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पंचकूला पुलिस का बड़ा अभियान, सड़क पर लापरवाही पड़ी भारी; हर दिन हो रहे ट्रैफिक चालान

पंचकूला. सड़क पर कुछ मिनट बचाने की जल्दबाजी और सुरक्षा नियमों की अनदेखी लोगों की जेब पर भी भारी पड़ रही है। पंचकूला में यातायात नियमों की अनदेखी करने पर इस साल छह महीनों के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने 26,109 चालान किए हैं। एक जनवरी से 30 जून तक का यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। क्योंकि औसतन हर दिन लगभग 150 चालान काटे जा रहे हैं। वहीं, इन चालानों के जरिए 12 करोड़ 12 लाख चार हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। आंकड़े बताते हैं कि सबसे अधिक लापरवाही दोपहिया वाहन चालक कर रहे हैं। सबसे ज्यादा चालान टू-व्हीलर सवारों के हेलमेट न पहनने के हुए हैं, जबकि शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों की संख्या भी चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, बिना हेलमेट वाहन चलाने पर सबसे अधिक 12,914 चालान किए गए और छह करोड़ 30 लाख 46 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इससे साफ है कि पंचकूला ट्रैफिक पुलिस की तरफ से लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियान और सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में दोपहिया चालक नियमों को ताक पर रख सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं। वहीं ऐसे वाहन चालक अपनी और दूसरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं। ड्रंक एंड ड्राइव के 2950 चालान इसके अलावा इन छह महीनों में ड्रंक एंड ड्राइव के 2950 चालान काटे गए। हालांकि इन मामलों का निपटारा कोर्ट से होता है। ऐसे में जुर्माना की राशि भी अदालत से तय होती है। वहीं गलत पार्किंग के 2464, ट्रिपल राइडिंग के 913, रेड लाइट जंप करने के 516 और बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाने के 401 चालान किए गए। ओवर स्पीड के केवल तीन मामले दर्ज हुए। ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे वाहन चालक ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि चालान का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और लोगों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। आंकड़े यह संकेत देते हैं कि पंचकूला में अब भी बड़ी संख्या में लोग बुनियादी ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे सड़क सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

जल संकट पर हरियाणा के 24 गांव एकजुट, आंदोलन तेज करने का ऐलान

हांसी/बठिंडा. पेयजल की मांग को लेकर चल रहे चानौत के आंदोलन ने सोमवार को नया और निर्णायक मोड़ ले लिया। आंदोलनकारियों ने दोपहर एक बजे से तीन बजे तक हांसी-बरवाला मार्ग पर टेंट गाड़कर रोड जाम कर दिया, जिससे हाइवे पर दो घंटे तक वाहनों के पहिए थम गए। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। यातायात को वैकल्पिक मार्गों से निकाला गया, जबकि आंदोलन के बीच धरना समिति ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि अब यह लड़ाई केवल चानौत की नहीं रहेगी, बल्कि रोघी और बूरा खाप के 24 गांव बारी-बारी से आंदोलन की जिम्मेदारी संभालेंगे। धरना समिति ने घोषणा की कि अब प्रतिदिन एक गांव पूरे आंदोलन का संचालन करेगा। जिस गांव की बारी होगी, उसी दिन उस गांव की पंचायत, महिला शक्ति और ग्रामीण धरनास्थल पर पहुंचकर व्यवस्था संभालेंगे। आंदोलन को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। इसी को लेकर मंगलवार को 24 गांवों के सरपंचों और धरना समिति की संयुक्त बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। गांव में टी-कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग गांव में टी-कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर 16 मई से आंदोलन लगातार जारी है। धरना समिति का कहना है कि उनकी मांग आज भी वही है और जब तक गांव को टी-कनेक्शन से पानी नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। समिति ने दावा किया कि सरकार चाहे जितना समय लगा दे, ग्रामीण पीछे हटने वाले नहीं हैं। धरना समिति के सदस्यों ने बताया कि आंदोलन को लगातार चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर उपायुक्तों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए। इसके बाद चार जुलाई को धरनास्थल से ट्रैक्टर मार्च निकाला गया और गांव के जलघर तक मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया गया। सोमवार का हाइवे जाम उसी आंदोलन की अगली कड़ी था। हाल ही में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने एनएचआइ से एनओसी नहीं मिलने का हवाला देते हुए भाखड़ा पाइप लाइन का कार्य रोक दिया था। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि उनका संघर्ष पाइप लाइन के लिए नहीं, बल्कि टी-कनेक्शन के माध्यम से गांव को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए है। जाम के दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम पूरे समय मौके पर मौजूद रही। अधिकारियों ने स्थिति पर लगातार नजर रखी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। निर्धारित समय पूरा होने के बाद आंदोलनकारियों ने जाम समाप्त कर दिया, जिसके बाद हाइवे पर यातायात सामान्य हो सका। अब 24 गांव मिलकर लड़ेंगे पानी की लड़ाई धरना समिति के अनुसार अब रोघी और बूरा खाप के 24 गांव आंदोलन को नई मजबूती देंगे। हर दिन एक गांव धरनास्थल की पूरी जिम्मेदारी संभालेगा। उसी गांव के ग्रामीण, पंचायत और महिलाएं पूरे दिन आंदोलन का संचालन करेंगी। समिति का कहना है कि इस व्यवस्था से आंदोलन लगातार चलता रहेगा और सरकार पर समाधान निकालने का दबाव भी बढ़ेगा। मंगलवार को सभी 24 गांवों के सरपंचों की बैठक में इसकी विस्तृत रूपरेखा तय की जाएगी।

हरियाणा में 10 जुलाई तक बारिश के आसार, सात जिलों में येलो अलर्ट जारी हुआ

 हिसार  प्रदेश में मौसम तेजी से बदल रहा है। रविवार शाम के बाद 11 जिलों में वर्षा हुई। कुछ जिलों में तेज वर्षा हुई तो कुछ में गर्मी से लोग परेशान रहे। हिसार में गर्मी के चलते विनोद नगर के 24 वर्षीय विक्की की मौत हो गई। पोस्टमार्टम में गर्मी से मौत की पुष्टि हुई है। वहीं मंगलवार को सात जिलों में तेज वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार जींद, यमुनानगर, भिवानी, अंबाला व झज्जर आदि जिलों में वर्षा हुई। इसके साथ ही आने वाले दिनों में भी तेज वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि आने वाले दिनों में वर्षा से तापमान में गिरावट हो सकती है। गर्मी के कारण विनोद नगर निवासी विक्की की रविवार रात को तबीयत बिगड़ गई थी। परिवार के लोग इसे अस्पताल ले गए। वहां पर इलाज के दौरान मौत हो गई। विक्की मजदूरी करता था। मानसून के आगे बढ़ने की संभावना चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मदन खीचड़ ने बताया कि मानसून टर्फ की उत्तरी सीमा जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार व भठिंडा तक बनी हुई है। अरब सागर में एक डिप्रेशन बनने से अनुकूल परिस्थितियों के कारण मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है। जिससे मानसूनी हवाओं और राजस्थान पर एक साईक्लोनिक सर्कुलेशन बनने से हरियाणा राज्य में 10 जुलाई तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने तथा ज्यादातर क्षेत्रों में बीच-बीच में हवाओं व गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। परंतु इस दौरान कुछ एक स्थानों पर तेज वर्षा हो सकती है। इससे दिन के तापमान में गिरावट तथा वातावरण में नमी की अधिकता बने रहने की संभावना है। यलो अलर्ट: पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, मेवात और पलवल। वर्षा (मिलीमीटर में)     करनाल : 16     गुरुग्राम : 38     भिवानी : 2.4     चरखी दादरी : 9     हिसार : 31     जींद : 26.5     कैथल : 8.5     सोनीपत : 1 तापमान (डिग्री सेल्सियस में) जिला न्यूनतम अधिकतम अंबाला 29 36.8 भिवानी 26.5 37 गुरुग्राम 27.4 36 हिसार 28.2 38.2 नारनौल 26.5 34.5 रोहतक 28.2 33.6 सिरसा 29 38.2  

