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Indore Ragging Case: seniors का हैवानियत भरा टॉर्चर, घंटों बंधक बनाकर कराया नशा, चार छात्र निलंबित

इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला सामने आया है। सीनियर ने धोखे से जूनियरों को अपने निजी फ्लैट पर बुलाया। उनसे मारपीट की और तीन घंटे तक बंधक बनाए रखा। जूनियरों को शराब व सिगरेट पीने पर मजबूर किया गया। इस मामले में एमबीबीएस 2025 बैच के विद्यार्थियों ने यूजीसी की नेशनल एंटी-रैगिंग सेल में शिकायत की है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 बैच के सीनियर छात्रों ने बंधक बना कर उनके साथ ये हरकत की। 4 सीनियर छात्र निलंबित मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि यूजीसी में शिकायत 18 नवंबर को दर्ज कराई थी। 20 नवंबर को कॉलेज की एंटी-रैगिंग सेल ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए और चार सीनियर मेडिकल छात्रों को एक-एक माह के लिए निलंबित कर दिया है।   करीब तीन घंटे तक बंधक बनाकर रखा शिकायत में जूनियरों ने बताया है कि उनके ही एक बैच मेट ने उन्हें झांसे में लेकर फ्लैट तक पहुंचाया। उन्हें यह नहीं पता था कि फ्लैट में सीनियर रहते हैं। इस कारण वे लोग सीनियरों के जाल में फंस गए। उन्हें करीब तीन घंटे तक वहीं रोके रखा गया। मारपीट की गई। जूनियर इतना डरे हुए हैं कि उन्होंने शिकायत में यह भी लिखा है कि कृपया हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करें और कार्रवाई करें। दो वर्षों में रैगिंग के सात मामले सामने आए बता दें कि इससे पहले अक्टूबर माह में भी रैगिंग की घटना सामने आई थी। जिसमें स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में प्रथम वर्ष की पीजी छात्रा ने आरोप लगाया था कि वह इतना परेशान हो गई कि वह मानसिक रूप से प्रताड़ित होकर 14 दिन की छुट्टियों पर अपने घर चली गई। यह भी आरोप लगाया था कि इससे चार माह में उसका वजन 22 किलो कम हो गया था। हालांकि बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली थी। इस मेडिकल कालेज में दो वर्षों में रैगिंग के सात मामले सामने आ चुके हैं।

अस्पताल में अव्यवस्था की पोल खुली: वार्ड के बेड पर बेखौफ सोते मिले कुत्ते

खंडवा मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में अस्पतालों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के किल्लोद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मेल वार्ड में पलंग पर आराम करते लावारिस कुत्तों का चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अस्पताल प्रशासन की भारी लापरवाही उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा ताक पर अस्पताल के वार्ड में कुत्ते बेखौफ घूमने और पलंग पर झुंड में आराम करने का यह वीडियो कर्मचारी के स्वजन ने ही बनाया है। बताया जाता है कि अस्पताल में इलाज तो दूर सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों में अविश्वास के चलते मरीज मजबूरी में ही उपचार के लिए आते हैं। ग्रामीणों को आरोप है की छोटी सी समस्या होने पर भी मरीज को 70 किलोमीटर दूर खंडवा रेफर कर दिया जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सफाई पर भी कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे संक्रमण की आशंका बनी रहती है। वार्ड बाय, नर्सिंग स्टाफ से लेकर चिकित्सक भी समय पर नहीं मिलने की शिकायत ग्रामीणों ने की है। अस्पताल बना आरामगाह अस्पताल के मेल वार्ड के दो पलंग पर तीन-तीन कुत्तों का आराम करना दर्शाता है कि अस्पताल प्रशासन, बीएमओ और सुरक्षा कर्मचारियों की लापरवाही किस हद तक बढ़ चुकी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डीएस शर्मा ने बताया कि अस्पताल में इस मामले में लापरवाही के लिए ड्यूटी डॉक्टर ,नर्स और सफाई कर्मी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। किल्लोद में स्वास्थ्य सेवा और सुविधाओं की पोल खोल रहा यह वीडियो सामने आने के बाद सीएमएचओ डा. ओपी जुगतावत ने जांच के आदेश दिए हैं। 

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में अभ्युदय मध्यप्रदेश के दर्शन, लोक नृत्यों की रही धूम

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में अभ्युदय मध्यप्रदेश के दर्शन, लोक नृत्यों की रही धूम मध्यप्रदेश की विरासत से विकास की झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र मध्यप्रदेश के लोक नृत्यों की रही धूम भोपाल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अग्रसर है। सूक्ष्म, लघु एवं उद्यम मध्यम उद्योग मंत्री  चैतन्य काश्यप ने 44वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश दिवस के अवसर पर यह बाते कहीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 18 नई नीतियां बनाई है, जो निवेशमित्र है और निवेशकों को आकर्षित करती हैं। मंत्री  काश्यप ने मध्यप्रदेश मंडप का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर मंडप का भ्रमण किया। इस अवसर पर मंदसौर की सांसद  सुधीर गुप्ता, और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। अभ्युदय मध्यप्रदेश के दर्शन प्रगति मैदान दिल्ली में चल रहे भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में किए जा सकते हैं। 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' थीम पर 14 से 27 नवंबर तक चलने वाले मेला में मध्यप्रदेश की विरासत से विकास की अद्भुत झांकी, एक जिला-एक उत्पाद और परम्परागत कलाकृतियों आगंतुकों को आकर्षित कर रही है। मध्यप्रदेश मण्डप मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है। यहां कि ऐतिहासिक धरोहर, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल, लोक परम्पराओं की समृद्धि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के संकल्प "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" को न केवल पूरी कर रही है अपितु विश्व पर्यटन मानचित्र पर इसे अग्रणी स्थान दिला रही है। अमेरिका से प्रकाशित एक प्रतिष्ठित पत्रिका ने विगत वर्ष मध्यप्रदेश को दुनिया के टॉप 10 टूरिज्म डेस्टिनेशन में शामिल किया जो गौरव का विषय है। इस सन्दर्भ का उल्लेख प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा 25 दिसम्बर को खजुराहो में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई की जयंती कार्यक्रम में किया गया था 44वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश मण्डप ग्वालियर किला के रूप में तैयार किया गया है। मण्डप के केन्द्र में 64 योगिनी मन्दिर मुरैना के दर्शन होते है। मण्डप को मेले की थीम 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के अनुरूप सजाया गया है। लुटियन्स ने जब भारतीय संसद भवन का डिजाइन तैयार किया था तब उन्होंने भारत वर्ष की प्रसिद्ध इमारतों के डिजाईन बुलवाये थे, जिसमें से उन्होने मुरैना जिले के 64 योगिनी मन्दिर का चयन कर भारतीय संसद भवन का निर्माण कराया था। मण्डप में मध्यप्रदेश की विश्व धरोहार खजुराहों, सांची स्तूप एवं भीमबेटका के साथ प्रस्तावित धरोहर स्थलों, विभिन्न सांस्कृतिक माहोत्सव, हस्तशिल्प, हाथकरघा, जी.आई. ओ.डी.ओ.पी. उत्पादों को भी सजाया गया है। मंडप में इन उत्पादों को होलोग्राफिक इमेज से भी प्रदर्शित किया जा रहा है। इन उत्पादों की बिक्री भी हो रही है। इसमें राज्य शासन की विभिन्न नीतियों एवं उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। मण्डप में औद्योगिक विकास के साथ पर्यटन की भी पूर्ण जानकारी प्रदर्शित की गयी है। मण्डप में सिंहस्थ-2028 की तैयारी को भी दर्शाया गया है। इन्दौर के जी.आई. उत्पाद, चमड़े के खिलौने एवं टेराकोटा के उत्पाद भी प्रदर्शित किये गये है। स्टार्ट-अप भी अपने उत्पादों का प्रचार और विक्रय कर रहे हैं। मध्यप्रदेश मण्डप, निर्मित विरासत, सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय विरासत एवं वन्य जीवन को आकर्षक रूप से प्रदर्शित करता है। मण्डप जहां एक ओर प्रदेश की गौरवशाली विरासत को प्रदर्शित कर रहा है वही दूसरी ओर सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का संदेश भी दे रहा है। यही कारण है कि मेले में इस बार फिर मध्यप्रदेश मण्डप दर्शकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। यहां अभ्युदय मध्यप्रदेश की झलक स्पष्ट देखी जा सकती है। मध्यप्रदेश के लोक नृत्य की धूम मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध लोक नृत्यों की धूम पूरे अंतर्राष्ट्रीय मेले में मची हुई है। मटकी लो नृत्य, पनिहारी लोक नृत्य और बघेली लोक गायन जैसे पारंपरिक नृत्यों ने लोगों का मन मोह लिया है। मटकी लोक नृत्य में महिलाएं रंग-बिरंगे पारंपरिक वेशभूषा में चेहरे पर घूंघट डाले, ढोल की थाप पर एक खास लय में नृत्य करती हैं। यह नृत्य आड़ा-खड़ा और रजवाड़ी के नाम से भी जाना जाता है। पनिहारी लोक नृत्य महिलाओं के जीवन को चित्रित करता है, जो पानी के घड़े दूर से लाती हैं। इसके गीत भी पानी और बारिश के महत्व के बारे में हैं। मती शीला बरनाठी बघेली लोक गायन की प्रसिद्ध लोक गायिका बघेली लोक गायन मध्यप्रदेश के रीवा, सतना, शहडोल, सीधी, अनुग्रह और उमरिया जिलों में प्रचलित है।  

MP के 9 जिलों में डकैतों का कहर जारी, ग्वालियर-चंबल में योगेंद्र गुर्जर गैंग सक्रिय

भोपाल मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल को डकैत मुक्त करने के दावों के बीच सच्चाई यह है कि अब भी प्रदेश के नौ जिले डकैतों से प्रभावित हैं। इनमें महाकोशल-विंध्य के जिले भी शामिल हैं। डकैत प्रभावित जिले ग्वालियर, शिववुरी, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, रीवा, सतना और पन्ना हैं। मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981 प्रदेश के इन जिलों के कुछ थानों, क्षेत्रों में अभी भी लागू है। इनमें से छह जिलों का संपूर्ण क्षेत्र डकैतों से प्रभावित है। ग्वालियर-चंबल में योगेंद्र गुर्जर का गिरोह है सक्रिय ग्वालियर-चंबल अंचल में योगेंद्र गुर्जर का गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह के सरगना योगेंद्र पर राजस्थान और मप्र पुलिस ने 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। प्रदेश में सीमावर्ती राज्यों से अंतरराज्यीय डकैत गिरोह की सक्रियता बढ़ी है। इनमें दस्यु प्रभावित क्षेत्रों में डकैती की घटनाएं अधिक होती है। वर्ष 2020 से लेकर वर्ष 2024 तक डकैती के 300 से अधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। वर्तमान जो डकैत गिरोह सक्रिय हैं वह अन्य राज्यों से आकर डकैती और लूट की घटनाओं को अंजाम देने वालों का समूह है। जिनके विरुद्ध पांच साल में अलग-अलग प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं।   योगेंद्र गिरोह दो राज्यों के लिए बना मुसीबत ग्वालियर-चंबल में योगेंद्र गुर्जर का गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह ने मध्य प्रदेश के साथ ही राजस्थान में भी डकैती की है। पुलिस के साथ इस गिरोह की मुठभेड़ भी हो चुकी है, योगेंद्र व उसके साथी फरार हैं। हालांकि योगेंद्र के गिरोह में शामिल डकैत तहसीला गुर्जर ने राजस्थान के धौलपुर में सरेंडर कर दिया था। वह धौलपुर के मौरोली का रहने वाला है। तहसीला के विरुद्ध धौलपुर के अलावा मध्य प्रदेश के थाना सरायछौला मुरैना, तिघरा ग्वालियर, सेसईपुरा श्योपुर में लूट, अपहरण, हत्या का प्रयास, फिरौती व पुलिस मुठभेड़ के कई मामले दर्ज हैं। डकैती प्रभावित जिले व क्षेत्र जिला–जिले का प्रभावित क्षेत्र ग्वालियर– संपूर्ण जिला ग्वालियर शिवपुरी– संपूर्ण जिला शिवपुरी मुरैना– संपूर्ण जिला मुरैना भिंड– संपूर्ण जिला भिंड श्योपुर– संपूर्ण जिला श्योपुर दतिया– संपूर्ण जिला दतिया रीवा– थाना डभौरा, अतरैला, पनवार, जवा, जनेह, सेमरिया, सिरमौर। सतना– थाना सिंहपुर, चित्रकूट (नया गांव), सभापुर, बरौधा, मझगवां, धारकुंडी। पन्ना– थाना अजयगढ़, धरमपुर, बृजपुर, मडला। नोट- इसमें रेल थाना भी है। जीआरपी ग्वालियर बीजी, ग्वालियर एनजी, जीआरपी मुरैना।

थर्ड लाइन कनेक्टिविटी शुरू, एनकेजे यार्ड और कई रूट प्रभावित, 1800 करोड़ में बनेगा लंबा फ्लाईओवर

कटनी  1800 करोड़ की लागत से मध्य प्रदेश के कटनी के झलवारा स्टेशन से न्यू मझगवां फाटक तक रेलवे द्वारा रेल फ्लाईओवर (ग्रेड सेपरेटर) का निर्माण कराया जा रहा है। अप और डाउन ट्रेक में बनाए जा रहे ग्रेड सेपरेटर के करीब 15.85 लंबे अप ट्रैक का कार्य पूरा हो चुका है। इस अपट्रेक को अब बिलासपुर की ओर से आने वाली थर्ड लाइन से जोड़ने का कार्य रेलवे द्वारा शुरु कराया गया है। इसके लिए एनकेजे यार्ड में सी-केबिन के समीप ब्लॉक लेकर प्री-एएनआई वर्क शुरु कर दिया गया है। आगामी दिनों में एनआई वर्क कर कनेक्टिविटी दी जाएगी, जिससे ट्रेनों का आवागमन भी प्रभावित होगा। अब तक हो चुका इतना काम जानकारी के अनुसार, झलवारा से न्यू मझगवां फाटक तक बने ग्रेड सेपरेटर को सिंगरौली की ओर से आने वाले रेलखंड से दो माह पूर्व ही जोड़ा जा चुका है वहीं अब बिलासपुर की ओर से आने वाली ट्रेनों को ग्रेड सेपरेटर से जोड़ने कार्य शुरु किया गया है। वर्तमान में सिर्फ सिंगरौली की ओर से आने वाली ट्रेनें ही इसमें आगे बढ़ पाती है वहीं अब बिलासपुर लाइन जुड़ने से मालगाड़ियां एनकेजे को बाइपास करते हुए सीधे बीना रेलखंड पर रवाना होंगी। इसके लिए यार्ड रिमॉडलिंग भी की जा रही है। नये सिंग्नल सहित अन्य जरूरी कार्य कराए जाएंगे। ऐसे हुआ है ग्रेड सेपरेटर का निर्माण कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना (Katni Grade Separator project) की कुल लागत लगभग 1800 करोड़ रुपए है। यह ग्रेड सेपरेटर भारत का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट बनने जा रहा है, जो न केवल संरचनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि रेलवे संचालन में भी नई संभावनाओं के ‌द्वार खोलेगा। परियोजना की कुल लंबाई 33.40 किमी है, जिसमें डाउन ग्रेड सेपरेटर 17.52 किमी और अप ग्रेड सेपरेटर 15.35 किमी शामिल हैं। अप साइड 1570 फाउंडेशन और 264 पियर्स व डाउन साइड 2592 फाउंडेशन और 425 पियर्स का निर्माण कराया गया है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल माह में रेलवे ने ग्रेड सेपरेटर के अप ट्रेक में कार्य पूरा होने के बाद कटंगी खुर्द स्टेशन से न्यू मझगवां स्टेशन तक रेलगाड़ी का सफल परिचालन किया था और अब लगातार ग्रेड सेपरेटर से मालगाड़ी दौड़ रही हैं। बरगवां मेमू उमरिया तक जाएगी जानकारी के अनुसार इस ब्लॉक के कारण गाड़ी संख्या 68747/48 बिलासपुर-कटनी-बिलासपुर मेमू व गाड़ी संख्या 61603/04 कटनी-बरगवां-कटनी मेमू का संचालन प्रभावित होगा। ये दोनों ट्रेर्ने 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक कटंगीखुर्द स्टेशन से ही शुरू होंगी और खत्म होंगी। हालांकि इस दौरान यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ेगा। डाउन ट्रैक पर धीमा कार्य, 2026 तक होगा पूरा एक ओर जहां अप ट्रैक का कार्य पूरा हो चुका है तो वहीं डाउन ट्रैक पर निर्माण एजेंसी का कार्य धीमी गति से चल रहा है। आलम यह है कि 17.52 किमी लंबे इस ट्रेक पर कई स्थानों पर पिलर भी बनकर तैयार नहीं हुए है। बताया जा रहा है कि डाउन ट्रैक का कार्य इस वर्ष पूरा होना मुश्किल है। कटनी-चिरमिरी पैसेंजर निरस्त रहेगी जानकारी के अनुसार ब्लॉक के चलते कटनी-चिरमिरी पैसेंजर को रद्द किया जा रहा है। गाड़ी संख्या 61609 कटनी-चिरमिरी 26 नवंबर से 2 दिसंबर तक व गाड़ी संख्या 61602 चिरमिरी-कटनी मेमू 27 नवंबर से 3 दिसंबर तक निरस्त रहेगी। ग्रेड सेपरेटर परियोजना से यह होंगे फायदे     बीना-कटनी रेल खंड में मालगाड़ियों की संख्या और गति में वृद्धि होगी।     कटनी से बिलासपुर और सिंगरौली के लिए अतिरिक्त रेल लाइन जुड़ जाएगी, जिससे न्यू कटनी, कटनी मुड़वारा जैसे व्यस्त क्षेत्रों को बायपास किया जा सकेगा।

राज्य में अग्नि सुरक्षा होगी मजबूत, 36 नए फायर स्टेशन बनाए जाएंगे

भोपाल   अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों में 36 आधुनिक फायर स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके लिए 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर फंड आवंटित किया गया है। फायर स्टेशन बनाने के साथ नई फायर गाड़ियां खरीदी जाएंगी और उपकरण भी आधुनिक तकनीक के होंगे, ताकि आग लगने की घटनाओं पर जल्दी और प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सके। इसके साथ ही सरकार राज्य स्तरीय फायर कंट्रोल रूम भी बनाएगी, जहां से पूरे प्रदेश के सभी फायर स्टेशनों को जोड़ा जाएगा। इससे आगजनी की घटनाओं पर त्वरित निगरानी और समन्वय सुनिश्चित होगा। नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया है, जिसकी मंजूरी के बाद काम शुरू हो जाएगा।  कहां बनेंगे फायर स्टेशन फायर स्टेशन 8 नगर निगमों – रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, रतलाम, मुरैना, खंडवा, इंदौर और उज्जैन में बनाए जाएंगे। इसके अलावा नए बने जिलों – मऊगंज, पांढुर्रा, मैहर, अनूपपुर, निवाड़ी सहित अन्य जिलों में भी स्टेशन स्थापित होंगे। साथ ही 4 औद्योगिक क्षेत्रों – पीथमपुर (धार), मंडीदीप (रायसेन), बामोर (मुरैना) और मेघनगर (झाबुआ) को भी शामिल किया गया है। दो एकड़ जमीन में बना स्टेशन  हर फायर स्टेशन लगभग 2 एकड़ जमीन में बनेगा। एक स्टेशन पर दो दमकल गाड़ियां रहेंगी। एक बड़ी और एक छोटी। प्रति स्टेशन निर्माण पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें फायर स्टेशन + फायर गाड़ियां    पर 119 करोड़, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पर 20 करोड़, आधुनिक फायर उपकरण पर 178 करोड़, कंट्रोल रूम सुदृढ़ीकरण पर 20 करोड़, अन्य विशेष आवश्यकताएं पर 59 करोड़ खर्च होंगे। यानी कुल 398 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें   75% राशि लगभग 297 करोड़ केंद्र सरकार और 25% राशि करीब 100 करोड़ राज्य सरकार देगी।   

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य, नहीं लगाई तो घर पहुंचेगा चालान

जबलपुर  मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) न होने पर सीधे ई-चालान जारी किया जाएगा। परिवहन विभाग टोल प्लाजा में लगे सीसीटीवी कैमरों को अपने पोर्टल से लिंक कर रहा है। नई व्यवस्था जनवरी से लागू होने की संभावना है। इसका उद्देश्य है कि सभी वाहनों में एचएसआरपी अनिवार्य रूप से लगाई जाए। क्यों की जा रही सख्ती जानकारी के अनुसार सभी टोल प्लाजा पर 24 घंटे सीसीटीवी चल रहे हैं। इन्हें पोर्टल से जोड़ने पर वाहन का नंबर प्लेट सीधे स्कैन होगा। यदि नंबर प्लेट मानक के अनुरूप नहीं है या वाहन पर एचएसआरपी नहीं लगी है, तो सिस्टम तुरंत ही गाड़ी मालिक को ई-चालान भेज देगा। बता दें कि अप्रेल 2019 से नए बिकने वाले सभी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य है। पुराने (2019 से पहले रजिस्टर्ड) वाहनों के लिए भी एचएसआरपी लगवाना जरूरी किया गया है। इसके बावजूद इसकी गति धीमी है। दिसंबर तक लगवा लें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को दिसंबर तक का समय दिया है। इसके बाद बिना एचएसआरपी वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और चालान की राशि भी बढ़ाई जाएगी। ऐसी होगी नई व्यवस्था टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे परिवहन विभाग के पोर्टल से जुड़े। गाड़ियों के गुजरने के समय हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन किया जाएगा। जिसमें पोर्टल पर तुरंत पूरा रिकॉर्ड खुलकर आ जाएगा। एचएसआरपी न होने या अन्य कमियों पर तत्काल ई-चालान जारी कर दिया जाएगा। 

मोबाइल बना मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा, 73% लोग डिजिटल डिपेंडेंसी से पीड़ित

 इंदौर  एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग द्वारा मोबाइल की लत से परेशान 500 लोगों पर किए गए अध्ययन के बेहद परेशान करने वाले निष्कर्ष सामने आए हैं। इसके अनुसार मोबाइल अब सिर्फ एक तकनीकी उपकरण नहीं रह गया, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अध्ययन के अनुसार 73 प्रतिशत लोग मोबाइल की लत यानी डिजिटल डिपेंडेंसी से पीड़ित पाए गए। अत्यधिक मोबाइल उपयोग के कारण लोग बिना एहसास किए मूक अवसाद (साइलेंट डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं। 80 प्रतिशत प्रतिभागियों में हल्का लेकिन लगातार चलने वाला अवसाद देखा गया। औसतन लोग प्रतिदिन सात घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं। यानी साल भर में करीब 1800 घंटे यानी पूरे 75 दिन मोबाइल पर निकल जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल न मिलने पर घबराहट (नोमोफोबिया), नींद में कमी, तनाव बढ़ना और बार-बार फोन चेक करने की मजबूरी जैसे व्यवहारगत लक्षण बढ़ते जा रहे हैं। बच्चों और किशोरों में इसका असर और भी गंभीर है। किशोरों में अवसाद का खतरा बढ़ रहा है और 10–14 वर्ष के बच्चों में दिमागी विकास प्रभावित हो रहा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी अत्यधिक मोबाइल चलाने के कारण किशोरों में आत्मविश्वास में कमी और वास्तविक जीवन से दूरी बढ़ रही है। चूंकि, यह उम्र सीखने, समझने और सामाजिक कौशल विकसित करने की होती है, ऐसे में अत्यधिक स्क्रीन टाइम उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके लिए स्कूलों में एक मॉडल बनाने की आवश्यकता है। समय रहते यदि मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो जल्द मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी। उपाय     फोन पार्किंग जोन बनाएं     रोजाना मोबाइल उपयोग का समय तय करें।     अनावश्यक एप्स के नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे बार-बार फोन देखने की आदत कम होगी।     इंटरनेट मीडिया एप दिन में 2-3 बार ही खोलें। इनके उपयोग के लिए टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं।     रात में सोते समय मोबाइल को अपने बिस्तर से दूर रखें।     दिनभर में कुछ ऐसा समय तय करें, जब मोबाइल से दूर रहेंगे। जैसे खाना खाते समय, पढ़ाई के समय या परिवार के साथ बैठते समय।     खाली समय में मोबाइल के बजाय किताब पढ़ें, संगीत सुनें, वाक पर जाएं।     घर में एक फोन पार्किंग जोन बनाएं, जहां सभी फोन रख दें और बार-बार हाथ में न लें। इन 5 तरीकों से छुड़ाएं बच्चे की फोन लत बच्चों की इन गलतियों को न करें नज़रअंदाज, तुरंत टोके वरना हाथ से निकल जाएगा आपका बच्चा स्क्रीन टाइम करें कंट्रोल  अपने बच्चे के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने के लिए एक सीमित समय निर्धारित करें. उदाहरण के लिए, आप उन्हें दिन में केवल 1-2 घंटे के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने की परमिशन दे सकते हैं. स्मार्टफोन-फ्री एरिया बनाएं अपने घर में एक स्मार्टफोन-फ्री एरिया बनाएं. उदाहरण के लिए, आप अपने डाइनिंग या बेडरूम में स्मार्टफोन का उपयोग बिल्कुल न करें.  ऑफलाइन एक्टिविटीज पर ध्यान दीजिए अपने बच्चे के लिए ऑप्शनल एक्टिविटीज का ऑप्शन दीजिए, जो उन्हें स्मार्टफोन से दूर रखें. उदाहरण के लिए, आप उन्हें खेल, बुक रीडिं, या कला बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. निगरानी रखें अपने बच्चे के स्मार्टफोन का उपयोग करने पर निगरानी रखें. आप फोन में पैरेंट्ल कंट्रोल एप्लीकेशन इंस्टॉल कर सकते हैं जिससे आपका बच्चा फोन पर क्या देख रहा है, इसको आसानी से ट्रैक कर सकते हैं.  रात में फोन चलाने से रोकें अपने बच्चे के साथ बातचीत करें और उन्हें स्मार्टफोन की लत के बारे में समझाएं. इसके अलावा रात के समय बच्चे को फोन बिल्कुल न दें. इससे बच्चे की आंख और स्किन दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है.  फोन की लत से होने वाले नुकसान      नींद की कमी     अवसाद     चिड़चिड़ापन     ध्यानकेंद्रित करने में परेशानी     आत्मसम्मान की कमी  

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा, मध्यप्रदेश में स्टेट टास्क फोर्स का गठन

भोपाल  कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देशभर में बढ़ रही चिंता बढ़ रही है, इसे देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इसे प्राथमिकता पर रखा है, उच्च शिक्षा विभाग ने इस दिशा में ठोस और व्यापक कदम उठाने की शुरुआत कर दी है। प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल टास्क फोर्स (NTF) के निर्देशों के बाद स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन कर उसे सक्रिय कर दिया है, जो अब पूरे राज्य में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय कर रही है। उल्‍लेखनीय है कि NTF द्वारा आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहल केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि “राज्य के विद्यार्थियों के लिए एक सुरक्षित, सहयोगी और दबावमुक्त शैक्षणिक माहौल” तैयार करने की दिशा में सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रयास है। STF के हाथ में मानसिक स्वास्थ्य सुधार की कमान NTF के निर्देशों के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है । यह राज्य में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं और रोकथाम उपायों पर केंद्रित नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए योजना एवं निर्देश जारी कर रही है। एसटीएफ के अध्‍यक्ष आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा है। ओएसडी डॉ. उषा के. नायर को इसका सदस्य सचिव नियुक्‍त किया गया है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है । यह एक बहु-विभागीय तंत्र है जो विद्यार्थियों की चुनौतियों को व्यापक दृष्टि से देखेगा। स्टेट टास्क फोर्स (STF) क्या करेगी? राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श से जुड़े उपायों की निगरानी, NTF के निर्देशों के अनुपालन का मूल्यांकन, कोचिंग व कॉलेज परिसरों का मानसिक स्वास्थ्य ऑडिट, हेल्पलाइन, काउंसलिंग, मनोसामाजिक समर्थन की व्यवस्था को मजबूत करना, जिला स्तरीय DTF को दिशा देना और उनकी रिपोर्ट की समीक्षा, आत्महत्या रोकथाम से जुड़े जोखिम कारकों की पहचान और सुधार को बढ़ावा, राज्य सरकार को नियमित सिफारिशें और नीतिगत सुझाव शैक्षणिक संस्‍थानों में नोडल अधिकारियों की होगी नियुक्ति सभी सुधारों के समन्वय प्रभावी हो, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी शासकीय एवं निजी शैक्षणिक संस्‍थानों को नोडल अधिकारी नियुक्‍त करने के निर्देश दिए हैं। इसमें सरकारी विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों एवं सभी शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं। जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) का गठन अनिवार्य राज्य स्तर के प्रयास प्रभावी रूप से जिलों तक पहुँचे इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) का गठन भी अनिवार्य कर दिया है। डीटीएफ की अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे, जबकि अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी और तकनीकी, चिकित्सा तथा स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे। ये जिम्मेदारी रहेगी डीटीएफ की      कोचिंग संस्थानों के पंजीयन की निगरानी करना।     परामर्श सेवाओं की उपलब्धता कराना।     STF–NTF निर्देशों के क्रियान्वयन कराना।     शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा पर निगरानी रखना। कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन अनिवार्य  उच्च शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी जिले में बिना पंजीयन के कोई भी कोचिंग संस्था संचालित न हो। यह कदम विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, अनियमित प्रबंधन और अनुशासनहीन वातावरण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसलिए जरूरी हैं ये कदम देशभर में मानसिक तनाव और परीक्षा दबाव से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि समस्या केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि संस्थागत संरचना से भी जुड़ी है, जहाँ गाइडलाइन, परामर्श, निगरानी और संवाद की कमी विद्यार्थियों को अकेला कर देती है। एसटीएफ और डीटीएफ का गठन इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।  

नई कलेक्टर गाइडलाइन के तहत 15 जनवरी तक जिले भेजा जाएगा प्रस्ताव, महंगी होगी संपत्ति

भोपाल मध्य प्रदेश में एक बार फिर से प्रापर्टी की दरें बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन (प्रापर्टी की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव) बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इस संबंध में महानिरीक्षक पंजीयन अमित तोमर ने बुधवार को आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार नई गाइडलाइन का प्रस्ताव पहले सभी जिलों की उप जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा बनाकर 15 जनवरी 2026 तक जिला मूल्यांकन समितियों को भेजना होगा। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति प्रस्तावित गाइडलाइन को लेकर अधिसूचना जारी कर लोगों व राजनीतिक दलों से सुझाव लेगी। 31 मार्च से नई दरें लागू होंगी इन सुझावों पर चर्चा के बाद आवश्यकता होने पर संशोधन कर 30 जनवरी तक प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। सभी जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा 15 फरवरी तक गाइडलाइन का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया जाएगा। इस प्रस्ताव पर बोर्ड शासन से चर्चा के बाद 31 मार्च से प्रदेशभर में प्रापर्टी की नई दरें लागू कर देगा। जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब एक लाख 12 हजार में से 74 हजार स्थानों पर प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त अधिक होती है। विभिन्न जिलों में इन स्थानों का पंजीयन और राजस्व अधिकारियों द्वारा एआई सहित अन्य माध्यमों से सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे के बाद ही तय होगा कि कितने स्थानों पर प्रापर्टी की दरों में वृद्धि की जानी है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 60 हजार स्थानों पर प्रापर्टी की दरों में वृद्धि की गई थी। हालांकि आवासीय आरसीसी निर्माण और सभी क्षेत्रों में आरबीसी, टिनशेड, कच्चा कवेलू के लिए प्रचलित निर्माण दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई थी। इन बिंदुओं का ध्यान रखना होगा     स्थानों में दरें निर्धारित करने (यथावत, वृद्धि या कमी) नये स्थान व कालोनी जोड़े जाने की स्थिति में दरें प्रस्तावित किए जाने के लिए आवश्यक अनुमतियों की जानकारी एवं दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हों।     ऐसे स्थान जहां भूमि अधिग्रहण हो रही है या होने की संभावना है तो स्थानों व अधिग्रहण भूमि के आसपास के क्षेत्रों में होने वाले संभावित विकास को दृष्टिगत रखते हुए दरें प्रस्तावित की जाएं।     मूल्य सूचकांक तथा नगर व ग्राम में हुए और प्रस्तावित विकास को दृष्टिगत रखना होगा।     दरें यथासंभव वास्तवित रूप से प्रचलित दरों के अनुरूप हों।     पिछले सालों की निर्माण के लिए तय लागत दरों को ध्यान में रखते हुए प्लाट आदि की दरें निर्धारित की जाएं।