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अब स्कूल में नहीं चलेगा मोबाइल, UP में नई पॉलिसी लागू

लखनऊ उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में 1 अप्रैल से शुरू हो रहा नया शैक्षणिक सत्र (2026-27) छात्र-छात्राओं के लिए एक नई सुबह लेकर आ रहा है। अब स्कूलों की प्रार्थना सभा केवल प्रार्थना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह ज्ञान और सूचना का केंद्र बनेगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बढ़ते 'स्क्रीन टाइम' के दुष्परिणामों को देखते हुए छात्रों के लिए समाचार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है, जबकि कैंपस में मोबाइल लाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। प्रार्थना सभा में 'न्यूज बुलेटिन' माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब छात्र प्रार्थना सभा में प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अखबारों की सुर्खियां पढ़ेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों में पढ़ने की आदत (Reading Habit) विकसित करना है। इस पहल के तहत केवल खबर पढ़ना ही काफी नहीं होगा, बल्कि शिक्षकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे समाचारों में आए कठिन शब्दों का सही उच्चारण सुनिश्चित कराएं। साथ ही, उन शब्दों का अर्थ और वाक्य प्रयोग भी समझाया जाएगा, जिससे छात्रों की भाषा दक्षता और सामान्य ज्ञान (GK) दोनों में सुधार होगा। मानसिक स्वास्थ्य की चिंता परिषद ने किशोरावस्था में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल की लत से बच्चों में आंखों की रोशनी कमजोर होना, एकाग्रता की कमी और ऑनलाइन गेम्स के प्रति बढ़ते रुझान जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं। इन्हीं को देखते हुए स्कूलों में छात्रों के मोबाइल लाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। परिषद का मानना है कि इससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर सकारात्मक असर पड़ेगा। तकनीक का सही संतुलन दिलचस्प बात यह है कि एक ओर जहां मोबाइल पर पाबंदी है, वहीं दूसरी ओर परिषद छात्रों को 'डिजिटल साक्षर' बनाने की ओर भी कदम बढ़ा रहा है। नई व्यवस्था के तहत:     सभी पंजीकृत विद्यार्थियों की व्यक्तिगत ईमेल आईडी बनाई जाएगी।     शिक्षण के लिए स्मार्ट क्लास और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाया जाएगा।     छात्रों को 'खान एकेडमी', 'द टीचर एप', 'मनोदर्पण' और 'करियर एडवाइजर' जैसे पोर्टल्स के व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा का मेल शिक्षा विभाग की यह पहल पारंपरिक पुस्तकों-अखबारों के प्रति जुड़ाव और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बीच एक बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश है। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के पहले जारी आदेशों को अब जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने जशपुर में मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का किया शुभारंभ : खिलाड़ी बास्केटबॉल शतरंज कैरम और टेबल टेनिस खेल का करेंगे अभ्यास

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुर में 3 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से निर्मित मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर प्रदान करता है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री  साय ने स्टेडियम का अवलोकन किया और वहां उपस्थित खिलाड़ियों के साथ खेल का आनंद भी लिया।उन्होंने खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि सरकार प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी उचित मंच मिल सके। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त साधन है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर दिया जाए। मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में खिलाड़ियों को बास्केटबॉल के साथ-साथ शतरंज, कैरम और टेबल टेनिस जैसे खेलों का अभ्यास करने की आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। यह स्टेडियम न केवल खेल गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि जशपुर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविन्द भगत,  कृष्णा राय, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत अध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष  गंगाराम भगत,  विजय आदित्य सिंह जुदेव, सरगुजा कमिश्नर  नरेन्द्र दुग्गा, आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  लाल उमेद सिंह, डीएफओ  शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, खिलाड़ी और कोच उपस्थित थे।

