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एप्को की पहल : मिट्टी के गणेश से सजेगा पर्यावरण संरक्षण का पर्व

भोपाल  पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में ग्रीन गणेश अभियान-2025 का संचालन किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत ‘आओ, बनाओ, घर ले जाओ’ निःशुल्क 4 दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ शुक्रवार को एप्को इंस्टिट्यूट भवन, पर्यावरण परिसर में हुआ। कार्यशाला का शुभारंभ एप्को के कार्यपालन संचालक श्री दीपक आर्य ने किया। कार्यशाला 22 से 25 अगस्त तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक होगी। यहां अनुभवी मूर्तिकार प्रतिभागियों को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। कार्यशाला में बनाई गई प्रतिमाएँ प्रतिभागियों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। कार्यशाला में एप्को के कार्यपालन संचालक श्री आर्य ने कहा कि प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियाँ जल स्रोतों को प्रदूषित करती हैं। उन्होंने अपील की है कि गणेशोत्सव के लिए मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी प्रतिमाएँ स्थापित करें तथा उनका विसर्जन घर पर ही करें। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण का संकल्प बनाने का आह्वान भी किया। कार्य़शाला में शासकीय नवीन उ.मा. विद्यालय ओल्ड कैम्पियन, भोपाल के ईको क्लब प्रभारी श्री अमोल अधोलिया अपने 50 विद्यार्थियों के साथ उपस्थित रहे। शासकीय मा. विद्यालय बोर्ड कॉलोनी की श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव एवं श्रीमती अर्चना दुबे 35 छात्राओं के साथ कार्यशाला में शामिल हुईं। एप्को की कार्यशाला के पहले दिन 350 प्रतिभागियों ने गणेश प्रतिमाएँ बनाईं और उन्हें अपने साथ घर ले गए। प्रतिभागियों ने इस पहल को अत्यंत सराहनीय बताया। कार्यशाला में एप्को के प्रशासनिक अधिकारी श्री मनोहर पाटिल, प्रमुख वास्तुविद श्रीमती अनिता वर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री लोकेंद्र ठक्कर, वास्तुविद श्री कमलेश वर्मा, शिक्षा अधिकारी श्री दिलीप चक्रवर्ती, कार्यक्रम के समन्वयक कार्यपालन यंत्री श्री राजेश रायकवार सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।  

साइबर अपराध से बचाव: डर, आलस्य और लालच सबसे बड़ी कमजोरी: विशेषज्ञ

भोपाल प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) भोपाल और केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञ वक्ताओं ने साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता साइबर कमांडो अनुज समाधिया ने "डिजिटल अरेस्ट एवं साइबर स्लेवरी" विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत डर, आलस्य और लालच हैं। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग बिना सोचे-समझे किसी भ्रामक संदेश, लिंक या कॉल पर प्रतिक्रिया कर देते हैं, जो उन्हें जाल में फंसा देता है। श्री समाधिया ने कहा—“किसी भी संदिग्ध संदेश या कॉल पर कार्रवाई करने से पहले ठहर कर उसकी वास्तविकता पर विचार करना चाहिए।” बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन में सावधानी जरूरी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सीनियर फैकल्टी अरुण पोनप्पन ने बैंकिंग एवं वित्तीय लेन-देन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ग्राहकों को कभी भी अपना ओटीपी, पासवर्ड या एटीएम कार्ड की डिटेल किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। साथ ही, संदिग्ध लिंक या फर्जी कॉल से सतर्क रहना जरूरी है। सोशल मीडिया पर फर्जी सूचनाओं से बचें साइबर सुरक्षा प्रशिक्षक  अतुल श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक सूचनाओं और उनसे बचाव के उपायों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज और गुमराह करने वाले संदेश बड़ी चुनौती हैं, जिन्हें साझा करने से पहले सत्यापन करना चाहिए। पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी कार्यशाला में बड़ी संख्या में पत्रकारों, मीडिया प्रतिनिधियों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन पीआईबी भोपाल के सहायक निदेशक अजय उपाध्याय ने किया। वहीं, सीबीसी भोपाल के उप निदेशक शारिक नूर ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर पीआईबी भोपाल के सहायक निदेशक समीर वर्मा, सीबीसी भोपाल के सहायक निदेशक पराग मांदले सहित अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।

जनजातीय परिवारों को सशक्त करने बनेगा तीन लाख आदि कर्मयोगियों का समर्प‍ित संवर्ग

41 जिलों के 11294 जनजातीय बहुल गांवों को मिलेगा लाभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में जनजातीय परिवारों को सशक्त बनाने और प्रत्येक परिवार को योजनाओं का लाभ देने के लिए तीन लाख "आदि कर्मयोगियों" का समर्प‍ित संवर्ग तैयार किया जा रहा है। इससे 41 जिलों के 11 हजार 294 जनजातीय बहुल गांवों में रह रहे परिवारों को लाभ होगा। इसका उद्देश्य जनजातीय कल्याण के लिए उत्तरदायी, पारदर्शी और जवाबदेह शासन को बढ़ावा देना है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सोच है कि विकसित भारत के निर्माण में जनजातीय परिवारों की समान भागीदारी हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार आदि कर्मयोगी अभियान में शासकीय अधिकारी 'आदि कर्मयोगी' के रूप में, युवा नेता, शिक्षक, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनजातीय कार्यों में रूचि रखने वाले प्रतिबद्ध लोग 'आदि सहयोगी' के रूप में और स्व-सहायता समूह, जनजातीय नेता, स्वयंसेवक, सांस्कृतिक कार्यकर्ता, गांव के निवासी "आदि साथी" के रूप में जुड़ सकते हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत आदि कर्मयोगी अभियान में मध्यप्रदेश में विशेषज्ञ संस्था भारत ग्रामीण आजीविका फाउंडेशन – बी.आर.एल.एफ द्वारा आदि कर्मयोगियों को राज्य, जिला, विकासखंड और ग्राम स्तरीय प्रशिक्षण देकर मास्टर ट्रेनर तैयार किये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 02 अक्टूबर 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का शुभारंभ किया था। केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा इस अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री मोदी के मिशन अनुरूप आदि कर्मयोगी अभियान प्रारंभ किया गया है। आदि कर्मयोगी एक राष्ट्रीय मिशन है। इसमें जमीनी स्तर पर शासन-प्रशासन तंत्र तथा सेवाओं को जनजातीय परिवारों के हित में मजबूत बनाया जायेगा। इस अभियान से देश में 20 लाख जिला अधिकारियों एवं अन्य हितधारकों का एक कैडर विकसित हो रहा है। इसमें मध्यप्रदेश के तीन लाख आदि कर्मयोगी शामिल हैं। आदि कर्मयोगी अभियान में स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, ग्रामीण विकास, वन, पंचायती राज विभाग और जल जीवन मिशन शामिल हैं। यह अभियान केन्द्र से लेकर विकासखंड स्तर तक जनजातीय विकास के संपूर्ण दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और सार्वजनिक संस्थानों में विश्वास बढ़ाने का कार्य करेगा। आदि कर्मयोगी अभियान के प्रथम चरण में देश के 27 राज्यों के 326 जिलों को शामिल किया गया है। इसमें मध्यप्रदेश के 41 जिले शामिल हैं। अभियान अंतर्गत धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ग्राम स्तर पर अपेक्षित परिणामों में मुख्य रूप से महत्वपूर्ण सेवाओं जैसे – आवास, सड़क, पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य में सौ प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना है। मध्यप्रेश में प्रगति स्‍टेट प्रोसेस लैब प्रशिक्षण का चार दिवसीय दूसरा सत्र 23 अगस्त से भोपाल सहित 24 जिलों में शुरू हो रहा है। प्रथम चरण के 17 जिलों में एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम हुआ। राज्य स्तरीय प्रोसेस लैब प्रशिक्षण के प्रथम चरण में 11 से 14 अगस्‍त को भोपाल में दो स्थानों पर 17 जिलों के 136 डिस्ट्रिक्ट मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्ष‍ित किया गया। डिस्ट्रिक्ट प्रोसेस लैब 20 से 22 अगस्त तक चली। इसमें केन्‍द्रीय जनजातीय कार्य राज्‍यमंत्री श्री दुर्गादास उइके और मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने मार्गदर्शन दिया। आदि कर्मयोगी अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए राज्य, जिला, विकासखंड और ग्राम स्तर पर उत्तरदायी समूह बनाये गये हैं। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव जिला स्तर पर संबंधित कलेक्टर और विकासखंड स्तर पर एसडीएम उत्तरदायी समूहों की अध्यक्षता करेंगे। जनजातीय बहुल गांव अब नया परिवर्तन अनुभव करने के लिए तैयार हो रहे हैं। सड़क संपर्क, पक्के मकान, पेयजल, घरेलू बिजली, आयुष्यमान भारत, डिजिटल सेवा जैसी सेवाओं से जनजातीय परिवार अब वंचित नहीं रहेंगे। प्रदेश में आदि सेवा केन्द्र बनाने की भी तैयारी है, जहां शिकायत निवारण रजिस्टर, नोडल अधिकारियों के संपर्क नम्बर और ग्राम के विकास का विजन तैयार करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया जायेगा।  