HTET आंसर-की हुई रिलीज, अभ्यर्थियों को मिला 72 घंटे का मौका, ऐसे करें ऑब्जेक्शन

भिवानी. हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के प्रश्न पत्रों की खामियों के बीच हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने आंसर-की जारी कर दी है। लेवल तीन की सायं को जारी की गई तो लेवल एक व दो की रात तक जारी की गई। आंसर-की के बाद अभ्यर्थी 72 घंटे यानी नौ जुलाई की सायं तक अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकेंगे। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से पांच व छह जुलाई को हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा-2025 करवाई गई थी। सुरक्षा के कडे़ पहरे और सीसीटीवी की निगरानी में करीब 1,92,226 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी जबकि 17.60 प्रतिशत यानी 41068 अनुपस्थित रहे थे। परीक्षा के बाद प्रश्न पत्रों की खामियों के कारण काफी सवाल उठे और अभ्यर्थियों ने आरोप लगाए कि मुहावरे का अर्थ पूछा मगर मुहावरा दिया ही नहीं। मैथ के सवालों में अंग्रेजी में अलग अंक दिए इनके अलावा मैथ के सवालों में अंग्रेजी में अलग अंक दिए और हिंदी में अलग। कई जगह प्रश्न पत्र मिस प्रिंटिंग की शिकायत आई तो काफी अभ्यर्थी ऐसे भी रहे जिन्होंने आरोप लगाए कि बुकलेट सील नहीं थी। अब हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से आंसर-की जारी कर दी है और प्रश्न पत्रों की खामियों के चलते आपत्तियां भी ज्यादा लगने की संभावनाएं है। अभ्यर्थियों को आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 72 घंटे का समय दिया गया है। यानी नौ जुलाई तक अभ्यर्थी अपनी आपत्तियां दर्ज करवा सकते है। लेवल     कुल अभ्यर्थी     उपस्थित     गैर हाजिर एक     41,062     31,402     9,660 दो     1,19,141     99,904     19,237 तीन     73,091     60,920     12,171 हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों को लगता है कि प्रश्न पत्र में दिए प्रश्न अधूरे थे या गलत थे या उनके विकल्प सही नहीं थे, वे अपनी आपत्तियां दर्ज करवाए। हम हमारे एक्सपर्ट के समक्ष आपत्तियां रखेंगे। हम अभ्यर्थियों को आश्वस्त करते है कि किसी अभ्यर्थी के साथ अन्याय नहीं होगा।

सभी सरकारी दस्तावेज होंगे ऑनलाइन, हरियाणा सरकार ने विभागों को दिए निर्देश

चंडीगढ़  हरियाणा में दस्तावेजों के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने को लेकर सरकार ने सभी विभागों से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश में सभी कानूनों, नियमों, सरकारी आदेश, सर्कुलर, अधिसूचनाओं, नीतियों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों का केंद्रीकृत ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया जाना है। ताकि सभी दस्तावेज विभागवार, विषयवार और अंतिम अपडेट की तारीख के साथ ऑनलाइन उपलब्ध हो जाए और आसानी से सर्च किए जा सके। मुख्य सचिव ने भेजा रिमाइंडर मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी प्रशासनिक सचिवों को रिमाइंडर जारी कर कहा है कि नौ जून को दिए गए निर्देशों के बावजूद कई विभागों से अब तक कार्रवाई रिपोर्ट नहीं मिली है। विभागों से कहा गया है कि बिना और देरी किए एक्शन टेकन रिपोर्ट निर्धारित ई-मेल पर भेजी जाए, ताकि आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सके। साथ ही सभी विभागों को अपने-अपने कानूनों, नियमों और अन्य दस्तावेजों की संपादन योग्य डिजिटल कॉपी तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी बताना होगा कि कौन-से नियम या कानून अप्रासंगिक हो चुके हैं और किनमें संशोधन, सरलीकरण या निरस्तीकरण की जरूरत है। विभागों की छह बिंदुओं पर समीक्षा सरकार नियामकीय सुधार के तहत सभी विभागों के नियमों की छह बिंदुओं पर समीक्षा करा रही है। इसमें अनावश्यक लाइसेंस खत्म करना, पुराने और अप्रासंगिक नियम हटाना, जोखिम आधारित निरीक्षण व्यवस्था लागू करना तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाना शामिल है।  

