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गहलोत ने हरमाड़ा हादसे के पीड़ितों का हाल जाना, बोले—सरकार कर रही है उपेक्षा

जयपुर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के हरमाड़ा हादसे में घायल लोगों से एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। गहलोत ने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार हादसों के बाद तब ही हरकत में आती है, जब लोग धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होते हैं। उन्होंने कहा कि हरमाड़ा में डंपर की टक्कर से 13 लोगों की मौत हो गई, लेकिन अब तक सरकार की ओर से किसी प्रकार का मुआवजा घोषित नहीं किया गया है, जो बेहद संवेदनहीनता है। गहलोत ने कहा कि चाहे जोधपुर का हादसा हो या जैसलमेर में बस में आग लगने की घटना, सरकार तब ही राहत देती है जब लोग मॉर्च्यूरी के बाहर विरोध दर्ज कराते हैं। उन्होंने मांग की कि हरमाड़ा हादसे के सभी पीड़ितों और मृतकों के परिवारों को तत्काल राहत राशि दी जाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना में गुजरात और बिहार के लोग भी घायल हुए हैं, इसलिए सरकार को बिना भेदभाव सहायता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान और जोधपुर हाईकोर्ट ने सड़क हादसों पर संज्ञान लिया है, जो खुद सरकार की विफलता को दर्शाता है। गहलोत ने सुझाव दिया कि सरकार को एक विशेष समिति गठित कर विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, ताकि सड़क हादसों पर प्रभावी रोक लग सके। उन्होंने कहा कि कई जगह सड़कों पर स्पीड ब्रेकर नहीं हैं और कई स्थानों पर गलत तरीके से बने हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। आज आरटीओ के पास गाड़ियों की गति मापने की मशीनें मौजूद हैं, फिर भी सड़क सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। लगातार हो रही मौतें सरकार की नाकामी को दर्शाती हैं। अस्पताल में गहलोत ने घायल गुजरात निवासी मनोज गोविंद व्यास से मुलाकात कर हालचाल जाना। मनोज ने बताया कि वे छह दोस्तों के साथ खाटूश्यामजी दर्शन के लिए आए थे। हादसे में उनके दो दोस्तों की मौत हो गई और चार घायल हैं। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद लूटपाट की भी घटना हुई, जिसमें उनका मोबाइल और पर्स चोरी हो गया। नीमकाथाना निवासी देशराज ने बताया कि हादसे में उनका ई-रिक्शा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घायल होने के बावजूद उन्होंने अन्य लोगों की मदद की। वहीं गोविंदपुरा कालवाड़ निवासी ज्ञानरंजन ने बताया कि उनके पिता अजय को गंभीर चोटें आई हैं और वे आईसीयू में भर्ती हैं। गहलोत ने कहा कि सरकार को ऐसे हादसों से सबक लेना चाहिए और पीड़ितों को जल्द से जल्द सहायता पहुंचानी चाहिए ताकि परिवारों को राहत मिल सके।

उदयपुर में परिचालक भर्ती परीक्षा शांतिपूर्ण सम्पन्न, आधे से कम परीक्षार्थी पहुंचे केंद्रों पर