केंद्रीय मंत्री गडकरी और CM डॉ. यादव करेंगे जबलपुर में 1052 करोड़ के फ्लाईओवर का उद्घाटन

यातायात होगा सुगम और मिलेगी नई रफ्तार भोपाल  केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 अगस्त, शनिवार को जबलपुर नगर को प्रदेश के सबसे बड़े और अत्याधुनिक फ्लाईओवर की सौगात देंगे। यह फ्लाईओवर जबलपुर शहर को नए यातायात स्वरूप में महानगरीय पहचान देगा। जबलपुर में 1052 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 6.855 किलोमीटर लंबा यह एलिवेटेड कॉरिडोर न केवल मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाईओवर है, बल्कि इसमें कई ऐसी विशेषताएं भी शामिल हैं जो इसे विशिष्ट पहचान देती हैं। इस फ्लाईओवर का सबसे बड़ा तकनीकी आकर्षण रेल मार्ग के ऊपर निर्मित 192 मीटर लंबा सिंगल स्पान केबल स्टे ब्रिज है। इस परियोजना में कुल 3 बो-स्ट्रिंग ब्रिज भी शामिल किए गए हैं। इनमें से दो पुल रानीताल क्षेत्र में और एक पुल बलदेवबाग क्षेत्र में बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि ये सभी पुल पूरी तरह स्टील से निर्मित हैं और प्रत्येक की लंबाई लगभग 70 मीटर है। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों से निर्मित यह संरचना न केवल जबलपुर बल्कि पूरे देश के लिए एक अद्वितीय और प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करती है।” यातायात की दृष्टि से यह फ्लाईओवर क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। जहां पहले मदनमहल से दमोह नाका तक पहुँचने में 40 से 45 मिनट का समय लगता था, अब फ्लाईओवर शुरू होने के बाद यह दूरी मात्र 6 से 8 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि शहर में प्रदूषण का स्तर भी घटेगा। व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, नागरिकों की दैनिक जीवनशैली सरल होगी और जबलपुर एक नए यातायात मॉडल के रूप में देश के अन्य शहरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करेगा। यह परियोजना जबलपुर की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के बीच आधुनिकता का संगम प्रस्तुत करती है। यह शहर की पहचान को महानगरीय स्वरूप देने में सहायक होगी।री स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों के लिए बेहतर आवागमन और जीवनशैली सुनिश्चित करेगी।  

सिपाही की रहस्यमय मौत, MP के नशा मुक्ति केंद्र में पसलियां टूटी और पेट में खून

ग्वालियर नशा मुक्ति केंद्र की आड़ में यातनागृह बने केंद्रों में एक और मौत का मामला सामने आया है। भिंड के रहने वाले सिपाही अजय सिंह भदौरिया की बड़ागांव स्थित नशा मुक्ति केंद्र में मौत हो गई। उसे पिछले माह केंद्र में ले जाया गया था। स्वजन का आरोप है कि मंथन नशा मुक्ति केंद्र में अजय के साथ मारपीट की गई। उसकी पसलियां तोड़ दी गईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डेढ़ लीटर रक्त पेट में मिलने की बात कही गई है। घरवालों ने हत्या का मामला दर्ज कराया पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्वजन ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत कर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। स्वजन के अनुसार, अजय के शव को हाईवे पर छोड़कर संचालकगण भाग गए थे। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के नशा मुक्ति केंद्रों में लगातार इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। अरुण सिंह भदौरिया ने बताया कि उनके भाई अजय सिंह भदौरिया (40) निवासी धर्मनगर भिंड वर्तमान में रायसेन में सिपाही के रूप में पदस्थ थे। पिछले माह वह अवकाश पर घर आए थे।   पिछले महीने अजय को नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया नशे की लत के कारण 23 जुलाई 2025 को मंथन नशा मुक्ति केंद्र बड़ागांव ग्वालियर में उन्हें भर्ती करने के लिए भेजा गया था। केंद्र के संचालक अजय पांडेय और मनीष दुबे तीन और लोगों के साथ गाड़ियों से आए थे और अजय को साथ ले गए। अगले दिन अजय की तबीयत खराब होने की सूचना दी और फिर आधा घंटे बाद मौत की सूचना दे दी। अरुण ने बताया कि इससे कुछ देर पहले ही अजय द्वारा परेशान करने की बात केंद्र वालों ने बताई थी और अस्वस्थ बताया था। अजय के एक बेटा व दो बेटी हैं। बता दें कि 14 अगस्त को संस्कार नशा मुक्ति केंद्र महाराजपुरा में पंजाब नेशनल बैंक के फील्ड ऑफिसर पंकज शर्मा की भी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा 18 अगस्त को शिवपुरी के एक नशा मुक्ति केंद्र में वाहन चोरी के एक आरोपित की संदिग्ध परिस्थितियों मौत हो गई थी।

मेट्रो ट्रैक का ट्रॉली टेस्ट, अफसरों ने लिया जायजा; MD ने बारिश में भी काम रोकने से किया इनकार

इंदौर इंदौर में मेट्रो ट्रेन के 17 किलोमीटर हिस्से का काम पूरा करने पर मेट्रो रेल कार्पोरेशन का फोकस है, ताकि यहां तक मेट्रो का संचालन किया जा सके। अभी जिस सात किलोमीटर हिस्से में मेट्रो चल रही है, वहां यात्री नहीं मिल पा रहे है। शुक्रवार को मेट्रो रेल कार्पोरेशन के एमडी एस कृष्ण चैतन्य ने 11 किलोमीटर हिस्से का ट्राॅली रन कर जायजा लिया। उन्होंने अफसरों से कहा कि बारिश के दौरान भी मेट्रो के काम की गति कम नहीं होना चाहिए। छह माह के भीतर हमे मेट्रो ट्रेन का ट्रायल रन रेडिसन चौराहे तक करना है। उन्होंने कहा कि मेट्रो स्टेशन के बचे काम भी पूरे कर लिए जाए। दौरे में उन्होंने विजय नगर, मेघदूत गार्डन, बापट चौराहा, चंद्रगुप्त मोर्य प्रतिमा चौराह के स्टेशनों के काम देखे। इसके अलावा गांधी नगर डिपो का भी निरीक्षण किया। वहां ट्रेनों के रखरखावल तकनीकी सेटअप, कंट्रोल रुम की जानकारी ली और जरुरत के हिसाब से स्टाॅफ बढ़ाने के लिए भी कहा। निरीक्षण के बाद उन्होंने अफसरों व ठेेकेदार एजेसिंयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए। इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो के लिए बनेगी डीपीआर इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो के लिए हुए सर्वे की रिपोर्ट अफसरों के सामने प्रस्तुत की गई। 45 किलोमीटर के रुट के निर्माण पर दस हजार करोड़ का खर्च आएगा। अब इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होगी। इसे लेकर हुई बैठक में बताया गया कि इस रुट पर 11 स्टेशन बनेंगे और उज्जैन में चार किलोमीटर का हिस्सा अंडरग्राउंड बनेगा। मुख्यमंत्री चाहते है कि सिंहस्थ से पहले मेट्रो का निर्माण हो जाएगा, लेकिन तीन साल में काम संभव नहीं है,क्योकि अभी डीपीआर बनने में ही छह माह से अधिक का समय लग जाएगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यंग्यकार श्री हरिशंकर परसाई का किया स्मरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साहित्य की व्यंग्य विधा के माध्यम से समाज की विसंगतियों पर गहरी चोट करने वाले प्रख्यात साहित्यकार श्री हरिशंकर परसाई की जयंती पर उनका स्मरण किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परसाई जी की ‘भोलाराम का जीव’ और ‘सदाचार का ताबीज’ जैसी कालजयी रचनाएं सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों का मार्ग प्रशस्त करती रहेंगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैतूल जंगल सत्याग्रह के जनजातीय नायकों को दी श्रद्धांजलि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल में हुए जंगल सत्याग्रह के जनजातीय गौरव एवं महान क्रांतिकारी कोवा गोंड एवं बूचा कोरकू के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 1930 में आज ही के दिन बैतूल में ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध जनजातीय नायक श्रद्धेय गंजन सिंह कोरकू के नेतृत्व में जंगल सत्याग्रह आरंभ हुआ था, जिसने अंग्रेजों को पीछे हटने को मजबूर कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय समुदाय के अधिकारों के संरक्षण और अन्याय के विरुद्ध यह सत्याग्रह सदैव मातृभूमि के प्रति समर्पण भाव से कार्य करने के लिए प्रेरित करता रहेगा।  

CBI स्पेशल कोर्ट का बड़ा फैसला, डाक विभाग के तीन अफसरों को घोटाले में 5 साल की सजा

जबलपुर   सीबीआई की विशेष कोर्ट ने डाक विभाग के तीन अधिकारियों को भ्रष्टाचार व धोखाधड़ी के अपराध में दोषी करार दिया है. सीबीआई कोर्ट ने सागर के डाक विभाग में पदस्थ रहे तीन अधिकारियों को पांच-पांच साल तक के कारावास के साथ अर्थदंड से दंडित किया है. कोर्ट ने 17 नवंबर 2022 को दर्ज हुए मामले की लंबी सुनवाई के बाद ये सजा सुनाई है. क्या है पूरा मामला? अभियोजन की ओर से बताया गया कि सभी आरोपी सागर जिले के बीना एलएसजी उप डाकघर में पदस्थ रहे हैं. डाकघर के तत्कालीन उप डाकपाल विशाल कुमार अहिरवार, हेमंत सिंह और रानू नामदेव पर आरोप था कि तीनों ने 1 जनवरी 2020 से 5 जुलाई 2021 के बीच डाकघर में जमा लोगों के 1 करोड़ 21 लाख रु से ज्यादा की राशि का हेरफेर करते हुए जमाकर्ताओं को फर्जी पासबुक जारी की थी. जब कुछ जमाकर्ता अवधि पूरी होने पर रूपए निकालने पहुंचे, तभी पूरा मामला उजागर हुआ और फिर शिकायत सीबीआई से की गई. शासन को पहुंचाया 1 करोड़ 21 लाख का नुकसान सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि तीनों आरोपियों ने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने को 1 करोड़ 21 लाख 82 हजार 921 रु नुकसान पहुंचाया. इस राशि को गलत तरीके से निकालकर आरोपियों ने उसका उपयोग खुद को लाभ पहुंचाने के लिए किया था. भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी व जालसाजी के दोषी सीबीआई ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार,जालसाजी व धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था. सीबीआई कोर्ट ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए गए साक्ष्य व गवाहों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए कारावास व अर्थदंड की सजा से दंडित किया. सीबीआई की ओर से लोक अभियोजन संजय कुमार उपाध्याय ने पैरवी की. किसे कितनी हुई सजा? सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने तत्कालीन उप डाकपाल विशाल कुमार अहिरवार को 5 साल कारावास की सजा और 39 हजार रु जुर्माना, हेमंत सिंह को 4 साल की सजा और 7 हजार रु जुर्माना और रानू नामदेव को भी 4 साल के कठोर कारावास के साथ 7 हजार रु के अर्थदंड से दंडित किया है.

इंदौर की युवती का खुलासा: शादी के बाद बच्चे का जबरन खतना और मांस खिलाने का दबाव

इंदौर इंदौर शहर में एक जैन युवती के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक मुस्लिम युवक ने पहले उससे शादी रचाई और फिर उस पर मुस्लिम धर्म अपनाने का दबाव बनाया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मुस्लिम युवक और उसकी बहन के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। जबरन कराया बच्चों का खतना जानकारी के अनुसार, एक हाई प्रोफाइल परिवार की युवती की शिकायत पर मुंबई के यूसुफ खान और उनकी बहन गुलबानो के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जैन समाज की इस युवती ने बताया कि शादी के बाद यूसुफ ने उसके बच्चों का जबरन खतना करवाया और मांस खाने के लिए मजबूर कर बच्चों का धर्म परिवर्तन कराने का दबाव बनाया। इसके बाद पीड़िता ने इंदौर आकर अपने परिजनों को आपबीती सुनाई और थाने में शिकायत दर्ज कराई। रोमी नाम बताकर की थी दोस्ती पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह इंदौर की एक पॉश कॉलोनी में रहती है। साल 2004 में उसकी दोस्ती यूसुफ से हुई थी, जिसने उस समय अपना नाम रोमी बताया था। उस समय पीड़िता एक विज्ञापन कंपनी में काम करती थी। इसके बाद दोनों ने 2005 में मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में शादी कर ली। उसी वर्ष पीड़िता को एक टीवी चैनल से जुड़ने का अवसर मिला। मुंबई जाने पर उसे पता चला कि रोमी वास्तव में यूसुफ है और मुस्लिम धर्म से है। इस पर पीड़िता ने रिश्ता तोड़ने की बात कही, लेकिन यूसुफ ने आश्वासन दिया कि वह उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं करेगा और वह अपने जैन धर्म के अनुसार जीवन जी सकती है। मुस्लिम धर्म अपनाने का बनाया दवाब हालांकि, 2011 में पीड़िता के एक बेटे के जन्म के बाद यूसुफ और उसकी बहन गुलबानो का व्यवहार बदल गया। जन्म के 40 दिन बाद यूसुफ ने चुपके से बच्चे का खतना करवा दिया। इसके बाद यूसुफ ने पीड़िता पर दबाव बनाया कि उनकी बेटी की परवरिश और शिक्षा मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार होगी। गुलबानो ने भी पीड़िता को धमकाते हुए कहा कि वह मुस्लिम धर्म अपनाए, वरना यूसुफ से उसका रिश्ता खत्म कर दिया जाएगा। इसके अलावा, यूसुफ बच्चे को जबरन मांस खिलाता था। जब बच्चा मांस खाने से इनकार करता, तो यूसुफ उसके मुंह में मांस के टुकड़े डालकर मुंह बंद कर देता था। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि यूसुफ और गुलबानो ने कई बार उसके निजी वीडियो बनाए। घर पर आने वाले एक मसाज करने वाले व्यक्ति के साथ यूसुफ ने आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया और वीडियो वायरल करने की धमकी दी। कुछ समय पहले पीड़िता एक कार्यक्रम में शामिल होने इंदौर आई और उसने अपनी पूरी आपबीती परिजनों को बताई। इसके बाद देर रात तुकोगंज थाने में यूसुफ और गुलबानो के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया।