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महंगाई भत्ता 55 से बढ़कर 58 प्रतिशत हुआ

भोपाल  वित्त विभाग ने राज्य के शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (डीए) में वृद्धि का निर्णय लिया है। जारी आदेश के अनुसार सातवें वेतनमान के अंतर्गत कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता अब दिनांक एक जुलाई 2025 से (भुगतान माह अगस्त 2025 से) 55 प्रतिशत से 3 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया है। वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार यह बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2025 से कुल 58 प्रतिशत देय माना जाएगा। हालांकि कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ 1 अप्रैल 2026 (भुगतान माह मई 2026) से प्राप्त होगा। सरकार द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 3 प्रतिशत की इस वृद्धि के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत हो जाएगा। यह निर्णय राज्य के लाखों कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आएगा। एरियर का भुगतान छह किश्तों में वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों को महंगाई भत्ते में हुई वृद्धि का लाभ एक जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की एरियर राशि का भुगतान छह समान किश्तों में दिया जाएगा। इन किश्तों का भुगतान मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में किया जाएगा। सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान वित्त विभाग ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनका निधन हो गया है, उन्हें अथवा उनके नामांकित सदस्य को एरियर की पूरी राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी। भुगतान संबंधी अन्य निर्देश महंगाई भत्ते की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक राशि को अगले पूर्ण रुपये में जोड़ा जाएगा, जबकि 50 पैसे से कम राशि को छोड़ दिया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि महंगाई भत्ते का कोई भी हिस्सा किसी अन्य प्रयोजन के लिए वेतन का भाग नहीं माना जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि महंगाई भत्ते के भुगतान पर होने वाला व्यय संबंधित विभाग के स्वीकृत बजट प्रावधान के भीतर ही सुनिश्चित किया जाए। 

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में “विज्ञान में राष्ट्रीय स्वत्व” पर हुआ व्याख्यान

भोपाल ब्रिटिश शासनकाल में भारत को कमतर आंकने का कुत्सित प्रयास किया गया और भारतीय समाज में विद्यमान परंपरागत ज्ञान में निहित वैज्ञानिक उपलब्धियों को छुपाया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने, भारत को स्वाभिमान के साथ विश्वमंच पर पुनः सशक्त होकर खड़े होने का महत्वपूर्ण अवसर दिया है। हमारा देश, अपने पूर्वजों के दर्शन "ज्ञानमेव शक्ति" के आधार पर, विश्वमंच पर पुनः सिरमौर बनेगा, इसके भारतीय ज्ञान परम्परा में विद्यमान समृद्ध वैज्ञानिक दृष्टिकोण को युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में पुनः सामने लाने की आवश्यकता है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने गुरुवार को, भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के ज्ञान-विज्ञान भवन में, प्रज्ञा प्रवाह एवं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "विज्ञान में राष्ट्रीय स्वत्व : भारतीय वैज्ञानिकों का संघर्ष" विषयक एक दिवसीय व्याख्यान के शुभारम्भ अवसर पर कही। मंत्री  परमार ने भारतीय ज्ञान परम्परा में विद्यमान वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर स्वत्व के भाव की जागृति के आलोक में अपने विचार साझा किए। उच्च शिक्षा मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में, उच्च शिक्षा में पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेश किया जा रहा है। हर क्षेत्र, हर विधा और हर विषय में, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समृद्ध परंपरागत भारतीय ज्ञान पर शिक्षाविद् व्यापक मंथन कर रहे हैं। मंत्री  परमार ने कहा कि हमारे पूर्वज प्रकृति के ऊर्जा स्रोतों का महत्व जानते थे, इसलिए उन्होंने कृतज्ञता के साथ नदी, सूर्य और पेड़ों के प्रति संरक्षण भाव से पूजन की परंपराएं स्थापित की थी। भारत का दृष्टिकोण विश्व को परिवार मानता है, इसका सशक्त उदाहरण है जब भारत ने कोविड के संकटकाल में, विभिन्न देशों को वैक्सीन उपलब्ध करायी और वसुधैव कुटुंबकम् के भारतीय दृष्टि को विश्वमंच पर गुंजायमान किया। मंत्री  परमार ने कहा कि हमें अपनी पुरातन ज्ञान परम्परा पर, स्वत्व के भाव के साथ गर्व करने की आवश्यकता है, इससे स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को विश्वमंच पर हर क्षेत्र में अग्रणी बनाने की संकल्पना सिद्ध हो सकेगी। व्याख्यान के दौरान "नेशनल सेल्फहुड इन साइंस" पुस्तक का विमोचन भी किया गया। मुख्य वक्ता  जे. नंदकुमार ने अपने व्याख्यान में कहा कि विज्ञान एक सार्वलौकिक विषय है। उन्होंने कृत्रिम मेधा (एआई) जैसी आधुनिक तकनीक की उपयोगिता पर विस्तृत प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण योगदान का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन ने स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम की प्रासंगिकता एवं विषय की महत्ता पर प्रकाश डाला। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एस. बी. सिंह द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया तथा राष्ट्रगान “जन गण मन” के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। व्याख्यान में प्रज्ञा प्रवाह के विभिन्न पदाधिकारीगण, विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलगुरु, प्राध्यापकगण, विविध शिक्षाविद्, विद्वतजन, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री से उत्तरप्रदेश के राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने सौजन्य मुलाकात की

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में उत्तरप्रदेश सरकार के राज्यमंत्री जलशक्ति विभाग  रामकेश निषाद ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए  निषाद का राज्य में स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट का प्रतीक चिन्ह और बस्तर पंडुम की पुस्तिका भेंट की।  मुख्यमंत्री  साय को  निषाद ने छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के सफल आयोजन पर हार्दिक बधाई दी। मुख्यमंत्री ने  निषाद से छत्तीसगढ़ में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर 4% रोड टैक्स लागू, खरीदना पड़ेगा महंगा सौदा

भोपाल  राज्य परिवहन विभाग ने ईवी रजिस्ट्रेशन के नियमों में संशोधन किया है। अब तक जिन इलेक्ट्रिक वाहनों पर शून्य रोड टैक्स लगता था, उन पर अब चार प्रतिशत तक टैक्स वसूलने की तैयारी कर ली गई है। इस फैसले से उन खरीदारों को बड़ा झटका लगा है, जो पर्यावरण संरक्षण और टैक्स बचत के नाम पर महंगी इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने की योजना बना रहे थे। नए नियमों के लागू होने के बाद गणित पूरी तरह बदल गया है। 20 लाख की कार पर अब 80 हजार रुपये अतिरिक्त उदाहरण के तौर पर, पहले जहां 20 लाख रुपये की इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स के नाम पर शून्य भुगतान करना पड़ता था, वहीं अब चार प्रतिशत टैक्स के हिसाब से खरीदार को लगभग 80 हजार रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। यह बदलाव न केवल कारों पर, बल्कि टू-व्हीलर और कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर भी असर डालेगा। परिवहन विभाग का कहना है कि प्रदेश में ईवी की बढ़ती संख्या और बुनियादी ढांचे (चार्जिंग स्टेशन आदि) के विकास के लिए राजस्व जुटाना आवश्यक है, इसलिए यह फैसला लिया गया है। बिक्री की रफ्तार सुस्त पड़ने की आशंका हालांकि ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ईवी की बिक्री की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। लोग अब पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड गाड़ियों के साथ ईवी की कीमतों की तुलना नए सिरे से करेंगे। टैक्स में इस बढ़ोत्तरी के कारण हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच का अंतर कम हो जाएगा, जिससे ग्राहकों का रुझान बदल सकता है। शासन के निर्देशानुसार इलेक्ट्रिक वाहनों के टैक्स स्लैब में संशोधन किया गया है। अब तक ईवी को बढ़ावा देने के लिए शत-प्रतिशत छूट दी जा रही थी। अब चार प्रतिशत का टैक्स प्रभावी किया गया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। – जितेंद्र शर्मा, आरटीओ, भोपाल  

