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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के नजदीक उमरिया में दो बाघों ने गांव में मवेशियों को बनाया निशाना

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सटे पनपथा गांव के सरैया टोला में गुरुवार की शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब रहवासी क्षेत्र में एक नहीं बल्कि दो बाघों की चहल-कदमी देखी गई। अचानक बाघों को बस्ती की ओर बढ़ते देख ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बाघों ने गांव के ही गेंदिया सिंह के एक मवेशी पर हमला कर शिकार किया था। मवेशी को निवाला बनाने के दौरान दोनों बाघ रहवासी क्षेत्र तक पहुंच गए। ग्रामीणों ने आपसी साहस दिखाते हुए तेज आवाजें और बर्तनों की खड़खड़ाहट से किसी तरह बाघों को जंगल की ओर खदेड़ा। सूचना मिलने पर वन विभाग और पार्क टीम मौके पर पहुंची, जिन्होंने क्षेत्र का मुआयना किया और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। टीम लगातार क्षेत्र में पेट्रोलिंग और निगरानी बनाए हुए है, ताकि बाघों की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके। फिलहाल गांव में रात होते ही सन्नाटा और डर का माहौल है, जबकि ग्रामीण बाघों की दोबारा आमद की आशंका से अब भी सहमे हुए हैं।  

76 अधिकारियों का बड़ा जिम्मा, वन क्षेत्रपालों को मिला पदस्थापना आदेश

भोपाल  प्रशासनिक नजरिए से 7 नवंबर का दिन मध्यप्रदेश के लिए कुछ खास होगा। इस दिन प्रदेश को 8 सौ से ज्यादा नए अधिकारी, कर्मचारी मिलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन नव-चयनित सरकारी सेवकों को समारोहपूर्वक नियुक्ति एवं पदस्थापना आदेश प्रदान करेंगे। शुक्रवार को राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में यह कार्यक्रम आयोजित होगा। खास बात यह है कि यहां 76 वन क्षेत्रपालों को भी पदस्थापना आदेश प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही इन्हें प्रदेश के वनों के संरक्षण, संवर्धन का अहम दायित्व दे दिया जाएगा। 7 नवम्बर को पूर्वान्ह 11.30 बजे से कार्यक्रम शुरु होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यहां वन एवं लोक स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा विभाग के कुल 877 अधिकारी-कर्मचारियों को नियुक्ति एवं पदस्थापना आदेश प्रदान करेंगे। इनमें वन विभाग के 543 नव-नियुक्त वनरक्षक एवं वन क्षेत्रपाल और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के 334 नव-नियुक्त विशेषज्ञ एवं नर्सिंग ऑफिसर शामिल हैं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग भर्ती परीक्षा वर्ष 2024-25 से चयनित 75 निश्चेतना विशेषज्ञ, 62 सर्जरी विशेषज्ञ, 106 शिशु रोग विशेषज्ञ एवं 91 नर्सिंग ऑफिसर को नियुक्ति आदेश दिए जाएंगे। वन विभाग में मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मण्डल, भोपाल द्वारा आयोजित वनरक्षक भर्ती परीक्षा वर्ष 2022-23 में चयनित 467 नव-नियुक्त वनरक्षकों को पदस्थापना आदेश दिए जाएंगे। इन्होंने वन प्रशिक्षण विद्यालयों में वानिकी प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया है। साथ ही मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित वन क्षेत्रपाल भर्ती परीक्षा वर्ष 2020-21 से चयनित 76 वन क्षेत्रपाल को भी पदस्थापना आदेश प्रदान किए जाएगे। इन्होंने देश की विभिन्न प्रशिक्षण अकादमियों में 18 माह का प्रशिक्षण पूरा किया है। द्वितीय श्रेणी (Class II) के राजपत्रित अधिकारी बता दें कि मध्यप्रदेश में वन क्षेत्रपाल (Range Forest Officer) द्वितीय श्रेणी (Class II) के राजपत्रित अधिकारी होते हैं। ये राज्य वन सेवा (State Forest Service – SFS) के अंतर्गत आते हैं जोकि वन मंडल अधिकारी (DFO) के अधीन रहकर कार्य करते हैं। प्राय: इन्हें एक वन रेंज (Forest Range) का प्रभार दिया जाता है। वनों के संरक्षण, संवर्धन का अहम दायित्व वन क्षेत्रपालों का ही रहता है। वृक्षों की कटाई, वन उत्पादों का संग्रहण और वन क्षेत्र का प्रबंधन भी इनके कार्यों में शामिल है।

हुरून इंडिया की सूची में मध्यप्रदेश के सबसे धनी व्यक्ति विनोद अग्रवाल, संपत्ति 4,430 करोड़

इंदौर  इंदौर शहर के जाने-माने उद्योगपति और समाजसेवी विनोद अग्रवाल प्रदेश में सबसे ज्यादा धनी तो हैं ही, वे सेवा कार्यों में भी अव्वल हैं। गुरुवार को हुरून इंडिया ने देशभर के दानदाताओं की सूची जारी की, इसमें अग्रवाल कोल के मुखिया विनोद अग्रवाल देश में 71वें नंबर पर हैं। वे प्रदेश में सबसे ऊपर हैं। वे लगातार 5 बार से इस लिस्ट में जगह बनाए हुए हैं। अग्रवाल ने वर्ष 2024-25 में 19 करोड़ की राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, पशु कल्याण, गरीब, कुपोषण जैसे कार्यों में लगाई। मालूम हो, पिछले दिनों हुरून इंडिया ने देश के सबसे धनी लोगों की सूची जारी की थी। इसमें विनोद अग्रवाल की संपत्ति 4430 करोड़ रुपए थी। वे प्रदेश के सबसे धनी व्यक्ति भी है। 5 साल से वे परोपकार में प्रदेश में नंबर वन हैं। बुधवार को ही उन्होंने इंदौर के अन्नपूर्णा माता मंदिर में 10 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले हाईटेक सभा मंडप और अन्नक्षेत्र का भूमिपूजन किया। वे अपनी संस्था बालाजी सेवार्थ विनोद अग्रवाल फाउंडेशन के माध्यम से कई प्रकल्प चला रहे हैं। हालांकि बीते साल उन्होंने 20 करोड़ रुपए दान में लगाए थे, वे देश में 58वें नंबर पर थे। टाटा-बिरला से मिली प्रेरणा विनोद अग्रवाल ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि भगवान ने बहुत कुछ दिया है। सभी को अपनी कमाई से दूसरों के लिए कुछ करना चाहिए। मैंने टाटा-बिरला को देखकर परोपकार शुरू किया। ऐसे ही अन्य सक्षम लोगों को मदद के लिए हाथ बढ़ाना चाहिए। परोपकार करने से आत्म संतुष्टि मिलती है। पूरे शहर में जरूरतमंदों को बांटेंगे भोजन अग्रवाल ने बताया कि अयोध्या में अन्नक्षेत्र का वर्तमान में काम चल रहा है। महालोक, सालासर बालाजी में जनसुविधा के लिए काम करवाए हैं। अन्नपूर्णा मंदिर में हाईटेक भोजनशाला बनाई जा रही है। हर दिन दो से ढाई हजार जरूरतमंद लोगों को शहर के अलग-अलग हिस्सों में भोजन पहुंचाएंगे। योग के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य के वे कई प्रकल्प चला रहे हैं।