उदयपुर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) द्वारा शनिवार को परिचालक (कंडक्टर) भर्ती परीक्षा का आयोजन प्रदेशभर में किया गया। कुल 500 पदों के लिए हुई इस परीक्षा में 1 लाख 12 हजार से अधिक अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे। इसके लिए राज्य के 14 जिलों में 370 परीक्षा केंद्र बनाए गए। उदयपुर जिले में परीक्षा एक ही पारी में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित हुई, जिले में कुल 15 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां 5064 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 49.59 फीसदी उम्मीदवार ही परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की आवाजाही शुरू हो गई थी। प्रवेश सुबह 9 बजे से दिया गया और 10 बजे गेट बंद कर दिए गए। इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। एग्जाम सेंटरों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई थी। पुलिसकर्मियों ने प्रवेश से पहले उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड और पहचान पत्र की जांच की। कई केंद्रों पर परीक्षार्थियों के हाथों में बंधे धागे काट दिए गए, ताकि किसी तरह की नकल या तकनीकी मदद न ली जा सके। सभी अभ्यर्थियों की मेटल डिटेक्टर से स्कैनिंग की गई। मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, इयरफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र के बाहर ही जमा करवाए गए। परीक्षा हॉल में सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। बोर्ड ने इस बार अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए एडमिट कार्ड के साथ एक विशेष लिंक भी जारी किया है। इस लिंक को स्कैन कर उम्मीदवार आसानी से अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकते हैं। यह सुविधा पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पांच बड़े जिलों में शुरू की गई है। फिलहाल इसमें गूगल लोकेशन या मुख्य प्रवेश द्वार की फोटो उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसमें बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की दिशा सहित अन्य उपयोगी जानकारी दी गई है। कुल मिलाकर, सख्त सुरक्षा और तकनीकी सुविधा के बीच यह परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। अब अभ्यर्थियों को रिजल्ट और कट-ऑफ का इंतजार है, जो चयन बोर्ड द्वारा बाद में जारी किया जाएगा।

अंता सीट पर गर्म हुआ माहौल, जीत के लिए कांग्रेस-भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत

जयपुर/बारां अंता विधानसभा उपचुनाव की जंग अब अपने अंतिम और निर्णायक दौर में है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने इस चुनावी रण को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस ने मैदान में करीब 300 नेताओं की फौज उतार दी है, जिनमें सांसदों से लेकर पीसीसी पदाधिकारियों तक शामिल हैं। हर गांव और हर बूथ पर नेताओं को तैनात किया गया है ताकि मतदाता तक सीधा संपर्क बनाया जा सके। वहीं बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी प्रचार में उतर चुकी हैं। आज अंता में वसुंधरा राजे और सीएम भजनलाल शर्मा का संयुक्त रोड शो रखा गया है। पार्टी ने अब तक 272 नेताओं को जिम्मेदारी दी है, जिनमें 40 बड़े नेताओं को स्टार प्रचारक बनाया गया है। चुनाव प्रभारी, सह प्रभारी और स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायतवार 170 प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। हर पंचायत में 3-3 नेताओं को जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने बूथ स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट पर जोर दिया है। कांग्रेस विधायक सचिन पायलट बुधवार को अंता में रोड शो कर चुके हैं।  गोविंद डोटासरा, सुखजिंदर रंधावा, सचिन पायलट और टीकाराम जूली जैसे दिग्गज नेता पहले ही प्रचार में जुट चुके हैं। आने वाले दिनों में अशोक गहलोत के भी अंता पहुंचने की संभावना है। भाजपा की रणनीति और बड़ा रोड शो वहीं भाजपा भी अब पूरी ताकत से मैदान में उतर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज 6 नवंबर (गुरुवार) को अंता में भव्य रोड शो करेंगे। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, सांसद दुष्यंत सिंह, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन भी एक विशेष रथ पर सवार होंगे। यह पहला मौका होगा जब भजनलाल शर्मा और वसुंधरा राजे एक साथ किसी सीट पर प्रचार करते दिखाई देंगे। वसुंधरा राजे पहले ही प्रचार अभियान की शुरुआत कर चुकी हैं। रोड शो की तैयारियां पूरी रोड शो दोपहर 12 बजे मांगरोल के सुभाष चंद्र बोस सर्किल से शुरू होकर आज़ाद चौक होते हुए सीसवाली चौराहा तक निकाला जाएगा। पूरे मार्ग पर 51 स्वागत द्वार सजाए गए हैं और जगह-जगह कार्यकर्ता फूल बरसाकर स्वागत करेंगे। कार्यक्रम में महिला और युवा कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी रहेगी। भाजपा का दावा है कि यह रोड शो क्षेत्र में पार्टी के प्रति जनसमर्थन को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का कार्यक्रम सुबह 10:50 बजे जयपुर से प्रस्थान के बाद झालावाड़ होते हुए मांगरोल पहुंचेगा। दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक रोड शो के बाद वे पुनः जयपुर लौटेंगे। चुनावी महत्व अंता उपचुनाव से भले ही विधानसभा का समीकरण न बदले, लेकिन दोनों दल इसे राजनीतिक संदेश देने का मौका मान रहे हैं। भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से राजस्थान में अब तक 7 उपचुनाव हो चुके हैं। लेकिन यह पहला उपचुनाव है जब सीएम भजनलाल शर्मा व पूर्व सीएम वसुंधरा राजे एक साथ रोड शो में नजर आएंगे। वहीं कांग्रेस के भी तमाम बड़े नेता लगातार अंता में आ रहे हैं। छोटी-छोटी सभाओं तक में जा रहे हैं। कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश में है, जबकि भाजपा सत्ता में जनसमर्थन दिखाने के लिए पूरा जोर लगा रही है। आखिरी तीन दिनों में दोनों दलों के दिग्गज नेताओं के बीच सियासी शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलेगा।  

उधारी में 1000, बदले में 1 करोड़: सब्जीवाले की दोस्ती ने किया कमाल

जयपुर  सब्जी बेचकर परिवार का पालन करने वाले अमित सेहरा भले ही 'नए करोड़पति' हैं, लेकिन वह दिल के पहले से ही अमीर हैं। तभी तो जिस दोस्त से 1000 रुपये उधार लेकर वह 11 करोड़ जीते उसे अब मूलधान के अलावा एक करोड़ रुपये वापस करने जा रहे हैं। राजस्थान में जयपुर के कोटपुतली के निवासी अमित की कहानी इन दिनों सुर्खियों में है। लोग उनकी किस्मत ही नहीं, विनम्रता और दोस्त की मदद को याद रखने की भी तारीफ कर रहे हैं। दरअसल, अमित सेहरा अपने एक दोस्त मुकेश के पास घूमने के लिए पंजाब गए थे। उन्होंने बठिंडा में एक लॉटरी की दुकान और उस पर टिकट खरीदने वालों की भीड़ देखी तो उनका मन भी ललचा गया। वह भी अपनी किस्मत आजमाना चाहते थे। पता चला कि एक टिकट के लिए 500 रुपये खर्च करने होंगे। अमित के जेब में उस वक्त टिकट के लायक पैसे नहीं थे। उन्होंने संकोच किए बिना मुकेश से तुरंत एक हजार रुपये उधार लिए। अमित सेहरा ने तुरंत दुकान से दो लॉटरी के टिकट खरीद लिए। एक अपनी पत्नी के नाम और एक खुद के नाम। पंजाब स्टेट लॉटरी-दिवाली बंपर 2025 के लिए 11 करोड़ रुपये का जैकपॉट निकलने वाला था। अमित को तब कहां पता था कि अब उन्हें आगे किसी से उधार लेने की जरूरत नहीं होगी। वह पंजाब से वापस राजस्थान आ चुके थे। लेकिन जब उन्हें पता चला कि वही वह खुशनसीब हैं, जिसे सबसे बड़ी इनामी राशि मिलेगी तो वह ना तो भगवान का आभार जताना भूले और ना ही अपने उस दोस्त की मदद। सेहरा ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पास लॉटरी पुरस्कार प्राप्त करने की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए चंडीगढ़ जाने के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं हैं। जयपुर के कोटपुतली से आये और ठेले पर सब्जी बेचने वाले सेहरा ने कहा,'यह भगवान का आशीर्वाद है कि उन्होंने मुझे ‘छप्पर फाड़ के’ दिया।' उन्होंने कहा कि वह यह पैसा अपने दो छोटे बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करेंगे और एक घर भी बनवाएंगे। अमित ने कहा कि वह अपने दोस्त मुकेश को लॉटरी टिकट के वास्ते पैसे उधार देने के लिए एक करोड़ रुपये देंगे। वह मुकेश की दो बेटियों के नाम 50-50 लाख रुपये देने जा रहे हैं।

UPSC की चुनौती और वजन की जंग: IAS परी ने कैसे 45 किलो कम कर खुद को बनाया फिट और फाइनली IAS अधिकारी

 जयपुर  परी बिश्नोई के लिए आईएएस अधिकारी बनने की राह बिल्कुल भी आसान नहीं थी. हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर यूपीएससी की तैयारी के दौरान अपने भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बारे में खुलकर बात की. 2017 में अपने पहले यूपीएससी अटेम्प्ट में असफलता का सामना करने से लेकर तनाव के कारण बढ़ते वजन से जूझने तक उनकी कहानी लाखों उम्मीदवारों के लिए प्रेरणादायक है. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी एक लंबी और थका देने वाली प्रक्रिया होती है, जिसमें अक्सर उम्मीदवारों को भावनात्मक और शारीरिक रूप से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक कहानी है एक महिला IAS अधिकारी की, जिन्होंने अपनी पहली असफलता के बाद न सिर्फ भारी वजन बढ़ने की समस्या से लड़ाई लड़ी, बल्कि उसे हराकर अपने IAS बनने के सपने को भी पूरा किया। हम बात कर रहे हैं आईएएस परी बिश्नोई की। पहली असफलता और वजन बढ़ने की चुनौती UPSC की तैयारी कर रहे हर उम्मीदवार की तरह, इस अधिकारी ने भी पूरी लगन से अपना पहला प्रयास दिया था। लेकिन, जब उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली, तो यह उनके लिए एक बड़ा झटका था। इस भावनात्मक तनाव और अनिश्चितता के दौर में, उन्होंने अपना मानसिक संतुलन खो दिया और इसका सीधा असर उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ा। देखते ही देखते उनका वजन 45 किलोग्राम तक बढ़ गया। इस दौरान, वह अपनी पसंदीदा चीजें, जैसे बाहर जाना और लोगों से मिलना-जुलना भी बंद कर चुकी थीं। उन्हें लगा कि उनका सपना अधूरा रह गया है और शायद वह कभी IAS नहीं बन पाएंगी। असफलता के बाद सफलता का स्वाद  हालांकि निराशा का यह दौर हमेशा के लिए नहीं रहा. जब परी को दो साल बाद यूपीएससी के इंटरव्यू का कॉल आया तो उसके अंदर कुछ बदल गया. उन्होंने तय किया कि इस बार उनकी लड़ाई सिर्फ रैंक या पद के लिए नहीं बल्कि अपने आत्मविश्वास और पहचान को फिर से हासिल करने के लिए है. नए दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल बदलने पर फोकस किया. लगातार एक्सरसाइज, वजन उठाकर, पौष्टिक खाना और ताजा भरपूर स्वस्छ आहार के साथ उन्होंने कठोर अनुशालन का पालन किया. उनके शारीरिक परिवर्तन ने उसके मानसिक विकास को भी प्रभावित किया और वह एनर्जेटिक महसूस करने लगीं. गलतियों से सीखा सबक परी ने अपनी पिछली तैयारी के दौरान की गई गलतियों के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने पिछले टॉपर्स की अपनाई गई रणनीतियों का विश्लेषण किए बिना कोचिंग क्लासेस को आंख मूंदकर फॉलो किया. उनके पास कोई निर्धारित टाइम टेबल नहीं था और कोई सब्जेक्ट स्पेसिफिक लक्ष्य नहीं थे और दृष्टिकोण में स्पष्टता का अभाव था. परीक्षा पैटर्न या पिछले पेपरों पर ध्यान देने के बजाय उन्होंने केवल वही पढ़ा जिसमें उनकी रुचि थी. इन गलतियों को उन्होंने सुधारा.  2019 में परी बिश्नोई ने आखिरकार 30वीं रैंक के साथ यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली और अपने लंबे समय से देखे गए सपने को हकीकत में बदल लिया. उनकी शादी भाजपा नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल बिश्नोई के पोते भव्य बिश्नोई से हुई है. इस साल की शुरुआत में इस जोड़े ने अपनी बेटी वेदा का स्वागत किया. परी की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्ची जीत कभी न गिरने में नहीं, बल्कि हर बार जब ज़िंदगी आपको गिराए, तब उठ खड़े होने में है. आत्मविश्वास की वापसी और वजन घटाने का संकल्प हालांकि एक दिन उन्हें महसूस हुआ कि अगर उन्हें अपने सपने को पूरा करना है, तो उन्हें सबसे पहले खुद पर विश्वास करना होगा और अपने शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करना होगा। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। उन्होंने सबसे पहले अपना बढ़ा हुआ वजन कम करने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने कुछ सरल लेकिन प्रभावी कदम उठाए: नियमित व्यायाम: उन्होंने हर दिन व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। शुरू में यह मुश्किल था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी आदत बन गई। स्वस्थ आहार : उन्होंने अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दिया। जंक फूड और अनहेल्दी भोजन से दूरी बनाकर संतुलित और पौष्टिक आहार लेना शुरू किया। सकारात्मक सोच : उन्होंने नकारात्मक विचारों को दूर कर सकारात्मक सोच अपनाई। हर छोटे बदलाव और सफलता के लिए खुद को सराहा। इन प्रयासों के दम पर उन्होंने न सिर्फ अपना 45 किलो वजन कम किया, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत महसूस करने लगीं। IAS बनने का सपना हुआ साकार वजन कम करने के बाद, उन्होंने एक नए आत्मविश्वास के साथ UPSC परीक्षा की तैयारी में खुद को फिर से झोंक दिया। इस बार उनकी रणनीति ज्यादा फोकस और अनुशासन वाली थी। उन्होंने पिछली गलतियों से सीखा और अपनी कमियों पर काम किया। आखिरकार, उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक प्रयासों से UPSC परीक्षा क्रैक कर IAS अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया। यह कहानी उन सभी उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा है, जो असफलता और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह दिखाती है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो कोई भी मुश्किल आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती, फिर चाहे वह वजन कम करना हो या देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करना।

उद्योगों की रफ्तार बढ़ी: राजस्थान में 7.05 लाख करोड़ के निवेश पर जमीन पर काम शुरू

जयपुर राजस्थान में निवेश परिदृश्य अब इरादों से हकीकत की ओर बढ़ रहा है। अब तक हुए 3,362 एमओयू पर ज़मीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है, जिनमें 7.05 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। ये निवेश राज्य के 20 प्रमुख सेक्टरों में किए जा रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र निवेश में सबसे आगे है, जिसमें 432 एमओयू के माध्यम से 5.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें अक्षय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े बड़े उपक्रम शामिल हैं, जो राजस्थान को देश का अग्रणी क्लीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में हैं। सेक्टर वाइज निवेश का ब्योरा: उद्योग विभाग ने 1,182 एमओयू के तहत 57,319 करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित किए हैं, जो विनिर्माण और एमएसएमई सेक्टर में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाते हैं। शहरी विकास एवं आवासन क्षेत्र में भी 306 एमओयू के तहत 26,826 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट क्रियान्वयन के चरण में हैं, जिनका फोकस शहरी विस्तार, सस्ती आवास योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर है। इसके अलावा, खनन क्षेत्र में 22 एमओयू के माध्यम से 28,092 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। पर्यटन क्षेत्र में 267 एमओयू के तहत 8,907 करोड़ रुपये के निवेश से हेरिटेज, इको और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में 663 एमओयू से 7,741 करोड़ रुपये के निवेश के जरिए एग्री-वैल्यू चेन और फूड प्रोसेसिंग को मज़बूती दी जा रही है। चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा में भी 5,500 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं, जो स्वास्थ्य और कौशल विकास के बुनियादी ढांचे को सशक्त करेंगे। इसके साथ ही, एविएशन, आयुष, पशुपालन, आईटी और खेल जैसे उभरते क्षेत्रों में भी नई नीतियों के तहत ठोस प्रगति हो रही है। सभी एमओयू की मॉनिटरिंग के लिए एक समर्पित तंत्र बनाया गया है ताकि तय समयसीमा में इन निवेशों को धरातल पर उतारा जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह राजस्थान की आर्थिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। राज्य ने निवेश घोषणाओं और वास्तविक कार्यान्वयन के बीच की खाई को पाट दिया है। 7.05 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर कार्य प्रगति पर होने के साथ, राजस्थान देश के सबसे तेज़ी से बढ़ते निवेश गंतव्यों में शामिल हो रहा है- अक्षय ऊर्जा, विनिर्माण उत्कृष्टता और प्रगतिशील नीतियों के बल पर। गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में आयोजित इन्वेस्ट राजस्थान समिट (9-11 दिसंबर) के दौरान राज्य सरकार ने रिकॉर्ड 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए थे। 12 नई नीतियां लाने की तैयारी निवेश प्रस्तावों को रफ्तार देने के लिए सरकार इसी साल 12 नई नीतियां भी लाने की तैयारी कर चुकी है। इनमें से कुछ नीतियों के ड्रॉफ्ट कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजे जा चुके हैं। आने वाली नई नीतियां इस प्रकार हैं: 1. एग्रीकल्चर एवं फूड प्रोसेसिंग: किसानों की आय बढ़ाने और एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्री को प्रोत्साहन देने पर जोर। 2. नई औद्योगिक नीति: मैन्युफैक्चरिंग को सशक्त बनाकर बड़े निवेश को आकर्षित करने की योजना। 3. एविएशन और लगिंग: राजस्थान को एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस का हब बनाना, ड्रोन्स और स्पेयर पार्ट्स के लिए तैयार करेंगी नीति। 4. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर: बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए राजस्थान को नया ग्लोबल हब बनाना। मल्टीनैशनल कंपनियों के आने से टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और सपोर्ट सेंटर खुल सकेंगे। 5. नई टूरिज्म नीति: राजस्थान की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता को नए रूप में पेश करने की कोशिश। हेरिटेज, ईको और ग्रामीण टूरिज्म को प्राथमिकता। 6. ग्रीन ग्रोथ क्रेडिट नीति: पर्यावरण अनुकूल प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा, जिसमें सोलर एनर्जी, ग्रीन एनर्जी और हरित उद्योग शामिल होंगे। 7. स्पोर्ट्स नीति: नई प्रतिभाओं के लिए अवसर, विश्वस्तरीय ढांचा का विकास। प्रशिक्षकों और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर पर फोकस। 8. एफएमसीजी नीति: मैन्युफैक्चरिंग और कृषि की बेहतर उपयोगिता सुनिश्चित कर एफएमसीजी क्षेत्र को बढ़ावा। छोटे और मध्यम उद्योगों की भागीदारी की दिशा में कदम। 9. आईटी आउटसोर्सिंग और फॉरेस्ट नीति: ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी और युवाओं को रोजगार बढ़ाने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सशक्त बनाने की दिशा। 10. ट्रेड प्रमोशन नीति: व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए योजना। 11. सेमीकंडक्टर पॉलिसी: टेक्नोलॉजी हार्डवेयर निवेश के लिए नई सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग नीति तैयार की जाएगी। 12. ड्रोन और एयरो स्पेस पॉलिसी: एयरोस्पेस उद्योगों में निवेश को नई दिशा देने। राज्य में हार्ड-कोर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस हब स्थापित करने पर फोकस।  

डिवाइडर पर चढ़ी कार देख लोग समझे नशे में ड्राइवर, देख तो पूर्व सरपंच को आया हार्ट अटैक

कोटा जिले में कार चलाते समय एक व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हो गई। घटना के दौरान गाड़ी तेजी से डिवाइडर पर चढ़कर दूसरी ओर उतर गई। राहगीरों ने पास जाकर देखा तो उसमें ड्राइवर की सीट पर 55 वर्षीय अर्जुन गुंजल बैठे हुए थे। उन्हें सीने में लगातार दर्द उठ रहा था, इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। पहले राहगीरों को यह लगा था कि किसी ड्राइवर ने नशे की हालत में यह एक्सीडेंट किया है। गुंजल के रिश्तेदार भारत गुर्जर ने बताया कि अर्जुन गुंजल सरपंच रह चुके हैं और पूरी तरह स्वस्थ भी थे। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ घंटे पहले उन्हें उल्टी हुई थी, तब वे गैस की समस्या बताकर निकल गए। बाद में सूचना मिली कि यह हादसा हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई। वहीं एक प्रत्यक्षदर्शी रविंद्र सिंह ने बताया कि गाड़ी के आसपास काफी भीड़ लगी हुई थी। पहले लग रहा था कि किसी ड्राइवर ने शराब की नशे में गाड़ी ठोंक दी है। गाड़ी के पीछे गुंजल लिखा होने पर रविंद्र ने अपने दोस्त रूपचंद गुंजल को कॉल करके बताया। इसके बाद पता चला कि यह गाड़ी अर्जुन गुंजल की है। राहगीरों ने गाड़ी का शीशा तोड़कर अर्जुन को बाहर निकाला और सीपीआर देने की कोशिश की लेकिन उनके शरीर पर किसी भी तरह की कोई हलचल नहीं दिख रही थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इस दौरान चिकित्सकों ने भी उन्हें सीपीआर देकर रिकवरी करने की कोशिश भी की लेकिन सफल नहीं हो सके।

दोस्ती की मिसाल: उधार से खरीदी टिकट पर लगी 11 करोड़ की लॉटरी, दोस्त को देगा हिस्सा

कोटपूतली-बहरोड़ कहते हैं किस्मत कब, कहां और कैसे पलट जाए, कोई नहीं जानता। ऐसा ही वाकया हुआ कोटपूतली के एक साधारण सब्जी विक्रेता के साथ, जो पंजाब राज्य लॉटरी के दिवाली बम्पर 2025 के पहले इनाम का विजेता बने। किस्मत के इस धनी का नाम कोटपूतली निवासी अमित सेहरा है। 32 वर्षीय अमित की आमदनी रोज सड़क किनारे सब्जी की रेहड़ी लगाकर होती थी लेकिन अब उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है। जानकारी के अनुसार अमित सेहरा ने यह लॉटरी टिकट बठिंडा से 500 रुपये में खरीदी थी, जिस पर 31 अक्टूबर की शाम लुधियाना में निकाले गए ड्रॉ में पहला इनाम निकला, जिसके इनाम के रूप में उन्हें 11 करोड़ रुपये की राशि मिली है। इस बड़ी जीत के बाद अमित अपने परिवार सहित बुधवार को बठिंडा पहुंचे, जहां उन्होंने दावा प्रक्रिया पूरी की। अमित ने बताया कि उन्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा कि किस्मत ने इतनी बड़ी खुशखबरी दी है। उन्होंने कहा कि वे इस धनराशि का उपयोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने, बच्चों की पढ़ाई और एक बेहतर जीवन जीने की दिशा में करेंगे। इस खुशखबरी के बाद कोटपूतली में अमित के घर और मोहल्ले में जश्न जैसा माहौल है। लोग लगातार उन्हें बधाई देने पहुंच रहे हैं और इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि मेहनतकश इंसान की किस्मत कैसे एक पल में पलट गई। उल्लेखनीय है कि दिवाली बम्पर लॉटरी में दूसरे इनाम के तौर पर 1 करोड़ रुपये और तीसरे इनाम के रूप में 50 लाख रुपये का प्रावधान था लेकिन कोटपूतली के अमित ने 11 करोड़ की बड़ी जीत हासिल की।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले 2025 में राजस्थान का जलवा! कला, पर्यटन और उद्योग में नई पहचान बनेगी खास

जयपुर इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (ITPO) द्वारा 14 से 27 नवम्बर, 2025 तक नई दिल्ली के प्रगति मैदान में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (India International Trade Fair – IITF) 2025 का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष राजस्थान को मेले के 'पार्टनर स्टेट' का दर्जा प्रदान किया गया है।  राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड (RSIC)  द्वारा लगभग एक हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में राजस्थान मंडप का आकर्षक निर्माण किया जाएगा। इस मंडप में राज्य की औद्योगिक प्रगति, सांस्कृतिक विविधता, कला, शिल्प, पर्यटन और निवेश की संभावनाओं की विशिष्ट झलक देखने को मिलेगी। मंडप में कारीगरों एवं उ‌द्यमियों ‌द्वारा लाइव प्रदर्शन  के लिए विशेष क्षेत्र का आयोजित किये जाएंगे। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट वॉल एवं राज्य की विरासत, नवाचार और सतत औ‌द्योगिक विकास आधारित प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।   प्रमुख सचिव (उद्योग) एवं अध्यक्ष प्रबंध निदेशक राजसिको श्री आलोक गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष का मेला राज्य के प्रमुख सरकारी विभागों जैसे उद्योग, पर्यटन, रीको, बीआईपी, खादी, राजीविका एवं रूडा की सहभागिता से और भी समृद्ध होगा। मेले में राजस्थान के पारंपरिक व्यंजन और हस्तशिल्प उत्पादों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। "एक भारत श्रेष्ठ भारत" की भावना को समर्पित इस मेले का एक प्रमुख आकर्षण राजस्थान और असम का एकीकरण रहेगा। इस विशेष पहल के माध्यम से  दोनों राज्यों की संस्कृति, कला, और व्यापारिक संभावनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा। जिससे इन दोनों राज्यों के बीच मजबूत व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध स्थापित होंगे।  उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की यह पहल राज्य के कारीगरों, शिल्पकारों, उ‌द्यमियों और निवेशकों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत हाड़ौता में गुरुवार को होगी ‘नारी चौपाल’

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुसार सक्षम जयपुर अभियान एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत जयपुर जिले के प्रत्येक उपखंड पर नारी चौपाल आयोजित की जा रही है। इसी कड़ी में 6 नवंबर को चौमूं के हाड़ौता स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में चौपाल होगी। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने नारी चौपाल के सफल आयोजन के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी हैं एवं आयोजन में अधिक से अधिक महिलाओं एवं बालिकाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किये हैं। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं  प्रशिक्षु आईएएस श्री मृणाल ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त एवं जागरूक बनाना है। नारी चौपाल में महिलाओं को सरकार की योजनाओं, अधिकारों और कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी, साथ ही उनकी समस्याओं और सुझावों को भी सुना जाएगा। महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश डोगीवाल ने बताया कि मंगलवार को प्रातः 10 बजे से 2 बजे तक चलने वाली चौपाल में नुक्कड़ नाटक, मारवाड़ी गीत, आत्मरक्षा प्रशिक्षण सहित अन्य गतिविधियां आकर्षण का केन्द्र रहेंगी।   नारी चौपाल के माध्यम से समाज में लिंगानुपात सुधार, महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने, तथा महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद किया जाएगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं, नियमों और अधिनियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा ताकि समतामूलक समाज का निर्माण हो सके। नारी चौपाल कार्यक्रमों में महिला एवं बाल विकास, चिकित्सा, शिक्षा, पुलिस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे। ये अधिकारी महिलाओं के साथ सीधा संवाद कर उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, पोषण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर जागरूक करेंगे। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को प्रेरित करने के लिए सफलता की कहानियाँ और अनुभव भी साझा किए जाएंगे। साथ ही चौपाल स्थल पर योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सहायता काउंटर भी लगाए जाएंगे, ताकि महिलाओं को मौके पर ही आवश्यक जानकारी और सहयोग मिल सके। नारी चौपाल महिलाओं के लिए केवल संवाद का मंच नहीं होगा, बल्कि यह उन्हें आत्मविश्वास, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देने का अवसर भी प्रदान करेगा। इससे महिलाओं तक सरकार की योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचेंगी और समाज में उनकी भागीदारी और अधिक मजबूत होगी। नारी चौपाल श्रृंखला से जिले की हजारों महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगी।