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MP वित्त विभाग की नई गाइडलाइन: बाबू और अफसर को 10 दिन में फाइलें निपटाने का आदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा समय-समय पर जो घोषणाएं की जाती हैं या मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव मानिट (समयसीमा) के जो मामले होते हैं, उन सभी से जुड़ी फाइलें वित्त विभाग में कोई भी अधिकारी एक समयसीमा से अधिक रोककर नहीं रख सकेगा। अधिकतम दस दिनों में फाइलों का निपटारा करके आगे बढ़ानी होंगी। इसके लिए वित्त विभाग ने अपने अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शिका तैयार की है। इसमें सबके दायित्व को स्पष्ट किया गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोई असमंजस की स्थिति ना रहे। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री सहित विशेष व्यक्तियों से प्राप्त होने वाले पत्रों को तुरंत कार्रवाई करना होगा। इसका रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में रखे जाने वाले विषयों की संक्षेपिका तैयार करना, विभागीय अभिमत समय पर देना, विभिन्न आयोगों से प्राप्त होने वाले प्रतिवेदन व अनुशंसाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करने, समितियों की बैठक समय पर संपन्न करवाना, अवकाश, पेंशन, सामान्य भविष्य निधि से जुड़े मामलों का समयावधि में प्रस्तुतीकरण सुनिश्चित करवाना अपर सचिव और उपसचिव का दायित्व होगा। इसके साथ ही फाइलों के निपटारे की समय सीमा भी स्पष्ट कर दी गई है। इसमें मंत्री परिषद को भेजे जाने वाले प्रकरण, नई योजना के करणप्रकरण में 10 दिन, चिकित्सा की प्रतिपूर्ति के मामलों में अधिकतम पांच दिन, बजट राशि से संबंधित प्रतिबंध में पांच दिन, आहरण सीमा बीस प्रतिशत की कटौती, विदेश यात्रा की अनुमति की फाइल पांच दिन, मंत्री से जुड़ी नस्ती और अनुपूरक बजट के प्रस्ताव की फाइल को तीन दिन में आगे बढ़ाना होगा। मनमाना पर्यवेक्षण शुल्क नहीं ले सकेंगे वहीं, वित्त विभाग में निर्माण कार्यों पर लिए जाने वाले पर्यवेक्षण शुल्क को लेकर भी नई व्यवस्था बना दी है, जो एक अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। 10 करोड़ रुपये से कम लागत वाले निर्माण कार्य की एजेंसी विभाग है तो तकनीकी स्वीकृति पर पर्यवेक्षण शुल्क शून्य रहेगा। जबकि, निर्माण एजेंसी शासन की कोई संस्था है तो यह एक प्रतिशत रहेगा। 10 करोड रुपये से अधिक के निर्माण कार्य में एजेंसी शासन होने पर पर्यवेक्षण शुल्क तीन प्रतिशत और अन्य संस्था होने पर छह प्रतिशत की दर से लिया जाएगा।

एमपी में सख्त कार्रवाई का दौर, 8 कलेक्टर और 7 एसपी निलंबित, सीएम ने लापरवाह अफसरों पर की कार्रवाई

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव की सख्त प्रशासनिक शैली के चलते सवा दो साल में आठ कलेक्टर और सात एसपी को पद से हटाया। उनकी कार्रवाई का में तीन बड़े फैक्टर उभरकर सामने आए हैं। इसमें कानून-व्यवस्था में चूक, भ्रष्टाचार/रिश्वत और प्रशासनिक लापरवाही शामिल हैं। प्रशासनिक लापरवाही सीएम को बिलकुल पसंद नहीं है, इसलिए ऐसे अफसरों पर तुरंत कार्रवाई की गई। यहीं नहीं सीएम ने जनता से बदसलूकी, भ्रष्टाचार के मामले सामने आते ही तुरंत एक्शन लिया है। इसके माध्यम से सीएम ने कड़ा संदेश देने की कोशिश की हैं।  प्रशासनिक ढिलाई पर सख्त एक्शन के कुछ मामले मुख्यमंत्री के एक्शन के सबसे ज्यादा मामले ऐसे रहे, जहां प्रशासनिक लापरवाही या जिम्मेदारी निभाने में ढिलाई सामने आई। हाल ही में सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी पर दफ्तर में नियमित नहीं बैठने और जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें हटा दिया गया।  वहीं, अगस्त 2024 में सागर दीवार हादसे में 9 बच्चे की मौत के बाद कलेक्टर दीपक आर्य, एसपी अभिषेक तिवारी और एसडीएम संदीप सिंह को हटाया गया। जनवरी 2026 में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी कांड में निगमायुक्त दिलीप यादव और अपर आयुक्त रोहित सोनिया को हटाया गया। दिसंबर 2023 गुना बस हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद कलेक्टर तरुण राठी, एसपी विजय कुमार खत्री और परिवहन आयुक्त संजय कुमार झा पर कार्रवाई हुई। दिसंबर 2023 में ही हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लॉस्ट मामले में एसपी संजीव कुमार कंचन और कलेक्टर ऋषि गर्ग को हटाया गया। उक्त  मामलों से पता चलता है कि लापरवाही से जुड़ी घटनाओं और मामलों में मोहन सरकार ने सबसे अधिक कड़ा रुख अपनाया और कार्रवाई की। जिन मामलों में जनहानि हुई, उनमें तो संबंधित अधिकारियों को बिलकुल नहीं बख्शा गया।  हिंसा होने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर भी नपे राज्य में जिन मामलों में कानून-व्यवस्था बिगड़ी या हिंसक घटनाएं हुईं, वहां सबसे तेज और कड़ी कार्रवाई देखने को मिली। मार्च 2025 में मऊगंज के गड़रा हत्याकांड विवाद के दौरान युवक सनी द्विवेदी की हत्या और पुलिस टीम पर हमले में एएसआई रामगोविंद गौतम की मौत के बाद कलेक्टर अजय श्रीवास्तव और एसपी रसना ठाकुर को हटा दिया गया। इसी तरह जून 2024 में सिवनी में 50 से अधिक गोवंश की हत्या के बाद तनावपूर्ण हालात बने। इसके बाद कलेक्टर क्षितिज सिंघल और एसपी राकेश कुमार सिंह पर भी कार्रवाई हुई। इससे साफ है कि जहां भी कानून व्यवस्था बिगड़ी और जनसभावनाएं प्रभावित हुई, वहां सीधे शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिरी।   भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की झलक दिखी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में भी सरकार का रुख सबसे सख्त नजर आया है, जहां सीधे अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई की गई। इसी माह गुना के हवाला रिश्वत कांड में गुजरात के व्यापारी से एक करोड़ रुपये जब्त करने के बाद 20 लाख रुपये लेकर छोड़ देने के आरोप में एसपी अंकित सोनी को हटा दिया गया। वहीं, थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मी भी सस्पेंड हुए। जनवरी 2026 अशोकनगर के आनंदपुर साहिब ट्रस्ट मामले में रिश्वत के आरोपों के चलते कलेक्टर आदित्य सिंह को पद से हटाया गया। यह कार्रवाई बिना किसी औपचारिक शिकायत के आधार पर की गई। भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ने बिना किसी जांच के त्वरित और कड़ा फैसला लिया। विवादित मामलों में भी अफसरों पर गाज गिरी प्रदेश में अधिकारियों के व्यवहार और व्यक्तिगत विवाद भी कार्रवाई के कारण बने और उन्हें पदों से हटाया गया। इससे पता चलता है कि सार्वजनिक व्यवहार और छवि भी अब प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा मानी जा रही हैं। शाजापुर कलेक्टर किशोर कान्याल को उनकाे एक बैठक में ड्राइवर से औकात पूछने वाला वीडियो वायरल होने के बाद हटाया गया।  जून 2025 कटनी एसपी अभिजीत रंजन को सीएसपी और उनके परिवार की शिकायतों के बाद पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया। भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह से हुए सार्वजनिक विवाद के बाद सितंबर 2025 में भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को हटा दिया गया। 

मां शारदा मंदिर मैहर: 9 दिनों में 10 लाख भक्तों ने किए दर्शन, चौथे दिन रही भीड़ सबसे ज्यादा

 मैहर चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां शारदा धाम में इस वर्ष आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। नवरात्रि के पहले दिन से लेकर महानवमी तक नौ दिनों में देशभर से लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में भक्तों की सबसे ज्यादा भीड़ चौथे दिन रही।  किस दिन कितने भक्त मंदिर पहुंचे:      पहले दिन: करीब 90 हजार श्रद्धालु     दूसरे दिन: 85 हजार     तीसरे दिन: 1 लाख 30 हजार से अधिक     चौथे दिन: 1 लाख 53 हजार 505     पांचवें दिन: 1 लाख 35 हजार 991     छठे दिन: 78 हजार 838     सातवें दिन: 1 लाख 11 हजार 689     आठवें दिन: 92 हजार 324     नवमी (महानवमी): 97 हजार 202 नवरात्रि मेले के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा के लिए  2 एडिशनल एसपी, 8 डीएसपी, 10 इंस्पेक्टर, 15 सब-इंस्पेक्टर और लगभग 560 पुलिस जवान पूरे मेला क्षेत्र में तैनात रहे। 125 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और 2 ड्रोन के माध्यम से भीड़ और गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। 16 कार्यपालिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए और कई मेडिकल टीमें सक्रिय रहीं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था हो सके। मंदिर में  19 से 27 मार्च तक वीआईपी दर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, जिससे आम श्रद्धालुओं को बिना भेदभाव के दर्शन का अवसर मिल सका। 

इंदौर के चौराहे पर 23 मीटर की ऊंचाई पर लटका 400 टन लोहा, इंजीनियरिंग की अनोखी मिसाल

इंदौर   इंदौर के लवकुश चौराहे पर बन रहे डबल डेकर फ्लाईओवर के निर्माण में एक अहम उपलब्धि हासिल की गई है। यहां शहर की सबसे लंबी 65 मीटर की स्टील गर्डर को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। करीब 400 टन वजनी इस विशाल गर्डर को जमीन से 23 मीटर ऊंचाई पर लगाने की जटिल प्रक्रिया करीब 12 घंटे तक चली। इस गर्डर के जुड़ने से शहर में यातायात को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।  तीन विंच मशीनों की मदद से पूरा हुआ चुनौतीपूर्ण काम लवकुश चौराहे पर बो स्ट्रिंग स्पान के निर्माण के दौरान इस भारी गर्डर को हवा में ही जोड़ा गया। इसे सही जगह तक लाने के लिए तीन विंच मशीनों का इस्तेमाल किया गया। इनमें से दो मशीनों से गर्डर को आगे की ओर खींचा गया, जबकि एक मशीन को पीछे से संतुलन बनाए रखने और रोकने के लिए लगाया गया था। अब जैक पुश तकनीक के जरिए इसे दूसरी तरफ के बो स्ट्रिंग स्पान पर ले जाने की तैयारी की जा रही है। पहली गर्डर का काम पूरा होने के बाद अब दूसरी स्टील गर्डर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इंदौर विकास प्राधिकरण बना रहा भव्य फ्लाईओवर इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा लवकुश चौराहे पर कुल 1452 मीटर लंबा डबल डेकर फ्लाईओवर बनाया जा रहा है। इस परियोजना में 19 सेगमेंटल स्पान, 4 कंपोजिट गर्डर स्पान और एक खास बो स्ट्रिंग स्पान शामिल है। जिस बो स्ट्रिंग स्पान पर यह गर्डर रखी गई है, उसकी लंबाई 65 मीटर है और यहां ऐसी दो स्टील गर्डर लगाई जानी हैं। पहली गर्डर का निर्माण कार्य पूरा कर उसे तय स्थान पर स्थापित कर दिया गया है। रात भर चली गर्डर लगाने की प्रक्रिया गर्डर को स्थापित करने की प्रक्रिया गुरुवार रात 11 बजे शुरू हुई, जो शुक्रवार सुबह 11 बजे पूरी हुई। गर्डर को खींचकर सही जगह तक लाने में ही करीब 5 घंटे लगे। पुलिंग शुरू करने से पहले गर्डर को रीले पर चढ़ाया गया और उसके संतुलन की पूरी जांच की गई। सुरक्षा के लिहाज से इस दौरान नीचे से गुजरने वाले यातायात को पूरी तरह बंद कर दिया गया, ताकि कोई हादसा न हो। शहर का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर पॉइंट बना आकर्षण यह 400 टन वजनी गर्डर जिस बो स्ट्रिंग पर रखी गई है, उसकी ऊंचाई 23 मीटर है, जो इंदौर के सभी फ्लाईओवर में सबसे ज्यादा है। इस फ्लाईओवर की खास बात यह है कि इसके नीचे से मेट्रो और एक अन्य फ्लाईओवर गुजर रहा है। इसी वजह से गर्डर को ऊंचाई पर ही जोड़ना पड़ा। इस जटिल काम के लिए 900 टन की कुल क्षमता वाली दो क्रेन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें एक 600 टन और दूसरी 300 टन की क्रेन शामिल थी। इन्हीं क्रेन की मदद से भारी एंगल और निर्माण सामग्री को 23 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचाया गया। 

डीप-टेक नवाचार और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा संकल्प से समाधान” कार्यक्रम में भी होंगे शामिल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार आज  को इंदौर में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान वे सिंहासा आईटी पार्क में स्थापित “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” का शुभारंभ करेंगे, दशहरा मैदान में आयोजित “संकल्प से समाधान अभियान” कार्यक्रम में भाग लेंगे और अमृत 2.0 योजना में विभिन्न जल आपूर्ति परियोजनाओं का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे। प्रदेश में डीप-टेक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र होगा सुदृढ़ सिंहासा आईटी पार्क में स्थापित “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” की स्थापना आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर का टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन एवं रिसर्च पार्क) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के संयुक्त सहयोग से की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करना, उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, उन्नत विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश को सशक्त बनाना और उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लॉन्चपैड सेंटर का अवलोकन करेंगे तथा यहां संचालित नवाचार एवं स्टार्टअप गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त करेंगे। यह केंद्र मध्यप्रदेश को डीप-टेक नवाचार आधारित विकास एवं उद्यमिता का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। “संकल्प से समाधान” अभियान से मजबूत हुआ जनविश्वास मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दशहरा मैदान में “संकल्प से समाधान अभियान” के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर हितलाभ वितरण करेंगे। प्रदेश में 12 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक संचालित इस अभियान के अंतर्गत इंदौर जिले में 1 लाख 44 हजार 912 आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। अभियान चार चरणों में संचालित हुआ, जिसमें ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक शिविर आयोजित कर विभिन्न विभागों की 100 से अधिक सेवाओं को शामिल किया गया।समस्याओं का मौके पर समाधान सुनिश्चित होने से शासन के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है। अमृत 2.0 के तहत जल आपूर्ति को मिलेगी मजबूती मुख्यमंत्री अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत नर्मदा जल प्रदाय योजना के चौथे चरण का भूमि-पूजन करेंगे। इस परियोजना से शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ किया जाएगा तथा वर्ष 2040 तक की बढ़ती आबादी की मांग को पूरा करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी। पैकेज–2 : पाइपलाइन एवं टनल निर्माण पैकेज–2 के अंतर्गत वांचू पॉइंट से राऊ सर्कल तक लगभग 39 किलोमीटर लंबी 2235 मिमी व्यास की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। साथ ही लगभग 2870 मीटर लंबाई में आधुनिक तकनीक से टनल निर्माण किया जाएगा तथा राऊ सर्कल पर क्लोरीनेशन सिस्टम स्थापित कर जल की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।इस पैकेज की लागत लगभग 448.23 करोड़ रुपये है तथा कार्य 30 माह में पूर्ण किया जाएगा। पैकेज–3 : ओवरहेड टैंक एवं वितरण नेटवर्क पैकेज–3 के अंतर्गत 20 नए ओवरहेड टैंक (15 से 35 लाख लीटर क्षमता) बनाए जाएंगे तथा 29 मौजूदा टैंकों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही लगभग 27.4 किमी फीडर पाइपलाइन, 4.7 किमी ग्रेविटी मेन लाइन और 685 किमी वितरण लाइन बिछाई जाएगी।लगभग 1.26 लाख घरेलू जल कनेक्शन तथा 1.08 लाख से अधिक वाटर मीटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे 24×7 जल प्रदाय सुनिश्चित होगा। इस पैकेज की लागत लगभग 410.50 करोड़ रुपये है और इसे 36 माह में पूर्ण किया जाएगा। पैकेज–4 : विस्तारित जल वितरण प्रणाली पैकेज–4 के अंतर्गत 20 नए ओवरहेड टैंक एवं 46 मौजूदा टैंकों का उन्नयन किया जाएगा। साथ ही 25.82 किमी फीडर लाइन और 892 किमी वितरण पाइपलाइन बिछाई जाएगी।इस पैकेज के माध्यम से लगभग 1.21 लाख नए घरेलू कनेक्शन और 1.62 लाख से अधिक वाटर मीटर लगाए जाएंगे, जिससे जल वितरण प्रणाली को और अधिक स्मार्ट एवं प्रभावी बनाया जाएगा। इस कार्य की लागत लगभग 497.23 करोड़ रुपये है तथा इसे 36 माह में पूर्ण किया जाएगा। सिरपुर एसटीपी : स्वच्छता और जल पुनः उपयोग की दिशा में बड़ी पहल मुख्यमंत्री सिरपुर क्षेत्र में 20 एमएलडी क्षमता के अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण करेंगे। लगभग 62.72 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना के अंतर्गत 10 प्रमुख सीवर आउटफॉल को ट्रैप कर अशोधित सीवेज को सीधे तालाब में जाने से रोका गया है। परियोजना में 8.5 किमी सीवर लाइन, 5 किमी ट्रीटेड वाटर रीयूज लाइन तथा 0.5 एमएल क्षमता का ओवरहेड टैंक स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से उपचारित जल का उपयोग शहर के लगभग 25 उद्यानों, हरित क्षेत्रों एवं अन्य कार्यों में किया जाएगा।  

1 अप्रैल से टोल की दरें बढ़ेंगी, 5-10% तक महंगा होगा सफर, जबलपुर से अन्य शहरों का सफर भी होगा महंगा

जबलपुर  वाहन चालकों के लिए 1 अप्रैल से सफर महंगा होने जा रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा टोल टैक्स में 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा रही है, जो हर साल की तरह इस बार भी लागू होंगी। इस बढ़ोतरी का सीधा असर जबलपुर से नागपुर, रायपुर, प्रयागराज और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों की यात्रा पर पड़ेगा। वाहन चालकों को अब हर टोल प्लाजा पर ज्यादा राशि चुकानी होगी। 5 से 10 रुपए तक बढ़ेगा टोल जानकारी के अनुसार, जबलपुर के आसपास स्थित टोल प्लाजा पर कार चालकों को 5 से 10 रुपए तक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। वहीं FASTag के जरिए मिलने वाले करीब 3 हजार रुपए के एनुअल पास में भी लगभग 75 रुपए तक की बढ़ोतरी की संभावना है। कैसे तय होता है टोल रेट टोल टैक्स की दरें होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) के आधार पर तय की जाती हैं। हर साल के अंत में इंडेक्स का मूल्यांकन कर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय नए रेट जारी करता है। टोल की राशि सड़क की लंबाई और उस पर बने इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे फ्लाईओवर, अंडरपास, टनल आदि के आधार पर भी तय होती है। जहां ज्यादा सुविधाएं होती हैं, वहां टोल भी अधिक लगता है। लोगों में नाराज वाहन चालकों का कहना है कि टोल बढ़ाना समझ में आता है, लेकिन सड़कों का मेंटेनेंस भी उतना ही जरूरी है। भोपाल रोड की हालत खराब बताई जा रही है, जबकि बरेला के आगे अभी भी काम जारी है। इसके बावजूद पूरा टोल वसूला जा रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी है। कारों के लिए अभी इतना लिया जा रहा है टोल बरगी टोल (नागपुर रोड)    165 रुपए सिहोरा टोल (प्रयागराज रोड)    130 रुपए शहपुरा टोल (भोपाल रोड)    90 रुपए बरेला टोल (रायपुर रोड)    35 रुपए जबलपुर से दमोह, सागर अभी हाईवे घोषित है, लेकिन बना नहीं है, जिसके चलते यह अभी स्टेट हाइवे की श्रेणी में आता है। इसी तरह से जबलपुर से पाटन, तेंदुखेड़ा जबलपुर से गोटेगांव में स्टेट हाईवे को टोल है। वाहन मालिकों का कहना है कि टोल टैक्स बढ़ाए जाना अच्छा है, पर सड़क का मेंटेनेंस भी जरूरी होता है। उनका कहना है कि सड़क को साल भर मेनटेन नहीं किया जाता है। भोपाल रोड अभी भी खराब है। इसके बाद भी टोल पूरा देना पड़ता है। इसी तरह बरेला के आगे काम चल रहा है। एक अप्रैल से सालाना पास के लिए 3075 रुपए देने होंगे NHAI ने कार के लिए बनाए जाने वाले सालाना पास की कीमतों में 75 रुपए की बढ़ोतरी की। ये बढ़ोतरी भी 1 अप्रैल से लागू होगी। अभी सालाना पास 3 हजार रुपए में बनता है, जिसमें 200 टोल बूथ क्रॉस करने की लिमिट होती है। 1 अप्रैल से बनने वाले सालाना पास के लिए अब 3075 रुपए देने पड़ेंगे। सालाना रिवीजन के तहत बढ़ी कीमतें सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, जब फास्टैग एनुअल पास की शुरुआत की गई थी, तभी इसके नोटिफिकेशन में हर साल कीमतों की समीक्षा और बदलाव का प्रावधान रखा गया था। यह बढ़ोतरी उसी सालाना रिवीजन प्रक्रिया का हिस्सा है। देश भर में हाईवे टोल की दरों में बदलाव के लिए जो फॉर्मूला तय है, उसी के आधार पर इस बार 2.5% की वृद्धि की गई है। 52 लाख से ज्यादा लोग इस्तेमाल कर रहे हैं यह पास सरकार ने 15 अगस्त से इस खास एनुअल पास की शुरुआत की थी, जिसे उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर रिस्पॉन्स मिला है। अब तक 52 लाख से ज्यादा हाईवे कार यूजर्स इस स्कीम से जुड़ चुके हैं। इस पास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे एक साल में कितनी भी बार रिचार्ज कराया जा सकता है और यह लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए काफी किफायती साबित होता है। 31 मार्च तक पुराने रेट पर खरीदने का मौका अगर आप अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं और इस बढ़ोतरी से बचना चाहते हैं, तो आपके पास अभी मौका है। अधिकारियों ने बताया कि जो यूजर्स 31 मार्च तक अपना पास रिचार्ज करा लेंगे या नया पास खरीदेंगे, उन्हें यह पुराने रेट यानी 3,000 रुपए में ही मिल जाएगा। 1 अप्रैल की सुबह से सिस्टम में नई दरें अपडेट कर दी जाएंगी।

अब स्कूल में नहीं चलेगा मोबाइल, UP में नई पॉलिसी लागू

लखनऊ उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में 1 अप्रैल से शुरू हो रहा नया शैक्षणिक सत्र (2026-27) छात्र-छात्राओं के लिए एक नई सुबह लेकर आ रहा है। अब स्कूलों की प्रार्थना सभा केवल प्रार्थना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह ज्ञान और सूचना का केंद्र बनेगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बढ़ते 'स्क्रीन टाइम' के दुष्परिणामों को देखते हुए छात्रों के लिए समाचार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है, जबकि कैंपस में मोबाइल लाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। प्रार्थना सभा में 'न्यूज बुलेटिन' माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब छात्र प्रार्थना सभा में प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अखबारों की सुर्खियां पढ़ेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों में पढ़ने की आदत (Reading Habit) विकसित करना है। इस पहल के तहत केवल खबर पढ़ना ही काफी नहीं होगा, बल्कि शिक्षकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे समाचारों में आए कठिन शब्दों का सही उच्चारण सुनिश्चित कराएं। साथ ही, उन शब्दों का अर्थ और वाक्य प्रयोग भी समझाया जाएगा, जिससे छात्रों की भाषा दक्षता और सामान्य ज्ञान (GK) दोनों में सुधार होगा। मानसिक स्वास्थ्य की चिंता परिषद ने किशोरावस्था में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल की लत से बच्चों में आंखों की रोशनी कमजोर होना, एकाग्रता की कमी और ऑनलाइन गेम्स के प्रति बढ़ते रुझान जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं। इन्हीं को देखते हुए स्कूलों में छात्रों के मोबाइल लाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। परिषद का मानना है कि इससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर सकारात्मक असर पड़ेगा। तकनीक का सही संतुलन दिलचस्प बात यह है कि एक ओर जहां मोबाइल पर पाबंदी है, वहीं दूसरी ओर परिषद छात्रों को 'डिजिटल साक्षर' बनाने की ओर भी कदम बढ़ा रहा है। नई व्यवस्था के तहत:     सभी पंजीकृत विद्यार्थियों की व्यक्तिगत ईमेल आईडी बनाई जाएगी।     शिक्षण के लिए स्मार्ट क्लास और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाया जाएगा।     छात्रों को 'खान एकेडमी', 'द टीचर एप', 'मनोदर्पण' और 'करियर एडवाइजर' जैसे पोर्टल्स के व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा का मेल शिक्षा विभाग की यह पहल पारंपरिक पुस्तकों-अखबारों के प्रति जुड़ाव और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बीच एक बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश है। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के पहले जारी आदेशों को अब जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने जशपुर में मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का किया शुभारंभ : खिलाड़ी बास्केटबॉल शतरंज कैरम और टेबल टेनिस खेल का करेंगे अभ्यास