देशभर के 10 संभागों में वंदे मातरम्@150 के कार्यक्रम, भोपाल में समारोह हुआ भव्य

भोपाल   वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी ने आज से पूरे देश में ‘वंदे मातरम्@150’ अभियान की शुरुआत की। मध्यप्रदेश में इस अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के शौर्य स्मारक में किया। इस मौके पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, मंत्रीगण, सांसद, विधायक, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने शौर्य स्मारक और भाजपा प्रदेश कार्यालय दोनों स्थानों पर ‘वंदे मातरम्’ के मूल स्वरूप में सामूहिक गायन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा और स्वतंत्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब किसी देश में आजादी की भावना जागृत होती है, तो इस गीत के शब्द लोगों के मन में नई ऊर्जा का संचार करते हैं। भोपाल के शौर्य स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, रामेश्वर शर्मा, महापौर माली श्री राय, ACS अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह, DGP कैलाश मकवाना, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल और भोपाल की पुलिस कमिश्नर हरि नारायण चारी मिश्रा मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम का मूल मंत्र हमेशा से हमें प्रेरित करता रहा है। हर देश में जब स्वतंत्रता की भावना बढ़ती है, तब इन शब्दों से एक नए प्रकार का स्पंदन उत्पन्न होता है, जिसे हम गीतों के रूप में अनुभव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि "कदम कदम बढ़ाए जा" पुलिस बैंड द्वारा प्रस्तुत किया गया है और यह गीत आजादी के संघर्ष के दौरान रचित गीतों में से एक है। इस गीत की रचना में त्रिदेवियों दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती को जोड़ने की विशेष संरचना है और इसके माध्यम से उनकी पूजा का संदेश भी निहित है। हमारी त्रिदेवियों की कल्पना हजारों वर्षों से चली आ रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अतीत के अप्रतिम गीतों ने आजादी की अलख जगाई। 19वीं शताब्दी से शुरू हुई यह यात्रा हमें आज भी प्रेरित करती है। आजादी के हर संघर्ष में, चाहे वह अमेरिका हो या इंग्लैंड, जब आजादी की अलख जगती है, तब शब्दों से नए संकल्प उत्पन्न होते हैं। राष्ट्रभक्ति गीतों के माध्यम से देश अपनी पहचान बनाता है। 10 संभागों में एक साथ हुआ आयोजन भाजपा के इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत भोपाल सहित राज्य के 10 संभागों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। हर संभाग में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार के मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। शौर्य स्मारक पर हुए आयोजन में मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर माली श्री राय, DGP कैलाश मकवाना, ACS अशोक वर्णवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। ‘स्वदेशी संकल्प’ भी लिया गया ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के बाद कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने ‘स्वदेशी का संकल्प’ भी लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि “वंदे मातरम्” की रचना में भारत की त्रिदेवियों—दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का आह्वान है, जो हमारी संस्कृति और मातृशक्ति की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक जागृति का प्रतीक बनेगा। 10 संभागों में हो रहे कार्यक्रम वंदे मातरम गायन के बाद स्वदेशी का संकल्प भी सामूहिक रूप से लिया जाएगा। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत मध्यप्रदेश के भोपाल सहित 10 संभागों और 10 विशेष स्थानों पर विशेष आयोजन हो रहे है। इन आयोजनों में प्रदेश मंत्री, बीजेपी के प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, विधायक सहित जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे है। 26 नवंबर तक चलेगा अभियान 07 नवंबर से शुरू होने वाला यह उत्सव 26 नवम्बर (संविधान दिवस) तक देशभर के साथ प्रदेशभर में मनाया जाएगा, जिसमें हर जिले और हर शैक्षणिक संस्थान की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पूरे प्रदेश में होंगे आयोजन भाजपा ने राज्यभर के 10 प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर भी इस अभियान के तहत विशेष आयोजन किए हैं। इनमें महाकाल लोक (उज्जैन), देवी अहिल्याबाई स्मारक (इंदौर), शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्मारक (मुरैना), रानी लक्ष्मीबाई बलिदान स्थल (ग्वालियर), शहीद रघुनाथ शाह–शंकर शाह स्थल (जबलपुर) और सेठानी घाट (नर्मदापुरम) शामिल हैं। 26 नवंबर तक चलेगा राष्ट्रव्यापी उत्सव यह अभियान 7 नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक चलेगा। इस दौरान राज्य के प्रत्येक जिले, स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम् गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे। भाजपा नेताओं ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य देशभर में राष्ट्रगीत के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को और सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री बोले — "वंदे मातरम् हमारी पहचान" मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा—     “वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, यह हमारी पहचान है। इसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों भारतीयों को प्रेरित किया। अब समय है कि नई पीढ़ी इस गीत के संदेश को समझे और भारत की सांस्कृतिक एकता को सहेजे।” अब जानिए कौन से मंत्री कहां है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव- शौर्य स्मारक (भोपाल) उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल- कलेक्टर कार्यालय (रीवा) मंत्री कैलाश विजयवर्गीय- कलेक्टर कार्यालय (इंदौर) मंत्री राकेश सिंह – कलेक्टर कार्यालय (जबलपुर) मंत्री राव उदय प्रताप सिंह- कलेक्टर कार्यालय (नर्मदापुरम) मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर -कलेक्टर कार्यालय (ग्वालियर) मंत्री गोविंद सिंह राजपूत- कलेक्टर कार्यालय (सागर) मंत्री एंदल सिंह कंसाना -कलेक्टर कार्यालय (मुरैना) मंत्री दिलीप जायसवाल -कलेक्टर कार्यालय (शहडोल) मंत्री गौतम टेटवाल -कलेक्टर कार्यालय (उज्जैन) भाजपा आज इन दस स्थानों पर कर रही आयोजन     भाजपा प्रदेश कार्यालय भोपाल     मॉ नर्मदा तट सेठानी घाट नर्मदापुरम     शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्मारक मुरैना     रानी लक्ष्मीबाई बलिदान स्थल ग्वालियर     रानी लक्ष्मीबाई स्मारक स्थल सागर     शहीद पदम्धर स्मारक रीवा     शहीद स्मारक शहडोल     शहीद रघुनाथ शाह, शंकर शाह बलिदान स्थल जबलपुर     देवी अहिल्या बाई स्मारक स्थल इंदौर     महाकाल लोक उज्जैन

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ से शुरू हुई सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री करेंगे नेतृत्व

छतरपुर  बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में 'सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0' का शुभारंभ दिल्ली के इंद्रप्रस्थ से हुआ। यह यात्रा वृंदावन तक जाएगी। शुक्रवार सुबह 9 बजे कात्यायनी मंदिर परिसर में संत-महात्माओं की उपस्थिति में मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के बाद संतों की ओर से सौंपे गए धर्म ध्वज को लेकर बागेश्वर बाबा के नेतृत्व में यात्रा वृंदावन के लिए रवाना होगी। धीरेंद्र शास्त्री बोले- यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति गुरुवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए बागेश्वर महाराज ने कहा कि यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति है, जिसका उद्देश्य विचारों को जगाना और समाज को जोड़ना है। उन्होंने कहा, हम विवाद नहीं, संवाद के माध्यम से आगे बढ़ना चाहते हैं। यह यात्रा सनातन एकता का संदेश लेकर चलेगी। महाराज श्री ने बताया कि मंचीय कार्यक्रम में राष्ट्रगान, हनुमान चालीसा, श्रीराम नाम संकीर्तन और हिंदू एकता की शपथ ली जाएगी। उन्होंने देश-विदेश के हिंदुओं से 7 से 16 नवंबर के बीच चलने वाली इस यात्रा में कम से कम एक दिन शामिल होने का आग्रह किया। इस पदयात्रा में देश के कई संत, आचार्य शामिल होंगे इस पदयात्रा में जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज, राजेंद्र दास महाराज, दीदी मां ऋतंभरा, चिदानंद मुनि जी, स्वामी ज्ञानानंद महाराज, सुधांशु जी महाराज, राजू दास महाराज, मृदुल कांत शास्त्री, दाती महाराज, पंडित संजीव कृष्ण ठाकुर और महामंडलेश्वर नवल किशोर दास सहित देशभर के अनेक संत, आचार्य और महामंडलेश्वर भाग ले रहे हैं। राजनीतिक क्षेत्र से दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद मनोज तिवारी और मंत्री कपिल मिश्रा भी उपस्थित रहेंगे। बागेश्वर महाराज ने बताया कि यात्रा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की 422 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरेगी, जिससे करीब 5 करोड़ लोगों तक इसका संदेश पहुंचेगा। इस साल 300 से अधिक मुस्लिम सदस्य भी होंगे शामिल इस बार यात्रा को मुस्लिम समाज से भी समर्थन मिला है। फैज खान के नेतृत्व में 300 से अधिक मुस्लिम सदस्य पदयात्रा में शामिल होंगे। हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में मुस्लिम समुदाय ने कहा कि यह यात्रा 'लोगों को जोड़ने का कार्य कर रही है', इसलिए वे भी इसमें साथ चलेंगे।     महाराज का संदेश – यात्रा में मर्यादा व शांति बनाए रखें     बागेश्वर महाराज ने सभी पदयात्रियों से कहा है कि वे मर्यादित होकर चलें।     किसी जाति, पंथ या संप्रदाय पर टिप्पणी न करें, और अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग न करें।     प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि सभी संवेदनशील स्थलों पर विशेष सुरक्षा की जाए। पदयात्रा के सात संकल्प 1. यमुना माता का शुद्धिकरण। 2. भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। 3. गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिले। 4. श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर भव्य रूप में निर्मित हो। 5. ब्रज परिक्षेत्र से मांस-मदिरा पर प्रतिबंध। 6. अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद पर रोक। 7. जात-पात और ऊंच-नीच का भेद समाप्त कर सामाजिक समरसता स्थापित हो।

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना: नई यात्राओं का हुआ ऐलान

तिरुपति, रामेश्वरम, कामाख्या, द्वारका, वैष्णोदेवी, जगन्नाथपुरी और अयोध्या में होंगे तीर्थ दर्शन भोपाल संस्कृति, पर्यटन तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के विशेष प्रयास किए जा रहे है। साथ ही प्रदेश में तीर्थाटन की परंपरा को संरक्षित और प्रोत्साहित करते हुए एवं प्रदेश के बुजुर्गों को तीर्थयात्रा का लाभ दिए जाने के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना का संचालन किया जा रहा है। ‘‘मध्यप्रदेश तीर्थ-दर्शन योजना’’ केवल धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज में बुजुर्गों के सम्मान को पुनर्स्थापित करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है। इसका अगला चरण 13 नवंबर 2025 से प्रारंभ होकर 29 मार्च 2026 तक चलेगा। पहली यात्रा श्री तिरुपति तीर्थ के लिए 13 नवंबर को जबलपुर से रवाना होगी। पांच महीनों में प्रदेश के बुजुर्गों को तिरुपति, रामेश्वरम, कामाख्या, द्वारका, वैष्णोदेवी, जगन्नाथपुरी और अयोध्या में तीर्थ दर्शन कराए जाएंगे। राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से वरिष्ठ नागरिकों के समूह देश के प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा के लिए भेजे जाएंगे धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा संबंधित जिलों के कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए है। योजना उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए है जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है तथा वे आयकर-दाता नहीं हैं। महिलाओं को आयु सीमा में 2 वर्ष की छूट दी गई है। इच्छुक आवेदक अपने आवेदन तहसील, स्थानीय निकाय, जनपद कार्यालय अथवा कलेक्टर द्वारा निर्धारित स्थानों पर जमा कर सकते हैं। राज्य मंत्री श्री लोधी ने बताया कि यात्रियों का अंतिम चयन संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा किया जाएगा। किसी जिले में निर्धारित कोटे से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो यात्रियों का चयन कम्प्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। यात्रियों की स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेन में डॉक्टर और सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए जायेंगे। उन जिलों में जहाँ ट्रेन का स्टॉपेज या स्टेशन नहीं है वहाँ के यात्रियों को बोर्डिंग स्टेशन तक लाने को व्यवस्था संबंधित जिलों के कलेक्टर्स करेंगे। राज्य मंत्री श्री लोधी ने सभी यात्रियों से आग्रह किया है कि मौसम के अनुरूप वस्त्र, ऊनी वस्त्र, कंबल, चादर, तौलिया, साबुन और आवश्यक दवाइयां जैसी व्यक्तिगत उपयोग की सामग्री अपने साथ रखें। IRCTC करेगा यात्रा का प्रबंधन योजना का क्रियान्वयन भारत सरकार के उपक्रम IRCTC (इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के द्वारा किया जा रहा है। यात्रा के दौरान IRCTC द्वारा पेयजल, भोजन, नाश्ता और चाय उपलब्ध कराई जाएगी। यात्रियों के रुकने की व्यवस्था, उन्हें तीर्थ स्थल तक बसों द्वारा ले जाने और वापस ट्रेन तक लाने की जिम्मेदारी भी IRCTC की होगी। सभी तीर्थ यात्रियों के लिए अपने साथ ओरिजिनल आधार कार्ड या वोटर कार्ड रखना अनिवार्य है। राज्यमंत्री श्री लोधी ने बताया कि ‘‘मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना’’ उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए संबल है, जो तीर्थयात्रा की इच्छा तो रखते हैं परंतु आर्थिक या स्वास्थ्यगत कठिनाइयों के कारण यात्रा करने में असमर्थ होते हैं।  यह योजना धार्मिक आस्था को सम्मान देती है और बुजुर्गों को आध्यात्मिक आनंद के साथ सामाजिक सुरक्षा का विश्वास भी प्रदान करती है। राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए निरंतर अधोसंरचना उन्नयन, तीर्थस्थलों के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार और यात्रा मार्गों के विकास पर कार्य कर रही है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को सुगमता मिल रही है, बल्कि धार्मिक पर्यटन को आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी सशक्त बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के ये प्रयास आने वाले समय में मध्यप्रदेश को ‘‘आध्यात्मिक पर्यटन के अग्रणी राज्य’’ के रूप में और अधिक प्रतिष्ठा दिलाएँगे।

सरकारी और निजी नर्सिंग कॉलेजों पर सवाल: 33 हजार में से 29 हजार सीटें खाली!

भोपाल प्रदेश के सरकारी और निजी नर्सिंग कॉलेजों में हुए फर्जीवाड़े का असर अब प्रवेश में देखने को मिल रहा है। कालेजों में डिग्री और डिप्लोमा मिलाकर 33 हजार सीटों में से चार हजार सीटों पर भी प्रवेश नहीं हुए हैं, जबकि अंतिम चरण की काउंसलिंग पूरी हो गई है। सीटें रिक्त रहने के कारण इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आइएनसी) ने प्रवेश की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी है। कुछ और नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता इस बीच मिल सकती है, पर पहले से ही लगभग 90 प्रतिशत सीटें रिक्त हैं। नर्सिंग काउंसिल के अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष से भी कम प्रवेश हुए हैं। एक समय था, जब प्रतिवर्ष 40 से 45 हजार सीटों पर प्रवेश हो रहे थे। प्रदेश में आधे से अधिक नर्सिंग कॉलेज बिना मापदंड चल रहे थे। वर्ष 2022 में ला स्टूडेंट एसोसिएशन ने हाई कोर्ट जबलपुर में ऐसे कॉलेजों की सूची के साथ याचिका लगाई।   कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी। इसके बाद 200 से अधिक कॉलेज बंद हो गए। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद दूसरे राज्यों के विद्यार्थी मप्र नहीं आ रहे। उल्टा, यहां के छात्र दूसरे राज्यों में नर्सिंग की पढ़ाई के लिए जा रहे हैं। इस कारण सीटें नहीं भर पा रही हैं। नर्सिंग पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की सर्वाधिक संख्या बीएससी नर्सिंग और जीएनएम (डिप्लोमा) की होती हैं। वर्ष 2024 में सरकारी व निजी मिलाकर कुल 19,212 सीटों में से 3,030 यानी 16 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश हुए थे। वर्ष 2025 में 22,880 में से 2843 यानी 12 प्रतिशत में ही प्रवेश हुए हैं। फिर कैसे मिलेगा अस्पतालों को नर्सिंग स्टाफ प्रवेश कम होने से बड़ी चिंता यह है कि सरकारी और निजी अस्पतालों को कुशल नर्सिंग स्टाफ कैसे मिल पाएगा। अभी स्थिति यह है कि सरकारी कालेजों की ही बीएससी नर्सिंग की लगभग 150 सीटें रिक्त हैं। बड़ी जद्दोजहद के बाद सभी सरकारी कालेजों को मान्यता मिल पाई है। जिस तरह से नए निजी और सरकारी अस्पताल खुल रहे हैं, प्रतिवर्ष लगभग 10 हजार नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता है।

AIIMS भोपाल के डॉक्टरों का कमाल, वेस्टेज गर्भनाल से 13 लोगों की आंखों की रोशनी लौटी

भोपाल  गर्भनाल, गर्भस्थ शिशु के लिए रक्षा कवच का काम करता है. जबकि शिशु का जन्म होने के बाद इस कवच को वेस्टेज समझ के फेंक दिया जाता था, लेकिन एम्स भोपाल के डाक्टर अब इस इस गर्भनाल की झिल्लियों से आंखे खो चुके मरीजों के जीवन में फिर से रोशनी लाने का काम कर रहे हैं. दीपावली के दौरान कार्बाइड गन से घायल 13 लोग आंखों का इलाज कराने के लिए एम्स भोपाल पहुंचे थे. जहां डाक्टरों ने एमनियोटिक मेम्ब्रेन यानि गर्भनाल की झिल्लियों का उपयोग कर उनकी आंखों की रोशनी लौटाई. घाव भरने और पारदर्शिता बनाए रखने में करती है मदद एम्स भोपाल के सर्जन डॉक्टर समेंद्र खुरकुर ने बताया कि "नवजात शिशुओं के जन्म के बाद उनके गर्भनाल को पहले फेंक दिया जाता था, लेकिन अब यही आंखों की गंभीर समस्याओं में दवाई का काम कर रही है. गर्भनाल की जीवित झिल्ली घाव भरने में मदद करती है. इसके साथ ही आंखों की पारदर्शिता बनाए रखने में भी मदद करती है. वहीं निजी अस्पतालों में जहां इस तरह के इलाज में 40 से 50 हजार रुपए खर्च हो जाते हैं. भोपाल एम्स में आयुषमान कार्डधारकों का यह इलाज निशुल्क किया जा रहा है. जबकि जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उनसे भी केवल 250 रुपए लिए जा रहे हैं. मरीजों की आंखों का 80 प्रतिशत विजन लौटा डॉक्टर समेंद्र खुरकुर ने बताया किए मनियोटिक मेम्ब्रेन तकनीकी ऐसे लोगों के लिए कारगर है, जिनकी आंखें केमिकल के पटाखों से खराब हुई है. उनके कार्नियल अल्सर या संक्रमण की स्थिति में और एलर्जिक सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों के इलाज में बेहतर रिजल्ट मिलता है. इसके साथ ही इसका इस्तेमाल ट्रामा या सर्जरी के बाद ऊतकों की बेहतर रिकवरी के लिए भी किया जाता है. उन्होंने बताया कि एम्स भोपाल में जिन मरीजों का इलाज चल रहा है, उनका विजन 80 प्रतिशत से अधिक लौट चुका है. इनमें अधिकतर मरीजों की आंखें कार्बाइड गन से डैमेज हुई थी. इस तरह किया जाता है एमनियोटिक मेम्ब्रेन से इलाज आंखो में चोट, इंफेक्शन या पटाखों से आंखों की ऊपरी सतह झुलसने पर यदि दवाइयों से घाव ठीक नहीं होते तो एमनियोटिक मेम्ब्रेन ग्राफ्टिंग की जाती है. सबसे पहले डिलेवरी के बाद नवजात शिशु को इससे अलग किया जाता है. फिर इसे स्टरलाइज करने के बाद नार्मल स्लाइन से साफ किया जाता है. इसके बाद इसे एंटीबायोटिक या बीटाडीन सॉल्यूशन से साफ किया जाता है. इसके बाद आंखों के क्षतिग्रस्त हिस्से को साफ कर टांकों के माध्यम से इसकी ग्राफ्टिंग की जाती है. इससे घाव जल्द भरते हैं और मरीज की रिकवरी जल्दी होती है. जानिए क्या होता है एमनियोटिक मेम्ब्रेन एमनियोटिक मेम्ब्रेन एक पतली और मजबूत झिल्ली होती है, जो गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को घेरे रहती है. विशेष रूप से, यह एमिनियोटिक थैली की आंतरिक या भीतरी परत होती है, जो भ्रूण को धारण करने वाला आवरण होती है. एमनियोटिक थैली में एमनियोटिक द्रव और एक बाहरी परत भी होती है, जिसे कोरियोन कहा जाता है. ये संरचनाएं मिलकर भ्रूण के लिए एक सुरक्षात्मक आवरण बनाती हैं, ताकि वह बढ़ सके और विकसित हो सके.

