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यूपीआईटीएस में दिखा परिवहन विभाग का सड़क सुरक्षा पर जोर, 28 से 30 सितंबर तक चलेगा ऑपरेशन कवच

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा योगी सरकार के कार्यकाल में परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित, सुगम और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की झलक उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में भी देखने को मिल रही है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण में परिवहन विभाग ने अपने स्टॉल के माध्यम से विभागीय सेवाओं, सड़क सुरक्षा और वाहन संबंधी नई व्यवस्थाओं की जानकारी दी। यहीं पर परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि सड़क सुरक्षा के तहत 28 से 30 सितंबर तक प्रदेश में अनधिकृत बसों के विरूद्ध ऑपरेशन कवच अभियान चलाया जाएगा। 28 से 30 सितंबर तक ऑपरेशन कवच परिवहन विभाग की तकनीकी कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव ने बताया कि अवैध रूप से संचालित बसों के खिलाफ ऑपरेशन कवच के तहत 28 से 30 सितंबर तक प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य परिवहन नियमों के अनुपालन को प्रभावी बनाना और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। एनसीआर के प्रदूषण पर ईओएल वाहनों पर फोकस उन्होंने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और खराब होती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए एंड ऑफ लाइफ (ईओएल) वाहनों को अधिकृत स्क्रैप केंद्र पर स्क्रैप कराने की अपील की। एनसीआर के वाहन स्वामियों से पुराने और निर्धारित मानकों के अनुरूप जीवन पूरा कर चुके वाहनों को अधिकृत केंद्र तक पहुंचाने का आग्रह किया, ताकि पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सके। परिवर्तन पोर्टल से पुराने वाहनों को बदलने का लाभ उन्होंने परिवहन विभाग की परिवर्तन योजना की जानकारी देते हुए यूरो मानक बीएस 1,2,3 व 4 वाले वाहनों के स्वामियों से परिवर्तन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की अपील की। वहीं कार्यशाला में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को कम करने के लिए यातायात नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया गया। लोगों से नियंत्रित गति से वाहन चलाने, दोपहिया पर हेलमेट और चारपहिया में सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने, शराब पीकर वाहन न चलाने व ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की गई। परिवहन विभाग ने बताया कि जनसुविधा के लिए उसकी 52 सेवाओं को फेसलेस किया गया है, जबकि 40 सेवाएं ऑटो अप्रूवल मोड में संचालित की जा रही हैं। ट्रेड शो में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी आधुनिक तकनीक और सिमुलेटर के जरिए युवाओं को जानकारी भी दी जा रही है।

नेलसनार में बाढ़ के बीच जिला प्रशासन की मानवीय पहल, बाढ़ में फंसे यात्रियों को कराया भोजन

बीजापु भैरमगढ़ के समीप नेलसनार क्षेत्र में बाढ़ के कारण नेशनल हाईवे के अवरुद्ध होने से आवागमन प्रभावित हुआ। इस दौरान मार्ग में फंसे यात्रियों को जिला प्रशासन की ओर से भोजन उपलब्ध कराया गया। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 26 सितंबर को दिन के समय करीब 150 लोगों तथा रात्रि में लगभग 70 मुसाफिरों को भोजन कराया गया। विपरीत परिस्थितियों में जिला प्रशासन की इस मानवीय पहल से रास्ते में फंसे लोगों को राहत मिली। कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन में संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम, तहसीलदार सहित मैदानी अमला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासनिक एवं एसडीआरएफ की टीम द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है तथा आवश्यकता के अनुसार प्रभावित एवं फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाढ़ प्रभावित मार्गों पर अनावश्यक आवागमन से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

साइबर अपराध, आतंकवाद प्रतिरोध, कानून-व्यवस्था, पुलिस आधुनिकीकरण सहित पुलिसिंग के विभिन्न विषयों पर वरिष्ठ अधिकारियों ने दी जानकारी

भोपाल  केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह के प्रस्तावित मध्यप्रदेश दौरे के दौरान पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों एवं नवीन आपराधिक कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी आयोजित की जानी है। इसकी तैयारियों के संबंध में आज डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने पुलिस मुख्यालय, भोपाल में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश की पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र के अनुसार साइबर अपराध, आपराधिक न्याय प्रणाली, कानून-व्यवस्था, आतंकवाद प्रतिरोध, नक्सल उन्मूलन, विदेशियों से संबंधित विषय, आपदा प्रबंधन, पुलिस आधुनिकीकरण तथा पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा संबंधी समन्वय सहित विभिन्न विषयों पर जानकारी एवं प्रस्तुतिकरण दिया। डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने बैठक में सेफ क्लिक, ‘नशे से दूरी है जरूरी’, नक्सलवाद के उन्मूलन एवं हार्टफुलनेस सहित मध्यप्रदेश पुलिस की विभिन्न पहलों एवं अभियानों से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने पुलिसिंग के विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों, आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा जनहित से जुड़े अभियानों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने एवं प्रदर्शनी में इन अभियानों की प्रभावी प्रस्तुति तथा इनके माध्यम से पुलिस और नागरिकों के बीच जागरूकता एवं सहभागिता को प्रदर्शित करने पर जोर दिया। साइबर अपराध, सुरक्षा एवं आधुनिक पुलिसिंग पर समीक्षा बैठक में ई-जीरो एफआईआर, 1930 साइबर हेल्पलाइन, साइबर कमांडो प्रशिक्षण तथा ‘सेफ क्लिक’ जागरूकता अभियान की प्रगति की जानकारी दी गई, जिसके माध्यम से 8.6 करोड़ लोगों तक पहुंच बनाई गई। आतंकवाद प्रतिरोध के अंतर्गत एटीएस की क्षमताओं एवं परिचालन दक्षता तथा अंतरराज्यीय प्रकृति के मामलों में समन्वय पर चर्चा हुई। विदेशियों एवं अवैध प्रवासियों के विरुद्ध कार्रवाई, आपदा प्रबंधन, पुलिस आधुनिकीकरण तथा पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा समन्वय की भी समीक्षा की गई। डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने आधुनिक तकनीक एवं संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय पर जोर दिया। कानून-व्यवस्था, आपराधिक न्याय प्रणाली एवं फॉरेंसिक व्यवस्थाओं की जानकारी अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था एवं आपराधिक न्याय प्रणाली, नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, ई-समन, मेडिको-लीगल परीक्षण एवं पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग सिस्टम पर प्रस्तुतिकरण दिया। साथ ही अभियोजन निदेशालय, नेटग्रिड के उपयोग, नवीन न्याय संहिता के अंतर्गत दो वर्षों की तुलनात्मक स्थिति, फॉरेंसिक सेवाओं तथा 57 मोबाइल फोरेंसिक वैन की जानकारी दी गई। जेल विभाग द्वारा मॉडल जेल अधिनियम-2023 के अंतर्गत मध्यप्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदी अधिनियम-2024 तथा मॉडल जेल मैन्युअल-2016 से संबंधित जानकारी साझा की गई। प्रदर्शनी की तैयारियों की जानकारी दी  पंकज वास्तव ने बैठक के दौरान विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्तव ने 3 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित नवीन आपराधिक कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में अपराध घटित होने से लेकर नागरिक को न्याय मिलने तक की पूरी प्रक्रिया को सरल एवं सहज तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें पुलिस, एफएसएल, अभियोजन, जेल एवं अन्य संबंधित विभागों की भूमिका, आधुनिक तकनीक तथा डिजिटल व्यवस्थाओं को विभिन्न स्टॉल, वीडियो, डिजिटल स्क्रीन, पोस्टर एवं मॉडल के माध्यम से दर्शाया जाएगा। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर जागरूकता, नक्सल उन्मूलन, ‘सेफ क्लिक’, ‘नशे से दूरी है जरूरी’ सहित विभिन्न जनहितकारी पहलों एवं उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान, वन एवं वन्यजीवन, पारंपरिक कला-संस्कृति एवं जनजातीय विरासत की झलक भी प्रदर्शनी में शामिल की जाएगी। प्रदर्शनी लगभग पांच दिनों तक संचालित की जाएगी और 3 अक्टूबर से आम नागरिकों के लिए प्रारंभ होगी। बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित बैठक में विशेष पुलिस महानिदेशक  आदर्श कटियार,  अनिल कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  डी. निवास वर्मा,  योगेश चौधरी,  जयदीप प्रसाद,  के.पी. वेंकटेश्वर राव,  अंशुमन यादव, पुलिस महानिरीक्षक डॉ. आशीष, जेल डीआईजी  एम.आर. पटेल, डायल 112 एवं स्वास्थ्य विभाग   के अधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

बिहार में लाइब्रेरियन पात्रता परीक्षा का ऐलान, 150 सवालों की होगी CBT परीक्षा

 पटना  बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा, 2026 का नोटिफिकेशन रविवार को जारी कर दिया है। परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए निर्धारित वेबसाइट  sletregistration.cbrt.co.in पर जाना होगा। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम ने परीक्षा को लेकर जानकारी साझा की है। परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। इसमें कुल 150 अंकों के बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा की अवधि 150 मिनट यानी ढाई घंटे होगी। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा और गलत उत्तर के लिए निगेटिव मार्किंग नहीं की जाएगी।   पुस्तकालय विज्ञान से 100 और सामान्य ज्ञान से 50 अंक विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा में कुल 150 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें 100 अंक के प्रश्न पुस्तकालय विज्ञान विषय से होंगे, जबकि 50 अंक के प्रश्न सामान्य ज्ञान पर आधारित होंगे। परीक्षा का पाठ्यक्रम राज्य के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय विज्ञान की स्नातक डिग्री के लिए लागू पाठ्यक्रम के अनुरूप होगा। स्नातक के साथ पुस्तकालय विज्ञान की डिग्री जरूरी पात्रता परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी का बिहार का निवासी होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी के पास स्नातक की डिग्री के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। स्नातक में न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक आवश्यक होंगे। निर्धारित श्रेणियों के अभ्यर्थियों को इसमें पांच प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। सभी वर्गों को उम्र सीमा में 10 वर्ष की छूट परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को आयु सीमा में सभी वर्गों के लिए 10 वर्ष की छूट दी जाएगी। पात्रता से जुड़ी अन्य शर्तें बोर्ड की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार लागू होंगी। किस वर्ग के लिए कितने न्यूनतम अंक जरूरी पात्रता परीक्षा में सफल होने के लिए अलग-अलग श्रेणियों के लिए न्यूनतम अर्हतांक निर्धारित किया गया है। श्रेणी                                                  न्यूनतम अर्हतांक सामान्य वर्ग                                       50 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग                                         45.5 प्रतिशत अत्यंत पिछड़ा वर्ग                              42.5 प्रतिशत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति     40 प्रतिशत दिव्यांग                                                 40 प्रतिशत महिला                                                  40 प्रतिशत

विकसित भारत जीरामजी योजना से सेंड फिल्टर निर्माण ने दी भूजल को संजीवनी

रायपुर “जल है तो जीवन है”—यह पंक्तियाँ धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत मुल्ले के लिए केवल एक नारा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था की बुनियाद बन चुकी हैं। वर्षा आधारित इस क्षेत्र में जल की एक-एक बूंद को सहेजने के संकल्प के साथ 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत विकसित भारत जीरामजी योजना से जल स्रोतों में सेंड फिल्टर (Sand Filter) का सफल निर्माण कराया गया है। यह पहल वर्षा एवं सतही जल के कुशल प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभरी है। प्राकृतिक छनन तकनीक से बहते पानी का जतन ​वर्षाकाल में खेतों और गलियों से बहकर व्यर्थ चले जाने वाले पानी को उपयोगी बनाने के उद्देश्य से गाँव में सेंड फिल्टर की स्थापना की गई है। इस संरचना में रेत और प्राकृतिक छनन माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जो जल के साथ बहकर आने वाली मिट्टी, गाद और अन्य ठोस अशुद्धियों को प्रभावी ढंग से रोकते हैं। इससे स्वच्छ जल जमीन के भीतर समाकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। सीमित संसाधनों में तैयार यह छोटी संरचना भविष्य की जल संपदा को सुरक्षित करने की एक मजबूत नींव साबित हो रही है। 52 हजार की लागत में दोहरा लाभ: जल संरक्षण के साथ रोजगार ​ग्राम मुल्ले में इस सेंड फिल्टर का निर्माण 52 हजार रुपये की स्वीकृत लागत से सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसमें सामग्री के लिए 41 हजार रुपये तथा मजदूरी के लिए 11 हजार रुपये निर्धारित थे। निर्माण कार्य पूर्ण होने पर कुल 52 हजार रुपये व्यय हुए, जिसमें से 10,500 रुपये मजदूरी मद में खर्च किए गए। इस कार्य की सबसे खास बात यह रही कि इसमें गाँव के ही श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और आय का साधन प्राप्त हुआ। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती कृषि प्रधान ग्राम मुल्ले की अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर जल की उपलब्धता पर निर्भर है। ऐसे में सेंड फिल्टर के ज़रिए भूजल स्तर में सुधार होने से आने वाले समय में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को निरंतरता मिलेगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर किसानों की आय और फसल उत्पादन पर पड़ेगा। बदलाव की बयार: 'आज का संरक्षण, कल की सुरक्षा' इस पहल ने ग्रामीणों की सोच में भी बड़ा बदलाव लाया है। अब गाँव के लोग वर्षा जल को केवल एक तात्कालिक जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए संजोने योग्य प्राकृतिक धरोहर मान रहे हैं। मुल्ले गाँव का यह प्रयास यह संदेश देता है कि जल सुरक्षा की जंग केवल बड़ी-बड़ी परियोजनाओं से ही नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी से किए गए छोटे-छोटे प्रयासों से भी जीती जा सकती है। आज सहेजी जा रही यही एक-एक बूंद आने वाले कल में गाँव की जीवनरेखा बनेगी।

योगी सरकार की तत्परता से अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव तेज, जिलों में फील्ड पर उतरा प्रशासन

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जारी भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने रविवार को प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों से संवाद कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने और राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश राहत आयुक्त के अनुसार 25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में 66.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 7.6 मिलीमीटर है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। प्रदेश के 75 जिलों में से 56 जिलों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। फर्रूखाबाद में सामान्य से 7,385 प्रतिशत, कन्नौज में 5,664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4,408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4,240 प्रतिशत और महोबा में 4,100 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। क्षतिग्रस्त मकानों की सूचना पर मदद में जुटा प्रशासन अतिवृष्टि और आंधी-तूफान से प्रदेश में 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। मकान क्षति के मामलों में हरदोई में 272, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 और बहराइच में 44 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस संबंध में प्रशासन मदद उपलब्ध कराने में जुट गया है। फसल क्षति का तत्काल आकलन अधिकारियों को फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण और आकलन कर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक आवास की व्यवस्था व पात्र परिवारों को आवास योजनाओं का लाभ दिलाने को भी कहा गया है। फील्ड में रहकर राहत कार्यों की निगरानी राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों को फील्ड में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। राहत सामग्री और अनुमन्य सहायता राशि का वितरण प्राथमिकता के आधार पर करने और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करने को कहा गया है। रेस्क्यू अभियान लगातार जारी जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार रेस्क्यू अभियान चला रहे हैं। सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों को आवश्यक सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन ने आमजन से जलभराव, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तथा नदियों-नालों के तेज बहाव वाले स्थानों पर अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। आपातकालीन सहायता के लिए राहत आयुक्त कार्यालय की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करने की भी अपील की गई है।

बहराइच की 198 ग्राम पंचायतों में बन रहीं डिजिटल लाइब्रेरी, QR स्कैन करते ही दर्ज होगी उपस्थिति

बहराइच  जिले के 14 विकास खंडों के 198 ग्राम पंचायतों में तैयार की जा रही डिजिटल लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की हाजिरी अब क्यूआर कोड से लगेगी। विद्यार्थी के क्यूआर कोड स्कैन करते ही उसकी उपस्थिति दर्ज हो जाएगी और इसकी जानकारी सीधे शासन स्तर तक पहुंचेगी। इससे लाइब्रेरी में विद्यार्थियों की उपस्थिति की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी। जिले में डिजिटल लाइब्रेरियों को आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है। अंदर आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के साथ साज-सज्जा कराई गई है, जो विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करेगी। लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित किताबें भी रखी गई हैं। प्रत्येक लाइब्रेरी में कम से कम 25 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था है। बड़ी लाइब्रेरियों में एक साथ करीब 50 विद्यार्थी बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं। लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए क्यूआर कोड लगाया गया है। विद्यार्थी के स्कैन करते ही उसकी हाजिरी दर्ज हो जाएगी। इससे लाइब्रेरी में विद्यार्थियों की उपस्थिति की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी और इसकी निगरानी शासन स्तर से की जाएगी। व्यवस्था की देखरेख जिला पंचायत राज अधिकारी के मार्गदर्शन में की जा रही है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 7.92 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। डिजिटल लाइब्रेरियों की स्थापना का काम चल रहा है। यहां पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों की हाजिरी भी लगेगी। इसके लिए क्यूआर कोड लगाया जाएगा। लाइब्रेरी स्थापित होने के बाद मुख्यमंत्री की ओर से लाइव प्रसारण के माध्यम से इन सभी का उद्घाटन भी किया जा सकता है। -चंद्रभान सिंह, डीपीआरओ।  

मंत्री परमार ने बच्चों एवं माताओं से किया आत्मीय संवाद

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार के मुख्य आतिथ्य में "सेवा संकल्प अभियान" के अंतर्गत शाजापुर जिले के शुजालपुर के फ्रीगंज राघवगंज आंगनवाड़ी केंद्र 20/1 में “आंगन मिलन” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत रूप से दीप प्रज्ज्वलन एवं कन्या पूजन के साथ किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थितजनों को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के "मन की बात" कार्यक्रम के 138वें संस्करण एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के उद्बोधन का एलईडी के माध्यम से सीधा प्रसारण हुआ। कार्यक्रम में मंत्री  परमार ने आंगनवाड़ी केंद्र में उपस्थित नन्हे-मुन्ने बच्चों एवं माताओं के साथ आत्मीय संवाद किया। इस दौरान मंत्री  परमार ने माताओं एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं दैनिक गतिविधियों के संबंध में जानकारी भी ली। मंत्री  परमार ने बच्चों के साथ समय बिताया तथा उनकी गतिविधियों में सहभागिता की। इस दौरान बच्चों की मासूमियत और उत्साह ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बच्चो को खिलोने की किट वितरित की गई । मंत्री  परमार ने कहा कि बच्चे हमारे समाज और राष्ट्र का भविष्य हैं। उनके स्वस्थ शरीर, संस्कारित मन और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रारंभिक वर्षों में विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और संस्कारों से जोड़ने का कार्य किया जाता है। मंत्री  परमार ने कहा कि आंगनवाड़ी केवल बच्चों की देखभाल और पोषण का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने वाला महत्वपूर्ण केंद्र है। बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार के साथ समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। जब समाज संवेदनशील होकर बच्चों और माताओं के साथ खड़ा होता है, तो सेवा की भावना और अधिक मजबूत होती है। मंत्री  परमार ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचकर सेवा और सहभागिता की भावना को मजबूत करने का प्रयास है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक संवेदना और सहयोग पहुंचाना तथा जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही सेवा का वास्तविक उद्देश्य है। मंत्री  परमार ने माताओं से भी बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पौष्टिक आहार, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य देखभाल तथा अच्छे संस्कार अत्यंत आवश्यक हैं। बच्चों के प्रारंभिक विकास में माता-पिता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने केंद्र में संचालित गतिविधियों तथा बच्चों के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उपस्थित माताओं ने भी बच्चों से जुड़े विषयों पर संवाद किया। कार्यक्रम में बच्चों के साथ आत्मीय वातावरण में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। जिला कार्यक्रम अधिकारी  संजय त्रिपाठी ने बताया कि “आंगन मिलन” कार्यक्रम का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों से जनभागीदारी को जोड़ना, बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा माताओं और बच्चों के साथ आत्मीय संवाद के माध्यम से सेवा एवं संवेदना की भावना को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में बच्चों की मुस्कान और माताओं के स्नेह के बीच सेवा के संकल्प को दोहराया गया। उपस्थितजनों ने कहा कि समाज के नन्हे बच्चों के स्वस्थ, संस्कारित और उज्ज्वल भविष्य के लिए ऐसे आयोजन जनभागीदारी को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों से आंगनवाडी केन्द्रों को गोद लेने के लिये आहवान किया। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा दीदी का भी सम्मान किया गया। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से बच्चों के चेहरे पर मुस्कान, माताओं के मन में विश्वास और प्रत्येक आंगन में खुशहाली का संकल्प निरंतर आगे बढ़ाने की भावना कार्यक्रम में देखने को मिली। इस अवसर पर जिले का नवाचार "घर में पकायेगे घर का खायेंगे" अंतर्गत पोषण प्रदर्शनी लगाई गई एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया जिसका मत्री  एवं अतिथियों द्वारा अवलोकन किया गया। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष शुजालपुर  बबीता परमार, डॉ. रवि पांडे, सेवा संकल्प अभियान जिला प्रभारी  नरेन्द्र सिंह यादव,  देवेन्द्र सिसोदिया,  देवेन्द्र तिवारी, अंजू खत्री,  युवराज रामडिया,  योगेश शिवहरे, अनुविभागीय अधिकारी शुजालपुर  अंकिता पाटकर, प्रभारी परियोजना अधिकारी शुजालपुर  ममता परमार सहित जनप्रतिनिधिगण, पार्षदगण एवं गणमान्य नागरिक, महिलाऐं, बच्चे उपस्थित रहे।  

‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर आयुर्वेद को जनकल्याण से जोड़ें : राज्यपाल पटेल

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि मन की बात से प्रेरणा लेकर आयुर्वेद को जनकल्याण से जोड़ें, क्योंकि आने वाला समय आयुर्वेद का है। आवश्यकता उसके ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने की है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन, प्रकृति संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश समाज तक पहुंचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। आयुर्वेद को केवल उपचार तक सीमित नहीं रखें। उसके ज्ञान से रोग नियंत्रण, स्वास्थ्य जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद महाविद्यालय को शिक्षा, शोध, सेवा और जन-जागरूकता को एक साथ आगे बढ़ाने का केंद्र बनने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य का संबंध केवल दवा से नहीं, बल्कि स्वच्छता, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, योग, व्यायाम और सकारात्मक सोच से भी है। राज्यपाल  पटेल पं. खुशीलाल शासकीय (स्वशासी) आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान के रजत जयंती सभागार में रविवार को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम ‘मन की बात’ के प्रसारण से पूर्व श्रोताओं को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि ‘मन की बात’ प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के नागरिकों से संवाद का नवाचार है, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रेरक कार्य और अनुभव सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम सामान्य नागरिकों के छोटे प्रयासों और जन भागीदारी की उपयोगी पहल को सामने लाकर समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक कार्य करने की प्रेरणा देता है। जागरूक नागरिक अपने स्तर पर निरंतर प्रयासों से समाज में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकते हैं। ‘मन की बात’ यह संदेश देती है कि समाज में बदलाव केवल बड़े प्रयासों से नहीं, बल्कि छोटे और निरंतर कार्यों से भी संभव है। उन्होंने उदाहरण दिया कि किसी गांव में एक विद्यार्थी भी स्वास्थ्य जागरूकता का छोटा अभियान शुरू कर अनेक परिवारों तक उसका प्रभाव पहुंचा सकता है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि आधुनिक समय में जीवनशैली से जुड़ी अनेक चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और अनुशासित दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है। स्वस्थ शरीर से स्वस्थ मन और सक्रिय बुद्धि का निर्माण होता है। उन्होंने संतुलित आहार, मिलेट के सेवन, पर्याप्त पानी पीने, नियमित व्यायाम और कम तेल के उपयोग को स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया। कोविड के दौरान गिलोय की महत्ता को बताते हुए अधिकांश पेड़-पौधों में औषधीय गुण होने की बात कही। जन औषधि केंद्रों से दवाएँ लेने के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों पर बल दिया। बताया कि देश में 25 हजार केंद्र बनाने का लक्ष्य है, जिनमें 19 हजार केंद्र स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि गांवों और जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय पौधों तथा पारंपरिक उपचार से जुड़ा व्यापक ज्ञान उपलब्ध है। इस ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टि से समझना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से स्थानीय ज्ञान, वन औषधियों और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के अध्ययन तथा शोध के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज की आधारशिला हैं। शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि आयुष विभाग द्वारा जन स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित शिक्षा, शोध, उपचार और योग की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद प्रकृति, संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली पर आधारित प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो स्वास्थ्य और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। आभार प्रदर्शन आयुक्त आयुष मती आर. उमा महेश्वरी ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल  पटेल का शॉल, फल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। अतिथियों द्वारा भगवान धनवंतरी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

पोषक तत्वों से भरपूर मुनगा स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण

रायपुर  कुपोषण के खिलाफ छत्तीसगढ़ की एक स्थानीय पहल अब राष्ट्रीय मंच तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने पोषण की चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और जनभागीदारी को जोड़ने वाली इस पहल की सराहना की। छत्तीसगढ़ में सितंबर माह को पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 12 सितंबर को ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की। अभियान का उद्देश्य मुनगा के पौधे को घर-घर पहुंचाने के साथ उसके पोषण संबंधी लाभों के प्रति परिवारों को जागरूक करना है। मुनगा या सहजन छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर सहज उपलब्ध है। पोषक तत्वों से भरपूर मुनगा स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन ए, सी, कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व के साथ ही औषधीय गुणों से युक्त है। मुनगा को अपने भोजन में पौष्टिक आहार के रूप में शामिल करने की पहल बेहतरीन है। मुनगे के पेड़ को पेड़ तेजी से बढ़ता है और अपेक्षाकृत कम देखभाल की जरूरत होती है। मुनगा पोषण, औषधीय गुणों एवं हरियाली के दृष्टिगत महत्वपूर्ण पौधा माना गया है। स्थानीय भोजन और पोषण से जोड़ते हुए राज्य सरकार ने इसे कुपोषण के खिलाफ अभियान का हिस्सा बनाया है। खासतौर पर महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण के लिए ध्यान केंद्रित कर ’हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान चलाया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों को इस अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है, जहां पोषण जागरूकता के साथ परिवारों को मुनगा के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ’हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान के तहत प्रदेशभर में विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों एवं जनमानस के घरों के लिए व्यापक तौर पर मुनगे के पौधे का वितरण किया गया है, जिसके अंतर्गत प्रदेशभर में अब तक कुल 10 लाख 29 हजार 831 मुनगा के पौधें का वितरण का किया गया है। जिलों में क्रमशः बस्तर जिले में 25,244, कांकेर जिले में 43,071, दंतेवाड़ा में 7,056, नारायणपुर में 21,224, बीजापुर में 15699, सुकमा में 4,835, कोंडागांव में 31983, सरगुजा में 43754, कोरिया में 19022, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 11939, सूरजपुर में 64599, बलरामपुर में 27107, जशपुर जिले में 1,62271 पौधे लगाएं गए है। इसी प्रकार रायपुर जिले में 23948, महासमुंद में 6420, धमतरी में 48833, बलौदाबाजार में 28398, गरियाबंद में 10527, दुर्ग में 42474 राजनांदगांव जिले में 3480, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 21991, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 39222, कबीरधाम में 75776, बेमेतरा में 19575, बालोद में 50933, बिलासपुर में 14965, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 43007, जांजगीर-चांपा में 57653, सक्ती में 6425, कोरबा में 1,01,002, रायगढ़  में 41,776, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 9,824, मुंगेली जिले में 6,518 पौधे लगाएं गए है। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें किसी महंगे या बाहरी संसाधन के बजाय स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध पौधे को पोषण अभियान का माध्यम बनाया गया है। यानी घर के आंगन में लगा एक पौधा परिवार के भोजन में पोषण बढ़ाने के साथ कुपोषण के खिलाफ जागरूकता का भी जरिया बने। ‘हर घर मुनगा’ को केवल पौधरोपण अभियान के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके जरिए पौधरोपण, पोषण जागरूकता, आंगनबाड़ी सेवाओं और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।