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400 करोड़ के लोन का खेल! हरियाणा के इस गांव में ऐसे चलता था पूरा रैकेट

चंडीगढ़  हरियाणा का डीघल गांव 400 करोड़ के नकद लोन का अड्डा बन गया है. यहां 5% मासिक ब्याज पर कॉर्पोरेट्स को 'ज़ुबान' पर कर्ज़ मिलता है। इस खेल में गैंगस्टर भी शामिल । एक फाइनेंसर के मर्डर और एक सब-इंस्पेक्टर व आईजी की आत्महत्या के बाद इस खूनी मकड़जाल का भंडाफोड़ हुआ। अब गांव में दहशत है और फाइनेंसरों को पुलिस सुरक्षा लेनी पड़ी है।    हर महीने 5% ब्याज पर 400 करोड़ रुपये तक का नकद लोन… वो भी बिना किसी बैंक के, सिर्फ ‘ज़ुबान’ पर. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हरियाणा के झज्जर जिले के डीघल गांव की ज़मीनी हकीकत है। पैसे के इस ‘अदृश्य’ और अरबों रुपये के खेल ने जब अपना खूनी रंग दिखाया, तो एक ऐसा मकड़जाल सामने आया जिसमें बड़े फाइनेंसर, कॉर्पोरेट और गैंगस्टर, सब उलझे हुए हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब रोहतक साइबर सेल के सब-इंस्पेक्टर संदीप कुमार लाठर ने 14 अक्टूबर को आत्महत्या कर ली। मरने से पहले उन्होंने एक वीडियो में आरोप लगाया कि एक मर्डर केस से एक म्यूजिक कंपनी के मालिक राव इंद्रजीत यादव का नाम हटाने के लिए हरियाणा के एक आईजी (वाई पूरन कुमार) ने 50 करोड़ रुपये की घूस मांगी थी। चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ ही समय पहले उन आईजी ने भी आत्महत्या कर ली थी। यह पूरा घटनाक्रम एक ऐसे मकड़जाल की तरफ इशारा कर रहा था, जिसके तार डीघल गांव के करोड़ों रुपये के नकद फाइनेंस के धंधे से जुड़े थे।   क्या है 400 करोड़ का यह ‘नकद’ खेल? डीघल को वहां के लोग ‘फाइनेंसरों का गांव’ कहते है। गांव के लोगों और मामले की जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यहां 20 से 50 साल के करीब 1200 लोग इस धंधे में शामिल हैं।इनमें से ज्यादातर युवा है है। ये लोग आपस में 10 से 20 लाख रुपये तक जमा करके एक बड़ा ‘पूल’ बनाते हैं। इस पूल से बड़े-बड़े कॉर्पोरेट्स और रियल एस्टेट कारोबारियों को अरबों रुपये तक का कर्ज़ दिया जाता है और यह सब कुछ ‘कैश’ यानी नकद में होता है। इस धंधे का सबसे चौंकाने वाला पहलू है इसका ब्याज. यह पूरा सिस्टम 5% मासिक ब्याज दर पर चलता है. यानी, अगर किसी ने एक करोड़ रुपये का लोन लिया, तो उसे हर महीने 5 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के तौर पर चुकाने होंगे. इस पैसे की वसूली के लिए डीघल और आसपास के कई जिलों (रोहतक, सोनीपत, भिवानी) के हज़ारों लड़के लगे हुए हैं. इनके कर्जदार सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यूपी, राजस्थान, गुड़गांव, मुंबई और दिल्ली तक फैले हैं।  यहां ‘ज़ुबान’ और ‘पंच’ पर चलता है धंधा आखिर बिना किसी बैंक या कानूनी प्रक्रिया के करोड़ों का यह लेन-देन कैसे चलता है? दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा सौदा ज़ुबान और ताकत के दम पर चलता है।लोन देने से पहले ये फाइनेंसर 5% ब्याज जोड़कर कर्जदार से मासिक चेक ले लेते हैं. 6 महीने का बैंक खाता और टर्नओवर भी देखा जाता है. अगर मामला थोड़ा भी संदिग्ध लगा, तो ज़मीन, मकान या कंपनी के मालिकाने के असली कागज़ात गिरवी रख लिए जाते हैं। लेकिन इस सौदे में सबसे ज़रूरी चीज़ एक ‘पंच’ (बिचौलिया) होता है। यह कोई राजनीतिक या सामाजिक रूप से रसूखदार व्यक्ति होता है, जो दोनों पक्षों की गारंटी लेता है ।

डेंगू ने सिरसा में ली एक और जान, स्वास्थ्य विभाग में मचा अलर्ट

सिरसा  सिरसा जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। यह आंकड़ा 600 के आस-पास पहुंच गया है। वहीं बीते दिन देर रात को रानियां के गांव चकराइयां के 43 वर्षीय गुरमेल सिंह की निजी अस्पताल में डेंगू के इलाज के दौरान मौत हो गई।  बता दें कि जिले में इससे पहले भी वायरल बुखार से औटू में बहन भाई, ओढ़ां में बच्ची ओर अहमदपुर में 13 वर्षीय बच्ची की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। व्यक्ति की मौत के बाद मातम छाया हुआ है। वह खेतीबाड़ी करता था और तीन बच्चों का पिता था। जिले में फोगिंग के साथ सैंपल लेने का काम जारी है। तब भी डेंगू के मामलों में गिरावट नहीं आई। 

हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने शहीदी यात्रा में लगाए जो बोले सो निहाल के जयकारे

अंबाला हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने आज अम्बाला में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें साला शहीदी दिवस को समर्पित शहीदी यात्रा में शामिल होते हुए गुरू जी का आशीर्वाद लिया और यात्रा को दिल्ली के लिए रवाना किया। उन्होंने "जो बोले सो निहाल" के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालुओं में जोश का संचार किया।  इस अवसर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान एवं अन्य पदाधिकारियों ने मंत्री अनिल विज को सिरोपा एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। गौरतलब है कि यात्रा दिल्ली में गुरुद्वारा श्री शीशगंज साहिब में सम्पन्न होगी। इस अवसर पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के पूर्व वरिष्ठ उप प्रधान सुदर्शन सिंह सहगल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

हरियाणा की रिया को गूगल में मिला 57 लाख रुपये का पैकेज

चंडीगढ़  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी की प्रतिभाशाली छात्रा रिया अरोड़ा ने अपनी मेहनत व लगन से नया मुकाम हासिल किया है। हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली रिया गूगल में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। 22 साल की उम्र में रिया को 57 लाख रुपये का वार्षिक पैकेज मिला है। खास बात यह है कि रिया का चयन डिग्री पूरी होने से चार महीने पहले हो गया था। वीरवार को आयोजित 13वें दीक्षा समारोह में रिया को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक व संस्थान रजत पदक से सम्मानित किया गया। उनकी यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि देशभर की बेटियों के लिए प्रेरणा भी बनी है।  रिया की आरंभिक शिक्षा शिवा शिक्षा सदन, सोनीपत में हुई। 12वीं के बाद उन्हें आइआइटी मंडी में प्रवेश मिला था। अपनी सफलता पर रिया ने कहा कि संस्थान में उनका सफर शानदार रहा। जो कुछ सीखा, यहीं आकर सीखा। राष्ट्रपति पदक पाना एक सपने जैसा लगता है। मेहनत व आत्मविश्वास से हर कोई इस मुकाम तक पहुंच सकता है। उन्होंने जूनियर्स को संदेश दिया कि अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें, मेहनत करें और खुद पर भरोसा रखें।  रिया के पिता डा. हरिंद्र पाल व माता गुंजन अरोड़ा ने बेटी की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि रिया ने परिवार व देश का नाम रोशन किया है। उसकी मेहनत और समर्पण ने यह मुकाम दिलाया है।    