वंदे-मातरम के 150 साल: मध्यप्रदेश में भव्य जन-उत्सव, राज्य मंत्री लोधी ने किया ऐलान

राष्ट्रगीत वंदे-मातरम की 150वीं वर्षगांठ मध्यप्रदेश में एक भव्य जन-उत्सव के रूप में मनाई जाएगी : राज्य मंत्री  लोधी पूरे एक वर्ष तक, पंचायत से लेकर पर्यटन स्थलों तक गूंजेगा वंदे मातरम का अमर स्वर राज्य स्तरीय मुख्य समारोह 7 नवंबर को शौर्य स्मारक में होगा सभी मुख्यालयों पर होगा एक साथ गायन "स्वदेशी अपनाएँ" का लिया जाएगा सामूहिक संकल्प भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर को मध्यप्रदेश में एक अविस्मरणीय 'जन-उत्सव' के रूप में मनाया जाएगा। संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह गौरवशाली आयोजन 7 नवंबर 2025 से प्रारंभ होकर 7 नवंबर 2026 तक, पूरे एक वर्ष तक चलेगा। यह समारोह, भारत सरकार के निर्णय के अनुरूप, राष्ट्रगीत के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी ओजस्वी भूमिका और हमारी सांस्कृतिक विरासत में इसके अमूल्य महत्व को प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। राज्यमंत्री  लोधी ने इस आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा, "'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का वह जीवंत स्फुरण है जिसने करोड़ों भारतवासियों के हृदय में स्वाधीनता की अलख जगाई। यह हमारे अमर बलिदानियों का जयघोष था। इस ऐतिहासिक वर्षगांठ को मनाने का निर्णय हमारी नई पीढ़ी को उस त्याग और राष्ट्र-प्रेम की भावना से सीधे जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। मध्य प्रदेश इस राष्ट्रीय आयोजन को एक जन-अभियान का स्वरूप देगा। राज्यमंत्री  लोधी ने बताया कि वर्ष भर चलने वाले इन समारोहों को चार मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है, जिससे राष्ट्र-प्रेम की भावना सतत प्रवहमान रहे।          प्रथम चरण: 7 नवंबर से 14 नवंबर 2025 तक।          द्वितीय चरण: 19 जनवरी से 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस सप्ताह)।          तृतीय चरण: 7 अगस्त से 15 अगस्त 2026 ('हर घर तिरंगा अभियान' के साथ)।          चतुर्थ चरण: 1 नवंबर से 7 नवंबर 2026 (समापन सप्ताह)। राज्यमंत्री  लोधी ने बताया कि राज्य स्तरीय समारोह 7 नवंबर 2025 को प्रातः 09:30 बजे भोपाल स्थित शौर्य स्मारक में संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित किया जाएगा। इसी समय, प्रातः 9:30 बजे, प्रदेश के सभी जिला, तहसील एवं विकासखण्ड मुख्यालयों पर "वंदे मातरम" का संपूर्ण गायन एक साथ, एक स्वर में किया जाएगा। प्रातः 10 बजे से नई दिल्ली में आयोजित प्रधानमंत्री के मुख्य कार्यक्रम के सीधे प्रसारण को देखने-सुनने की व्यवस्था प्रदेश के सभी आयोजन स्थलों पर सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय, अर्द्ध-शासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में 7 नवंबर को वंदे मातरम का भव्य गायन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। इस राष्ट्रगीत गायन को और अधिक भव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए पुलिस बैंड, स्कूल-कॉलेजों के बैंड एवं अन्य स्थानीय बैंड दलों की सहभागिता भी होगी। राज्यमंत्री  लोधी ने बताया कि यह आयोजन केवल शासकीय न होकर, 'जन-जन का आयोजन' बनेगा। इसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि, शासकीय अधिकारी-कर्मचारी, पुलिसकर्मी, चिकित्सक, शिक्षक और सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से शामिल होंगे। राज्य मंत्री  लोधी ने कार्यक्रमों की श्रंखला के संबंध में बताया कि 8 नवंबर 2025: प्रातः 10 बजे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश की सभी जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायतों में 'वंदे मातरम' का सामूहिक गायन आयोजित किया जाएगा, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। 10 नवंबर 2025 प्रातः 10 बजे नगरीय विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से प्रदेश के सभी नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद) में वंदे मातरम का गायन किया जाएगा। संस्कृति मंत्री ने निर्देश दिए कि पर्यटन विभाग के समन्वय से, प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टरों द्वारा चयनित प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी 'वंदे मातरम' राष्ट्रगीत का गायन सुनिश्चित किया जाए, जिससे पर्यटकों में भी राष्ट्रीय गौरव का संचार हो। "सभी स्वदेशी अपनाएँ" का लिया जाएगा सामूहिक संकल्प राज्यमंत्री  लोधी ने बताया कि इन सभी आयोजनों का एक महत्वपूर्ण और सार्थक भाग "सभी स्वदेशी अपनाएँ" का सामूहिक संकल्प। यह संकल्प राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रतीकात्मक और ठोस कदम होगा।   

उमरिया में 3 दिवसीय मास्टर ट्रेनर ट्रेनिंग, साल 2026 में होगी बाघों की गणना

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में साल 2026 में होने वाली बाघ की गणना को लेकर अधिकारी कर्मचारियों को लगातार ट्रेंड किया जा रहा है. इसके लिए 3 नवंबर से लेकर 5 नवंबर तक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तीन दिवसी मास्टर ट्रेनर की ट्रेनिंग कराई गई. इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. 50 से अधिक कर्मचारी और अधिकारियों ने लिया हिस्सा 3 नवंबर से 5 नवंबर तक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला ईको केंद्र में विशेष ट्रेनिंग आयोजित की गई, जिसमें वन मंडल स्तरीय मास्टर ट्रेनर और समन्वय अधिकारियों की ये तीन दिवसीय ट्रेनिंग आयोजित की गई थी, जहां 7 मंडलों के 50 से अधिक अधिकारी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया. इसमें कर्मचारी और अधिकारियों को अलग-अलग लेवल की ट्रेनिंग कराई गई. इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी और एक्सपर्ट्स भी मौजूद रहे. फील्ड सेशन में डाटा कलेक्शन सहित कई बिंदुओं पर चर्चा 3 दिवसीय ट्रेनिंग के आखिरी दिन भोपाल से आए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एल कृष्णमूर्ति भी शामिल हुए, जहां उन्होंने फील्ड सत्र में हिस्सा लिया. इस दौरान एल कृष्णमूर्ति के साथ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय और उपसंचालक पीके वर्मा भी सम्मिलित थे. फील्ड सेशन में फील्ड में डाटा कलेक्शन में आने वाली कठिनाइयों और छोटी-छोटी गलतियां के निराकरण पर ध्यान दिया गया. कैमरा ट्रैप में इन बातों पर फोकस फील्ड सत्र के बाद WII देहरादून से आए आशीष प्रसाद और मास्टर ट्रेनर कमलेश नंदा ने क्लासरूम सेशन भी लिया और फील्ड में आने वाली समस्याओं का निराकरण किया. बाघों की गणना में कैमरा ट्रैप का बहुत बड़ा रोल होता है, फील्ड में कैमरा ट्रैप लगाने में अक्सर गलतियां हो जाती हैं, ऐसे में कौन सी छोटी-छोटी गलतियां होती हैं, जिन पर फोकस करने की जरूरत है, फील्ड में होने वाली इन छोटी छोटी गलतियों पर भी ध्यान दिया गया. इन कारणों से बाघ गणना में सही संख्या नहीं मिलती कई बार कैमरा ट्रैप को गलत दिशा में, दूरी एवं ऊंचाई पर लगाने के कारण फोटो ब्लर हो जाती है और टाइगर नहीं मिल पाता है. जिसके चलते बाघ गणना में सही संख्या नहीं मिल पाती. इसके अलावा कैमरा ट्रैप आईडी और स्थान भी मिसमैच होने के चलते डाटा कलेक्शन में दिक्कत होती है. ऐसी छोटी-छोटी गलतियों पर भी फोकस किया गया, उन गलतियों को सुधारने के तरीके भी बताए गए. बांधवगढ़ बाघों का गढ़ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि "ये तीन दिवसीय ट्रेनिंग थी, जिसमें 7 वन मंडल के 50 से ज्यादा अधिकारी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और मास्टर ट्रेनर बने. यह तैयारी 2026 में होने वाली बाघ गणना के लिए हो रही है. बाघ गणना 2026 की तैयारी की समीक्षा भी की गई. साथ ही इसे सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश भी सभी अधीनस्थों को दिए.     बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों का गढ़ माना जाता है, इसीलिए पूरे मध्य प्रदेश में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मिलने वाले बाघों की संख्या पर सबकी नजर रहेगी. टाइगर रिजर्व प्रबंधन भी बाघों की सटीक और सही गणना के लिए लगातार ट्रेनिंग और तैयारी कर रहा है. इससे पहले साल 2022 में बाघों की गणना की गई थी, जिसमें 165 बाघ मिले थे, इस बार देखना दिलचस्प होगा की बाघों की संख्या कहां तक पहुंचती है.