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औषधीय फसलों की खेती में मध्यप्रदेश सबसे आगे, ईसबगोल और अश्वगंधा का उत्पादन बढ़ा

औषधीय फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य मध्यप्रदेश  46 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती ईसबगोल, अश्वगंधा की खेती भोपाल  मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रकि टन औषधीय फसलों का उत्पादन  हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग के कारण किसानों का भी आकर्षण इन फसलों के उत्पादन की ओर बढ़ा है। प्रदेश में वर्ष 2022-23 में 44 हजार 324 हैक्टेयर में औषधीय फसलों की बोनी की गई थी । जो 2024-25 में बढ़कर 46 हजार 837 हैक्टेयर हो गया यानिकी 2 हजार 512 हैक्टेयर की वृद्धि हुई है। इन फसलों का वर्ष 2021-22 में उत्पादन   एक लाख 16 हजार 848 मीट्रिक टन था जो 2024-25 में बढ़कर एक लाख 24 हजार 199 मीट्रिक टन हो गया है। उल्लेखनीय है कि भारत में औषधीय और सुगंधित फसलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश की सर्वाधिक भागीदारी है। एक अनुमान के अनुसार देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है। राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान और अन्य प्रोत्साहन दे रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान करती है। सरकार पारंपरिक फसलों के अलावा औषधीय पौधों जैसी वाणिज्यिक फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिल सके। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।  मध्यप्रदेश में प्रमुख फसलें अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है। प्रदेश में 13 हजार हैक्टेयर में ईसवगोल, 6 हजार 626 हैक्टेयर अश्वगंधा, 2 हजार 403 हैक्टेयर में सफेद मूसली, 974 हैक्टेयर में कोलियस तथा 23 हजार 831 हैक्टेयर में अन्य औषधी फसल की बोनी की गई है। मध्यप्रदेश सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह का औषधीय पौधों की खेती आकर्षित कर रही है। राज्य सरकार द्वारा डाबर, वैद्यनाथ जैसी आयुर्वेद कम्पनियों, संजीवनी क्लिनिक में विंध्यवैली जैसे ब्रांड के माध्यम से औषधीय उत्पादन को बाजार मुहैया करा रही है।  

बिल्डिंग का बड़ा खर्च, लेकिन मीटिंग हॉल नहीं बना; अब अतिरिक्त 10 करोड़ से निर्माण होगा

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी में खराब इंजीनियरिंग का एक और नमूना सामने आया है। लिंक रोड नंबर-1 पर भोपाल नगर निगम ने 5 एकड़ में करीब 40 करोड़ रुपए से 8 मंजिला बिल्डिंग तो बना दी, लेकिन जिम्मेदार मीटिंग हॉल बनाना भूल गए।  यह एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि ऐसे 2 प्रोजेक्ट और हैं, जिनमें खराब इंजीनियरिंग के नमूने सामने आ चुके हैं। 90 डिग्री एंगल वाले ऐशबाग ब्रिज को लेकर पहले ही भोपाल सुर्खियों में रह चुका है। फिर मेट्रो के 2 स्टेशन भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। इन नमूनों को सिलसिलेवार जानिए…। सबसे पहले निगम मुख्यालय का ताजा मामला लिंक रोड नंबर-1 पर ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर नगर निगम का नया मुख्यालय भवन बना है। इसके बाद 10 से ज्यादा लोकेशन पर बने ऑफिस एक ही छत पर आ जाएंगे। करीब 40 करोड़ रुपए से बन रही बिल्डिंग में सिर्फ सोलर पैनल लग रहे हैं तो गार्डनिंग, फोन, इंटरनेट केबल और कुछ फ्लोर पर फर्नीचर का काम चल रहा है। कई मायनों में बिल्डिंग खास है। जब तक नया हॉल नहीं बनेगा, तब तक आईएसबीटी में होंगी बैठकें इन सब अच्छी बातों में एक बड़ी गलती भी हो गई। इस बिल्डिंग में परिषद का मीटिंग हॉल ही नहीं बना है। इसलिए 10 करोड़ रुपए खर्च कर परिषद हॉल बनाने का प्लान है, लेकिन जब तक यह नहीं बन जाता, तब तक आईएसबीटी में ही परिषद की बैठकें होंगी। पड़ताल की गई तो पता चला कि जब बिल्डिंग बनी थी, तब मीटिंग हॉल ही उसमें शामिल नहीं था। जिम्मेदारों का कहना है कि शुरुआत में बिल्डिंग की कुल लागत 22 करोड़ रुपए थी, लेकिन बाद में लागत बढ़ती गई। अब यह 40 करोड़ में आ गई। हॉल में ही परिषद की बैठक होती है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि जब भी कोई निर्माण कार्य कराया जाता है तो उसकी डिजाइन समेत कई पैमानों पर नजर रखी जाती है। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया होती है। नगर निगम अपनी ही बिल्डिंग में मीटिंग हॉल जैसा निर्माण करना ही भूल गया। अब मीटिंग हॉल को लेकर दूसरी बिल्डिंग बनेगी, लेकिन पैसा तो जनता का ही लगेगा, जो टैक्स के रूप में वसूला गया है। एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय फिनिशिंग हो रही है। 40% बिजली उत्पादन को लेकर बिगाड़ा फ्रंट मुख्यालय के ठीक सामने परिसर में ही पार्किंग बनाई गई है, जिस पर शेड है। इन्हीं शेड के ऊपर सोलर पैनल लगा दिए गए, ताकि 40 प्रतिशत बिजली निगम खुद ही बना सके, लेकिन ये ऐसी जगह लगाए गए हैं, जिनसे पूरी बिल्डिंग ही छिप गई, यानी बिल्डिंग का फ्रंट ही बदल गया है। इस मामले में निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का कहना है कि डिजाइन गलत नहीं है। उस समय आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। हालांकि, इसके बाद इस्टीमेट कॉस्ट बढ़ी है। यह भी सही है कि पुरानी डिजाइन में परिषद हॉल नहीं था। अभी और जमीन लेकर पास में ही परिषद का हॉल बनवा रहे हैं, ताकि यहां बैठकें हो सकें। पार्किंग की जगह पर आपत्ति जताई है। इस वजह से फ्रंट ढंक गया है। सोलर पैनल छत पर लगाए जा सकते हैं।

डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को 19वाँ राष्ट्रीय पुरस्कार, पद्मश्री श्री मठपाल करेंगे सम्मानित

19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री मठपाल होंगे सम्मानित "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 09 से 11 जनवरी, 2026 तक भोपाल में राष्ट्रीय संगोष्ठी में संक्षेप (Abstract) जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर 2025 तक भोपाल  19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री यशोधर मठपाल को सम्मानित किया जाएगा। संस्कृति विभाग के संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय द्वारा दिये जाने वाले राष्ट्रीय सम्मान में श्री मठपाल को प्रशस्ति पत्र, सम्मान पट्टिका और 2 लाख रुपये प्रदान किए जायेगे। यह पुरस्कार किसी सक्रिय भारतीय नागरिक या संस्था को पुरातत्व के क्षेत्र में उनकी सृजनात्मक, रचनात्मक और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। आयुक्त पुरातत्व श्रीमती उर्मिला शुक्ला ने बताया कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदान को स्मरण करने के लिए, पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय, भोपाल 09 से 11 जनवरी, 2026 तक कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर एक राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। इसी दौरान 19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में, पूरे भारत से प्रशासकों, नीति निर्माताओं, क्षेत्रीय पदाधिकारियों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों की भागीदारी होगी, जो पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालयों के क्षेत्रों में विभिन्न उभरते मुद्दों पर चर्चा करेंगे और पुरातात्विक खजानों के प्रभावी संरक्षण, प्रबंधन और विकास के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीतियों की सिफारिश करेंगे।  आयुक्त पुरातत्व श्रीमती शुक्ला ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्देश्य को 3 विषयों पर प्रस्तुति और चर्चा के माध्यम से संबोधित किया जाएगा। इन विषयों में पुरातत्व, नृवंश-पुरातत्व (ethnoarchaeology), पुरातत्वमिति (archaeometry), कलाकृति विश्लेषण, सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन आदि में नई सफलताएँ,  हाइब्रिड सिस्टम सहित अभिलेखागार और रिकॉर्ड प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियाँ और मूर्त और अमूर्त विरासतों (tangible and intangible heritages) के संग्रह, भंडारण, पहुँच और संरक्षण में नवीनतम विकास और डिजिटल क्यूरेशन के रुझान शमिल है।  सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर तक बढ़ाई गई राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषयों या संबंधित क्षेत्रों में से किसी पर भी सार-संक्षेप (Abstracts) आमंत्रित हैं। सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2025 थी, जिसे अब 20 नवंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया है। स्वीकृत सार-संक्षेप के पूर्ण पर्चों (full papers) का मूल्यांकन, संपादन किया जाएगा और उन्हें संगोष्ठी की कार्यवाही पुस्तक (seminar proceeding book) में प्रकाशित किया जाएगा। प्रत्येक विषय क्षेत्र पर सर्वश्रेष्ठ पर्चा प्रस्तुति (best paper presentation) के लिए पुरस्कार भी दिए जाएंगे। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.archaeology.mp.gov.in को देखा जा सकता है।  उल्लेखनीय है कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर (1919-1988), जिन्हें 'हरिभाऊ' के नाम से जाना जाता है और भारतीय शैल कला (rock art) अध्ययन के "पितामह" के रूप में संदर्भित किया जाता है, एक प्रख्यात भारतीय पुरातत्वविद्, कला इतिहासकार, मुद्राशास्त्री, पुरालेखविद् और सांस्कृतिक शोधकर्ता थे। उनका जीवन और कार्य भारत के समृद्ध प्राचीन इतिहास और प्रागैतिहासिक कला को उजागर करने और संरक्षित करने के लिए समर्पित था। उन्हें जनवरी 1975 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म श्री से सम्मानित किया गया। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार, जिसे वाकणकर सम्मान भी कहा जाता है, मध्यप्रदेश के भोपाल में पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय द्वारा (वर्ष के आधार पर) वार्षिक या द्विवार्षिक रूप से प्रस्तुत किया जाने वाला एक राष्ट्रीय पुरस्कार है।  

राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का शुभारंभ 18 नवंबर को, करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 18 नवम्बर को करेंगे राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदशर्नी का शुभारंभ प्रदशर्नी में 31 प्रदेशों के 900 विद्यार्थी कर रहे हैं सहभागिता 23 नवम्बर तक होंगी विज्ञान पर केन्द्रित गतिविधियां भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल में 18 नवम्बर मंगलवार को प्रात: 9:45 पर 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। शुभारंभ समारोह में जनजातीय कार्य मंत्री  कुंवर विजय शाह एवं स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह भी मौजूद रहेंगे। प्रदशर्नी  का आयोजन राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, श्यामला हिल्स, भोपाल में किया जा रहा है। प्रदर्शनी के आयोजन में स्कूल शिक्षा विभाग सहभागिता कर रहा है। प्रदर्शनी में 31 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 900 विद्यार्थी एवं शिक्षक विज्ञान पर केन्द्रित प्रोजेक्ट एवं मॉडल प्रदर्शित करेंगे। बच्चों में प्रोत्साहित की जायेगी विज्ञान के प्रति रूचि कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना और वैज्ञानिक विचार विकसित करना है। इस कार्यक्रम में देश के समस्त प्रदेश एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के स्कूली विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में प्रतिदिन प्रात: 9 बजे से विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं जैसे आंचलिक विज्ञान केन्द्र, आईसर, मैनिट, आईसेक्ट एवं ग्लोबल स्किल पार्क के वैज्ञानिक सहभागी विद्यार्थियों के साथ वैज्ञानिक वार्ता में विशेष व्याख्यान देंगे। इसके बाद 30 मिनट विद्यार्थियों के साथ प्रश्नोत्तरी भी होगी। विज्ञान प्रदर्शनी का 2025-26 का विषय सतत् भविष्य के लिये विज्ञान प्रौद्योगिकी रखा गया है। प्रदशर्नी के दौरान मुख्य रूप से खाद्य, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, परिवहन एवं संचार, प्राकृति खेती, आपदा प्रबंधन, गणितीय मॉडलिंग और कंप्यूटेशनल थिंकिंग के साथ अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष रूप से चर्चा की जायेगी। विज्ञान प्रदशर्नी में शाम को प्रतिदिन विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। विभिन्न राज्यों से आये विद्यार्थियों को राजधानी भोपाल के आसपास ऐतिहासिक स्थलों, संग्रहालयों, विज्ञान केन्द्र, शिल्प केन्द्र आदि का भ्रमण भी कराया जायेगा। प्रदशर्नी की विशेषताएं प्रदर्शनी में प्रतिदिन 2 हजार विद्यार्थी एवं नागरिक अवलोकन करने पहुंचेंगे। प्रदर्शनी में 240 साइंस मॉडल का प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदशर्नी में प्रतिभागी विद्यालयों की संख्या 229 है। यह प्रदर्शनी देश के विभिन्न भागों के युवाओं एवं बच्चों को विज्ञान, गणित तथा पर्यावरण संबंधी मुद्दों के विभिन्न पहलुओं के विषय में जानकारी प्राप्त करने और एक-दूसरे के साथ अपनी विविध संस्कृतियों को साझा करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगी। भोपाल में 6 दिवसीय प्रदर्शनी का समापन 23 नवम्बर को दोपहर 3:30 बजे होगा।  

मसूरी में IAS अफसरों की ट्रेनिंग, 39 कलेक्टरों का सिलेक्शन और प्रशासनिक तैयारियां

भोपाल  लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) मसूरी में मिड करियर ट्रेनिंग आयोजित करेगा। यह ट्रेनिंग 5 जनवरी से 30 जनवरी तक चलेगी। इसमें 122 आईएएस अफसर शामिल होंगे। इसके साथ ही, इसमें एमपी के 39 कलेक्टरों समेत अन्य अधिकारियों को बुलाया गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र भेजकर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया है। हालांकि, प्रदेश के 39 कलेक्टरों को लेकर पेंच फंस गया है। क्या है कारण… चलिए बताते हैं। चुनाव आयोग के आदेशों से बनी परेशानी     इस ट्रेनिंग के दौरान चुनाव आयोग के सख्त निर्देशों की वजह से 39 कलेक्टरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चुनाव आयोग ने SIR के कारण प्रशासनिक फेरबदल पर रोक लगा दी है।     इससे इन कलेक्टरों को ट्रेनिंग में शामिल होने की मंजूरी मिलने की संभावना कम हो गई है। इसलिए, इन 39 कलेक्टरों का मिड करियर ट्रेनिंग में शामिल होना अब मुश्किल नजर आ रहा है। प्रदेश के 39 कलेक्टरों का सिलेक्शन लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशिक्षण अकादमी मसूरी में मिड करियर ट्रेनिंग के लिए किया गया है इसमें उज्जैन संभागायुक्त के अलावा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, सागर, रीवा जैसे बड़े शहरों के कलेक्टर शामिल है इसके साथ ही मंत्रालय और अलग-अलग विभागों में विभाग प्रमुख के उप सचिव और सचिव के रूप में काम करने वाले आईएएस अधिकारियों को भी ट्रेनिंग के लिए सिलेक्ट किया गया है 24वें मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम के शेड्यूल जारी करते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखा है पांच जनवरी 2026 से 30 जनवरी तक चलने वाले मिड करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के फेज थ्री के लिए 2010 बैच के अधिकारियों का चयन मामला दर मामला के आधार पर किया गया है जबकि 2016 बैच के अधिकारियों के लिए यह तीसरा और अंतिम अवसर है 2017 बैच के अफसरों के लिए दूसरा और वर्ष 2018 बैच के अफसरों के लिए पहला प्रशिक्षण अवसर है ये कलेक्टर ट्रेनिंग के लिए चयनित जिन कलेक्टरों का चयन ट्रेनिंग के लिए किया गया है उसमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान, धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल, बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना, अलीराजपुर कलेक्टर कलेक्टर नीतू माथुर, खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता, बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह, उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह शामिल है साथ ही देवास कलेक्टर ऋतु राज, शाजापुर कलेक्टर रितु बाफना, आगर मालवा कलेक्टर प्रीति यादव, मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग, नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, दतिया कलेक्टर स्वन्प्रिल जी वानखेड़े, मुरैना कलेक्टर लोकेश रामचंद्र जांगिड़, श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा को ट्रेनिंग के लिए चुना गया है इसके अलावा रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल, सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी, सतना कलेक्टर सतीश कुमार एस, अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली, उमरिया कलेक्टर धरणेंद्र कुमार जैन, सागर कलेक्टर संदीप जी आर दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल निवाड़ी कलेक्टर जमुना भिडे सीहोर कलेक्टर बालागुरू के रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीना हरदा कलेक्टर सिद्थार्थ जैन बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सोमवंशी नरिसंहरपुर कलेक्टर रजनी सिंह छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेंद्र नारायण सिवनी कलेक्टर शीतला पटले बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना, और पांढ़ुर्णा कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ का भी चयन किया गया है 12 दिसंबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा इसमें कहा गया है कि ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए सिलेक्ट किए गए अधिकारियों का रजिस्ट्रेशन 12 दिसंबर तक ऑनलाइन कराने की कार्रवाई कराएं। साथ ही अधिकारियों से कहा गया है कि 19 दिसंबर तक प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संबंधित अधिकारियों के नामांकन की स्वीकृति भेंजे सभी अफसरों को 4 जनवरी को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी मसूरी के लिए भेजना सुनिश्चित करें इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए उन अधिकारियों का चयन किया गया है जो 31 दिसंबर 2029 के पहले सेवानिवृत्त नहीं हो रहे है भोपाल कलेक्टर, उज्जैन कमिश्नर को भी बुलाया मिड करियर ट्रेनिंग के लिए 2010 बैच के एमपी कैडर को दो आईएएस अधिकारी चुने गए है इनमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह शामिल है वीएस चौधरी कोलसानी रुचिका चौहान हरिजिंदर सिंह बी विजय दत्ता अनुग्रह पी चंद्रमौलि शुक्ला नीरज कुमार सिंह पंकज जैन अजय कटेसरिया निधि निवेदिता स्वरोचिष सोमवंशी प्रवीण सिंह अधयक अनुराग वर्मा प्रतिभा पाल फटिंग राहुल हरिदास राजीव रंजन मीना बक्की कार्तिकेयन अवधेश शर्मा कुमार पुरुषोत्तम सुभाष कुमार द्विवेदी धरणेंद्र कुमार जैन नरेंद्र कुमार सोमवंशी राजेश बाथम संतोष कुमार वर्मा अरूण कुमार परमार गिरीश कुमार मिश्रा शिवम वर्मा ,सोनिया मीना हर्ष दीक्षित रजनी सिंह प्रियंक मिश्रा मयंक अग्रवाल अनूप कुमार सिंह संतीष कुमार एस नीरज कुमार वशिष्ठ अमर बहादुर सिंह संदीप जीआर पवन कुमार जैन रिजु बाफना आशीष वशिष्ठ साकेत मालवीय शीतला पटले रिषव गुप्ता लोकेश रामचंद्र जांगिड़ अंकित अष्ठाना नेहा मीना अरुण कुमार विश्वकर्मा भव्या मित्तल क्षितिज सिंघल दीलीप कुमार कापसे बुध्देश कुमार वैद्य अभय कुमार बेडेकर सुधीर कुमार कोचर नीतू माथुर जमुना भिडे अंजू अरुण कुमार परीक्षित संजयराव झाड़े सौरभ संजय सोनवड़े भारसत योगेश तुकाराम राहुल नामदेव धोटे अंकिता धाकरे शेर सिंह मीना अभिलाष मिश्रा देंवेंद्र कुमार नागेंद्र गुरु प्रसाद कुमार सत्यम संजय कुमार जैन राखी सहाय हर्ष सिंह अदिति गर्ग हर्षल पंचोली रितु राज संस्कृति जैन मृणाल मीना पार्थ जायसवाल हिमांशु चंद्रा अर्पिता वर्मा बालागुरू के जे रीभा रौशन कुमार मनोज कुमार सरियाम हरेंद्र नारायण प्रीति यादव जयति सिंह सिध्दार्थ जैन अंशुल गुप्ता स्वन्प्रिल वानखेड़े संजना जैन जगदीश कुमार गोमे अनुराग सक्सेना प्रताप नारायण यादव संघमित्रा गौतम कीर्ति खुरासिया अजीजा सरसार जफर संपना पंकज सोलंकी आशीष सांगवान राजेश कुमार जैन सुचिस्मिता सक्सेना दिशा प्रणय नागवंशी गजेंद्र सिंह नागेश मलिका निगम नागर मंजूषा विक्रांत राय संघ प्रिय शिशिर गेमावत अभिषेक चौधरी तपस्या परिहार सिध्दार्थ जैन प्रथम कौशिक श्याम वीर अमन वैष्णव हरसिमरन प्रीत कौर अंजलि जोसेफ अक्षय कुमार तेम्रवाल रामप्रकाश अहिरवार अर्चना सोलंकी संदीप केरकट्टा अभय सिंह ओहरिया वंदना वर्मा रेखा राठौर नवीन कुमार ध्रुर्वे

सुरक्षा बलों का अभियान तेज, नक्सलियों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं के साथ पहली प्राथमिकता सरेंडर

मंडला  नक्सलियों को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक और सख्त अभियान शुरू किया गया है. मार्च 2026 तक नक्सल समस्या पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए कई आकर्षक योजनाओं की घोषणाएं भी की हैं. मंडला जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है. नक्सलवाद खत्म करने का रोडमैप तैयार एसपी रजत सकलेचा ने बताया "नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का रोडमैप तैयार है. इसके तहत पुलिस और सुरक्षा बल लगातार जंगल के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इस बार अभियान में सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की ताकत भी जुड़ गई है." राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 20 हज़ार से लेकर 4 लाख 50 हज़ार रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आर्थिक मदद एसपी रजत सकलेचा ने बताया "सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जमीन खरीदने के लिए 20 लाख रुपए तक की मदद दी जाएगी. प्रोत्साहन राशि के रूप में न्यूनतम 5 लाख रुपए, नए जीवन की शुरुआत के लिए 1 लाख 50 हज़ार रुपए,और विवाह करने पर 50 हज़ार रुपए की विशेष सहायता राशि प्रदान की जाएगी. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को फ्री खाद्यान्न भी दिया जाएगा ताकि वे समाज की मुख्यधारा में दोबारा जुड़ सकें. राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है." अन्य नक्सलियों की जानकारी देने पर सरकारी जमीन मिलेगी अगर कोई नक्सली पुलिस को दूसरे नक्सली के आत्मसमर्पण या मूवमेंट की जानकारी देता है, तो उसे सरकारी नौकरी देने पर भी विचार किया जा सकता है. हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें. मार्च 2026 तक मंडला को नक्सल मुक्त बनाने का हमारा लक्ष्य है. इस योजना की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने मीडिया, सोशल मीडिया और स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से व्यापक प्रचार अभियान शुरू कर दिया है. सरकार की योजनाएं नक्सलियों तक पहंचाने की अपील सरकार का उद्देश्य साफ है कि जंगलों में छिपे हर नक्सली तक यह संदेश पहुंचे कि अब सरकार सज़ा नहीं, सुधार का मौका दे रही है. मंडला पुलिस और प्रशासन का मानना है कि अगर यह अभियान सफल रहा तो न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश में शांति और विकास की राह और मजबूत होगी.  

डॉ. यादव ने की डॉ. खट्टर के साथ सौजन्य मुलाकात, बढ़ाई आपसी संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. खट्टर से की सौजन्य भेंट डॉ. यादव ने की डॉ. खट्टर के साथ सौजन्य मुलाकात, बढ़ाई आपसी संवाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री की सौजन्य भेंट, दोनों नेताओं ने की महत्वपूर्ण बातचीत सिंहस्थ-2028 से जुड़ी तैयारियों एवं परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार की शाम नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री डॉ. मनोहर लाल खट्टर से उनके आवास पर सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री डॉ. खट्टर को सिंहस्थ-2028 आयोजन से जुड़ी तैयारियों एवं अन्य प्रमुख परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास कार्यो और इसके विस्तार प्रस्तावों, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, शुचिता, नदी संरक्षण, पेयजल व्यवस्था, अस्थायी आवास निर्माण आदि विषयों के संबंध में केंद्रीय मंत्री को विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का सर्वोत्कृष्ट आयोजन बनाने के लिए राज्य सरकार विभिन्न बहुआयामी योजनाओं पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं —स्वच्छ भारत अभियान, अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी पहल, विद्युत परियोजनाओं और शहरी आधारभूत ढांचे से संबंधित अन्य योजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी। बैठक में अपर मुख्य, (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रमुख अधिकारी तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

रॉबर्ट वाड्रा बोले- लोग चाहेंगे तो राजनीति में आएंगे, बिहार चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद उठी मांग

इंदौर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति और बिज़नेसमैन रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी राजनीतिक पारी को लेकर बड़ा बयान दिया हैं. इंदौर में उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए राजनीति में आने के संकेत दिए. इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला किया.  रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि मैं राजनीति में आऊंगा तो लोग परिवारवाद कहने लगेंगे लेकिन अगर लोग चाहेंगे तो में राजनीति में आएंगे, अगर हम संसद में होंगे तो लोगों की बात को और बात को मजबूत करेंगे. वहीं बेटे रेहान के राजनीति में एंट्री के सवाल पर उन्होंने हा कि अभी ये सही समय नहीं है.   प्रियंका गांधी के पति और कांग्रेस नेता रॉबर्ट वाड्रा ने बिहार चुनाव परिणामों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता हालिया चुनाव नतीजों से किसी भी तरह खुश नहीं है। उन्होंने कहा कि जो परिणाम सामने आए हैं, वे जनता की मर्जी नहीं बल्कि चुनाव आयोग की भूमिका का नतीजा हैं। वाड्रा ने कहा कि बिहार में दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए, क्योंकि मौजूदा परिणामों पर भरोसा करना मुश्किल है। जनता का फैसला इससे अलग होता  इंदौर में मीडिया से बातचीत करते हुए वाड्रा ने कहा कि चुनाव आयोग की मदद से यह परिणाम सामने लाए गए हैं और जनता का असली फैसला इससे अलग होता। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ देशभर के युवा लगातार जुड़ रहे हैं। रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन भी खड़ा किया जाएगा। उनके मुताबिक, अगर बिहार में दोबारा चुनाव कराए जाते हैं तो नतीजे बिल्कुल बदल जाएंगे। एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया वाड्रा ने कहा कि इस समय रेहान को राजनीति में डालने का सही समय नहीं है. रेहान राजनीति देखी है सीखा है और गांधी परिवार के संघर्ष को भी महसूस किया है. रॉबर्ट वाड्रा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि रेहान ने यह भी देखा है कि किस हद तक बीजेपी एजेंसी का प्रयोग करती है.  बीजेपी हर एक चुनाव में हमारे नाम का प्रयोग करती है. बिहार के रिजल्ट से लोग हैरान है खुश नहीं है. चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया में मदद की जिसकी वजह से ऐसे नतीजे आए हैं. बिहार में जो हुआ वो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है. एनडीए वाले अपने वादे को पूरा नहीं कर पाएगी.  बिहार में फिर चुनाव कराने की माँग इससे पहले रॉबर्ट वाड्रा ने बिहार के नतीजों पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि बिहार में चुनाव सही तरीके से नहीं कराए गए. अगर राड्य में दोबारा चुनाव कराए जाएंगे तो नतीजे पूरी तरह से बदल जाएंगे. युवा इन दिनों एनडीए सरकार की योजनाओं से परेशान हैं और सरकार को बदलना चाहते हैं.  आपको बता दें कि रॉबर्ट वाड्रा इन दिनों इंदौर और उज्जैन में धार्मिक यात्रा पर है. इस दौरान उन्होंने बिहार चुनाव को लेकर पत्रकारों से बात करते हुए अपनी राय भी रखी है.  महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे वाड्रा इंदौर प्रवास के दौरान वाड्रा ने अपने धार्मिक कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे दो दिनों तक मध्य प्रदेश में रहेंगे और इस दौरान उज्जैन एवं ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे। बिहार की जनता इससे खुश नहीं रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि बिहार की जनता वास्तव में इन नतीजों से खुश नहीं है। जो कुछ हुआ है, वह पूरी तरह चुनाव आयोग की वजह से हुआ है। आयोग ने जिस तरह मदद की, उसके बाद जो परिणाम आए हैं, उनसे कोई भी सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के साथ अब बड़ी संख्या में युवा जुड़ रहे हैं और सभी मिलकर लोकतंत्र के लिए आंदोलन खड़ा करेंगे। यह चुनाव किसी भी तरह निष्पक्ष नहीं था, इसलिए बिहार में दोबारा मतदान होना चाहिए। अगर फिर से चुनाव हुए तो नतीजे पूरी तरह बदल जाएंगे।

सरकारी मदद के बिना पलायन रोकने के लिए बीजेपी करेगी आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक काम

भोपाल  2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने आदिवासी क्षेत्रों में समग्र ग्रामीण विकास का नया ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इस योजना के तहत आदिवासी आरक्षित 47 विधानसभा क्षेत्रों में तीन से चार गांवों के समूह बनाकर विभिन्न मानकों पर बिना सरकारी सहयोग के विकास कार्य किए जाएंगे। इस पहल को ‘संकुल विकास परियोजना’ नाम दिया गया है। क्लस्टर आधारित विकास मॉडल बीजेपी ने क्लस्टर स्तर पर विस्तृत प्रोफाइल तैयार कराई है। इसमें प्रत्येक संकुल का नाम, संबंधित जिला और ब्लॉक, शामिल ग्राम पंचायतों की सूची, तहसील मुख्यालय से दूरी, पंचायतों के अंतर्गत आने वाले गांवों की संख्या, कुल जनसंख्या और परिवारों का विवरण सम्मिलित किया गया है। एक क्लस्टर में अधिकतम आठ ग्राम पंचायतों को शामिल करने की व्यवस्था की गई है। ये है BJP का पूरा प्लान बीजेपी जनजातीय मोर्चे ने मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में गांवों के विकास के लिए संसदीय संकुल विकास परियोजना लागू की है। इस पहल के तहत प्रत्येक आदिवासी विधानसभा सीट पर तीन से चार गांवों को जोड़कर एक संकुल (क्लस्टर) बनाया जाएगा। इसमें एक-दूसरे से भौगोलिक रूप से जुड़े ग्राम पंचायतों को सम्मिलित किया जाएगा, ताकि आवागमन और समन्वय दोनों में सुगमता बनी रहे। क्लस्टर में शामिल ग्राम पंचायतों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जलसंकट, आजीविका और पलायन जैसे प्रमुख मुद्दों पर ट्राइबल सिविल सोसाइटी बिना किसी सरकारी सहयोग के स्वयं विकास कार्यों को आगे बढ़ाएगी। कलस्टर की प्रोफाइल तैयार कराई बीजेपी ने क्लस्टर लेवल की प्रोफाइल तैयार कराई है। इसमें संकुल के नाम के साथ जिला, ब्लॉक और संकुल में शामिल ग्राम पंचायतों के नाम, तहसील मुख्यालय से दूरी, पंचायत में शामिल गांवों की संख्या, पंचायत की जनसंख्या और कुल परिवारों की संख्या की जानकारी तैयार कराई है। एक कलस्टर में अधिकतम 8 ग्राम पंचायतें शामिल की जा सकती हैं। कलस्टर कमेटी में विधायक और पूर्व विधायक शामिल होंगे संकुल विकास परियोजना के लिए बनने वाली कमेटी में उस क्षेत्र के बीजेपी विधायक, संबंधित पंचायतों के सरपंच, जिला पंचायत, जनपद पंचायत अध्यक्ष शामिल किए जाएंगे। जहां बीजेपी के विधायक नहीं हैं वहां पूर्व विधायकों या हारे हुए विधानसभा प्रत्याशी समिति में लिए जाएंगे। अब आदिवासी क्षेत्रों में बीजेपी और कांग्रेस का प्रभाव समझिए एमपी में आदिवासी वर्ग के लिए 47 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं। इनमें से 25 सीटों पर बीजेपी, 21 सीटों पर कांग्रेस और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी का कब्जा है। आदिवासी क्षेत्रों में बीजेपी गांवों के समग्र विकास का मॉडल प्रस्तुत करके कांग्रेस के विकास और बीजेपी के डेवलपमेंट मॉडल को बताना चाहती है। एमपी की मोहन सरकार में आदिवासी वर्ग के 5 मंत्री हैं। इनमें विजय शाह, नागर सिंह चौहान, निर्मला भूरिया, संपतिया उईके, राधा सिंह मंत्री हैं। विधायक और पूर्व विधायक भी होंगे शामिल संकुल विकास परियोजना के लिए प्रस्तावित समिति में संबंधित क्षेत्र के बीजेपी विधायक, शामिल ग्राम पंचायतों के सरपंच, जिला पंचायत और जनपद पंचायत के अध्यक्षों को सदस्य बनाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में पार्टी का विधायक नहीं है, वहां समिति में पूर्व विधायक या पिछली विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी को शामिल किया जाएगा।