साइबर अपराध पर हरियाणा पुलिस की सख्ती, 31% धनवापसी के साथ जांच में बड़ी सफलता

चंडीगढ़ हरियाणा में साइबर अपराधियों से निपटने में सख्ती और जागरूकता अभियान का असर दिखने लगा है। विशेषकर हाट स्पाट नूंह में साइबर ठगों का नेटवर्क तोड़ने में खासी सफलता मिली है। पिछले छह महीन में 14 हजार 139 अवैध आनलाइन सामग्री हटाई गई और 3947 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। डेढ़ साल के दौरान नूंह से 927 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में 31 प्रतिशत धन वापसी सुनिश्चित की है। यह राष्ट्रीय औसत 3.85 प्रतिशत से आठ गुना अधिक है। पिछले डेढ़ साल में 9100 पुलिस कर्मियों को साइबर जांच का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। 25 जून से ई-जीरो एफआईआर सुविधा लागू पुलिस अधीक्षक (साइबर) मयंक गुप्ता ने बताया कि साइबर अपराधियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण, नीति, अनुसंधान एवं विकास, डार्क वेब जांच तथा वर्चुअल डिजिटल एसेट से संबंधित विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव है। 25 जून से ई-जीरो एफआइआर सुविधा लागू कर दी गई है। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त एक लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें स्वतः इलेक्ट्रानिक जीरो एफआइआर में परिवर्तित होकर संबंधित साइबर पुलिस थानों को चली जाती हैं। इससे ऐसे मामलों में त्वरित पंजीकरण और जांच सुनिश्चित हो रही है। इस दौरान गृह सचिव सुधीर राजपाल, पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल तथा गृह विभाग की अतिरिक्त सचिव डा. वंदना दिसोदिया ने भी अपनी बात रखी। नूंह में पकड़े सर्वाधिक साइबर अपराधी नूंह में सर्वाधिक साइबर अपराधी पकड़े गए हैं। पिछले डेढ़ साल में हरियाणा पुलिस ने 473 एफआइआर दर्ज करते हुए 927 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। आरोपितों से 751 मोबाइल फोन तथा 1442 सिम कार्ड जब्त किए। इसके अतिरिक्त 43 हजार 354 मोबाइल नंबर तथा उनसे जुड़े 5007 आइएमईआइ को ब्लाक किया गया। प्रदेश में साइबर अपराध जांच के दौरान फ्रीज किए गए बैंक खातों से संबंधित 533 शिकायतों में से 410 का निपटान किया जा चुका है। 675 पुलिसकर्मी साइबर अपराध की जांच में जुटे प्रदेश में 675 पुलिस कर्मी साइबर अपराध जांच में कार्यरत हैं। इसके अलावा 3742 अधिकारियों ने साइट्रेन पोर्टल के माध्यम से आनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में 5390 पुलिस कर्मियों को विशेष आफलाइन प्रशिक्षण दिया गया। हरियाणा पुलिस के दो अधिकारी साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित किए गए हैं तथा 12 अन्य अधिकारी साइबर कमांडो प्रशिक्षण के अगले चरण के लिए पात्र घोषित किए गए हैं। समन्वय पोर्टल पर हरियाणा ने अन्य राज्यों से प्राप्त 8872 अनुरोधों में से 8,625 का निपटान कर 97 प्रतिशत से अधिक दक्षता दर्ज की है।

लखपति दीदी अभियान से ग्रामीण महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर उद्यमी

भिवानी  हरियाणा के गांवों में अब कहावत बदलती नजर आ रही है जिस गांव म्हैं बहु बेटी कमाऊ हो ली, समझो उस गांव की तकदीर चमक ली…। मामूली बचत से शुरू हुई यह मुहिम अब आत्मनिर्भर हरियाणा की सबसे मजबूत पहचान बनती जा रही है। जी हां कभी चौके-चूल्हे और घर-आंगन तक सीमित मानी जाने वाली ग्रामीण महिलाएं आज हरियाणा के विकास की ऐसी कहानी लिख रही हैं, जिस पर पूरा गांव गुमान कर रहा है। बचत की छोटी-सी पोटली तै शुरू हुआ सफर अब लाखों के कारोबार तक पहुंच गया है स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी अभियान ने गांव की बहु बेटियां म्हैं ऐसा भरोसा जगाया है कि अब वे केवल अपने परिवार की आमदनी बढ़ाने तक ही सीमित नहीं, बल्कि पूरे गांव की तरक्की की मजबूत धुरी बन चुकी हैं। कहीं अचार-पापड़ की खुशबू है तो कहीं देशी अनाज के बिस्कुट, कहीं ड्रोन उड़ाती दीदी है तो कहीं जैविक उत्पादों से दूसरे राज्यों तक पहचान बना रही महिलाएं। गांव की चौपालों में अब खेती-किसानी के साथ कारोबार की बातें भी सुनाई देने लगी हैं। साफ है, हरियाणा के गांवों में बदलाव की बयार चल पड़ी है और इस बदलाव की अगुवाई महिलाएं कर रही हैं। बचत तै बरकत… यही बन गया गांव का नया मंत्र हरियाणा में आज 63 हजार से ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे करीब 6.21 लाख परिवार जुड़े हुए हैं। प्रदेश में 5300 ग्राम संगठन और 270 क्लस्टर लेवल फेडरेशन महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कड़ी बने हुए हैं। कभी हर महीने 100-200 रुपये की बचत करने वाली महिलाएं आज उसी बचत के दम पर बैंक से ऋण लेकर अपना कारोबार खड़ा कर रही हैं। डेयरी, हस्तशिल्प, अचार, पापड़, मसाले, देशी खाद्य उत्पाद, सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, अगरबत्ती, जैविक खेती और कई छोटे उद्योग अब गांव की महिलाओं की पहचान बन चुके हैं। पहले जो महिलाएं घर की चौखट लांघने में झिझकती थीं, आज वे अपने उत्पादों की मार्केटिंग कर रही हैं, ऑनलाइन आर्डर ले रही हैं और दूसरे राज्यों तक सामान भेज रही हैं। गांव की चौपाल में अब केवल फसलों की नहीं, बल्कि कारोबार बढ़ाने की भी चर्चा होती है लखपति दीदी बनण की होड़, बढ़ रहया आत्मविश्वास स्वयं सहायता समूहों की इस मुहिम को लखपति दीदी अभियान ने नई रफ्तार दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में 58 हजार से ज्यादा महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यानी वे सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। कमाई बढ़ने के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे केवल घर के खर्च तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, परिवार के स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और पंचायतों के फैसलों में भी अपनी मजबूत भागीदारी निभा रही हैं। गांव की दूसरी महिलाएं भी इन्हें देखकर आगे बढ़ने का हौसला जुटा रही हैं। हरियाणवी जायके का स्वाद देशभर में पहुंच रहा गांव की दीदियों का हुनर अब हरियाणा की सरहदों से बाहर भी अपनी पहचान बना चुका है। बहल की रेखा के बनाए देशी अचार, पापड़ और मिर्च-मसाले नोएडा, चंडीगढ़ समेत कई राज्यों में पसंद किए जा रहे हैं। गुरुग्राम के चंदू गांव की पूजा शर्मा देशी अनाज से तैयार बिस्कुट दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश तक भेज रही हैं। ताजनगर की रवि प्रजापति जैविक उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। ढिगावा निवासी सुषमा देवी के मिर्च-मसाले, रोस्टेड अनाज, बेसन, पापड़, देशी घी और दूध ग्राहकों की पहली पसंद बन चुके हैं। मंढाणा की शकुंतला आधुनिक तकनीक अपनाकर ड्रोन दीदी के रूप में किसानों की मदद कर रही हैं। साहलेवाला की विद्या के पायदान, कृष्णा के तैयार किए हरियाणवी परिधान, नीलम का ब्यूटी पार्लर और प्रमिला की देशी गुड़ की सुहाली व साबुन भी बाजार में खूब पसंद किए जा रहे हैं। भिवानी बस अड्डे पर बनाई कैंटीन की थाली का जायका ही न्यारा है। गांव खरक की सुमन के अचार और सुनीता की तैयार की गई चूड़ियों की भी अच्छी मांग है। ये केवल कुछ उदाहरण हैं। प्रदेश में ऐसी हजारों महिलाएं हैं जो कभी बेरोजगार थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद आज अपने परिवार के साथ-साथ गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं। अब गांव में अक्सर यह बात सुनने को मिल जाती है हमारी बहु बेटियां ईब किसे तै कम कोन्या। अब बाजार भी साथ, सरकार भी साथ महिलाओं के उत्पाद केवल गांव तक सीमित न रहें, इसके लिए सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश में 13 सांझा बाजार संचालित किए जा रहे हैं, जहां स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री होती है। इसके अलावा 420 मिशन कैंटीन और 18 बस अड्डों पर 20 दुकानें महिलाओं के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध करा रही हैं। डिजिटल प्लेटफार्म, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण और बैंकिंग सुविधाओं ने भी महिलाओं के कारोबार को नई पहचान दी है। अब गांव की बहु बेटियां मोबाइल पर आर्डर ले रही हैं और अपने उत्पादों को दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचा रही हैं। नंबर गेम प्रदेश में महिला ग्राम संगठन : 5300 महिला स्वयं सहायता समूह : 63,000 समूहों से जुड़े परिवार : 6.21 लाख क्लस्टर लेवल फेडरेशन : 270 सांझा बाजार : 13 मिशन कैंटीन : 420 18 बस अड्डों पर संचालित दुकानें : 20 लखपति दीदी : 58,000 से अधिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूरजभान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को बेहतर बाजार, डिजिटल प्लेटफार्म और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत महिलाएं ही होंगी। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरा गांव विकास की राह पर आगे बढ़ता है।  

हरियाणा HTET Exam विवादों में, पेपर में मुहावरे पूछने और अंग्रेजी-गणित की गलतियों पर बवाल

लुधियाना. हरियाणा में रविवार को हुए HTET एग्जाम में गंभीर गड़बड़ियों की बात सामने आई है। आरोप है कि एग्जाम के दौरान गलत OMR शीट, गलत क्वेश्चन पेपर, बिना सील वाले पेपर और क्वेश्चन पेपर में गंभीर गलतियां जैसी शिकायतें सामने आई हैं।   बिना मुहावरे के मतलब पूछा गया कुछ मामलों में मुहावरे गायब थे और उनके मतलब सीधे पूछे गए थे, जबकि कुछ में मैथ के सवालों में हिंदी और इंग्लिश के अंकों में अंतर दिखा।  इंग्लिश के पेपर में ऐसे सवाल थे जिनका रेफरेंस पैराग्राफ पेपर में था ही नहीं।  क्वेश्चन पेपर और OMR शीट के सीरियल नंबर अलग कैथल में क्वेश्चन पेपर और OMR शीट के सीरियल नंबर अलग-अलग पाए गए, जबकि रेवाड़ी में बिना सील के क्वेश्चन पेपर बांटे गए।  कुछ सेंटर्स पर कम क्वेश्चन पेपर मिले, और कई कैंडिडेट्स को उनके तय सब्जेक्ट के बजाय दूसरे सब्जेक्ट के क्वेश्चन पेपर दे दिए गए। इस अफरा-तफरी के कारण एक सेंटर पर कैंडिडेट्स ने एग्जाम का बॉयकॉट भी कर दिया। आज जारी होगी आंसर की रविवार को, हरियाणा टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (HTET) के दूसरे दिन, लेवल 1 (PRT) और लेवल 2 (TGT) एग्जाम पूरे राज्य में शांति से और कड़ी सुरक्षा के बीच हुए। एग्जाम के सफल आयोजन के बाद, हरियाणा बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजुकेशन के चेयरमैन शंकर धूपर ने कैंडिडेट्स को एक बड़ा अपडेट देते हुए कहा कि आंसर की सोमवार, 6 जुलाई को जारी की जाएंगी। बोर्ड चेयरमैन ने बताया कि एग्जाम रविवार को दो अलग-अलग सेशन में हुआ। सुबह का सेशन, सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक, लेवल 2 (TGT) के लिए था, जिसमें सबसे ज़्यादा कैंडिडेट्स आए। शाम का सेशन, दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक, लेवल 1 (PRT) के लिए था। सुबह और शाम के सेशन मिलाकर कुल 162,000 से ज़्यादा कैंडिडेट्स ने एग्जाम दिया।

