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धान कटाई के बाद आलू की खेती पर फोकस, कुफरी ज्योति और पुखराज जैसी किस्मों से मिलेगा फायदा

 करनाल  धान की कटाई के बाद खेतों को अगली फसल के लिए तैयार कर रहे किसानों के लिए आलू की खेती आमदनी बढ़ाने का विकल्प बन सकती है। अक्टूबर का महीना आलू की बुआई के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सही किस्म का चयन, प्रमाणित बीज, खेत की तैयारी, संतुलित खाद और पानी का प्रबंधन भी फसल की सफलता तय करते हैं। किसानों को चाहिए कि वे अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और फसल की अवधि के अनुसार किस्म चुनें तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह से बुआई करें। 34 हजार हेक्टेयर में 8,16,000 एमटी उत्पादन का लक्ष्य बागवानी विभाग के मुताबिक इस बार 34 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती और 8,16,000 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। ये आंकड़े बताते हैं कि आलू प्रदेश की सब्जी उत्पादन व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मैदानी क्षेत्रों में 25 अक्टूबर तक की जा सकती है बुआई मैदानी क्षेत्रों में आलू की अगेती बुआई के लिए अक्टूबर का मध्य से अंतिम सप्ताह महत्वपूर्ण माना जाता है। सामान्य कृषि सलाह के अनुसार 10 से 25 अक्टूबर के बीच बुआई की जा सकती है। पछेती बुआई के लिए नवंबर के पहले पखवाड़े तक का समय उपयोगी हो सकता है, लेकिन किस्म, क्षेत्र और मौसम के अनुसार समय में बदलाव जरूरी है। करनाल और आसपास के किसानों को खेत में पर्याप्त नमी, मिट्टी के तापमान और मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। कौन-सी किस्में चुनें आलू की किस्म का चयन उत्पादन व बाजार की मांग को ध्यान में रखकर करना चाहिए। प्रदेश में कुफरी ज्योति, कुफरी पुखराज, कुफरी बहार और कुफरी चंद्रमुखी जैसी किस्मों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, किस्मों की अवधि, रोगों के प्रति संवेदनशीलता, कंद का आकार और बाजार में उपयोग अलग-अलग हो सकता है। ऐसे करें बुआई, तभी मिलेगा बेहतर उत्पादन आलू की अच्छी फसल के लिए खेत की तैयारी पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। खेत की मिट्टी भुरभुरी और जल निकासी वाली होनी चाहिए। खेत में पानी रुकने से कंद सड़ने और रोग लगने का खतरा बढ़ सकता है। बुआई के लिए स्वस्थ, रोगमुक्त और प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करें। आलू का फसल में पछेती झुलसा जैसे रोग नुकसान पहुंचा सकते हैं। बिना रोग की पहचान के कीटनाशक या फफूंदनाशक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। प्रमाणित बीज, सही बुआई समय, मिट्टी की जांच और संतुलित पोषण से बेहतर मुनाफे की संभावना बढ़ाई जा सकती है। – डा. मनोज भानुकर, डिप्टी डायरेक्टर आलू प्रौद्योगिकी संस्थान करनाल।

चंडीगढ़-हरियाणा में सरकारी खजाने से करोड़ों की हेराफेरी, 94 करोड़ रुपये ठिकाने लगाने का आरोप

चंडीगढ़  हरियाणा के विभिन्न विभागों, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट सोसायटी में 700 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई ने सोमवार को चार और आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनमें सेक्टर-35 के बर्तन कारोबारी गौरव कांसल के अलावा सिद्धार्थ नरूला, मोहित और मनोज शामिल हैं। चारों को पंचकूला की सीबीआई अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन के रिमांड पर भेजा है। सीबीआई के अनुसार, गौरव ने सरकारी खातों से निकाली गई रकम को कैश में बदलने और उसे दोबारा बैंक खातों में जमा कराने में अहम भूमिका निभाई। दो वर्षों के दौरान उसने आइडीएफसी बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर और मामले के कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि के साथ मिलकर 94 करोड़ रुपये ठिकाने लगाए। एजेंसी का आरोप है कि आरोपितों ने गिरोह की तरह काम किया। अब जांच की जा रही है कि रकम किन लोगों तक पहुंची और उससे कहां संपत्ति खरीदी गई। सीबीआई के मुताबिक, छह दिसंबर 2023 से पांच दिसंबर 2025 के बीच जाली कंपनियों आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से भारत डिस्ट्रिब्यूटर्स के खाते में 82 लेन-देन के जरिए 26.78 करोड़ रुपये भेजे गए। इसके बदले 66 लेन-देन के माध्यम से 25.18 करोड़ रुपये वापस भेजे गए। एजेंसी का आरोप है कि इस लेन-देन के बदले कैश भी दिया गया। सरकारी खातों से निकाली गई रकम को सीधे खर्च करने के बजाय कई बैंक खातों से घुमाकर कैश में बदला जाता था, ताकि स्रोत और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना मुश्किल हो। सीबीआई के अनुसार, प्रक्रिया का संचालन रिभव ऋषि के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कार्यालय से होता था। गौरव कैश कन्वर्टर के तौर पर काम करता था। उसके एक चचेरे भाई की भूमिका की भी जांच हो रही है। सीबीआई के मुताबिक, गौरव ने 140 से अधिक लेन-देन के जरिए रिभव ऋषि के लिए सरकारी धन ठिकाने लगाया और कैश कन्वर्टर्स तक करीब 94 करोड़ रुपये पहुंचाए। नगर परिषद कालका के 18 करोड़ और आइएएस के बेटे तक हवाला सबसे सनसनीखेज खुलासा 20 जनवरी 2026 का है। एमसी कालका के खाते से 18.46 करोड़ रुपये उड़ाए गए। इसमें से 4 करोड़ रुपये एसआरआर प्लानिंग गुरुज के आरबीएल खाते में गए, जिसने उसी दिन 2.50 करोड़ रुपये मेगा स्टोर को भेज दिए। 21 और 22 जनवरी को स्वास्तिक ने 80 लाख और 1.10 करोड़ रुपये और भेजे। 22 जनवरी 2026 को रिभव ऋषि के कहने पर मोहित गोयल ने अपने स्टोर और अपने जानकारों के जरिए 2 करोड़ रुपये कैश का इंतजाम किया। यही 2 करोड़ रुपये उसी शाम हवाला चैनल से दिल्ली में आरोपित आइएएस आरके सिंह के बेटे तक पहुंच गए। इस तरह कालका नगर परिषद का सरकारी पैसा 48 घंटे के अंदर कैश बनकर एक लोकसेवक तक पहुंच गया। सरकारी खजाने के 59.50 करोड़ डकारे वहीं गिरफ्तार तीसरा आरोपित सेक्टर-32डी में एससीओ 357 में संचालित चंडीगढ़ मेगा स्टोर का मालिक मोहित गोयल है। आरोपित सेक्टर-37बी का रहने वाला है। सीबीआइ के मुताबिक, मोहित गोयल जानता था कि आरएस ट्रेडर्स और कैपको फिनटेक सर्विसेज, रिभव ऋषि की फर्में हैं। आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि ने ही उसके स्टोर का खाता खुलवाया था। 11 अक्टूबर 2023 से 28 जनवरी 2026 के बीच आरोपित फर्मों आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक, स्वास्तिक देश और एसआरआर प्लानिंग गुरुज ने मोहित गोयल और उसकी दो फर्मों -चंडीगढ़ मेगा स्टोर और भगवती एजेंसीज को 112 बार में 59 करोड़ 50 लाख 47 हजार 515 रुपये भेजे। बदले में उसने सिर्फ 14 करोड़ 5 लाख 24 हजार रुपये ही बैंक से वापस भेजे।

हरियाणा में ₹700 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला, CBI की कार्रवाई में 4 और गिरफ्तार

चंडीगढ़. हरियाणा के विभिन्न विभागों, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट सोसायटी में 700 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई ने सोमवार को चार और आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनमें सेक्टर-35 के बर्तन कारोबारी गौरव कांसल के अलावा सिद्धार्थ नरूला, मोहित और मनोज शामिल हैं। चारों को पंचकूला की सीबीआई अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन के रिमांड पर भेजा है। सीबीआई के अनुसार, गौरव ने सरकारी खातों से निकाली गई रकम को कैश में बदलने और उसे दोबारा बैंक खातों में जमा कराने में अहम भूमिका निभाई। दो वर्षों के दौरान उसने आइडीएफसी बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर और मामले के कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि के साथ मिलकर 94 करोड़ रुपये ठिकाने लगाए। एजेंसी का आरोप है कि आरोपितों ने गिरोह की तरह काम किया। अब जांच की जा रही है कि रकम किन लोगों तक पहुंची और उससे कहां संपत्ति खरीदी गई। सीबीआई के मुताबिक, छह दिसंबर 2023 से पांच दिसंबर 2025 के बीच जाली कंपनियों आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से भारत डिस्ट्रिब्यूटर्स के खाते में 82 लेन-देन के जरिए 26.78 करोड़ रुपये भेजे गए। इसके बदले 66 लेन-देन के माध्यम से 25.18 करोड़ रुपये वापस भेजे गए। एजेंसी का आरोप है कि इस लेन-देन के बदले कैश भी दिया गया। सरकारी खातों से निकाली गई रकम को सीधे खर्च करने के बजाय कई बैंक खातों से घुमाकर कैश में बदला जाता था, ताकि स्रोत और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना मुश्किल हो। सीबीआई के अनुसार, प्रक्रिया का संचालन रिभव ऋषि के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कार्यालय से होता था। गौरव कैश कन्वर्टर के तौर पर काम करता था। उसके एक चचेरे भाई की भूमिका की भी जांच हो रही है। सीबीआई के मुताबिक, गौरव ने 140 से अधिक लेन-देन के जरिए रिभव ऋषि के लिए सरकारी धन ठिकाने लगाया और कैश कन्वर्टर्स तक करीब 94 करोड़ रुपये पहुंचाए। नगर परिषद कालका के 18 करोड़ और आइएएस के बेटे तक हवाला  सबसे सनसनीखेज खुलासा 20 जनवरी 2026 का है। एमसी कालका के खाते से 18.46 करोड़ रुपये उड़ाए गए। इसमें से 4 करोड़ रुपये एसआरआर प्लानिंग गुरुज के आरबीएल खाते में गए, जिसने उसी दिन 2.50 करोड़ रुपये मेगा स्टोर को भेज दिए। 21 और 22 जनवरी को स्वास्तिक ने 80 लाख और 1.10 करोड़ रुपये और भेजे। 22 जनवरी 2026 को रिभव ऋषि के कहने पर मोहित गोयल ने अपने स्टोर और अपने जानकारों के जरिए 2 करोड़ रुपये कैश का इंतजाम किया। यही 2 करोड़ रुपये उसी शाम हवाला चैनल से दिल्ली में आरोपित आइएएस आरके सिंह के बेटे तक पहुंच गए। इस तरह कालका नगर परिषद का सरकारी पैसा 48 घंटे के अंदर कैश बनकर एक लोकसेवक तक पहुंच गया। सरकारी खजाने के 59.50 करोड़ डकारे वहीं गिरफ्तार तीसरा आरोपित सेक्टर-32डी में एससीओ 357 में संचालित चंडीगढ़ मेगा स्टोर का मालिक मोहित गोयल है। आरोपित सेक्टर-37बी का रहने वाला है। सीबीआइ के मुताबिक, मोहित गोयल जानता था कि आरएस ट्रेडर्स और कैपको फिनटेक सर्विसेज, रिभव ऋषि की फर्में हैं। आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि ने ही उसके स्टोर का खाता खुलवाया था। 11 अक्टूबर 2023 से 28 जनवरी 2026 के बीच आरोपित फर्मों आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक, स्वास्तिक देश और एसआरआर प्लानिंग गुरुज ने मोहित गोयल और उसकी दो फर्मों -चंडीगढ़ मेगा स्टोर और भगवती एजेंसीज को 112 बार में 59 करोड़ 50 लाख 47 हजार 515 रुपये भेजे। बदले में उसने सिर्फ 14 करोड़ 5 लाख 24 हजार रुपये ही बैंक से वापस भेजे।

CM नायब सैनी का बड़ा फैसला, हरियाणा के परिवारों को कम कीमत पर मिलेगी सोलर सुविधा

 हिसार दीपावली पर्व पर अंत्योदय परिवार को खुशखबरी मिल सकती है। मात्र पांच हजार रुपये में घर की छत पर सोलर पैनल लगवा सकते हैं। बाकी खर्चा केंद्र व हरियाणा सरकार मिलकर उठाएंगे। खास बात यह है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसके लिए मंजूरी दे दी है। वित्त विभाग ने भी मुहर लगाकर फाइल को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को भेज दी है। आने वाले 20 दिन के अंदर अंत्योदय परिवार को खुशखबरी मिल सकती है। दूसरी खास बात है कि सोलर पैनल बिजली निगम की संबंधित शाखा लगाकर देगी, जिसमें वे खुद वेंडर्स से संपर्क कर अंत्योदय परिवार को योजना का लाभ दिलवाएंगे। अंत्योदय परिवार को सिर्फ अपने दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करवाने होंगे। जिसके बाद संबंधित शाखा के अधिकारी उस आवेदन की मानिटरिंग कर कार्य को गति देंगे। ताकि पोर्टल पर आवेदन का पता रहे कि आवेदन किस चरण में पहुंचा है और कितने दिन में योजना का लाभ मिलेगा। नॉन रिफंडेबल होंगे पांच हजार रुपये उपरोक्त योजना के तहत जैसे ही अंत्योदय परिवार दस्तावेज प्रक्रिया पूरी कर लेता है। तो एसडीओ व एक्सईएन की जिम्मेदारी रहेगी कि वे अंत्योदय परिवार को पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर पैनल का लाभ पहुंचाए। इससे पहले अंत्योदय परिवार को मात्र पांच हजार रुपये का टोकन लेना होगा, जिसे दिखाकर बिजली निगम की विशेष टीम घर की छत पर सोलर पैनल लगाएगी। अंत्योदय परिवार को वेंडर्स से संपर्क करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अभी तक हिसार सर्कल में साढ़े आठ हजार उपभोक्ताओं ने उठाया लाभ पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के हिसार जिले में 8150 उपभोक्ता संबंधित योजना का लाभ उठा चुके हैं। जबकि साढ़े तेरह हजार से अधिक आवेदन पहुंचे हैं। साढ़े पांच हजार से अधिक आवेदन लटके हैं। 13,200 उपभोक्ताओं ने वेंडरों को सेलेक्ट कर लिया है। हिसार प्रथम डिविजन में करीब 4400 व हिसार द्वितीय डिविजन में करीब 3100 उपभोक्ताओं ने उपरोक्त योजना का लाभ उठाया है। यह है पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसे 15 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था। देश के एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल (रूफटाप सोलर) लगाकर उन्हें हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना है। लाभार्थी को एक किलोवाट क्षमता वाले सोलर पैनल पर 30 हजार रुपये, दो किलोवाट क्षमता पर 60 हजार रुपये व तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले सोलर पैनल पर 78 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है। अंत्योदय परिवार के लिए मानक     – परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख से कम हो     – जिस परिवार के पास जमीन न हो     – विशेष रूप से पिछड़े जनजाति के लोग     – विधवाएं, वृद्ध व्यक्ति और दिव्यांगजन, असंगठित क्षेत्र के दैनिक मजदूर (रिक्शा चालक, कुली, रेहड़ी-पटरी वाले) व पारंपरिक ग्रामीण कारीगर (कुम्हार, बढ़ई, बुनकर, लोहार) शामिल हैं।     अंत्योदय परिवार को मात्र पांच हजार रुपये में पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ मिल सकेगा। सीएम ने मंजूरी दे दी है। आगामी कार्रवाई के लिए फाइल को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को भेजी है। अगले 25 दिन से पहले योजना जमीन पर उतर जाएगी।     – विक्रम सिंह, प्रबंध निदेशक, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम  

सोशल मीडिया से मिली पहचान, नवरात्रि में मनदीप ने जीती 50 लाख की लॉटरी

सरदूलगढ़   हरियाणा के सिरसा जिले की रानियां तहसील के गांव सुल्तानपुरिया निवासी मनदीप सिंह ने लॉटरी में 50 लाख रुपये जीते हैं। इसके साथ ही मनदीप लखपति बन गया। हालांकि, लॉटरी निकलने के बाद शुरुआत में विजेता की पहचान नहीं हो पाई थी। इसके बाद लॉटरी सेंटर की ओर से इंटरनेट मीडिया पर वीडियो साझा कर लोगों से इसे अधिक से अधिक शेयर करने की अपील की गई, ताकि जीत की खबर संबंधित व्यक्ति तक पहुंच सके। सोमवार को विजेता मनदीप सिंह की पहचान हुई और उन्होंन गौरव लॉटरी सेंटर के संचालक से मुलाकात की। हेमराज ने भी जीता 21 लाख  वहीं, इससे पहले रूपनगर के कीरतपुर साहिब में पीर साईं बुढ़ण शाह जी की दरगाह के पास लंबे समय से फड़ी लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले बुजुर्ग हेमराज की किस्मत अचानक चमक गई थी। हेमराज की महज 50 रुपये की लाटरी टिकट ने उसे 21 लाख रुपये की इनामी राशि जितवा दी। लॉटरी निकलने की खबर मिलते ही हेमराज और उनके परिवार में खुशी का माहौल है। लंबे समय से आर्थिक तंगी में परिवार का गुजारा करने वाले हेमराज के लिए यह इनाम किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है। हेमराज दरगाह के पास कपड़े आदि की फड़ी लगाकर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। विदेश में नहीं चमकी किस्मत, लॉटरी ने बना दी करोड़पति वहीं, बटाला के गांव वडाला ग्रंथियां का कवलजीत सिंह कर्ज लेकर विदेश गया था, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया था। मां पिंदरजीत कौर के नाम पर खरीदी लॉटरी ने उसे करोड़पति बना दिया। कवलजीत सिंह ने बताया कि वह कर्ज लेकर मस्कट गया था। वह अकसर लॉटरी की टिकट खरीद कर स्टॉल पर ही रख जाता था। सोमवार को भी स्टॉल पर ही टिकट खरीद कर रख गया था। रात आठ बजे ड्रा निकला तो उसका एक करोड़ का इनाम निकल आया। इसके बाद फोन पर उसे सूचना दी गई।  

Gurugram Property Scam: एक PAN कार्ड से 25,000 प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन का मामला, 55 हजार करोड़ के लेनदेन की जांच

गुरुग्राम  हरियाणा के गुरुग्राम में संपतियों की खरीद के बाद रजिस्ट्रेशन में बड़ा खेल सामने आया है. बादशाहपुर तहसील में आयकर विभाग के सर्वेक्षण के दौरान लगभग 25,000 संपत्तियों के रिकॉर्ड में विसंगतियां पाए जाने के बाद 55,000 करोड़ रुपये के सौदे जांच के दायरे में आ गए हैं. इनमें पिछले दो वर्षों के दौरान जमीन की कई रजिस्ट्रियों में एक ही पैन नंबर के कथित इस्तेमाल की बात सामने आई है. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।  अधिकारी ने बताया कि भारी मूल्य वाले संपत्ति सौदों में विसंगतियों की जांच के लिए आयकर विभाग, चंडीगढ़ के निदेशक (जांच एवं आपराधिक खुफिया जानकारी) ने सात सदस्यीय टीम का गठन किया है, जो वर्तमान में बादशाहपुर तहसील कार्यालय में रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही है।  आयकर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, विभाग को लगभग 12,000 संपत्तियों से जुड़े 15,000 करोड़ रुपये के सौदों की कोई जानकारी नहीं मिली थी. अधिकारियों ने बताया कि जब लगभग 25,000 संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की गई, तो पता चला कि या तो इन सौदों की सूचना विभाग को नहीं दी गई थी या फिर गलत पैन दर्ज किए गए थे. इन संपत्तियों से जुड़े लगभग 55,000 करोड़ रुपये के सौदों में अनियमितताएं सामने आई हैं. विभाग विसंगतियों के वास्तविक दायरे का पता लगाने के लिए रिकॉर्ड का मिलान कर रहा है। गौर रहे कि हरियाणा में जब 30 लाख रुपये से ज़्यादा की प्रॉपर्टी डील्स होती है तो जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जानकारी देनी होती है और इसमें ‘स्टेटमेंट ऑफ़ फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन्स’ फाइल किया जाता है. हरियाणा सरकार ने मई 2026 तक का एसएफटी डाटा दिया है और इसमें खुलासा हुआ है. 140 तहसीलदारों ने समय से पहले अपने ‘स्टेटमेंट ऑफ़ फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन्स’ जमा कर दिए  थे और 120 ने डेडलाइन तक अपनी रिपोर्ट जमा की है।  

हरियाणा में बारिश से बदला मौसम, खेतों में जलभराव से किसान परेशान

अंबाला. हरियाणा के कई जिलों में रविवार रात बारिश हुई। अंबाला, रोहतक और कुरुक्षेत्र समेत कई जिलों में रिमझिम बारिश ने रविवार को मौसम का मिजाज बदल दिया। सुबह साढ़े 11 बजे से दोपहर साढ़े तीन बजे तक जिले में बारिश होती रही। अधिकतम तापमान सामान्य से सात डिग्री नीचे 25.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर ठंडक ऐसी रही कि घरों और कार्यालयों में कई जगह एसी ही नहीं, पंखे भी बंद रहे। दूसरी ओर, शहर और छावनी के कई इलाकों में जलजमाव से लोगों की परेशानी बढ़ी तो खेतों में खड़ी फसल को लेकर किसानों की चिंता भी गहरा गई। कई जिलों में बारिश से भीगी फसल: – बारिश के कारण सिरसा, डबवाली, कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर और करनाल समेत कई क्षेत्रों की मंडियों में पानी भर गया. छह जिलों की मंडियों में करीब 6.28 लाख टन धान भीगने की जानकारी सामने आई है. अंबाला की मंडियों में भी पानी भरने से लगभग 4 लाख क्विंटल धान प्रभावित हुआ. फसल भीगने से उसकी गुणवत्ता और खरीद को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है. कैथल और कुरुक्षेत्र में आवक का दबाव: प्रदेश के पांच जिलों में ही 14.17 लाख टन से अधिक धान मंडियों में पहुंच चुका है. कुरुक्षेत्र में सर्वाधिक 5.14 लाख टन आवक दर्ज की गई, जिसमें से 3.74 लाख टन की खरीद और 1.73 लाख टन का उठान हुआ. कैथल में 3.54 लाख टन आवक के मुकाबले 2.10 लाख टन की खरीद और 86 हजार टन का उठान हुआ. करनाल में 2.32 लाख टन, अंबाला में 2.31 लाख टन और फतेहाबाद में 86 हजार टन धान पहुंचा है. इन आंकड़ों से मंडियों पर बढ़ते दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है.

पेंशन विवाद में हाई कोर्ट पहुंचा सेवानिवृत्त शिक्षक, हरियाणा सरकार को देना होगा जवाब

चंडीगढ़  सेवानिवृत्त शिक्षक की पेंशन रोके जाने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ललित भारद्वाज का कहना है कि सेना में नियमानुसार नाम बदलने के बावजूद बीएड डिग्री में नाम के अंतर को लेकर उनके खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई। जांच में डिग्री सही पाई गई और पुलिस ने अदालत में रद्द करने की रिपोर्ट पेश की, फिर भी अप्रैल 2026 में उनकी पेंशन रोक दी गई। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ के समक्ष दायर याचिका में भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में 12 वर्ष से अधिक सेवा की। चिकित्सा आधार पर सेना से छुट्टी मिलने के बाद वह शिक्षा विभाग में शिक्षक नियुक्त हुए। सेना में रहते हुए वर्ष 1991 में उन्होंने नियमानुसार अपना नाम लाला राम से बदलकर ललित भारद्वाज किया था। यह बदलाव सेना के पार्ट-दो आदेश से अधिसूचित हुआ था। याचिकाकर्ता का आरोप याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्होंने शिक्षा विभाग में 20 वर्ष से अधिक सेवा की और उनका सेवा रिकॉर्ड बेदाग रहा। वह 13 अप्रैल 2022 से पीजीटी अंग्रेजी के पद पर पदोन्नत हुए और 31 दिसंबर 2024 को सेवानिवृत्त हुए। द्वितीय एसीपी लाभ की मांग विभाग ने स्वीकार नहीं की। बीएड डिग्री और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में नाम अलग होने के आरोप में 17 जनवरी 2026 को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। जांच के दौरान संबंधित विश्वविद्यालय ने डिग्री सही बताई। जांच अधिकारी ने तीन जुलाई 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष रद्द करने की रिपोर्ट पेश की। शिकायतकर्ता ने भी रिपोर्ट के निष्कर्षों से सहमति जताई थी। सरकार ने अदालत को क्या बताया? सरकार ने अदालत को बताया कि विभाग ने पुलिस रिपोर्ट के विरोध में आपत्ति याचिका दायर की है। शिकायतकर्ता का बयान विभाग की पूर्व अनुमति के बिना दिया गया था और उसे विभाग का आधिकारिक पक्ष नहीं माना जा सकता। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने दबाव डालकर उससे संतोषजनक रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कराए। मामला अदालत में विचाराधीन है और लोकायुक्त के समक्ष भी शिकायत लंबित है। सुनवाई में राज्य सरकार के वकील इस बात का खंडन नहीं कर सके कि 31 दिसंबर 2024 को सेवानिवृत्ति तक याचिकाकर्ता को कोई आरोपपत्र या कारण बताओ नोटिस जारी नहीं हुआ था। हाई कोर्ट ने आगे की दलीलों के लिए मामला 17 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया है।

धान की फसल भीगने से किसानों में रोष, हरियाणा के कृषि मंत्री के सामने जताया विरोध

करनाल. कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के गाड़ी में बैठते ही किसान नारेबाजी करने लगे। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ता और किसानों के बीच बहस हो गई। करनाल जिले की घरौंडा अनाज मंडी में धान की खरीद और नमी के नाम पर कटौती से नाराज किसानों ने रविवार को कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के सामने विरोध जताया। मंत्री के मार्केट कमेटी ऑफिस से गाड़ी में बैठते ही किसानों ने भाजपा मुर्दाबाद के नारे लगाए। किसानों का आरोप था कि वे तीन दिन से मंडी में धान बेचने के लिए बैठे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो रही। नमी के नाम पर प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपए तक काटे जा रहे हैं। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार का बचाव किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। तीन दिन से मंडी में बैठे, फिर भी नहीं बिक रही धान किसान गगनदीप, सोनू और अन्य किसानों ने कहा कि वे तीन दिन से धान बेचने के लिए मंडी में इंतजार कर रहे हैं। खरीद प्रक्रिया में देरी हो रही है। यदि धान खरीदी भी जाती है तो नमी का हवाला देकर प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपए तक काट लिए जाते हैं। भाजपा नेता और कार्यकर्ता मंडी में आकर फोटो खिंचवाते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। उनके मुताबिक, मंडी में राइस मिलर्स की संख्या कम है और खरीद एजेंसियां भी धान की ढेरियों तक समय पर नहीं पहुंच रही हैं। किसानों का दावा है कि 17 प्रतिशत नमी होने के बावजूद धान खरीद नहीं की जा रही। बारिश से बढ़ी चिंता, कम भाव मिलने का आरोप किसानों ने कहा कि पहले ही खरीद में देरी हो रही है और अब बारिश के कारण धान में नमी बढ़ने की आशंका है। इससे फसल बेचने में और परेशानी हो सकती है। करीब 2,000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर धान खरीदी जा रही है और नमी के नाम पर बड़ी कटौती की जा रही है। गगसीना के एक किसान ने भी आरोप लगाया कि उसकी धान 2,200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी गई, जिससे उसे नुकसान हुआ। किसानों ने कहा कि अधिकारियों और नेताओं को कार्यालयों में बैठकर स्थिति का आकलन करने के बजाय मंडियों में पहुंचकर खरीद व्यवस्था की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए। नमी के नाम पर कटौती का तय फार्मूला बनाने की मांग किसान नेता जगदीप औलख ने कहा कि धान की खरीद में आ रही दिक्कतों और नमी के नाम पर की जा रही कटौती की जानकारी मंत्रियों और अधिकारियों को है। घरौंडा मंडी में राइस मिलर्स की कमी के कारण भी खरीद प्रभावित हो रही है। 20 प्रतिशत तक नमी वाली धान में नियमानुसार कटौती करीब 75 रुपए प्रति क्विंटल बनती है, जबकि आरोप है कि किसानों से 250 से 300 रुपए तक काटे जा रहे हैं। जब नमी निर्धारित सीमा से दो प्रतिशत अधिक हो तो कटौती के लिए स्पष्ट फार्मूला क्यों नहीं बनाया जाता। भाजपा कार्यकर्ता बोले- किसानों की धान खरीदी जा रही किसानों की नारेबाजी के बीच भाजपा कार्यकर्ता निशांत राणा, पवन ढाकला और संजय खैंची ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार निर्धारित मानकों के अनुसार किसानों की धान खरीद रही है। यदि कोई कम भाव पर फसल खरीद रहा है तो किसान लिखित शिकायत दें, ताकि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। कार्यकर्ताओं ने किसानों से खरीद प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतें सामने रखने को कहा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस होती रही। कृषि मंत्री बोले- बारिश और हड़ताल से प्रभावित हुई लिफ्टिंग कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कुछ मंडियों में लिफ्टिंग धीमी हुई है। इसके पीछे बारिश और राइस मिलरों की हड़ताल भी वजह है। अधिकारियों से बातचीत कर धान के उठान में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी फसल का पूरा भुगतान मिले और किसी किसान का एक दाना भी खरीद से वंचित न रहे। धान की खरीद के बाद चावल भारतीय खाद्य निगम (FCI) को दिया जाता है। ऐसे में खरीद, मिलिंग और उठान की प्रक्रिया निर्धारित व्यवस्था के तहत होती है। इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

हिसार को मिलेगी बड़ी सौगात, कचरे से बिजली बनाने के लिए लगेगा नया प्लांट

हिसार. हरियाणा के हिसार में कचरे से बिजली बनाने की योजना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के नजदीक ढंढूर गांव में प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के लिए ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (OGEL) की तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने जमीन का निरीक्षण किया है। इस परियोजना के तहत कचरे से 5 से 10 मेगावाट बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। दिल्ली से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने प्रस्तावित स्थल की स्थिति देखी और तकनीकी जानकारी जुटाई। इस दौरान नगर निगम की टीम भी एक्सईएन जयवीर डूडी के नेतृत्व में मौजूद रही। यह कार्रवाई निगमायुक्त सी. जयाश्रद्धा के मार्गदर्शन में की गई। जमीन की मिट्टी की होगी जांच, फिर आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट जमीन का निरीक्षण पूरा होने के बाद अब मिट्टी की जांच करवाई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्लांट की स्थापना से जुड़ी अगली तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। योजना के अनुसार, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद और भिवानी जिले के सिवानी क्षेत्र से आने वाले कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। इससे कई क्षेत्रों के ठोस कचरे के निस्तारण में मदद मिलने की उम्मीद है। 15 एकड़ जमीन मिली, कचरा प्रोसेसिंग के लिए ₹9.93 करोड़ का टेंडर प्रस्तावित परियोजना के लिए राजकीय पशुधन फार्म की 55 एकड़ भूमि में से 15 एकड़ जमीन लीज पर उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा कचरे की प्रोसेसिंग से जुड़े काम के लिए मेरठ की एक एजेंसी को 9.93 करोड़ रुपये का टेंडर दिया गया है। यह राशि कचरा प्रोसेसिंग के काम से संबंधित बताई गई है, इसे पूरे बिजली प्लांट की कुल लागत नहीं समझना चाहिए। जमीन का निरीक्षण करने पहुंची ओजीईएल की टीम ने निगमायुक्त सी. जयाश्रद्धा के साथ बैठक भी की। बैठक में परियोजना की तैयारियों और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। चिकनवास सब स्टेशन से जुड़ेगा प्लांट, बिछेगी 10 किलोमीटर लाइन प्रस्तावित प्लांट से तैयार होने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। योजना के मुताबिक, प्लांट को चिकनवास के 220 केवी सब स्टेशन से जोड़ा जाएगा। इसके लिए करीब 10 किलोमीटर लंबी 33 केवी बिजली लाइन बिछाने का प्रस्ताव है। एचवीपीएनएल के एक्सईएन सत्यप्रकाश के नेतृत्व में चिकनवास सब स्टेशन तैयार होने की जानकारी दी गई है। हिसार का यह वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट शुरू होने पर कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ बिजली उत्पादन में भी मदद मिल सकती है। फिलहाल परियोजना जमीन की जांच और तकनीकी तैयारियों के चरण में है। प्लांट के निर्माण और बिजली उत्पादन शुरू होने की निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है।