अभिनेत्री और सांसद जया प्रदा ने महाकालेश्वर मंदिर में की पूजा, नंदी के कान में रखी मुराद

उज्जैन अभिनेता धर्मेंद्र के स्वास्थ की मंगलकामना लेकर एक समय की विख्यात अभिनेत्री व सांसद जया प्रदा बाबा महाकाल के दरबार में पहुंची. इसके अलावा अभिनेता सनी सिंह और अभिनेत्री युक्ति थरेजा ने भी बाबा महाकाल के दर्शन लाभ लिए. जया प्रदा ने नंदी हॉल में नंदी के कान में लगकर कुछ मुराद मांगी. इसके बाद जया प्रदा ने महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्था की तारीफ की. अभिनेता सनी सिंह, अभिनेत्री युक्ति थरेजा ने भी किए दर्शन महाकालेश्वर मंदिर धाम में रोजाना हजारों की संख्या में भक्त आते हैं. नेता, अभिनेता, अभिनेत्रियां, खिलाड़ी व अन्य VVIP भी बाबा महाकाल के दर्शन करने आते रहते हैं. रविवार को अभिनेत्री जया प्रदा और सोमवार सुबह अभिनेता सनी सिंह, अभिनेत्री युक्ति थरेजा बाबा महाकाल की शरण मे पहुंचे. तीनों लोगों ने देश में सुख-समृध्दि की मंगलकामना की. बाबा महाकाल से धर्मेंद्र के लिए प्रार्थना जया प्रदा ने कहा "बाबा महाकाल के धाम से कोई खाली हाथ नहीं जाता. बाबा हमेशा झोली भरकर भेजते हैं. बाबा जल्द ही करोड़ों लोगों के दिल पर राज करने वाले धर्मेंद्र का स्वस्थ ठीक करें, यही मंगलकामना की है." उन्होंने मंदिर में सफाई व्यवस्थाओ की भी तारीफ की. जयाप्रदा बॉलीवुड की प्रसिद्ध कलाकार रही हैं. वह लोकसभा की सदस्य भी रह चुकी हैं. फिलहाल वह भाजपा से जुड़ी हैं. जयाप्रदा ने अमिताभ, धर्मेंद्र, जितेंद्र, मिथुन जैसे बड़े कलाकारों के साथ लीड रोल निभाया है. बाबा महाकाल के दर्शन कर भावविभोर वहीं, फिल्म अभिनेता सनी सिंह एवं फिल्म अभिनेत्री युक्ति थरेजा का भी पुजारी परिवार ने सम्मान किया. सभी कलाकारों ने मंदिर के गर्भ गृह के द्वार से माथा टेक भगवान का आशीर्वाद लिया. सनी सिंह और युक्ति थरेजा ने मंदिर प्रबंधन द्वारा किए जा रहे सुचारु दर्शन व्यवस्थाओं की सराहना की. दोनों ने महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन को अपने लिए आध्यात्मिक एवं अविस्मरणीय अनुभव बताया. सन्नी सिंह ने इन फिल्मों में रोल किए सन्नी सिंह मॉडल भी हैं. फ़िल्म 'दिल तो बच्चा है जी' से उन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री में एंट्री की थी. सोनू के टीटू की स्वीटी, उजड़ा चमन व अन्य फिल्मों में वह काम कर चुके हैं. अभिनेत्री युक्ति थरेजा मॉडल और टीवी सीरियलों में काम करने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में आई हैं. उन्होंने जुनून, डेविल, मैक्रो व कुछ और फिल्मों में रोल किए हैं.