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त्रिदिवसीय उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस 2026 आज से

त्रिदिवसीय उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस 2026 आज से  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे शुभारंभ, वैज्ञानिकों को भी करेंगे सम्मानित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में होगा आयोजन, तकनीकी सत्रों में शामिल होंगे देश के नामचीन कृषि वैज्ञानिक व विशेषज्ञ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे कार्यक्रम का शुभारंभ, वैज्ञानिकों को मिलेगा सम्मान लखनऊ उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) की ओर से बुधवार से त्रिदिवसीय उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस का आयोजन होगा। 8 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका उद्घाटन करेंगे। ट्रांसफॉर्मिंग एग्रीकल्चर फॉर विकसित कृषि- विकसित भारत@ 2047 विषयक छठवीं उप्र कृषि विज्ञान कांग्रेस का आयोजन भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में होगा।  यह जानकारी “उपकार” के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने दी। समारोह में उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना (2025-26) के अंतर्गत चयनित 15 वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कई तकनीकी सत्र भी होंगे, जिसमें अनेक कृषि वैज्ञानिक व विशेषज्ञ सम्मिलित होंगे।  उद्घाटन समारोह में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष कैप्टन (सेवानिवृत्त) विकास गुप्ता आदि मौजूद रहेंगे।

डीएम को फोन पर दी घेरकर मारने की धमकी, किसान यूनियन का प्रदेश सचिव चढ़ा पुलिस के हत्थे, भेजा गया जेल

पीलीभीत उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में जिलाधिकारी को फोन पर धमकी देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. आरोपी ने न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया बल्कि पूरनपुर मंडी आने पर जिलाधिकारी को घेरकर मारपीट करने की धमकी भी दी. मामला सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. जानकारी के अनुसार 6 अप्रैल को कलेक्ट्रेट स्थित गांधी सभागार में बर्ड फ्लू की रोकथाम को लेकर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह की अध्यक्षता में बैठक चल रही थी. इसी दौरान उनके सीयूजी नंबर पर एक कॉल आई, जिसे उनके आशुलिपिक ने रिसीव किया. फोन करने वाले ने खुद को बलजिंदर सिंह बताया और गेहूं खरीद को लेकर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया. आरोपी ने कहा कि यदि डीएम पूरनपुर मंडी आए तो उसे घेरकर मारा जाएगा और यह बात रिकॉर्ड कर लेने की भी बात कही. हैरानी की बात यह रही कि आरोपी ने खुद इस कॉल की रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया. जिसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की. तहरीर के आधार पर पूरनपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस ने आरोपी बलजिंदर सिंह, निवासी मुझा कला, को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी खुद को किसान यूनियन (अन्नदाता गुट) का प्रदेश सचिव बताता है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर भेजा जेल पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने बताया कि कॉल के दौरान अभद्र भाषा और धमकी दी गई थी. जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेजा गया है. घटना के बाद आरोपी का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वह माफी मांगता नजर आ रहा है. उसने कहा कि उसके पिता कई दिनों से गेहूं बेचने के लिए केंद्र पर परेशान थे, इसी तनाव में उससे गलत शब्द निकल गए. इधर, इस घटना के बाद पूरनपुर मंडी में हलचल बढ़ गई है. जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक खुद मौके पर पहुंचे. वहीं थाने के बाहर किसान नेताओं की भीड़ जमा हो गई और कुछ लोगों ने नारेबाजी भी की. किसानों का आरोप है कि जिले में गेहूं की सरकारी खरीद न होने से वे परेशान हैं हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अधिकारी को धमकी देना कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

शासन की योजनाओं से बदला जीवन, पीएम आवास और उज्ज्वला से मिला ग्रामीणों को सहारा

शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से संवरा जीवन,पीएम आवास, उज्ज्वला और महतारी वंदन से मिला संबल रायपुर शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण अंचलों में न केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं, बल्कि आमजन के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय भी जोड़ रही हैं। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड पामगढ़ के ग्राम लोहर्सी की निवासी श्रीमती ज्योति कश्यप की जीवन यात्रा परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल है। कभी अभाव और कठिनाइयों से जूझ रही श्रीमती ज्योति कश्यप का जीवन आज शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से पूरी तरह बदल चुका है। पूर्व में उनका कच्चा मकान हर मौसम में चुनौती बन जाता था। वर्षा के दौरान छत टपकना, घर में पानी भरना और असुरक्षित वातावरण में रहना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। इसके साथ ही लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते समय उठने वाले धुएं से आंखों में जलन और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं उनके स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रही थीं। परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव तब आया, जब उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आशा और विश्वास के साथ आवेदन किया और आवास स्वीकृत होने के बाद उनके जीवन में जैसे नई रोशनी का संचार हुआ। पक्के मकान के निर्माण से अब उनका परिवार सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण में निवास कर रहा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्राप्त होने से उनकी रसोई धुएं से मुक्त हो गई है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ समय और श्रम की भी बचत हो रही है। श्रीमती ज्योति कश्यप के जीवन में आत्मनिर्भरता का एक नया आयाम महतारी वंदन योजना से जुड़ा है। इस योजना के तहत प्रतिमाह प्राप्त होने वाली 1000 रुपये की सहायता राशि से वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं कर पा रही हैं। जहां पहले उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब वे आत्मसम्मान के साथ अपने निर्णय लेने में सक्षम हुई हैं। आज श्रीमती ज्योति कश्यप का जीवन इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाएं यदि सही पात्र तक पहुंचें, तो वे न केवल जीवन स्तर को सुधारती हैं, बल्कि आत्मविश्वास और स्वाभिमान को भी नई ऊंचाई प्रदान करती हैं।

एक जिला एक उत्पाद योजना से आई नई उम्मीद, अदरक की खेती से दोगुना मुनाफा

एक जिला एक उत्पाद योजना से बदली तस्वीर अदरक की खेती से दोगुना मुनाफा कमाया रायपुर  सरकार की “एक जिला एक उत्पाद” योजना अब धरातल पर किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसी क्रम में बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम बघमरा के युवा प्रगतिशील किसान श्री आकाश चंद्राकर ने अदरक की खेती के माध्यम से सफलता की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है। पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ते हुए आकाश चंद्राकर ने “एक जिला एक उत्पाद” योजना से प्रेरित होकर अपने लगभग ढाई एकड़ खेत में अदरक की खेती की शुरुआत की। वैज्ञानिक पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन के साथ की गई इस खेती से उन्हें उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त हुआ। साथ ही बाजार में अदरक की अच्छी मांग के कारण उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिला, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों को प्रोत्साहित करने और खेती की लागत को कम करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के उद्यानिकी विभाग द्वारा राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत आकाश चंद्राकर को लगभग 49 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इस वित्तीय सहयोग से उन्हें आधुनिक कृषि संसाधन जुटाने, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं तकनीकों का उपयोग करने में सहायता मिली, जिसका सीधा लाभ उत्पादन और गुणवत्ता में दिखाई दिया। आकाश चंद्राकर बताते हैं कि अदरक की खेती उनके लिए समृद्धि का नया द्वार बनकर आई है। शासन से प्राप्त अनुदान ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। “एक जिला एक उत्पाद” के अंतर्गत अदरक को चयनित किए जाने के बाद जिले के अन्य किसान भी इस नगदी फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पारंपरिक फसलों की तुलना में अदरक से प्राप्त अधिक शुद्ध लाभ ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। जिला प्रशासन बालोद और उद्यानिकी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी सलाह एवं अनुदान से खेती अब घाटे का सौदा नहीं, बल्कि लाभ का माध्यम बनती जा रही है। श्री चंद्राकर ने केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि शासन की इस पहल से बालोद जिला अदरक उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करेगा।

संघर्ष और भटकाव के बाद मनकू कड़ती की एक नई यात्रा की शुरुआत

संघर्ष और भटकाव के बाद मनकू कड़ती की नई शुरुआत रायपुर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अंचल में बदलाव की कई कहानियां उभर रही हैं। इन्हीं में से एक कहानी है बीजापुर जिले के छोटे से गांव चेरली के युवक मनकू कड़ती की, जिनका जीवन संघर्ष, भटकाव और फिर सकारात्मक परिवर्तन का उदाहरण बनकर सामने आया है। बीजापुर जिले के चेरली गांव में जन्मे मनकू कड़ती का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। गरीबी, असुरक्षा और सीमित संसाधनों के बीच उनका परिवार लगातार चुनौतियों से जूझता रहा। पारिवारिक स्थिति उस समय और भी गंभीर हो गई, जब उनके पिता को जेल जाना पड़ा। इस घटना ने मनकू के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला और उनका बचपन अभाव और अस्थिरता के माहौल में बीता। इन्हीं परिस्थितियों और नकारात्मक माहौल के प्रभाव में मनकू धीरे-धीरे भटकाव की ओर बढ़ने लगे। उन्हें लगा कि गलत रास्ता ही उन्हें पहचान और सुरक्षा दिला सकता है। हालांकि, उनके भीतर एक द्वंद्व लगातार बना रहा। क्या यही उनका भविष्य है ? यह सवाल उनके मन में बार-बार उठता रहा। समय के साथ मनकू के भीतर आत्मचिंतन की प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने महसूस किया कि हिंसा और भय के रास्ते पर चलकर वे अपने जीवन को अंधकार की ओर ले जा रहे हैं। यही एहसास उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने ठान लिया कि अब वे अपनी दिशा बदलेंगे और एक नई शुरुआत करेंगे। अप्रैल 2025 में मनकू कड़ती ने साहसिक कदम उठाते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। यह निर्णय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन यही उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सही फैसला साबित हुआ। इस कदम ने उनके लिए मुख्यधारा में लौटने और एक सम्मानजनक जीवन जीने के रास्ते खोल दिए। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें पुनर्वास प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने ट्रैक्टर ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षण लिया, जहां उन्होंने न केवल भारी मशीनों का संचालन सीखा, बल्कि अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास को भी अपने जीवन में अपनाया। निरंतर मेहनत और सीखने की इच्छा ने उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाया।  आज मनकू कड़ती एक बदले हुए इंसान के रूप में सामने आए हैं। वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हैं और समाज के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जहां पहले उनके जीवन में डर और अस्थिरता थी, वहीं अब आत्मविश्वास और नई उम्मीद ने जगह ले ली है। मनकू कड़ती के जीवन की यह नई शुरूआत इस बात का प्रमाण है कि विपरीत परिस्थितियों और गलत दिशा में बढ़ते कदमों के बावजूद, यदि व्यक्ति दृढ़ निश्चय कर ले तो जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।

नई रेल लाइन का 800 मीटर ट्रैक तैयार, जुलाई से शुरू होगी सेवा, कई गांवों को मिलेगी कनेक्टिविटी

इंदौर  इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के तहत बहुप्रतीक्षित टीही टनल का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर और धार विधायक नीना वर्मा ने निर्माणाधीन टनल में करीब 70 फीट नीचे उतरकर कार्यों का जायजा लिया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने सुरंग के भीतर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग है, जिसे तय समयसीमा में पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने दावा किया है कि आगामी जून-जुलाई तक टनल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से धार के बीच सीधा रेल संचालन शुरू होने की संभावना है। हाल ही में पीथमपुर से धार के बीच टॉवर वैगन इंजन के माध्यम से सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। टनल में युद्धस्तर पर चल रहा काम रेलवे अधिकारियों के अनुसार करीब 3 किमी लंबी टीही टनल में तेजी से कार्य जारी है। अब तक लगभग 800 मीटर हिस्से में ट्रैक और पटरी बिछाने का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य भी तेज गति से प्रगति पर है। फिनिशिंग और अन्य तकनीकी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बुनियादी ढांचे को मिल रही मजबूती केंद्र सरकार की पहल पर क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। टीही टनल और इंदौर-दाहोद रेल परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है जो आने वाले समय में पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। कनेक्टिविटी से विकास को रफ्तार राज्यमंत्री ठाकुर ने कहा कि इंदौर-धार रेल लाइन शुरू होने से क्षेत्र में आवागमन आसान होगा और व्यापार-उद्योग को नई गति मिलेगी। यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी खोलेगी। परियोजना की मुख्य विशेषताएं लंबाई और मार्ग: कुल लंबाई 204.76 किमी (183 किमी मप्र में, 22 किमी गुजरात में)। मार्ग: इंदौर-टीही-पीथमपुर-सागौर- गुणावद-धार-दाहोद। वर्तमान स्थिति : इंदौर-टीही (21 किमी) तक काम पूरा हो चुका है। टीही-धार के बीच 2.9 किमी लंबी सुरंग का काम पूरा हो चुका है, ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया में है। रेलवे स्टेशन (धार) निर्माण अंतिम चरण में है। तकनीकी प्रगति: सागौर-धार खंड में ट्रैक बिछाने के लिए मशीन का उपयोग किया जा रहा है। फायदे: इस लाइन के शुरू होने से इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी लगभग 55 किमी. कम हो जाएगी।

अमृत मिशन 2.0 के तहत 20 एमएलडी क्षमता के टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट को मिली मंजूरी, प्रदूषण-मुक्त होगी नदी

रायपुर अमृत मिशन 2.0 के तहत 20 एमएलडी क्षमता के टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट ऊर्जाधानी कोरबा की जीवनरेखा मानी जाने वाली हसदेव नदी अब प्रदूषण के काले साये से मुक्त होकर फिर से कल-कल बहेगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘अमृत मिशन 2.0’ योजना ने कोरबा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है। छत्तीसगढ़ शासन के प्रयासों से भारत सरकार ने शहर के दूषित जल के वैज्ञानिक उपचार हेतु 165 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। सालों से शहर के 11 बड़े नालों का दूषित सीवरेज जल सीधे हसदेव नदी में मिलकर उसकी शुद्धता को प्रभावित कर रहा था। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए 20 एमएलडी क्षमता का अत्याधुनिक टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 3 करोड़ 30 लाख लीटर दूषित जल को नदी में गिरने से पहले ही रोककर अत्याधुनिक तकनीक से उपचारित किया जाएगा। इससे नदी के प्रदूषण में भारी कमी आएगी और उसका जल पुनः स्वच्छ बनेगा। परियोजना के पूर्ण होते ही कोरबा उन चुनिंदा 12 शहरों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहाँ जल शोधन की ऐसी उन्नत और वैज्ञानिक व्यवस्था उपलब्ध है। यह परियोजना केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी बनेगी। उपचारित किए गए करोड़ों लीटर पानी को बर्बाद करने के बजाय एनटीपीसी द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदा जाएगा। इससे उद्योगों को स्वच्छ जल उपलब्ध होगा, नगर निगम के राजस्व में वृद्धि होगी और भू-जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। कलेक्टर  कुणाल दुदावत ने इसे कोरबा जिले के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मानकों का पालन करते हुए नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा तैयार किए गए इस वैज्ञानिक समाधान को अब वास्तविक रूप मिलने जा रहा है। वर्तमान में निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है और जल्द ही निर्माण कार्य धरातल पर शुरू हो जाएगा। अमृत मिशन 2.0 के तहत यह प्लांट न केवल हसदेव नदी को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण की नई मिसाल भी पेश करेगा। इसके माध्यम से कोरबा औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वच्छता के क्षेत्र में भी अग्रणी बनेगा।

बारूद की गंध की जगह अपने भविष्य विकास गढने लगे हैं

रायपुर बारूद की गंध की जगह अपने भविष्य विकास गढने लगे हैं छत्तीसगढ़ शासन की नक्सली पुनर्वास नीति केवल शस्त्र छोड़ने का अभियान नहीं, बल्कि भटकते युवाओं के जीवन में नई रोशनी लाने का माध्यम बन गई है। जहां कभी बारूद की गंध थी, वहां अब विकास की सड़कें पहुंच रही हैं। भय और आतंक को छोड़कर हुनर अपना रहे ये युवा आज छत्तीसगढ़ के बदलते स्वरूप के प्रतीक बन गए हैं।           राज्य शासन की नीति का मुख्य केंद्र केवल आत्मसमर्पण तक सीमित न रहकर, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा में मजबूती से स्थापित करना है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा लिवलीहुड कॉलेज में आत्मसमर्पित युवक-युवतियों के लिए स्वरोजगार आधारित विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। विनाश से विकास तक का सफर इस परिवर्तन की एक जीती-जागती मिसाल हैं 27 वर्षीय विनोद कुरसम। बीजापुर जिले के सुदूर बीहड़ गांव कोकेरा के रहने वाले विनोद का बचपन अभावों और भय के साये में बीता। शिक्षा की कमी विनोद केवल पांचवीं तक पढ़ सके, क्योंकि उनके गांव के स्कूल को माओवादियों ने बारूद से उड़ा दिया था। बुनियादी सुविधाओं (सड़क, बिजली, शिक्षा) से कटे कोकेरा गांव में 15-16 साल पहले नक्सलियों ने पैर पसारे। विनोद को कम उम्र में ही बाल संगठन में झोंक दिया गया और बाद में वे चौरपल्ली आरपीसी जनताना सरकार के कमांडर बना दिए गए। परिवर्तन का संकल्प विनोद स्वीकार करते हैं कि असामाजिक गतिविधियों में उनके जीवन के कीमती 16 वर्ष व्यर्थ ही व्यतीत हो गए। लेकिन शासन की विकास योजनाओं और पुनर्वास नीति ने उनकी सोच बदल दी। 15 जनवरी 2026 को विनोद ने अपने 30 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर नई शुरुआत का फैसला किया।जब जागो तब सवेरा। विनोद कुरसम ने कहा कि मैं अपने बच्चों को वह जीवन नहीं देना चाहता जो मैंने जिया। मैं उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाना चाहता हूँ।  आत्मनिर्भरता की नई उड़ान           आज विनोद दंतेवाड़ा के लिवलीहुड कॉलेज में इलेक्ट्रीशियन का ट्रेड सीख रहे हैं। उनके चेहरे की मुस्कान उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और तीन बेटे (बबलू, कांत और निलेष) हैं। उनका बड़ा बेटा वर्तमान में बालक आश्रम बरदेली में कक्षा 7 वीं का छात्र है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद विनोद अपने गांव के पास ही बिजली के उपकरणों की मरम्मत का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। विनोद की कहानी शासन की नीतियों की एक असाधारण सफलता है।

क्या है इस जगह का राज? छत्तीसगढ़ में ‘उछलती जमीन’ का रहस्य, कदम रखते ही महसूस होगा झटका

सरगुजा   छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित मैनपाट केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी 'रहस्यमयी धरती' के लिए भी दुनिया भर में कौतूहल का विषय बना हुआ है। 'मिनी शिमला' के नाम से मशहूर यह हिल स्टेशन विज्ञान और रोमांच का एक ऐसा संगम है, जिसे देख कर पर्यटक दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। आइए जानते हैं कहां यह रहस्यमयी जगह। जहां कदम रखते ही कांपने लगती है जमीन मैनपाट का सबसे बड़ा आकर्षण 'जलजली' पॉइंट है। यहां की जमीन आम पत्थरों या मिट्टी की तरह कठोर नहीं है। जैसे ही आप इस जमीन पर कदम रखते हैं या थोड़ा सा उछलते हैं, पूरी धरती किसी स्पंज के गद्दे की तरह हिलने लगती है। ऐसा महसूस होता है जैसे आप जमीन पर नहीं, बल्कि पानी पर तैरती किसी चादर पर खड़े हों। क्या है इस रहस्य के पीछे का विज्ञान? विशेषज्ञों के अनुसार, इसे वैज्ञानिक भाषा में 'क्वेकिंग बॉग' (Quaking Bog) कहा जाता है। जमीन के नीचे पानी का एक बड़ा सोते (Internal water body) होने और ऊपर वनस्पति व दलदली मिट्टी की एक मोटी लचीली परत होने के कारण यह 'बाउंस' करती है। हालांकि, शोधकर्ता आज भी इस गुत्थी को पूरी तरह सुलझाने में जुटे हैं कि इतनी ऊंचाई पर यह संरचना स्थायी रूप से कैसे बनी हुई है। 'मिनी शिमला' की मनमोहक वादियां समुद्र तल से लगभग 3,300 फीट की ऊंचाई पर बसा मैनपाट अपनी ठंडी जलवायु और धुंध भरी पहाड़ियों के कारण पर्यटकों की पहली पसंद है। पर्यटन के अन्य प्रमुख केंद्र:     उल्टा पानी: यहां गुरुत्वाकर्षण के नियम फेल होते नजर आते हैं, क्योंकि पानी ढलान के बजाय ऊपर की ओर बहता है।     टाइगर और फिश पॉइंट: घने जंगलों के बीच गिरते दूधिया झरने मन को शांति प्रदान करते हैं।     मेहता पॉइंट: यहाँ से सूर्यास्त और घाटियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। संस्कृति का संगम: छोटा तिब्बत मैनपाट की एक और खासियत यहां का तिब्बती समुदाय है। 1962 के आसपास यहां बड़ी संख्या में तिब्बती शरणार्थी बसे थे, जिसके बाद इसे 'मिनी तिब्बत' कहा जाने लगा। यहां के भव्य और शांत बौद्ध मठ आत्मिक शांति का अनुभव कराते हैं। स्थानीय बाजारों में तिब्बती ऊनी कपड़े और पारंपरिक व्यंजनों (जैसे मोमोज और थुपका) का स्वाद सैलानियों को खूब लुभाता है।  

800 मीटर का ट्रैक तैयार, जुलाई से नई रेल लाइन का संचालन, कई गांवों को मिलेगा कनेक्टिविटी

इंदौर  इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के तहत बहुप्रतीक्षित टीही टनल का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर और धार विधायक नीना वर्मा ने निर्माणाधीन टनल में करीब 70 फीट नीचे उतरकर कार्यों का जायजा लिया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने सुरंग के भीतर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग है, जिसे तय समयसीमा में पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने दावा किया है कि आगामी जून-जुलाई तक टनल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से धार के बीच सीधा रेल संचालन शुरू होने की संभावना है। हाल ही में पीथमपुर से धार के बीच टॉवर वैगन इंजन के माध्यम से सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। टनल में युद्धस्तर पर चल रहा काम रेलवे अधिकारियों के अनुसार करीब 3 किमी लंबी टीही टनल में तेजी से कार्य जारी है। अब तक लगभग 800 मीटर हिस्से में ट्रैक और पटरी बिछाने का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य भी तेज गति से प्रगति पर है। फिनिशिंग और अन्य तकनीकी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बुनियादी ढांचे को मिल रही मजबूती केंद्र सरकार की पहल पर क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। टीही टनल और इंदौर-दाहोद रेल परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है जो आने वाले समय में पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। कनेक्टिविटी से विकास को रफ्तार राज्यमंत्री ठाकुर ने कहा कि इंदौर-धार रेल लाइन शुरू होने से क्षेत्र में आवागमन आसान होगा और व्यापार-उद्योग को नई गति मिलेगी। यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी खोलेगी। परियोजना की मुख्य विशेषताएं लंबाई और मार्ग: कुल लंबाई 204.76 किमी (183 किमी मप्र में, 22 किमी गुजरात में)। मार्ग: इंदौर-टीही-पीथमपुर-सागौर- गुणावद-धार-दाहोद। वर्तमान स्थिति : इंदौर-टीही (21 किमी) तक काम पूरा हो चुका है। टीही-धार के बीच 2.9 किमी लंबी सुरंग का काम पूरा हो चुका है, ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया में है। रेलवे स्टेशन (धार) निर्माण अंतिम चरण में है। तकनीकी प्रगति: सागौर-धार खंड में ट्रैक बिछाने के लिए मशीन का उपयोग किया जा रहा है। फायदे: इस लाइन के शुरू होने से इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी लगभग 55 किमी. कम हो जाएगी।