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राजस्थान पंचायत चुनाव में बड़ा आरक्षण अपडेट, 1.30 लाख वार्ड पंच सीटों की तस्वीर साफ

जयपुर आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं। राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर गुरुवार को बड़ा अपडेट सामने आया। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में हजारों गांवों की चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। उपखंड मुख्यालयों पर हुई लॉटरी में सरपंच के 14,403 और वार्ड पंच के 1,30,584 पदों के लिए आरक्षण तय किया गया। खास बात यह है कि प्रदेश में करीब 7,200 महिला सरपंच और करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच चुनी जाएंगी। सरपंच के 14 हजार से ज्यादा पदों का आरक्षण तय आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं। महिला आरक्षण के चलते बड़ी संख्या में गांवों की कमान इस बार महिलाओं के हाथ में जाएगी। करीब 7,200 पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। ऐसे में कई गांवों में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे पुरुष दावेदारों की उम्मीदों पर भी आरक्षण लॉटरी ने असर डाला है। वार्ड पंचों में भी हजारों सीटें महिलाओं के लिए सरपंचों के साथ-साथ 1,30,584 वार्ड पंच पदों के लिए भी आरक्षण तय कर दिया गया है। इनमें 21,962 वार्ड SC, 19,117 वार्ड ST और करीब 15 हजार वार्ड OBC के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं, कुल आरक्षण व्यवस्था के तहत करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच भी चुनी जाएंगी। यानी पंचायत चुनाव में इस बार महिलाओं की भागीदारी बड़े स्तर पर दिखाई देगी। 4 जिलों में बड़ा उलटफेर, सभी सरपंच सीट ST के लिए आरक्षण लॉटरी में सबसे ज्यादा चर्चा बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों की हो रही है। इन चार जिलों में सरपंच के सभी 1,253 पद ST वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक बांसवाड़ा में 327, डूंगरपुर में 442, प्रतापगढ़ में 277 और सलूंबर में 207 सरपंच पद हैं। इन सभी पदों पर ST वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगे। इन जिलों में आरक्षण का सीधा असर उन दावेदारों पर पड़ेगा जो लंबे समय से सरपंच चुनाव की तैयारी कर रहे थे। अब टिकट और चुनावी रणनीति भी आरक्षण के हिसाब से तय होगी। बाड़मेर में दोबारा निकली लॉटरी, क्यों मचा विवाद? इधर बाड़मेर पंचायत समिति में सरपंच पदों की आरक्षण लॉटरी के दौरान विवाद खड़ा हो गया। लॉटरी में कपूरड़ी ग्राम पंचायत को SC वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इस पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराई। आपत्ति करने वालों का कहना था कि ग्राम पंचायत में SC वर्ग की आबादी नहीं है। मामला सामने आने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरी पंचायत समिति की आरक्षण लॉटरी दोबारा निकालने के आदेश दिए। इससे बाड़मेर की पंचायत समिति में कई सीटों का आरक्षण बदलने की संभावना बन गई है। अब चुनाव की तारीखों का इंतजार सरपंच और पंच के साथ-साथ प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के आरक्षण का पूरा ब्योरा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है। संभावना जताई जा रही है कि शनिवार या सोमवार तक राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की घोषणा कर सकता है। इसके बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह से चुनाव की अधिसूचना जारी होने और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी करनी है। ऐसे में आरक्षण लॉटरी के बाद अब राजस्थान के गांवों में चुनावी सरगर्मी तेज होना तय माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस गांव की कमान महिला के हाथ जाएगी और किस सीट पर कौन सा वर्ग मैदान में उतरेगा?

राजस्थान में 15 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं की समीक्षा, 2029 तक पक्के घरों का लक्ष्य

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में राज उन्नति की 9वीं बैठक में करीब 15 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विकास कार्यों में तेजी लाने, समय पर स्वीकृति, निविदा और कार्यादेश जारी करने तथा योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब, युवा, नारी शक्ति और किसान विकास परियोजनाओं के केंद्र में हैं। अधिकारियों को फील्ड में जाकर योजनाओं की निगरानी करने और देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए। राज्य के सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए करीब 12,500 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। प्रदेश के सभी 41 जिलों के 65,308 राजकीय विद्यालयों का तकनीकी सर्वे पूरा हो चुका है। सर्वे में 3,587 जर्जर स्कूल भवनों और करीब 71,078 कक्षा-कक्षों के साथ बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं में सुधार की जरूरत सामने आई है। पिछले दो वर्षों में 3,364 कार्य स्वीकृत किए गए, जबकि 652 नए स्कूल भवनों को प्रशासनिक स्वीकृति देकर निविदा प्रक्रिया में लिया गया है। 2-अटल प्रगति पथों का काम नवंबर तक पूरा होगा 5 हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण कस्बों में अटल प्रगति पथों के निर्माण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक निर्माण विभाग को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए। वर्ष 2025-26 के सभी शेष कार्य और 2026-27 के प्रथम चरण के प्रगतिरत कार्य नवंबर 2026 तक पूरे करने को कहा गया। दूसरे चरण के सभी निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होंगे। मुख्यमंत्री ने जिलेवार टाइमलाइन तय करने और गुणवत्ता की लगातार निगरानी के निर्देश दिए। इन सड़कों से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और जनसुविधाओं तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। 3-पंचायत मुख्यालयों पर बनेंगे अटल ज्ञान केन्द्र ग्रामीण युवाओं और आमजन को अध्ययन तथा डिजिटल सेवाओं की सुविधा देने के लिए अटल ज्ञान केन्द्रों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। पहले चरण में प्रदेश में 2,052 केन्द्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 628 केन्द्र पूरे हो चुके हैं। दूसरे चरण में 3 हजार अटल ज्ञान केन्द्र बनाए जाने हैं, जिनमें से 1 हजार की स्वीकृति जारी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने दूसरे चरण के 2 हजार केन्द्रों की स्थापना की स्वीकृति जल्द जारी करने को कहा। इन केन्द्रों में पुस्तकालय, ई-लाइब्रेरी, ई-मित्र, ऑनलाइन सेवाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा मिलेगी। 4-स्कूलों में दूध की आपूर्ति बाधित नहीं होगी पन्नाधाय बाल गोपाल योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के पोषण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्कूलों में नियमित रूप से दूध उपलब्ध कराने और दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा विभाग को सभी जिलों में दूध पाउडर की शत-प्रतिशत आपूर्ति जल्द सुनिश्चित करने को कहा गया। स्कूल शिक्षा, गोपालन और वित्त विभाग को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए, ताकि आपूर्ति में किसी तरह का व्यवधान न आए। योजना के तहत प्रदेश में करीब 46 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है और इसके लिए करीब 800 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान है। 5-ग्रामीण रोजगार में 3.29 करोड़ मानव दिवस सृजित वीबी-जीरामजी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की प्रगति की मुख्यमंत्री ने समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जरूरतमंद पात्र परिवार को आवश्यकतानुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाए और मजदूरी का भुगतान समय पर सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने जुलाई से अब तक 3 करोड़ 29 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित होने को योजना की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ग्रामीण विकास विभाग को रोजगार और भुगतान की प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए गए। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की जरूरत रखने वाले पात्र परिवारों को समय पर काम मिले और भुगतान में देरी नहीं हो। 6-वर्ष 2029 तक सभी पात्र परिवारों को पक्का आवास प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2029 तक सभी पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लक्ष्य को टाइमलाइन के अनुसार पूरा करने के निर्देश दिए। दिसंबर 2026 तक सभी प्रगतिरत आवास पूरे कराने और लाभार्थियों को समय पर किस्तों का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया। वर्ष 2026-27 के आवंटित लक्ष्यों की स्वीकृति भी जल्द जारी करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने वन भूमि में निवासरत भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर भूमि और आवास आवंटित करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र परिवारों को आवास सुविधा मिल सके। 7-ग्रामीण क्षेत्रों की शिकायतों का प्राथमिकता से होगा समाधान ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने लंबित परिवादों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। 1 जनवरी से 21 सितंबर 2026 तक ग्रामीण क्षेत्रों से कुल 8,97,808 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 8,68,425 का निस्तारण किया जा चुका है। केवल 3.27 प्रतिशत शिकायतें लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने पेयजल, जलभराव और सड़क से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने को कहा। जिन ग्राम पंचायतों में जनसेवा शिविर नहीं हुए हैं, वहां पंचायत समिति स्तर पर शिविर आयोजित कर शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। 8-भरतपुर, बीकानेर और अजमेर में बनेंगे RIT भरतपुर, बीकानेर और अजमेर के तीन इंजीनियरिंग कॉलेजों को अपग्रेड कर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी RIT के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इन संस्थानों की स्थापना के लिए विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। इसके लिए विधि विभाग से शीघ्र सहमति लेने को कहा गया। इन तीनों RIT की स्थापना पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में वित्त विभाग को आवश्यक वित्तीय स्वीकृति जारी करने के निर्देश भी दिए। 9-प्रदेश में 6 नए ट्रोमा सेंटरों के काम में तेजी राज्य में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए छह नए ट्रोमा सेंटरों के निर्माण की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कोलाना बांदीकुई और दलोत प्रतापगढ़ के ट्रोमा सेंटरों का काम 31 मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए। देसूरी पाली के ट्रोमा सेंटर को मार्च 2028 तक पूरा करने को कहा गया। RUHS जयपुर में ट्रोमा सेंटर के उन्नयन का काम मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। साण्डेराव पाली में … Read more

आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के भविष्य की पहली पाठशाला, दिया कुमारी ने बताया ‘लोकल हीरो’

जयपुर विकसित भारत जन सेवा अभियान के तहत शुक्रवार को वाटिका के सामुदायिक भवन में 'आंगन मिलन सेवा' कार्यक्रम का आयोजन उपमुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रीदिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा सहयोगिनियों को माला पहनाकर, पौधा एवं माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रेषित पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और धात्री माताओं के बच्चों का अन्नप्राशन करवाया गया। अपने संबोधन में दिया कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी सिर्फ एक केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माण की पहली पाठशाला है। आंगनबाड़ी बहनें हर बच्चे की मुस्कान और हर माँ के विश्वास की जिम्मेदारी पूर्ण मुस्तैदी से निभा रही हैं। यह सम्मान उस ममता, मेहनत और समर्पण का सम्मान है, जिससे नई पीढ़ी का भविष्य संवर रहा है। दिया कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए परिवार और समाज को जोड़ने का प्रयास है। पोषण के क्षेत्र में निःस्वार्थ भाव से काम करने वाली कार्यकर्ता, सहायिका ही हमारे लोकल हीरो हैं। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आंगनबाड़ी बहनों के समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें पत्र प्रेषित किया है। पोषण ट्रैकर जैसी डिजिटल व्यवस्था से पोषण की निगरानी अधिक प्रभावी हुई है, जिसकी G20, UNICEF, WHO तक में सराहना हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ और अपग्रेड किया जा रहा है, नए केंद्र बनाए जा रहे हैं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों के पोषण में सुधार और उनका उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करना है। उन्होंने आह्वान किया कि हर स्वस्थ बच्चा हमारी जिम्मेदारी है, हम सभी हर बच्चे को सही पोषण, स्नेह और संस्कार देने का संकल्प लें। आंगनबाड़ी केंद्र विकसित राजस्थान की नई कहानी लिखने का मंच बनेंगे। कार्यक्रम में निदेशक समेकित बाल विकास सेवाएं वासुदेव मालावत,  जनप्रतिनिधियों, संस्था प्रधानों, महिला मोर्चा की सदस्यों, राजीविका समूहों तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी माताओं और बच्चों ने भाग लिया।

बिहार के सरकारी स्कूलों में मिलेगा ‘ऑफ द मंथ’ सम्मान, तय होंगे नए मानक

 पटना  काॅरपोरेट की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में पैरेंट्स ऑफ द मंथ, टीचर्स ऑफ द मंथ और स्टुडेंट ऑफ मंथ की व्यवस्था शुरू होने जा रही है। कॉरपोरेट संस्थानों में इंप्लाई ऑफ द मंथ की व्यवस्था चलती है। सरकारी विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की तर्ज पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (पीटीएम) का आरंभ हुआ है। इस व्यवस्था के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि पीटीएम के दिन अभिभावक अपने बच्चों के परफार्मेंस को जानने हर हाल में विद्यालय में आएं। रचनात्मक सुझाव दिए और सक्रियता दिखाई तो बनेंगे पैरेंट्स ऑफ द मंथ बच्चे के शिक्षकों से बात करें। इस क्रम में यह व्यवस्था की जा रही कि अभिभावक यह बताएं कि विद्यालय की व्यवस्था को और अधिक उत्कृष्ट करने को ले और क्या-क्या किया जा सकता है। अभिभावकों के रचनात्मक सुझाव को संबंधित शिक्षकों द्वारा नोट किया जाएगा। सभी सुझावों का अध्ययन संबंधित विद्यालय के शिक्षकों के समूह द्वारा किया जाएगा सर्वश्रेष्ठ सुझाव देने वाले को पैरेंट्स ऑफ द मंथ का खिताब मिलेगा। विद्यालय में उन्हें सम्मानित किए जाने की व्यवस्था भी बन रही। इस तरह तय होंगे टीचर्स ऑफ द मंथ शिक्षा विभाग ने अभी सभी माडल स्कूलाें के लिए टीचर्स ऑफ द मंथ की व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत विद्यालय को एक फार्म दिया जाएगा। फार्म को सभी शिक्षक भर कर देंगे। उस क्रम में यह देखा जाएगा कि संबंधित शिक्षक ने अपने विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई में कोई नवाचार कि‍या या नहीं। पढ़ाई सिलेबस के लिहाज से जहां पहुंचनी थी वहां पहुंची या नहीं। इस क्रम में विद्यालय प्रबंधन विद्यार्थियों की भी राय लेगा। स्टुडेंट्स ऑफ द मंथ के ल‍िए हाजिरी भी महत्वपूर्ण स्टुडेंट्स ऑफ द मंथ को तय किए जाने को ले कई तरह के मानक तय किए गए हैं। इसमें एक मानक यह भी है कि विद्यार्थी की स्कूल में हाजिरी कितनी रही। इसके अलावा गृह कार्य, क्लास में एकाग्रता, स्कूल की अन्य तरह की गतिविधियों में उसकी सक्रियता आदि का आकलन किया जाएगा। इसके लिए भी विद्यालय में एक फार्म उपलब्ध रहेगा जिसे शिक्षकों को भरना। विद्यालय में अभिभावक रूचि लें, शिक्षकों के बीच कुछ नया करने का भाव जगे तथा विद्यार्थियों की सक्रियता नजर आए इसे केंद्र में रखकर इन सभी को सम्मानित करने की योजना शुरू की जा रही। इसका सकारात्मक असर दिखेगा।     मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बण्डा की दयोदय गौशाला में किया वृक्षारोपण, गौवंश को खिलाया चारा एवं गुड़ के लड्डू

भोपाल   उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने बण्डा स्थित दयोदय गौशाला पहुंचकर गौसेवा की। उन्होंने सर्वप्रथम गौशाला परिसर में वृक्षारोपण किया। सेवा संकल्प यात्रा के यात्रियों ने भी गौशाला परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया। इसके पश्चात उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गौशाला में गौवंश को चारा एवं गुड़ के लड्डू खिलाए। इस दौरान उन्होंने गौशाला परिसर का अवलोकन भी किया तथा गौसेवा से जुड़े कार्यों की जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गौशाला में उपस्थित गौसेवकों एवं संबंधितों से चर्चा की। उन्होंने गौवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। इस अवसर पर दमोह सांसद  राहुल सिंह लोधी, बण्डा विधायक  वीरेन्द्र सिंह लोधी, मती रानी कुशवाहा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जगदीश कुमार गोमे, डिप्टी कलेक्टर सु मोना दांगी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गौसेवक उपस्थित रहे।

सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत जल स्रोतों की साफ-सफाई

सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत जल स्रोतों की साफ-सफाई नदी घाटों एवं जलाशयों को स्वच्छ रखने जनभागीदारी से चला विशेष अभियान रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वन विभाग धमतरी वनमंडल द्वारा शुरू किए गए ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत आज 25 सितंबर को जिले के विभिन्न महत्वपूर्ण जल स्रोतों एवं नदी घाटों में विशेष स्वच्छता एवं जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य जल स्रोतों के संरक्षण, नदी घाटों की स्वच्छता तथा आमजन में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा। वन विभाग द्वारा अभियान की शुरुआत 23 सितंबर 2026 को पौधरोपण कार्यक्रम के साथ की गई थी। इसी क्रम में आज फुटहामुड़ा जलाशय, नरहरा जलप्रपात कोटरवाही, महानदी उद्गम स्थल फरसियां, नगरी स्थित महामाई मंदिर तथा गणेश घाट सिंहावा में जल स्रोतों एवं नदी घाटों की साफ-सफाई की गई। अभियान के दौरान नदी घाटों और जल स्रोतों के आसपास फेंकी गई प्लास्टिक बोतलें, कूड़ा-कचरा एवं अन्य अपशिष्ट सामग्री को हटाकर संबंधित स्थलों की सफाई की गई। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों एवं आम नागरिकों को जल स्रोतों और नदी घाटों में कचरा नहीं फेंकने के लिए जागरूक किया गया। वन विभाग की टीम ने लोगों से जल स्रोतों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त रखने में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया। अभियान के दौरान संबंधित स्थलों पर पौधरोपण भी किया गया। इसके माध्यम से जल संरक्षण के साथ-साथ हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश आमजन तक पहुंचाया गया। अधिकारियों ने कहा कि जल स्रोत केवल पेयजल एवं सिंचाई का आधार ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं। इनके संरक्षण के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी भी आवश्यक है। ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान के माध्यम से वन विभाग द्वारा स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की सहभागिता से लोगों को अपने आसपास के जल स्रोतों और प्राकृतिक स्थलों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान में श्री संजय रौतिया, उपवनमंडलाधिकारी नगरी, श्री बी.के. लकड़ा, संलग्नाधिकारी, श्री अभिनव शर्मा, प्रशिक्षु सहायक वन संरक्षक एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी बिरगुड़ी, श्री संदीप कुमार सोम, वन परिक्षेत्र अधिकारी नगरी उत्पादन, श्री के.पी. जोशी, वन परिक्षेत्र अधिकारी नगरी, श्री ओमकार सिन्हा, वन परिक्षेत्र अधिकारी केरेगांव, श्री सत्य नारायण प्रधान, वन परिक्षेत्र अधिकारी धमतरी, डिप्टी रेंजर श्री मंशा राम साहू, श्री राकेश तिवारी, श्री उमेश सिंह, वनरक्षक श्री प्रेमलाल निषाद, श्री दुलेश्वर मार्कण्डेय, श्री कुलेश्वर बघेल, श्री अमित पटेल सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं अन्य स्टाफ उपस्थित थे। वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की कि नदी घाटों, जलाशयों, जलप्रपातों एवं अन्य प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक एवं कचरा न फेंकें और स्वच्छता बनाए रखने में अपना योगदान दें। स्वच्छ जल स्रोत, स्वच्छ पर्यावरण और हरित धमतरी के लक्ष्य को जनसहभागिता से साकार करने का संदेश अभियान के माध्यम से दिया गया।

राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने सेवा संकल्प अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक में की सहभागिता

अनूपपुर  सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बिजुरी के हनुमान मंदिर चौराहा में नुक्कड़ नाटक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने सहभागिता की। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सेवा संकल्प अभियान के उद्देश्यों, सेवा भावना और जनभागीदारी के महत्व को प्रभावी एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से समाज में आपसी सहयोग, जरूरतमंदों की सहायता, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। इस अवसर पर राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सेवा का भाव समाज को जोड़ने और सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को समाजहित में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सामूहिक सहभागिता से सेवा कार्यों को और व्यापक बनाया जा सकता है। राज्यमंत्री जायसवाल ने नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति का अवलोकन करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने अभियान के अंतर्गत किए जा रहे जनजागरूकता कार्यक्रमों की सराहना की। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आमजन को सेवा कार्यों से जुड़ने और समाजहित में अपना योगदान देने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर नगर पालिका बिजुरी की अध्यक्ष श्रीमती सहबीन पनिका सहित अन्य जनप्रतिनिधि आम नागरिक उपस्थित रहे।

ट्रिपल आईटी भोपाल में कोडर आर्मी के संस्थापक रोहित नेगी एवं सह संस्थापक आदित्य टंडन का छात्रों के साथ विशेष सत्र आयोजित।

भोपाल HackerRank कैंपस क्रू ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल (IIIT भोपाल) के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ (TnP सेल) के सहयोग से "RE.MARKS 2.0" नामक वक्ता कार्यक्रम का आयोजन मैनिट भोपाल के सिविल सभागार में किया गया। ट्रिपल आईटी भोपाल के निदेशक प्रोफेसर आशुतोष  कुमार सिंह ने छात्रों को बताया कि रोहित नेगी और आदित्य टंडन जैसे युवा कोडिंग प्रतिभाओं को शामिल करते हुए इस तरह के सत्र भविष्य में भी आयोजित किए जाते रहेंगे, जिसका उद्देश्य छात्रों को अपने कौशल निखारने और उद्योग जगत के लिए तैयार बनाने में मदद करना है।प्रो. सिंह ने कहा कि आज का युवा अपने यूथ आइकन से प्रेरित हो उनको ही सुनना चाहता है।आज के प्रतिस्पर्धी आई टी जगत में युवाओं को सही दिशा निर्देश मिलना नितांत आवश्यक है। ट्रिपल आई तो भोपाल जो राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है उसका निदेशक होने के नाते मेरी यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा से चयनित होकर आया छात्र भीड़ में न खोकर अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर अपने संस्थान का नाम ऊंचा करे।छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु मै हर संभव प्रयास करूंगा।आज का सत्र भी इसी की एक कड़ी है।आशा है छात्र रोहित नेगी एवं आदित्य टंडन के अनुभव से अपनी कोडिंग स्किल एवं अपनी स्किल्स का विकास करेंगे।  ऐंकर अलख मिश्रा और रिया द्विवेदी ने मंच संभाला और कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। इसके कुछ समय बाद, मुख्य अतिथियों रोहित नेगी (संस्थापक, Coder Army) और आदित्य टंडन (सह-संस्थापक, Coder Army) का जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया गया और डॉ. दीप जोशी ने उन्हें पुष्प गुच्छ से सम्मानित किया। डॉ. दीप जोशी ने भी छात्रों को संबोधित करते हुए महत्वपूर्ण बातें साझा कीं और उद्योग जगत के लिए तैयार बने रहने हेतु निरंतर सीखते रहने और व्यावहारिक कौशल पर बल दिया। वक्ताओं ने हल्के-फुल्के परिहास के साथ बातचीत शुरू करते हुए अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की — किस तरह उन्होंने कोडिंग सीखनी शुरू की, कैसे वे मित्र बने, और अंततः कैसे उन्होंने मिलकर Coder Army की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने छात्रों के प्रश्नों के लिए मंच खोला और अपने वास्तविक अनुभवों के आधार पर वर्तमान कंप्यूटर विज्ञान क्षेत्र से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। छात्रों के साथ साझा की गई कुछ प्रमुख बातें: आदित्य टंडन: "अगर कोई तकनीक आपको भविष्य को लेकर डराती है, तो उसे सीख लीजिए। वह इसलिए डरावनी लगती है क्योंकि वह अनजानी है।" रोहित नेगी: "श्रेष्ठ बनने के लिए सबसे बुद्धिमान होना ज़रूरी नहीं है।" रोहित नेगी: "यह कभी केवल कोड के बारे में नहीं होता। यह विपणन, प्रस्तुति और उपयोगकर्ता के बारे में होता है। यह हमेशा से उपयोगकर्ता के बारे में ही रहा है।" रोहित नेगी: "वह जोखिम उठाइए। यही वह तत्व है जो संसार के सर्वश्रेष्ठ लोगों को शेष सबसे अलग करता है।" वक्ताओं ने इस विषय पर चर्चा की कि कोई परियोजना विकास से बाज़ार तक वास्तव में कैसे पहुंचती है, उद्योग में आगे बढ़ने के लिए किस मानसिकता की आवश्यकता होती है, किसी उम्मीदवार को नियुक्ति योग्य क्या बनाता है, और आज के तकनीकी परिदृश्य में वास्तव में क्या महत्व रखता है। नवोदित कंपनियों और बड़ी उत्पाद कंपनियों, दोनों में अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने छात्रों को दोनों की वास्तविकताओं से अवगत कराया। रोहित नेगी ने डेटा संरचना एवं एल्गोरिदम (DSA) के महत्व पर भी प्रकाश डाला और इससे जुड़े कई भ्रमों को दूर करते हुए छात्रों को स्पष्ट रूप से बताया कि उन्हें किस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और किससे बचना चाहिए। आदित्य टंडन ने बताया कि आज के युग में, जो तेज़ी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से प्रभावित हो रहा है, एक सर्वसामान्यज्ञ और विशेषज्ञ दोनों बनना कितना आवश्यक है। सर्वश्रेष्ठ प्रश्न पूछने वाले छात्रों को मंच पर आमंत्रित किया गया और मुख्य अतिथियों रोहित नेगी तथा आदित्य टंडन द्वारा उन्हें उपहार भेंट किए गए। इसके तुरंत बाद, 15 सितंबर को आयोजित BCC (बेस्ट कोडर कॉन्टेस्ट)के विजेताओं को भी टी  एंड पी सेल के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. दीप जोशी और टी पी ओ, डॉ. अजय वास्तव द्वारा मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में पुरस्कृत किया गया। समापन विचार एवं आभार प्रदर्शन ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर डॉ. अजय वास्तव के संक्षिप्त संबोधन से हुई, जिन्होंने आयोजन की भव्यता और गुणवत्ता के बारे में बात की और टी एंड पी सेल के निरंतर प्रयासों से अवगत कराते हुए भविष्य में ऐसे और आयोजनों का वादा किया।उन्होंने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए उनके समय और ज्ञान के लिए धन्यवाद दिया। डॉ. अजय वास्तव ने कार्यक्रम का समापन करते हुए कहा, "हम अक्सर तकनीकी बातों, शिक्षा और उद्योग के बारे में चर्चा करते हैं, लेकिन आज हमें एक ऐसे विषय पर चर्चा करने का अवसर मिला जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता — नौकरी मिलने के बाद क्या होता है और आप इन परिस्थितियों में कैसे आगे बढ़ सकते हैं।" उन्होंने कहा जिस बेबाकी से काडर आर्मी के रोहित नेगी और आदित्य टंडन ने छात्रों के सवालों के जवाब दिये उससे हर छात्र प्रभावित हुआ है और यही वजह है कि उनको सुनने और अपने सवालों के जवाब के लिए छात्र 4 घंटे आराम से बैठ कर उनको सुनते रहे। इन समापन विचारों के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

पीएम किसान सम्मान निधि की सहायता से एवन सिंह और नरेश यादव ने संजोए बेहतर खेती के सपने

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसान हितैषी सोच से खेती को मिला आर्थिक संबल पीएम किसान सम्मान निधि की सहायता से एवन सिंह और नरेश यादव ने संजोए बेहतर खेती के सपने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का किसानों तक पहुँचा लाभ रायपुर,  खेत की मिट्टी से जुड़ा किसान जब अपनी फसल के लिए समय पर बीज और खाद की व्यवस्था कर पाता है, तो उसके भीतर खेती को लेकर भरोसा और बढ़ जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ने देश के किसानों को इसी तरह का आर्थिक सहारा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में दी जाती है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम पंचायत सारबहरा के किसान एवन सिंह और नरेश यादव भी इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। इनके लिए किसान सम्मान निधि की राशि केवल बैंक खाते में आने वाली रकम नहीं, बल्कि खेती के जरूरी समय पर मिलने वाला ऐसा सहारा है, जो कृषि कार्यों की तैयारी को आसान बनाता है। समय पर मिली सहायता, खेती की तैयारी में बनी ताकत ग्राम पंचायत सारबहरा निवासी किसान एवन सिंह मेहनत और लगन से खेती करते हैं। वे बताते हैं कि योजना से प्राप्त राशि का उपयोग वे बीज, उर्वरक और खेती से जुड़े अन्य जरूरी कार्यों में करते हैं। एवन सिंह के लिए यह सहायता खेती के मौसम में आने वाले खर्चों को संभालने में उपयोगी साबित होती है। उनका कहना है कि जब कृषि कार्य के लिए जरूरी सामग्री समय पर उपलब्ध हो जाती है, तो खेती की तैयारी बेहतर ढंग से की जा सकती है। इससे किसान का समय बचता है और खेती के प्रति उसका भरोसा भी मजबूत होता है। छोटे खर्चों में बड़ी राहत, खेती में बढ़ा आत्मविश्वास इसी ग्राम पंचायत के किसान नरेश यादव लगभग 4 एकड़ भूमि में खेती करते हैं। वे भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी हैं। नरेश बताते हैं कि खेती में बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री के लिए समय-समय पर राशि की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में सम्मान निधि से मिलने वाली सहायता किसानों के लिए राहत का काम करती है। उनका कहना है कि योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाया है। किसान अब कृषि की तैयारी पहले से बेहतर ढंग से कर पा रहे हैं और अपनी खेती को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। किसान की जरूरत को समझने वाली सोच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसान-केंद्रित सोच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि खेती के मौसम में किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। PM-KISAN इसी उद्देश्य से किसानों को आय सहायता प्रदान करने वाली केंद्र सरकार की योजना है। सारबहरा के एवन सिंह और नरेश यादव की कहानी इस बात को सामने लाती है कि जब किसान को समय पर आर्थिक सहयोग मिलता है, तो वह अपनी कृषि जरूरतों को अधिक सहजता से पूरा कर सकता है। किसान के खाते में सीधे पहुंचने वाली सहायता उसे अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार राशि का उपयोग करने की सुविधा देती है। PM-KISAN में लाभ सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाने का प्रावधान है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। किसानों के लिए योजनाओं की जानकारी, पात्रता और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया को गांवों तक पहुंचाने से कृषि क्षेत्र में सरकारी सहायता का प्रभाव अधिक प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रहा है। एवन सिंह और नरेश यादव जैसे किसानों के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ सही समय पर किसान तक पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसान हितैषी पहल और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में योजनाओं के क्रियान्वयन का उद्देश्य किसानों को खेती के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है। किसानों के सपनों को मिल रहा आर्थिक आधार एवन सिंह और नरेश यादव की कहानी केवल दो किसानों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की तस्वीर है, जिसमें किसान को खेती के जरूरी खर्चों के लिए समय पर मिलने वाली सहायता से अपने निर्णय अधिक आत्मविश्वास के साथ लेने का अवसर मिलता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किसान हितैषी विजन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का लाभ गांव और खेत तक पहुंचने से किसानों के आत्मविश्वास को नया आधार मिल रहा है। खेतों में मेहनत करने वाले किसानों के लिए यह आर्थिक सहयोग बेहतर कृषि, मजबूत परिवार और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद को और मजबूत कर रहा है।