ट्रेन फूड से परेशानी: वंदे भारत में सफर के दौरान मां-बेटे की हालत खराब

रांची. प्रीमियम ट्रेनों में बेहतर सुविधा और गुणवत्ता के दावों के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस के खाने को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। Vande Bharat Express में यात्रा कर रही रांची की एक महिला यात्री ने आरोप लगाया है कि ट्रेन में परोसे गए भोजन के बाद उन्हें तेज एलर्जी हो गई, जबकि उनके दो वर्षीय बच्चे को भी दस्त की शिकायत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रांची निवासी आयुषी सिंह 27 मार्च को ट्रेन संख्या 22500 (वाराणसी–देवघर वंदे भारत एक्सप्रेस) के कोच E1 में यात्रा कर रही थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि यात्रा के दौरान भोजन करने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें गंभीर एलर्जी की समस्या हो गई। साथ ही, उनके बच्चे की भी तबीयत खराब हो गई। भोजन की गुणवत्ता पर उठाए सवाल महिला यात्री ने अपनी शिकायत में ट्रेन के भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर मामला बताया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद ट्रेन स्टाफ का रवैया संवेदनशील नहीं था। आयुषी ने अपने दावे के समर्थन में अस्पताल की पर्ची और कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं। बताया गया है कि फिलहाल उनका इलाज रांची के मां राम प्यारी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में चल रहा है। यात्री ने यह भी कहा कि ट्रेन में दिया गया पानी का स्वाद असामान्य था, जिससे उन्हें स्वच्छता को लेकर और संदेह हुआ। क्या बोला IRCTC? इस पूरे मामले पर आईआरसीटीसी की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आईआरसीटीसी ने बयान जारी कर कहा कि 27 मार्च को ट्रेन संख्या 22500 (वाराणसी-देवघर वंदे भारत एक्सप्रेस) में परोसे गए लंच की जांच की गई थी और वह संतोषजनक पाया गया। वहीं, आरसीटीसी रांची के संयुक्त महाप्रबंधक एस.जे सोरेंग ने स्पष्ट किया कि यह ट्रेन वाराणसी-देवघर रूट की है, इसलिए इस मामले में संबंधित रूट के अधिकारी ही विस्तृत जानकारी दे सकेंगे। इस घटना के बाद एक बार फिर ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों ने भी इंटरनेट मीडिया पर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए रेलवे से सख्त कार्रवाई और बेहतर निगरानी की मांग की है।

संविदा कर्मियों के लिए खुशखबरी, 65 वर्ष तक सेवा जारी रखने की अनुमति

भोपाल  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), मध्य प्रदेश में कार्यरत संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुभव को तरजीह दी गई है। विभाग ने अपने संविदा मानव संसाधन (एचआर) मैनुअल 2025 के नियमों में बड़ा संशोधन किया है। नए प्रविधान के तहत अब 65 वर्ष की आयु पूरी कर चुके अनुभवी कर्मचारी विशेष परिस्थितियों में आगे भी अपनी सेवाएं दे सकेंगे। मिशन कार्यालय द्वारा जारी इस आदेश से उन कर्मचारियों का रास्ता साफ हो गया है जो रिटायरमेंट के बाद भी विभाग को अपनी सेवाएं देना चाहते थे। मिशन संचालक को मिले विशेष अधिकार पुराने नियमों के मुताबिक, एलोपैथिक डॉक्टरों को छोड़कर बाकी सभी संविदा कर्मचारियों के लिए काम करने की अधिकतम उम्र सीमा 65 साल ही तय थी। अब इसमें बदलाव कर मिशन संचालक को विशेष अधिकार दिए गए हैं। यदि कोई सेवानिवृत्त कर्मचारी या अधिकारी शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है, तो मिशन संचालक विशेष स्थिति में उन्हें 65 साल की उम्र के बाद भी आगामी वर्षों के लिए कार्य करने की अनुमति दे सकेंगे। एलोपैथिक डॉक्टरों पर लागू नहीं होगा नियम संशोधित नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि 65 साल के बाद कार्यकाल बढ़ाने की यह छूट एलोपैथिक स्नातक (एमबीबीएस) और स्नातकोत्तर (एमडी/एमएस) चिकित्सा अधिकारियों पर लागू नहीं होगी। विभाग का मानना है कि इस बदलाव से स्वास्थ्य मिशन को उन अनुभवी प्रशासनिक और तकनीकी स्टाफ का लाभ मिलता रहेगा, जो लंबे समय से मिशन की योजनाओं को धरातल पर उतारने का अनुभव रखते हैं। अनुभवी कर्मचारियों की कार्यक्षमता का लाभ लेने के लिए एचआर मैनुअल में यह संशोधन किया गया है। फिट होने की स्थिति में मिशन संचालक के पास कार्यकाल बढ़ाने का अधिकार रहेगा। – डॉ. राकेश बौहरे, वरिष्ठ संयुक्त संचालक (एचआर), एनएचएम म.प्र.  

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की गाज और बेरोजगार हुए इंटर शिक्षकों के भविष्य पर संकट, समायोजन का सरकारी वादा अब भी अधूरा

जमशेदपुर झारखंड के डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई अब पूरी तरह बंद कर दी गई है। 31 मार्च को सभी कॉलेजों में इंटर के शिक्षकों का आखिरी कार्यदिवस रहा। इसके बाद उन्हें कॉलेज नहीं आने को कह दिया गया है। सभी शिक्षकों की सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। शिक्षकों के साथ साथ इंटर सेक्शन के शिक्षकेतर कर्मचारियों को भी अल्टीमेटम दे दिया गया है। उन्हें जून के बाद काम से हटा दिया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था के साथ हजारों शिक्षकों के चूल्हे पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 31 मार्च की वह तारीख, जो अक्सर वित्तीय वर्ष के समापन और नई शुरुआत का प्रतीक होती है, इस बार झारखंड के अंगीभूत महाविद्यालयों में कार्यरत पांच हजार से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए ब्लैक डे साबित हुआ है। नई शिक्षा नीति का अनुपालन नई शिक्षा नीति के अनुपालन और राज्य सरकार के कड़े रुख के बीच डिग्री कॉलेजों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पर स्थायी रूप से पूर्ण विराम लग गया है। इस फैसले ने न केवल कॉलेजों के बड़े शैक्षणिक ढांचे को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि उन संविदा शिक्षकों के भविष्य को भी अधर में लटका दिया है, जिन्होंने अपने जीवन के दो-तीन दशक इन्हीं कक्षाओं में छात्रों का भविष्य संवारने में खपा दिए। आज स्थिति यह है कि इन शिक्षकों के पास न नौकरी बची है और न ही आने वाले कल की कोई स्पष्ट उम्मीद। ईएमआई भरने का कोई जरिया नहीं बचा कॉलेजों में इंटरमीडिएट सेक्शन के बंद होने का असर इतना व्यापक है कि इसने एक साथ हजारों घरों की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है। वे शिक्षक, जो कल तक गौरव के साथ कक्षाओं में व्याख्यान देते थे, आज इन शिक्षकों की माली हालत इस कदर खराब हो चुकी है कि घर का राशन जुटाना, बच्चों की स्कूल फीस भरना और बुजुर्ग माता-पिता की दवाइयों का खर्च उठाना बड़ी चुनौती बन गया है। कई शिक्षकों ने जमा-पूंजी घर बनाने या बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए कर्ज लेने में लगा दी थी, लेकिन अब उनके सामने बैंक की ईएमआई भरने का कोई जरिया नहीं बचा है। स्कूलों में समायोजित करने का आश्वासन सरकार की ओर से पिछले दिनों बार-बार यह आश्वासन दिया गया था कि डिग्री कॉलेजों से इंटरमीडिएट की पढ़ाई हटने की स्थिति में इन अनुभवी शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी प्लस टू (उच्च माध्यमिक) स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। शिक्षा विभाग के गलियारों में इस नीति को लेकर कई बार चर्चाएं हुईं और मंत्रियों द्वारा सार्वजनिक मंचों से यह घोषणा भी की गई कि किसी भी कर्मचारी को सड़क पर नहीं आने दिया जाएगा। लेकिन 31 मार्च की समय सीमा बीतने के बाद भी समायोजन की वह फाइल कहीं दबी हुई है। आश्वासन की जिस घुट्टी के सहारे ये शिक्षक अबतक काम कर रहे थे, वह अब कड़वी हकीकत में बदल चुकी है। शिक्षक-कर्मचारी खाली हाथ इस पूरे घटनाक्रम के बीच बड़ा सवाल महाविद्यालयों के इंटरमीडिएट सेक्शन के बैंक खातों में जमा करोड़ों रुपये को लेकर भी उठ रहे हैं। झारखंड अंगीभूत महाविद्यालय इंटरमीडिएट शिक्षक संघ ने इस मुद्दे पर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को घेरना शुरू कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, कोल्हान भर के कॉलेजों के इंटर सेक्शन के खातों में छात्रों के नामांकन और अन्य शुल्कों से जमा करोड़ों की आंतरिक राशि मौजूद है। संघ का स्पष्ट कहना है कि जब यह पैसा इन्हीं शिक्षकों और कर्मचारियों की मेहनत और छात्रों के माध्यम से जमा हुआ है तो इसे केवल बैंक खातों में सड़ाने या किसी और मद में खर्च करने के बजाय उन शिक्षकों को सम्मानजनक विदाई राशि के रूप में क्यों नहीं दिया जा रहा है, जो आज दाने-दाने को मोहताज हैं। समायोजन का सरकार का वादा अब भी अधूरा आज राज्य के हजारों शिक्षकों और इंटर कर्मचारियों के चेहरे पर छाई मायूसी केवल एक नौकरी जाने का दुख नहीं है, बल्कि उस भरोसे के टूटने का दर्द है, जो उन्होंने व्यवस्था पर किया था। सरकार का प्लस टू स्कूलों में समायोजन का वादा अब चुनावी जुमले जैसा प्रतीत होने लगा है। बेरोजगार हुए इन शिक्षकों में महिला शिक्षकों की संख्या भी अधिक है, जिनके लिए इस उम्र में दोबारा करियर शुरू करना पहाड़ जैसा कठिन है। कई शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जवानी इन कॉलेजों को दे दी, इस उम्मीद में कि कभी न कभी उनकी सेवा स्थायी होगी या उन्हें बेहतर विकल्प मिलेगा, लेकिन बदले में उन्हें केवल अनिश्चितता और अपमान मिला है।

इंदौर में आधुनिक ग्रेडिंग एवं कलर सॉर्टिंग प्लांट का शुभारंभ कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम : कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि इंदौर जिले के ग्राम अरण्या में अत्याधुनिक ग्रेडिंग एवं कलर सॉर्टिंग प्लांट का शुभारंभ से क्षेत्र के किसानों एवं व्यापारियों के लिए आधुनिक तकनीक के माध्यम से बेहतर गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा तेज़ प्रोसेसिंग सुनिश्चित हो सकेगी। यह पहल कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम है। कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा आधुनिक तकनीकों के उपयोग से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा तथा कृषि व्यापार अधिक संगठित और प्रतिस्पर्धी बनेगा। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। ऐसे आधुनिक प्लांट किसानों को बेहतर ग्रेडिंग सुविधा प्रदान करेंगे, जिससे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी। मंत्री  कंषाना ने कहा कि इस नई सुविधा से कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के साथ स्थानीय कृषि व्यापार को नई गति मिलेगी। क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे कृषि विकास के लिए सकारात्मक कदम बताया है। मंत्री  कंषाना ने कहा कि आधुनिक ग्रेडिंग और कलर सॉर्टिंग प्लांट कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के लिए उपयोग की जाने वाली एक उन्नत तकनीक है। इसमें कच्चे माल को हॉपर में डाला जाता है, जहाँ सफाई, ग्रेडिंग और रंग के आधार पर छंटाई की जाती है। इसमें फोटोसेंसर और हाई-स्पीड कैमरे लगे होते हैं जो खराब या रंगहीन दानों को पहचान कर उन्हें अलग कर देते हैं।यह गेहूं, चावल, चना, मूंगफली, तुलसी, कलौंजी, चिया सीड और किनवा जैसे विभिन्न अनाज और बीजों के लिए उपयोग किया जाता है। खराब, क्षतिग्रस्त या अलग रंग के दानों को हटाने से उत्पाद की ग्रेडिंग बेहतर होती है। बेहतरीन रंग और सफाई वाले अनाज की बाजार में अधिक कीमत मिलती है। मानव श्रम कम लगता है और शुद्धता अधिक होती है।  

महात्मा गांधी नरेगा योजना के अलग-अलग पैरामीटर्स पर जिले ने हासिल की कई उपलब्धियां

रायपुर सर्वाधिक परिवारो को रोजगार, सर्वाधिक मानव दिवस का रोजगार सहित सर्वाधिक दिव्यांगजनों को रोजगार देने के मामले में कबीरधाम प्रदेश में प्रथम स्थान पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत कबीरधाम जिले ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना का बेहतर क्रियान्वयन कर कई उपलब्धियां हासिल करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में कबीरधाम जिले ने ग्रामीणों को सर्वाधिक मानव दिवस का रोजगार देने, सर्वाधिक परिवारों को रोजगार, सर्वाधिक दिव्यांग जनों को रोजगार देने सहित अनेको पैरामीटर पर कई उपलब्धियां अपने नाम की। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा लगातार विभागीय समीक्षाओं के दौरान शासकीय योजनाओं से ग्रामीणों को लाभान्वित करने प्रोत्साहित किया जाता रहा है। और आज इसी का परिणाम है कि कबीरधाम जिले ने मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में बेहतर प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में एक बार फिर अपना नाम प्रथम पंक्ति में स्थापित किया है। लगातार प्रयास के मिले सुखद नतीजे- कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा कलेक्टर कबीरधाम श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए निरंतर समीक्षा की गई। ग्राम पंचायतो की मांग पर बहुत से निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए और कार्य प्रारंभ कर ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। वनांचल क्षेत्र से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक बड़ी मात्रा में निर्माण कार्य चल रहे हैं। समय पर मजदूरी भुगतान हो यह सुनिश्चित किया गया। वर्तमान में ग्रामीणों के लिए पर्याप्त मात्रा में रोजगार उपलब्ध है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11 हजार 466 परिवारों को 100 दिवस का रोजगार मिला है और वे आर्थिक रूप से लाभान्वित हुए है।हमारा सतत प्रयास है कि मनरेगा योजना से समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को लाभान्वित किया जाए। जल संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन एवं आजीविका जैसे प्रमुख घटकों के क्षेत्र में योजना से पर्याप्त कार्य हो रहे है।  रोजगार के साथ आजीविका को बढ़ाना प्रमुख उद्देश्य – सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया की ग्रामीणों के मांग पर रोजगार उपलब्ध कराना, समय पर निर्माण कार्य की स्वीकृति एवं सभी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो इन बातों पर विशेष ध्यान दिया। इसीलिए जिले के सभी क्षेत्रों में ग्रामीणों को पर्याप्त रोजगार मिला और हम प्रदेश में बेहतर कर पाए। आजीविका डबरी, नया तालाब निर्माण, कच्ची नाली निर्माण, पुराने तालाबों का गहरीकरण जैसे अनेक जल संरक्षण के कार्याे के साथ आजीविका के लिए कुकुट पालन शेड, पशुपालन शेड जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। मार्च माह के अंतिम सप्ताह में प्रारंभ हुए नए कार्यों से जिले की उपलब्धि और बढ़ेगी तथा हमारे ग्रामीणों को और अधिक लाभ होना अपेक्षित है। उल्लेखनीय है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से ग्रामीणों को बड़ी मात्रा में रोजगार का अवसर मिलता है। योजना से ग्रामीणों को रोजगार के साथ गांव में विभिन्न परिसंपत्तियों का निर्माण होता है। योजना के क्रियान्वयन में कबीरधाम जिला लगातार कई वर्षों से प्रदेश में अग्रणी बना हुआ है ग्रामीणों को इसका लाभ मिल रहा है। मनरेगा योजना के पैरामीटर्स जिसमें कबीरधाम ने हासिल की उपलब्धि सर्वाधिक मानव दिवस रोजगार का सृजन-जिले के ग्रामीणों को 58 लाख 54 हजार 40 मानव दिवस का रोजगार मिला। जो प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। सर्वाधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार- जिले के 1 लाख 42 हजार 482 ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिला, जो प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। सर्वाधिक दिव्यांग जनों को रोजगार- जिले में 2 हजार 538 दिव्यांग जनों को 58 हजार 493 मानव दिवस का रोजगार दिया गया। जो प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। ग्रामीण महिलाओं को भी मिला रोजगार का बेहतर अवसर- योजना अंतर्गत 1 लाख 30 हजार 160 महिलाएं पंजीकृत है और इन्हें 29 लाख 33 हजार 959 मानव दिवस का रोजगार मिला है। महिलाओं को रोजगार देने के मामले में कबीरधाम जिला पूरे प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। 124 करोड़ 53 लाख से अधिक का मजदूरी भुगतान- मनरेगा में रोजगार पाने वाले जिले के ग्रामीणों को 124 करोड़ 53 लाख 46 हजार रुपए का मजदूरी भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में जारी किया गया। मजदूरी भुगतान के मामले में कबीरधाम जिला प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। ग्रामीणों को मिला मजदूरी भुगतान से उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।

नैन्सी ग्रेवाल का आखिरी वीडियो वायरल, लाल बैग लेकर घर से निकलीं, बहन का इमोशनल संदेश

चंडीगढ़  कनाडा में हत्या का शिकार हुई पंजाबी इन्फ्लुएंसर नैन्सी ग्रेवाल का आखिरी वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में नैन्सी लाल कार में बैठने से पहले हाथ में लाल बैग लिए घर से निकलती दिखाई दे रही है। यह वीडियो उनकी बहन अलीशा ग्रेवाल ने इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा- आई मिस यू सिस्टर एवरी सिंगल डे।  चार मार्च की रात करीब साढ़े 9 बजे हमलावरों ने नैन्सी पर चाकू से हमला कर दिया था। कैनेडियन पुलिस के अनुसार, हमले के दौरान वह जान बचाने के लिए भागी, लेकिन हमलावरों ने कई वार किए। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   हरियाणा में जन्मी नैन्सी का परिवार बाद में पंजाब के लुधियाना और फिर जालंधर में रहा। वह कनाडा के विंडसर इलाके में रहती थी। वीडियो में वह 4 मार्च को दोपहर 3:02 बजे काम पर जाते हुए नजर आती है। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर होगा। बता दें कि 4 मार्च को चाकू मारकर नैन्सी की हत्या कर दी गई थी। कैनेडियन पुलिस के मुताबिक रात करीब साढ़े 9 बजे हमलावर घर में घुसे। उस समय नैन्सी अपनी किसी बुजुर्ग पेशेंट को देखने के लिए गई थी। जब हमला हुआ तो वह जंगल की तरफ भागी। जहां 2 हमलावरों ने उसके पेट में कई बार चाकू से वार किए। पुलिस ने पहुंचकर नैन्सी को अस्पताल पहुंचाया। लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। नैन्सी का जन्म हरियाणा में हुआ था। लेकिन बाद में उनका परिवार लुधियाना फिर जालंधर शिफ्ट हो गया। वह कनाडा के विंडसर इलाके में रहती थी। वीडियो में क्या दिख रहा… अलीशा की तरफ से अपलोड किए वीडियो में साफ दिख रहा है कि नैन्सी 4 मार्च को 3 बजकर 2 मिनट पर अपने काम पर जा रही है। नैन्सी ने ब्लैक टॉप पहन रखा है और हाथ में बैग पकड़े हुए घर से बाहर निकल रही है। इसके बाद वह लॉन में पार्क की गई अपनी लाल कार में बैठती है और निकल जाती है। इसके बाद से नैन्सी कभी घर नहीं लौटी। बहन बोली- मैं तुम्हें हर रोज मिस करती हूं नैन्सी नैन्सी ग्रेवाल की बहन अलीशा ने अपने इंस्टा अकाउंट पर वीडियो शेयर कर लिखा कि नैन्सी मैं तु्म्हें हर रोज मिस करती हूं। ये उस दिन का लास्ट वीडियो है जब रात को नैन्सी का कत्ल कर दिया गया। काम पर जाने से पहले वो अपने घर में टहल रही है। वह कभी नहीं जानती थी कि आज के बाद इस घर में लौटकर आएगी। कनाडा पुलिस ने खालिस्तानी लिंक स्वीकार किया नैन्सी ग्रेवाल की हत्या को लगभग 1 महीना होने को है। लेकिन अभी तक कोई भी कातिल नहीं पकड़ा गया है। कनाडा पुलिस ने शुरुआती जांच में खालिस्तानी लिंक होने से मना कर दिया था। लेकिन अब खालिस्तानी लिंक होने की बात स्वीकार करते हुए इस एंगल से भी जांच को आगे बढ़ाया है। हालांकि खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने वीडियो जारी कर दावा किया था कि नैन्सी की हत्या के पीछे सिख फॉर जस्टिस का कोई हाथ नहीं है। खालिस्तान और पंजाब मुद्दों पर बोलती थी नैन्सी नैन्सी खालिस्तानियों के साथ ही पंजाब के हर मुद्दे पर बात करती थी। कत्ल से पहले अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया के नाभा जेल से बाहर आने पर डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों पर भी तीखी टिप्पणी की थी। इसके अलावा श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी गड़गज के खिलाफ भी वीडियो अपलोड किए थे। थ्रेट के चलते उसने कुछ हफ्तों से सोशल मीडिया पर वीडियो डालने भी बंद कर दिए थे।