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुर में 3 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से निर्मित मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर प्रदान करता है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री  साय ने स्टेडियम का अवलोकन किया और वहां उपस्थित खिलाड़ियों के साथ खेल का आनंद भी लिया।उन्होंने खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि सरकार प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी उचित मंच मिल सके। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त साधन है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर दिया जाए। मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में खिलाड़ियों को बास्केटबॉल के साथ-साथ शतरंज, कैरम और टेबल टेनिस जैसे खेलों का अभ्यास करने की आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। यह स्टेडियम न केवल खेल गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि जशपुर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविन्द भगत,  कृष्णा राय, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत अध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष  गंगाराम भगत,  विजय आदित्य सिंह जुदेव, सरगुजा कमिश्नर  नरेन्द्र दुग्गा, आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  लाल उमेद सिंह, डीएफओ  शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, खिलाड़ी और कोच उपस्थित थे।

ममता की छांव और उम्मीद की नई किरण : अनामिका जैन के सेवा संकल्प की अनकही दास्तान

भोपाल समाज में अक्सर जिन्हें हम 'विक्षिप्त' कहकर अनदेखा कर देते हैं, उनके पीछे छिपी पीड़ा और खोई हुई पहचान को वापस लौटाने का बीड़ा मंदसौर की एक बेटी ने उठाया है। संजीत (मंदसौर) की रहने वाली मती अनामिका जैन आज उन बेसहारा महिलाओं के लिए 'मसीहा' बन चुकी हैं, जिनका अपना कोई ठिकाना नहीं था। एक छोटे से विचार से शुरू हुआ बदलाव का सफर अनामिका जी का सेवा का सफर 17-18 साल पहले उनके पिता के साथ शुरू हुआ था। मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) की पढ़ाई कर चुकीं अनामिका ने जब समाज के सबसे उपेक्षित तबके—निराश्रित और विक्षिप्त महिलाओं—की स्थिति देखी, तो उनका मन पसीज गया। शुरुआत में वे सात वर्षों तक इन महिलाओं की देखरेख कर उन्हें इंदौर या उज्जैन के अनाथालयों में भेजती थीं। लेकिन कई बार जगह की कमी के कारण जब उन्हें वहां से वापस लौटा दिया जाता, तो वह बेबसी अनामिका जी को सोने नहीं देती थी। इसी पीड़ा ने 'अनामिका जनकल्याण सेवा समिति विक्षिप्त आश्रय गृह' की नींव रखी। रेवास देवड़ा रोड पर बना 'अपना घर' वर्ष 2018 में प्रशासन के सहयोग से उन्होंने एक शासकीय भवन (500 क्वार्टर, रेवास देवड़ा रोड) में इस आश्रय गृह की स्थापना की। यह मध्य प्रदेश का ऐसा पहला आश्रम बना, जो न केवल महिलाओं को छत देता है, बल्कि उनके पुनर्वास (Rehabilitation) पर केंद्रित है।इन महिलाओं को दवा से ज्यादा एक परिवार और प्यार की जरूरत होती है," अनामिका जी कहती हैं। उनके आश्रम में त्यौहार केवल रस्म नहीं, बल्कि खुशियों का संगम होते हैं, जहाँ इन महिलाओं को पूरी तरह पारिवारिक माहौल दिया जाता है। तकनीक और ममता का मेल: गूगल से मिलाते हैं बिछड़े परिवार अनामिका जी का कार्य केवल आश्रय देने तक सीमित नहीं है। पुलिस विभाग द्वारा लाई गई महिलाओं का वे इलाज करवाती हैं और उनकी याददाश्त वापस लाने के लिए खेल-खेल में गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। • सफलता का आँकड़ा: अब तक 54 महिलाओं को ठीक कर उनके अपनों से मिलवाया जा चुका है। • डिजिटल मदद: गूगल मैप्स और ऑनलाइन माध्यमों से वे उन महिलाओं के पते ढूंढती हैं जो वर्षों से अपने घर का रास्ता भूल चुकी थीं। चुनौतियों को बनाया ताकत: मिला 'रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय पुरस्कार' इस कठिन मार्ग में अनामिका जी को अपने पति का भी भरपूर सहयोग मिला। उनके कार्यों की गूंज शासन तक भी पहुंची। महिला उत्पीड़न को रोकने, बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ने और वंचितों के पुनर्वास के लिए उन्हें राज्य सरकार द्वारा 'रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। भविष्य का सपना: आत्मनिर्भरता का केंद्र अनामिका जैन केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का सपना देखती हैं। वे कुष्ठ बस्ती और गाडोलिया बस्ती में स्कूल चलाने, महिलाओं की शराब छुड़वाने और विधवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का कार्य भी कर रही हैं। उनका लक्ष्य एक ऐसा विशाल पुनर्वास केंद्र बनाना है, जहाँ हर महिला को शिक्षा और रोजगार मिल सके।"महिलाओं की संवेदनशीलता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। अगर हम एक-दूसरे का हाथ थाम लें, तो कोई भी समाज असहाय नहीं रहेगा।"  

रामनवमी झड़पों से भड़के संत, केंद्र से बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की अपील

अयोध्या शुक्रवार को रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कुछ हिस्सों में दो समुदायों के बीच झड़प हुई। हिंसा में एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मामले को शांत करते हुए पुलिस ने प्रभावित जांगीपुर और रघुनाथगंज इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है। इस घटना को लेकर अब अयोध्या के संतों ने विरोध दर्ज कराया है और ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा है। महामंडलेश्वर विष्णु दास ने शोभा यात्रा पर हुई पत्थरबाजी की घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, "ममता बनर्जी कट्टर समुदाय को पाल कर रखती हैं और एक ही समुदाय को खुश करने की कोशिश करती हैं, लेकिन अब उनकी सत्ता जाने वाली है क्योंकि उन्होंने हमारे भगवान श्री राम की शोभा यात्रा पर पथराव किया है। इन्होंने गैंग बना रखी है, जिसका काम सिर्फ पथराव करना और हमारे समुदाय को नुकसान पहुंचाना है। ममता जैसे लोग ही हैं, जो भारत में रहकर शरिया कानून लाना चाहते हैं।" उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश जैसे हालात हैं, जहां हिंदुओं पर अत्याचार होता रहा है, और इसके पीछे ममता सरकार का बड़ा हाथ है, लेकिन अब समय आ गया है कि वहां के हिंदू और सनातनी लोग उन्हें जवाब देने वाले हैं और सत्ता से बेदखल करने वाले हैं। वहीं, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी रामनवमी के दिन पश्चिम बंगाल में हुई घटना को पीड़ादायक बताया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की जरूरत है क्योंकि अब बात हाथ से निकल चुकी है। ममता बनर्जी आतंकवादियों के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल को भारत से अलग करना चाहती हैं। जैसा हाल पहले बांग्लादेश का हुआ था, अब उसी नक्शेकदम पर पश्चिम बंगाल पहुंच चुका है। वहां भी हिंदुओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है और अगर स्थिति को संभाला नहीं गया तो हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।" जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि बंगाल की पुलिस भी सरकार और आतंकियों के इशारे पर काम करती है और हिंदूओं की किसी मामले में सुनवाई नहीं होती है।