सेवा की कहानी : पोषण पुनर्वास केंद्र से लौट रही बच्चों के चेहरे की मुस्कान

विशेष लेख सेवा की कहानी : पोषण पुनर्वास केंद्र से लौट रही बच्चों के चेहरे की मुस्कान कुपोषण की पीड़ा से स्वस्थ और खुशहाल बचपन की ओर बढ़ रहे बच्चे बढ़ता वजन सिर्फ तराजू पर बढ़ती संख्या नहीं, लौटती ताकत, मुस्कान और बचपन की कहानी है रायपुर,   बचपन यानी खेलना, दौड़ना, हंसना, सीखना और सपने देखना। लेकिन जब कोई बच्चा कुपोषण की गिरफ्त में आता है तो कमजोरी उसके शरीर के साथ उसके सामान्य बचपन को भी प्रभावित करने लगती है। ऐसे बच्चों को समय पर उपचार और पोषण देकर स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाने में पोषण पुनर्वास केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सेवा संकल्प अभियान के बीच सरगुजा जिले के शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय, अम्बिकापुर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) से सामने आ रही बच्चों की कहानियां इसी बदलाव की तस्वीर पेश करती हैं। यहां कुपोषित बच्चों को चिकित्सकीय देखभाल और पोषण पुनर्वास के साथ माता-पिता को भी बच्चे के खान-पान और देखभाल से जुड़ी आवश्यक जानकारी दी जा रही है। यहां किसी बच्चे का बढ़ता हुआ वजन महज तराजू पर बदलता आंकड़ा नहीं है। उसके पीछे बच्चे की बेहतर होती पोषण स्थिति, माता-पिता की उम्मीद और स्वास्थ्यकर्मियों की सतत देखभाल जुड़ी है। यह उस बचपन को वापस पाने की कोशिश है, जिसे कुपोषण ने कमजोर कर दिया था। कुपोषण केवल कम वजन की समस्या नहीं कुपोषण को केवल बच्चे के दुबले या कमजोर दिखाई देने तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। गंभीर कुपोषण बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता और वृद्धि-विकास को प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने का असर बच्चे के शारीरिक विकास के साथ सीखने और सामान्य गतिविधियों में उसकी भागीदारी पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि कुपोषण की समय पर पहचान और उपचार महत्वपूर्ण है। बच्चे को उचित पोषण और चिकित्सकीय देखभाल देकर स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाना उसके वर्तमान स्वास्थ्य के साथ भविष्य में निवेश भी है। जहां उपचार के साथ लौटता है बचपन पोषण पुनर्वास केंद्र गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास की महत्वपूर्ण व्यवस्था है। यहां बच्चे की स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति की निगरानी, आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल और पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराने के साथ माता-पिता को बच्चे की देखभाल तथा खान-पान से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल बच्चे का वजन बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाना और परिवार को ऐसी जानकारी देना भी है जिससे घर लौटने के बाद बच्चे के पोषण का बेहतर ध्यान रखा जा सके। 20 बिस्तरों का केंद्र, सैकड़ों बच्चों के लिए उम्मीद शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय, अम्बिकापुर में संचालित 20 बिस्तरों वाला पोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषित बच्चों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद का केंद्र बन रहा है। वर्ष 2021-22 में यहां 189 बच्चों के उपचार के साथ दर्ज दर 73 प्रतिशत थी। अप्रैल से सितम्बर 2026 की अवधि में 248 बच्चों के उपचार के साथ यह दर बढ़कर 88 प्रतिशत दर्ज की गई है। इन आंकड़ों के पीछे उन परिवारों की अनेक कहानियां हैं जो अपने कमजोर बच्चे को लेकर चिंता के साथ केंद्र पहुंचे और उपचार एवं पोषण पुनर्वास के बाद बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद लेकर घर लौटे। शिवाशी, रश्मि, प्रतीक और युवराज के बढ़ते वजन में दिखी उम्मीद केंद्र में उपचार प्राप्त करने वाले बच्चों के रिकॉर्ड इस बदलाव को और स्पष्ट करते हैं। शिवाशी का वजन 7.6 किलोग्राम से बढ़कर 8.840 किलोग्राम, रश्मि का 9.3 किलोग्राम से 10.720 किलोग्राम, प्रतीक का 8.5 किलोग्राम से 9.370 किलोग्राम तथा युवराज का वजन 12 किलोग्राम से बढ़कर 13.980 किलोग्राम दर्ज किया गया। ये आंकड़े केवल वजन में आए बदलाव को नहीं बताते, बल्कि उपचार और पोषण पुनर्वास के बाद बेहतर वृद्धि की दिशा में बच्चों के बढ़ते कदमों की तस्वीर भी प्रस्तुत करते हैं। हर बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है और केवल वजन बढ़ने के आधार पर संपूर्ण स्वास्थ्य का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके बावजूद नियमित निगरानी में वजन और वृद्धि में सुधार बच्चे की पोषण स्थिति का आकलन करने के महत्वपूर्ण संकेतकों में शामिल हैं। बढ़ता वजन यानी लौटती उम्मीद कुपोषण से कमजोर बच्चा कई बार अपनी उम्र के दूसरे बच्चों की तरह सामान्य गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी नहीं कर पाता। बीमारी और कमजोरी परिवार की चिंता भी बढ़ाती है। ऐसे में उपचार और उचित पोषण के बाद जब बच्चे की स्थिति में सुधार दिखाई देता है, तो यह पूरे परिवार के लिए राहत लेकर आता है। माता-पिता के लिए बच्चे का स्वस्थ होना किसी आंकड़े से कहीं अधिक मायने रखता है। इसीलिए पोषण पुनर्वास केंद्र में किसी बच्चे का बढ़ता वजन केवल तराजू पर बढ़ती संख्या नहीं है। वह बच्चे की बेहतर होती पोषण स्थिति के साथ परिवार में लौटती उम्मीद की कहानी भी है। अस्पताल से घर तक जारी रहती है सुपोषण की यात्रा एनआरसी में उपचार पूरा होना महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन बच्चे को कुपोषण से दूर रखने की जिम्मेदारी इसके बाद भी जारी रहती है। घर लौटने के बाद उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार, स्वच्छता, बीमारी के दौरान उचित देखभाल तथा बच्चे की वृद्धि की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए एनआरसी में माता-पिता को बच्चे के पोषण और देखभाल से संबंधित व्यवहार की जानकारी देना उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उद्देश्य यह है कि परिवार स्वयं भी बच्चे की पोषण स्थिति को बेहतर बनाए रखने में सक्रिय भागीदारी करे। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग सहित संबंधित अमले का समन्वय इस व्यवस्था को और मजबूत बनाता है। एक ओर स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार एवं पोषण पुनर्वास और दूसरी ओर समुदाय स्तर पर आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से निगरानी और मार्गदर्शन—दोनों मिलकर कुपोषण के विरुद्ध प्रभावी व्यवस्था तैयार करते हैं। स्वस्थ बच्चा यानी स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। पर्याप्त पोषण मिलने पर बच्चा स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता है, अधिक सक्रिय रह सकता है और सीखने तथा सामाजिक गतिविधियों में बेहतर भागीदारी कर सकता है। इसलिए किसी बच्चे को कुपोषण से बाहर निकालने का प्रयास केवल वर्तमान बीमारी या कमजोरी का उपचार नहीं … Read more