Panchkula Murder Case: आरोपियों के सिर मुंडवाने पर कोर्ट सख्त, पुलिस कमिश्नर से तलब किया जवाब

पंचकूला. पिंजौर में चर्चित हत्या मामले के चार आरोपितों को नंगे पैर और मुंडे सिर के साथ सार्वजनिक रूप से बाजार में घुमाने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। घटना के करीब एक माह बाद कालका अदालत ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए इसे पंचकूला के सत्र न्यायाधीश के संज्ञान में लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पंचकूला के पुलिस आयुक्त (सीपी) को भी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। मामला छह जून का है, जब पिंजौर में जितेश मनोचा हत्याकांड के चार आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद बाजार में पैदल घुमाया था। आरोपियों के सिर मुंडे हुए थे और उनके पैरों में चप्पल या जूते भी नहीं थे। यह परेड पिंजौर के व्यस्त बाजार से कराई गई थी, जिसके वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई थीं। घटना को लेकर मानवाधिकारों और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे थे। हिरासत में प्रताड़ना के आरोप भी जांच के दायरे में आठ जून को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी रोहित मेहता की ओर से अधिवक्ता दीपांशु बंसल ने अदालत में पक्ष रखा कि आरोपितों को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया। अदालत के समक्ष मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि आरोपियों के शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए हैं। रिपोर्ट में विभिन्न हिस्सों में चोटें दर्ज होने का भी उल्लेख किया गया। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि हिरासत में प्रताड़ना और सार्वजनिक परेड की घटनाएं आपस में जुड़ी हैं तो उनकी संयुक्त जांच की जाए, अन्यथा दोनों मामलों की अलग-अलग जांच कराई जाए। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए। हत्या के बाद हुई थी कार्रवाई पुलिस ने छह जून को जितेश मनोचा हत्याकांड में चार आरोपित मनप्रीत सिंह उर्फ मणि, रोहित मेहता उर्फ विक्की, मनीष कुमार और खुशदीप सिंह उर्फ दीपी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद इन्हें पिंजौर बाजार में पैदल ले जाया गया था। इसी कार्रवाई को लेकर अब न्यायिक स्तर पर सवाल उठे हैं। अदालत के ताजा आदेश के बाद अब सभी की नजरें पुलिस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट होगा कि सार्वजनिक परेड और हिरासत के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया कानून और मानवाधिकारों के अनुरूप थी या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

राष्ट्र की एकता और अखंडता के महान पुरोधा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धापूर्वक नमन

चंडीगढ़  भारत के महान राष्ट्र नायकों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम अत्यंत सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वे केवल एक प्रखर शिक्षाविद्, दूरदर्शी राजनेता और कुशल प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले एक युगपुरुष थे। उनका सम्पूर्ण जीवन हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई, 1901 को एक संभ्रांत परिवार में हुआ था। महानता के सभी गुण उन्हें विरासत में मिले थे। उनके पिता आशुतोष बाबू अपने जमाने के प्रख्यात शिक्षाविद् थे। वे 24 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय सीनेट के सदस्य बने। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कर्मक्षेत्र के रूप में 1939 से राजनीति में भाग लिया और आजीवन इसी में लगे रहे। उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में देश के औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। किंतु जब राष्ट्रहित के मूल्यों से समझौता करने की स्थिति आई, तब उन्होंने सिद्धान्तों के लिए अपने पद का त्याग करना उचित समझा। यह उनके उच्च आदर्शों और अटूट राष्ट्रहित का अनूठा प्रमाण है। डॉ. मुखर्जी ने सदैव एक सशक्त, समरस और आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा। उनका विश्वास था कि देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि है तथा इसके साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता। जम्मू कश्मीर के सन्दर्भ में उनका ऐतिहासिक संदेश 'एक देश में दो विधान, दो प्रथम और दो निशान नहीं चलेंगे। केवल एक ही नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का उद्घोष था। इसी उद्देश्य के लिए उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान देकर राष्ट्रसेवा की एक अमर मिसाल स्थापित की। आज विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते हुए हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों से निरन्तर प्रेरणा प्राप्त करते हैं। एक मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी को स्वतंत्र भारत की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने वाली सबसे सफल चार परियोजनाओं की शुरुआत करने का श्रेय जाता है। वर्ष 1948 में, पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में स्वचालित इंजन कारखाने की शुरुआत हुई जिसमें वर्ष 1950 में 'देशबंधु नाम से एसेंबल किये गए पार्ट्स से देश के प्रथम भारतीय स्वचालित इंजन का निर्माण किया गया। डॉ. मुखर्जी ने हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट फैक्ट्री को लिमिटेड कंपनी के रूप में पुनर्गठित किया, जिसने शानदार काम करते हुए इंडियन एयरफोर्स के लिए जेट एयरक्राफ्ट की असेंबलिंग की। नागरिक तथा रक्षा उद्देश्यों के प्रशिक्षण के लिए एचटी-2 का, भारतीय रेलवे के लिए 'स्टील रेल कोच' का, तथा विभिन्न राज्यों तथा निजी परिवहन प्राधिकरण के लिए बसों के बाहरी ढांचे का निर्माण किया गया। इस प्रकार, डॉ. मुखर्जी के कुशल और योग्य नेतृत्व में 1947-48 तथा 1948-49 में विश्वयुद्ध के दौरान हुई क्षति को लाभ में बदल दिया गया। कंपनियों का विक्रय 1949-50 में लगभग 2 करोड़ रुपये तक हो गया। उस समय हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट कारखाने द्वारा निर्मित भारतीय रेलवे के नये मॉडल थर्ड क्लास कोच का निर्माण सही मायने में डॉ. मुखर्जी की व्यक्तिगत रूचि का ही परिणाम था। डॉ. मुखर्जी भारतीय एकता, सुशासन और आत्मनिर्भर के प्रबल समर्थक थे। यद्यपि हरियाणा का गठन उनके निधन के बाद हुआ है। फिर भी उनके राष्ट्रवादी विचारों और नीतिगत दृष्टिकोण ने ऐसे भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की जिसने हरियाणा सहित पूरे देश के विकास की दिशा को प्रेरित किया। उन्होंने कृषि, उद्योग, शिक्षा और राष्ट्रीय एकीकरण को देश की प्रगति का आधार माना। हरियाणा आज कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास, खेल और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। डॉ. मुखर्जी का मानना था कि विकास का लाभ पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उनके विचार, पारदर्शी प्रशासन, मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था और जन-कल्याणकारी नीतियों को बढ़ावा देते हैं। हरियाणा सरकार ऐसी महान विभूति के आदर्शों का अनुसरण कर रही है। आज हरियाणा में आधुनिक सड़कें, नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और निवेश को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां उसी समावेशी और विकासोन्मुख सोच को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही हैं। उनके आदर्श आज भी हरियाणा को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना 01.04.2017 से शुरू की गई हैं। इस योजना के तहत उन व्यक्तियों को कवर किया जाता है, जो हरियाणा के स्थाई निवासी हों तथा हरियाणा में रह रहें हैं और जिन द्वारा प्रधान मन्त्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत पंजीकरण नहीं करवाया गया है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना के तहत एक लाख रुपये की राशि का लाभ दिया जाता है 18 से 70 वर्ष तक की आयु के व्यक्ति को इस योजना के तहत कवर किया जाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश ने राष्ट्रीय एकता, सुशासन, आत्मनिर्भरता और जनकल्याण के अनेक ऐतिहासिक आयाम स्थापित किए हैं। यह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों के भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है। उनके जन्म दिवस पर मैं उन्हें अपनी ओर से नमन करता हूं जो एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे। उन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। सार्वजनिक जीवन में उनका अटूट विश्वास, साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। हम उनके द्वारा संजोए गए सेवा मूल्यों के मार्गदर्शन में एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा