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Haryana Education: सरकारी स्कूलों में शुरू होगी रोबोटिक्स और AI शिक्षा, 391 लैब बनकर तैयार

 यमुनानगर  सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान की पढ़ाई किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। वे रोबोट बनाएंगे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) पर काम करेंगे, 3-डी प्रिंटर से माडल तैयार करेंगे और अपने आइडिया को तकनीक के जरिए हकीकत में बदलना सीखेंगे। क्योंकि प्रदेश के 391 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में इसी माह अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) शुरू हो रही है। इसके लिए स्कूलों में सामान पहुंच चुका है, वहीं मई में शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूल खुलते ही यह लैब क्रियान्वित की जा रही हैं। इससे सरकारी स्कूलों के हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा और नवाचार का मंच मिल सकेगा। अटल टिंकरिंग लैब की शुरुआत वर्ष 2018 में नीति आयोग ने अटल इनोवेशन मिशन के तहत की थी। उस समय निर्धारित मानकों के आधार पर प्रदेश के ज्यादातर निजी स्कूलों मं ही यह सुविधा मिल सकी थी, जबकि अधिकांश सरकारी स्कूल इससे वंचित रह गए थे। नीति आयोग की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने अपने संसाधनों से 391 सरकारी स्कूलों में 2026-27 के शैक्षणिक सत्र में अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने का निर्णय लिया। इसके लिए फरवरी से स्कूलों में लैब का सामान भेजना शुरू कर दिया गया था, जो अब लगभग सभी स्कूलों में पहुंच चुका है। साथ ही मई में शिक्षकों को लैब से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया गया। हिसार में सबसे ज्यादा 29 लैब, रोहतक में सबसे कम पांच सबसे ज्यादा हिसार के 29 स्कूलों में लैब स्थापित हो रही हैं। इसके बाद जींद व सिरसा में 26-26, यमुनानगर में 23, अंबाला, भिवानी व फतेहाबाद में 22-22, करनाल में 21, कैथल में 20, पानीपत व सोनीपत में 19-19, कुरुक्षेत्र, नूंह व पलवल में 17-17, महेंद्रगढ़ में 16 और गुरुग्राम में 15 लैब स्थापित होंगी। चरखी दादरी, पंचकूला व रेवाड़ी में 11-11, फरीदाबाद में 10 व झज्जर में नौ लैब हैं। सबसे कम पांच लैब रोहतक में हैं। नवाचार, वैज्ञानिक सोच व तकनीकी कौशल का होगा विकास जिला विज्ञान विशेषज्ञ विशाल सिंघल ने बताया कि जुलाई में लैब शुरू कराने का प्रयास है। इनमें छात्र-छात्राएं रोबोटिक्स, एआइ, 3-डी प्रिंटिंग, इलेक्ट्रानिक्स, सेंसर, माइक्रोकंट्रोलर व कोडिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। यात्री छात्र केवल सिद्धांत नहीं पढ़ेंगे, बल्कि मॉडल तैयार करेंगे, प्रोटोटाइप बनाएंगे व दैनिक जीवन की समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने का अभ्यास भी करेंगे। इससे विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच व तकनीकी कौशल का विकास होगा।

ज्वार और बाजरा खेती पर हरियाणा सरकार देगी सब्सिडी, किसानों के लिए नई योजना शुरू

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने ज्वार और बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (पोषक-अनाज) के तहत अनुदान योजना शुरू की है। योजना के तहत किसानों को प्रदर्शन प्लांट लगाने, प्रमाणित बीज खरीदने, पोषक तत्व प्रबंधन और पौध संरक्षण के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। योजना के लिए आवेदन 16 जून से शुरू हो चुके हैं। इसका लाभ लेने के लिए किसान हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इस योजना का उद्देश्य ज्वार और बाजरा का उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना है। इसके साथ ही सरकार बेहतर बीजों के इस्तेमाल और आधुनिक खेती को बढ़ावा देना चाहती है। यह योजना फिलहाल हरियाणा के भिवानी, गुरुग्राम, हिसार, झज्जर, जींद, महेंद्रगढ़, मेवात, रेवाड़ी, रोहतक और चरखी दादरी सहित 10 ज़िलों में लागू है। किन कामों पर मिलेगा अनुदान? खरीफ़ सीज़न में ज्वार और बाजरा के समूह प्रदर्शन प्लांट लगाने पर किसानों को 3,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता मिलेगी। एक किसान अधिकतम 5 एकड़ तक इसका लाभ ले सकता है। यानी अधिकतम 15000 रुपये का अनुदान ले सकता है। प्रत्येक क्लस्टर 25 एकड़ का होगा और एक ही किसान को लगातार दो वर्षों तक एक ही क्लस्टर में दोबारा लाभ नहीं मिलेगा। कृषि सामग्री खरीदने के बाद उसकी रसीद पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। योजना के तहत प्रमाणित बीज खरीदने पर भी अनुदान मिलेगा। 10 वर्ष से कम पुरानी किस्मों के बीज पर 3,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो), 10 वर्ष से अधिक पुरानी किस्मों के बीज पर 1,500 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) और संकर बीज पर 10,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) सहायता मिलेगी। इस मद में एक किसान अधिकतम 2.5 एकड़ तक लाभ ले सकता है। जिस किसान को एक बार सहायता मिल जाएगी, वह अगले दो वर्षों तक इसी मद में दोबारा सहायता नहीं ले सकेगा। पोषक तत्व और पौध संरक्षण पर भी मिलेगी सहायता सूक्ष्म पोषक तत्व, चूना, जिप्सम, सल्फर आधारित उर्वरक, जैव उर्वरक और अन्य मृदा सुधारकों की खरीद पर 1,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) अनुदान मिलेगा। इसी तरह पौध संरक्षण के लिए आईपीएम, जैव-कीटनाशक, पीपी रसायन और खरपतवारनाशकों की खरीद पर भी 1,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) सहायता दी जाएगी। इन दोनों मदों में एक किसान अधिकतम 5 एकड़ तक लाभ ले सकता है और सहायता मिलने के बाद अगले दो वर्षों तक उसी मद में दोबारा लाभ नहीं मिलेगा। योजना का लाभ लेने के लिए किसान 18 जुलाई 2026 तक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग वेबसाइट agriharyana. gov. in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कृषि सामग्री हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार की सिफ़ारिश के अनुसार सरकारी, अर्द्धसरकारी, सहकारी समिति या अधिकृत विक्रेता से खरीदनी होगी। योजना के दिशा-निर्देशों का पालन करना भी ज़रूरी होगा।

GI टैग से चमका हरियाणा का किन्नू, किसानों की आय बढ़ने की नई उम्मीद

सिरसा. हरियाणा के लिए गौरव की बात है क्योंकि सिरसा जिले का किन्नू अब वैश्विक पहचान के साथ बाजार में उतरेगा। सिरसा के किन्नू को GI टैग मिलना हरियाणा के किसानों, बागवानी क्षेत्र और प्रदेश की समृद्ध कृषि विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह सम्मान सिरसा के किन्नू को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने के साथ-साथ हमारे किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जानकारी के अनुसार सिरसा हरियाणा का सबसे बड़ा किन्नू उत्पादक क्षेत्र है। यहां करीब 13 हजार हेक्टेयर भूमि पर किन्नू के बाग लहलहा रहे हैं। जिला बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद के अनुसार, जिले में प्रतिवर्ष 1 लाख 80 हजार 508 मीट्रिक टन किनू का उत्पादन हो रहा है। जिले में सबसे ज्यादा किन्नू के बाग डबवाली खंड में लगे हुए हैं। विशेष नवायु और मिट्टी के कारण यहां का किन्नू चमकदार, रसीला और स्वादिष्ट होता है। क्या होता है GI टैग? यह टैग किसी उत्पाद की उस खास विशेषता, स्वाद या गुणवत्ता के लिए दिया जाता है जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र की बजह से होती है। यह उत्पाद को कानूनी संरक्षण देता है। हरियाणा के लिए गौरव  बता दें कि सिरसा के किन्नू को स्वतंत्र GI टैग मिला है। इससे पहले बासमती चावल के लिए हरियाणा और पंजाब को संयुक्त रूप से और फुलकारी के लिए संयुक्त टैग मिला हुआ है।

मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा, आशीष के अकाउंट में आए ₹16 लाख पर उठे सवाल

भिवानी. पहाड़ी माता मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच अब आर्थिक पहलुओं तक पहुंच गई है। पुलिस जांच में आरोपित आशीष के बैंक खाते में करीब 16 लाख रुपये जमा होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ में आरोपित इस राशि के स्रोत के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दे सका। इसके बाद पुलिस ने बैंक खाते से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच तेज कर दी है। साथ ही खाते को फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है, ताकि जांच पूरी होने तक राशि के संबंध में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि बैंक खाते में जमा राशि का मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण से कोई संबंध है या नहीं। इससे पहले पुलिस आरोपी की निशानदेही पर करीब 2.50 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण और चांदी के कई बर्तन बरामद कर चुकी है। अब जांच का केंद्र बैंक खाते, वित्तीय लेनदेन और संभावित आर्थिक कड़ियों पर आ गया है। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि आरोपित के खातों में धनराशि किन माध्यमों से पहुंची और क्या इस पूरे घटनाक्रम में अन्य लोगों की भी कोई भूमिका रही है।

ऑपरेशन के बीच युवक की मौत, हिसार के 4 डॉक्टरों पर लापरवाही का मामला दर्ज

बरवाला/हिसार. कस्बे के डा. अनंतराम जनता अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही के कारण आपरेशन के दौरान युवक नवदीप (31) की मौत हो गई। पता चलने पर स्वजन ने अस्पताल परिसर में हंगामा कर शव लेने से इन्कार कर दिया। सूचना मिलने पर बरवाला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और काफी देर तक स्वजन को समझाते रहे। मृतक के स्वजन लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाने की मांग पर अड़े रहे। पुलिस ने अस्पताल के चार चिकित्सकों के खिलाफ केस दर्ज किया। स्वजन ने उसके बाद शव उठाया। जानकारी के अनुसार गांव भैणी बादशाहपुर निवासी सुरेश चंद्र के बेटे नवदीप को पित्त की थैली में पथरी की शिकायत थी। नवदीप मुनीम का काम करता था। दर्द के चलते स्वजन उसे 29 जून को बरवाला के डॉ. अनंतराम जनता अस्पताल में लेकर आए। आरोप है कि चिकित्सक अनंतराम ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि उनके पास अनुभवी चिकित्सकों की पूरी टीम है। दूरबीन विधि से बेहतर उपचार करने का दावा किया उन्होंने दूरबीन विधि से बेहतर उपचार करने का दावा किया और कहा कि आपरेशन के महज दो घंटे बाद मरीज को छुट्टी दे दी जाएगी। पूरे उपचार के लिए 20 हजार लगेंगे। स्वजन ने नवदीप को 30 जून की सुबह 11 बजे अस्पताल में भर्ती कराया और रुपये जमा करवा दिए। शाम करीब साढ़े चार बजे नवदीप को आपरेशन थियेटर में ले जाया गया। ऑपरेशन टीम में डा. अनंत राम, डा. प्रवीण कुमार गोयल, डा. अभिषेक ढांडा और शिव कुमार कौशिक शामिल थे। स्वजन का आरोप है कि शाम करीब सात बजे चिकित्सकों ने उनसे अचानक दो यूनिट खून लाने को कहा। उन्हें तुरंत ब्लड सेंटर से खून लाकर दे दिया। कुछ देर बाद चिकित्सकों ने दोबारा दो यूनिट खून और फिर चार यूनिट प्लाज्मा मंगवाया। रात करीब 12 बजे चिकित्सकों ने फिर से दो यूनिट खून लाने को कहा, लेकिन जब स्वजन खून लेने जाने लगे, तो चिकित्सकों ने उन्हें रोक दिया। चिकित्सकों से क्या पूछा? जब चिकित्सकों से पूछा कि इतना खून क्यों लग रहा है और क्या कोई दिक्कत है, तो चिकित्सकों ने कहा कि सुबह तक बिल्कुल ठीक हो जाएगा, अभी बेहोशी की हालत में है। बुधवार तड़के ढाई बजे स्वजन को नवदीप की मौत का पता चला। जब पिता ने नवदीप के शव को देखा, तो सामने आया कि चिकित्सकों ने दूरबीन से उपचार करने की बात कहकर उसके पेट के दाहिनी तरफ बड़ा आपरेशन किया हुआ था। नवदीप की मौत के बाद स्वजन ने हंगामा कर दिया। मृतक के पिता सुरेश चंद ने आरोप लगाया है कि चिकित्सकों और लैब स्टाफ की लापरवाही के कारण ही उनके बेटे की जान गई है। उन्होंने पुलिस से चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और चिकित्सकों के एक विशेष बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की। बाद में पुलिस ने जब चिकित्सकों पर केस दर्ज किया तो स्वजन शव का पोस्टमार्टम करवाने पर राजी हुए। पीत की थैली में कई थी पथरियां डॉ. अनंतराम बरवाला ने कहा कि नवदीप के पेट में पीत की थैली में कई पथरी थी। अस्पताल के चिकित्सकों ने उसका आपरेशन शुरू किया। आपरेशन के दौरान पता चला कि पीत की थैली के पास काफी पस थी। जिस दूर करना था। पस को अलग करने का काम किया गया। इस दौरान काफी खून बहने लगा। युवक को कई यूनिट ब्लड चढ़ाई गई। हमें दुख है कि हम मरीज की जान को नहीं बचा पाए। बरवाला थाना प्रभारी दलबीर सिंह ने कहा कि अस्पताल में आपरेशन के बाद युवक की मौत के मामले में जांच जारी है। स्वजन के बयान पर डा. अनंतराम बरवाला समेत अन्य चिकिस्तकों पर केस दर्ज किया है।

आरटीई उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी, 22 जिलों में 687 स्कूलों की पहचान

 हिसार आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत सीटें न दिखाने वाले निजी स्कूलों पर शिक्षा निदेशालय की टेढ़ी नजर है। इस कड़ी में शिक्षा निदेशालय ने 22 जिलों के अंदर सर्वे कर 687 स्कूलों की पहचान की है, जोकि 3 साल से उच्च अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर शिक्षा के नाम पर दुकानें चला रहे थे। सर्वे रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि 687 स्कूलों के पास न मान्यता से संबंधित दस्तावेज मिले और न ही विशेष समयाविधि तक दाखिले करने के अधिकार से कोई संबंधित दस्तावेज मिले। जिस पर निदेशालय ने उपरोक्त स्कूलों से दाखिले की शक्ति छीनने का फैसला लिया है। साथ ही सभी उपायुक्त को भी पत्र जारी करने का फैसला लिया है, जोकि गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर आगामी कार्रवाई करेंगे। 413 निजी स्कूलों ने दिखाई 3 हजार सीटें प्रदेश में 1100 स्कूलों को सर्च किया था। जिनके पास मान्यता से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले थे। सरकार ने स्कूलों को दस्तावेज पूरे करने का समय दिया। जिस पर प्रदेश में 413 निजी स्कूलों ने मान्यता से संबंधित दस्तावेज पूरे कर दिया। साथ ही आरटीई के तहत 3 हजार सीटें भी दिखाई। जिसके बाद सरकार ने शेष 600 से अधिक स्कूलों पर कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए है। सरकार ने इस बार एक किलोमीटर का दायरा ही रखा है। जिसके दायरे में विद्यार्थी निजी स्कूल में उपरोक्त योजना के तहत आवेदन कर सकेगा। 6 जुलाई तक विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 भी जारी कर दिया है। किसी तरह की कोई शिकायत हो तो अभिभावक उपरोक्त हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज करवा सकता है। समस्या की ये सुनवाई करेगी कमेटी     पहले अभिभावक खंड स्तर पर गठित कमेटी में अपनी शिकायत रख सकते हैं।     जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी व डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी पर अपील लगा सकते हैं     इसके बाद भी समस्या का निदान नहीं हुआ तो संयुक्त निदेशक प्रशासनिक शाखा के पास शिकायत रख सकते हैं पंचकूला के मौलिक शिक्षा निदेशक मनिता मलिक ने कहा कि हमने प्रदेश के 687 निजी स्कूलों को जांचा है, जिनके पास मान्यता से संबंधित एक भी दस्तावेज नहीं मिले। समय देने पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए है। जिसके बाद अब एमआइएस पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। साथ ही डीसी को भी स्पष्ट कहा जाएगा कि वे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर कार्रवाई करें।  

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, 22 जिलों के 687 गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिले बंद

हिसार. आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत सीटें न दिखाने वाले निजी स्कूलों पर शिक्षा निदेशालय की टेढ़ी नजर है। इस कड़ी में शिक्षा निदेशालय ने 22 जिलों के अंदर सर्वे कर 687 स्कूलों की पहचान की है, जोकि 3 साल से उच्च अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर शिक्षा के नाम पर दुकानें चला रहे थे। सर्वे रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि 687 स्कूलों के पास न मान्यता से संबंधित दस्तावेज मिले और न ही विशेष समयाविधि तक दाखिले करने के अधिकार से कोई संबंधित दस्तावेज मिले। जिस पर निदेशालय ने उपरोक्त स्कूलों से दाखिले की शक्ति छीनने का फैसला लिया है। साथ ही सभी उपायुक्त को भी पत्र जारी करने का फैसला लिया है, जोकि गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर आगामी कार्रवाई करेंगे। 413 निजी स्कूलों ने दिखाई 3 हजार सीटें प्रदेश में 1100 स्कूलों को सर्च किया था। जिनके पास मान्यता से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले थे। सरकार ने स्कूलों को दस्तावेज पूरे करने का समय दिया। जिस पर प्रदेश में 413 निजी स्कूलों ने मान्यता से संबंधित दस्तावेज पूरे कर दिया। साथ ही आरटीई के तहत 3 हजार सीटें भी दिखाई। जिसके बाद सरकार ने शेष 600 से अधिक स्कूलों पर कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए है। सरकार ने इस बार एक किलोमीटर का दायरा ही रखा है। जिसके दायरे में विद्यार्थी निजी स्कूल में उपरोक्त योजना के तहत आवेदन कर सकेगा। 6 जुलाई तक विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 भी जारी कर दिया है। किसी तरह की कोई शिकायत हो तो अभिभावक उपरोक्त हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज करवा सकता है। समस्या की ये सुनवाई करेगी कमेटी पहले अभिभावक खंड स्तर पर गठित कमेटी में अपनी शिकायत रख सकते हैं। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी व डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी पर अपील लगा सकते हैं इसके बाद भी समस्या का निदान नहीं हुआ तो संयुक्त निदेशक प्रशासनिक शाखा के पास शिकायत रख सकते हैं पंचकूला के मौलिक शिक्षा निदेशक मनिता मलिक ने कहा कि हमने प्रदेश के 687 निजी स्कूलों को जांचा है, जिनके पास मान्यता से संबंधित एक भी दस्तावेज नहीं मिले। समय देने पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए है। जिसके बाद अब एमआइएस पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। साथ ही डीसी को भी स्पष्ट कहा जाएगा कि वे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर कार्रवाई करें।

हरियाणा में मानसून पहुंचा, कई जिलों में झमाझम बारिश; पूरे प्रदेश में जल्द छाने के आसार

हिसार हरियाणा में मानसून की एंट्री हो गई है। इस बार मानसून यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला की तरफ से आया है। मौसम विज्ञानियों ने पहले ही 48 घंटे में मानसून के आने का अलर्ट जारी किया था। अब मानसून के पूरे प्रदेश में जल्द से जल्द छाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। मौसम में बदलाव के साथ ही प्रदेश के तीन जिलों को छोड़ कर बाकी जगह पर प्री-मानूसन की वर्षा हुई। प्रदेश के 10 जिलों में वर्षा के साथ ही वीरवार को 20 जिलों में वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसून के 48 घंटे में एंट्री की संभावना व्यक्त की गई थी। मानसून की गति तेज होने के साथ ही इसकी हरियाणा में एंट्री यमुनानगर की तरफ से हुई। मानसून के साथ ही पहले दिन 23 एमएम यमुनानगर में वर्षा हुई। आइएमडी के विज्ञानियों की तरफ से इस साल वर्षा सामान्य से कम जताई जा रही है। अभी तक भी हरियाणा में सामान्य से 47 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। विज्ञानियों के अनुसार मानसून आने वाले दिनों में जल्द ही पूरे हरियाणा में छा जाएगा। मानसून के दौरान 2025 में 134 प्रतिशत हुई थी वर्षा 2025 में मानसून के दौरान 134 प्रतिशत वर्षा हुई थी। यह सामान्य से अधिक थी। जुलाई 2025 में ही यह वर्षा 173.7 एमएम थी। यह सामान्य से 17 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई थी। वर्षा का यलो अलर्ट पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, जींद, पानीपत, हिसार, भिवानी, सोनीपत, रोहतक, चरखी दादरी, झज्जर, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेवात व पलवल।  

गुरुग्राम में सबसे ज्यादा बदलाव, 56 हजार लोगों ने अपनाया पाइप्ड गैस कनेक्शन

चंडीगढ़ पश्चिम एशिया में हुए युद्ध संकट के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जारी निर्देश के बाद हरियाणा के शहरों से करीब सवा लाख उपभोक्ताओं ने एलपीजी रसोई गैस सिलिंडर की जगह पीएनजी कनेक्शन ले लिया है। करीब 34 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके आवेदन अभी गैस पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन के लिए लंबित हैं। कनेक्शन में बदलाव करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या गुरुगाम में सबसे अधिक (56 हजार) है। गुरुग्राम के अलावा पिछले तीन माह में फरीदाबाद, रेवाड़ी, सोनीपत में भी घर के पास गैस लाइन की उपलब्धता को देखते हुए लोगों ने एलपीजी रसोई गैस सिलिंडर को सरेंडर कर पीएनजी कनेक्शन लिया है। ऐसे उपभाक्ताओं को एजेंसी की ओर से सिलिंडर जमा करने के बाद एक फार्म बाउचर के साथ दिया है। इसका उपयोग लोग तब कर सकेंगे जब उन्हें वर्तमान पते को छोड़ दूसरे जिला में नया ठिकाना बनाना होगा और वहां पर पीएनजी की पाइप लाइन घर के पास उपलब्ध नहीं होगी। तब उन्हें इसी बाउचर पर वहां की गैस एजेंसी एलपीजी सिलिंडर के साथ नया कनेक्शन जारी कर देगी। बता दें कि केंद्र सरकार ने ही युद्ध संकट के चलते गैस आपूर्ति में आ रही बाधा के चलते अप्रैल माह में निर्देश जारी किए थे कि पीएनजी की उपलब्धता वाले शहर या क्षेत्र में एलपीजी सिलिंडर का उपयोग करने वाले लोग अपना पीएनजी कनेक्शन लेकर एलपीजी कनेक्शन बंद करा दें। इसके लिए उन्हें समय भी दिया गया था। लोगों को परेशानी नहीं हो इसके लिए पीएनजी कनेक्शन मिलने के बाद एलपीजी सिलिंडर एजेंसी में जमा कराने का एक माह का समय दिया था। हालांकि, होर्मुज समुद्री मार्ग खुलने कर वजह से गैस लेकर आने वाले जहाज निर्वाध रूप से आने लगे हैं लेकिन अभी भी लोगों को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए कहा जा रहा है। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार पीएनजी पाइप लाइन बिछाने वाली कंपनियों को एनओसी देने की प्रक्रिया भी सरल कर रखी है।  

बोरवेल में बच्चे की मौत के बाद कार्रवाई, अंबाला में खेत मालिक सहित तीन पर FIR

अंबाला. गांव धन्यौड़ा के खेत में मंगलवार सुबह सात बजे खुले पड़े 300 फीट गहरे बोरवेल में साढ़े तीन वर्षीय मासूम निरवैर सिंह उर्फ निर्भय की मौत के बाद प्रशासन ने एक्शन लिया है। लापरवाही बरतने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। SP अजीत सिंह शेखावत ने कहा कि इस दुखद घटना में परिवार की शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एसपी ने कहा कि बोरवेल को मालिक और ठेकेदार ने खुला छोड़ दिया था और सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए गए, जिससे यह हादसा हुआ। वहां न कोई चेतावनी बोर्ड लगा हुआ था और न कोई बैरियर। शिकायत मिलने पर सदर पुलिस स्टेशन ने 3 लोगों के खिलाफ (खेत का मालिक और दो अन्य, जिन्होंने खेत ठेके पर लिया हुआ था) मामला दर्ज किया है। मामले के सभी तथ्यों की जांच के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 20 घंटे तक मौत से लड़ा निर्भय बता दें कि मंगलवार को बच्चे को निकालने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ), सेना की टीम, प्रशासन और पंजाब के संगरूर से आई विशेषज्ञ टीम रेस्क्यू में देर रात तक लगी थीं। करीब 20 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब साढ़े चार बजे बच्चे को 160 फीट ऊपर तक लाया गया। लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका। रेस्क्यू के दौरान रात करीब 10 बजे बोरवेल में 220 फीट तक रस्सी जा रही थी और निर्भय 40 फीट और नीचे चला गया था। बोरवेल में डाले गए कैमरे से मिली तस्वीरों में बच्चे पर वर्षा का पानी गिरता दिखाई दे रहा था। रेस्क्यू टीम ने जिस कैमरे से बच्चे की स्थिति जांची, उसमें हलचल नहीं दिखी।  पिता को खाने दे जा रहा था निर्भय बता दें कि धन्यौड़ा का किसान मंजीत मंगलवार सुबह 6:30 बजे पिता को खाना देने खेत जा रहा था तो बेटे निर्भय ने भी जाने की जिद की तो मंजीत साथ ले गया। पिता को खाना दे वह काम करने लगा। तभी निर्भय खेत में खेलने लगा। वहां रास्ते के साथ नौ इंची चौड़े बोरवेल बोरी से ढकी थी। निर्भय उस बोरी पर कूद गया और बोरवेल में चला गया।