ममता की छांव और उम्मीद की नई किरण : अनामिका जैन के सेवा संकल्प की अनकही दास्तान

भोपाल समाज में अक्सर जिन्हें हम 'विक्षिप्त' कहकर अनदेखा कर देते हैं, उनके पीछे छिपी पीड़ा और खोई हुई पहचान को वापस लौटाने का बीड़ा मंदसौर की एक बेटी ने उठाया है। संजीत (मंदसौर) की रहने वाली मती अनामिका जैन आज उन बेसहारा महिलाओं के लिए 'मसीहा' बन चुकी हैं, जिनका अपना कोई ठिकाना नहीं था। एक छोटे से विचार से शुरू हुआ बदलाव का सफर अनामिका जी का सेवा का सफर 17-18 साल पहले उनके पिता के साथ शुरू हुआ था। मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) की पढ़ाई कर चुकीं अनामिका ने जब समाज के सबसे उपेक्षित तबके—निराश्रित और विक्षिप्त महिलाओं—की स्थिति देखी, तो उनका मन पसीज गया। शुरुआत में वे सात वर्षों तक इन महिलाओं की देखरेख कर उन्हें इंदौर या उज्जैन के अनाथालयों में भेजती थीं। लेकिन कई बार जगह की कमी के कारण जब उन्हें वहां से वापस लौटा दिया जाता, तो वह बेबसी अनामिका जी को सोने नहीं देती थी। इसी पीड़ा ने 'अनामिका जनकल्याण सेवा समिति विक्षिप्त आश्रय गृह' की नींव रखी। रेवास देवड़ा रोड पर बना 'अपना घर' वर्ष 2018 में प्रशासन के सहयोग से उन्होंने एक शासकीय भवन (500 क्वार्टर, रेवास देवड़ा रोड) में इस आश्रय गृह की स्थापना की। यह मध्य प्रदेश का ऐसा पहला आश्रम बना, जो न केवल महिलाओं को छत देता है, बल्कि उनके पुनर्वास (Rehabilitation) पर केंद्रित है।इन महिलाओं को दवा से ज्यादा एक परिवार और प्यार की जरूरत होती है," अनामिका जी कहती हैं। उनके आश्रम में त्यौहार केवल रस्म नहीं, बल्कि खुशियों का संगम होते हैं, जहाँ इन महिलाओं को पूरी तरह पारिवारिक माहौल दिया जाता है। तकनीक और ममता का मेल: गूगल से मिलाते हैं बिछड़े परिवार अनामिका जी का कार्य केवल आश्रय देने तक सीमित नहीं है। पुलिस विभाग द्वारा लाई गई महिलाओं का वे इलाज करवाती हैं और उनकी याददाश्त वापस लाने के लिए खेल-खेल में गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। • सफलता का आँकड़ा: अब तक 54 महिलाओं को ठीक कर उनके अपनों से मिलवाया जा चुका है। • डिजिटल मदद: गूगल मैप्स और ऑनलाइन माध्यमों से वे उन महिलाओं के पते ढूंढती हैं जो वर्षों से अपने घर का रास्ता भूल चुकी थीं। चुनौतियों को बनाया ताकत: मिला 'रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय पुरस्कार' इस कठिन मार्ग में अनामिका जी को अपने पति का भी भरपूर सहयोग मिला। उनके कार्यों की गूंज शासन तक भी पहुंची। महिला उत्पीड़न को रोकने, बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ने और वंचितों के पुनर्वास के लिए उन्हें राज्य सरकार द्वारा 'रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। भविष्य का सपना: आत्मनिर्भरता का केंद्र अनामिका जैन केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का सपना देखती हैं। वे कुष्ठ बस्ती और गाडोलिया बस्ती में स्कूल चलाने, महिलाओं की शराब छुड़वाने और विधवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का कार्य भी कर रही हैं। उनका लक्ष्य एक ऐसा विशाल पुनर्वास केंद्र बनाना है, जहाँ हर महिला को शिक्षा और रोजगार मिल सके।"महिलाओं की संवेदनशीलता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। अगर हम एक-दूसरे का हाथ थाम लें, तो कोई भी समाज असहाय नहीं रहेगा।"  

रामनवमी झड़पों से भड़के संत, केंद्र से बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की अपील

अयोध्या शुक्रवार को रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कुछ हिस्सों में दो समुदायों के बीच झड़प हुई। हिंसा में एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मामले को शांत करते हुए पुलिस ने प्रभावित जांगीपुर और रघुनाथगंज इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है। इस घटना को लेकर अब अयोध्या के संतों ने विरोध दर्ज कराया है और ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा है। महामंडलेश्वर विष्णु दास ने शोभा यात्रा पर हुई पत्थरबाजी की घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, "ममता बनर्जी कट्टर समुदाय को पाल कर रखती हैं और एक ही समुदाय को खुश करने की कोशिश करती हैं, लेकिन अब उनकी सत्ता जाने वाली है क्योंकि उन्होंने हमारे भगवान श्री राम की शोभा यात्रा पर पथराव किया है। इन्होंने गैंग बना रखी है, जिसका काम सिर्फ पथराव करना और हमारे समुदाय को नुकसान पहुंचाना है। ममता जैसे लोग ही हैं, जो भारत में रहकर शरिया कानून लाना चाहते हैं।" उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश जैसे हालात हैं, जहां हिंदुओं पर अत्याचार होता रहा है, और इसके पीछे ममता सरकार का बड़ा हाथ है, लेकिन अब समय आ गया है कि वहां के हिंदू और सनातनी लोग उन्हें जवाब देने वाले हैं और सत्ता से बेदखल करने वाले हैं। वहीं, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी रामनवमी के दिन पश्चिम बंगाल में हुई घटना को पीड़ादायक बताया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की जरूरत है क्योंकि अब बात हाथ से निकल चुकी है। ममता बनर्जी आतंकवादियों के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल को भारत से अलग करना चाहती हैं। जैसा हाल पहले बांग्लादेश का हुआ था, अब उसी नक्शेकदम पर पश्चिम बंगाल पहुंच चुका है। वहां भी हिंदुओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है और अगर स्थिति को संभाला नहीं गया तो हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।" जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि बंगाल की पुलिस भी सरकार और आतंकियों के इशारे पर काम करती है और हिंदूओं की किसी मामले में सुनवाई नहीं होती है।

प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की कला सिखाने शिक्षकों को दी गई प्रकृति शिक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित मध्यप्रदेश प्रकृति संरक्षण शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (एमपीटीटीएनसी 2025–2028) के अंतर्गत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2021 में हुए कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़-26 में प्रारंभ किए गए मिशन LiFE (लाइफ स्टायल फॉर एनवारनमेंट) के उद्देश्यों से प्रेरित यह प्रशिक्षण डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान (भोपाल) और पीसीपीसी के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया। इसका लक्ष्य प्रकृति के अविवेकपूर्ण उपभोग के स्थान पर सचेत और विचारशील उपयोग को बढ़ावा देना है। शिक्षक प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को प्रकृति संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली के संबंध में प्रशिक्षित कर विद्यार्थियों को जिम्मेदार और जागरुक नागरिक के रूप में विकसित करना है। पन्ना नेचर कैंप्स के अनुभव से मिली प्रेरणा शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की परिकल्पना पूर्व में आयोजित पन्ना नेचर कैंप्स की सफलता से प्रेरित हो कर की गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के सहयोग से संचालित इन शिविरों ने पन्ना टाइगर पुनर्स्थापन परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग 15 वर्षों तक चले इस प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया कि संरक्षण कार्यों में समाज और समुदाय की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण के संवैधानिक दायित्व पर फोकस शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस तथ्य पर विशेष जोर दिया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48(क) राज्यों को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का दायित्व देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(ग) प्रत्येक नागरिक को प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करने और सभी जीवों के प्रति करुणा रखने का मौलिक कर्तव्य सौंपता है। इसके अंतर्गत वन, झील, नदियाँ और वन्यजीवों की सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में रेखांकित किया गया है। प्रकृति संरक्षण की चुनौतियों पर चर्चा शिक्षक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में प्रकृति संरक्षण से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई है। इसमें तेजी से बढ़ती जनसंख्या, आर्थिक विकास की तीव्र गति और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को प्रमुख कारण बताया गया। विकास की प्रक्रिया में पारिस्थितिकी सुरक्षा के उपायों को शामिल करना भी आवश्यक है, जिससे प्रकृति स्वयं को पुनर्जीवित कर सके। ‘ईको-सिटीजन’ तैयार करने में शिक्षकों की भूमिका शिक्षक प्रशिक्षण में बताया गया कि विद्यार्थी समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सबसे प्रभावी वाहक होते हैं। शिक्षक उनके साथ सबसे अधिक समय बिताते हैं और उन्हें सही दिशा में प्रेरित कर सकते हैं। प्रशिक्षित शिक्षक विद्यार्थियों में भी प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर सकेंगे और ये विद्यार्थी भविष्य में जिम्मेदार और संवेदनशील ईको-सिटीजन के रूप में समाज में योगदान दे सकेंगे।

अगले 3 दिन यूपी में मौसम की करवटें जारी, बारिश का सिलसिला रहेगा बरकरार

लखनऊ मौसम का मिजाज हर दिन करवट बदल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव की वजह से एक बार फिर से 29 मार्च से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर शुरू होने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, बारिश का यह दौर एक अप्रैल तक जारी रहने की संभावना जताई जा रही है जो 30 और 31 मार्च को प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अपना प्रभाव डालेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 29 मार्च को 3 से 5 डिग्री तक तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है और देर शाम या रात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश हो सकती है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि बारिश का यह क्रम 30 व 31 मार्च को तीव्र हो सकता है और लखनऊ समेत बाकी हिस्सों में भी प्रभाव डाल सकता है। इस वजह से कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हो सकती है। बारिश की वजह से 31 मार्च तक तापमान में 3 से 5 डिग्री की ही गिरावट के बाद फिर से अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री की क्रमिक बढ़ोतरी हो सकती है। रविवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 30 मार्च को हवा के झोंकों की रफ्तार बढ़कर 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक होने के भी आसार जताए जा रहे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 मार्च को कोई खास परिवर्तन नहीं होगा लेकिन 30 मार्च को संभाग में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ झोंकेदार हवा 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के आसार हैं। शनिवार को झांसी में अधिकतम तापमान सबसे अधिक 38.6 डिग्री दर्ज किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में क्रिकेट एकेडमी का किया शुभारंभ

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुर में क्रिकेट एकेडमी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में खेल सुविधाओं का विस्तार कर युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे भविष्य में राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें। जशपुर में क्रिकेट खेल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर पालिका और ग्रीन क्रिकेट जशपुर के बीच एमओयू भी किया गया है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को संगठित प्रशिक्षण और बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। मुख्यमंत्री  साय ने इस दौरान सरगुजा ओलंपिक की विजेता बास्केटबॉल टीम से मुलाकात की और खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन और उपलब्धियां प्रदेश के युवाओं में खेल के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाती हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  राम प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविन्द भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष  गंगाराम भगत, कृष्णा राय,  विजय आदित्य सिंह जुदेव, सरगुजा कमिश्नर  नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  लाल उमेद सिंह, डीएफओ  शशि कुमार सहित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

मेहनतकश श्रमिकों का सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुर में आयोजित जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ईंधन आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार की प्रभावी विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंधों के कारण आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम का वातावरण बन रहा है।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पेट्रोल, डीज़ल या गैस का अनावश्यक भंडारण न करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे पहले ईंधन की उपलब्धता बनी रही है, वैसे ही आगे भी निर्बाध रूप से मिलती रहेगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित 12 विभिन्न योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों को बच्चे के जन्म पर 20,000 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा मकान निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। श्रमिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा खरीदने में भी सहायता दी जा रही है, जिसे पहले 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करता है, तो उसे 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके साथ ही मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पहले 100 बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 200 सीट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए “दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है, जिसके तहत ऐसे मजदूरों को सालाना 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है। उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में लाखों भूमिहीन मजदूरों के खातों में लगभग 495 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जनधन खातों के माध्यम से अब योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बीच में ही खत्म हो जाता था, लेकिन अब पूरी राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रोविडेंट फंड (PF) प्रणाली को यूनिवर्सल बनाया गया है, जिससे श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में काम करने पर अपना पीएफ लाभ जारी रख सकते हैं। इसके अलावा न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर और निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन के अंत में श्रमिकों को प्रदेश के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके परिश्रम और योगदान से ही राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रदेशभर में आयोजित हो रहे श्रमिक सम्मेलन—श्रम मंत्री श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचे और उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 20,000 रुपए, मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही 10वीं और 12वीं में टॉप-10 में आने वाले श्रमिकों के बच्चों को 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो वर्षों में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई है। इसके अलावा “अटल शिक्षा योजना” के तहत श्रमिकों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और उनके जीवन स्तर में सुधार हो। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने भी राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए श्रमिकों से इनका अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की। इस अवसर पर श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष  शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष  अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यशप्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष जशपुर  गंगाराम भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, श्रमिक बंधु एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बाघापुराना में बंटी कुर्सी: चेयरमैन आप, वाइस चेयरमैन कांग्रेस

मोगा (पंजाब)   इस चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर 14 सदस्यों के समर्थन से चेयरमैन तथा वाइस चेयरमैन के पद पर जीत हासिल की। आम आदमी पार्टी की सरबजीत कौर चेयरमैन और कांग्रेस की चरणजीत कौर वाइस चेयरमैन चुनीं गईं। शिरोमणि अकाली दल को 12 वोट मिले। पहले 17 मार्च को हुए थे चुनाव बाघापुराना ब्लॉक समिति में कुल 25 सदस्यों का चुनाव हुआ था, जिसमें अकाली दल के 13, कांग्रेस पार्टी के 3, एक निर्दलीय और आम आदमी पार्टी के आठ सदस्य जीतकर आए थे। 17 मार्च को हुए पहले चुनाव के दौरान अकाली दल और कांग्रेस ने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया था कि उनके सदस्यों को मतदान करने से रोका गया। आरोपों के बावजूद आम आदमी पार्टी ने अपना चेयरमैन और वाइस चेयरमैन घोषित कर दिया था। इसके बाद शिरोमणि अकाली दल ने मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें चुनाव दोबारा करवाने की मांग की गई। हाईकोर्ट ने दिए थे 28 मार्च को चुनाव के आदेश इस दौरान तत्कालीन एसडीएम ने भी पंजाब चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर मोगा डिप्टी कमिश्नर पर दबाव के आरोप लगाए गए, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए बाघापुराना के एसडीएम बबनदीप सिंह वालिया को कोट में पेश होने को कहा था। 23 मार्च को एसडीएम कोर्ट में पेश हुए जिसके बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को 28 मार्च को दोबारा चुनाव करवाने के निर्देश दिए। अदालत के आदेश पर आज प्रशासन की निगरानी में निष्पक्ष तरीके से मतदान कराया गया जिसमें आम आदमी पार्टी की सरबजीत कौर चेयरमैन और कांग्रेस की चरणजीत कौर वाइस चेयरमैन बनीं। विधायक अमृतपाल सिंह सुखानंद ने बताया कि आज दोबारा हुए चुनाव में उनकी जीत हुई है। उन्होंने कहा कि 17 मार्च को हुए पिछले चुनाव में भी सरबजीत कौर चेयरमैन बनी थीं, लेकिन विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप आज पूरी तरह से झूठ साबित हो गए। उन्होंने बताया कि इस चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को मिलाकर कुल 14 सदस्यों का समर्थन मिला और सर्वसम्मति से चेयरमैन व वाइस चेयरमैन का चयन किया गया। विपक्ष को 12 वोट मिले। उन्होंने बताया कि 17 मार्च को हुए चुनाव के दौरान विपक्ष द्वारा की गई कथित गुंडागर्दी के मामले में भी कार्रवाई करने की बात कही गई। डीसी मोगा सागर सेतिया ने बताया कि आज हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत ब्लॉक समिति के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन पदों के लिए चुनाव करवाए गए। यह चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए, जिसमें 25 सदस्यों के साथ विधायक ने अपना वोट दिया। पूरी चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई। सभी के सहयोग से चुनाव सफलतापूर्वक और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का अवलोकन

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जशपुर में  निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कार्य की गति और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहे निर्माण पर संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल के पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र के लोगों के लिए जीवनरेखा साबित होगा और मरीजों को यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी।   इस अत्याधुनिक चिकित्सालय का निर्माण एनटीपीसी लारा के सीएसआर फंड से लगभग 35 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से किया जा रहा है। अस्पताल का भूमिपूजन 7 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री  साय द्वारा किया गया था। वर्तमान में इस अस्पताल का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। प्रस्तावित 6 मंजिला भवन में ग्राउंड फ्लोर सहित चार मंजिलों का ढलाई कार्य पूर्ण हो चुका है।  अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर में इमरजेंसी सेवाएं, प्रथम तल पर ओपीडी, द्वितीय एवं तृतीय तल पर वार्ड, चतुर्थ तल पर आईसीयू, पंचम तल पर ऑपरेशन थियेटर संचालित होगा। यह चिकित्सालय अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में 15 ओपीडी, 4 आईसीयू, 4 ऑपरेशन थियेटर, फिजियोथेरेपी, पैथोलॉजी लैब, सीटी स्कैन, डायलिसिस, एक्स-रे, इमरजेंसी वार्ड, एमआरआई, ईसीजी सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जूदेव,  भरत सिंह, कृष्ण कुमार राय,  विजय आदित्य प्रताप सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।