होता है। खेलों में भारतीय दृष्टि केंद्रित शुचिता एवं चरित्र निर्माण की आवश्यकता हैं। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी, पारम्परिक एवं ग्रामीण खेलों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करना, खिलाड़ियों में खेल भावना, नैतिक आचरण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ खेल संस्कृति का विकास करना एवं खेलों के माध्यम से खिलाड़ी रूपी नागरिकों में भारतीय दृष्टि केंद्रित राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना था। क्रीड़ा भारती प्रदेश समिति के अध्यक्ष श्री दीपक सचेती, राष्ट्रीय नियामक मंडल सदस्य श्री भीष्म सिंह राजपूत, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन, कुलसचिव डॉ अनिल शर्मा एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ आलोक मिश्रा सहित क्रीड़ा भारती के विभिन्न पदाधिकारीगण, खेल विधा से जुड़े विविध विषयविद, प्राध्यापकगण, क्रीड़ा अधिकारी एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित थे।  

भावी वैद्यों में मानवीय दृष्टिकोण स्थापित करने का कार्य करें प्राध्यापक

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। आने वाले समय में, प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा अग्रणी स्थान पर होगी और इसमें हमारे प्राध्यापकों एवं चिकित्सकों के समर्पण की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। मंत्री श्री परमार शनिवार को, भोपाल के मानसरोवर समूह के मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के सभागृह में, फैकल्टी डेवलपमेंट को लेकर आयोजित एकदिवसीय "फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला" का शुभारम्भ कर, संबोधित कर रहे थे। आयुष मंत्री श्री परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने, प्रदेश में विश्वस्तरीय आयुर्वेद महाविद्यालय खोले जाने का निर्णय लिया है और इसके लिए चिकित्सकों और प्राध्यापकों के पद भी सृजित होंगे। मंत्री श्री परमार ने समस्त आयुर्वेद प्राध्यापकों से आह्वान करते हुए कहा कि भारतीय दर्शन "वसुधैव कुटुंबकम्" के मंत्र को आयुर्वेद की पैथी के माध्यम से विश्वमंच तक पहुंचाएं। मंत्री श्री परमार ने कहा कि भावी आयुर्वेद चिकित्सकों एवं वैद्यों में मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने का कार्य करें। विश्व आयुर्वेद परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. महेश कुमार व्यास ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि सही चिकित्सा तभी संभव है जब चिकित्सकों और प्राध्यापकों को सही निर्देशन मिले। प्रमुख वक्ता के रूप में महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइंस के बोर्ड ऑफ रिसर्च के सदस्य डॉ. किरण टवलारे ने योग्यता एवं उत्कृष्टता के परिप्रेक्ष्य में, मुख्य मानचित्रण प्रस्तुत किया। आईजीपी आयुर्वेद कॉलेज, नागपुर की प्राध्यापक डॉ. कल्पना टवलारे ने खेती और उद्देश्यों की दक्षता पर प्रकाश डाला। मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग सिंह राजपूत ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। मानसरोवर समूह के आयुर्वेद संचालक डॉ. बाबुल ताम्रकार ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह एकदिवसीय कार्यशाला; श्री साईं ग्रामोत्थान समिति, मानसरोवर समूह के मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, श्री साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन और विश्व आयुर्वेद परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई है। कार्यशाला में विश्व आयुर्वेद परिषद् के संरक्षक वैद्य गोपाल दास मेहता, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. ए एस यादव, श्री साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन की प्राचार्य डॉ. मनीषा राठी, फैकल्टी ऑफ आयुर्वेद के प्राचार्य डॉ. श्रीकांत पटेल, मानसरोवर समूह के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर सचिन जैन सहित देश भर से पधारे 300 से अधिक प्राध्यापक उपस्थित थे।  

भावांतर योजना में सोयाबीन का मॉडल रेट बढ़कर हुआ 4285 रुपए

भोपाल  भावांतर योजना 2025 के अंतर्गत  सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए आज 22 नवंबर को 4285 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट और न्यूनतम समर्थन मूल्य के भावांतर की राशि राज्य सरकार द्वारा दी जा रही है। सोयाबीन के मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी है। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए, 15 नवंबर को 4225 रुपए, 16 नवंबर को 4234 रुपए, 17 नवंबर को 4236 रुपए, 18 नवंबर को 4255 रुपए, 19 नवंबर को 4263 रुपए, 20 नवंबर को 4267 रुपए 21 नवंबर को 4271 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी हुआ था। राज्य सरकार की गारंटी है कि किसानों को हर हाल में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य की 5328 रुपए  प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी।  