प्रचंड बहुमत पर मीठा जश्न: सीएम सैनी बोले— जलेबी की तरह बनी रहे जीत की मिठास

सोनीपत  सोनीपत के राई स्थित राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में राज्य स्तरीय बलिदान दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया और इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंच से दादा कुशाल सिंह के बलिदान दिवस पर शत-शत नमन किया। इसके साथ बिहार चुनाव में एनडीए का प्रचंड बहुमत मिलने पर सीएम सैनी ने जलेबी बांटकर मुंह मिठा किया।   इसके साथ सोनीपत के राई में उन्होंने धर्म और देश की रक्षा के लिए अनेकों शहीदों ने अपने बलिदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुशाल सिंह की शहादत हरियाणा की पहचान बनी है। कुशाल सिंह के जीवन पर बनी फिल्म बनाने का मुख्य उद्देश्य उनके जीवन के बारे में सबको बताना है। मुगलों के राज में धर्मपरिवर्तन के खिलाफ गुरु तेग बहादुर ने हमेशा से ही लड़ाई लड़ी थी। नायब सिंह सैनी ने गुरू तेग बहादुर और बाबा कुशाल सिंह के बलिदान पर प्रकाश डाला और कहा कि जब मानवता पर संकट आएगा तब हरियाणा का जवान बलिदान देने से पीछे नहीं हटता हैं। वो बलिदान केवल धर्म नहीं बल्कि राष्ट्रीय चेतना के लिए भी था। 25 तारीख को गुरु तेग बहादुर पर कुरुक्षेत्र में एक कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत करेंगे।हिंद की चादर कार्यक्रम के तहत चार यात्राएं चल रही है, जिनका समापन 25 को कुरुक्षेत्र में होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1984 के दंगों में पीड़ित 121 परिवारों के एक सदस्य को मिलेगी सरकारी नौकरी देने का हमारी सरकार का निर्णय है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि यमुनानगर में बना रहे मेडिकल कॉलेज का नाम हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखा गया हैं। दादा कुशाल सिंह दहिया जी ने जिस धर्म, निष्ठा और देशभक्ति का परिचय दिया वह हर दिल के लिए बन प्रेरणा चुका है। जीटी रोड से बड़खालसा जाने वाली रोड का नाम दादा कुशाल सिंह दहिया मार्ग किया जाएगा। बड़खालसा सामुदायिक केंद्र का नाम बदलकर अमर शहीद दादा कुशाल सिंह दहिया किया जाएगा। गांव बड़खालसा में दादा कुशाल सिंह दहिया के शहीदी स्मारक का जीर्णोधार भी किया जाएगा। गांव दिपालपुर में ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि पर महिलाओं एवं युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट पार्क भी बनाया जाएगा।  इस पार्क के निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये की राशि का खर्च आएगा। गांव दिपालपुर में कम्युनिटी सेंटर का भी निर्माण करवाया जाएगा, जिस पर आएगी 65 लाख रुपये की लागत आएगी। राई विधानसभा के 25 किलोमीटर के रास्तों को खेत खलिहान योजना के तहत पक्का करवाया जाएगा। पौंड अथॉरिटी द्वारा निरीक्षण के बाद तालाबों का विस्तारीकरण एवं सौंदर्यकरण करवाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बड़खालसा में विकास कार्यों के लिए 31 लाख रुपए देने घोषणा भी की है।  