प्रारंभिक कक्षाओं का अर्धवार्षिक मूल्यांकन अब 8 दिसंबर से

राज्य शिक्षा केन्द्र ने जारी की नई समय सारिणी भोपाल  प्रदेश की शासकीय और अशासकीय शालाओं में कक्षा 3 से 8 के लिए सोमवार 24 नवम्बर से आयोजित होने वाला अर्धवार्षिक मूल्यांकन की तिथि बढ़ाई गई है। अब मूल्यांकन का कार्य 8 दिसम्बर से 13 दिसम्बर 2025 के मध्य होगा। राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक श्री हरजिंदर सिंह ने वर्तमान में प्रदेश में संचालित चुनावी प्रक्रिया एसआईआर में शासकीय कर्मचारियों की व्यस्तता के कारण कक्षा 3 से 8 के अर्धवार्षिक मूल्यांकन की तिथियों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में नवीन समयसारिणी जारी की है।  

मध्यप्रदेश को बनाए वैज्ञानिक अनुसंधान का हब : मंत्री सारंग

भोपाल में राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का हुआ आयोजन भोपाल खेल युवा कल्याण एवं सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश के केन्द्र में है यहां की सारी परिस्थितियां विज्ञान अनुसंधान के अनुकूल है। इस कारण केन्द्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को विज्ञान अनुसंधान हब के रूप में विकसित किया जा सकता है। यहां देश के अन्य राज्यों में हो रहे वैज्ञानिक अनुसंधानों से बेहतर समन्वय किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेश में बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी के आयोजन को महत्वपूर्ण क्षण बताया। मंत्री श्री सारंग शनिवार को भोपाल में 59वीं बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। बाल विज्ञान प्रदर्शनी में 23 राज्यों 7 केन्द्र शासित प्रदेशों और 7 अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के 800 से अधिक बाल वैज्ञानिक और शिक्षकों ने संयुक्त रूप से 240 साइंस मॉडल प्रदर्शित किये। इस मौके पर महापौर भोपाल नगर निगम श्रीमती मालती राय भी मौजूद थी। बाल वैज्ञानिकों में भारत की उज्ज्वल तस्वीर मंत्री श्री सारंग ने कहा कि बाल वैज्ञानिकों ने साइंस पर केन्द्रित नवाचार करते हुए मॉडल प्रदर्शित किये हैं। इससे हमें भारत के भविष्य की उज्ज्वल तस्वीर दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि बाल वैज्ञानिकों को सतत प्रोत्साहन दिया जाये तो इनमें से किसी को भी नोबल पुरस्कार मिल सकता है। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अनुसंधान को महत्व देते हुए नया नारा 'जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान और जय अनुसंधान' दिया है। इस नारे में प्रधानमंत्री ने अनुसंधान को भी महत्व दिया है। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि राज्य सरकार ने मेडिकल की पढ़ाई को हिन्दी माध्यम से किये जाने के लिये मेडिकल की पुस्तकें हिन्दी में तैयार की हैं। इसकी प्रसंशा देश भर में हुई है। नई शिक्षा नीति में मातृ भाषा को महत्व सचिव केन्द्रीय स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग नई दिल्ली श्री संजय कुमार ने राष्ट्रीय बाल विज्ञानिक प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिये स्कूल शिक्षा विभाग को बधाई दीं। नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए सचिव श्री संजय कुमार ने कहा, "इसमें जोर दिया गया है बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मातृ भाषा में होना चाहिए"। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक काल में बच्चों का मस्तिष्क विकास मातृ भाषा में ही होता है। सचिव श्री संजय कुमार ने अंग्रेजी को एक विषय के रूप में पढ़ने और अधिक से अधिक भाषाओं के सीखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में जो बच्चा पहली कक्षा में आता है वह कम से कम 12वीं कक्षा तक अनिवार्य रूप से पढ़ाई करे। केन्द्रीय सचिव श्री संजय कुमार ने बच्चों को स्कूल में आनंद पूर्ण माहौल में शिक्षा दिये जाने की भी बात कही। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद नई दिल्ली श्री दिनेश प्रसाद सकलानी, निदेशक राष्ट्रीय नवप्रर्वतन प्रतिष्ठान गांधी नगर गुजरात डॉ. अरविंद सी. रानाडे, एनसीईआरटी प्रो. सुनीता फरक्या ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में सचिव स्कूल शिक्षा श्री संजय गोयल, संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह एवं विभागीय अधिकारी मौजूद थे।  

बड़वानी में हथियार तस्करी पर करारा प्रहार, संयुक्त पुलिस कार्रवाई में 10 आरोपी पकड़े गए

बड़वानी जिले के महाराष्ट्र सीमा क्षेत्र में बसे उमर्टी में एक बार फिर पुलिस कार्रवाई में अवैध हथियार निर्माण की फैक्ट्री पकड़ी गई है। इस बार कार्रवाई में बड़वानी, खरगोन सहित महाराष्ट्र पुलिस के 200 कर्मियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई को अंजाम दिया। संयुक्त कार्रवाई में अलग-अलग टीमों ने दबिश देकर महाराष्ट्र पुलिस के अपराध से संबंधित सात आरोपित और वरला थाना के तीन आरोपितों को धर दबोचा। मौके से एक देशी पिस्टल सहित भारी मात्रा में अवैध हथियार निर्माण करने की सामग्री बरामद की। पहले रैकी कराई, फिर दी दबिश उक्त कार्रवाई के पूर्व खरगोन के मंडलेश्वर, बेडिय़ा और वरला पुलिस टीम से उमर्टी क्षेत्र की रैकी कराई गई। इसके बाद दबिश कार्रवाई को अंजाम दिया गया। कार्रवाई में पुणे पुलिस महाराष्ट्र की टीम का नेतृत्व डीसीपी समय मुंडे, खंडवा-खरगोन की टीम का नेतृत्व एएसपी खरगोन बिट्टू सहगल और बड़वानी टीम का नेतृत्व सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे ने किया। इस दौरान थाना प्रभारी वरला भी अपने बल के साथ मौजूद रहे। बड़वानी पुलिस अधीक्षक जगदीश डावर के निर्देशन में कार्रवाई में वरला थाना प्रभारी नारायण रावल, सेंधवा ग्रामीण प्रभारी ओमप्रकाश चोंगड, सेंधवा शहर बलजीत सिंह बिसेन, उपनिरीक्षक कृष्णा मंडलोई, सहायक उपनिरीक्षक उमाशंकर मंडलोई, गुजरा बारिया सहित खरगोन, खंडवा का बल शामिल रहा।   इन आरोपितों को बड़वानी पुलिस ने पकड़ा     सतवंत सिंह पुत्र बडवानी सिंग टकराना से एक पिस्टल और अवैध हथियार निर्माण करने की सामग्री लोहे के पाइप, भट्टी चलाने का पंखा, कानस, लोहे की प्लेट, सरिए, अवैध हथियार बनाने के सांचे (कुल कीमत 25 हजार रूपये)     अवतार सिंह पुत्र महुसिंग से अवैध हथियार निर्माण करने का लोहे के पाइप, भट्टी चलाने का पंखा, कानस, लोहे की प्लेट, सरिए, अवैध हथियार बनाने के सांचे, लोहे के धारदार फरसे (कुल कीमत 25 हजार रूपये)     नूरबिन सिंह पुत्र हेटसिंग के कब्जे से अवैध हथियार निर्माण करने का लोहे के पाइप, भट्टी चलाने का पंखा, कानस, लोहे की प्लेटे, सरिए, अवैध हथियार बनाने के सांचे, लोहे के धारदार फरसे (कीमत 25 हजार रूपये) इन आरोपितों को ले गई महाराष्ट्र पुलिस     राजपाल सिंह पुत्र प्रधान सिंह     नानक पुत्र अजित सिंह     गुरूचरण सिंह पुत्र आव सिंह     बच्चन सिंह पुत्र दिवान सिंह     जशवीर पुत्र प्रकाश सिंह     प्रवीण पुत्र उत्तम सिंह टकराना     अलोक सिंह पुत्र जोहरसिंह (सभी निवासी उमर्टी, उक्त सभी आरोपियों के कब्जे से करीब दो लाख रुपये मूल्य की हथियार निर्माण सामग्री जब्त की गई।)