Industrial Boost: अब कृषि भूमि पर भी खोल पाएंगे उद्योग, सरकार ने किया बड़ा बदलाव

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने कृषि ज़ोन में उद्योगों की राह में सबसे बड़ी रुकावट माने जाने वाले सड़क मानकों को नरम कर दिया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से जारी नई पॉलिसी ने ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास का दरवाज़ा पहले से कहीं ज्यादा खोल दिया है। अब निवेशकों को चौड़ी सड़क ढूंढने के झंझट में नहीं फंसना पड़ेगा और छोटे गांवों तक औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने का रास्ता साफ़ हो गया है। वहीं, हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी डेवलपमेंट प्लानों में लागू मिक्सड लैंड यूज (एमएलयू) के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने 19 मार्च, 2021 की नीति के सब-क्लॉज 3बी को बदलते हुए नए मानक लागू किए हैं। पहले कृषि ज़ोन में उद्योगों के लिए न्यूनतम 33 फीट चौड़ी सड़क अनिवार्य थी, जिसके कारण कई प्रोजेक्ट काग़ज़ों में ही अटक जाते थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत 20 फीट चौड़ी मौजूदा गांव लिंक रोड, या 33 फीट राजस्व/स्व-निर्मित पंचायत रास्ता को भी उद्योग लगाने के लिए वैध अप्रोच माना जाएगा। यह बदलाव उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ा अवसर है, जहां चौड़ी सड़कें उपलब्ध नहीं थीं। हाईवे कनेक्टिविटी वाले उद्योगों को भी बड़ा फायदा नई पॉलिसी में उन निवेशकों को भी राहत मिली है जिनकी साइटें नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे या शेड्यूल रोड से सीधी जुड़ी हैं। ऐसे मामलों में अब एक्सेस परमिशन मिलते ही सीएलयू की मंजूरी मिल सकेगी। इससे हाईवे किनारे औद्योगिक बेल्ट्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सभी विभागों को भेजे नये आदेश नए आदेश की प्रति उद्योग विभाग, अर्बन लोकल बॉडीज़ और इंडस्ट्रीज़ एंड कॉमर्स विभाग को भेज दी गई है, ताकि इसे जमीनी स्तर पर तुरंत लागू कराया जा सके। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ की भावना के अनुरूप है, जहां उद्योगों पर अनावश्यक शर्तें कम कर निवेश का माहौल तैयार किया जा रहा है। आगामी वर्षों में ग्रामीण हरियाणा में रोजगार, ढांचागत विकास और छोटी औद्योगिक इकाइयों की संख्या में तेजी आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हरियाणा में मिक्सड लैंड यूज के नियम बदले हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी डेवलपमेंट प्लानों में लागू मिक्सड लैंड यूज (एमएलयू) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब मिक्सड लैंड यूज में कौन-सी गतिविधि बिल्कुल भी नहीं चलेगी। इसके लिए एक 12 बिंदुओं की प्रतिबंधित सूची जारी की गई है। नए नियम के बाद जिन गतिविधियों का नाम इस सूची में नहीं है, वे सभी मिक्सड लैंड यूज जोन में अनुमति योग्य मानी जाएंगी। यह आदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की तरफ से जारी किया गया है। आदेश गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और हिसार मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटीज सहित सभी संबंधित विभागों को भेजा गया है। पहले मिक्सड लैंड यूज को लेकर अक्सर यह उलझन रहती थी कि कौन-सा व्यवसाय या उपयोग इस ज़ोन में आते हैं और कौन-सा नहीं।   कई बार आवेदन महीनों तक अटके रहते थे। अब सरकार ने इस समस्या को खत्म करते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित सूची में जो गतिविधियां हैं, वे नहीं चलेंगी। बाकी सब नियमों के अनुसार मान्य रहेंगी। इससे विभागों के बीच होने वाली अस्पष्टता खत्म होगी और डेवलपर्स व व्यवसायियों को मंजूरी लेने में आसानी होगी। इन 12 गतिविधियों पर पूरी तरह रोक सरकार ने जिन उपयोगों को मिक्सड लैंड यूज जोन में पूरी तरह प्रतिबंधित किया है, उनमें हैवी इंडस्ट्रीज़, कचरा डंपिंग और लैंडफिल साइट्स, केमिकल और पेट्रोकेमिकल प्लांट्स, न्यूक्लियर पावर से जुड़ी इंस्टॉलेशन, स्लॉटर हाउस और टैनरी, डेयरियां, पोल्ट्री और पिगरी यूनिट्स, ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, माइनिंग व क्वारिंग गतिविधियां, कब्रिस्तान, श्मशान भूमि, फार्महाउस तथा प्रदूषणकारी या हानिकारक गतिविधियां पर पाबंदी लगाई है। फार्म हाउस को इस जोन में पहली बार बैन किया गया है। साथ ही, उन सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी, जिसे सरकार आगे सार्वजनिक हित में प्रतिबंधित घोषित करे। सभी मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटीज को निर्देश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से प्रदेश की पांचों मेट्रोपोलिटन डेवलेपमेंट अथॉरिटीज को इस संदर्भ में निर्देश जारी किए हैं। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत व हिसार अथॉरिटी शामिल हैं। अथॉरिटीज को इन नियमों को तुरंत प्रभाव से लागू करने के लिए कहा गया है। इन सभी प्राधिकरणों को अपने-अपने डेवलपमेंट प्लानों में नई सूची के अनुसार संशोधन करने होंगे। आवेदन की प्रक्रिया होगी आसान नया नियम लागू होने के बाद मिक्सड लैंड यूज से जुड़े आवेदन पहले की तुलना में जल्दी निपटेंगे। जिन गतिविधियों पर प्रतिबंध नहीं है, उनके लिए विभाग को अलग से व्याख्या देने या स्पष्टीकरण मांगने की जरूरत नहीं रहेगी। इससे निवेशकों को स्पष्टता मिलेगी, डेवलपमेंट की गति बढ़ेगी और अनियमित उपयोग पर रोक लगेगी। सरकार का मानना है कि इससे योजनाबद्ध शहरी विकास को मजबूती मिलेगी और शहरों में असंगत या प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को जड़ से रोका जा सकेगा।

ग्रुप-D कर्मचारियों को बड़ी राहत: हरियाणा सरकार ने बदला पूरा सिस्टम, एक ही प्राधिकरण लेगा सभी फैसले

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने ग्रुप-डी कर्मचारियों से जुड़े मामलों को तेज़ और पारदर्शी ढंग से निपटाने के लिए एक बड़ी प्रशासनिक पहल की है। हरियाणा ग्रुप-डी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2018 और हरियाणा सरकारी राजपत्र (21 दिसंबर, 2023) के आधार पर जारी नए निर्देशों के तहत अब मानव संसाधन विभाग के महानिदेशक को नियुक्तिकर्ता प्राधिकरण घोषित किया गया है। यानी ग्रुप-डी कर्मियों की नियुक्ति, त्यागपत्र, स्थानांतरण और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण निर्णय अब इसी प्राधिकरण से होकर गुजरेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानवीय आधार पर नियुक्ति के सभी प्रकरणों की जांच हरियाणा मानवीय आर्थिक सहायता अथवा नियुक्ति नियम, 2019 के अनुसार की जाएगी। हर केस का सत्यापन एचएसएएस (हरियाणा प्रशासनिक सेवा) कैडर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा। साथ ही, संबंधित विभागाध्यक्ष की विस्तृत सिफारिश भी आवश्यक होगी। सरकार ने कहा है कि बिना समुचित दस्तावेज़ और तस्दीक के कोई भी मानवीय आधार पर नियुक्ति का मामला आगे नहीं भेजा जाएगा। 28 मार्च, 2018 या उसके बाद नियुक्त हुए सभी कॉमन कैडर ग्रुप-डी कर्मचारियों के त्यागपत्र वाले प्रकरणों को नियंत्रण अधिकारी या विभाग के माध्यम से सीधे मानव संसाधन विभाग तक भेजा जाएगा। सरकार ने चेतावनी दी है कि अनावश्यक देरी वाले मामलों की जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय पर तय होगी। अनुशासनात्मक मामलों में संपूर्ण रिकॉर्ड अनिवार्य अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े मामलों में सरकार ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि कि मामले का पूरा दस्‍तावेज़ी रिकॉर्ड, तथ्यात्मक रिपोर्ट तथा विभागीय टिप्पणियां और सुझाव सभी अनिवार्य रूप से संलग्न किए जाएं। सरकार ने साफ कहा है कि बिना पूर्ण रिकॉर्ड के अनुशासनात्मक प्रकरण किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। विभागों को सख्त हिदायत जारी पत्र में सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इन नए नियमों को पत्र और भावना दोनों रूपों में लागू किया जाए। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था ग्रुप-डी कर्मचारियों से जुड़े मामलों को एक समान, पारदर्शी और तेज़ गति से निपटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और पूरे राज्य में समान प्रक्रिया लागू करने में मदद करेगी।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता खत्म, लाल किला ब्लास्ट के बाद छात्रों की स्थिति क्या?

फरीदाबाद देश की राजधानी दिल्ली के दिल में हुई लाल किला ब्लास्ट की गूंज अब हरियाणा के फरीदाबाद तक पहुंच चुकी है. सोमवार शाम करीब 6:52 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास सफेद i20 कार में धमाका हुआ, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई. जांच में सामने आया कि इस साजिश के तार अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हो सकते हैं. इसी बीच, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है. AIU ने कहा कि अब यूनिवर्सिटी को AIU का नाम या लोगो इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. यह फैसला न केवल संस्थान के लिए बड़ा झटका है, बल्कि हजारों छात्रों के करियर पर भी गहरा असर डाल सकता है. छात्रों के लिए क्या रास्ते बचे हैं? छात्र फिलहाल UGC और AICTE से मान्यता प्रमाणपत्र लेकर भारतीय विश्वविद्यालयों या सरकारी नौकरियों में आवेदन कर सकते हैं. लेकिन विदेशी एडमिशन के लिए उन्हें AIU समकक्ष सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा. इससे बाहर पढ़ाई मुश्किल हो जाएगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि यूनिवर्सिटी को अब सुधारात्मक कदम उठाकर AIU से सदस्यता पुनः प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए. कैसे अल-फलाह यूनिवर्सिटी बनी आतंकी साजिश का अड्डा जांच एजेंसियों के मुताबिक अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 आतंकियों की गुप्त बैठकों का केंद्र थी. बताया जा रहा है कि ये मीटिंग्स रूम नंबर 13 में होती थीं, जहां दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सीरियल ब्लास्ट की योजना बनाई जा रही थी. लाल किला ब्लास्ट केस की जांच में अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 से आतंकी लिंक सामने आए हैं. यह कमरा डॉ. मुजम्मिल अहमद गाई का था जो पुलवामा का रहने वाला बताया जा रहा है. जांच में सामने आया कि वह नियमित रूप से कुछ कट्टरपंथी डॉक्टरों और छात्रों से मिलता था. एजेंसियों को संदेह है कि यूनिवर्सिटी की लैब से IED की क्षमता बढ़ाने वाले केमिकल इसी कमरे में लाए गए थे. फिलहाल पुलिस ने कमरा नंबर 13 को सील कर दिया है, और वहां से लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कैमिकल कंटेनर, और डिजिटल नोट्स बरामद किए गए हैं. AIU ने आधिकारिक बयान में कहा- अल-फलाह यूनिवर्सिटी को अपनी किसी भी गतिविधि में AIU का नाम या लोगो इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. विश्वविद्यालय की वेबसाइट से तुरंत AIU का लोगो हटाया जाए. AIU के अनुसार यह फैसला संस्था की “Good Standing” नीति के तहत लिया गया है. अगर किसी यूनिवर्सिटी का नाम किसी विवाद, आपराधिक जांच या फर्जी गतिविधि में सामने आता है, तो उसकी सदस्यता निलंबित या समाप्त की जा सकती है. AIU क्या है और क्यों है इतनी अहम संस्था? AIU यानी Association of Indian Universities भारत की सबसे पुरानी उच्च शिक्षा संस्था है, जो 1925 में स्थापित हुई थी. यह संस्था भारत के सभी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों (केंद्रीय, राज्य, डीम्ड, निजी, ओपन) का प्रतिनिधित्व करती है और विदेशी डिग्रियों की समानता (Equivalence) तय करती है. AIU की मुख्य जिम्मेदारियां     भारत के सभी विश्वविद्यालयों को एक शैक्षणिक मंच पर लाना.     विदेशी डिग्रियों की भारतीय स्तर पर वैधता तय करना.     यूनिवर्सिटीज के बीच रिसर्च, नीति और खेल सहयोग बढ़ाना.     विश्वविद्यालयों को सदस्यता, स्पोर्ट्स पार्टिसिपेशन और इंटरनेशनल रिप्रेजेंटेशन देना.     यदि कोई यूनिवर्सिटी विवादों में हो तो उसकी सदस्यता निलंबित या रद्द करना. AIU सदस्यता रद्द होने के परिणाम प्रभाव का क्षेत्र    संभावित असर विदेशी शिक्षा    विदेशों की यूनिवर्सिटीज में प्रवेश मुश्किल, Equivalence सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा सरकारी नौकरियां    UPSC, SSC, PSU जैसी नौकरियों में आवेदन रुक सकता है यूनिवर्सिटी की साख    प्रतिष्ठा में गिरावट, एडमिशन में 40-50% कमी संभव रिसर्च फंडिंग    अंतरराष्ट्रीय सहयोग और परियोजनाएं ठप खेलकूद    AIU के यूनिवर्सिटी गेम्स से प्रतिबंध छात्र    करियर अनिश्चित, डिग्रियों की वैल्यू घटेगी अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर असर: साख और भविष्य पर संकट अल-फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद की प्रतिष्ठित निजी यूनिवर्सिटीज में मानी जाती रही है. लेकिन अब इस विवाद और सदस्यता रद्द होने से-     यूनिवर्सिटी की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां खत्म होंगी,     नए छात्र एडमिशन से कतराएंगे,     खेल और रिसर्च फंडिंग प्रभावित होगी,     और विदेश में डिग्री की वैधता खत्म हो जाएगी.     हालांकि, राहत यह है कि UGC और NMC की मान्यता फिलहाल बरकरार है, इसलिए यूनिवर्सिटी की डिग्रियां घरेलू स्तर पर वैलिड रहेंगी. दिल्ली ब्लास्ट के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर दोहरी मार पड़ी है. एक तरफ आतंकवादी साजिश के तारों से जुड़ने के आरोप, दूसरी ओर AIU सदस्यता का रद्द होना. यह मामला न सिर्फ एक विश्वविद्यालय के भविष्य बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है. अब देखना होगा कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी खुद को इस संकट से कैसे बाहर निकालती है. अल-फलाह यूनिवर्सिटी का चांसलर, जानें कहां-कहां से होती है कमाई? हरियाणा के फरीदाबाद जिले में बसा अल फलाह विश्वविद्यालय हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर जांच के घेरे में आ चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके कुछ डॉक्टरों का दिल्ली बम धमकों से संबंध है. जांच जारी रहने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने किसी भी संस्थागत संलिप्तता से इनकार कर दिया है. लेकिन एक बात सबका ध्यान आकर्षित कर रही है वह इसके चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी का व्यवसायिक बैकग्राउंड. आइए जानते हैं की यूनिवर्सिटी के अलावा किन कंपनियों का मालिक है जावेद अहमद सिद्दीकी. कहां से हुई सफर की शुरुआत  जावेद अहमद सिद्दीकी का सफर 1990 के दशक के अंत में शुरू हुआ. 1990 के दशक के अंत में जावेद अहमद सिद्दीकी ने दिल्ली एनसीआर में कई व्यवसाय स्थापित किए. आज के समय में वह अल फलाह विश्वविद्यालय के चांसलर के रूप में काम करते हैं. इसी के साथ वह अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी भी हैं. यह ट्रस्ट विश्वविद्यालय और स्कूलों, अनाथालय और मदरसों के साथ-साथ कई शैक्षणिक और कल्याणकारी संस्थानों की देखरेख करता है.  जावेद अहमद सिद्दीकी के स्वामित्व और प्रबंधन वाली कंपनियां  भारत के कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक जावेद अहमद सिद्दीकी 9 पंजीकृत कंपनियों से निर्देशक या प्रबंध प्रमुख के रूप में जुड़े हुए हैं. इनमें अल फलाह इन्वेस्टमेंट लिमिटेड, अल फलाह सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड, अल फलाह कंसलटेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अल फलाह एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, अल फलाह एनर्जी लिमिटेड, अल … Read more

लिंगानुपात में बड़ी छलांग! हरियाणा पहुँचा 912 पर, जानें कैसे आया बदलाव

चंडीगढ़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव के निर्देशानुसार हरियाणा में लिंगानुपात में सुधार हेतु राज्य टास्क फोर्स (एस.टी.एफ.) की साप्ताहिक बैठक स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक डा. वीरेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत अवैध गर्भपात पर अंकुश लगाने और राज्य के लिंगानुपात में और सुधार लाने के प्रयासों को तेज करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक में बताया गया कि स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभागों के निरंतर प्रयासों के कारण राज्य में पहली जनवरी से 10 नवम्बर, 2025 तक लिंगानुपात 912 दर्ज किया गया लिए है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 904 था। जिलेवार प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए बैठक में बताया गया कि फतेहाबाद, गुरुग्राम, पंचकूला, पानीपत और रेवाड़ी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जबकि सिरसा, सोनीपत और चरखी दादरी में गिरावट देखी गई है। इन जिलों को सतर्कता बढ़ाने, अवैध गर्भपात पर अंकुश लगाने और अपने-अपने लिंगानुपात में सुधार के लिए अल्ट्रासाऊंड केंद्रों का समन्वित निरीक्षण करने  दिया और अधिकारियों को दोषी पाए जाने वाले डाक्टरों के लाइसेंस रद्द करने सहित दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि चरखी दादरी के गोपी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एस.एम.ओ. को खराब लिंगानुपात के लिए आरोप पत्र जारी किया गया है। इसके अलावा, नारायणगढ़, मुलाना और चौरमस्तपुर के प्रभारी एस.एम.ओ. और पलवल, चरखी दादरी, सिरसा और सोनीपत के सी.एम.ओ. को इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। 

जेजेपी स्थापना दिवस की तैयारियां तेज, जुलाना में जुटेगी पार्टी की ताकत

चंडीगढ़  7 दिसंबर को जुलाना में होने वाले स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर जननायक जनता पार्टी तैयारियों में जुट गई है। जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह चौटाला ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बृज शर्मा को कार्यक्रम के आयोजक की कमान सौंपते हुए कई महत्वपूर्ण समितियों का गठन किया है और प्रदेश, जिला और हलका स्तर पर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, पूर्व विधायक अमरजीत ढांडा, जोरा सिंह, रजनी मलिक, धर्मपाल प्रजापत और कृष्ण राठी को कार्यक्रम समन्वय समिति में शामिल किया गया हैं। वहीं कार्यक्रम आयोजक समिति में वरिष्ठ नेता डॉ केसी बांगड़, मुकेश सेठी, राहुल शर्मा, दलबीर धनखड़, अश्विनी वर्मा और दीपकमल सहारण को जिम्मेदारी दी हैं। जेजेपी ने स्थापना दिवस कार्यक्रम की तैयारियों के लिए हिसार और जींद जिले में दुष्यंत चौटाला, पानीपत में बृज शर्मा, भिवानी में दिग्विजय सिंह चौटाला और राव अभिमन्यु को जिला प्रभारी बनाया हैं। दादरी में पूर्व चेयरमैन राजेंद्र लितानी, झज्जर में पूर्व विधायक राजदीप फौगाट और कर्नल सुखविंदर राठी, कुरुक्षेत्र में मोहसिन चौधरी, अंबाला में प्रो रणधीर चीका, फरीदाबाद में ऋषिराज राणा, फतेहाबाद में स. सर्वजीत मसीतां और एडवोकेट सुरेंद्र भागीराम को जिला प्रभारी की कमान सौंपी गई हैं। इसी तरह गुरुग्राम जिले में दिनेश डागर, कैथल में रोशन ढांडा, करनाल में कृष्ण राठी, महेंद्रगढ़ में राकेश जाखड़, नूंह में रविंद्र सांगवान और राजेश भारद्वाज, पंचकुला में सुरजीत सौंढा और किरण पूनिया को जिला प्रभारी बनाया गया हैं। इनके अलावा पलवल में तेजपाल डागर और रविंद्र सांगवान, रेवाड़ी में नरेश द्वारका, रोहतक में सुमित राणा, सिरसा में कुलजीत कुलड़िया, सोनीपत में देवेंद्र कादियान, यमुनानगर में मोहसिन चौधरी और किरण पूनिया जिला प्रभारी होंगे।  वहीं विधानसभा क्षेत्रों में जेजेपी ने असंध हलके में बृज शर्मा, बाढड़ा में पूर्व विधायक नैना सिंह चौटाला, नरवाना में पूर्व विधायक रमेश खटक, बरोदा में दिग्विजय सिंह चौटाला, उकलाना में राजेंद्र लितानी और अनिल बालकिया, जुलाना में धर्मबीर सिहाग को हलका प्रभारी बनाया गया हैं। जींद हलके में राजेश सैनी, सफीदों में प्रो रणधीर चीका, उचाना में ओपी लाठर और अनिल जंधेड़ी, गोहाना में कुलदीप मलिक, इसराना में कृष्ण राठी, कलायत में रोशन ढांडा, नारनौंद में अमित बूरा, बरवाला में करण सिंह देपल, हांसी में अजीत ओडीएम, बवानी खेड़ा में जगदीश सिहाग, नलवा में सज्जन बलाली, महम में उपेंद्र कादियान, बेरी में रविंद्र सांगवान को हलका प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। वहीं दादरी हलके में कर्नल सुखविंदर राठी, पिहोवा में धूप सिंह माजरा, खरखौदा में राज सिंह दहिया, किलोई में सुमित राणा, बहादुरगढ़ में संजय दलाल, पूंडरी में रमेश सिद्धपुर, बादली में राव अभिमन्यु, कलानौर में रविंद्र पटौदी और भूपेंद्र बोंद, झज्जर में नरेश द्वारका और नीलोखेड़ी में रणदीप कौल हलका प्रभारी होंगे।